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                <title>lucknow court - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>lucknow court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लखनऊ कोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को 20 साल की सख्त सजा सुनाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के विशेष न्यायालय पॉक्सो ने नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार और संबंधित अपराधों के मामले में आरोपी पूरन कश्यप को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर लगाए गए सभी आरोपों को साबित मानते हुए कठोर दंड दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) कुमार प्रशान्त ने की। फैसला 30 जुलाई  को सुनाया गया। अभियोग पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अभिषेक उपाध्याय और अरुण कुमार ने दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से निजी अधिवक्ता  आर.एन. यादव उपस्थित रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>मामले</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184361/lucknow-court-sentenced-20-years-rigorous-imprisonment-to-the-accused"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/2023031278.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के विशेष न्यायालय पॉक्सो ने नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार और संबंधित अपराधों के मामले में आरोपी पूरन कश्यप को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर लगाए गए सभी आरोपों को साबित मानते हुए कठोर दंड दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) कुमार प्रशान्त ने की। फैसला 30 जुलाई  को सुनाया गया। अभियोग पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अभिषेक उपाध्याय और अरुण कुमार ने दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से निजी अधिवक्ता  आर.एन. यादव उपस्थित रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>मामले की पृष्ठभूमि</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />पुलिस थाना वजीरगंज, जनपद लखनऊ की मुकदमा में आरोपी पूरन कश्यप (आयु 55 वर्ष, पुत्र स्व. भोला कश्यप, निवासी  राजेन्द्र नगर, थाना नाका, लखनऊ) पर धारा 376(2)एन, 323, 504, 506, 452 भा.दं.सं. तथा धारा 5/6 POCSO एक्ट के तहत मुकदमा चलाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />वादी  (पीड़िता के पिता) के अनुसार, आरोपी (रिश्तेदार) 4 मई 2023 को उनके घर आकर 17 वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ जबरन बलात्कार किया। पीड़िता की मां की मृत्यु हो चुकी थी और घर पर कोई जिम्मेदार सदस्य नहीं रहता था। आरोपी लगभग छह महीने तक मौका पाकर बार-बार बलात्कार करता रहा, जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई। डॉक्टर ने छह महीने की गर्भावस्था की पुष्टि की।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />आरोपी ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दबाव डालकर 19 नवंबर 2023 को पीड़िता का विवाह अपने बड़े बेटे आयुष कश्यप से करवा दिया।<br />अदालत का निर्णय और सजा</p>
<p style="text-align:justify;"><br />अदालत ने अभियोजन साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट तथा डीएनए रिपोर्ट (जिसमें आरोपी पीड़िता के नवजात शिशु का जैविक पिता साबित हुआ) पर विश्वास जताते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आरोपी ने नाबालिग रिश्तेदार की असहाय स्थिति का फायदा उठाकर गंभीर अपराध किया, इसलिए किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सुनाई गई सजाएं:</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2">- धारा 5/6 POCSO एक्ट (धारा 376(2)एन भा.दं.सं. सहित): 20 वर्ष कठोर कारावास तथा 50,000 अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष अतिरिक्त साधारण कारावास)।<br />- धारा 452 भा.दं.सं.: 3 वर्ष कठोर कारावास तथा 5,000 अर्थदंड।<br />- धारा 323 भा.दं.सं.: 6 महीने कठोर कारावास तथा 1,000 अर्थदंड।<br />- धारा 504 भा.दं.सं.: 1 वर्ष कठोर कारावास तथा 1,000 अर्थदंड।<br />- धारा 506 भा.दं.सं.: 2 वर्ष कठोर कारावास तथा 2,000 अर्थदंड।</blockquote>
