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                <title>Sanatan Dharma - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के  जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर राम जानकी मंदिर में हुआ सुंदरकांड पाठ</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  नैनी रेलवे स्टेशन स्थित श्री राम जानकी मंदिर में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के पुनःप्राप्त जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी का पूजन-अर्चन किया तथा कैबिनेट मंत्री नंदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और जनकल्याण की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर पार्षद राकेश जायसवाल, जिला संयोजक एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष हरि कृष्णा (बबलू) तिवारी, नामित पार्षद दिलीप केसरवानी, सेक्टर संयोजक</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183176/sunderkand-recitation-took-place-in-ram-janaki-temple-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260711-wa0130.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनी रेलवे स्टेशन स्थित श्री राम जानकी मंदिर में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के पुनःप्राप्त जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी का पूजन-अर्चन किया तथा कैबिनेट मंत्री नंदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और जनकल्याण की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर पार्षद राकेश जायसवाल, जिला संयोजक एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष हरि कृष्णा (बबलू) तिवारी, नामित पार्षद दिलीप केसरवानी, सेक्टर संयोजक जय कृष्णा तिवारी, मंदिर प्रबंधक त्रिभुवन चौरसिया, पत्रकार राकेश गुप्ता (बच्चा), विनोद जायसवाल, गुड्डू गैरेज, घनश्याम जायसवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने धार्मिक वातावरण में सुंदरकांड का श्रवण कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 20:38:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय गौरक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा पहुंची बिसवां </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां/सीतापुर।</strong> जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा  मंगलवार को बिसवां पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र एवं ताल मखाने के फूलों से तैयार विशेष मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया। पत्थर शिवाला धाम के सामने एवं बाबा मनसाराम चुंगी के निकट आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना है और यह अभियान मांग पूरी होने तक निरंतर चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई सरोकार नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जो भी दल गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182893/shankaracharya-swami-avimukteshwarananda-saraswatis-81-day-gaurakshartha-dharma-yudh-yatra-reaches"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260707-wa0012.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां/सीतापुर।</strong> जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 81 दिवसीय गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा  मंगलवार को बिसवां पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र एवं ताल मखाने के फूलों से तैयार विशेष मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया। पत्थर शिवाला धाम के सामने एवं बाबा मनसाराम चुंगी के निकट आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना है और यह अभियान मांग पूरी होने तक निरंतर चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई सरोकार नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो भी दल गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा, उन्हें उसी का समर्थन मिलेगा  उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक संतों की मांग के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित नहीं किया है। सभा के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का संकल्प भी दिलाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 22:16:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>संकट मोचन धाम पाथरोल में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भजन संध्या व महाआरती आज</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाथरोल, करों, देवघर, झारखंड:-  </strong>ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज सोमवार को संकट मोचन धाम, पाथरोल में भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। मंदिर समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार संध्या 8:30 बजे से भजन-कीर्तन का शुभारंभ होगा, जिसके पश्चात रात्रि 9:30 बजे बाबा की भव्य महाआरती संपन्न होगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी प्रसाद सहित अन्य प्रसाद का वितरण भी किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को श्रद्धालुओं के सहयोग से भजन संध्या, बाबा की महाआरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इसी परंपरा को आगे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182354/bhajan-evening-and-maha-aarti-today-on-jyeshtha-purnima-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-41.