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                <title>महेन्द्र तिवारी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>महेन्द्र तिवारी RSS Feed</description>
                
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                <title>बाल संरक्षण की आवश्यकता और वैश्विक प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिवस बच्चों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से समर्पित है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं क्योंकि वही भविष्य के नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार और नीति निर्माता बनते हैं। यदि बच्चों को सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षित और स्वस्थ वातावरण प्राप्त हो तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि वे शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी और उपेक्षा का सामना करते हैं</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180366/child-protection-needs-and-global-efforts"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/image.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिवस बच्चों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से समर्पित है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं क्योंकि वही भविष्य के नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार और नीति निर्माता बनते हैं। यदि बच्चों को सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षित और स्वस्थ वातावरण प्राप्त हो तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि वे शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी और उपेक्षा का सामना करते हैं तो समाज का विकास भी प्रभावित होता है। इसी कारण बाल सुरक्षा केवल सामाजिक विषय नहीं बल्कि मानवीय और नैतिक दायित्व भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का इतिहास 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों से जुड़ा हुआ है। 1925 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में बच्चों के कल्याण पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों पर विशेष चर्चा हुई। बाद में 1949 में मास्को में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला लोकतांत्रिक संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बच्चों के संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष दिवस मनाया जाना चाहिए। इसके बाद 1 जून 1950 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस मनाया गया। उस समय द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण लाखों बच्चे अनाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विस्थापित और निर्धन हो चुके थे। युद्ध ने बच्चों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था और उनकी सुरक्षा के लिए वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यही कारण था कि इस दिवस को मानवीय संवेदना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक माना गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय के साथ इस दिवस का महत्व लगातार बढ़ता गया। संयुक्त राष्ट्र ने भी बच्चों के अधिकारों को वैश्विक स्तर पर महत्व दिया। 1954 में विश्व बाल दिवस की स्थापना की गई और 20 नवंबर 1959 को बाल अधिकारों की घोषणा स्वीकार की गई। इसके बाद 1989 में बाल अधिकारों पर सम्मेलन को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया। इस सम्मेलन में बच्चों के शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिव्यक्ति और विकास के अधिकारों को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई। आज विश्व के अधिकांश देश बाल अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी अनेक क्षेत्रों में बच्चों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाल संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष शिक्षा है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि आत्मविश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेक और व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। एक शिक्षित बच्चा अपने अधिकारों को समझता है और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने में सक्षम बनता है। फिर भी आज विश्व में करोड़ों बच्चे विद्यालय से दूर हैं। गरीबी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक असमानता और बाल श्रम इसके प्रमुख कारण हैं। अनेक बच्चे आर्थिक मजबूरी के कारण छोटी आयु में काम करने लगते हैं जिससे उनका बचपन छिन जाता है। बाल श्रम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें शोषण के चक्र में फँसा देता है। इसलिए सरकारों और सामाजिक संगठनों का यह दायित्व है कि वे प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुँचाएँ और बाल श्रम को समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठाएँ।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाल विवाह भी बाल अधिकारों के लिए एक गंभीर चुनौती है। अनेक समाजों में आज भी कम आयु में बच्चों विशेषकर बालिकाओं का विवाह कर दिया जाता है। इससे उनकी शिक्षा बाधित होती है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कम आयु में मातृत्व अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। साथ ही बाल विवाह लड़कियों की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को भी सीमित कर देता है। इस समस्या के समाधान के लिए कानूनी प्रतिबंधों के साथ सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है। जब तक समाज अपनी सोच में परिवर्तन नहीं लाएगा तब तक केवल कानून पर्याप्त सिद्ध नहीं होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान समय में बच्चों के सामने नई चुनौतियाँ भी उभर रही हैं। तकनीकी विकास ने जहाँ ज्ञान और संचार के नए अवसर दिए हैं वहीं अनेक जोखिम भी उत्पन्न किए हैं। इंटरनेट और सामाजिक माध्यमों के माध्यम से