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                <title>Social Awareness - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Social Awareness RSS Feed</description>
                
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                <title>अब यह तस्वीर बदलनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नसमय बदला, तकनीक बदली, जीवन-शैली बदली, बाजार बदला और फैशन भी बदल गया। महिलाओं को उपभोक्तावादी संस्कृति ने विज्ञापनों और प्रदर्शन की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने के नए-नए तरीके खोज लिए। किंतु दुखद प्रश्न यह है कि क्या समाज की मूलभूत सोच बदली? क्या बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत हो गई? क्या दहेज प्रथा समाप्त हो गई? क्या स्त्री उत्पीड़न इतिहास बन गया?</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से इन प्रश्नों का उत्तर आज भी नकारात्मक है। अनेक समस्याएँ आज भी यथावत बनी हुई हैं, बल्कि कई मामलों में उन्होंने और अधिक विकराल रूप धारण कर लिया है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180674/now-this-picture-should-be-changed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नसमय बदला, तकनीक बदली, जीवन-शैली बदली, बाजार बदला और फैशन भी बदल गया। महिलाओं को उपभोक्तावादी संस्कृति ने विज्ञापनों और प्रदर्शन की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने के नए-नए तरीके खोज लिए। किंतु दुखद प्रश्न यह है कि क्या समाज की मूलभूत सोच बदली? क्या बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत हो गई? क्या दहेज प्रथा समाप्त हो गई? क्या स्त्री उत्पीड़न इतिहास बन गया?</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से इन प्रश्नों का उत्तर आज भी नकारात्मक है। अनेक समस्याएँ आज भी यथावत बनी हुई हैं, बल्कि कई मामलों में उन्होंने और अधिक विकराल रूप धारण कर लिया है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में महिलाओं की स्थिति अभी भी अपेक्षित सम्मान और अवसरों से काफी दूर दिखाई देती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में सुधार तो हुआ है, किंतु वह इतना व्यापक नहीं है कि समाज को संतोष हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे बुजुर्ग कहा करते थे कि शिक्षा का प्रसार होगा तो समाज की कुरीतियाँ स्वतः समाप्त हो जाएँगी। स्त्रियाँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेंगी और बेटी को बोझ नहीं, अवसर माना जाएगा। कुछ क्षेत्रों में प्रगति अवश्य हुई है, किंतु धरातल पर तस्वीर अभी भी अधूरी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण  के अनुसार देश में 10 वर्ष या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर लगभग 46.4 प्रतिशत तक पहुँचा है, जो पहले 41 प्रतिशत था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुधार उत्साहजनक है, किंतु इसका अर्थ यह भी है कि आधी से अधिक महिलाएँ अभी भी दस वर्ष की बुनियादी शिक्षा से वंचित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय छोड़ने वाली बालिकाओं की संख्या आज भी चिंता का विषय बनी हुई है।  शिक्षा के क्षेत्र में असमानता का एक कारण बाल विवाह, गरीबी, सामाजिक रूढ़ियाँ तथा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी हैं। अनेक परिवार आज भी पुत्र की शिक्षा को निवेश और पुत्री की शिक्षा को व्यय मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही सोच आगे चलकर दहेज जैसी कुप्रथा को जन्म देती और इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि शिक्षा और आधुनिकता के दावों के बीच दहेज का दानव आज भी जीवित है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में दहेज निषेध अधिनियम के अंतर्गत 15,489 मामले दर्ज किए गए तथा दहेज से संबंधित घटनाओं में 6,156 महिलाओं की मृत्यु हुई। अर्थात प्रतिदिन लगभग 17 महिलाओं ने दहेज की कीमत अपने जीवन से चुकाई। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की व्यापक तस्वीर भी चिंता उत्पन्न करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2023 में देशभर में महिलाओं के विरुद्ध लगभग 4.48 लाख अपराध दर्ज किए गए। इनमें सबसे बड़ी संख्या पति अथवा रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामलों की रही, जो कुल अपराधों का लगभग 30 प्रतिशत है। यह स्थिति केवल आँकड़ों की कहानी नहीं है; यह उन लाखों बेटियों, बहनों और माताओं की पीड़ा का दस्तावेज है जो आज भी भेदभाव, हिंसा और असमानता का सामना कर रही हैं। समाज सुधारिका सावित्रीबाई फुले ने कहा था यदि तुम शिक्षित हो जाओगे तो तुम्हें अपने अधिकारों का ज्ञान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं डॉ. भीमराव आंबेडकर का प्रसिद्ध कथन है कि किसी समाज की प्रगति का आकलन उसकी महिलाओं की प्रगति से किया जाना चाहिए। महात्मा गांधी ने भी कहा था यदि आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता है, किंतु यदि आप एक स्त्री को शिक्षित करते हैं तो पूरा परिवार शिक्षित होता है। इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद का मानना था कि जिस राष्ट्र ने अपनी स्त्रियों का सम्मान करना नहीं सीखा, वह कभी महान नहीं बन सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है; आवश्यक यह है कि बालिका शिक्षा को सामाजिक सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और समान अवसरों से जोड़ा जाए। जब तक बेटी को परिवार की उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा, जब तक विवाह को आर्थिक लेन-देन का माध्यम समझा जाएगा, तब तक दहेज की मानसिकता समाप्त नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि एक ओर हम महिला सशक्तिकरण के नारे लगाते हैं, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाते हैं, महिलाओं की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं, दूसरी ओर कन्या के जन्म पर चिंता और विवाह के समय दहेज की चर्चा अभी भी अनेक घरों में सामान्य बात मानी जाती है। यह दोहरा सामाजिक चरित्र हमारी सबसे बड़ी चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता केवल कानूनों की नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की है। विद्यालयों में लैंगिक समानता के संस्कार, परिवारों में बेटियों के प्रति समान व्यवहार, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, दहेज लेने-देने वालों का सामाजिक बहिष्कार तथा पंचायत स्तर तक जनजागरण अभियान ही वास्तविक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यदि हम सचमुच विकसित भारत का स्वप्न देखते हैं तो हमें यह स्वीकार करना होगा कि बालिका शिक्षा, स्त्री सम्मान और दहेज उन्मूलन केवल महिला मुद्दे नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रश्न हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस दिन हर बेटी निर्भय होकर शिक्षा प्राप्त करेगी, अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकेगी और विवाह दहेज नहीं बल्कि समानता, सम्मान और प्रेम पर आधारित होगा, उसी दिन हम सच्चे अर्थों में आधुनिक, प्रगतिशील और सभ्य समाज कहलाने के अधिकारी होंगे। अब समय की आवश्यकता यह है  कि हम केवल परिवर्तन की प्रतीक्षा न करें, बल्कि स्वयं परिवर्तन बनें। क्योंकि बेटी का सम्मान ही समाज का सम्मान है, और स्त्री की प्रगति ही राष्ट्र की वास्तविक प्रगति है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:49:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यह बर्बरता भरी जहरीली मानसिकता कहां से जन्म लेती है? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180375/where-does-this-barbaric-poisonous-mentality-originate-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/6a19794db4168-tension-in-the-area-following-the-murder-of-17-year-old-surya-chauhan-photo-itg-293224395-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक बेहद सनसनीखेज और कलेजा कँपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ खोड़ा थाना क्षेत्र में बकरीद के दिन एक 17 वर्षीय हिंदू किशोर, सूर्या चौहान की उसके ही पूर्व परिचित मुस्लिम दोस्तों ने बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले कट्टरपंथी हमलावरों ने पीड़ित से पूछा, “क्या तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि यह कहते ही उन्होंने सूर्या पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान तड़प-तड़प कर इस हिंदू लड़के ने दम तोड़ दिया। पुलिस की प्राथमिकी इस पूरी खौफनाक साजिश की गवाही दे रही है। पुलिस ने रविवार के तड़के मुख्य आरोपी असद को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है इस से पहले 3 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया और 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें मृतक सूर्या चौहान मूल रूप से एटा का रहने वाला था। वह नवनीत विहार, खोड़ा में अपनी माँ, बड़े भाई यश चौहान और छोटी बहन के साथ रहता था। उसके पिता कौशलेंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। सूर्या 11वीं कक्षा का छात्र था। जानकारी के मुताबिक, करीब 8 महीने पहले सूर्या का पड़ोस में रहने वाले असद नाम के युवक से किसी बात पर मामूली विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए असद ने बकरीद के पवित्र दिन को चुना। 28 मई की दोपहर को असद ने सूर्या को फोन किया। उसने सूर्या को बकरीद की पार्टी के बहाने मिलने के लिए चौधरी स्कूल के पास वाली गली नंबर 2 में बुलाया। सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ असद से मिलने पहुँचा था। विक्की और आयुष ने आँखों देखा हाल बताते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। विक्की ने बताया कि जैसे ही वे गली में पहुँचे, वहाँ पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक समेत 5 से 6 मुस्लिम युवक हथियारों के साथ घात लगाकर बैठे थे बताया जा रहा है कि आते ही उन्होंने सूर्या को चारों तरफ से दबोच लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक और हिंसक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या कभी बकरा हलाल होते देखा है? चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपितों ने चिल्लाते हुए कहा कि आज बकरीद है और आज कुर्बानी इस हिंदू लड़के की देंगे। यह कहते ही सभी आरोपितों ने सूर्या पर बड़े चाकुओं से हमला बोल दिया। उन्होंने सूर्या के पेट, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ कई वार किए। हमला इतना बर्बर था कि चाकुओं की गोदने की वजह से सूर्या की आंतें तक बाहर आ गईं।मौके पर चीख-पुकार और शोर मच गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोर सुनकर पास ही मौजूद सूर्या का भाई यश चौहान और उसकी माँ दौड़ते हुए घटना स्थल की तरफ भागे। परिजनों को अपनी तरफ आता देख सभी मुस्लिम हमलावर खून से लथपथ सूर्या को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गएपरिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सूर्या को नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल लेकर पहुँचे। वहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद अगले दिन यानी 29 मई को दोपहर करीब 12 बजे सूर्या ने दम तोड़ दिया। सूर्या की मौत की खबर जैसे ही खोड़ा इलाके में फैली, वहाँ भारी रोष और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार अपने बेटे को याद कर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। खोड़ा नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी और विभिन्न हिंदू संगठनों के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए मृतक के भाई यश चौहान द्वारा दी गई तहरीर जानलेवा हमला कर हत्या करने के प्रयास के संबंध में दर्ज कराई गई थी प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 28 मई को दोपहर करीब 3:30 बजे शिकायतकर्ता का भाई सूर्या अपने दोस्त आयुष (पुत्र मनोज भारती, निवासी नवनीत विहार, खोड़ा) के साथ जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तभी खोड़ा की शर्मा डेरी वाली गली में लोकप्रिय विहार का रहने वाला अशद (पुत्र नवाब) मिला।अशद ने अचानक सूर्या के साथ गाली-गलौज करते हुए झगड़ा शुरू कर दिया और फिर जान से मारने की नीयत से उसके पेट में चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में सूर्या गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना स्थल पर मौजूद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में इस हत्या को लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन से माँग की है कि सभी फरार आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। हिंदू समाज का कहना है कि यह केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज की सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। विभिन्न संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य आरोपित असद समेत सभी दोषियों के घरों पर तुरंत बुलडोजर नहीं चलाया गया और उन्हें सख्त सजा नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रण में बता रही है और मुख्य आरोपित की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि यूपी के गाजियाबाद और इस से सटे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आस-पास के क्षेत्रों में हत्या के कुछ हालिया मामलों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस जांच और आधिकारिक रिपोर्टों में इन घटनाओं को सुनियोजित या समुदाय-विशिष्ट घृणा  के बजाय मुख्य रूप से आकस्मिक विवादों, पुरानी दुश्मनी या आपसी रंजिश का परिणाम बताया गया है।आपको दो माह पहले जेजे कालोनी उत्तम नगर की नृशंसता भरी वारदात याद होगी यहां हिन्दू त्योहार होली के दिन रंग-बिरंगे पानी के छींटे पड़ने और गुब्बारा लगने को लेकर दो समुदाय से जुड़े परिवारों के बीच विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना में 26 वर्षीय तरुण कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी दिन यानि होली के दिन ही सिगरेट के विवाद में सूरज नामक 26 वर्षीय हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में सादिक नामक आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई की। और अब दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बकरीद के दिन एक 16 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की उसके ही परिचित दोस्त अशद ने साथियों के साथ मिलकर चाकू गोदकर हत्या कर दी गई है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यकीनन मौजूदा वारदात नाबालिग में लड़के सूर्या की बकरीद के दिन जिस तरह आतातायी हमलावरों ने हत्या की है वह अराजक व कम्युनल अपराधियों के बढ़ते हौसले का सबूत है घटना पर दुख जताते हुए और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए मृतक की मां ने कहा, "मैं घर पर नहीं थी, ड्यूटी पर थी। किसी ने मुझे फोन करके बताया कि मेरे बेटे को चाकू मार दिया गया है। जब मैं आई, तो मैंने शाम 7 बजे के करीब अपने बेटे का चेहरा देखा।  