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाथरोल, करों, देवघर, झारखंड:-  </strong>ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज सोमवार को संकट मोचन धाम, पाथरोल में भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। मंदिर समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार संध्या 8:30 बजे से भजन-कीर्तन का शुभारंभ होगा, जिसके पश्चात रात्रि 9:30 बजे बाबा की भव्य महाआरती संपन्न होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी प्रसाद सहित अन्य प्रसाद का वितरण भी किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को श्रद्धालुओं के सहयोग से भजन संध्या, बाबा की महाआरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंदिर समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:20:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भागवत कथा सुनने से होता है मानव जीवन का कल्याणः मधुसूदनाचार्य महराज</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong> नगर पंचायत बिस्कोहर के वार्ड नंबर 15 डेगहर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन कथा व्यास स्वामी मधुसूदनाचार्य महाराज ने भगवान के 24 अवतारों एवं नारद महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान विभिन्न अवतारों के माध्यम से धर्म की स्थापना और मानव कल्याण का संदेश देते हैं। नारद जी के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, सत्संग और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कथाव्यास ने कहा कि भागवत कथा समाज में नैतिक मूल्यों, आपसी प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना को मजबूत करती है तथा लोगों को सत्य और धर्म</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181501/listening-to-bhagwat-katha-brings-benefit-to-human-life-madhusudancharya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781794133348.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong> नगर पंचायत बिस्कोहर के वार्ड नंबर 15 डेगहर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन कथा व्यास स्वामी मधुसूदनाचार्य महाराज ने भगवान के 24 अवतारों एवं नारद महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान विभिन्न अवतारों के माध्यम से धर्म की स्थापना और मानव कल्याण का संदेश देते हैं। नारद जी के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, सत्संग और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कथाव्यास ने कहा कि भागवत कथा समाज में नैतिक मूल्यों, आपसी प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना को मजबूत करती है तथा लोगों को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इस दौरान यज्ञाचार्य बनवारी लाल, सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी, शीला देवी, महेंद्र मणि त्रिपाठी, मनोज त्रिपाठी, धर्मेंद्र, अविनाश त्रिपाठी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:26:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का  शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<div><div><div><div><div><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> नगर पंचायत बिस्कोहर के वार्ड नंबर 15 विश्वनाथ नगर टोला डेंगहर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा  का शुभारम्भ दिन मंगलवार को भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।  बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने  गाजे बाजे के साथ  बिस्कोहर बस स्टाप से होते हुए  बूढ़ी राप्ती नदी घाट पर  जल भरने के लिए पहुंची। अयोध्या धाम से पधारे यज्ञाचार्य बनवारी लाल त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रोचारण के द्वारा मुख्य यजमान शीला देवी पत्नी स्व हरीराम त्रिपाठी को विधि विधान के अनुसार पवित्र जल भराया । इसके बाद कलश यात्रा पुनः</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181377/inauguration-of-shrimad-bhagwat-katha-with-grand-kalash-yatra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781620488598.jpg" alt=""></a><br /><div><div><div><div><div><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> नगर पंचायत बिस्कोहर के वार्ड नंबर 15 विश्वनाथ नगर टोला डेंगहर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा  का शुभारम्भ दिन मंगलवार को भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।  बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने  गाजे बाजे के साथ  बिस्कोहर बस स्टाप से होते हुए  बूढ़ी राप्ती नदी घाट पर  जल भरने के लिए पहुंची। अयोध्या धाम से पधारे यज्ञाचार्य बनवारी लाल त्रिपाठी ने वैदिक मंत्रोचारण के द्वारा मुख्य यजमान शीला देवी पत्नी स्व हरीराम त्रिपाठी को विधि विधान के अनुसार पवित्र जल भराया । इसके बाद कलश यात्रा पुनः यज्ञ स्थल पर  जल को लेकर  यज्ञ मण्डप में विधि विधान से स्थापित किया गया। कथा संयोजक महेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि कथा 22 जून तक चलेगी।इस कार्यक्रम में  कथा ब्यास स्वामी मधुसूदन चार्य जी, यज्ञाचार्य बनवारी लाल त्रिपाठी, मुख्य यजमान शीला देवी, मोहन मिश्रा, राम बोल पाठक, सुरेश पाण्डेय,बैजनाथ गुप्ता, हरिकीर्तन मणि त्रिपाठी,विवेक शुक्ला, संजय सोनी, डाक्टर अभि विश्वास,</div><div>महेंद्र मणि त्रिपाठी, मनोज कुमार त्रिपाठी, धर्मेन्द्र मणि त्रिपाठी, धीरेंद्र मणि त्रिपाठी, राघवेंद्र, अविनाश, शुभम, आशीष, दिव्यांश, राज रतन आदि मौजूद रहे।</div></div></div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 21:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong> कसारी रामगढ़ स्थित भिखारी बाबा आश्रम परिसर में वृहस्पतिवार को सातवें दिन विराट रुद्र महायज्ञ में यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान जयकारे से समूचा परिसर गुंजायमान हो गया। शिव मंदिर में दूध से रुद्राभिषेक पूजन भी कराया गया। वृंदावन से आई बाल कथा वाचिका धानी शास्त्री ने भागवत कथा का रसपान कराया। वहीं भजन संध्या में वाराणसी से आए राष्ट्रीय बाल कलाकार श्री राम कृष्ण, श्री राधा कृष्ण व श्री राधे कृष्ण ने एक से बढ़कर एक भजन, गीत व गजल सुनाया। वहीं वृंदावन से आए कलाकारों की रासलीला</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180990/crowd-of-devotees-gathered-to-circumambulate-the-yagya-mandap"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001716465.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong> कसारी रामगढ़ स्थित भिखारी बाबा आश्रम परिसर में वृहस्पतिवार को सातवें दिन विराट रुद्र महायज्ञ में यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान जयकारे से समूचा परिसर गुंजायमान हो गया। शिव मंदिर में दूध से रुद्राभिषेक पूजन भी कराया गया। वृंदावन से आई बाल कथा वाचिका धानी शास्त्री ने भागवत कथा का रसपान कराया। वहीं भजन संध्या में वाराणसी से आए राष्ट्रीय बाल कलाकार श्री राम कृष्ण, श्री राधा कृष्ण व श्री राधे कृष्ण ने एक से बढ़कर एक भजन, गीत व गजल सुनाया। वहीं वृंदावन से आए कलाकारों की रासलीला देखने को भारी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। प्रकृति रक्षा के लिए 251 जड़ी बूटियों से निर्मित हवन सामग्री से आहुति दी गई। प्रतिदिन चलने वाले विशाल भंडारा में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के आयोजक भिक्षुक भिखारी जंगली दास दीनबंधु रमाशंकर गिरी जी महाराज ने बताया कि आचार्यगण गोपालधर द्विवेदी, राजेश कुमार पाठक, हरिओम द्विवेदी व अमरेश तिवारी द्वारा विराट रूद्र महायज्ञ एवं पूजन कार्य कराया जा रहा है। प्रतिदिन शिव मंदिर में दूध, गंगाजल से रुद्राभिषेक पूजन कराया जा रहा है। प्रकृति रक्षा के लिए 251 जड़ी बूटियों से निर्मित हवन सामग्री से आहुति दी जा रही है। प्रतिदिन चलने वाले विशाल भंडारा में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य यजमान दिनेश, उषा देवी, रूपा गुप्ता, देवेंद्र कुमार, चिंता मौर्य, उर्मिला देवी, विमला देवी, शशि देवी, विजय सिंह, मनीष कुमार, कृति सागर, शुभराम महाराज, परमानंद, रमेश कुमार, प्रहलाद, रामखेलावन, किरन मोदवाल, मानवी, संगीता, मुन्ना बाबा, केवलानंद महाराज, आनंद ओझा, राकेश पाठक, कालो देवी, डॉक्टर विजय, हीरा सिंह, संजय अग्रवाल, चांदनी अग्रवाल, संगीता, राजेश आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:56:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'भगवान मंत्रियों का इंतजार नहीं करते, सब बराबर हैं'</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत में लगभग हर छोटे-बड़े प्रसिद्ध मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए एक अलग लाइन या विशेष पास की व्यवस्था होती है। कुछ तय रकम या टिकट के पैसे देने के बाद कोई भी व्यक्ति घंटों लंबी लाइनों से बचकर सीधे भगवान के गर्भगृह तक दर्शन के लिए पहुंच जाता है। हालांकि, पैसे और रसूख के दम पर मिलने वाली इस विशेष सुविधा पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला अब मद्रास हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंचा है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मंदिरों में पैसे और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180385/god-does-not-wait-for-ministers-all-are-equal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/vmyzo_hj.