बच्चों का आभासी शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर धमकी और अनुपयुक्त सामग्री तक पहुँच बढ़ी है। अनेक बच्चे मानसिक तनाव और अकेलेपन का अनुभव कर रहे हैं। इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी भावनाओं को समझना और सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करना आज की आवश्यकता है। केवल तकनीकी नियंत्रण पर्याप्त नहीं है बल्कि बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझाने की भी आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का प्रश्न भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है। प्रतियोगिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक दबाव और अकेलापन बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यदि किसी बच्चे को प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग और समझ नहीं मिलती तो वह अवसाद और भय का शिकार हो सकता है। स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बच्चों को ऐसा वातावरण चाहिए जहाँ वे अपनी भावनाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकें। परिवार और विद्यालय को बच्चों के लिए केवल अनुशासन का केंद्र नहीं बल्कि विश्वास और सुरक्षा का स्थान बनना चाहिए। एक संवेदनशील समाज ही स्वस्थ और आत्मविश्वासी पीढ़ी का निर्माण कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक स्तर पर युद्ध और प्राकृतिक आपदाएँ बच्चों के जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में लाखों बच्चे विद्यालयों से वंचित हो जाते हैं और अनेक बच्चों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है। कुछ क्षेत्रों में बच्चों को सैनिक गतिविधियों में भी शामिल किया जाता है जो मानवता के लिए अत्यंत दुखद स्थिति है। प्राकृतिक आपदाएँ और महामारियाँ भी बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। ऐसे समय में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवीय सहायता अत्यंत आवश्यक हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ राहत कार्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बच्चों की सहायता करने का प्रयास करती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समाज में बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक बच्चों को सही दिशा दे सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिभावक उन्हें प्रेम और सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं तथा सामाजिक संगठन जागरूकता फैलाकर सहायता पहुँचा सकते हैं। विद्यालयों में बाल अधिकारों पर चर्चा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निबंध प्रतियोगिताएँ और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं ताकि बच्चे अपने अधिकारों को समझ सकें। मीडिया भी बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि समाज का प्रत्येक वर्ग इस दिशा में सक्रिय हो जाए तो बच्चों के जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता इस बात की है कि बाल संरक्षण को केवल सरकारी योजना न माना जाए बल्कि सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जाए। प्रत्येक बच्चे को भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। किसी भी बच्चे को हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शोषण और उपेक्षा का सामना न करना पड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सुनिश्चित करना पूरे समाज का दायित्व है। बच्चों के सपनों की रक्षा करना ही भविष्य की रक्षा करना है। यदि हम आज बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देंगे तो आने वाला समाज अधिक शांतिपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपूर्ण और मानवीय होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस हमें यह संदेश देता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल एक दिन का विषय नहीं बल्कि निरंतर चलने वाला प्रयास है। यह दिवस हमें आत्मचिंतन करने और अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा देता है। प्रत्येक बच्चे में अपार संभावनाएँ छिपी होती हैं और उन संभावनाओं को विकसित करने के लिए प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और सुरक्षा आवश्यक है। जब समाज बच्चों के अधिकारों का सम्मान करना सीख जाएगा तब वास्तविक प्रगति संभव होगी। यही इस दिवस की सबसे बड़ी सार्थकता है और यही वह संदेश है जिसे पूरी मानवता को अपनाना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:21:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने अनुवाद की मूक पशुओं की भाषा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव सभ्यता के इतिहास में यह इच्छा हमेशा से रही है कि हम अपने आस-पास के मूक पशुओं की भाषा को समझ सकें। पौराणिक कहानियों से लेकर आधुनिक विज्ञान कथाओं तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जानवरों से बातचीत करने की क्षमता को हमेशा एक जादुई शक्ति या वरदान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। परंतु वर्तमान समय में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहराई से प्रभावित कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्राचीन स्वप्न भी अब वास्तविकता का रूप लेने लगा है। चीन के एक नए तकनीकी स्टार्टअप ने इस दिशा में एक अत्यंत क्रांतिकारी और साहसिक</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180341/when-artificial-intelligence-translated-the-language-of-mute-animals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/world-wildlife-day-creative-banner-planet-animals-ai-generated-concept-309958476.