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                <title>Social Awareness - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Social Awareness RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पारिवारिक कलह से रिश्तों का रोज़ होता पतन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा देश है, लेकिन देश में बढ़ते अपराध—विशेषकर घरेलू और पारिवारिक हिंसा के जघन्य मामलों—में निरंतर वृद्धि होना एक सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। आज के आधुनिक दौर में जब भी हम समाचार पत्रों या न्यूज़ चैनलों से रूबरू होते हैं, तो राजनीति से इतर आपराधिक घटनाओं और पारिवारिक कलह से जुड़ी खबरों का प्रतिशत लगातार बढ़ता दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया द्वारा इन घटनाओं को प्रमुखता से दिखाना अब मजबूरी बन गई है, क्योंकि देश के लगभग हर धर्म, वर्ग और समाज में पारिवारिक हिंसा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176801/relationships-deteriorate-every-day-due-to-family-discord"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/18_11_2022-home_vastu_20221118_155216.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा देश है, लेकिन देश में बढ़ते अपराध—विशेषकर घरेलू और पारिवारिक हिंसा के जघन्य मामलों—में निरंतर वृद्धि होना एक सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। आज के आधुनिक दौर में जब भी हम समाचार पत्रों या न्यूज़ चैनलों से रूबरू होते हैं, तो राजनीति से इतर आपराधिक घटनाओं और पारिवारिक कलह से जुड़ी खबरों का प्रतिशत लगातार बढ़ता दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया द्वारा इन घटनाओं को प्रमुखता से दिखाना अब मजबूरी बन गई है, क्योंकि देश के लगभग हर धर्म, वर्ग और समाज में पारिवारिक हिंसा का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, जो कई बार जघन्य अपराधों का रूप ले लेता है। भारत विश्व को शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाला देश माना जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि हमारे अपने ही परिवारों में रिश्तों के बीच दूरियाँ इतनी बढ़ती जा रही हैं कि साथ बैठकर भोजन करना भी कठिन होता जा रहा है। सिर्फ भाई-भाई के रिश्ते ही नहीं, बल्कि पति-पत्नी के संबंधों में भी जिस गति से अलगाव बढ़ रहा है और उसके भयावह परिणाम सामने आ रहे हैं, वह पूरे समाज के लिए गहन चिंतन का विषय है। यह स्थिति हर धर्म, हर वर्ग और हर व्यक्ति को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आधुनिकता की दौड़ में हमने नई पीढ़ी को महंगी शिक्षा और भौतिक सुख-सुविधाएँ तो भरपूर दी हैं, लेकिन उन्हें सहनशीलता, धैर्य, अपनत्व, विनम्रता और परिवार को साथ लेकर चलने के संस्कार देने में हम कहीं पीछे रह गए हैं। परिणामस्वरूप, नवपीढ़ी में धैर्य और सहनशीलता का अभाव बढ़ रहा है, जो पारिवारिक कलह को जन्म देकर कई बार गंभीर अपराधों में बदल जाता है। आज कोई भी समाज या व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि वह पारिवारिक कलह से पूरी तरह मुक्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो घटनाएँ आज हम समाचारों में देख-सुन रहे हैं, वे कल किसी भी परिवार की वास्तविकता बन सकती हैं। कहीं पैसों के विवाद, कहीं अवैध संबंधों की आशंका, कहीं कर्ज का दबाव, तो कहीं नशे की लत या पारिवारिक हस्तक्षेप—इन सभी कारणों से महानगरों से लेकर गाँवों तक रिश्तों का पतन तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई बार कम उम्र और कम समझ वाले लोग भी संदेह या आवेग में आकर अपने ही जीवनसाथी की हत्या जैसे जघन्य अपराध कर बैठते हैं। वहीं, कर्ज और पारिवारिक तनाव से परेशान होकर अपने ही मासूम बच्चों की हत्या कर आत्महत्या करने की घटनाएँ भी समाज को झकझोर देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह भी एक कटु सत्य है कि पारिवारिक कलह अब केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक सीमित नहीं रही। जहाँ गरीब परिवारों में इसे आर्थिक तंगी का परिणाम माना जाता है, वहीं संपन्न और भौतिक रूप से समृद्ध घरों से उठती कलह की आवाजें रिश्तों के आंतरिक विघटन की ओर संकेत करती हैं। हर दिन अवैध संबंधों की शंका और अविश्वास के चलते प्रेम, विश्वास और अपनत्व जैसे रिश्तों का गला घोंटने की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ऐसे में समाज के हर वर्ग को पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण और रिश्तों की गरिमा बनाए रखने के लिए गंभीरता से विचार करना होगा। यदि हम परिवार की खुशहाली, सौहार्द और विश्वास को बनाए रखना चाहते हैं, तो मजबूत और संतुलित दाम्पत्य जीवन पर सामूहिक मंथन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अरविंद