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत में लगभग हर छोटे-बड़े प्रसिद्ध मंदिर में वीआईपी दर्शन के लिए एक अलग लाइन या विशेष पास की व्यवस्था होती है। कुछ तय रकम या टिकट के पैसे देने के बाद कोई भी व्यक्ति घंटों लंबी लाइनों से बचकर सीधे भगवान के गर्भगृह तक दर्शन के लिए पहुंच जाता है। हालांकि, पैसे और रसूख के दम पर मिलने वाली इस विशेष सुविधा पर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला अब मद्रास हाई कोर्ट की चौखट पर पहुंचा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मंदिरों में पैसे और वीआईपी दर्जे के आधार पर दी जाने वाली इस विशेष सुविधा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने दोटूक शब्दों में कहा कि भगवान के दरबार में कोई मंत्री हो या आम आदमी, उनमें कोई भेद नहीं हो सकता। ईश्वर के सामने सभी इंसान बराबर हैं, ऐसे में मंदिरों के भीतर वीआईपी दर्शन की इस कुप्रथा का कोई औचित्य नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ (बेंच) ने इस मामले की सुनवाई के दौरान बेहद तीखे सवाल उठाए। अदालत ने मंदिरों में वीआईपी दर्शन की प्रथा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भगवान के सामने किसी रसूखदार मंत्री और एक आम नागरिक में कोई फर्क है? कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा कि दर्शन के लिए कोई भी प्रशासनिक प्रक्रिया तय की जाए, लेकिन उससे मंदिर की कतारों में खड़े आम श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी या मानसिक ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस जी आर स्वामीनाथन की बेंच ने वीआईपी संस्कृति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “मंत्रियों और विधायकों को अपने मन से यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए कि मंदिर में भगवान उनका इंतजार कर रहे हैं, और वे अपने रसूख के दम पर किसी भी समय मंदिर में सीधे प्रवेश कर सकते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। आखिर हमें इस वीआईपी दर्शन की क्या आवश्यकता है? जब ईश्वर के समक्ष सभी लोग पूरी तरह समान हैं, तो फिर वहां क्या मंत्री और क्या आम जनता।”।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट के इन कड़े और तीखे सवालों पर सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी वी बालासुब्रमण्यम ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने वीआईपी दर्शन की पैरवी करते हुए दलील दी कि इस तरह की प्रथा का पालन करने से एक तरफ जहां विशिष्ट लोगों के कारण लगने वाली लंबी-लंबी कतारों से मुक्ति मिलती है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी टिकटों से मंदिरों को भी काफी बड़ी आय (राजस्व) प्राप्त होती है। अपनी इस दलील के साथ ही उन्होंने इस विषय पर सरकार का विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से कुछ समय की मांग की। हाई कोर्ट ने सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें पूरा जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल, यह पूरा कानूनी विवाद हाल ही में विजय सरकार में मंत्री बने आर निर्मल कुमार के एक मंदिर दौरे को लेकर शुरू हुआ है। मंत्री निर्मल कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगे थे कि जब वे दर्शन के लिए पहुंचे, तो उनके रसूख के कारण तिरुपरनकुंड्रम स्थित ऐतिहासिक सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के कपाट आम जनता के लिए पूरी तरह बंद करवा दिए गए थे। इसके बाद जब मंत्री महोदय ने आराम से दर्शन कर लिए, तब कहीं जाकर आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर को दोबारा खोला गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, विपक्ष द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों को विजय सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। मद्रास हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका विश्व हिंदू परिषद (VHP) की तमिलनाडु इकाई के वरिष्ठ नेता पी. चोकलिंगम द्वारा दायर की गई है। उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि मंत्री निर्मल कुमार की तरह ही आए दिन कई बड़े नेता, मंत्री और विधायक मंदिरों में वीआईपी दर्शन के लिए प्रोटोकॉल का धौंस जमाते हैं, जिसकी वजह से दूर-दूर से आए आम भक्तों को घंटों धूप और कतारों में खड़े रहकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि सनातन धर्म किसी भी व्यक्ति के साथ धन, सामाजिक स्थिति, पद या जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति कतई नहीं देता है, इसलिए मंदिर के भीतर सभी भक्तों के साथ पूरी तरह समान व्यवहार किया जाना चाहिए। हालांकि, याचिकाकर्ता चोकलिंगम ने अपनी गुहार में व्यावहारिक आधार पर कुछ विशेष छूट की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, नवविवाहित जोड़ों, मंदिर में अपनी कला की प्रस्तुति देने वाले स्थानीय कलाकारों, इसके अलावा देश के राष्ट्राध्यक्षों और संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों (जैसे राष्ट्रपति, राज्यपाल या मुख्य न्यायाधीश) को इस नियम से अलग रखकर कुछ विशेष रियायतें जरूर दी जानी चाहिए, लेकिन इसका फायदा राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठाया जाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:03:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जगत के मंगल का सुफल है भगवान श्रीकृष्ण का लोकावतार-दण्डी स्वामी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> नगर