मुझे इंसाफ़ चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल पहुंचने के बाद जो कुछ देखा, उसे याद करते हुए मृतक की मौसी सुनीता ने कहा, "मैं सबसे पहले अस्पताल गई थी। मैंने उन्हें वहां देखा। वे यह साबित करना चाहते थे कि पहले बकरे की कुर्बानी दी और अब वे इंसान की कुर्बानी देंगे। बकरीद के दिन मेरे बच्चे को धोखे से घर से बुलाया गया। फिर उससे पूछा गया कि बकरा कैसे काटा जाता है। हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता? हमारे बच्चों ने कभी खून-खराबा नहीं देखा। वे क्या कहते? यही कहते कि उन्होंने कभी नहीं देखा। फिर उसके पेट में चाकू घोंप दिया गया और उसकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल यह है कि इस तरह की दरिंदगी और बर्बरता की सोच को कौन उकसा रहा है? बकरीद से दो दिन पहले ही गाजियाबाद से सटे हापुड़ जनपद के पिलखुवा में एक शनिदेव प्रतिमा को एक समुदाय विशेष के एक जेहादी ने तोड़ दिया बाद में सीसीटीवी कैमरे के जरिए मिले सबूत से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी मनमानी घृणा और विद्वेष की बातें बहुलता से वायरल हो रहीं हैं यह एक स्वस्थ समाज की संरचना को तोड़ रहा है और परस्पर जहरीली सोच तैयार कर रहा है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए और इस जहर की फसल को बीजनाश करनी चाहिए ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बौद्धिक,आर्थिक प्रगति को छिन्न-भिन्न करती रूढ़िवादिता और अंधविश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">धार्मिक रूढ़िवादिता,कट्टरपंथी धर्मांधता हमारी प्रगति के बड़े बाधको में से एक है। यह हमारी राहों के कंटक और रोड़े साबित हुए हैं।  उनसे हमें हर हाल में छुटकारा पाना होगा। बुनियादी शिक्षा के प्रचार प्रसार से इसके अवरोधों को जनमानस के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए ।जो विषय वस्तु आजाद विचारों मान्यताओं को बर्दाश्त नहीं करती उन्हें समाप्त हो जाना चाहिए, ऐसी अन्य और मानवीय कमजोरियां हैं, जिन पर हमें विजय प्राप्त करनी है। इस कार्य के लिए सभी समुदायों के क्रांतिकारी उत्साही नौजवानों की आवश्यकता है। यह बात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह ने अपने संगठन नौजवान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180139/conservatism-and-superstition-disrupting-intellectual-and-economic-progress"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/410.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">धार्मिक रूढ़िवादिता,कट्टरपंथी धर्मांधता हमारी प्रगति के बड़े बाधको में से एक है। यह हमारी राहों के कंटक और रोड़े साबित हुए हैं।  उनसे हमें हर हाल में छुटकारा पाना होगा। बुनियादी शिक्षा के प्रचार प्रसार से इसके अवरोधों को जनमानस के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए ।जो विषय वस्तु आजाद विचारों मान्यताओं को बर्दाश्त नहीं करती उन्हें समाप्त हो जाना चाहिए, ऐसी अन्य और मानवीय कमजोरियां हैं, जिन पर हमें विजय प्राप्त करनी है। इस कार्य के लिए सभी समुदायों के क्रांतिकारी उत्साही नौजवानों की आवश्यकता है। यह बात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह ने अपने संगठन नौजवान भारत सभा के लाहौर में प्रकाशित घोषणा पत्र में लिखी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">शहीद भगत सिंह ने अपने जीवन का बलिदान कर भारत को आजादी दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी, पर आजादी के बाद भी भारत का जनमानस उन्हीं अंधविश्वास धर्मांधता तथा रूढ़िवाद पर फंसा हुआ है।और अभी भी इस युग में अंधविश्वास का बोलबाला दिखाई देता है। बिल्ली रास्ता काट दे तो यह समझना कि राह में दुर्घटना होने की संभावना हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">घर से निकलते समय कोई छींक दे तो यह समझना कि होने वाला काम बिगड़ जाएगा,और घर में कौवे के बोलने से यह अर्थ निकाला जाए कि घर में मेहमान आने वाले हैं। छोटी चिड़िया यदि मिट्टी की धूल से खेल रही हो तो यह समझा जाए की घनघोर बारिश होने वाली है, आदि इत्यादि ऐसी कई धारणाएं हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक तथा सामाजिक प्रमाण, तर्क या आधार मौजूद नहीं है। फिर भी बड़ी संख्या में लोग इन बातों पर विश्वास करके अपनी नियति तय करने में जुट जाते हैं, अपने विवेक का प्रयोग किए बिना ही इन बातों पर विश्वास कर लेना ही अंधविश्वास माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोग तेरा के अंक को अशुभ मानते हैं, तो कई देश किस अंग को शुभ भी मानते हैं। मृत्यु के बाद भी अनेक तरह के अंधविश्वास जी एवं आडंबर संयुक्त कर्मकांड किए जाते हैं। एवं इन कर्मकांड को नहीं किए जाने पर मनुष्य की आत्मा भूत बनकर इर्द गिर्द मंडराती है। और इस तरह के भूत मनुष्य जाति को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं, ऐसी मान्यताएं अंधविश्वास के साक्षात प्रमाण हैं। अधिकतर भारतीय ग्रामीण अभी भी यह मानते हैं कि पृथ्वी शेषनाग पर टिकी हुई है और भूकंप आने पर वह इस बात का दावा करते हैं कि शेषनाग नाराजगी कारण पृथ्वी हिलने लगी है,और भी पूजा पाठ करने में लग जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र ग्रहण तथा सूर्य ग्रहण के समय भी ग्रामीण क्षेत्र में लोगों द्वारा ऐसे ही कयास लगाए जाते हैं, और फिर ग्रहों की पूजा की जाती है। पूजा करना बहुत अच्छी बात है,ईश्वर में आस्था होनी चाहिए यह एक तरह की एकाग्रता तथा अदृश्य शक्ति के प्रति आप का समर्पण भाव दिखाती है। ईश्वर से लगाओ तथा ईश्वरीय शक्ति के आगे समर्पण एक स्तुत्य के कार्य है। पर इसके पीछे अंधविश्वास को पुष्पित पल्लवित करना खतरनाक भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रह के चक्कर को दूर करने के लिए किसी विशेष जाति अथवा पत्थर की अंगूठी पहनना विशेष मंत्र वाला ताबीज पहनना जादू टोना तथा टोटका करवाना आदि अंधविश्वास के बड़े उदाहरण हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">और इन सब अंधविश्वास के चक्कर में अनेक लोग धोखाधड़ी तथा शोषण के शिकार होते देखे गए हैं। अंधविश्वास धर्मांधता एक सामाजिक बुराई की तरह दिखाई देती है, जो निश्चित तौर पर देश के विकास के लिए बड़ी बाधा बन जाती है। संत कबीर दास ने बड़ी बेबाकी से इस अंधविश्वास पर अपनी कविता के माध्यम से गहरा कटाक्ष किया है, अरिहरन की चोरी करै, करे सुई का दान, ऊंचा चढ़ी के देखता,केतिक दूर विमान।</p>
<p style="text-align:justify;">दोहे का अर्थ है, मानव कुमार्ग के पथ पर चलकर कमाए गए अनैतिक धन का बहुत छोटा सा भाग दान कर आकाश की ओर देखता है कि उसको स्वर्ग ले जाने वाला विमान कितनी दूर है। अज्ञानी मानव का यह सोचना एक बड़े अंधविश्वास को दर्शाता है। किसी भी गरीब स्त्री की जमीन जायजाद को हड़पने के लिए जमीदारों या मुखिया द्वारा गांव में उसे डायन घोषित कर देना या ईश्वर को खुश करने के लिए मनुष्य की नरबलि दे देना या पशुओं की बलि देना एक बड़ा अंधविश्वास माना जाता है। इन सब अंधविश्वास से समाज में विसंगति फैलती है एवं जो साक्षरता तथा मानवता के लिए बड़े खतरे और विकास के लिए अवरोध पैदा करने के तथ्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर इनको सजा देकर समाज में अंधविश्वास के खिलाफ सरकार को एक स्वस्थ संदेश देने की आवश्यकता है। समाचार पत्र, टीवी चैनल, इंटरनेट इन सब में राशिफल, वास्तु शास्त्र हाथ में पहनने वाले पत्थरो के बारे में जोर शोर से प्रचार प्रसार किया जाता है, जबकि इन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इनके चलते बड़े-बड़े जालसाज तथा ठग लोगों से पैसा तथा सोने चांदी की ठगी करने से नहीं चूकते। यह अंधविश्वास यद्यपि सिर्फ भारत में ही नहीं है बल्कि ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया कनाडा अमेरिका तथा साउथ अफ्रीका में भी इसी बड़े पैमाने पर व्याप्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि अशिक्षित मनुष्य अंधविश्वासों को मानता है तो यह बात समझ में आती है कि वह वास्तविकता से अशिक्षा के कारण अनभिज्ञ है, एवं इनके परिणामों के बारे में नहीं जानता है। किंतु यह विडंबना तथा अफसोस की बात है कि इस वैज्ञानिक युग में उच्च शिक्षित लोग अनेक प्रकार के अंधविश्वासों से घिरे हुए हैं। शिक्षा अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर विवेकपूर्ण सोचने की शक्ति प्रदान करती है, इसके बाद ही मनुष्य विज्ञान तथा तर्क के आधार पर इसको परख कर किसी बात को मान्यता देता है। अतः अंधविश्वास धर्मांधता के खिलाफ शिक्षा जगत तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में इस विषय को शामिल कर अशिक्षित तथा शिक्षित दोनों को अंधविश्वास के प्रति सचेत कर इसके दुष्परिणामों के बारे में अच्छे से समझा देना चाहिए तभी अंधविश्वास समाज से दूर हो पाएगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:33:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रजातंत्र, वैचारिक स्वतंत्रता ही उसकी आत्मा और वास्तविक स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">प्रजातंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि नागरिकों और समाज की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का जीवंत मंच है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेना या अर्थव्यवस्था से पहले उसके विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना में निहित होती है। जब नागरिक बिना भय के सोच सकते हैं, बोल सकते हैं और अपने विचार साझा कर सकते हैं, तभी एक सशक्त, प्रगतिशील और जीवंत लोकतंत्र का निर्माण होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर देश में ऐसे चिंतनशील व्यक्तियों और समूहों का होना आवश्यक है, जो राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के सिद्धांतों को नई ऊर्जा प्रदान करें। संस्कृति, संस्कार और वैचारिक परिपक्वता के बिना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178223/democracys-ideological-freedom-is-its-soul-and-true-form"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01633.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रजातंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि नागरिकों और समाज की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का जीवंत मंच है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेना या अर्थव्यवस्था से पहले उसके विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना में निहित होती है। जब नागरिक बिना भय के सोच सकते हैं, बोल सकते हैं और अपने विचार साझा कर सकते हैं, तभी एक सशक्त, प्रगतिशील और जीवंत लोकतंत्र का निर्माण होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर देश में ऐसे चिंतनशील व्यक्तियों और समूहों का होना आवश्यक है, जो राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के सिद्धांतों को नई ऊर्जा प्रदान करें। संस्कृति, संस्कार और वैचारिक परिपक्वता के बिना कोई भी राष्ट्र वैश्विक मंच पर स्थायी प्रगति नहीं कर सकता। विचार केवल शब्द नहीं होते, वे समाज की दिशा और दशा तय करने वाली शक्तियाँ होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यक्तिगत वैचारिक अभिव्यक्ति भारत जैसे गणतांत्रिक देश की मूल आत्मा है। विचार और सिद्धांत मनुष्य की अंतःप्रज्ञा का प्रतिबिंब होते हैं। यदि इन विचारों के प्रवाह को रोका जाए, तो यह केवल अभिव्यक्ति का दमन नहीं, बल्कि व्यक्ति की अंतरात्मा को आहत करना होता है। इतिहास साक्षी है कि जब भी विचारों को दबाने का प्रयास हुआ, उन्होंने और अधिक तीव्र होकर समाज में परिवर्तन की लहर पैदा की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राचीन यूनान के महान दार्शनिक सुकरात इसका सजीव उदाहरण हैं। साधारण रूप-रंग के बावजूद उनके विचारों में अद्भुत मौलिकता और जनजागरण की शक्ति थी। राजसत्ता ने उनके विचारों को खतरा मानकर उन्हें मृत्युदंड दे दिया, परंतु विष का प्याला पीने के बाद भी उनके विचार अमर हो गए। आज भी उनकी शिक्षाएं मानवता को दिशा प्रदान करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार अब्राहम लिंकन ने दास प्रथा के विरुद्ध जो विचार प्रस्तुत किए, वे उस समय अत्यंत क्रांतिकारी थे। उन्होंने कहा कि दास भी मनुष्य हैं और उन्हें समान अधिकार मिलना चाहिए। उनके इन विचारों ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया। यद्यपि उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी, पर उनके विचारों ने दास प्रथा के अंत की नींव रखी और मानवाधिकारों की नई परिभाषा गढ़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद के शब्द हम जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके अनुसार विचार ही मनुष्य का निर्माण करते हैं, वही उसे महान या दुष्ट बनाते हैं। व्यक्ति का अस्तित्व उसके विचारों से ही परिभाषित होता है। भौतिक शरीर भले ही नष्ट हो जाए, पर विचारों की शक्ति और प्रभाव कालातीत होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के डिजिटल युग में यह विषय और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया, सूचना प्रौद्योगिकी और वैश्विक संवाद के माध्यमों ने विचारों के प्रसार को तीव्र और व्यापक बना दिया है। एक व्यक्ति का विचार अब कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुँच सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि विचार अब केवल व्यक्तिगत नहीं रहते, वे जनांदोलन का रूप धारण कर सकते हैं।.इतिहास में फ्रांसीसी क्रांति इसका सशक्त उदाहरण है, जहाँ जनमानस में जागृत विचारों ने राजसत्ता की जड़ों को हिला दिया। इसी प्रकार भारत का स्वतंत्रता संग्राम भी विचारों और सिद्धांतों की शक्ति का परिणाम था, जहाँ लाखों लोगों ने एक साझा विचारधारा के तहत संघर्ष किया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि, विश्व के कुछ देशों में आज भी विचारों की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। अभिव्यक्ति के माध्यमों को नियंत्रित कर वैचारिक प्रवाह को सीमित करने का प्रयास किया जाता है। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। विचारों को कैद नहीं किया जा सकता वे स्वभावतः स्वतंत्र, गतिशील और अजेय होते हैं।यह शाश्वत सत्य है कि व्यक्ति को दबाया जा सकता है, पर विचारों को नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">विचार एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचते हुए और अधिक सशक्त होते जाते हैं। जब एक विचार जनमानस में उतर जाता है, तो वह अकेले व्यक्ति का नहीं रह जाता, बल्कि सामूहिक चेतना का हिस्सा बन जाता है। यही वह क्षण होता है, जब परिवर्तन की शुरुआत होती है और युग निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अतः किसी भी स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र के लिए आवश्यक है कि वह अपने नागरिकों को विचारों की स्वतंत्रता प्रदान करे, उन्हें नवीनता और उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करे। क्योंकि विचार ही वह शक्ति हैं, जो समाज को दिशा देते हैं, राष्ट्र को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और मानवता को आगे बढ़ाते हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:51:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पारिवारिक कलह से रिश्तों का रोज़ होता पतन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा देश है, लेकिन देश में बढ़ते अपराध—विशेषकर घरेलू और पारिवारिक हिंसा के जघन्य मामलों—में निरंतर वृद्धि होना एक सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। आज के आधुनिक दौर में जब भी हम समाचार पत्रों या न्यूज़ चैनलों से रूबरू होते हैं, तो राजनीति से इतर आपराधिक घटनाओं और पारिवारिक कलह से जुड़ी खबरों का प्रतिशत लगातार बढ़ता दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया द्वारा इन घटनाओं को प्रमुखता से दिखाना अब मजबूरी बन गई है, क्योंकि देश के लगभग हर धर्म, वर्ग और समाज में पारिवारिक हिंसा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176801/relationships-deteriorate-every-day-due-to-family-discord"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/18_11_2022-home_vastu_20221118_155216.