<p style="text-align:justify;">सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में पूर्व में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। अर्थदंड की राशि पीड़िता को पुनर्वास के लिए दी जाएगी। अदालत ने पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने का भी निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को भी निर्देश दिया है कि पीड़िता को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सजायाबी वॉरंट जिला कारागार लखनऊ भेजने तथा निर्णय की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और पीड़िता को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा और  पॉक्सो कानून के कड़े प्रावधानों को दोहराता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 23:29:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Lucknow POCSO Court बाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषी को  कठोर कारावास की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सचिन बाजपेयी -लखनऊ, </strong></p>
<blockquote class="format1">बाल यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में लखनऊ की विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त सेनी उर्फ़ श्रीराम को भारतीय दंड संहिता  और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी करार देकर कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं <strong>सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो, मोहम्मद कमरूज़्ज़मा खान</strong> द्वारा सुनाया गया फैसला </blockquote>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />अभियुक्त सेनी उर्फ़ श्रीराम (आयु लगभग 30 वर्ष), निवासी ग्राम हरदा मजरा अकड़रिया, थाना इटौंजा, लखनऊ, के विरुद्ध यह मामला सत्र परीक्षण संख्या 212/2018 के रूप में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 14 जनवरी 2018 की रात</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/162382/convict-sentenced-to-rigorous-imprisonment-in-child-sexual-abuse-case"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/nyayalaya.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सचिन बाजपेयी -लखनऊ, </strong></p>
<blockquote class="format1">बाल यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में लखनऊ की विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त सेनी उर्फ़ श्रीराम को भारतीय दंड संहिता  और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी करार देकर कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं <strong>सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो, मोहम्मद कमरूज़्ज़मा खान</strong> द्वारा सुनाया गया फैसला </blockquote>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />अभियुक्त सेनी उर्फ़ श्रीराम (आयु लगभग 30 वर्ष), निवासी ग्राम हरदा मजरा अकड़रिया, थाना इटौंजा, लखनऊ, के विरुद्ध यह मामला सत्र परीक्षण संख्या 212/2018 के रूप में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 14 जनवरी 2018 की रात लगभग 3:30 बजे अभियुक्त ने पीड़िता के पिता के घर में अवैध रूप से प्रवेश कर नाबालिग पीड़िता के साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर उसने पीड़िता और उसकी माँ को जान से मारने की धमकी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना के बाद अभियुक्त पर की धारा 452 (घर में घुसपैठ) 354 (छेड़छाड़),506 (आपराधिक धमकी) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 (यौन उत्पीड़न) में आरोप लगाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-12/2023031546.jpg" alt="दोषी सेनी उर्फ़ श्रीराम को विशेष न्यायालय ने सुनाई कठोर कारावास की सजा" width="1200" height="800"></img></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों—विशेषकर पीड़िता और उसकी माँ—के बयानों को विश्वसनीय मानते हुए, साथ ही अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को अपराध का दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने कहा कि प्रस्तुत प्रमाण अभियुक्त की संलिप्तता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कठोर कारावास और अर्थदंड</strong></h4>
