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                <title>सुरक्षा अभियान - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सुरक्षा अभियान RSS Feed</description>
                
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                <title>नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता भारत सुरक्षा विकास और विश्वास की नई विजयगाथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत ने लंबे समय तक जिस आंतरिक चुनौती का सामना किया वह नक्सलवाद के रूप में देश के अनेक हिस्सों में फैली रही। यह समस्या केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं थी बल्कि इसने सामाजिक आर्थिक और मानवीय जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया। दशकों तक आदिवासी क्षेत्रों में भय असुरक्षा और पिछड़ापन बना रहा। गांवों में विकास की रफ्तार थम गई और लोगों का भरोसा व्यवस्था से डगमगाने लगा। आज जब देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस परिवर्तन के पीछे की नीति संकल्प और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174668/india-moving-towards-the-end-of-naxalism-a-new-victory"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1926804-10.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत ने लंबे समय तक जिस आंतरिक चुनौती का सामना किया वह नक्सलवाद के रूप में देश के अनेक हिस्सों में फैली रही। यह समस्या केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं थी बल्कि इसने सामाजिक आर्थिक और मानवीय जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया। दशकों तक आदिवासी क्षेत्रों में भय असुरक्षा और पिछड़ापन बना रहा। गांवों में विकास की रफ्तार थम गई और लोगों का भरोसा व्यवस्था से डगमगाने लगा। आज जब देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस परिवर्तन के पीछे की नीति संकल्प और प्रयासों को समझा जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के नेतृत्व में बीते वर्षों में जो रणनीति अपनाई गई वह बहुआयामी रही। केवल सुरक्षा बलों की तैनाती तक सीमित न रहकर सरकार ने विकास और विश्वास दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया। यही कारण है कि जिन क्षेत्रों में कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी वहां आज स्कूल खुल रहे हैं सड़कें बन रही हैं और जीवन सामान्य हो रहा है। यह बदलाव अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे वर्षों की योजनाबद्ध मेहनत और स्पष्ट नीति रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नक्सलवाद की जड़ें अक्सर गरीबी और पिछड़ेपन से जोड़कर देखी जाती रही हैं। लेकिन वास्तविकता इससे अधिक जटिल रही है। कई ऐसे क्षेत्र भी थे जहां आर्थिक स्थिति कमजोर थी फिर भी वहां नक्सलवाद नहीं पनपा। इसका अर्थ यह है कि नक्सलवाद केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक वैचारिक और रणनीतिक चुनौती भी था। वामपंथी उग्रवाद ने आदिवासी समाज को अपने प्रभाव में लेकर उन्हें मुख्यधारा से दूर करने का प्रयास किया। स्कूलों को जलाना विकास कार्यों को रोकना और भय का वातावरण बनाना इस रणनीति का हिस्सा रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने इस सच्चाई को समझते हुए अपनी नीति तैयार की। सुरक्षा बलों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया। खुफिया तंत्र को मजबूत बनाया गया और स्थानीय पुलिस को सशक्त किया गया। इसके साथ ही आत्मसमर्पण की नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया जिससे बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौटे। यह केवल सैन्य सफलता नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्वास का भी उदाहरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्तर जैसे क्षेत्रों में जो परिवर्तन देखने को मिला वह इस नीति की सफलता का प्रमाण है। जहां कभी प्रशासन की पहुंच सीमित थी वहां आज सरकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं। राशन की दुकानों से लेकर स्वास्थ्य केंद्र तक लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं। आधार और राशन कार्ड के माध्यम से लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों का विश्वास बढ़ा है और वे हिंसा से दूर होकर विकास की राह पर चलने लगे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके विपरीत यदि पिछले दशकों की स्थिति पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना रहा। सड़कें नहीं बनीं स्कूल नहीं खुले और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचीं। इस शून्य का लाभ उठाकर उग्रवादी संगठनों ने अपनी पकड़ मजबूत की। लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि व्यवस्था उनके खिलाफ है और हथियार उठाना ही एकमात्र रास्ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी देखा गया कि उस समय नक्सलवाद के खिलाफ स्पष्ट और कठोर नीति का अभाव था। कई बार राजनीतिक इच्छाशक्ति कमजोर दिखाई दी और समस्या को टालने का प्रयास किया गया। इससे नक्सलवाद का विस्तार हुआ और वह कई राज्यों तक फैल गया। देश के एक बड़े भूभाग में इसका प्रभाव देखा गया जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में स्थिति बदल चुकी है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि जो लोग भटक गए हैं उन्हें वापस लाने का अवसर मिले। इस संतुलित दृष्टिकोण ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और हिंसा की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।</div>
<div style="text-align:justify;">सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब आदिवासी समाज स्वयं इस बदलाव का भागीदार बन रहा है। वे समझ चुके हैं कि विकास और शांति ही उनके भविष्य का आधार है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के कार्यक्रमों ने उन्हें नई दिशा दी है। युवा पीढ़ी अब हथियार नहीं बल्कि शिक्षा और रोजगार को अपना लक्ष्य बना रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नक्सलवाद के अंत की यह यात्रा केवल सरकार की उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे समाज की जीत है। इसमें सुरक्षा बलों का साहस प्रशासन की प्रतिबद्धता और आम नागरिकों का सहयोग सभी शामिल हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि सही नीति और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य किया जाए तो सबसे जटिल समस्याओं का समाधान भी संभव है।