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                <title>international hindi news - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>ईरान का आर्थिक संकट: रियाल की गिरावट से वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत की नयी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><strong>डॉ.दीपकुमार शुक्ल(स्वतन्त्र टिप्पणीकार)</strong></p>
<p>ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। आर्थिक संकट ने न केवल देश की जनता को झकझोर दिया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी गहरा असर डाला है। ईरानी मुद्रा रियाल की रिकॉर्ड गिरावट, महँगाई का चालीस प्रतिशत से ऊपर पहुँचना और विदेशी मुद्रा भण्डार पर दबाव ने ईरान की अर्थव्यवस्था को लगभग पंगु बना दिया है। एक डॉलर के लिए लगभग 1.42 से 1.45 मिलियन रियाल देने पड़ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि देश की मुद्रा किस हद तक कमजोर हो</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165490/irans-economic-crisis-due-to-the-fall-of-rial-global"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/deep-shukla.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><strong>डॉ.दीपकुमार शुक्ल(स्वतन्त्र टिप्पणीकार)</strong></p>
<p>ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। आर्थिक संकट ने न केवल देश की जनता को झकझोर दिया है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी गहरा असर डाला है। ईरानी मुद्रा रियाल की रिकॉर्ड गिरावट, महँगाई का चालीस प्रतिशत से ऊपर पहुँचना और विदेशी मुद्रा भण्डार पर दबाव ने ईरान की अर्थव्यवस्था को लगभग पंगु बना दिया है। एक डॉलर के लिए लगभग 1.42 से 1.45 मिलियन रियाल देने पड़ रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि देश की मुद्रा किस हद तक कमजोर हो चुकी है। इस स्थिति ने आयात क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है और आम जनता के लिए रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना कठिन हो गया है। अनाप-शनाप कीमतें बढ़ने से खाद्य पदार्थों से लेकर आवश्यक वस्तुओं तक आम नागरिकों की पहुँच से बाहर होते जा रहे हैं। यही कारण है कि जनता सड़कों पर उतर आयी है| विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक सुधार की माँग तक सीमित ना रहकर शासन परिवर्तन की माँग तक पहुँच चुके हैं।</p>
<p>दिसम्बर-2025 के अन्त में व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुआ आन्दोलन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया। तेहरान ग्रैंड बाज़ार और मोबाइल मार्केट्स में दुकानदारों ने कारोबार बन्द कर दिया। विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस आन्दोलन में शामिल हो गये और धीरे-धीरे यह असन्तोष राजनीतिक विद्रोह का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी खुले आम शासन की वैधता पर सवाल उठाते हुए “Death to the oppressor—whether Shah or Supreme Leader” जैसे नारे लगा रहे हैं। जिसका अर्थ है “अत्याचारी का नाश हो- चाहे वह शाह हो या सर्वोच्च नेता”। जनता का मानना है कि मौजूदा नेतृत्व अक्षम हो चुका है। हालात इतने बिगड़े कि मौजूदा केन्द्रीय बैंक गवर्नर को इस्तीफ़ा देना पड़ा और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने नया गवर्नर नियुक्त किया। लेकिन यह बदलाव भी जनता के गुस्से को शान्त नहीं कर पाया| क्योंकि संकट की जड़ें कहीं अधिक गहरी हैं।</p>
<p>लगातार बढ़ती महँगाई, विदेशी मुद्रा भण्डार की कमी और आयात पर अत्यधिक निर्भरता ने रियाल को बुरी तरह कमजोर कर दिया है। दरअसल सितम्बर -2025 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा “स्नैपबैक प्रतिबन्ध” लागू कर देने से तेल और गैस निर्यात पर रोक लग गयी| जिससे ईरान की विदेशी मुद्रा आय घट गयी। मध्य-पूर्व में हालिया संघर्षों ने व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे निवेशकों का भरोसा घटा और पूँजी पलायन बढ़ा। राजनीतिक भ्रष्टाचार और शासन की प्राथमिकताएँ भी इस संकट के लिए जिम्मेदार हैं। सरकार ने घरेलू आर्थिक सुधारों की बजाय “एक्सिस ऑफ रजिस्टेंस” अर्थात क्षेत्रीय सैन्य गठबन्धन को फण्डिंग की  प्राथमिकता दी। इसके बाद घरेलू स्तर पर पानी और ऊर्जा संकट की उत्पादन लागत बढ़ गयी| जिसका सीधा असर उद्योग तथा कृषि पर पड़ा।</p>
