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                <title>Child Protection - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Child Protection RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>लखनऊ कोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को 20 साल की सख्त सजा सुनाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के विशेष न्यायालय पॉक्सो ने नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार और संबंधित अपराधों के मामले में आरोपी पूरन कश्यप को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर लगाए गए सभी आरोपों को साबित मानते हुए कठोर दंड दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) कुमार प्रशान्त ने की। फैसला 30 जुलाई  को सुनाया गया। अभियोग पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अभिषेक उपाध्याय और अरुण कुमार ने दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से निजी अधिवक्ता  आर.एन. यादव उपस्थित रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>मामले</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184361/lucknow-court-sentenced-20-years-rigorous-imprisonment-to-the-accused"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/2023031278.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">लखनऊ के विशेष न्यायालय पॉक्सो ने नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार और संबंधित अपराधों के मामले में आरोपी पूरन कश्यप को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर लगाए गए सभी आरोपों को साबित मानते हुए कठोर दंड दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) कुमार प्रशान्त ने की। फैसला 30 जुलाई  को सुनाया गया। अभियोग पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अभिषेक उपाध्याय और अरुण कुमार ने दलीलें रखीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से निजी अधिवक्ता  आर.एन. यादव उपस्थित रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><br /><strong>मामले की पृष्ठभूमि</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />पुलिस थाना वजीरगंज, जनपद लखनऊ की मुकदमा में आरोपी पूरन कश्यप (आयु 55 वर्ष, पुत्र स्व. भोला कश्यप, निवासी  राजेन्द्र नगर, थाना नाका, लखनऊ) पर धारा 376(2)एन, 323, 504, 506, 452 भा.दं.सं. तथा धारा 5/6 POCSO एक्ट के तहत मुकदमा चलाया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />वादी  (पीड़िता के पिता) के अनुसार, आरोपी (रिश्तेदार) 4 मई 2023 को उनके घर आकर 17 वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ जबरन बलात्कार किया। पीड़िता की मां की मृत्यु हो चुकी थी और घर पर कोई जिम्मेदार सदस्य नहीं रहता था। आरोपी लगभग छह महीने तक मौका पाकर बार-बार बलात्कार करता रहा, जिससे पीड़िता गर्भवती हो गई। डॉक्टर ने छह महीने की गर्भावस्था की पुष्टि की।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />आरोपी ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दबाव डालकर 19 नवंबर 2023 को पीड़िता का विवाह अपने बड़े बेटे आयुष कश्यप से करवा दिया।<br />अदालत का निर्णय और सजा</p>
<p style="text-align:justify;"><br />अदालत ने अभियोजन साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट तथा डीएनए रिपोर्ट (जिसमें आरोपी पीड़िता के नवजात शिशु का जैविक पिता साबित हुआ) पर विश्वास जताते हुए आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि आरोपी ने नाबालिग रिश्तेदार की असहाय स्थिति का फायदा उठाकर गंभीर अपराध किया, इसलिए किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई जा सकती।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सुनाई गई सजाएं:</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2">- धारा 5/6 POCSO एक्ट (धारा 376(2)एन भा.दं.सं. सहित): 20 वर्ष कठोर कारावास तथा 50,000 अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष अतिरिक्त साधारण कारावास)।<br />- धारा 452 भा.दं.सं.: 3 वर्ष कठोर कारावास तथा 5,000 अर्थदंड।<br />- धारा 323 भा.दं.सं.: 6 महीने कठोर कारावास तथा 1,000 अर्थदंड।<br />- धारा 504 भा.दं.सं.: 1 वर्ष कठोर कारावास तथा 1,000 अर्थदंड।<br />- धारा 506 भा.दं.सं.: 2 वर्ष कठोर कारावास तथा 2,000 अर्थदंड।</blockquote>
<p style="text-align:justify;">सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जेल में पूर्व में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। अर्थदंड की राशि पीड़िता को पुनर्वास के लिए दी जाएगी। अदालत ने पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने का भी निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ को भी निर्देश दिया है कि पीड़िता को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सजायाबी वॉरंट जिला कारागार लखनऊ भेजने तथा निर्णय की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और पीड़िता को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह फैसला नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा और  पॉक्सो कानून के कड़े प्रावधानों को दोहराता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 23:29:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184359/growing-challenge-of-fake-cases-serious-questions-raised-on-alleged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के कानून का दुरुपयोग वर्षों से हो रहा है लेकिन आज तक कितनी ही सरकारें आईं हों इनमें संसोधन नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान न्याय का अधिकार देता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे विशेष कानून बनाए गए जो समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पॉक्सो कानून भी इसी सोच का परिणाम हैं। इन कानूनों ने अनेक पीड़ितों को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है और समाज में अपराधियों के विरुद्ध कठोर संदेश दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक दूसरा पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या पारिवारिक संघर्ष में इन कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे मुक़दमे दर्ज कराए जाते हैं। यह मुद्दा अदालतों, विधि विशेषज्ञों और समाज के बीच लगातार बहस का विषय बना हुआ है। क्या सचमुच फर्जी मुकदमों की बाढ़ है?