<blockquote class="format2"><strong>विशेष न्यायालय ने अभियुक्त को विभिन्न धाराओं के तहत निम्न सजा सुनाई—</strong><br />धारा 354 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास व 2,000 अर्थदंड (न देने पर 15 दिन साधारण कारावास)।<br />धारा 452  के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 10,000 अर्थदंड  (न देने पर 1 माह साधारण कारावास)।<br />धारा 506  के तहत वर्ष का कठोर कारावास व 2,000 अर्थदंड (न देने पर 15 दिन साधारण कारावास)।<br />पॉक्सो धारा 7/8 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास व 5,000 अर्थदंड (न देने पर 15 दिन साधारण कारावास)।<br />न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएँ साथ-साथ  चलेंगी।</blockquote>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पीड़िता को मिलेगा अर्थदंड</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">न्यायालय ने आदेश दिया है कि दोषी से वसूले गए सभी अर्थदंड की राशि पीड़िता को पुनर्वास सहायता के रूप में प्रदान की जाए। साथ ही निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  लखनऊ को भेजकर पीड़िता को न्यायालय के नियम अनुसार क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का निर्देश दिया गया।<br />अभियुक्त को सजा काटने हेतु जिला कारागार, लखनऊ भेजने के आदेश भी पारित किए गए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>समाज के लिए कड़ा संदेश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि बाल यौन अपराधों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह आदेश समाज को यह स्पष्ट संदेश देता है कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर कानून द्वारा सख़्त कार्रवाई अनिवार्य है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/162382/convict-sentenced-to-rigorous-imprisonment-in-child-sexual-abuse-case</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 20:13:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत यादव के 30 वर्ष : न्याय, संघर्ष और सेवा का अद्भुत संगम</title>
                                    <description><![CDATA[<h1>  </h1>
<blockquote class="format1"><strong>राजधानी लखनऊ से विशेष संवाददाता</strong></blockquote>
<h3>  </h3>
<h5><em>"न्याय केवल अदालत की दीवारों तक सीमित नहीं होता,<br />यह समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।"</em><br />— वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong></h5>
<hr />
<h3><strong>न्याय के लिए समर्पित तीन दशक</strong></h3>
<p>उत्तर प्रदेश की राजधानी <strong>लखनऊ</strong> के जिला एवं सत्र न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के गलियारों में न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong> ने अपने पेशेवर जीवन के <strong>30 वर्ष पूर्ण</strong> कर लिए हैं। इस अवसर पर उनके चेंबर में अधिवक्ताओं, शुभचिंतकों और समाजसेवियों का जमावड़ा लगा रहा।</p>
<p>अधिवक्ता जगत के कई वरिष्ठ साथियों ने उन्हें बधाई दी और उनके कार्यों को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155142/senior-advocate-ajit-yadavs-30-years-complete-unique-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/whatsapp-image-2025-09-15-at-17.13.05_ba3c3b9d.jpg" alt=""></a><br /><h1> </h1>
<blockquote class="format1"><strong>राजधानी लखनऊ से विशेष संवाददाता</strong></blockquote>