पंचायत के दीवानी वार्ड में हो रही श्रीमदभागवत कथा में रविवार को भगवान श्रीकृष्ण एवं रूक्मणी विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध दिखे। कथाव्यास उत्तराखण्ड के बदरिका आश्रम से पधारे दण्डी स्वामी विनोदानंद सरस्वती जी महराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रूक्मणी का विवाह आत्मा का ईश्वर के प्रति समर्पण का नैतिक बोध कराता है। उन्होने श्रद्धालुओं को बताया कि राजकुमारी रूक्मणी के मन मे भगवान के गुणों का गुणगान सुनकर दिव्य भक्ति की चेतना जागृत हुई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्वामी विनोदानंद सरस्वती जी ने कहा कि रूक्मणी का भगवान श्रीकृष्ण से विवाह भक्त और ईश्वर के बीच सच्चे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177337/lord-shri-krishnas-lokavatar-dandi-swami-is-the-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260424-wa0149(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> नगर पंचायत के दीवानी वार्ड में हो रही श्रीमदभागवत कथा में रविवार को भगवान श्रीकृष्ण एवं रूक्मणी विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध दिखे। कथाव्यास उत्तराखण्ड के बदरिका आश्रम से पधारे दण्डी स्वामी विनोदानंद सरस्वती जी महराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रूक्मणी का विवाह आत्मा का ईश्वर के प्रति समर्पण का नैतिक बोध कराता है। उन्होने श्रद्धालुओं को बताया कि राजकुमारी रूक्मणी के मन मे भगवान के गुणों का गुणगान सुनकर दिव्य भक्ति की चेतना जागृत हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वामी विनोदानंद सरस्वती जी ने कहा कि रूक्मणी का भगवान श्रीकृष्ण से विवाह भक्त और ईश्वर के बीच सच्चे प्रेम का शाश्वत संदेश हैं। उन्होने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म जगत के मंगल और कल्याण का उत्सव बनकर धरा पर फलीभूत हुआ। कथा के दौरान सम्पूर्ण परिसर हरिनाम संकीर्तन एवं भक्ति संगीत की मधुर ध्वनियों से गुंजायमान रहा। देर शाम तक राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी भी कथा श्रवण को पहुंचे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद प्रमोद तिवारी ने क्षेत्रीय श्रद्धालुओं की ओर से दण्डी स्वामी विनोदानंद सरस्वती जी को आध्यात्मिक सम्मान सौंपा। वहीं व्यासपीठ द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य सांसद प्रमोद तिवारी को भी लोकमंगल का आशीष प्रदान हुआ। कथा का संचालन उच्च न्यायालय लखनऊ के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता दयाशंकर तिवारी ने किया। संयोजक शिक्षक रमाशंकर तिवारी, रामकिशोर तिवारी, रामराज तिवारी, रोहित तिवारी, शैलेन्द्र तिवारी ने संयुक्त रूप से व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी महेश, रामेश्वर तिवारी, कपिल तिवारी, दिवाकर नाथ शुक्ल, कौशलेन्द्र त्रिपाठी, गिरीश मिश्र, माताफेर मिश्र, आचार्य विनोद मिश्र, लालजी त्रिपाठी, भानु प्रताप सिंह, चेयरपर्सन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी, प्रमुख अमित प्रताप सिंह पंकज, शास्त्री सौरभ त्रिपाठी, आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 18:46:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अक्षयवट में बागेश्वर धाम सरकार के दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने पवित्र अक्षयवट में दिव्य दर्शन और पूजन-अर्चन किया इस दौरान धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने विधिवत पूजन-अर्चन कर देश और समाज के कल्याण की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन धर्म के महत्व, आस्था की शक्ति और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे। </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176989/a-sea-of-devotion-gathered-in-sangam-city-for-divine"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0289.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong>धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने पवित्र अक्षयवट में दिव्य दर्शन और पूजन-अर्चन किया इस दौरान धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने विधिवत पूजन-अर्चन कर देश और समाज के कल्याण की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सनातन धर्म के महत्व, आस्था की शक्ति और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए थे। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:24:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय नवसंवत्सर का स्वर्णिम आरंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173466/golden-beginning-of-indian-new-year"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindu-new-year-2025.