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कहना कि अधिकांश एससी-एसटी या पॉक्सो के मामले फर्जी हैं, उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर उचित नहीं होगा। कई मामलों में जांच के बाद आरोप सिद्ध नहीं हो पाते, लेकिन इसका कारण हमेशा झूठा मुकदमा नहीं होता। कमजोर जांच, पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव, गवाहों का मुकर जाना, समझौते का दबाव या लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी इसके कारण हो सकते हैं। हालाँकि, विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में कानूनों का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए यह विषय संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। निर्दोष व्यक्ति पर मुकदमे का प्रभाव- यदि कोई व्यक्ति वास्तव में झूठे मुकदमे में फँस जाता है, तो उसका प्रभाव केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, नौकरी पर संकट आ सकता है, आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजरता है। वर्षों तक मुकदमा चलने के बाद यदि वह निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी खोया हुआ समय और सम्मान आसानी से वापस नहीं आता। दूसरी ओर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एससी-एसटी कानून और पॉक्सो अधिनियम लाखों वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। भारत में जातीय उत्पीड़न और बच्चों के साथ यौन अपराध आज भी गंभीर समस्या हैं। यदि इन कानूनों को कमजोर किया जाए या हर शिकायत को संदेह की दृष्टि से देखा जाए, तो वास्तविक पीड़ित न्याय पाने से वंचित हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसलिए चुनौती यह नहीं है कि कानून समाप्त कर दिए जाएँ, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका सही और निष्पक्ष उपयोग हो। देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। विशेष कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों की संख्या बढ़ने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सुनवाई में देरी के कारण न तो पीड़ित को समय पर न्याय मिल पाता है और न ही निर्दोष व्यक्ति को शीघ्र राहत। तेज और वैज्ञानिक जांच, पर्याप्त न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा समयबद्ध सुनवाई इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार की जिम्मेदारी केवल कठोर कानून बनाना नहीं है, बल्कि उनकी निष्पक्ष क्रियान्वयन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। यदि कहीं झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि वास्तविक पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर न्याय मिलना चाहिए। इस विषय पर कई विधि विशेषज्ञ निम्न सुधारों की आवश्यकता बताते हैं— निष्पक्ष और वैज्ञानिक पुलिस जांच। फॉरेंसिक साक्ष्यों का अधिक उपयोग। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाना।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण। यदि अदालत यह पाए कि शिकायत जानबूझकर झूठी और दुर्भावनापूर्ण थी, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई। पुलिस और अभियोजन अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण। "सरकार और अदालतें धृतराष्ट्र बनी हुई हैं" जैसी अभिव्यक्ति एक राजनीतिक और भावनात्मक टिप्पणी हो सकती है, लेकिन वास्तविक समाधान तथ्यों और संस्थागत सुधारों में निहित है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में दो सिद्धांत समान रूप से महत्वपूर्ण हैं—दोषी को दंड मिले और निर्दोष को अनावश्यक दंड या उत्पीड़न न झेलना पड़े। इसलिए आवश्यकता न तो कानूनों को कमजोर करने की है और न ही हर शिकायत को झूठा मानने की। आवश्यकता ऐसी न्याय व्यवस्था की है जो वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाए, निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत बनाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:55:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाबालिग को बहला-फुसलाकर  दुष्कर्म के मामले में वांछित आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong>   हण्डिया पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े गंभीर मामले में फरार चल रहे एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को रविवार, 19 जुलाई 2026 को थाना क्षेत्र के फौजी ढाबा के पास से दबोचते हुए उसके विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू की पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान विकास यादव (19 वर्ष) पुत्र राम दुलार यादव, निवासी ग्राम नंदापुर, थाना ज्ञानपुर, जनपद भदोही के रूप में हुई है। उसके विरुद्ध थाना हण्डिया में दर्ज मुकदमा संख्या 353/2026 में कार्रवाई की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मामले के अनुसार, पीड़िता की तहरीर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183804/wanted-accused-arrested-for-luring-and-raping-a-minor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260719-wa0108.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong>  हण्डिया पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े गंभीर मामले में फरार चल रहे एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को रविवार, 19 जुलाई 2026 को थाना क्षेत्र के फौजी ढाबा के पास से दबोचते हुए उसके विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू की पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान विकास यादव (19 वर्ष) पुत्र राम दुलार यादव, निवासी ग्राम नंदापुर, थाना ज्ञानपुर, जनपद भदोही के रूप में हुई है। उसके विरुद्ध थाना हण्डिया में दर्ज मुकदमा संख्या 353/2026 में कार्रवाई की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले के अनुसार, पीड़िता की तहरीर पर आरोप लगाया गया था कि अभियुक्त ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर उसकी नाबालिग पुत्री को उसके ननिहाल से बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया तथा उसके साथ दुष्कर्म किया। इस शिकायत के आधार पर थाना हण्डिया में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस/भा.न्या.सं.) एवं पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जांच के दौरान पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में धाराओं में संशोधन किया। जांच में धारा 70(2) भा.न्या.सं. एवं 5(छ)/6 पॉक्सो एक्ट को हटाते हुए धारा 65(1) भा.न्या.