<h3> </h3>
<h5><em>"न्याय केवल अदालत की दीवारों तक सीमित नहीं होता,<br />यह समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए।"</em><br />— वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong></h5>
<hr />
<h3><strong>न्याय के लिए समर्पित तीन दशक</strong></h3>
<p>उत्तर प्रदेश की राजधानी <strong>लखनऊ</strong> के जिला एवं सत्र न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के गलियारों में न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता <strong>अजीत यादव</strong> ने अपने पेशेवर जीवन के <strong>30 वर्ष पूर्ण</strong> कर लिए हैं। इस अवसर पर उनके चेंबर में अधिवक्ताओं, शुभचिंतकों और समाजसेवियों का जमावड़ा लगा रहा।</p>
<p>अधिवक्ता जगत के कई वरिष्ठ साथियों ने उन्हें बधाई दी और उनके कार्यों को न्यायिक सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। अधिवक्ता <strong>आई.पी. सिंह</strong> ने उन्हें विशेष रूप से शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि, <em>“न्याय की साधना करना कोई आसान कार्य नहीं है, लेकिन जिस तरह से अजीत यादव ने तीन दशकों तक इसे तपस्या के रूप में निभाया है, वह सराहनीय है।”</em></p>
<hr />
<h3><strong>उतार-चढ़ाव से भरी लंबी यात्रा</strong></h3>
<p>अजीत यादव ने अपने करियर के शुरुआती दौर में अनेक कठिनाइयों का सामना किया। सीमित संसाधनों और तमाम बाधाओं के बावजूद उन्होंने वकालत के पेशे को केवल पेशा नहीं, बल्कि <strong>जनसेवा का माध्यम</strong> माना।</p>
<p>पिछले तीन दशकों में उन्होंने हजारों मुकदमों की पैरवी करते हुए समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक को न्याय दिलाने की कोशिश की। अधिवक्ताओं के अनुसार, उनका यह सफर केवल पेशेवर उपलब्धि नहीं बल्कि एक <strong>समर्पण की गाथा</strong> है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-09/whatsapp-image-2025-09-15-at-17.13.05_ba3c3b9d.jpg" alt="वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत यादव के 30 वर्ष : न्याय, संघर्ष और सेवा का अद्भुत संगम" width="1280" height="582"></img></p>
<hr />
<h3><strong>अम्बेडकरनगर से राजधानी तक का सफर</strong></h3>
<p>मूल रूप से <strong>अम्बेडकरनगर</strong> निवासी अजीत यादव ने लखनऊ को अपने संघर्ष और कार्यक्षेत्र का केंद्र बनाया। यहाँ आकर उन्होंने न केवल न्यायिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई, बल्कि <strong>राजनीति और समाज</strong> की गहरी समझ भी विकसित की।</p>
<p>उनके करीबी मानते हैं कि यादव राजनीति और सत्ता के समीकरणों को गहराई से समझते हैं और यही कारण है कि वे समाजिक मुद्दों पर सटीक दृष्टिकोण रखते हैं।</p>
<hr />
<h3><strong>कानून की जानकारी को जन-जन तक पहुँचाया</strong></h3>
<p>एक अधिवक्ता होने के बावजूद उन्होंने हमेशा आम जनता को उनके <strong>कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक</strong> करने का कार्य भी किया। समय-समय पर विभिन्न सेमिनारों और सभाओं में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि <em>“न्याय केवल अदालतों में सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर व्यक्ति को अपने अधिकार और कर्तव्य की जानकारी होनी चाहिए।”</em></p>
<hr />
<h3><strong>संघर्ष, मेहनत और जुझारूपन की पहचान</strong></h3>
<p>अधिवक्ता जगत में अजीत यादव को एक <strong>संघर्षशील और जुझारू अधिवक्ता</strong> के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कभी भी चुनौतियों से पीछे हटना नहीं सीखा। उनका मानना है कि बाधाएँ कार्य का हिस्सा हैं और उन्हें पार करना ही सफलता का मार्ग है।</p>
<p>उनकी यह सोच ही उन्हें उनके साथियों से अलग बनाती है। कई अधिवक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि यादव का यह <strong>30 वर्षों का संघर्ष</strong> आने वाली पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा है।</p>