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा देश है, लेकिन देश में बढ़ते अपराध—विशेषकर घरेलू और पारिवारिक हिंसा के जघन्य मामलों—में निरंतर वृद्धि होना एक सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। आज के आधुनिक दौर में जब भी हम समाचार पत्रों या न्यूज़ चैनलों से रूबरू होते हैं, तो राजनीति से इतर आपराधिक घटनाओं और पारिवारिक कलह से जुड़ी खबरों का प्रतिशत लगातार बढ़ता दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया द्वारा इन घटनाओं को प्रमुखता से दिखाना अब मजबूरी बन गई है, क्योंकि देश के लगभग हर धर्म, वर्ग और समाज में पारिवारिक हिंसा का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जो कई बार जघन्य अपराधों का रूप ले लेता है। भारत विश्व को शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाला देश माना जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि हमारे अपने ही परिवारों में रिश्तों के बीच दूरियाँ इतनी बढ़ती जा रही हैं कि साथ बैठकर भोजन करना भी कठिन होता जा रहा है। सिर्फ भाई-भाई के रिश्ते ही नहीं, बल्कि पति-पत्नी के संबंधों में भी जिस गति से अलगाव बढ़ रहा है और उसके भयावह परिणाम सामने आ रहे हैं, वह पूरे समाज के लिए गहन चिंतन का विषय है। यह स्थिति हर धर्म, हर वर्ग और हर व्यक्ति को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आधुनिकता की दौड़ में हमने नई पीढ़ी को महंगी शिक्षा और भौतिक सुख-सुविधाएँ तो भरपूर दी हैं, लेकिन उन्हें सहनशीलता, धैर्य, अपनत्व, विनम्रता और परिवार को साथ लेकर चलने के संस्कार देने में हम कहीं पीछे रह गए हैं। परिणामस्वरूप, नवपीढ़ी में धैर्य और सहनशीलता का अभाव बढ़ रहा है, जो पारिवारिक कलह को जन्म देकर कई बार गंभीर अपराधों में बदल जाता है। आज कोई भी समाज या व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि वह पारिवारिक कलह से पूरी तरह मुक्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो घटनाएँ आज हम समाचारों में देख-सुन रहे हैं, वे कल किसी भी परिवार की वास्तविकता बन सकती हैं। कहीं पैसों के विवाद, कहीं अवैध संबंधों की आशंका, कहीं कर्ज का दबाव, तो कहीं नशे की लत या पारिवारिक हस्तक्षेप—इन सभी कारणों से महानगरों से लेकर गाँवों तक रिश्तों का पतन तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई बार कम उम्र और कम समझ वाले लोग भी संदेह या आवेग में आकर अपने ही जीवनसाथी की हत्या जैसे जघन्य अपराध कर बैठते हैं। वहीं, कर्ज और पारिवारिक तनाव से परेशान होकर अपने ही मासूम बच्चों की हत्या कर आत्महत्या करने की घटनाएँ भी समाज को झकझोर देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी एक कटु सत्य है कि पारिवारिक कलह अब केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक सीमित नहीं रही। जहाँ गरीब परिवारों में इसे आर्थिक तंगी का परिणाम माना जाता है, वहीं संपन्न और भौतिक रूप से समृद्ध घरों से उठती कलह की आवाजें रिश्तों के आंतरिक विघटन की ओर संकेत करती हैं। हर दिन अवैध संबंधों की शंका और अविश्वास के चलते प्रेम, विश्वास और अपनत्व जैसे रिश्तों का गला घोंटने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसे में समाज के हर वर्ग को पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण और रिश्तों की गरिमा बनाए रखने के लिए गंभीरता से विचार करना होगा। यदि हम परिवार की खुशहाली, सौहार्द और विश्वास को बनाए रखना चाहते हैं, तो मजबूत और संतुलित दाम्पत्य जीवन पर सामूहिक मंथन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अरविंद रावल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:00:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईश वेलफेयर टीम द्वारा पॉल मर्सी होम में सेवा कार्यक्रम सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में दिनांक 12 अप्रैल 2026 को ईश वेलफेयर टीम द्वारा पॉल मर्सी होम में आश्रित मानसिक रूप से विशेष (मंदित) महिलाओं एवं बच्चियों के बीच एक सेवा एवं सहयोग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने मे  टीम के सदस्यों एवं सहयोगी समाजसेवियों जितेंद्र सिंह,  मनोज कुमार सिंह, गिरीश कुमार सिंह, मयंक सिंह, एस विर्दी, भैरव, आरती कपूर  (उमा ज्वेलर्स), ज्योति खरे सिविल डिफेन्स, नूतन वर्मा, शिखा, रुची मिश्रा, एडवोकेट रिचा मिश्रा, पवन सिंह, जीत बहादुर पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा, शर्मा, कमल सेन, संजय वर्मा ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई तथा आवश्यक खाद्य सामग्री- 60</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176036/service-program-completed-at-paul-mercy-home-by-ish-welfare"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/403623-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में दिनांक 12 अप्रैल 2026 को ईश वेलफेयर टीम द्वारा पॉल मर्सी होम में आश्रित मानसिक रूप से विशेष (मंदित) महिलाओं एवं बच्चियों के बीच एक सेवा एवं सहयोग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने मे  टीम के सदस्यों एवं सहयोगी समाजसेवियों जितेंद्र सिंह,  मनोज कुमार सिंह, गिरीश कुमार सिंह, मयंक सिंह, एस विर्दी, भैरव, आरती कपूर  (उमा ज्वेलर्स), ज्योति खरे सिविल डिफेन्स, नूतन वर्मा, शिखा, रुची मिश्रा, एडवोकेट रिचा मिश्रा, पवन सिंह, जीत बहादुर पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा, शर्मा, कमल सेन, संजय वर्मा ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई तथा आवश्यक खाद्य सामग्री- 60 किलोग्राम आटा, 65 किलोग्राम चावल, 26 किलोग्राम दाल, 10 किलोग्राम सरसों तेल, 15 किलोग्राम भूना चना, 15 किलोग्राम चूरा, 15 किलोग्राम रवा, 10 किलोग्राम चीनी एवं 3 किलोग्राम नमकीन भेंट किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त बच्चियों एवं महिलाओं को बंद मक्खन, केले एवं फ्रूटी वितरित की गई, जिसे पाकर वे अत्यंत प्रसन्न एवं आनंदित दिखाई दीं। कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण भावुकता एवं सेवा भावना से ओत-प्रोत रहा। उपस्थित सभी सदस्यों ने प्रभु का स्मरण कर सेवा का अवसर प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक  जितेंद्र सिंह ने सभी सहयोगी समाजसेवियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस प्रकार के सेवा कार्य आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, जिससे जरूरतमंदों के जीवन में मुस्कान लाई जा सके। इस अवसर पर सरिता सिंह नूतन वर्मा, जी एस विर्दी, अतुल सिंह श्रीनेत, संजय सिंह, असिस्टेंट सेल्टैक्स कमिश्नर्, एडवोकेट रिचा मिश्रा उपाध्यक्ष निर्मल एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी, पेंसनर क्लब से जीतबहादुर् पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा, शर्मा, सहित बहुत सारे समाज सेवी गण उपास्थित रहे...</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176036/service-program-completed-at-paul-mercy-home-by-ish-welfare</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 21:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने कन्या पूजन कर मनाया नवमी पर्व, उपहार देकर उत्साहवर्धन किया </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत विकास खंड नौगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र, साड़ी प्रथम में कन्या पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने पारंपरिक विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने कन्याओं के चरण धोकर, तिलक लगाकर तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें प्रसाद वितरित किया। साथ ही, सभी कन्याओं  को उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व नारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174346/district-magistrate-celebrated-navami-festival-by-worshiping-the-girl-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1774532849622.