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मानव सभ्यता के इतिहास में यह इच्छा हमेशा से रही है कि हम अपने आस-पास के मूक पशुओं की भाषा को समझ सकें। पौराणिक कहानियों से लेकर आधुनिक विज्ञान कथाओं तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जानवरों से बातचीत करने की क्षमता को हमेशा एक जादुई शक्ति या वरदान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। परंतु वर्तमान समय में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहराई से प्रभावित कर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्राचीन स्वप्न भी अब वास्तविकता का रूप लेने लगा है। चीन के एक नए तकनीकी स्टार्टअप ने इस दिशा में एक अत्यंत क्रांतिकारी और साहसिक कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पशु प्रेमियों तथा तकनीकी जगत को अचंभित कर दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस चीनी कंपनी ने एक ऐसा विशेष उपकरण तैयार किया है जो पालतू जानवरों की आवाजों और उनके शारीरिक हाव-भाव का विश्लेषण करके उसे इंसानी भाषा में अनुवाद करने में सक्षम है। इस पूरे आविष्कार में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली बात यह है कि इस उपकरण के माध्यम से किए जाने वाले अनुवाद को 95 प्रतिशत तक सटीक बताया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक बहुत बड़ा और अभूतपूर्व दावा माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अनोखी और अत्याधुनिक तकनीक को विकसित करने का पूरा गौरव चीन के हांगझोउ शहर में कार्यरत एक नए स्टार्टअप मेंग श्याओयी को जाता है। इस संस्थान ने वर्षों के व्यापक शोध और जटिल परीक्षणों के उपरांत पेट्टीचैट नाम का एक अनूठा स्मार्ट कॉलर बाजार में पेश किया है। यह गले में पहनाया जाने वाला कोई साधारण पट्टा नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु इसके अंदर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की एक पूरी कार्यप्रणाली समाहित है। इस गैजेट की मूल संरचना को शक्ति प्रदान करने के लिए अलीबाबा क्लाउड के सुप्रसिद्ध क्वेन एआई मॉडल का प्रयोग किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस मॉडल को विशेष रूप से पशुओं के व्यवहार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी विभिन्न ध्वनियों और मनोदशाओं को समझने के लिए ही तैयार किया गया है। इस पूरी तकनीक को विकसित करने में वैज्ञानिकों और डेवलपर्स को पूरे 2 वर्ष का लंबा समय लगा है। इस लंबी अवधि के दौरान कंपनी ने अनेक अनुभवी पशु चिकित्सकों और पशु व्यवहार विशेषज्ञों का सहयोग लिया ताकि पालतू जीवों के संवाद करने के तौर तरीकों का एक अत्यंत प्रामाणिक और वैज्ञानिक डेटाबेस तैयार किया जा सके जो इस उपकरण को आधार प्रदान कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस आधुनिक उपकरण को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से स्टार्टअप ने पालतू पशुओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य रूप से कुत्तों और बिल्लियों के लाखों ऑडियो और वीडियो नमूनों को एकत्रित किया और उनका बारीकी से अध्ययन किया। इन संकलित नमूनों में जानवरों के अलग-अलग परिस्थितियों में भौंकने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">म्याऊं करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घुरघुराने तथा उनके बैठने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उठने और पूंछ हिलाने जैसी विभिन्न शारीरिक मुद्राओं को रिकॉर्ड किया गया था। इस विशाल डेटा का विश्लेषण करने के पश्चात ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को इस योग्य बनाया जा सका कि वह जानवरों के भीतर छिपी भावनाओं के संकेतों को आसानी से पकड़ सके। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई पालतू पशु इस पट्टे को अपने गले में धारण करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसमें स्थापित किए गए बेहद संवेदनशील माइक्रोफोन उसकी आवाजों को तुरंत पकड़ लेते हैं और साथ ही इसमें लगे मोशन सेंसर उसकी शारीरिक गतिविधियों को मापते हैं। यह संपूर्ण प्रक्रिया इतनी तीव्र गति से पूरी होती है कि कुछ ही सेकंडों में सारा डेटा मालिक के स्मार्टफोन में मौजूद एक विशेष ऐप पर भेज दिया जाता है। यह ऐप उस डेटा का अनुवाद करके मोबाइल स्क्रीन पर सीधे छोटे और स्पष्ट वाक्य प्रदर्शित कर देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मालिक को अपने पालतू पशु की स्थिति तुरंत पता चल जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी मोर्चे पर इस उपकरण की सबसे बड़ी विशेषता इसके द्वारा किया जाने वाला सटीकता का दावा है। मेंग श्याओयी स्टार्टअप का कहना है कि उनका यह एआई मॉडल पालतू जानवरों की 20 से अधिक विभिन्न प्रकार की संवेगात्मक और मानसिक दशाओं को बिल्कुल सटीक रूप से पहचानने में पूरी तरह सक्षम है। इन दशाओं में पशुओं की प्रसन्नता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रोध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अकेलापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षुधा और खेलने की तीव्र इच्छा जैसी बुनियादी भावनाएं सम्मिलित हैं। स्टार्टअप द्वारा प्रस्तुत किए गए आधिकारिक परीक्षण के परिणामों पर यदि दृष्टि डालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बिल्लियों के संदर्भ में इस डिवाइस की अनुवाद सटीकता दर 94.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुत्तों के भिन्न व्यवहारों और आवाजों को समझने में यह उपकरण 92.3 प्रतिशत तक पूरी तरह सटीक सिद्ध हुआ है। इन दोनों ही पशुओं की सटीकता दरों के औसत को आधार बनाकर कंपनी बाजार में कुल 95 प्रतिशत सटीकता का भारी दावा प्रस्तुत कर रही है। यह आंकड़ा इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे पूर्व जितने भी पशु अनुवादक साधन बाजार में उपलब्ध थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे महज मनोरंजन के लिए थे और उनकी सटीकता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह डिवाइस केवल एकतरफा संचार व्यवस्था तक ही सीमित नहीं रहता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह दोतरफा संवाद स्थापित करने की एक अद्भुत सुविधा भी प्रदान करता है। इसका तात्पर्य यह है कि यह उपकरण न केवल पशु की मूक भाषा को मनुष्य को समझाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसके शुरुआती परीक्षणों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह मनुष्यों द्वारा बोले गए वाक्यों को ऐसी विशेष ध्वनियों और तरंगों में परिवर्तित करने का प्रयास करता है जिन्हें पालतू जानवर अधिक सहजता से समझ सकें। इस प्रकार यह उपकरण इंसानों और उनके वफादार पशु साथियों के मध्य आपसी समझ का एक नया माध्यम निर्मित कर रहा है। यदि हम इस गैजेट की भौतिक बनावट और उसके वजन की बात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे पालतू जीवों के शारीरिक आराम को ध्यान में रखकर अत्यंत सूक्ष्म रूप में ढाला गया है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे स्मार्ट कॉलर का कुल वजन मात्र 27 ग्राम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण छोटी बिल्ली अथवा लघु आकार के कुत्ते को भी इसे चौबीस घंटे गले में पहने रखने पर किसी भी प्रकार की असुविधा या भारीपन का किंचित भी आभास नहीं होता। इसके अतिरिक्त इसे आईपी65 की उत्कृष्ट रेटिंग प्रदान की गई है जो इसे पूरी तरह से वाटरप्रूफ और धूल से सुरक्षित बनाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पालतू पशु के जल में जाने या कीचड़ में खेलने पर भी यह यंत्र सुचारू रूप से कार्य करता रहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक उपभोक्ता बाजार में इस उत्पाद की व्यावसायिक पहुंच और आर्थिक व्यवहार्यता को देखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे आम जनता के बजट के भीतर रखने का सराहनीय प्रयास किया गया है। चीनी उत्पाद बाजार में इस एआई संचालित कॉलर की कीमत लगभग 118 से 120 अमेरिकी डॉलर के मध्य निर्धारित की गई है। यदि हम इस धनराशि को भारतीय मुद्रा के समकक्ष देखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह मूल्य लगभग 10,000 रुपये के आसपास आता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीकों के प्रति उत्सुक लोगों और पशु प्रेमियों के बीच इस उपकरण को लेकर किस सीमा तक आकर्षण व्याप्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका अनुमान इस सत्य से लगाया जा सकता है कि इसकी आधिकारिक बिक्री आरंभ होने के प्रारंभिक चरण में ही चीन के भीतर इसके 10,000 से अधिक अग्रिम आदेश यानी प्री-ऑर्डर बुक किए जा चुके थे। लोग अपने इन प्रिय और मूक साथियों के अंतर्मन के विचारों को जानने और उनके स्वास्थ्य की सही निगरानी करने हेतु इस राशि को व्यय करने में अत्यधिक रुचि प्रदर्शित कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इस विशिष्ट क्षेत्र में एक विशाल नए बाजार की नींव पड़ती दिखाई दे रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यद्यपि इस अभूतपूर्व एआई कॉलर को लेकर संपूर्ण विश्व के तकनीक प्रेमियों में एक व्यापक उत्साह का वातावरण दिखाई दे रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु इसके समानांतर ही वैज्ञानिक समुदाय और विश्वप्रसिद्ध पशु व्यवहार विशेषज्ञों का एक बहुत बड़ा वर्ग इस 95 प्रतिशत सटीकता के भारी भरकम दावे को पूर्णतः स्वीकार करने में संकोच कर रहा है और इसे गहरे संदेह के दृष्टिकोण से देख रहा है। अनेक वरिष्ठ जीव विज्ञानियों और शोधकर्ताओं का यह सुदृढ़ तर्क है कि पशुओं का आपसी या इंसानों के साथ संवाद केवल उनकी ध्वनियों अथवा कुछ सीमित शारीरिक हलचलों तक ही सीमित नहीं होता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जानवर अपनी आंतरिक अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने के लिए अपने तात्कालिक परिवेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर से निकलने वाली विशेष गंध जिसे फेरोमोन्स कहा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंखों के संपर्क और अत्यंत सूक्ष्म शारीरिक मुद्राओं का सहारा लेते हैं। इन सभी जटिल कारकों को केवल गले में बंधे एक छोटे पट्टे के सेंसरों द्वारा पूर्ण रूप से ग्रहण करना अत्यंत कठिन है। आलोचकों का यह भी मत है कि किसी भी स्वतंत्र वैश्विक प्रयोगशाला या अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शोध पत्रिका द्वारा अभी तक इन दावों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे अंतिम रूप से अचूक मान लेना तर्कसंगत नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन समस्त वैज्ञानिक मतभेदों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शंकाओं और वैचारिक बहसों के होने के बाद भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस अकाट्य सत्य से तनिक भी पीछे नहीं हटा जा सकता कि यह चीनी स्टार्टअप तकनीकी विकास के इतिहास में एक अत्यंत नवीन और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने का प्रयास कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अदभुत क्षमता का उपयोग करके भिन्न प्रजातियों के बीच की सदियों पुरानी भाषाई दूरी को समाप्त करने का यह उद्यम भविष्य की अनंत और कल्याणकारी संभावनाओं के मार्ग प्रशस्त करता है। यदि यह तकनीक आगामी समय में और अधिक परिष्कृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत और त्रुटिहीन होती है</span>,</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका अनुप्रयोग केवल घरों में पाले जाने वाले कुत्तों और बिल्लियों तक ही सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरन इसका उपयोग बड़े चिड़ियाघरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय वन्यजीव अभ्यारण्यों और ग्रामीण पशु चिकित्सालयों में गंभीर रूप से बीमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूक और पीड़ित वन्य जीवों के सटीक उपचार तथा उनकी कुशल देखभाल के लिए बहुत बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा। पेट्टीचैट जैसे संवेदनशील डिवाइस यह भली-भांति सिद्ध करते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मुख्य ध्येय केवल मानव उत्पादकता बढ़ाना या मशीनी कोडिंग करना ही नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह संपूर्ण प्रकृति के अछूते रहस्यों को उजागर करने और धरती के समस्त सहजीवी प्राणियों के साथ हमारे आत्मीय संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का एक अनुपम माध्यम बन सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:32:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हिंदुत्व, जाति और बंगाल का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2026 केवल एक चुनावी वर्ष नहीं बल्कि एक ऐसी निर्णायक ऐतिहासिक घटना बनकर उभरा है जिसने पूरे देश की राजनीति को नए ढंग से सोचने पर विवश कर दिया है। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा। इसके भीतर सांस्कृतिक अस्मिता, धार्मिक चेतना, राजनीतिक हिंसा, जातीय समीकरण, सामाजिक न्याय और वैचारिक संघर्ष के अनेक स्तर एक साथ दिखाई दिए। यही कारण है कि इस चुनाव को केवल भाजपा की विजय या तृणमूल कांग्रेस की पराजय कह देना उसकी व्यापकता को सीमित कर देना होगा। यह चुनाव उस लंबे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178852/hindutva-caste-and-the-future-of-bengal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/rajneeti2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2026 केवल एक चुनावी वर्ष नहीं बल्कि एक ऐसी निर्णायक ऐतिहासिक घटना बनकर उभरा है जिसने पूरे देश की राजनीति को नए ढंग से सोचने पर विवश कर दिया है। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा। इसके भीतर सांस्कृतिक अस्मिता, धार्मिक चेतना, राजनीतिक हिंसा, जातीय समीकरण, सामाजिक न्याय और वैचारिक संघर्ष के अनेक स्तर एक साथ दिखाई दिए। यही कारण है कि इस चुनाव को केवल भाजपा की विजय या तृणमूल कांग्रेस की पराजय कह देना उसकी व्यापकता को सीमित कर देना होगा। यह चुनाव उस लंबे सामाजिक और मानसिक संघर्ष का परिणाम था जो वर्षों से बंगाल के भीतर धीरे धीरे आकार ले रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2026 के विधानसभा चुनाव में कुल 91.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुछ चरणों में मतदान का प्रतिशत 92 तक पहुँचा। यह केवल चुनावी उत्साह का संकेत नहीं था बल्कि जनता के भीतर जमा असंतोष, भय, गुस्से और परिवर्तन की इच्छा का भी स्पष्ट प्रमाण था। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया जबकि तृणमूल कांग्रेस लगभग 80 सीटों तक सीमित रह गई। 2016 में भाजपा के पास केवल 3 सीटें थीं। 2021 में यह संख्या 77 तक पहुँची और 2026 में यह 207 हो गई। यह परिवर्तन अचानक नहीं था बल्कि एक लंबे सामाजिक और राजनीतिक विस्तार का परिणाम था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल लंबे समय तक वामपंथी राजनीति का गढ़ रहा। 1977 से 2011 तक 34 वर्षों तक वाममोर्चा ने यहाँ शासन किया। उसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने 15 वर्षों तक सत्ता संभाली। इस पूरी अवधि में भाजपा को बंगाल की राजनीति में कभी गंभीर शक्ति नहीं माना गया। बंगाल की बौद्धिक परंपरा, साहित्यिक संस्कृति और धर्मनिरपेक्ष छवि को देखते हुए यह माना जाता था कि यहाँ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीति कभी व्यापक जनाधार नहीं बना पाएगी। लेकिन 2026 ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परिवर्तन की जड़ें केवल चुनावी रणनीति में नहीं बल्कि उन घटनाओं में थीं जिन्होंने बंगाल के समाज को भीतर तक प्रभावित किया। संदेशखाली की घटनाएँ, राजनीतिक हिंसा, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, धार्मिक नारों को लेकर टकराव और अनेक स्थानों पर उत्पन्न असुरक्षा की भावना ने समाज के बड़े हिस्से को मानसिक रूप से बदल दिया। 2021 के चुनावों के दौरान 85 वर्षीय शोभा मजूमदार की मृत्यु को भाजपा और उसके समर्थकों ने राजनीतिक हिंसा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। बंगाल के अनेक क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, हमले और पलायन की घटनाओं ने यह धारणा मजबूत की कि राज्य में लोकतांत्रिक असहमति के लिए स्थान सीमित होता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी बीच धार्मिक पहचान का प्रश्न भी लगातार मजबूत होता गया। जय श्री राम का नारा केवल धार्मिक उद्घोष नहीं रहा बल्कि राजनीतिक प्रतिरोध का प्रतीक बन गया। भाजपा ने इसे सांस्कृतिक स्वाभिमान से जोड़कर प्रस्तुत किया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस पर लंबे समय से तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगता रहा। 2026-27 के बजट में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा के लिए लगभग 5713 करोड़ रुपये के आवंटन ने इस बहस को और तीखा कर दिया। भाजपा समर्थकों ने इसे हिंदू समाज की उपेक्षा और वोट बैंक की राजनीति का प्रमाण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि भाजपा को केवल शहरी या उच्च वर्गीय समर्थन नहीं मिला। अनुसूचित जाति और जनजाति की आरक्षित सीटों में भाजपा ने भारी सफलता प्राप्त की। 84 आरक्षित सीटों में से 67 पर विजय ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर आकर्षित हुआ। यही वह बिंदु है जहाँ बंगाल की राजनीति एक नए वैचारिक मोड़ पर पहुँचती दिखाई देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा ने लंबे समय तक हिंदू एकता की राजनीति की। चुनाव प्रचार के दौरान जातीय पहचान की तुलना में धार्मिक पहचान अधिक प्रभावी दिखाई दी। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद जिस प्रकार सामाजिक अभियान्त्रिकी की चर्चाएँ सामने आने लगीं, उससे नए विवाद पैदा हुए। कुछ विचारकों और रणनीतिकारों ने यह तर्क देना शुरू किया कि बंगाल में सवर्ण और मुसलमानों का एक ऐतिहासिक गठबंधन रहा जिसने दलितों और पिछड़ों को सत्ता से दूर रखा। इस प्रकार की व्याख्या ने भाजपा समर्थक सवर्ण वर्ग के भीतर असहजता पैदा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहीं से यह प्रश्न खड़ा होता है कि क्या भाजपा अब हिंदू एकता की राजनीति से आगे बढ़कर मंडल राजनीति की ओर लौट रही है। यदि ऐसा है तो यह भाजपा के लिए अवसर भी हो सकता है और संकट भी। अवसर इसलिए क्योंकि सामाजिक प्रतिनिधित्व की राजनीति भारतीय लोकतंत्र की वास्तविकता है। संकट इसलिए क्योंकि यदि हिंदू समाज को पुनः जातीय आधार पर विभाजित किया गया तो वह सांस्कृतिक एकता कमजोर हो सकती है जिसने भाजपा को बंगाल में इतनी बड़ी सफलता दिलाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल की सामाजिक संरचना उत्तर भारत के अनेक राज्यों से भिन्न रही है। यहाँ जातीय पहचान मौजूद अवश्य रही लेकिन उसने राजनीति को उस स्तर तक नियंत्रित नहीं किया जैसा बिहार या उत्तर प्रदेश में देखा गया। बंगाल की सांस्कृतिक चेतना लंबे समय तक भाषा, साहित्य और बौद्धिकता के इर्द गिर्द निर्मित होती रही। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और चैतन्य महाप्रभु की परंपरा ने धर्म को विभाजन के बजाय आध्यात्मिक समन्वय के रूप में प्रस्तुत किया। इसलिए यदि बंगाल में जातीय ध्रुवीकरण को कृत्रिम रूप से बढ़ाने का प्रयास होगा तो उसका सामाजिक प्रतिरोध भी सामने आ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस चुनाव में महिलाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न गुस्से ने सरकार विरोधी वातावरण तैयार किया। भाजपा ने इसे प्रभावी ढंग से राजनीतिक मुद्दा बनाया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर चुनाव परिणामों को लेकर विवाद भी सामने आए। विपक्षी दलों और कुछ आलोचकों ने मतदाता सूची संशोधन और मतदाता नाम हटाने की प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। हालांकि चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी विवादों के बावजूद यह तथ्य निर्विवाद है कि बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है। पहली बार भाजपा ने राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। यह केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं बल्कि वैचारिक स्वीकृति का भी संकेत है। लेकिन वास्तविक चुनौती अब शुरू होती है। चुनाव जीतना अपेक्षाकृत सरल होता है जबकि सामाजिक संतुलन बनाए रखना कहीं अधिक कठिन।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि भाजपा केवल धार्मिक ध्रुवीकरण पर निर्भर रहती है तो उसे दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता प्राप्त नहीं होगी। यदि वह केवल जातीय प्रतिनिधित्व की राजनीति करेगी तो उसका मूल सांस्कृतिक आधार कमजोर पड़ सकता है। बंगाल जैसे राज्य में स्थायी राजनीतिक सफलता के लिए सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक न्याय दोनों को साथ लेकर चलना आवश्यक होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज बंगाल के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या यह परिवर्तन समावेशी होगा या टकरावपूर्ण। क्या जय श्री राम और जय भीम को परस्पर विरोधी नारों की तरह प्रस्तुत किया जाएगा या उन्हें सामाजिक समन्वय के रूप में देखा जाएगा। यदि भाजपा इस संतुलन को साध लेती है तो बंगाल में उसका राजनीतिक आधार लंबे समय तक मजबूत रह सकता है। लेकिन यदि सत्ता के बाद समाज को नए नए वर्गों में बाँटने की राजनीति शुरू होती है तो वही जनता जिसने 2026 में ऐतिहासिक जनादेश दिया है, भविष्य में उससे निराश भी हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल का यह चुनाव केवल एक राज्य का चुनाव नहीं था। यह भारतीय राजनीति की बदलती दिशा का संकेत था। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक असुरक्षा, राजनीतिक हिंसा और प्रतिनिधित्व की राजनीति मिलकर किस प्रकार नए राजनीतिक समीकरण बना सकती है। आने वाले वर्षों में पूरा देश बंगाल को ध्यान से देखेगा क्योंकि यहाँ जो प्रयोग शुरू हुआ है उसका प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। बंगाल अब केवल साहित्य और संस्कृति की भूमि नहीं रहा बल्कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी वैचारिक प्रयोगशाला बन चुका है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:13:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार की राजनीति- निशांत कुमार का राजनीतिक उदय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="center">  </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">,</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173025/political-rise-of-nishant-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/mahendra_tiwari.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="center"> </p>
<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">- महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बिहार की राजनीति आज उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ सत्ता के गलियारों में बदलाव की सरसराहट नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक युग के अवसान और नए नेतृत्व के अभ्युदय की पदचाप सुनाई दे रही है। पिछले दो दशकों से बिहार की नियति को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक यात्रा के उस पड़ाव पर कदम रखा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी के रास्ते संगठन की मजबूती और उत्तराधिकार के प्रश्न पर जाकर टिक जाते हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर लंबे समय से जिस सन्नाटे को महसूस किया जा रहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह 8 मार्च 2026 को पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में नारों की गूँज के साथ टूट गया। निशांत कुमार का राजनीति में औपचारिक प्रवेश केवल एक व्यक्ति का दल में शामिल होना नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक क्षेत्रीय दल के अस्तित्व को बचाने की उस छटपटाहट का परिणाम है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अक्सर </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">वन मैन शो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वाली पार्टियों में उनके शीर्ष नेता के सक्रिय राजनीति से दूर होने पर दिखाई देती है। नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में जिस समाजवाद और वंशवाद विरोधी विचारधारा का झंडा बुलंद किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज उनकी पार्टी उसी वंशवाद के छाते तले खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। यह