<div class="youtubeplayer-responsive-iframe-outer"><iframe class="youtubeplayer-responsive-iframe" title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/W1JvgnUexAY" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></div>
<hr />
<h3><strong>लोगों की राय</strong></h3>
<p>इस अवसर पर मौजूद अधिवक्ताओं और बुद्धिजीवियों ने एक स्वर में कहा कि,</p>
<ul>
<li>
<p><em>“तीन दशकों में हजारों लोगों को न्याय दिलाना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।”</em></p>
</li>
<li>
<p><em>“अजीत यादव न केवल एक अधिवक्ता हैं, बल्कि न्याय के प्रहरी और समाज के सजग प्रहरी भी हैं।”</em></p>
</li>
<li>
<p><em>“उनकी ईमानदारी और सादगी ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई है।”</em></p>
</li>
</ul>
<hr />
<ul>
<li>
<p>30 वर्षों से वकालत के क्षेत्र में सक्रिय।</p>
</li>
<li>
<p>हजारों मुकदमों की पैरवी कर दिलाया न्याय।</p>
</li>
<li>
<p>आम जनता को कानून की जानकारी देने का मिशन।</p>
</li>
<li>
<p>राजनीति और समाज पर गहरी पकड़।</p>
</li>
<li>
<p>संघर्ष और मेहनत को सफलता का मूलमंत्र माना।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Sep 2025 21:06:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला 28 निर्दोष  की आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने का किया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[28 निर्दोष वादीगणों को बड़ी राहत देते उनके विरुद्ध चल रहे सिविल जज (सीनियर डिवीजन )/ एफ टी सी द्वितीय प्रतापगढ़ के समक्ष लंबित आपराधिक कार्यवाही को समाप्त किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142398/historic-decision-of-high-court-order-to-end-criminal-proceedings"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/12.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात-राजधानी</strong></p>
<p> उच्च न्यायालय लखनऊ की एकल खंडपीठ न्यायाधीश श्री शमीम अहमद द्वारा अपने आदेश दिनांक 14/06/2024 के जरिए ग्राम शिवपुर खुर्द थाना कोंहडौर जनपद प्रतापगढ़ के 28 निर्दोष वादीगणों को बड़ी राहत देते उनके विरुद्ध चल रहे सिविल जज (सीनियर डिवीजन )/ एफ टी सी द्वितीय प्रतापगढ़ के समक्ष लंबित आपराधिक कार्यवाही को समाप्त किया गया उक्त मामला थाना कोंहडौर जनपद प्रतापगढ़ द्वारा 30/05/2021 को कंधरापुर अयोध्या राज्य मार्ग पर कोंहडौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई हत्या के विरोध में क्षेत्रीय समाजसेवी व नवयुवकों द्वारा कैंडल मार्च निकल गया था।</p>
<p> </p>
<p>  जिसमें स्थानीय पुलिस ने कोरोना गाइडलाइन उल्लंघन का जुर्म बताते हुए 28 नवयुवकों के खिलाफ अपराध संख्या 106/2021 अंतर्गत धारा 143,147,281,283,188,269आई पी सी एवं 51B डिजास्टर मैनेजमेंट अधिनियम 2005 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर दिया था उक्त मामले में थाना कोंहडौर जनपद प्रतापगढ़ द्वारा विवेचना पूर्ण करते हुए न्यायालय सिविल जज (सीनियर डिवीजन) प्रतापगढ़ के समक्ष आरोप पत्र 06/08/2022 को दाखिल कर दिया गया जिस पर संबंधित न्यायालय द्वारा 13/09/2022 को तलबी आदेश पारित कर वादीगणों को तलब किया गया</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-06/23.jpg" alt="2" width="777" height="1280"></img></p>
<p>इसके बाद समस्त वादीगण अधिवक्ता मानुवेंद्र सिंह के मदद से माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में क्रिमिनल एप्लीकेशन संख्या 2784/2024 (482) आशीष कुमार तिवारी @ राहुल व 27 अन्य बनाम राज्य सरकार व अन्य दाखिल करवाए उक्त वाद में वादीगणों की तरफ से अधिवक्ता मानुवेंद्र सिंह ने न्यायालय के समक्ष तलवी आदेश व आरोप पत्र को अवैधानिक और विधि विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की याचिका किए तथा उन्होंने अपने दलील में कहा कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/ एफ टी सी द्वितीय प्रतापगढ़ को उक्त वाद में संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है क्योंकि धारा 172 से 184 आई पी सी पर जब तक कोरोना गाइडलाइन जारी करने वाला अधिकारी संबंधित मजिस्ट्रेट को लिखित में कंप्लेंट नहीं देता है।</p>