सं. तथा 3/4 पॉक्सो एक्ट की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी और मुखबिर की सूचना पर फौजी ढाबा के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183804/wanted-accused-arrested-for-luring-and-raping-a-minor</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 21:51:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैकड़ों महिलाओं ने काली पट्टी बांध किया प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> किदवई नगर श्री संकट मोचन विजय हनुमान एवं दुर्गा मंदिर में महिला मंडल के द्वारा राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की 13 वर्षीय बालिका से 32 लोगों द्वारा लगातार 5 दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म करने की दिल दहला देने वाली घटना से महिलाओं ने बड़ी संख्या में काली पट्टी बांध प्रदर्शन किया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  वीरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि इस जघन्य अपराध को लेकर पूरे देश में भारी आक्रोश है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए जगह-जगह कैंडिल मार्च निकाले जा रहे हैं। अध्यक्ष नीलम वीरेंद्र चौहान ने कहा कि इस हृदय विदारक घटना ने झकझोर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वीरेंद्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183032/hundreds-of-women-wore-black-bands-and-demonstrated-demanding-death"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002076496-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> किदवई नगर श्री संकट मोचन विजय हनुमान एवं दुर्गा मंदिर में महिला मंडल के द्वारा राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की 13 वर्षीय बालिका से 32 लोगों द्वारा लगातार 5 दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म करने की दिल दहला देने वाली घटना से महिलाओं ने बड़ी संख्या में काली पट्टी बांध प्रदर्शन किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> वीरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि इस जघन्य अपराध को लेकर पूरे देश में भारी आक्रोश है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए जगह-जगह कैंडिल मार्च निकाले जा रहे हैं। अध्यक्ष नीलम वीरेंद्र चौहान ने कहा कि इस हृदय विदारक घटना ने झकझोर दिया है। महामंत्री रेनू शुक्ला ने मांग करते हुए कहा कि ऐसे दुर्दात अपराधियों को फांसी होनी चाहिए।वरिष्ठ उपाध्यक्ष बीना त्रिपाठी सुधा शुक्ला अंजू द्विवेदी मधु मिश्रा डॉली द्विवेदी शालिनी अवस्थी अर्चना राठौर रेनू सेंगर सुषमा भारद्वाज संयोगिता तिवारी बबीता पांडे सुधा त्रिपाठी ने मां दुर्गा के समक्ष पूजन कर आत्मा की शांति की प्रार्थना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वीरेंद्र सिंह चौहान ने महिलाओं को संबोधित करते हुए अभिभावकों को बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए जागरूक रहने की बात कही। वही संयुक्त महिलाओं ने काली पट्टी बांध अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए 2 मिनट का मौन धारण किया। इस मौके पर मुख्य रूप से मंत्री शिवानी तिवारी करुणा त्रिवेदी रंजना अवस्थी अपर्णा तिवारी सुशीला श्रीवास्तव सुषमा कुशवाहा रानी गुप्ता नीलम दुबे कंचन सक्सेना लक्ष्मी द्विवेदी ज्योति दुबे संतोषी गुप्ता प्रियंका ठाकुर अर्चना सक्सेना मधु गुप्ता मीना पाल शांति तिवारी सुनीता शर्मा ममता मिश्रा रुचि त्रिपाठी भारती मिश्रा साधना दीक्षित मनोरमा दीक्षित सुहानी पाल एड सीमा राठौर आशा त्रिवेदी किरण पांडे रीता शास्त्री डॉ सुषमा सिंह गांधी आंटी सुदामा दुबे विजयलक्ष्मी दुबे विनीता ओमकार गुप्ता सोनी मुकुंद गुप्ता पप्पू तिवारी राजकुमार सिंह पप्पू तिवारी अमित मिश्रा अमित राठौर मयंक सहित काफी संख्या में क्षेत्रीय मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 21:50:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में वांछित युवक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना फूलपुर पुलिस ने दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में वांछित चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। आरोपी पर नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर दुष्कर्म करने तथा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को उसके गांव के समीप से गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">फूलपुर पुलिस ने बुधवार को मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रवीण पटेल को ग्राम आटा स्थित जौनपुर रोड मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182998/youth-wanted-for-raping-a-minor-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0151.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना फूलपुर पुलिस ने दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में वांछित चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। आरोपी पर नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर दुष्कर्म करने तथा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को उसके गांव के समीप से गिरफ्तार कर अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फूलपुर पुलिस ने बुधवार को मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रवीण पटेल को ग्राम आटा स्थित जौनपुर रोड मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रवीण पटेल (19 वर्ष) पुत्र मनोज पटेल, निवासी ग्राम आटा, थाना फूलपुर, कमिश्नरेट प्रयागराज के रूप में हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक, पीड़िता के पिता द्वारा दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने उनकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, घटना की शिकायत करने पर आरोपी ने पीड़िता और उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी भी दी। तहरीर के आधार पर थाना फूलपुर में मु0अ0सं0-198/2026 के तहत धारा 64(1), 115(2) एवं 351(3) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में मुकदमा दर्ज किया गया था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:48:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पतनः 13 साल की नाबालिग बच्ची चार होटल और 32! दरिंदे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजस्थान के श्रीगंगानगर में उस समय बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ अभियान व नारी सशक्तिकरण के तमाम नारे धूल धुसरित हो गए जब एक तेरह साल की नाबालिग बच्ची को चार होटलों में ले जाकर तीस से अधिक नर पिचाश दरिंदों ने बेरहमी से दरिंदगी की। जहां एक शर्मनाक और खौफनाक वारदात ने इंसानियत और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महज 13 साल की एक बच्ची के साथ ऐसी हैवानियत की गई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. इस घिनौनी वारदात के सामने आने के बाद पूरे जिले में