रावल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:00:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईश वेलफेयर टीम द्वारा पॉल मर्सी होम में सेवा कार्यक्रम सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में दिनांक 12 अप्रैल 2026 को ईश वेलफेयर टीम द्वारा पॉल मर्सी होम में आश्रित मानसिक रूप से विशेष (मंदित) महिलाओं एवं बच्चियों के बीच एक सेवा एवं सहयोग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने मे  टीम के सदस्यों एवं सहयोगी समाजसेवियों जितेंद्र सिंह,  मनोज कुमार सिंह, गिरीश कुमार सिंह, मयंक सिंह, एस विर्दी, भैरव, आरती कपूर  (उमा ज्वेलर्स), ज्योति खरे सिविल डिफेन्स, नूतन वर्मा, शिखा, रुची मिश्रा, एडवोकेट रिचा मिश्रा, पवन सिंह, जीत बहादुर पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा, शर्मा, कमल सेन, संजय वर्मा ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई तथा आवश्यक खाद्य सामग्री- 60</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176036/service-program-completed-at-paul-mercy-home-by-ish-welfare"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/403623-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में दिनांक 12 अप्रैल 2026 को ईश वेलफेयर टीम द्वारा पॉल मर्सी होम में आश्रित मानसिक रूप से विशेष (मंदित) महिलाओं एवं बच्चियों के बीच एक सेवा एवं सहयोग कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने मे  टीम के सदस्यों एवं सहयोगी समाजसेवियों जितेंद्र सिंह,  मनोज कुमार सिंह, गिरीश कुमार सिंह, मयंक सिंह, एस विर्दी, भैरव, आरती कपूर  (उमा ज्वेलर्स), ज्योति खरे सिविल डिफेन्स, नूतन वर्मा, शिखा, रुची मिश्रा, एडवोकेट रिचा मिश्रा, पवन सिंह, जीत बहादुर पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा, शर्मा, कमल सेन, संजय वर्मा ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई तथा आवश्यक खाद्य सामग्री- 60 किलोग्राम आटा, 65 किलोग्राम चावल, 26 किलोग्राम दाल, 10 किलोग्राम सरसों तेल, 15 किलोग्राम भूना चना, 15 किलोग्राम चूरा, 15 किलोग्राम रवा, 10 किलोग्राम चीनी एवं 3 किलोग्राम नमकीन भेंट किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त बच्चियों एवं महिलाओं को बंद मक्खन, केले एवं फ्रूटी वितरित की गई, जिसे पाकर वे अत्यंत प्रसन्न एवं आनंदित दिखाई दीं। कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण भावुकता एवं सेवा भावना से ओत-प्रोत रहा। उपस्थित सभी सदस्यों ने प्रभु का स्मरण कर सेवा का अवसर प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक  जितेंद्र सिंह ने सभी सहयोगी समाजसेवियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस प्रकार के सेवा कार्य आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, जिससे जरूरतमंदों के जीवन में मुस्कान लाई जा सके। इस अवसर पर सरिता सिंह नूतन वर्मा, जी एस विर्दी, अतुल सिंह श्रीनेत, संजय सिंह, असिस्टेंट सेल्टैक्स कमिश्नर्, एडवोकेट रिचा मिश्रा उपाध्यक्ष निर्मल एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी, पेंसनर क्लब से जीतबहादुर् पुरी, सुभाष चंद्र मिश्रा, शर्मा, सहित बहुत सारे समाज सेवी गण उपास्थित रहे...</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 21:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने कन्या पूजन कर मनाया नवमी पर्व, उपहार देकर उत्साहवर्धन किया </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत विकास खंड नौगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र, साड़ी प्रथम में कन्या पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने पारंपरिक विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने कन्याओं के चरण धोकर, तिलक लगाकर तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें प्रसाद वितरित किया। साथ ही, सभी कन्याओं  को उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व नारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174346/district-magistrate-celebrated-navami-festival-by-worshiping-the-girl-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1774532849622.