<p>ईरान का संकट केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं है। यह दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों में से एक है। आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक संकट ने इसके निर्यात तन्त्र को कमजोर कर दिया है। अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबन्धों और घरेलू संकट के कारण ईरान का तेल निर्यात घट रहा है। जिससे वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ गयी है। एशियाई देशों, विशेषकर भारत और चीन को वैकल्पिक सप्लाई चैन तलाशनी पड़ रही हैं। ईरान की अस्थिरता से ओपेक देशों पर दबाव बढ़ा है कि वे उत्पादन बढ़ाएँ। इससे अमेरिका और सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादक देशों को बाज़ार स्थिर करने का अवसर मिला है। यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिन्ता बढ़ी है,  खासकर सर्दियों के मौसम में जब ऊर्जा की माँग अधिक होती है। इस संकट ने वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ईरान शान्तिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाता है या उन्हें मारता है तो अमेरिका उनकी सहायता के लिए आगे आएगा। यह बयान सीधे तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर को चुनौती माना जा रहा है। हालाकि ईरान ने पलटवार करते हुए ट्रम्प को हद में रहने की चेतवानी दी है| अब सबकी नज़र इस बात पर है कि चीन और रूस जैसे देश ईरान के मौजूदा हालात पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। रूस ने ईरान के ताजा हालात पर चिन्ता जतायी है, परन्तु भारत ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि उनकी सरकार सभी को धैर्यपूर्वक सुनने को तैयार है और बैंकिंग सिस्टम में सुधार लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन जनता का गुस्सा इतना गहरा है कि इन बयानों से हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं।</p>
<p>भारत पर इस संकट का सीधा असर पड़ रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। ईरान का संकट और मध्य-पूर्व की अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब और रूस से तेल आयात करता है लेकिन ईरान की अस्थिरता से वैश्विक बाज़ार में कीमतें ऊपर जाएँगी। यदि ईरान “होर्मुज जलडमरूमध्य” को प्रभावित करता है तो 20 से 25 प्रतिशत वैश्विक तेल और एलएनजी सप्लाई बाधित होगी, जिससे भारत की ऊर्जा लागत बढ़ेगी। ईंधन महँगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी। खाद्य वस्तुओं और उपभोक्ता सामानों की कीमतें ऊपर जाएँगी। डॉलर की मज़बूती से रुपया कमजोर होगा, जिससे आयात महँगा पड़ेगा। भारत-ईरान व्यापार भी प्रभावित होगा। भारत ईरान से पेट्रोकेमिकल्स और खनिज आयात करता है। ईरान के वर्तमान संकट से यह व्यापार घट सकता है। भारतीय दवाइयाँ और कृषि उत्पाद ईरान में महँगे हो सकते हैं। वैश्विक बाज़ार में अस्थिरता से भारतीय शेयर बाज़ार पर दबाव बढ़ेगा, जैसा कि हाल ही में सेंसेक्स में गिरावट देखी गयी। इस संकट से सोने की कीमतें भी बढ़ेंगी क्योंकि निवेशक सुरक्षित विकल्प चुनते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोना आयातक है, इसलिए घरेलू बाज़ार में सोना महँगा होगा। यह संकट भारत के लिए जोखिम और अवसर दोनों लेकर आया है। जोखिम यह है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ेगा, महँगाई और व्यापार घाटा बढ़ सकता है। अवसर यह है कि भारत रूस और सऊदी अरब से आयात बढ़ाकर वैकल्पिक सप्लाई चैन मजबूत कर सकता है। घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को तेज़ करने का भी यह सही समय है। भारत के पास विविध आयात स्रोत और मज़बूत मैक्रोइकोनॉमिक संकेतक हैं, लेकिन तेल कीमतों और डॉलर की मज़बूती से घरेलू महँगाई बढ़ने की सम्भावना  है। आने वाले महीनों में यह संकट मध्य-पूर्व की स्थिरता और अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ारों के लिए गम्भीर चुनौती बन सकता है।</p>
<p>फिलहाल ईरान में हालात सामान्य होते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं। बढ़ती महँगाई ने मिडिल ईस्ट के इस देश के लोगों की चिन्ता बढ़ा दी है। कारोबारी से लेकर छात्र तक आन्दोलन में शामिल हो चुके हैं। धीरे-धीरे यह प्रदर्शन ईरान के आध्यात्मिक शहर कोम तक पहुँच चुका है। कोम ईरान में इस्लाम की राह दिखाने वाला शहर है और शिया मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। वहाँ तक आन्दोलन का पहुँचना यह दर्शाता है कि जनता का असन्तोष धार्मिक और सांस्कृतिक केन्द्रों तक फैल गया है। विपक्षी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक तेहरान, इस्फाहन, लोरेस्तान, मज़नदारन, खुजेस्तान, हमदान और फार्स में विरोध प्रदर्शन की आग फैल चुकी है। प्रदर्शनकारियों की भीड़ लगातार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह खामनेई के खिलाफ नारेबाज़ी कर रही है।</p>