गुस्सा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182840/fall-13-year-old-minor-girl-four-hotels-and-32"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजस्थान के श्रीगंगानगर में उस समय बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ अभियान व नारी सशक्तिकरण के तमाम नारे धूल धुसरित हो गए जब एक तेरह साल की नाबालिग बच्ची को चार होटलों में ले जाकर तीस से अधिक नर पिचाश दरिंदों ने बेरहमी से दरिंदगी की। जहां एक शर्मनाक और खौफनाक वारदात ने इंसानियत और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महज 13 साल की एक बच्ची के साथ ऐसी हैवानियत की गई, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. इस घिनौनी वारदात के सामने आने के बाद पूरे जिले में गुस्सा फूट पड़ा और लोग सड़कों पर उतर आए हैं. पुलिस प्रशासन, संगठित अपराधियों और अवैध होटलों के नेटवर्क को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं. मगर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उस मासूम को इंसाफ मिल पाएगा?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आपको बता दें 18 जून 2026 के दिन  जब इस खौफनाक कहानी की शुरुआत हुई. पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, 13 साल की पीड़ित बच्ची अपनी एक सहेली से मिलने श्रीविजयनगर गई थी. परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द घर लौट आएगी, लेकिन अचानक घरवालों से उसका संपर्क टूट गया. और वो लौटकर घर नहीं आई. उसे तलाश किया गया,  लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला. उसकी कोई खबर ना मिलने से घरवालों की चिंता बढ़ती गई और कुछ ही घंटों में यह मामला एक रहस्यमय गुमशुदगी में बदल गया.घरवाले पुलिस के पास पहुंचे. मदद की गुहार लगाई. तहरीर लेने के बाद पुलिस हरकत में आ गई. पुलिस जांच के मुताबिक, उसी रात बच्ची श्रीगंगानगर पहुंची थी और घर जाने के लिए एक ई-रिक्शा में बैठी. शैतान की एंट्री - आरोप है कि उसी दौरान रामबाबू नाम का एक ई-रिक्शा चालक उसे मिल गया.</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उसने बच्ची को बातों ही बातों में विश्वास में ले लिया और उसे घर छोड़ने का भरोसा दिया. लड़की उसके साथ ई रिक्शा में बैठ गई. उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में उसके साथ क्या होने वाला है. रामबाबू उसे घर पहुंचाने के बजाय एक होटल में ले गया. जहां उसने लड़की को होटल संचालक के हवाले कर दिया. बताया जा रहा है कि इसके बदले उसे अच्छे खासे पैसे मिले. अब वो मासूम बच्ची ऐसे जाल में फंस चुकी थी, जहां से निकलना उसके लिए नामुमकिन सा हो गया था.इस मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस बताती है कि जांच में सामने आया कि बच्ची को सबसे पहले 'होटल जॉय इन' ले जाया गया था. इसके बाद अगले कई दिनों तक उसे एक होटल से दूसरे होटल में ले जाया जाता रहा. शुरुआती जांच में तीन होटलों की जानकारी पुलिस को मिली थी, लेकिन बाद में बीरबल चौक के पास मौजूद 'ड्रीम' नाम के चौथे होटल का भी पता चला. पुलिस के अनुसार, एक बाद एक इन सभी होटलों में बच्ची को छिपाकर रखा गया था. और वहीं उसकी आबरू लूटी गई.</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिस्म का धंधा - आरोप है कि होटल मालिकों और मैनेजरों ने पांच दिनों के भीतर उस मासूम बच्ची को 30 से ज्यादा लोगों के सामने परोसा किया. आरोपों के मुताबिक, दिन के समय भी कई कई लोग उसके साथ रेप करते थे. कहा जाए तो उसके साथ लगातार गैंग रेप किया गया. दरिदों ने मौका मिलते ही उसके साथ दरिंदगी की. मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब दरिंदगी के दौरान वो बच्ची दर्द से तड़पती थी, तब उसे शांत करने और सुलाने के लिए जबरन उसे शराब पिलाई जाती थी. और फिर उसकी इज्जत को तार तार किया जाता था. बताया जा रहा है कि होटल मालिकों ने एक एक दिन में कई लोगों को बच्ची के साथ दरिंदगी करने की छूट दी थी.</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इस पूरी कहानी ने प्रदेश को ही नहीं देश को झकझोर दिया है.वहशीपन की ये कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाती. इस मामले में एक और सनसनीखेज आरोप तब सामने आया, जब जांच एजेंसियों को पता चला कि एक होटल मैनेजर ने उस बच्ची की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर भेजी थीं. इसी के बाद दरिंदगी का वो शर्मनाक खेल शुरू हुआ, जिसके चलते कई लोगों ने उस बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया. इसी तरह से कई अन्य लोग भी इस गुनाह की कड़ी से जुड़ते चले गए. ये वही लोग थे, जो बच्ची की आबरू का सौदा करने के लिए बारी-बारी से होटल पहुंचे थे. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुलिस का शिकंजा - पुलिस के अनुसार, बच्ची की उन्हीं तस्वीरों के जरिए कई अहम सुराग जांच करने वाली टीम के हाथ लगे.उधर, बच्ची के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस ने जांच शुरू की और 22 जून को 'होटल जॉय इन' से बच्ची को बरामद कर लिया गया. इसके बाद मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं. जांच आगे बढ़ी तो यह मामला कथित तौर पर संगठित अपराध और मानव तस्करी के एंगल तक पहुंच गया.पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गिरफ्तार किए गए लोगों में ई-रिक्शा चालक रामबाबू, होटल मालिक मयंक सैन, होटल मैनेजर हरदीप नाथ और सचिन सहित कई अन्य आरोपी शामिल हैं. इसके अलावा दीपक और तरुण नामक दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस का कहना है कि कुछ आरोपियों ने सीधे अपराध किया, जबकि कुछ ने इस गुनाह में सहयोग किया है। बुलडोजर एक्शन - होटलों पर चला बुलडोजर जिला प्रशासन ने उन होटलों को चिन्हित किया जहां इस वारदात को अंजाम दिया गया था और जो अवैध रूप से निर्मित थे। इनमें होटल जॉय इन , होटल सफायर और होटल ड्रीम लैंड शामिल हैं, जिन्हें पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सवाल सिर्फ एक नाबालिग बालिका के साथ दरिंदगी का नहीं है सवाल उस घिनौनी मानसिकता का है जो तेरह साल की एक मासूम बच्ची के अपरिपक्व और अविकसित शरीर को भूखे गिद्धों के झुंड की तरह नौंचने में पुलिस कानून सजा अदालत अथवा समाज और ईश्वर किसी का भी भय नहीं मानती है। क्या ईरिकशा वाले की करतूत से यह जाहिर नहीं होता है कि वह पहले भी इसी तरह मासूम लड़कियों को फंसा कर बहला फुसला कर इन होटल वालों के हाथों बेचता रहा होगा? एक शहर में होटल से होटल मासूम नाबालिग लड़की के जिस्म को दरिंदे नोचते रहे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> दरअसल पुलिस ऐसे धंधेबाजो से बंधी रकम माहवार वसूल कर इनके कारनामों से आंखें बंद कर लेती है इसी का नतीजा है कि इस तरह होटल वाले एक मासूम लडकी के जिस्म को भेड़ियों को परोसते रहे। ऐसे घृणित और समाज विरोधी अपराध के लिए सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 22:10:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, पचपेड़वा पुलिस की त्वरित कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </div>