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा नवरात्रि के पावन अवसर पर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के अंतर्गत विकास खंड नौगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्र, साड़ी प्रथम में कन्या पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने पारंपरिक विधि-विधान से कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने कन्याओं के चरण धोकर, तिलक लगाकर तथा पुष्प अर्पित कर उन्हें प्रसाद वितरित किया। साथ ही, सभी कन्याओं  को उपहार भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और उनकी महत्ता को दर्शाने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान का उद्देश्य समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना तथा उनके शिक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करना है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों को दी जा रही पोषण सेवाओं, शिक्षण सामग्री एवं साफ-सफाई की स्थिति की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के समग्र विकास का आधार हैं, इसलिए यहां की व्यवस्थाएं सुदृढ़ और प्रभावी होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय कुमार सिंह एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी साहब यादव भी उपस्थित रहे कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं तथा ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम का समापन कन्याओं को प्रसाद एवं उपहार वितरण के साथ हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण के संदेश को भी प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचाने में सफल रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 20:29:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर पर चिड़ियों का डेरा लगने से मन में होती है खुशी : कंचन वर्मा </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong>बर्डपुर क्षेत्र के सूर्यकुड़िया निवासी कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हैं। इन्होंने अपने घर पर गौरैयों की सुरक्षा के लिए घोसले बना रखे हैं। पानी देने के लिए विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं, जिसमें दाना देकर उनका पेट भरने का प्रयास करते हैं। कंचन के घर पर हर रोज चिड़ियों का डेरा जमता है। उनके इस प्रयास से परिजनों के मन में खुशी होती है।कंचन वर्मा बताते हैं कि घर में हरियाली है। बच्चों से परिवार खुशहाल है, बर्डपुर क्षेत्र के कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा  गौरैया की सुरक्षा के लिए घर पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173658/kanchan-verma-feels-happy-when-birds-camp-at-home"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773931876896.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong>बर्डपुर क्षेत्र के सूर्यकुड़िया निवासी कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हैं। इन्होंने अपने घर पर गौरैयों की सुरक्षा के लिए घोसले बना रखे हैं। पानी देने के लिए विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं, जिसमें दाना देकर उनका पेट भरने का प्रयास करते हैं। कंचन के घर पर हर रोज चिड़ियों का डेरा जमता है। उनके इस प्रयास से परिजनों के मन में खुशी होती है।कंचन वर्मा बताते हैं कि घर में हरियाली है। बच्चों से परिवार खुशहाल है, बर्डपुर क्षेत्र के कंचन वर्मा गौरैयों की सुरक्षा  गौरैया की सुरक्षा के लिए घर पर घोसला बनाने के बाद विशेष मिट्टी के कटोरे टांग रखे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके लिए रोज दाने का बंदोबस्त कटोरे में ही कर देते हैं। उन्होंने बताया कि कई साल से गौरैयों संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं। अपने घर की छत पर गौरेया के दाने-पानी के लिए विशेष इंतजाम किया है। वह बताते हैं कि सुबह में  जब चिड़ियों का डेरा घर पर होता है तो यह मन को सुखद अहसास कराता है।  उन्होंने कहा कि  पंक्षी प्रेमियों से अपील की कि प्लास्टिक के डिब्बों या लकड़ी के बने घोसले ऐसे स्थान पर लगा सकते हैं जहां पक्षियों को आने-जाने में आसानी हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खुद ऐसा करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। जब लोग गौरैया का ख्याल रखेंगे तो आंगन में जरूर फुदकेगी और आपके मन को खुशी मिलेगी सुरक्षा की दृष्टि से इस बात का ख्याल रखें कि बिल्ली की पहुंच न हो। इसके अलावा जिस स्थान पर घोसला हो वहां छत के पंखे दूरी पर हों। इसके साथ ही गौरैया के लिए दाना-पानी का ध्यान रखते हैं </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:37:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राष्ट्रीय सेवा योजना सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है : प्रो. सत्येंद्र कुमार दूबे</title>