<p>स्पष्ट है कि ईरान का संकट केवल घरेलू समस्या नहीं है बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। यह संकट जहाँ घरेलू स्तर पर जनता की रोज़मर्रा की जिन्दगी को प्रभावित कर रहा है, राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दे रहा है और शासन की वैधता पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीँ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर यह संकट ऊर्जा बाज़ार को अस्थिर कर रहा है, वैश्विक महँगाई को बढ़ा रहा है और भारत जैसे देशों की आर्थिक स्थिरता को चुनौती दे रहा है। भारत को इस संकट से निपटने के लिए अपनी ऊर्जा रणनीति को और अधिक मज़बूत करना होगा, वैकल्पिक सप्लाई चैन विकसित करनी होगी तथा नवीकरणीय ऊर्जा निवेश को तेज़ करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 21:31:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम की धरती से शुरू हुआ ‘धर्म युद्ध’ कैसे बन गया मर्यादा, सत्य और धर्म का संदेश?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  ’निसिचर हीन करउँ महि, भुज उठाइ पन कीन्ह’ दोहे की पंक्तियों में वीर रस का ऐसा भाव है, जो दीनों की दुर्दशा या धर्म की हानि देखते ही मानवता के शत्रु का समूल नाश करने की प्रतिज्ञा लेता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद भुज एयरबेस से भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस देश के आराध्य भगवान राम की अन्याय के खिलाफ प्रतिज्ञा को दोहराया। श्रीरामचरितमानस के बालकांड के इस दोहे का भाव सदियों से भारत का संस्कार है, जिसका अर्थ है- ‘भगवान राम ने अपने हाथों को उठाकर प्रण लिया कि वह पृथ्वी को राक्षसों से</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पिक्चर</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151987/how-did-dharma-war-become-dignity-and-religion-started-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/20250512193l-1980x1267.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> ’निसिचर हीन करउँ महि, भुज उठाइ पन कीन्ह’ दोहे की पंक्तियों में वीर रस का ऐसा भाव है, जो दीनों की दुर्दशा या धर्म की हानि देखते ही मानवता के शत्रु का समूल नाश करने की प्रतिज्ञा लेता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद भुज एयरबेस से भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस देश के आराध्य भगवान राम की अन्याय के खिलाफ प्रतिज्ञा को दोहराया। श्रीरामचरितमानस के बालकांड के इस दोहे का भाव सदियों से भारत का संस्कार है, जिसका अर्थ है- ‘भगवान राम ने अपने हाथों को उठाकर प्रण लिया कि वह पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करेंगे।’ आज आतंकवाद रूपी राक्षस का समूल नाश करने के लिए भगवान राम को आदर्श मानने वाले देश ने एक बार फिर ये प्रतिज्ञा दोहराई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पिक्चर अभी बाकी है</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सीजफायर के बाद ऑपरेशन ‘सिंदूर’ को लेकर सवाल उठाने वालों की शंका पर अब विराम लग जाना चाहिए। भुज एयरबेस से रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर एक ट्रेलर मात्र था, सही समय पर हम पूरी पिक्चर भी दुनिया को दिखाएंगे। पाकिस्तान को गुड बिहेवियर के लिए प्रोबेशन पर रखा है, अगर उसके व्यवहार में गड़बड़ी आती है तो उसे कड़े से कड़ा दंड दिया जाएगा।‘ यानी ये तो स्पष्ट है कि रणनीतिक कारणों से ऑपरेशन सिंदूर को भले ही स्थगित किया गया हो, लेकिन यह किसी भी तरह से पीछे हटना नहीं है। यह केवल एक रणनीतिक विश्राम है ताकि आतंकवाद के खिलाफ अगला कदम और अधिक सटीक और प्रभावशाली हो। पहले प्रधानमंत्री और अब रक्षामंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग अभी जारी है और यह निर्णायक होगी। इससे यह भी जाहिर होता है कि आतंक के पनाहगार-पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी भारत नहीं बरतेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक ऐलान</strong></p>
<p style="text-align:justify;">भारत का यह रूप न केवल देशवासियों को सुरक्षा का भरोसा देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी मर्यादा, सत्य और धर्म का संदेश दे रहा है। आतंकवाद के विरुद्ध यह लड़ाई अब एक राष्ट्रीय संकल्प बन चुकी है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान कि हम हमारे आराध्य श्रीराम का अनुसरण करते हुए आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें वह आसुरी शक्ति का विनाश करने का प्रण लेते हैं, ये जाहिर करता है कि जैसे हर युग में भारत भूमि से राक्षसों का नास किया गया, ठीक उसी प्रकार आज आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प पूरा होने तक किसी भी निर्णय को आखिरी नहीं माना जाए। इस बात से यह साबित होता है कि वाकई आज हमारी सोच और सामर्थ्य दोनों में बदलाव आया है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के जरिए भारत ने दुनिया को बड़ा संदेश दिया है कि अब भारत आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके लिए अब कूटनीति के साथ-साथ सैन्य शक्ति का भी इस्तेमाल खुलेआम किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>‘शठे शाठ्यम