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत विकास खंड नौगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र, साड़ी प्रथम में कन्या पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने पारंपरिक विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने कन्याओं के चरण धोकर, तिलक लगाकर तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें प्रसाद वितरित किया। साथ ही, सभी कन्याओं  को उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और उनकी महत्ता को दर्शाने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान का उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना तथा उनके शिक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करना है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों को दी जा रही पोषण सेवाओं, शिक्षण सामग्री एवं साफ-सफाई की स्थिति की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के समग्र विकास का आधार हैं, इसलिए यहां की व्यवस्थाएं सुदृढ़ और प्रभावी होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय कुमार सिंह एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी साहब यादव भी उपस्थित रहे कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं तथा ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम का समापन कन्याओं को प्रसाद एवं उपहार वितरण के साथ हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण के संदेश को भी प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचाने में सफल रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174346/district-magistrate-celebrated-navami-festival-by-worshiping-the-girl-and</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 20:29:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर पर चिड़ियों का डेरा लगने से मन में होती है खुशी : कंचन वर्मा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong>बर्डपुर क्षेत्र के सूर्यकुड़िया निवासी कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हैं। इन्होंने अपने घर पर गौरैयों की सुरक्षा के लिए घोसले बना रखे हैं। पानी देने के लिए विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं, जिसमें दाना देकर उनका पेट भरने का प्रयास करते हैं। कंचन के घर पर हर रोज चिड़ियों का डेरा जमता है। उनके इस प्रयास से परिजनों के मन में खुशी होती है।कंचन वर्मा बताते हैं कि घर में हरियाली है। बच्चों से परिवार खुशहाल है, बर्डपुर क्षेत्र के कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा  गौरैया की सुरक्षा के लिए घर पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173658/kanchan-verma-feels-happy-when-birds-camp-at-home"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773931876896.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong>बर्डपुर क्षेत्र के सूर्यकुड़िया निवासी कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हैं। इन्होंने अपने घर पर गौरैयों की सुरक्षा के लिए घोसले बना रखे हैं। पानी देने के लिए विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं, जिसमें दाना देकर उनका पेट भरने का प्रयास करते हैं। कंचन के घर पर हर रोज चिड़ियों का डेरा जमता है। उनके इस प्रयास से परिजनों के मन में खुशी होती है।कंचन वर्मा बताते हैं कि घर में हरियाली है। बच्चों से परिवार खुशहाल है, बर्डपुर क्षेत्र के कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा  गौरैया की सुरक्षा के लिए घर पर घोसला बनाने के बाद विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके लिए रोज दाने का बंदोबस्त कटोरे में ही कर देते हैं। उन्होंने बताया कि कई साल से गौरैयों संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं। अपने घर की छत पर गौरेया के दाने-पानी के लिए विशेष इंतजाम किया है। वह बताते हैं कि सुबह में  जब चिड़ियों का डेरा घर पर होता है तो यह मन को सुखद अहसास कराता है।  उन्होंने कहा कि  पंक्षी प्रेमियों से अपील की कि प्लास्टिक के डिब्बों या लकड़ी के बने घोसले ऐसे स्थान पर लगा सकते हैं जहां पक्षियों को आने-जाने में आसानी हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खुद ऐसा करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। जब लोग गौरैया का ख्याल रखेंगे तो आंगन में जरूर फुदकेगी और आपके मन को खुशी मिलेगी सुरक्षा की दृष्टि से इस बात का ख्याल रखें कि बिल्ली की पहुंच न हो। इसके अलावा जिस स्थान पर घोसला हो वहां छत के पंखे दूरी पर हों। इसके साथ ही गौरैया के लिए दाना-पानी का ध्यान रखते हैं </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:37:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय सेवा योजना सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है : प्रो. सत्येंद्र कुमार दूबे</title>
                                    <description><![CDATA[<div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173039/national-service-scheme-is-a-powerful-medium-for-development-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773061459179.jpg" alt=""></a><br /><div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं के चरित्र निर्माण, सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है। समाज को सकारात्मक दिशा देने में धैर्य, सहनशीलता और सेवा भाव जैसे गुणों का विशेष महत्व है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिन्हें एनएसएस के माध्यम से विकसित किया जाता है। मुख्य वक्ता डॉ. अरविन्द कुमार रावत (सहायक आचार्य, लोक प्रशासन विभाग) ने कहा कि आदर्श, मानव मूल्य और लोक संस्कृति के संरक्षण में राष्ट्रीय सेवा योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है। एनएसएस के स्वयंसेवक समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ एक आदर्श नागरिक के रूप में समाज निर्माण में सक्रिय योगदान देते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में डॉ. विशाल गुप्ता तथा डॉ. विमल चन्द्र वर्मा ने भी राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सौहार्द एवं स्वच्छता के महत्व पर विचार व्यक्त किए। संध्या सत्र में स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं द्वारा महिला दिवस, लोक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवन्त यादव के निर्देशन में हुआ। स्वागत एवं आभार डॉ. सरिता सिंह द्वारा व्यक्त किया गया।</div></div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173039/national-service-scheme-is-a-powerful-medium-for-development-of</link>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:04:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेब में पलता अदृश्य ज़हर: सोशल मीडिया और युवा मन का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">  </p>
<blockquote class="format1">
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">आभासी सफलता का दबाव और युवा मन का अवसाद</span>]</p>
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया: मनोरंजन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक प्रदूषण का नया दौर</span>]</p>