                                    <description><![CDATA[<div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173039/national-service-scheme-is-a-powerful-medium-for-development-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773061459179.jpg" alt=""></a><br /><div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर, </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के  राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों — भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई — के सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस पर सोमवार को  जनजागरण एवं स्वच्छता अभियान के साथ बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया। स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं ने शिविर स्थल की स्वच्छता के पश्चात ग्राम संग्रामपुर में जनसंपर्क कर स्वच्छता, सेवा भाव एवं जनसहभागिता के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बौद्धिक सत्र में अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येन्द्र कुमार दुबे (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग) ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं के चरित्र निर्माण, सामाजिक संवेदनशीलता और मानव मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है। समाज को सकारात्मक दिशा देने में धैर्य, सहनशीलता और सेवा भाव जैसे गुणों का विशेष महत्व है,</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिन्हें एनएसएस के माध्यम से विकसित किया जाता है। मुख्य वक्ता डॉ. अरविन्द कुमार रावत (सहायक आचार्य, लोक प्रशासन विभाग) ने कहा कि आदर्श, मानव मूल्य और लोक संस्कृति के संरक्षण में राष्ट्रीय सेवा योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है। एनएसएस के स्वयंसेवक समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ एक आदर्श नागरिक के रूप में समाज निर्माण में सक्रिय योगदान देते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में डॉ. विशाल गुप्ता तथा डॉ. विमल चन्द्र वर्मा ने भी राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सौहार्द एवं स्वच्छता के महत्व पर विचार व्यक्त किए। संध्या सत्र में स्वयंसेवक-स्वयंसेविकाओं द्वारा महिला दिवस, लोक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवन्त यादव के निर्देशन में हुआ। स्वागत एवं आभार डॉ. सरिता सिंह द्वारा व्यक्त किया गया।</div></div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:04:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेब में पलता अदृश्य ज़हर: सोशल मीडिया और युवा मन का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center">  </p>
<blockquote class="format1">
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">आभासी सफलता का दबाव और युवा मन का अवसाद</span>]</p>
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया: मनोरंजन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक प्रदूषण का नया दौर</span>]</p>
<p class="MsoNormal">  </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;" align="right">·      <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी मानव सभ्यता को खतरा बाहरी प्रदूषणों से था—धुएँ से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लास्टिक से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रसायनों से। पर आज सबसे घातक प्रदूषण हमारी जेब में रखा हुआ है—मोबाइल की चमकती स्क्रीन और उस पर दौड़ती सोशल मीडिया की दुनिया। यह प्रदूषण दिखाई नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मन और चेतना को भीतर से क्षीण कर देता है। यह शरीर को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और आशा को खा जाता है। यही कारण है</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173029/the-invisible-poison-growing-in-the-pocket-of-social-media"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/social_media_collection_2026.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;" align="center"> </p>
<blockquote class="format1">
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">आभासी सफलता का दबाव और युवा मन का अवसाद</span>]</p>
<p class="MsoNormal" align="center">[<span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया: मनोरंजन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक प्रदूषण का नया दौर</span>]</p>