समाचरेत्’</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जिन लोगों को ये लगता है कि ऑपरेशन सिंदूर को रोके जाने से कहीं हम पाकिस्तान की चाल में तो नहीं फंस रहे, उनकी या पड़ोसी मुल्क की सभी गलतफहमियों को दूर करने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के ‘शठे शाठ्यम समाचरेत्’ अर्थात् दुष्ट के साथ दुष्टता के ही व्यवहार वाले संदेश पर गौर करना चाहिए। ‘सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति। ममता रत सन ज्ञान कहानी। अति लोभी सन बिरती बखानी। क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। उसर बिज बए फल जथा। अर्थात् मुर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से उदारता का उपदेश, ममता में फंसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शांति) की बात और कामी से भगवान की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा उसर में बीज बोने से होता है। पाकिस्तान की प्रवृत्ति को बताते हुए रामचरितमानस की गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित इस चौपाई के जरिए राजनाथ सिंह ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद पर पर्दा डालने की किसी भी कोशिश को कामयाब नहीं होने देगा। उसका असल चेहरा अब किसी से छिपा नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>एक के बाद एक सभी झूठ बेनकाब</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर अगर पाकिस्तान नहीं सुधरा तो आने वाले समय में आतंकवाद के खिलाफ भारत और अधिक मजबूती से जवाब देने को तैयार है। इसका अंदाजा ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से दुनिया को भी लग गया है। इसमें कोई शक नहीं कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकरोधी रणनीति को नई मजबूती दी है। यह ऑपरेशन न केवल आतंकी नेटवर्क पर करारा प्रहार था बल्कि इससे जुड़ी सूचनाओं ने पाकिस्तान के कई भ्रामक दावों को भी उजागर किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही इस ऑपरेशन में जिस तरीके से उच्च स्तरीय इंटेलिजेंस का प्रयोग करते हुए जिन ठिकानों पर कार्रवाई की गई, उससे साबित होता है कि वे पहले से निगरानी में थे। इस तरह की सटीक कार्रवाई ने आतंकी नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने में मदद की है।और इस बात को अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी स्वीकार करने लगा है। कई ब्रिटिश पत्रकारों ने मोदी की आतंकवाद के खिलाफ मुहीम को सही बताते हुए साथ दिया। प्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक और पत्रकार मार्क टुली ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पीएम मोदी की आवाज को बुलंद किया है। ब्रिटिश पत्रकार सैम स्टीवेन्सन ने भी भारत के लोकतांत्रिक उत्साह की सराहना की है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुरक्षा बलों का तालमेल और साहस</strong></p>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर में सभी भारतीय सुरक्षाबलों, NIA और IB ने मिलकर काम किया। यह समन्वय दर्शाता है कि भारत आतंकवाद से निपटने में एक संयुक्त दृष्टिकोण अपना रहा है। ऐसी कार्रवाइयां न केवल फिजिकल रूप से आतंकियों को खत्म करती हैं, बल्कि उनके नेटवर्क और समर्थकों के मनोबल को भी गहरा आघात पहुंचाती हैं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता व दृढ़ता और मजबूत हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की बदलती रक्षा नीति और संकल्प का प्रमाण बन चुके ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि कोई भी देश आतंक को शह देगा तो उसे राजनीतिक या सैन्य स्तर पर जवाब जरूर मिलेगा। दहशतगर्दी का समर्थन करने वालों के लिए वाकई आतंकवाद के माथे पर खींची गई ‘सिंदूर’ की इस लाल लकीर को हलके में लेने की गलती दोहराना खुद के सर्वनाश को न्योता देने से कम नहीं होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 May 2025 16:53:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नहीं चला ट्रंप कार्ड, पाक सेना ने 4 घंटे में तोड़ा सीजफायर; अब शहबाज के तख्ता पलट की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका </strong>की मध्यस्थता से हुए भारत-पाकिस्तान सीजफायर का पाकिस्तानी सेना ने उल्लंघन किया. सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन हमले की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया. इससे भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव फिर बढ़ गया है. पाकिस्तान में सेना की इस कार्रवाई से तख्तापलट की आशंका भी जताई जा रही है.</p>