आज जब देश इस चुनौती से लगभग मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है तब यह आवश्यक है कि इस उपलब्धि को बनाए रखा जाए। विकास की गति को निरंतर बनाए रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी क्षेत्र फिर से पिछड़ापन और असुरक्षा का शिकार न बने। यही सच्चे अर्थों में नक्सलवाद के अंत की स्थायी गारंटी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत ने एक लंबी और कठिन लड़ाई में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। गृह मंत्रालय के नेतृत्व में अपनाई गई रणनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि सुरक्षा और विकास साथ साथ चल सकते हैं। यह केवल एक समस्या का समाधान नहीं बल्कि नए भारत की दिशा का संकेत है जहां हर नागरिक को समान अवसर और सुरक्षित जीवन का अधिकार प्राप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>नक्सलवाद की समाप्ति के बाद भी बहुत कुछ करना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">काफी पहले   केंद्र सरकार  ने  घोषणा की थी कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। मार्च 2026 की  अवधि से  एक दिन    पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बड़ी घोषणा की । नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने  कहा कि  देश में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है।  आदिवासी इलाकों में असली न्याय पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद केंद्र सरकार की सख्त नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार  नक्सल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174666/a-lot-needs-to-be-done-even-after-the-end"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/b40843a0-3641-11f0-8519-3b5a01ebe413.jpg.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">काफी पहले   केंद्र सरकार  ने  घोषणा की थी कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। मार्च 2026 की  अवधि से  एक दिन    पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बड़ी घोषणा की । नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने  कहा कि  देश में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है।  आदिवासी इलाकों में असली न्याय पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद केंद्र सरकार की सख्त नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तेजी से विकास करा  रही है। शिक्षा के लिए स्कूल और उपचार के लिए  वहां अस्पताल खुल रहे हैं। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें खत्म हो रही हैं और आदिवासियों की आवाज अब संसद तक पहुंची है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने समस्या को बढ़ने दिया। मोदी सरकार के फैसलों से हालात बदले हैं। उन्होंने कहा कि नक्सल विचारधारा आदिवासियों को गुमराह करती है और अब देश नक्सलवाद मुक्त बनने की ओर बढ़ रहा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने साफ कहा कि सरकार ने नक्सलियों से बातचीत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें खत्म कर विकास को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि जो हथियार उठाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों का पूरा केंद्रीय नेतृत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोलित ब्यूरो और कमेटी अब खत्म हो चुकी है। काफी मारे गए</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">  बहुतों </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> ने सरेंडर किया । कुछ अभी फरार हैं। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शाह ने कहा कि देश अब नक्सल मुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि कई बड़े ऑपरेशन जैसे बुढ़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थंडरस्टॉर्म और ब्लैक फॉरेस्ट चलाए गए।  इनमें भारी मात्रा में हथियार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईईडी फैक्ट्री और अनाज बरामद हुआ। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलंगाना और ओडिशा के बड़े इलाके अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुके हैं। सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की भूमिका को उन्होंने अहम बताया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय  गृहमंत्री ने  बताया  कि  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के समय देश संसाधनों की कमी और विकास की चुनौतियों से जूझ रहा था। कई दूर-दराज के इलाकों तक सरकार की पहुंच नहीं थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कों और सुविधाओं का अभाव था। ऐसे हालात में कुछ संगठनों ने इन कमजोरियों का फायदा उठाया। जहां राज्य की पकड़ कम थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हीं इलाकों को रेड कॉरिडोर बनाया गया। भोले-भाले आदिवासियों को भेदभाव और शोषण के नाम पर भड़काया गया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए गए। हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध भेदभाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास की कमी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका इस्तेमाल कर हिंसा को बढ़ावा दिया गया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शाह ने बताया कि केंद्र सरकार ने ऑल एजेंसी अप्रोच अपनाई</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें सीएपीएफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाया गया। फंडिंग और स्पोर्ट सिस्टम पर प्रहार किया गया। सरेंडर नीति लागू की गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक मदद और पुनर्वास दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर गांव तक अपनी पहुंच बनाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे नक्सलवाद कमजोर हुआ।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने  दावा किया   कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास हुआ। हजारों किलोमीटर सड़कें बनीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल टावर लगाए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एटीएम और डाकघर खोले गए। शिक्षा के लिए एकलव्य स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईटीआई और कौशल केंद्र बनाए गए। उन्होंने कहा कि विकास ही नक्सलवाद खत्म करने का सबसे बड़ा कारण बना।</span><br /><span lang="hi" xml:lang="hi"></span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शाह ने कहा कि नक्सलवाद गरीबी से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विचारधारा से पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती और बंदूक के जरिए सत्ता चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथ में हथियार दिए गए और विकास को रोका गया। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गृह मंत्री ने कहा कि सरकार आगे भी सख्ती और विकास दोनों पर काम जारी रखेगी। उन्होंने आदिवासी समाज को भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अब देश बंदूक से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान से चलेगा और यही असली जीत है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गृह मंत्री के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस "रेड कॉरिडोर" का विस्तार कभी पशुपति से तिरुपति तक माना जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब सिमटकर केवल कुछ जिलों तक रह गया है। 2014 में जहाँ 126 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं 2025-26 तक यह संख्या घटकर मात्र एक अंक में रह गई है। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कभी नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब वह सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है और वहां विकास की किरणें पहुँच रही हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार के इन दावों की पुष्टि जमीनी आंकड़ों से भी होती है। पिछले कुछ वर्षों में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 70  प्रतिशत  से अधिक की कमी आई है। सुरक्षा बलों की शहादत के आंकड़ों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। "ऑपरेशन कगार" और "ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट" जैसे लक्षित अभियानों के माध्यम से सुरक्षा बलों ने नक्सली नेतृत्व की कमर तोड़ दी है। 2025 के दौरान ही 300 से अधिक नक्सली मारे गए ।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इनमें कई शीर्ष कमांडर शामिल थे। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हजारों की संख्या में कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह समर्पण इस बात का प्रतीक है कि अब इस विचारधारा का आकर्षण खत्म हो रहा है।  इतना सब होने के बावजूद ,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इन सफलताओं के बावजूद नक्सलवाद की चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी चुनौती भौगोलिक विषमता है। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे घने वन क्षेत्र आज भी सुरक्षा बलों के लिए कठिन परीक्षा बने हुए हैं। नक्सलियों ने अपने पैर पीछे जरूर खींचे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे अक्सर घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों का लाभ उठाकर छापामार हमले करने की ताक में रहते हैं। इसके अलावा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">अर्बन नक्सलिज्म" या वैचारिक उग्रवाद एक नई चुनौती बनकर उभरा है। शहरों में बैठे कुछ बौद्धिक समूह नक्सलियों को वैचारिक और रसद सहायता प्रदान करते हैं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे इस समस्या की जड़ें गहरी बनी रहती हैं। जब तक इन वैचारिक और वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक उग्रवाद के पुनर्जीवित होने का खतरा बना रहेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य महत्वपूर्ण चुनौती स्थानीय आदिवासियों के बीच विश्वास की बहाली है। दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे होने के कारण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई क्षेत्रों में ग्रामीण अब भी सुरक्षा बलों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं। नक्सली अक्सर इस अविश्वास का फायदा उठाते हैं और ग्रामीणों को ढाल के रूप में उपयोग करते हैं। सुरक्षा बलों और स्थानीय जनता के बीच के इस "गवर्नेंस वैक्यूम" को भरना एक लंबी प्रक्रिया है। केवल सड़कों या मोबाइल टावरों का निर्माण पर्याप्त नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को यह महसूस कराना होगा कि सरकार उनकी संस्कृति और अधिकारों की रक्षक है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय की कमी भी कई बार बाधा बनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि नक्सली एक राज्य में दबाव बढ़ने पर दूसरे राज्य की सीमा में शरण ले लेते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विकास के मोर्चे पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार को "नियत नेल्लानार" (आपका अच्छा गांव) जैसी योजनाओं को और विस्तार देना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने पर केंद्रित हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण सबसे प्रभावी हथियार है। जब आदिवासियों के बच्चों के पास स्कूल होंगे और उनके युवाओं के पास रोजगार के अवसर होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नक्सलियों की भर्ती प्रक्रिया स्वतः ही बंद हो जाएगी। कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना नक्सली विचारधारा के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वन अधिकारों (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">फोरेस्ट राइट  एक्ट</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा  ताकि  आदिवासियों को अपनी जमीन पर मालिकाना हक का अहसास हो और वे उग्रवाद के बहकावे में न आएं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यता है कि </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन केवल बंदूकों के दम पर संभव नहीं है</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। वास्तव में ऐसा भी  नही हैं। कभी श्रीलंका में लिट्टे   बहुत मजबूत संगठन था।   उसके  लड़ाके बेमिसाल थे। श्रीलंका के साथ भारतवर्ष को भी  वह प्रभावित कर रहा था। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर भारतीय प्रधानमंत्री</span> <a title="राजीव गांधी" href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5_%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव गांधी</span></a> (1991), <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीलंकाई राष्ट्रपति</span> <a title="प्रेमदासा रनसिंघे (पृष्ठ मौजूद नहीं है)" href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%98%E0%A5%87?action=edit&amp;redlink=1"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेमदासा रनसिंघे</span></a> (1993) <span lang="hi" xml:lang="hi">सहित कई लोगों  की हत्या का आरोप है। श्रीलंका सरकार  से  इस संगठन को खत्म करने का  निर्णय  लिया। एक झटके में 2009 में लिट्टे  पूरी तरह खत्म हो  गया। न श्रीलंका   सरकार ने उसके लड़ाकों को फुसलाया।  