<p> </p>
<p>तब तक संबंधित मजिस्ट्रेट संज्ञान नहीं ले सकता लिहाजा उक्त तलबी आदेश व  आरोप पत्र निरस्त होने योग्य है इसके बाद माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ द्वारा उपरोक्त वाद को दिनांक 02/05/2024 को सुनकर आदेश रिजर्व कर लिया गया फिर गहनता से विचार कर उक्त वाद में 14/06/2024 को आदेश पारित करते हुए जस्टिस शमीम अहमद द्वारा वादीगड़ो की याचिका स्वीकार करते हुए तलबी आदेश व आरोप पत्र को रद्द कर दिया गया</p>
<p> </p>
<p>साथ ही वादीगणों के विरुद्ध संबंधित न्यायालय सिविल जज (सीनियर डिवीजन) इफ टी सी द्वितीय प्रतापगढ़ के समक्ष लंबित समस्त आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया नवयुवकों के लिए यह आदेश किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं है उक्त आदेश के बाद प्रतापगढ़ की जनता व सभी वादीगणों  ने अधिवक्ता मानुवेंद्र सिंह को धन्यवाद व्यक्त किया तथा माननीय उच्च न्यायालय का भी आभार व्यक्त किया</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jun 2024 16:08:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Exclusive: अमेरिकन अल्फा रिवॉल्वर से हुई जीवा की हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[Lucknow Courtroom Murder: लखनऊ कोर्ट परिसर में हुए संजीव जीवा हत्याकांड में शूटर ने अमेरिकन रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया था. आइए इस गन के बारे में जानते हैं l]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130328/jeeva-was-killed-with-exclusive-american-alpha-revolver-not-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/court.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Lucknow Courtroom Murder:</strong></p>
<p>लखनऊ के कोर्ट परिसर में हुए शूटआउट ने यूपी पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है. पेशी पर लाए गए पश्चिमी यूपी के गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा (Saneej Maheshwari Jeeva) की कोर्ट रूम के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई. संजीव राठी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके शरीर में छह गोलियां मिली हैं l</p>
<p><em>सूत्रों के मुताबिक, शूटर ने हत्या में अमेरिकन मेड रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया था. यानी एक भी गोली मिस नहीं हुई. आइए जानते हैं, उस रिवॉल्वर के बारे में जिससे जीवा को मौत के घाट उतार दिया गया.</em></p>
<p>सूत्रों के अनुसार, जीवा की हत्या 357 बोर की अमेरिकन अल्फा रिवॉल्वर से की गई थी. इस रिवॉल्वर को बहुत शॉर्प माना जाता है. ये रिवॉल्वर 5 से 6 लाख रुपये में मिलती है. इस रिवॉल्वर का कारतूस भी महंगा आता है. एक कारतूस की कीमत करीब डेढ़ से दो हजार रुपये है. खास बात ये है कि ये रिवॉल्वर और इसका कारतूत भारत में प्रतिबंधित नहीं है.  शूटर को ये हथियार कहां से मिला, इसका पता पुलिस की जांच में चल सकेगा.</p>
<h4><strong>बेहद ही शॉर्प था शूटर विजय का निशाना</strong></h4>
<p>संजीव जीवा हत्याकांड में विजय यादव नाम के एक शूटर को गिरफ्तार किया गया है. शूटर विजय जीवा के आने के पहले ही कोर्ट के बाहर बैठ गया था. जब संजीव के साथ ही शूटर विजय पीछे से कोर्ट रूम के भीतर गया और मौका मिलते ही कोट से रिवाल्वर निकाल कर जीवा पर पीछे से ताबड़तोड़ फायरिंग की. विजय का निशाना इतना सटीक था, रिवॉल्वर में मौजूद छह की छह गोलियां जीवा के शरीर में जा घुसीं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले छह गोलियों के निशान इस बात की पुष्टि करते हैं.</p>
<h3><br /><strong>अस्पताल में एडमिट है शूटर</strong></h3>
<p>संजीव जीवा की हत्या का आरोपी विजय यादव अभी ट्रॉमा सेंटर में एडमिट है. ऐसे में पुलिस शूटर  की कस्टडी रिमांड के लिए अर्जी दाखिल करेगी. कोर्ट अगर शूटर को पेश करने के लिए कहता है तब उसे पेश करने की व्यवस्था की जाएगी. </p>