<p style="text-align:justify;">पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को लेकर अमेरिका की मध्यस्थता में सीजफायर की बात कही गई थी, लेकिन सीजफायर की घोषणा के चार घंटे के बाद ही पाकिस्तानी सेना ने पीएम शहबाज शरीफ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151788/trump-card-did-not-run-pak-army-broke-ceasefire-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-05/whatsapp-image-2025-05-10-at-21.59.39_83b08c40.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका </strong>की मध्यस्थता से हुए भारत-पाकिस्तान सीजफायर का पाकिस्तानी सेना ने उल्लंघन किया. सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन हमले की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया. इससे भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव फिर बढ़ गया है. पाकिस्तान में सेना की इस कार्रवाई से तख्तापलट की आशंका भी जताई जा रही है.</p>
<p style="text-align:justify;">पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को लेकर अमेरिका की मध्यस्थता में सीजफायर की बात कही गई थी, लेकिन सीजफायर की घोषणा के चार घंटे के बाद ही पाकिस्तानी सेना ने पीएम शहबाज शरीफ की बात मानने से इनकार कर दिया और पाकिस्तानी सेना की ओर से फिर से भारतीय इलाकों में ड्रोन दागने की कोशिश की गई, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया है. बता दें कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुए सीजफायर का शहबाज सरकार ने समर्थन किया था, लेकिन अब जिस तरह से पाकिस्तान सेना बगावत पर उतर आई है. उससे पाकिस्तान में तख्ता पलट की आशंका भी बढ़ गयी है.</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1">दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना द्वारा सीजफायर तोड़ने के बाद राजस्थान के बाड़मेर, पंजाब के फिरोजपुर, गुरुदासपुर और पठानकोट और श्रीनगर में फिर से ड्रोन भेजने की कोशिश की गई, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया.</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />पाकिस्तान की ओर से सीजफायर के उल्लंघन के बाद पंजाब के फिरोजपुर में भी ब्लैकआउट एक बार फिर से घोषित किया गया. शहर में फिर खतरे के सायरन गूंजने लगे. इसके बाद जिला प्रशासन ने तुरंत बाजार दुकानें बंद करने की अपील की जारी की. तुरंत ब्लैक आउट करने की अपील की गई. इसके साथ ही सड़क पर चल रहे वाहनों की हेडलाइट भी बंद करवाई गई. हालांकि अब तक किसी तरह के धमाके की आवाज नहीं लेकिन एयर अटैक से सायरन एक्टिव हो गये हैं.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सीजफायर के 4 घंटे के बाद हुआ उल्लंघन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><br />पाकिस्तान ने शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर कई स्थानों पर संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन किया, जबकि दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनने के कुछ ही घंटे बाद ऐसा किया गया. सूत्रों के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को किसी भी संघर्ष विराम उल्लंघन का पूरी ताकत से जवाब देने का निर्देश दिया गया है.</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई भारत द्वारा यह घोषणा किए जाने के कुछ ही समय बाद हुई कि इस्लामाबाद द्वारा युद्धविराम वार्ता शुरू किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौता हो गया है. इसके तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार ने भी इसकी पुष्टि की. श्रीनगर में कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई और क्षेत्र में ब्लैकआउट लागू कर दिया गया. राजस्थान के पोखरण और कश्मीर के बारामूला में एक-एक ड्रोन को मार गिराया गया है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>उमर अब्दुल्ला ने पूछा- सीजफायर क्या हुआ?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तानी सेना ने अखनूर, राजौरी और आरएस पुरा सेक्टरों में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तोपखाने से गोलाबारी की. जम्मू के पलांवाला सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भी संघर्ष विराम उल्लंघन की खबरें आईं. बारामूला में एक ड्रोन को मार गिराया गया तथा संदिग्ध मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) देखे गए. बारामूला और श्रीनगर दोनों जगहों पर ब्लैकआउट लागू कर दिया गया है.<br />राजौरी में भी ड्रोन देखे गए तथा जम्मू क्षेत्र के सांबा जिले से हवाई हमले का सायरन बजने की सूचना मिली. हवाई गतिविधि की सूचना मिली तथा माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के आधार शिविर कटरा में ब्लैकआउट लागू कर दिया गया.</p>
<p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, “संघर्ष विराम को आखिर क्या हो गया? श्रीनगर में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं!!!” उन्होंने ड्रोन हमले का एक वीडियो साझा करते हुए कहा, “यह कोई संघर्ष विराम नहीं है. श्रीनगर के मध्य में वायु रक्षा इकाइयों ने अभी-अभी गोलीबारी शुरू की है.”</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 May 2025 22:03:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिर क्या है इमरान खान और आसिम मुनीर की जेल में हुई सीक्रेट मीटिंग का राज़ </title>