<p class="MsoNormal"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;" align="right">·      <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी मानव सभ्यता को खतरा बाहरी प्रदूषणों से था—धुएँ से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लास्टिक से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रसायनों से। पर आज सबसे घातक प्रदूषण हमारी जेब में रखा हुआ है—मोबाइल की चमकती स्क्रीन और उस पर दौड़ती सोशल मीडिया की दुनिया। यह प्रदूषण दिखाई नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मन और चेतना को भीतर से क्षीण कर देता है। यह शरीर को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसम्मान और आशा को खा जाता है। यही कारण है कि बीते कुछ वर्षों में युवाओं में अवसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अकेलापन और आत्महत्या की घटनाओं के पीछे सोशल मीडिया की भूमिका तेजी से चर्चा में आई है। यह तकनीक सुविधा का साधन बनकर आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अनियंत्रित उपयोग ने इसे मानसिक विष में बदल दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया का सबसे गहरा असर युवा मन की तुलना करने की प्रवृत्ति पर पड़ता है। यह मंच एक ऐसा आभासी संसार रच देता है जहाँ हर व्यक्ति अपनी जिंदगी का सबसे चमकदार पक्ष ही दिखाता है। महंगी कारें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शानदार यात्राएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आकर्षक चेहरे और लगातार मिलती सफलता—इन दृश्यों को देखकर एक सामान्य युवा अनजाने में स्वयं को असफल समझने लगता है। उसे लगने लगता है कि बाकी सब लोग जीवन की दौड़ में उससे बहुत आगे निकल चुके हैं। यही निरंतर तुलना धीरे-धीरे आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है और व्यक्ति को भीतर से तोड़ने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली प्रतिक्रिया—लाइक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमेंट और शेयर—एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक लत पैदा करती है। हर बार जब किसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मस्तिष्क में डोपामिन नामक रसायन सक्रिय होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो क्षणिक खुशी देता है। लेकिन यही खुशी व्यक्ति को बार-बार उसी प्रतिक्रिया की तलाश में बाँध देती है। जब अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो निराशा और बेचैनी बढ़ जाती है। धीरे-धीरे यह मानसिक निर्भरता व्यक्ति के आत्मसम्मान को पूरी तरह बाहरी स्वीकृति पर आश्रित बना देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समस्या का दूसरा गंभीर पक्ष है साइबर बुलिंग। सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही अपमान और उत्पीड़न के नए रास्ते भी खोल दिए। गुमनाम पहचान के पीछे छिपकर लोग दूसरों का मजाक उड़ाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपमानजनक टिप्पणियाँ करते हैं या निजी तस्वीरों को वायरल कर देते हैं। किशोर और युवा उम्र में आत्मसम्मान बेहद संवेदनशील होता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में सार्वजनिक अपमान मानसिक आघात बन जाता है। कई मामलों में यह अपमान इतना गहरा होता है कि पीड़ित युवा स्वयं को समाज के सामने असहाय महसूस करने लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सोशल मीडिया युवाओं के वास्तविक संबंधों को कमजोर कर रहा है। पहले दुख या तनाव के समय व्यक्ति परिवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रों या समाज के बीच समाधान खोजता था। अब वही व्यक्ति अपनी भावनाएँ स्क्रीन पर उकेर देता है। लेकिन वर्चुअल दुनिया में संवेदनशीलता का स्थान अक्सर प्रतिक्रिया और मनोरंजन ने ले लिया है। कई बार गंभीर पीड़ा को भी लोग हल्के में लेते हैं या उसे मजाक बना देते हैं। परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति और अधिक अकेला महसूस करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लत का प्रभाव युवाओं की दिनचर्या पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। देर रात तक मोबाइल पर सक्रिय रहने से नींद प्रभावित होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। नींद की कमी से चिड़चिड़ापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिंता और ध्यान की कमी बढ़ती है। पढ़ाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करियर और सामाजिक जीवन पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। जब व्यक्ति बार-बार असफलता या असंतुलन महसूस करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके भीतर निराशा की भावना और गहरी होने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया की एक और खतरनाक प्रवृत्ति है “परफेक्ट लाइफ” का भ्रम। यह मंच वास्तविक जीवन की जटिलताओं को छिपाकर केवल आकर्षक क्षणों को सामने लाता है। संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असफलता और साधारण जीवन के पल लगभग गायब रहते हैं। परिणामस्वरूप देखने वाले युवाओं को लगता है कि बाकी सभी लोग खुश और सफल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल वही संघर्ष कर रहे हैं। यही भ्रम धीरे-धीरे आत्मसम्मान को कमजोर करता है और जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल के वर्षों में कई देशों में किए गए अध्ययन यह संकेत देते हैं कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग और युवाओं में बढ़ती मानसिक समस्याओं के बीच स्पष्ट संबंध दिखाई देता है। चिंता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्महीनता और अकेलापन—ये सभी समस्याएँ अनियंत्रित सोशल मीडिया उपयोग से और बढ़ सकती हैं। जब व्यक्ति लगातार आभासी दुनिया में डूबा रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जूझने की उसकी क्षमता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समस्या का समाधान केवल तकनीक से दूरी बनाने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके विवेकपूर्ण उपयोग में छिपा है। युवाओं को यह समझाना आवश्यक है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली दुनिया पूरी सच्चाई नहीं होती। यह जीवन का केवल चुना हुआ और सजाया हुआ हिस्सा होता है। यदि युवा इस अंतर को समझ लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे तुलना और निराशा के जाल से बच सकते हैं। इसके साथ ही डिजिटल अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है—सीमित समय तक उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियमित विश्राम और वास्तविक जीवन की गतिविधियों में भागीदारी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार और शिक्षा संस्थानों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता को बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझने का प्रयास करना चाहिए। विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि युवा ऑनलाइन दुनिया के खतरों को पहचान सकें। यदि समाज समय रहते संवेदनशीलता और समर्थन का वातावरण बना सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज तकनीक को नकारना संभव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वह हमारे जीवन की धड़कनों में शामिल हो चुकी है। प्रश्न यह नहीं कि सोशल मीडिया रहे या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि हम उसका उपयोग किस विवेक और जिम्मेदारी के साथ करते हैं। यदि इसका संतुलित और सजग उपयोग हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही माध्यम ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रचनात्मकता और संवाद का सशक्त सेतु बन सकता है। लेकिन यदि नियंत्रण खो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यही चमकती स्क्रीन धीरे-धीरे मानसिक विष बनकर हमारी युवा पीढ़ी की ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और आशा को भीतर ही भीतर निगल सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता है कि समाज इस अदृश्य खतरे को गंभीरता से समझे। प्लास्टिक पर्यावरण को प्रदूषित करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सोशल मीडिया का असंतुलित प्रभाव मन और विचारों को प्रदूषित कर सकता है। यदि हम युवाओं को सुरक्षित और सशक्त भविष्य देना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमें उन्हें आभासी चमक से अधिक वास्तविक जीवन के मूल्य सिखाने होंगे। तभी यह पीढ़ी निराशा के अंधेरे में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्मविश्वास और संतुलन की रोशनी में आगे बढ़ सकेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:31:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको फूलपुर में रन फॉर सेफ्टी’ एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर इकाई में राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह (6 मार्च से 12 मार्च 2026) के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस सप्ताह का शुभारंभ 06 मार्च 2026 को इकाई प्रमुख द्वारा सुरक्षा ध्वज फहराकर तथा कर्मचारियों को सुरक्षा शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सुरक्षित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173019/organization-of-run-for-safety-and-painting-competition-in-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001642891.