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह केवल गणनात्मक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रकृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खगोल और मानव जीवन के गहरे संबंधों पर आधारित है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का आधार विक्रम संवत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक प्राचीन कालगणना प्रणाली है और आज भी भारत तथा नेपाल के कई भागों में प्रचलित है। यह पंचांग चंद्र और सूर्य दोनों की गति पर आधारित होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे लूनी सोलर कैलेंडर कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए समय-समय पर अतिरिक्त माह अर्थात अधिमास को भी जोड़ता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ऋतुओं और पर्वों का संतुलन बना रहे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारतीय ऋषियों ने समय की गणना को केवल गणित नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन और प्रकृति के समन्वय के रूप में देखा था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह दिन सृष्टि के आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि हिन्दू नववर्ष को केवल सामाजिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन मनुष्य को अपने जीवन की दिशा पर पुनर्विचार करने</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने और आत्मशुद्धि का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में हिन्दू नववर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">19 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को प्रारंभ होकर विक्रम संवत </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2083 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का आरंभ करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक विशेष वर्ष भी माना जा रहा है क्योंकि इसमें अधिमास के कारण </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">13 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महीने होंगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तथ्य इस बात को और भी रोचक बनाता है कि भारतीय कालगणना कितनी सूक्ष्म और वैज्ञानिक रही है। यह नववर्ष वसंत ऋतु के आगमन के साथ आता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब प्रकृति में नवपल्लव फूटते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फूल खिलते हैं और वातावरण में एक नई ताजगी का संचार होता है। यह दृश्य स्वयं इस बात का प्रतीक है कि जीवन में परिवर्तन और नवाचार अनिवार्य हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की सांस्कृतिक विविधता इस पर्व में अत्यंत सुंदर रूप से झलकती है। देश के विभिन्न भागों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाल में पोइला बैसाख और सिंधी समाज में चेती चांद।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नाम भले ही अलग हों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु सभी में एक ही भावना निहित है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई शुरुआत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का स्वागत। यही विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एकता में अनेकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को भी सुदृढ़ करता है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नए वस्त्र धारण करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार के साथ मिलकर विशेष भोजन का आनंद लेते हैं। घरों को फूलों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आम के पत्तों और रंगोली से सजाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक होता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सब केवल परंपरा नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया भी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो व्यक्ति को पुराने नकारात्मक अनुभवों को छोड़कर नए सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका आध्यात्मिक स्वरूप है। चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी इसी दिन से होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। यह साधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्म-अनुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम और आत्मबल को विकसित करने का माध्यम है। उपवास</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान और जप के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करना सीखता है और जीवन के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल बाहरी उत्सव नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आंतरिक परिवर्तन का भी अवसर है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत होता है। बीते हुए वर्ष की गलतियों और अनुभवों से सीख लेकर हम नए वर्ष में बेहतर निर्णय ले सकते हैं। यह पर्व हमें आशा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और सकारात्मकता का संदेश देता है। यह हमें यह याद दिलाता है कि समय चक्र निरंतर चलता रहता है और हर नया वर्ष हमें स्वयं को सुधारने और आगे बढ़ने का अवसर देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक समय में जब वैश्वीकरण और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और हमारी