                                    <description><![CDATA[<p>दुनियाभर में अपनी बिगड़ती छवि को सुधारने के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने फैसला किया है कि वो इमरान खान की जुबान पर लगाम लगाने के लिए ताकत का नहीं बल्कि कूटनीति का सहारा लेंगे। इसी के तहत उन्होंने इमरान खान को दोस्ती का ऑफर दिया है। पाकिस्तानी मीडिया की माने तो सेना प्रमुख आसिम मुनीर पुरानी दुश्मनी भुलाकर इमरान खान से हाथ मिलाना चाहते हैं। खबरों की माने तो आसिम मुनीर गुपचुप तरीके से रावलपिंडी की अदियाला जेल गए थे।</p>
<p>  उन्होंने इमरान खान से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पाकिस्तानी सेना की तरफ से बयान आया</p>
<p>कहा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/141004/what-is-the-secret-of-the-secret-meeting-between-imran"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/imran-khan_large_1321_19.webp" alt=""></a><br /><p>दुनियाभर में अपनी बिगड़ती छवि को सुधारने के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने फैसला किया है कि वो इमरान खान की जुबान पर लगाम लगाने के लिए ताकत का नहीं बल्कि कूटनीति का सहारा लेंगे। इसी के तहत उन्होंने इमरान खान को दोस्ती का ऑफर दिया है। पाकिस्तानी मीडिया की माने तो सेना प्रमुख आसिम मुनीर पुरानी दुश्मनी भुलाकर इमरान खान से हाथ मिलाना चाहते हैं। खबरों की माने तो आसिम मुनीर गुपचुप तरीके से रावलपिंडी की अदियाला जेल गए थे।</p>
<p> उन्होंने इमरान खान से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पाकिस्तानी सेना की तरफ से बयान आया कि इमरान खान अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगे। अंदर की खबर ये है कि इमरान खान और आसिम मुनीर की डील फाइनल हो चुकी है। इमरान खान के सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते ही पाकिस्तान की सेना उन्हें सत्ता में वापस लाने की तैयारी शुरू कर देगी।</p>
<p>कहा तो ये भी जा रहा है कि नवाज शरीफ को एक बार फिर से पाकिस्तान छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि ये खबरें कितनी सही है ये तो बताना मुश्किल है। लेकिन इमरान खान का लगातार सेना के खिलाफ जहर उगलना और सेना का उन आरोपों को खारिज करना।</p>
<p>ये इशारा जरूर करता है कि कहीं न कहीं आसिम मुनीर और इमरान खान के बीच कोई न कोई खिचड़ी तो पक रही है। महानिदेशक इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया था कि 9 मई के हिंसक विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों से माफी मांगने और कोई भी बातचीत करने से पहले अराजकता की राजनीति से दूर रहने की मांग की थी।</p>
<p>जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक अध्यक्ष इमरान खान ने 9 मई की घटनाओं के लिए माफी मांगने की सेना की मांग को ठुकरा दिया है। इसके साथ ही इमरान ने अपनी गिरफ्तारी के तुरंत बाद पिछले साल देश में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में अपनी पार्टी की संलिप्तता से इनकार किया है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा था कि 9 मई के आरोपियों और अपराधियों को संविधान और कानून के मुताबिक सजा देनी होगी। रावलपिंडी की अदियाला जेल में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान कहा मुझे माफी क्यों मांगनी चाहिए, यह मुझसे मांगी जानी चाहिए।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 May 2024 14:51:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने के क्षेत्र में उत्तर कोरिया ने किया वृद्धि का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International:</strong> उत्तर कोरिया ने अपनी नई, मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए एक ठोस-ईंधन इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। हाइपरसोनिक मिसाइल उच्च तकनीक हथियार प्रणालियों की एक श्रृंखला का हिस्सा है जिसे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने बढ़ती अमेरिकी शत्रुता से निपटने के लिए 2021 में पेश करने का सार्वजनिक रूप से संकल्प लिया था।</p>