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर इकाई में राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह (6 मार्च से 12 मार्च 2026) के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस सप्ताह का शुभारंभ 06 मार्च 2026 को इकाई प्रमुख द्वारा सुरक्षा ध्वज फहराकर तथा कर्मचारियों को सुरक्षा शपथ दिलाकर किया गया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा के नियमों का पालन करने और सुरक्षित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के निवासियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारियों, कर्मचारियों, महिलाओं तथा युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सुरक्षा का संदेश दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1001642892.jpg" alt="इसी क्रम में आज प्रातः इफको टाउनशिप घियानगर में ‘रन फॉर सेफ्टी’ का आयोजन किया गया। इस दौड़ का उद्देश्य कर्मचारियों, उनके परिजनों तथा टाउनशिप के निवासियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना" width="883" height="587"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके साथ ही सुरक्षा सप्ताह के अवसर पर टाउनशिप में बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय सुरक्षा एवं सुरक्षित जीवन से संबंधित था, जिसमें बच्चों ने रंगों के माध्यम से सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी में भी सुरक्षा के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इफको फूलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह के दौरान कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों के लिए आगे भी विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि कार्यस्थल और दैनिक जीवन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 20:59:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>होली के बाद मंदिर परिसर में चलाया गया बृहद स्वच्छता अभियान</title>
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात राहुल जायसवाल की रिपोर्ट </strong></div>
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<div><strong>नैनी,प्रयागराज। </strong></div>
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<div>होली पर्व के पश्चात रविवार को सरस्वती सामाजिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री शूलटांकेश्वर महादेव मंदिर,अरैल परिसर में बृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।</div>
<div>  </div>
<div>यह अभियान रविवार को प्रातः 7:00 बजे से आयोजित किया गया।कार्यक्रम अधिकारी एडवोकेट आत्म प्रकाश यादव के नेतृत्व में मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया गया।</div>
<div>  </div>
<div>इस दौरान मंदिर परिसर और गंगा घाट पर फैली गंदगी को साफ किया गया। </div>
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<div>उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस प्रकार हम अपने घरों को स्वच्छ और साफ रखते हैं, उसी प्रकार मंदिर, देवालय और गंगा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172949/after-holi-a-massive-cleanliness-campaign-was-conducted-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260308-wa0244.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div> </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात राहुल जायसवाल की रिपोर्ट </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>नैनी,प्रयागराज। </strong></div>
<div> </div>
<div>होली पर्व के पश्चात रविवार को सरस्वती सामाजिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री शूलटांकेश्वर महादेव मंदिर,अरैल परिसर में बृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।</div>
<div> </div>
<div>यह अभियान रविवार को प्रातः 7:00 बजे से आयोजित किया गया।कार्यक्रम अधिकारी एडवोकेट आत्म प्रकाश यादव के नेतृत्व में मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया गया।</div>
<div> </div>
<div>इस दौरान मंदिर परिसर और गंगा घाट पर फैली गंदगी को साफ किया गया। </div>
<div> </div>
<div>उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस प्रकार हम अपने घरों को स्वच्छ और साफ रखते हैं, उसी प्रकार मंदिर, देवालय और गंगा घाटों को भी स्वच्छ रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।</div>
<div> </div>
<div>होली पर्व के बाद मंदिर परिसर में काफी गंदगी जमा हो गई थी, जिसे सरस्वती परिवार के सदस्यों ने मिलकर साफ किया।स्वच्छता अभियान के दौरान उपस्थित लोगों ने एक स्वर में लोगों से अपील की कि गंगा घाटों, शिव मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों को स्वच्छ बनाए रखने में सभी को सहयोग करना चाहिए।.</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर धीरज यादव, सहदेव चौरसिया, शशिकांत पांडेय, इंदु प्रकाश सिंह, प्रियांशु उपाध्याय, धीरज रजवानी, शैलेंद्र पाल, नीरज पांडेय, विनोद गुरानी, सौरभ यादव, गौरव यादव और आर्यन यादव सहित कई लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।</div>
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<div class="yj6qo"> </div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 01:00:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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