पहचान को मजबूत करता है। यह युवा पीढ़ी को यह समझने का अवसर देता है कि हमारी परंपराएं केवल अतीत की धरोहर नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ ही</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा देता है। वसंत ऋतु में शरीर और मन दोनों में एक नई ऊर्जा का संचार होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस समय वातावरण शुद्ध होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्य की किरणें शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं और जीवन में संतुलन स्थापित करने का अवसर मिलता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के डिजिटल युग में भी हिन्दू नववर्ष अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह पर्व नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है और लोग इसे नए उत्साह के साथ मना रहे हैं। यह परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय का उदाहरण है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां प्राचीन मूल्य आधुनिक साधनों के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः हिन्दू नववर्ष एक ऐसा पर्व है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें जीवन के मूल सिद्धांतों की याद दिलाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">—</span><span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मकता और निरंतर विकास। यह केवल एक तिथि का परिवर्तन नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर है। जब हम इस दिन नए संकल्प लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल व्यक्तिगत नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति की दिशा में भी एक कदम होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस नववर्ष पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी संस्कृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और मूल्यों को संजोकर रखेंगे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएंगे। यही हिन्दू नववर्ष का वास्तविक संदेश है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नवीनता के साथ परंपरा का सम्मान और जीवन में संतुलन का मार्ग। यही वह सवेरा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल एक वर्ष का नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे जीवन का मार्गदर्शन करता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रज्ञा पुराण कथा सुनने से धन्य हो जाता है मानव जीवन : कैलाश नाथ तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,  </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के भरौली कैथोलिया में चल रहे गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के पहले दिन वृहस्पतिवार रात श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने प्रज्ञा पुराण की रोचक कथा सुनाते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। इसके अध्ययन से व्यक्ति के जीवन में आने वाले अनेक संकट दूर होते हैं और परिवार को उन्नति के मार्ग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173023/human-life-becomes-blessed-by-listening-to-pragya-purana-katha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1772803543856.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,  </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के भरौली कैथोलिया में चल रहे गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के पहले दिन वृहस्पतिवार रात श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने प्रज्ञा पुराण की रोचक कथा सुनाते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। इसके अध्ययन से व्यक्ति के जीवन में आने वाले अनेक संकट दूर होते हैं और परिवार को उन्नति के मार्ग पर ले जाने की प्रेरणा मिलती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कथा व्यास ने भगवान विष्णु और नारद के संवाद का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नारद जी ने भगवान विष्णु से प्रश्न किया कि त्रेता युग में श्रीराम और द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर आपने पृथ्वी को पापों से मुक्त किया, लेकिन कलयुग में मनुष्य अनेक दुखों और परेशानियों से घिरा हुआ है। ऐसे में उसके दुखों का अंत कैसे होगा।</div><div style="text-align:justify;">इस पर भगवान विष्णु ने कहा कि कलयुग में मनुष्य के दुखों से मुक्ति पाने और सांसारिक भवसागर से पार होने का सरल उपाय प्रज्ञा पुराण का अध्ययन और उसके आदर्शों को जीवन में अपनाना है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कथा के समापन पर श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर मिठाई लाल यादव, आदर्श राम मौर्य, जंगली यादव, लवकुश यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173023/human-life-becomes-blessed-by-listening-to-pragya-purana-katha</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:14:34 +0530</pubDate>
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