<p class="MsoNormal">  </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;" align="right">·      <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी मानव सभ्यता को खतरा बाहरी प्रदूषणों से था—धुएँ से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लास्टिक से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रसायनों से। पर आज सबसे घातक प्रदूषण हमारी जेब में रखा हुआ है—मोबाइल की चमकती स्क्रीन और उस पर दौड़ती सोशल मीडिया की दुनिया। यह प्रदूषण दिखाई नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मन और चेतना को भीतर से क्षीण कर देता है। यह शरीर को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और आशा को खा जाता है। यही कारण है</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173029/the-invisible-poison-growing-in-the-pocket-of-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/social_media_collection_2026.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center"> </p>
<blockquote class="format1">
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">आभासी सफलता का दबाव और युवा मन का अवसाद</span>]</p>
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया: मनोरंजन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक प्रदूषण का नया दौर</span>]</p>
<p class="MsoNormal"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;" align="right">·      <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी मानव सभ्यता को खतरा बाहरी प्रदूषणों से था—धुएँ से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लास्टिक से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रसायनों से। पर आज सबसे घातक प्रदूषण हमारी जेब में रखा हुआ है—मोबाइल की चमकती स्क्रीन और उस पर दौड़ती सोशल मीडिया की दुनिया। यह प्रदूषण दिखाई नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मन और चेतना को भीतर से क्षीण कर देता है। यह शरीर को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और आशा को खा जाता है। यही कारण है कि बीते कुछ वर्षों में युवाओं में अवसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अकेलापन और आत्महत्या की घटनाओं के पीछे सोशल मीडिया की भूमिका तेजी से चर्चा में आई है। यह तकनीक सुविधा का साधन बनकर आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अनियंत्रित उपयोग ने इसे मानसिक विष में बदल दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया का सबसे गहरा असर युवा मन की तुलना करने की प्रवृत्ति पर पड़ता है। यह मंच एक ऐसा आभासी संसार रच देता है जहाँ हर व्यक्ति अपनी जिंदगी का सबसे चमकदार पक्ष ही दिखाता है। महंगी कारें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शानदार यात्राएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकर्षक चेहरे और लगातार मिलती सफलता—इन दृश्यों को देखकर एक सामान्य युवा अनजाने में स्वयं को असफल समझने लगता है। उसे लगने लगता है कि बाकी सब लोग जीवन की दौड़ में उससे बहुत आगे निकल चुके हैं। यही निरंतर तुलना धीरे-धीरे आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है और व्यक्ति को भीतर से तोड़ने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली प्रतिक्रिया—लाइक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमेंट और शेयर—एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक लत पैदा करती है। हर बार जब किसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मस्तिष्क में डोपामिन नामक रसायन सक्रिय होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो क्षणिक खुशी देता है। लेकिन यही खुशी व्यक्ति को बार-बार उसी प्रतिक्रिया की तलाश में बाँध देती है। जब अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो निराशा और बेचैनी बढ़ जाती है। धीरे-धीरे यह मानसिक निर्भरता व्यक्ति के आत्मसम्मान को पूरी तरह बाहरी स्वीकृति पर आश्रित बना देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समस्या का दूसरा गंभीर पक्ष है साइबर बुलिंग। सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही अपमान और उत्पीड़न के नए रास्ते भी खोल दिए। गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर लोग दूसरों का मजाक उड़ाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपमानजनक टिप्पणियाँ करते हैं या निजी तस्वीरों को वायरल कर देते हैं। किशोर और युवा उम्र में आत्मसम्मान बेहद संवेदनशील होता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में सार्वजनिक अपमान मानसिक आघात बन जाता है। कई मामलों में यह अपमान इतना गहरा होता है कि पीड़ित युवा स्वयं को समाज के सामने असहाय महसूस करने लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सोशल मीडिया युवाओं के वास्तविक संबंधों को कमजोर कर रहा है। पहले दुख या तनाव के समय व्यक्ति परिवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रों या समाज के बीच समाधान खोजता था। अब वही व्यक्ति अपनी भावनाएँ स्क्रीन पर उकेर देता है। लेकिन वर्चुअल दुनिया में संवेदनशीलता का स्थान अक्सर प्रतिक्रिया और मनोरंजन ने ले लिया है। कई बार गंभीर पीड़ा को भी लोग हल्के में लेते हैं या उसे मजाक बना देते हैं। परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति और अधिक अकेला महसूस करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लत का प्रभाव युवाओं की दिनचर्या पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। देर रात तक मोबाइल पर सक्रिय रहने से नींद प्रभावित होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। नींद की कमी से चिड़चिड़ापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिंता और ध्यान की कमी बढ़ती है। पढ़ाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करियर और सामाजिक जीवन पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। जब व्यक्ति बार-बार असफलता या असंतुलन महसूस करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके भीतर निराशा की भावना और गहरी होने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया की एक और खतरनाक प्रवृत्ति है “परफेक्ट लाइफ” का भ्रम। यह मंच वास्तविक जीवन की जटिलताओं को छिपाकर केवल आकर्षक क्षणों को सामने लाता है। संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असफलता और साधारण जीवन के पल लगभग गायब रहते हैं। परिणामस्वरूप देखने वाले युवाओं को लगता है कि बाकी सभी लोग खुश और सफल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल वही संघर्ष कर रहे हैं। यही भ्रम धीरे-धीरे आत्मसम्मान को कमजोर करता है और जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल के वर्षों में कई देशों में किए गए अध्ययन यह संकेत देते हैं कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग और युवाओं में बढ़ती मानसिक समस्याओं के बीच स्पष्ट संबंध दिखाई देता है। चिंता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्महीनता और अकेलापन—ये सभी समस्याएँ अनियंत्रित सोशल मीडिया उपयोग से और बढ़ सकती हैं। जब व्यक्ति लगातार आभासी दुनिया में डूबा रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जूझने की उसकी क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समस्या का समाधान केवल तकनीक से दूरी बनाने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके विवेकपूर्ण उपयोग में छिपा है। युवाओं को यह समझाना आवश्यक है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली दुनिया पूरी सच्चाई नहीं होती। यह जीवन का केवल चुना हुआ और सजाया हुआ हिस्सा होता है। यदि युवा इस अंतर को समझ लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे तुलना और निराशा के जाल से बच सकते हैं। इसके साथ ही डिजिटल अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है—सीमित