भारतीय राजनीति की एक कड़वी हकीकत है कि क्षेत्रीय दल विचारधारा से ज्यादा एक चेहरे से बंधे होते हैं और जब वह चेहरा धुंधला पड़ने लगता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ता किसी ऐसे नाम की तलाश करते हैं जो उस विरासत को संजो सके। निशांत कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे एक ऐसे पिता के उत्तराधिकारी बनकर आए हैं जिन्होंने अपनी शर्तों पर राजनीति की है। नीतीश कुमार वह शख्सियत रहे हैं जिन्होंने विधानसभा में संख्या बल कम होने के बावजूद गठबंधन के साथियों को अपनी उंगलियों पर नचाया और चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित किया कि राजनीति में करिश्मा और चाणक्य नीति का मेल क्या होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के विधानसभा चुनावों ने नीतीश कुमार की लोकप्रियता पर उठ रहे तमाम सवालों पर विराम लगा दिया था। उनके गिरते स्वास्थ्य और भूलने की बीमारी की चर्चाओं के बीच जब परिणाम आए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे चौंकाने वाले थे। जनता ने उन्हें न केवल वोट दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार के ग्रामीण अंचलों में आज भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन बाबू</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की धमक बरकरार है। यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी सफलता के पीछे भी नीतीश कुमार का वह अति पिछड़ा और महिला वोट बैंक सक्रिय था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो खामोशी से उनके पक्ष में लामबंद रहता है। लेकिन अपने राजनीतिक चरमोत्कर्ष पर नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का फैसला और पार्टी की बागडोर परोक्ष रूप से निशांत कुमार के हाथों में सौंपने की तैयारी ने कार्यकर्ताओं को हतप्रभ कर दिया है। निशांत के स्वागत में लगे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत हैं तो निश्चिंत हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे दरअसल कार्यकर्ताओं के उसी भय को दर्शाते हैं जो नीतीश के बिना पार्टी के बिखरने की आशंका से पैदा हुआ है। 40 वर्षीय निशांत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक सक्रिय राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए यह डगर कांटों भरी है। राजनीति कोई इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं है जहाँ फार्मूलों से नतीजे निकाले जा सकें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ समीकरण हर पल बदलते हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के उस मूल आधार—कुर्मी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोइरी और अति पिछड़ा वर्ग—को अपने साथ जोड़े रखने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो नीतीश कुमार के व्यक्तित्व के आकर्षण में जेडीयू के साथ रहा है। क्या एक सौम्य और राजनीति से दूर रहा युवा इन वर्गों की आकांक्षाओं को वह स्वर दे पाएगा जो उनके पिता ने दिया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेता पहले से ही बिहार की मिट्टी में अपनी जड़ें गहरी कर चुके हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री एक ऐसे समय में हुई है जब उनके प्रतिद्वंद्वी राजनीति के मजे हुए खिलाड़ी बन चुके हैं। तेजस्वी यादव ने जहाँ लालू प्रसाद यादव की विरासत को अपनी मेहनत और संघर्ष से एक नई ऊँचाई दी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं चिराग पासवान ने भी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की छवि से निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। इन दोनों नेताओं के विपरीत निशांत को राजनीति विरासत में मिली तो है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने कभी अपने पिता के साथ धूप-छाँव में संघर्ष नहीं किया। वे नीतीश कुमार के उन राजनीतिक दांव-पेंचों के साक्षी नहीं रहे हैं जिन्होंने जेडीयू को बार-बार संकट से उबारा। ऐसे में पार्टी के भीतर मौजूद </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">घाघ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और पुराने नेताओं के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए अग्निपरीक्षा जैसा होगा। जेडीयू के भीतर कई ऐसे दिग्गज नेता हैं जो खुद को नीतीश का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानते रहे हैं। राजीव रंजन सिंह और संजय झा जैसे नेताओं की मौजूदगी में निशांत को अपनी स्वतंत्र पहचान बनानी होगी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वरना यह आशंका हमेशा बनी रहेगी कि वे केवल एक </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">रबर स्टैंप</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर रह जाएंगे और पार्टी की दूसरी लाइन के नेता उन्हें अपने हितों के लिए इस्तेमाल करेंगे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और गंभीर चुनौती भारतीय जनता पार्टी के साथ संबंधों को लेकर है। बिहार में बीजेपी अब वह छोटी पार्टी नहीं रही जो नीतीश कुमार के पीछे चलती थी। 2025 के नतीजों के बाद बीजेपी अब खुद को </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की भूमिका में देख रही है। गठबंधन की राजनीति अक्सर क्रूर होती है और हर बड़ी पार्टी अपने छोटे सहयोगी को निगलने या उसे अप्रासंगिक बनाने की कोशिश करती है। बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति बिहार में अपना मुख्यमंत्री लाने की है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद जेडीयू के लिए जूनियर पार्टनर बनकर अपनी स्वायत्तता बचाए रखना लगभग असंभव सा कार्य होगा। बीजेपी चाहेगी कि भविष्य में जेडीयू का उसमें विलय हो जाए या फिर वह इतनी कमजोर हो जाए कि उसका अपना कोई अस्तित्व न बचे। निशांत कुमार को इस </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रवत हमले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से पार्टी को बचाना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जेडीयू केवल एक