न समर्पण के लिए कहा। बंदूक के बल पर लिट्टे को खत्म कर दिया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत  सरकार   तो नक्सलवाद को खत्म करने के लिए इन्हें समझाने  और आत्म समर्पण  के लिए  प्रेरित कर रही है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार को अपनी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति को और अधिक उदार और प्रभावी बनाना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भटक चुके युवा बिना किसी डर के मुख्यधारा में लौट सकें। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस सबके लिए तकनीकी और खुफिया तंत्र को भी मजबूत करना होगा। आधुनिक तकनीक का उपयोग करके नक्सली गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें समय रहते रोकना संभव है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि नक्सलवाद कई राज्यों में फैला हुआ है। इससे निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों की जरूरत होती है। मजबूत इच्छा शक्ति की भी  आवश्यक्ता  है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:25:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अप्रैल से स्कूली वाहनों पर सख्त चेकिंग अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन/प्रशासन) डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप विद्यालयों में संचालित वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली के तहत प्रत्येक विद्यालय में परिवहन सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य है,जो स्कूल वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेजों पंजीकरण प्रमाण पत्र, फिटनेस, परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र एवं चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की नियमित जांच सुनिश्चित करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही वाहन चालकों का पुलिस सत्यापन एवं वार्षिक स्वास्थ्य व नेत्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173431/strict-checking-campaign-on-school-vehicles-from-april"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/45.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> स्कूली बच्चों के सुरक्षित परिवहन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन/प्रशासन) डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप विद्यालयों में संचालित वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली के तहत प्रत्येक विद्यालय में परिवहन सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य है,जो स्कूल वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेजों पंजीकरण प्रमाण पत्र, फिटनेस, परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र एवं चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की नियमित जांच सुनिश्चित करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही वाहन चालकों का पुलिस सत्यापन एवं वार्षिक स्वास्थ्य व नेत्र परीक्षण कराना भी आवश्यक है। कार्यालय परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश लखनऊ के निर्देशों के क्रम में सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की होगी। स्कूली वाहनों का संचालन मोटर वाहन अधिनियम 1988, केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 तथा अन्य निर्धारित सुरक्षा मानकों के अंतर्गत ही किया जाना अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया है कि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा, जिसमें स्कूल बस, वैन और अन्य वाहनों की सुरक्षा मानकों के अनुसार जांच की जाएगी। यदि कोई वाहन निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसके पंजीकरण निलंबन के साथ-साथ संबंधित विद्यालय की मान्यता निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में जारी निर्देशों को चेतावनी एवं विधिक नोटिस के रूप में मानते हुए सभी विद्यालयों को सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही, दुर्घटना या आपराधिक घटना की स्थिति में विद्यालय प्रबंधक एवं प्रधानाचार्य की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:24:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको फूलपुर में रन फॉर सेफ्टी’ एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर इकाई में राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह (6 मार्च से 12 मार्च 2026) के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस सप्ताह का शुभारंभ 06 मार्च 2026 को इकाई प्रमुख द्वारा सुरक्षा ध्वज फहराकर तथा कर्मचारियों को सुरक्षा शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सुरक्षित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173019/organization-of-run-for-safety-and-painting-competition-in-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001642891.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर इकाई में राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह (6 मार्च से 12 मार्च 2026) के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस सप्ताह का शुभारंभ 06 मार्च 2026 को इकाई प्रमुख द्वारा सुरक्षा ध्वज फहराकर तथा कर्मचारियों को सुरक्षा शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सुरक्षित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के निवासियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारियों, कर्मचारियों, महिलाओं तथा युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सुरक्षा का संदेश दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1001642892.jpg" alt="इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के निवासियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना" width="883" height="587"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके साथ ही सुरक्षा सप्ताह के अवसर पर टाउनशिप में बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय सुरक्षा एवं सुरक्षित जीवन से संबंधित था, जिसमें बच्चों ने रंगों के माध्यम से सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी में भी सुरक्षा के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के दौरान कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों के लिए आगे भी विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि कार्यस्थल और दैनिक जीवन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 20:59:34 +0530</pubDate>
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