<p>आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि किम ने मंगलवार को उत्तर-पश्चिमी रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र’ में हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए बहु चरणीय ठोस ईंधन इंजन के ग्राउंड जेट परीक्षण का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139668/north-korea-claims-progress-in-developing-hypersonic-missiles"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/missile_large_1224_153.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International:</strong> उत्तर कोरिया ने अपनी नई, मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए एक ठोस-ईंधन इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। हाइपरसोनिक मिसाइल उच्च तकनीक हथियार प्रणालियों की एक श्रृंखला का हिस्सा है जिसे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने बढ़ती अमेरिकी शत्रुता से निपटने के लिए 2021 में पेश करने का सार्वजनिक रूप से संकल्प लिया था।</p>
<p>आधिकारिक ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि किम ने मंगलवार को उत्तर-पश्चिमी रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र’ में हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए बहु चरणीय ठोस ईंधन इंजन के ग्राउंड जेट परीक्षण का मार्गदर्शन किया।</p>
<p>इसमें किम के हवाले से कहा गया है कि मध्यम दूरी वाली नई मिसाइल का रणनीतिक महत्व अमेरिका की मुख्य भूमि को निशाना बनाने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह ही है और दुश्मन इसके बारे में बेहतर जानते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139668/north-korea-claims-progress-in-developing-hypersonic-missiles</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2024 17:12:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच अचानक कैसे बिगड़ गए रिश्ते </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International:</strong> पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर सबकुछ ठीक नहीं है। दरअसल, हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो रहे हैं और 18 मार्च की घटना के बाद यह और खराब होना तय है। इस्लामाबाद ने पुष्टि की कि उसने पड़ोसी देश में खुफिया-आधारित आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया था, जिसमें आठ नागरिकों की मौत हो गई। जवाब में तालिबान सरकार ने सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों पर गोलीबारी की।</p>
<p>अब, दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है, पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगा रहा है और तालिबान इस आरोप से इनकार कर रहा है। दरअसल,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139611/how-relations-between-afghanistan-and-pakistan-suddenly-deteriorated"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/download2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International:</strong> पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर सबकुछ ठीक नहीं है। दरअसल, हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो रहे हैं और 18 मार्च की घटना के बाद यह और खराब होना तय है। इस्लामाबाद ने पुष्टि की कि उसने पड़ोसी देश में खुफिया-आधारित आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया था, जिसमें आठ नागरिकों की मौत हो गई। जवाब में तालिबान सरकार ने सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों पर गोलीबारी की।</p>
<p>अब, दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है, पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगा रहा है और तालिबान इस आरोप से इनकार कर रहा है। दरअसल, यह पाकिस्तान सरकार और अफगानिस्तान में तालिबान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का एक और अध्याय होगा।</p>
<p>लेकिन वास्तव में क्या हुआ? और यह घटना इस्लामाबाद और काबुल के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को कैसे प्रभावित करती है? 18 मार्च की तड़के, पाकिस्तान ने पूर्वी अफगानिस्तान के पक्तिका और खोस्त प्रांतों में दो हवाई हमले किए। तालिबान अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में तीन बच्चों सहित कम से कम आठ लोग मारे गए।</p>
<p>तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने घटना की पुष्टि करते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह अपने क्षेत्र में नियंत्रण की कमी और समस्याओं के लिए अफगानिस्तान को दोष न दे। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बहुत बुरे परिणाम हो सकते हैं जो पाकिस्तान के नियंत्रण में नहीं होंगे।</p>
<p>कुछ घंटों बाद, पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने भी हमलों की पुष्टि की और कहा कि उसने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों के अंदर खुफिया-आधारित आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया था। इसमें आगे कहा गया कि हाफिज गुल बहादुर समूह से संबंधित आतंकवादी उसके ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य थे।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ ये आतंकवादी पाकिस्तान के अंदर कई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार थे, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों नागरिकों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की मौत हुई।</p>