चुनाव जिताने वाली मशीन न बनकर रह जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसका अपना वैचारिक स्टैंड भी बना रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत के पक्ष में एक बात यह जाती है कि वे शिक्षित हैं और उनकी छवि साफ-सुथरी है। बिहार की युवा पीढ़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो जातिगत समीकरणों से ऊपर उठकर विकास और शिक्षा की बात करती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत में एक उम्मीद देख सकती है। लेकिन राजनीति में केवल शिक्षा और सौम्यता काफी नहीं होती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यहाँ जनमानस से जुड़ने के लिए पसीना बहाना पड़ता है। नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में जब वे सदस्यता ले रहे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें एक गहरा संदेश छिपा था। नीतीश ने शायद यह जतलाने की कोशिश की कि वे अभी भी वंशवाद के खिलाफ हैं और निशांत का आना पार्टी की इच्छा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी निजी जिद नहीं। हालांकि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संदेश आम जनता तक किस रूप में पहुँचता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखने वाली बात होगी। क्या जनता इसे नीतीश की मजबूरी समझेगी या एक सोची-समझी रणनीति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि जनता के बीच यह संदेश गया कि जेडीयू अब केवल एक परिवार को बचाने की कोशिश कर रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो नीतीश कुमार द्वारा दशकों में कमाई गई </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की साख को धक्का लग सकता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जेडीयू की सांगठनिक स्थिति वर्तमान में नाजुक है। 2010 में 115 सीटें जीतने वाली पार्टी 2020 में 45 पर सिमट गई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि 2025 में उसने फिर से 85 सीटों के साथ वापसी की। यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि पार्टी का जनाधार पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और वह गठबंधन के साथी की मजबूती पर निर्भर करता है। नीतीश कुमार का करिश्मा ही वह गोंद था जो इस गठबंधन को वजन देता था। अब जब गठबंधन की कमान निशांत की ओर झुक रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें साबित करना होगा कि वे केवल नीतीश के पुत्र नहीं हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक कुशल रणनीतिकार भी हैं। उन्हें उन विधायकों और नेताओं को टूटने से रोकना होगा जो सत्ता के नए केंद्रों की तलाश में दूसरी पार्टियों का रुख कर सकते हैं। अटकलें हैं कि उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है या पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष। पद चाहे जो भी मिले</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">असली चुनौती सड़क पर उतरकर कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतने की होगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने पिता के </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्गदर्शन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग किस सीमा तक करते हैं। नीतीश कुमार ने भले ही कह दिया हो कि "मैं हूँ ना"</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दिल्ली की राजनीति और पटना की जमीन के बीच का फासला बहुत बड़ा होता है। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दल अक्सर कमजोर कड़ियों की तलाश में रहते हैं। यदि निशांत ने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय जल्द नहीं दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो जेडीयू का अस्तित्व बीजेपी के बढ़ते प्रभुत्व और तेजस्वी यादव के आक्रामक विपक्ष के बीच सैंडविच बनकर रह सकता है। बिहार की राजनीति में यह एक नए अध्याय की शुरुआत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विरासत का बोझ है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिद्वंद्वियों की चुनौती है और एक ऐसी जनता की उम्मीदें हैं जो अब पुराने नारों से आगे निकलना चाहती है। निशांत कुमार को यह समझना होगा कि उनके पिता ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उन्हें शिखर पर बने रहने के लिए शून्य से शुरुआत करनी है। यह चुनौती किसी भी युद्ध से बड़ी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यहाँ हारने के लिए एक पूरी विरासत है और जीतने के लिए केवल संघर्ष।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निशांत कुमार की राह में सबसे बड़ी बाधा वह </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूडो-पॉलिटिकल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ढांचा भी है जिसे उनके पिता ने बड़ी कुशलता से बुना था। नीतीश कुमार ने अधिकारियों के भरोसे शासन चलाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता अक्सर खुद को उपेक्षित महसूस करते रहे। यदि निशांत भी इसी रास्ते पर चलते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो कार्यकर्ताओं का उत्साह जल्दी ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा। उन्हें पार्टी के भीतर लोकतंत्र को बहाल करना होगा और उन कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करना होगा जो अब तक केवल नीतीश के नाम पर वोट मांगते आए हैं। बिहार का भविष्य अब इस बात पर टिका है कि क्या यह नया नेतृत्व सुशासन की उस लौ को जलाए रख पाता है या फिर सत्ता की इस खींचतान में जेडीयू इतिहास के पन्नों में एक और क्षेत्रीय दल के रूप में दर्ज हो जाती है जो अपने नायक के जाने के बाद अपनी पहचान खो बैठा। 8 मार्च की वह शाम पटना के आकाश में नई उम्मीदें लेकर आई थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन उम्मीदों को हकीकत में बदलना निशांत कुमार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:17:08 +0530</pubDate>
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