समय तक उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियमित विश्राम और वास्तविक जीवन की गतिविधियों में भागीदारी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार और शिक्षा संस्थानों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझने का प्रयास करना चाहिए। विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि युवा ऑनलाइन दुनिया के खतरों को पहचान सकें। यदि समाज समय रहते संवेदनशीलता और समर्थन का वातावरण बना सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज तकनीक को नकारना संभव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वह हमारे जीवन की धड़कनों में शामिल हो चुकी है। प्रश्न यह नहीं कि सोशल मीडिया रहे या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि हम उसका उपयोग किस विवेक और जिम्मेदारी के साथ करते हैं। यदि इसका संतुलित और सजग उपयोग हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही माध्यम ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रचनात्मकता और संवाद का सशक्त सेतु बन सकता है। लेकिन यदि नियंत्रण खो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही चमकती स्क्रीन धीरे-धीरे मानसिक विष बनकर हमारी युवा पीढ़ी की ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और आशा को भीतर ही भीतर निगल सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता है कि समाज इस अदृश्य खतरे को गंभीरता से समझे। प्लास्टिक पर्यावरण को प्रदूषित करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सोशल मीडिया का असंतुलित प्रभाव मन और विचारों को प्रदूषित कर सकता है। यदि हम युवाओं को सुरक्षित और सशक्त भविष्य देना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमें उन्हें आभासी चमक से अधिक वास्तविक जीवन के मूल्य सिखाने होंगे। तभी यह पीढ़ी निराशा के अंधेरे में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्मविश्वास और संतुलन की रोशनी में आगे बढ़ सकेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:31:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको फूलपुर में रन फॉर सेफ्टी’ एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर इकाई में राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह (6 मार्च से 12 मार्च 2026) के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस सप्ताह का शुभारंभ 06 मार्च 2026 को इकाई प्रमुख द्वारा सुरक्षा ध्वज फहराकर तथा कर्मचारियों को सुरक्षा शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सुरक्षित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173019/organization-of-run-for-safety-and-painting-competition-in-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001642891.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर इकाई में राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह (6 मार्च से 12 मार्च 2026) के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस सप्ताह का शुभारंभ 06 मार्च 2026 को इकाई प्रमुख द्वारा सुरक्षा ध्वज फहराकर तथा कर्मचारियों को सुरक्षा शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सुरक्षित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के निवासियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारियों, कर्मचारियों, महिलाओं तथा युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सुरक्षा का संदेश दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1001642892.jpg" alt="इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के निवासियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना" width="883" height="587"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके साथ ही सुरक्षा सप्ताह के अवसर पर टाउनशिप में बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय सुरक्षा एवं सुरक्षित जीवन से संबंधित था, जिसमें बच्चों ने रंगों के माध्यम से सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी में भी सुरक्षा के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के दौरान कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों के लिए आगे भी विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि कार्यस्थल और दैनिक जीवन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 20:59:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली के बाद मंदिर परिसर में चलाया गया बृहद स्वच्छता अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>  </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात राहुल जायसवाल की रिपोर्ट </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>नैनी,प्रयागराज। </strong></div>
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<div>होली पर्व के पश्चात रविवार को सरस्वती सामाजिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री शूलटांकेश्वर महादेव मंदिर,अरैल परिसर में बृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।</div>
<div>  </div>
<div>यह अभियान रविवार को प्रातः 7:00 बजे से आयोजित किया गया।कार्यक्रम अधिकारी एडवोकेट आत्म प्रकाश यादव के नेतृत्व में मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया गया।</div>
<div>  </div>
<div>इस दौरान मंदिर परिसर और गंगा घाट पर फैली गंदगी को साफ किया गया। </div>
<div>  </div>
<div>उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस प्रकार हम अपने घरों को स्वच्छ और साफ रखते हैं, उसी प्रकार मंदिर, देवालय और गंगा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172949/after-holi-a-massive-cleanliness-campaign-was-conducted-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260308-wa0244.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div> </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात राहुल जायसवाल की रिपोर्ट </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>नैनी,प्रयागराज। </strong></div>
<div> </div>
<div>होली पर्व के पश्चात रविवार को सरस्वती सामाजिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री शूलटांकेश्वर महादेव मंदिर,अरैल परिसर में बृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।</div>
<div> </div>
<div>यह अभियान रविवार को प्रातः 7:00 बजे से आयोजित किया गया।कार्यक्रम अधिकारी एडवोकेट आत्म प्रकाश यादव के नेतृत्व में मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया गया।</div>
<div> </div>
<div>इस दौरान मंदिर परिसर और गंगा घाट पर फैली गंदगी को साफ किया गया। </div>
<div> </div>
<div>उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस प्रकार हम अपने घरों को स्वच्छ और साफ रखते हैं, उसी प्रकार मंदिर, देवालय और गंगा घाटों को भी स्वच्छ रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।</div>
<div> </div>
<div>होली पर्व के बाद मंदिर परिसर में काफी गंदगी जमा हो गई थी, जिसे सरस्वती परिवार के सदस्यों ने मिलकर साफ किया।स्वच्छता अभियान के दौरान उपस्थित लोगों ने एक स्वर में लोगों से अपील की कि गंगा घाटों, शिव मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने में सभी को सहयोग करना चाहिए।.</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर धीरज यादव, सहदेव चौरसिया, शशिकांत पांडेय, इंदु प्रकाश सिंह, प्रियांशु उपाध्याय, धीरज रजवानी, शैलेंद्र पाल, नीरज पांडेय, विनोद गुरानी, सौरभ यादव, गौरव यादव और आर्यन यादव सहित कई लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 01:00:14 +0530</pubDate>
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