<div>  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>पचपेड़वा थाना क्षेत्र में नाबालिग एवं मंदबुद्धि किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, थाना पचपेड़वा क्षेत्र की एक महिला ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग एवं मंदबुद्धि ननद के साथ गांव वीरपुर सेमरा निवासी राधेश्याम यादव उर्फ राजू ने दुष्कर्म किया है। शिकायत के आधार पर थाना पचपेड़वा में मुकदमा संख्या 95/2026 धारा 137(2)/64(2)K बीएनएस, 5K/6 पॉक्सो</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181505/accused-of-raping-a-minor-arrested-quick-action-by-pachpedwa"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0704.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>पचपेड़वा थाना क्षेत्र में नाबालिग एवं मंदबुद्धि किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, थाना पचपेड़वा क्षेत्र की एक महिला ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग एवं मंदबुद्धि ननद के साथ गांव वीरपुर सेमरा निवासी राधेश्याम यादव उर्फ राजू ने दुष्कर्म किया है। शिकायत के आधार पर थाना पचपेड़वा में मुकदमा संख्या 95/2026 धारा 137(2)/64(2)K बीएनएस, 5K/6 पॉक्सो एक्ट तथा 3(2)V एससी/एसटी एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक तथा क्षेत्राधिकारी तुलसीपुर के पर्यवेक्षण में थाना पचपेड़वा पुलिस टीम ने जांच और गिरफ्तारी अभियान तेज किया। प्रभारी निरीक्षक ओम प्रकाश चौहान के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी राधेश्याम यादव उर्फ राजू पुत्र राम समुझ निवासी ग्राम वीरपुर सेमरा, थाना पचपेड़वा को गिरफ्तार कर लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता को आवश्यक चिकित्सीय एवं विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा मामले की विवेचना नियमानुसार की जा रही है। आरोपी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:31:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन में अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर गोष्ठी आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> विकास खण्ड अंतर्गत ब्लाक सभागार में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम उन्मूलन विषयक चर्चा एवं गोष्ठी का आयोजन श्रम विभाग एवं मानव सेवा संस्थान सेवा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिसमें श्रमिको का बीओसीडब्लू कार्ड बनाने के लिए शिविर का भी आयोजन किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गोष्ठी में बाल श्रम के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक जनजागरूकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी जितेंद्र कुमार ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181083/seminar-organized-on-international-day-prohibition-of-child-labor-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781274565666.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> विकास खण्ड अंतर्गत ब्लाक सभागार में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम उन्मूलन विषयक चर्चा एवं गोष्ठी का आयोजन श्रम विभाग एवं मानव सेवा संस्थान सेवा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिसमें श्रमिको का बीओसीडब्लू कार्ड बनाने के लिए शिविर का भी आयोजन किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गोष्ठी में बाल श्रम के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक जनजागरूकता पर बल दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी जितेंद्र कुमार ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्थान विद्यालय में है, न कि कार्यस्थलों पर। बाल श्रम रोकने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आने की आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, श्रमिक पंजीकरण, श्रमिक हित लाभ योजनाओं एवं विभागीय सुविधाओं की जानकारी देते हुए पात्र लोगों से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। एडीओ पंचायत सदानंद वर्मा ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों, पंचायतों और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पर जोर दिया। मानव सेवा संस्थान सेवा, गोरखपुर के फील्ड एरिया कंसल्टेंट अरुण मद्धेशिया ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी बाल श्रम के प्रमुख कारण हैं। फील्ड एरिया कंसल्टेंट सन्दीप कुमार ने बाल श्रम को गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता भी आवश्यक है। </div><div style="text-align:justify;"> गोष्ठी में ग्राम पंचायत अधिकारी रविन्द्र जाटव, ईश्वर देव, केशभान यादव, राहुल शर्मा, जगदम्बा प्रसाद, पवन मोदनवाल, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, संतोष गुप्ता,मदद फाउंडेशन से फिल्ड सुपरवाइजर बृजलाल यादव सहित अन्य</div><div style="text-align:justify;">अधिकारियों, कर्मचारियों एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"><div class="hp" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="eqJbab cZD3Qb"><br /></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181083/seminar-organized-on-international-day-prohibition-of-child-labor-in</link>
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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 20:59:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल संरक्षण की आवश्यकता और वैश्विक प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिवस बच्चों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से समर्पित है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं क्योंकि वही भविष्य के नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार और नीति निर्माता बनते हैं। यदि बच्चों को सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षित और स्वस्थ वातावरण प्राप्त हो तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि वे शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी और उपेक्षा का सामना करते हैं</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180366/child-protection-needs-and-global-efforts"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/image.