<h4><strong>संजीव जीवा हत्याकांड में एफआईआर दर्ज</strong></h4>
<p>संजीव जीवा की पुलिस अभिरक्षा में हत्या के मामले में वजीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई है. सब इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह ने हत्या को लेकर शूटर विजय यादव के खिलाफ तहरीर दी है. इंस्पेक्टर की तहरीर पर आरोपी विजय यादव के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, 7 सीएलए, लोक सेवक को चोट पहुंचाने समेत आईपीसी की धाराओं में केस दर्ज हुआ है</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 14:39:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ के कैसरबाग कोर्ट परिसर में चली गोली, गैंगस्टर संजीव महेश्वरी जीवा की हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p>Lucknow: लखनऊ के कैसरबाग कोर्ट के भीतर गैंगस्टर संजीव महेश्वरी जीवा को गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमलावर वकील की ड्रेस में था. संजीव महेश्वरी मुख्तार अंसारी का करीबी था.</p>
<p>वह बीजेपी नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड का आरोपी था. पेशी के लिए संजीव को कोर्ट में लाया गया था. गोली कांड में चार पांच लोगों की घायल होने की भी खबर है. संजीव महेश्वरी जीवा पश्चिम यूपी का कुख्यात गैंगस्टर था. पुलिस ने एक हमलावर को हिरासत में लिया है. घायल अवस्था में हमलावर को पुलिस अस्पताल ले गई.</p>
<h4><strong>वकीलों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई</strong></h4>
<p>घटना के बाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130259/gangster-sanjeev-maheshwari-jeeva-shot-dead-in-lucknows-kaiserbagh-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/sanjeev-jeeva.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>Lucknow: लखनऊ के कैसरबाग कोर्ट के भीतर गैंगस्टर संजीव महेश्वरी जीवा को गोली मारकर हत्या कर दी गई. हमलावर वकील की ड्रेस में था. संजीव महेश्वरी मुख्तार अंसारी का करीबी था.</p>
<p>वह बीजेपी नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड का आरोपी था. पेशी के लिए संजीव को कोर्ट में लाया गया था. गोली कांड में चार पांच लोगों की घायल होने की भी खबर है. संजीव महेश्वरी जीवा पश्चिम यूपी का कुख्यात गैंगस्टर था. पुलिस ने एक हमलावर को हिरासत में लिया है. घायल अवस्था में हमलावर को पुलिस अस्पताल ले गई.</p>
<h4><strong>वकीलों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई</strong></h4>
<p>घटना के बाद वकीलों में आक्रोश है. वकीलों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. चश्मदीद ने बताया कि हमलावर ने छह गोलियां चलाई थीं. कोर्ट परिसर में खून के घब्बे गिरे हुए हैं. दीवारों पर भी खून के धब्बे हैं. घटना के बाद पुलिस ने वहां से बॉडी को हटाया.</p>
<h3><strong>कौन थे ब्रम्हादत्त द्विवेदी?</strong></h3>
<p>ब्रम्हादत्त द्विवेदी बीजेपी के बड़े नेता थे. वे अटल बिहारी वाजपेयी और  लालकृष्ण आडवाणी के करीबी थे. प्रसिद्ध गेस्ट हाउस घटना के दौरान उन्होंने मायावती को बचाया था. 10 फरवरी 1997 को हत्या कर दी गई थी.</p>
<h3><br /><strong>चश्मदीद ने क्या बताया?</strong></h3>
<p>एक वकील ने कहा कि मैं यहां ह रदिन आता हूं लेकिन आज जो हुआ वो शर्मनाक है. एक बच्ची को गोली लगी है. उसका पिता अपनी बच्ची के लिए तड़प रहा है. कोर्ट में आने से पहले जांच होती है, हम लोगों की भी जांच होती है. कोर्ट परिसर के भीतर अस्त्र आ रहा है. </p>
<h3><strong>कौन था संजीव जीवा?</strong></h3>
<p>संजीव महेश्वरी जीवा शामली जिले के रहने वाला था. अपराध की दुनिया में उसने 90 के शुरुआती दशक से रखी थी. उसके खिलाफ 22 से ज्यादा मामले दर्ज थे. उसे बाहुबली मुख्तार अंसारी का करीबी बताया जाता है.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2023 17:05:33 +0530</pubDate>
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