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस प्रत्येक वर्ष 1 जून को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिवस बच्चों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से समर्पित है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे होते हैं क्योंकि वही भविष्य के नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाकार और नीति निर्माता बनते हैं। यदि बच्चों को सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षित और स्वस्थ वातावरण प्राप्त हो तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यदि वे शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गरीबी और उपेक्षा का सामना करते हैं तो समाज का विकास भी प्रभावित होता है। इसी कारण बाल सुरक्षा केवल सामाजिक विषय नहीं बल्कि मानवीय और नैतिक दायित्व भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का इतिहास 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों से जुड़ा हुआ है। 1925 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में बच्चों के कल्याण पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों पर विशेष चर्चा हुई। बाद में 1949 में मास्को में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला लोकतांत्रिक संघ की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बच्चों के संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक विशेष दिवस मनाया जाना चाहिए। इसके बाद 1 जून 1950 को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस मनाया गया। उस समय द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण लाखों बच्चे अनाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विस्थापित और निर्धन हो चुके थे। युद्ध ने बच्चों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था और उनकी सुरक्षा के लिए वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यही कारण था कि इस दिवस को मानवीय संवेदना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक माना गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय के साथ इस दिवस का महत्व लगातार बढ़ता गया। संयुक्त राष्ट्र ने भी बच्चों के अधिकारों को वैश्विक स्तर पर महत्व दिया। 1954 में विश्व बाल दिवस की स्थापना की गई और 20 नवंबर 1959 को बाल अधिकारों की घोषणा स्वीकार की गई। इसके बाद 1989 में बाल अधिकारों पर सम्मेलन को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया। इस सम्मेलन में बच्चों के शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिव्यक्ति और विकास के अधिकारों को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई। आज विश्व के अधिकांश देश बाल अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी अनेक क्षेत्रों में बच्चों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाल संरक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष शिक्षा है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि आत्मविश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेक और व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। एक शिक्षित बच्चा अपने अधिकारों को समझता है और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने में सक्षम बनता है। फिर भी आज विश्व में करोड़ों बच्चे विद्यालय से दूर हैं। गरीबी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक असमानता और बाल श्रम इसके प्रमुख कारण हैं। अनेक बच्चे आर्थिक मजबूरी के कारण छोटी आयु में काम करने लगते हैं जिससे उनका बचपन छिन जाता है। बाल श्रम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें शोषण के चक्र में फँसा देता है। इसलिए सरकारों और सामाजिक संगठनों का यह दायित्व है कि वे प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुँचाएँ और बाल श्रम को समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठाएँ।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाल विवाह भी बाल अधिकारों के लिए एक गंभीर चुनौती है। अनेक समाजों में आज भी कम आयु में बच्चों विशेषकर बालिकाओं का विवाह कर दिया जाता है। इससे उनकी शिक्षा बाधित होती है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कम आयु में मातृत्व अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। साथ ही बाल विवाह लड़कियों की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को भी सीमित कर देता है। इस समस्या के समाधान के लिए कानूनी प्रतिबंधों के साथ सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है। जब तक समाज अपनी सोच में परिवर्तन नहीं लाएगा तब तक केवल कानून पर्याप्त सिद्ध नहीं होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान समय में बच्चों के सामने नई चुनौतियाँ भी उभर रही हैं। तकनीकी विकास ने जहाँ ज्ञान और संचार के नए अवसर दिए हैं वहीं अनेक जोखिम भी उत्पन्न किए हैं। इंटरनेट और सामाजिक माध्यमों के माध्यम से बच्चों का आभासी शोषण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर धमकी और अनुपयुक्त सामग्री तक पहुँच बढ़ी है। अनेक बच्चे मानसिक तनाव और अकेलेपन का अनुभव कर रहे हैं। इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी भावनाओं को समझना और सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करना आज की आवश्यकता है। केवल तकनीकी नियंत्रण पर्याप्त नहीं है बल्कि बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझाने की भी आवश्यकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का प्रश्न भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है। प्रतियोगिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारिवारिक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक दबाव और अकेलापन बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। यदि किसी बच्चे को प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग और समझ नहीं मिलती तो वह अवसाद और भय का शिकार हो सकता है। स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बच्चों को ऐसा वातावरण चाहिए जहाँ वे अपनी भावनाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकें। परिवार और विद्यालय को बच्चों के लिए केवल अनुशासन का केंद्र नहीं बल्कि विश्वास और सुरक्षा का स्थान बनना चाहिए। एक संवेदनशील समाज ही स्वस्थ और आत्मविश्वासी पीढ़ी का निर्माण कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक स्तर पर युद्ध और प्राकृतिक आपदाएँ बच्चों के जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में लाखों बच्चे विद्यालयों से वंचित हो जाते हैं और अनेक बच्चों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है। कुछ क्षेत्रों में बच्चों को सैनिक गतिविधियों में भी शामिल किया जाता है जो मानवता के लिए अत्यंत दुखद स्थिति है। प्राकृतिक आपदाएँ और महामारियाँ भी बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। ऐसे समय में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवीय सहायता अत्यंत आवश्यक हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ राहत कार्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बच्चों की सहायता करने का प्रयास करती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समाज में बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक बच्चों को सही दिशा दे सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभिभावक उन्हें प्रेम और सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं तथा सामाजिक संगठन जागरूकता फैलाकर सहायता पहुँचा सकते हैं। विद्यालयों में बाल अधिकारों पर चर्चा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निबंध प्रतियोगिताएँ और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं ताकि बच्चे अपने अधिकारों को समझ सकें। मीडिया भी बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि समाज का प्रत्येक वर्ग इस दिशा में सक्रिय हो जाए तो बच्चों के जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता इस बात की है कि बाल संरक्षण को केवल सरकारी योजना न माना जाए बल्कि सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जाए। प्रत्येक बच्चे को भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। किसी भी बच्चे को हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शोषण और उपेक्षा का सामना न करना पड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सुनिश्चित करना पूरे समाज का दायित्व है। बच्चों के सपनों की रक्षा करना ही भविष्य की रक्षा करना है। यदि हम आज बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देंगे तो आने वाला समाज अधिक शांतिपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपूर्ण और मानवीय होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस हमें यह संदेश देता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल एक दिन का विषय नहीं बल्कि निरंतर चलने वाला प्रयास है। यह दिवस हमें आत्मचिंतन करने और अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा देता है। प्रत्येक बच्चे में अपार संभावनाएँ छिपी होती हैं और उन संभावनाओं को विकसित करने के लिए प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और सुरक्षा आवश्यक है। जब समाज बच्चों के अधिकारों का सम्मान करना सीख जाएगा तब वास्तविक प्रगति संभव होगी। यही इस दिवस की सबसे बड़ी सार्थकता है और यही वह संदेश है जिसे पूरी मानवता को अपनाना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:21:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाल श्रम की व्यथा और कठोर श्रम करते हाथ मूल सुविधाओं से वंचित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल श्रमिकों के सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य अदृश्य हाथों की पीड़ा को भी सामने लाता है जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। भारत जैसे विकासशील देश में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहाँ श्रम के साथ-साथ बाल श्रम की समस्या भी एक गहरी सामाजिक विडंबना के रूप में उपस्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान और कानूनों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक उद्योगों, कारखानों, होटलों, ढाबों या अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों में कार्य कराना अपराध</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177665/the-pain-of-child-labor-and-hard-labor-deprived-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/international-labour-day_-_loom_solar_600x.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल श्रमिकों के सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन असंख्य अदृश्य हाथों की पीड़ा को भी सामने लाता है जो आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। भारत जैसे विकासशील देश में यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहाँ श्रम के साथ-साथ बाल श्रम की समस्या भी एक गहरी सामाजिक विडंबना के रूप में उपस्थित है।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान और कानूनों के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक उद्योगों, कारखानों, होटलों, ढाबों या अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों में कार्य कराना अपराध है। इसके बावजूद वास्तविकता यह है कि देश के छोटे-बड़े शहरों, कस्बों और गांवों में लाखों बच्चे आज भी श्रम के बोझ तले दबे हुए हैं। वे कभी चाय की दुकानों पर काम करते दिखते हैं, कभी पटाखा उद्योगों में, तो कभी कचरा बीनते या भीख मांगते हुए। यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि उनके बचपन, शिक्षा और भविष्य का भी हनन है।<br />बाल श्रम की जड़ें गहरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी, अशिक्षा और सामाजिक जागरूकता का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं। कई परिवारों में आर्थिक मजबूरी इतनी तीव्र होती है कि वे स्वयं अपने बच्चों को श्रम के दलदल में धकेल देते हैं। इसके अतिरिक्त अभिभावकों की असामयिक मृत्यु, बीमारी या परिवार में अधिक सदस्यों का होना भी बच्चों को समय से पहले जिम्मेदारियों के बोझ तले ला देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाल श्रमिकों का शोषण बहुआयामी होता है शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक। उन्हें वयस्क श्रमिकों की तुलना में बहुत कम पारिश्रमिक दिया जाता है, जिससे नियोजकों के लिए वे सस्ते और सुविधाजनक श्रम का स्रोत बन जाते हैं। यही कारण है कि बाल श्रम की प्रवृत्ति समाप्त होने के बजाय कई स्थानों पर बढ़ती दिखाई देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण कानून और योजनाएँ लागू की हैं, जैसे बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, तथा राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा पोषण, शिक्षा और बाल संरक्षण से जुड़ी अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और यूनिसेफ जैसे संगठन बाल श्रम उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के कन्वेंशन 138 और 182 विशेष रूप से बाल श्रम के उन्मूलन और खतरनाक कार्यों से बच्चों को मुक्त कराने पर केंद्रित हैं। फिर भी, समस्या का समाधान केवल कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्यवश, कई बार इन कानूनों का पालन कराने वाली एजेंसियाँ भ्रष्टाचार, लापरवाही और लालफीताशाही की शिकार हो जाती हैं। परिणामस्वरूप, नियोजक आसानी से बच निकलते हैं और बच्चे शोषण की आग में झोंक दिए जाते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बाल श्रम केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक प्रश्न भी है। जब तक समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ेगी, जब तक हम बच्चों को श्रम नहीं बल्कि शिक्षा और संस्कार का अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं होंगे, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मजदूर वर्ग की व्यापक स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिक आज भी न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षित कार्यस्थल जैसे मूल अधिकारों से वंचित हैं। प्रवासी मजदूरों की स्थिति, विशेषकर महामारी के समय, ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया कि श्रमिक वर्ग हमारे विकास का आधार होने के बावजूद सबसे अधिक उपेक्षित है। आज आवश्यकता इस बात की है कि बाल श्रम और श्रमिक शोषण के विरुद्ध एक समन्वित और सख्त नीति अपनाई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके लिए कानूनों का कठोर और पारदर्शी क्रियान्वयन,शिक्षा और पोषण योजनाओं का प्रभावी विस्तार, गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा, और समाज में जागरूकता का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। यदि हम सचमुच एक सशक्त और विकसित राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपने बच्चों को श्रम की बेड़ियों से मुक्त कर शिक्षा और अवसरों की मुख्यधारा में लाना होगा। अन्यथा, आज का यह बाल श्रमिक कल का कमजोर नागरिक बनेगा, और एक सुदृढ़ राष्ट्र का सपना अधूरा ही रह जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:08:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लखनऊ पुलिस ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी को दबोचा, तीन सहयोगी भी गिरफ्त में</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  राजधानी लखनऊ में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर लगाम कसने की मुहिम तेज करते हुए लखनऊ पुलिस ने एक कुख्यात अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर बाहर ले जाने और उसके साथ गलत हरकत करने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में कुल चार अभियुक्तों को हिरासत में लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। यह कार्रवाई गोशाईंगंज थाने की टीम ने की, जिससे इलाके में सुरक्षा का मनोबल बढ़ा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस आयुक्त लखनऊ  के अनुसार, गोशाईंगंज थाने में 5 अगस्त को एक नाबालिग लड़की के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173021/lucknow-police-arrested-the-accused-of-raping-a-minor-girl"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260308-wa0044.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ, </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> राजधानी लखनऊ में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर लगाम कसने की मुहिम तेज करते हुए लखनऊ पुलिस ने एक कुख्यात अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर बाहर ले जाने और उसके साथ गलत हरकत करने का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में कुल चार अभियुक्तों को हिरासत में लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। यह कार्रवाई गोशाईंगंज थाने की टीम ने की, जिससे इलाके में सुरक्षा का मनोबल बढ़ा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस आयुक्त लखनऊ  के अनुसार, गोशाईंगंज थाने में 5 अगस्त को एक नाबालिग लड़की के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपी अमन प्रजापति ने उनकी 15 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर बाहर ले जाकर शारीरिक शोषण किया। मामले की जांच में सामने आया कि अमन ने पीड़िता को 30 जून से 10 जुलाई 2025 तक कई बार बहाने बनाकर घर से बाहर निकाला और दुष्कृत्य किए। पीड़िता के बयान पर  (बलात्कार),  (धमकी) और POCSO एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गोशाईंगंज थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने अभियुक्त अमन प्रजापति पुत्र स्वर्ण प्रजापति निवासी ग्राम बेनीगंज जनपद बाराबंकी को 20 फरवरी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अमन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और बताया कि वह पीड़िता को 'प्यार' के नाम पर फंसाकर शोषण कर रहा था। पुलिस ने उसके कब्जे से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य बरामद किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा, मामले में तीन अन्य सहयोगी भी फंस चुके हैं। प्रथम सहयोगी के रूप में मोहम्मद उस्मान पुत्र मोहम्मद इकबाल निवासी मोहल्ला काजीपुरा गोशाईंगंज को 01 मार्च को गिरफ्तार किया गया। उस पर पीड़िता को अमन तक पहुंचाने और अपराध में सहायता करने का आरोप है। द्वितीय सहयोगी कैलाश पुत्र रामसहाय निवासी ग्राम दादरपुर गोशाईंगंज को 02 मार्च  को दबोचा गया, जो आरोपी अमन को आश्रय प्रदान करता था। तृतीय सहयोगी रामपाल जयसवाल पुत्र रामलखन निवासी ग्राम बेनीगंज को 03 मार्च को हिरासत में लिया गया। ये सभी अभियुक्त गोशाईंगंज थाने के अंतर्गत ही निवासी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, एक आरोपी- विवेक उर्फ बबलू पुत्र दादा राम निवासी ग्राम सरायनजाद गोशाईंगंज- अभी भी फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ  नोटिस जारी कर दिया है तथा उसे तलाशने के लिए मुखबिरों पर भरोसा जताया है। आयुक्त कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि "महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। इस तरह के अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह गिरफ्तारी लखनऊ पुलिस की सतर्कता का उदाहरण है, खासकर तब जब उत्तर प्रदेश में नाबालिगों के खिलाफ अपराधों की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। पीड़िता को उचित चिकित्सकीय सहायता और काउंसलिंग प्रदान की जा रही है, तथा मामला कोर्ट में मजबूत साक्ष्यों के साथ पेश किया जाएगा। पुलिस ने अपील की है कि ऐसी घटनाओं की सूचना तत्काल थाने या हेल्पलाइन 1090 पर दी जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:09:59 +0530</pubDate>
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