<p>कुछ घंटों बाद तालिबान ने हमलों की निंदा की। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने लिखा कि अफगानिस्तान का इस्लामी अमीरात इन हमलों की कड़ी निंदा करता है और इस लापरवाह कार्रवाई को अफगानिस्तान के क्षेत्र का उल्लंघन बताता है। अफगानिस्तान का इस्लामी अमीरात, जिसके पास दुनिया की महाशक्तियों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का लंबा अनुभव है, किसी को भी अपने क्षेत्र पर आक्रमण करने की अनुमति नहीं देता है। </p>
<p>हालाँकि, पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर इस तरह के हमले कोई नई बात नहीं है। हाल के वर्षों में, विश्व स्तर पर नामित आतंकवादी समूह और काबुल में सत्तारूढ़ तालिबान के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टीटीपी द्वारा पाकिस्तानी धरती पर हमले बढ़ गए हैं। वास्तव में पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, 2023 में देश में आतंकवादी हिंसा में 17 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और कुल 306 आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 693 लोग मारे गए।</p>
<p>रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आतंकवादियों के बढ़ते हमलों से संकेत मिलता है कि टीटीपी और उसके सहयोगी पाकिस्तान को बातचीत की प्रक्रिया बहाल करने के लिए 'मजबूर' करने के उद्देश्य से तीव्र आतंकवाद हमले का सहारा लेना जारी रखेंगे।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Mar 2024 17:51:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति चुनाव के लिए रूस में दूसरे दिन भी मतदान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Moscow:</strong> रूस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान के दूसरे दिन शनिवार को मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को छह और साल का कार्यकाल मिलना तय माना जा रहा है। देश के 11 ‘टाइम जोन’ के साथ ही यूक्रेन के अवैध रूप से कब्जाए क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों में मतदान जारी है। यह चुनाव स्वतंत्र मीडिया और प्रतिष्ठित अधिकार समूहों के दमन, पुतिन को राजनीतिक व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण देने और यूक्रेन के खिलाफ मॉस्को के युद्ध के दो साल पूरे होने के बाद हो रहा है। </p>
<p>चुनाव ऐसे समय में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139442/voting-continues-for-the-second-day-in-russia-for-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/6-26-23-mcfaul-photo-scaled.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Moscow:</strong> रूस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान के दूसरे दिन शनिवार को मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को छह और साल का कार्यकाल मिलना तय माना जा रहा है। देश के 11 ‘टाइम जोन’ के साथ ही यूक्रेन के अवैध रूप से कब्जाए क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों में मतदान जारी है। यह चुनाव स्वतंत्र मीडिया और प्रतिष्ठित अधिकार समूहों के दमन, पुतिन को राजनीतिक व्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण देने और यूक्रेन के खिलाफ मॉस्को के युद्ध के दो साल पूरे होने के बाद हो रहा है। </p>
<p>चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब पुतिन के राजनीतिक विरोधी या तो जेल में हैं या विदेश में निर्वासित हैं। पुतिन के धुर विरोधी व सबसे मुखर विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की फरवरी में आर्कटिक जेल में 47 वर्ष की आयु में मौत हो गई थी। अधिकारियों ने कहा कि मतदान व्यवस्थित रूप से जारी है। लेकिन कड़े नियंत्रण के बावजूद, मतदान केंद्रों पर तोड़फोड़ के कम से कम आधा दर्जन मामले सामने आए हैं। पश्चिमी देशों के नेताओं ने इस चुनाव को लोकतंत्र का उपहास बताया है। </p>
<p>यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने कटाक्ष करते हुए शुक्रवार को पुतिन को चुनाव में “जबरदस्त जीत” की बधाई दी, जिसके लिए तकनीकी रूप से मतदान अभी जारी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “न विपक्ष, न स्वतंत्रता, न विकल्प”। इस बीच दिवंगत विपक्षी नेता नवलनी की अनुपस्थिति में उनकी टीम के सामने पुतिन के खिलाफ विपक्षी आंदोलन को बरकरार रखने की मुश्किल चुनौती है। टीम के आंदोलन “नून अगेंस्ट पुतिन” को नवलनी पत्नी यूलिया नवलनया का साथ मिला है। </p>
<p>वे मतदाताओं से पुतिन के शासन और यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के प्रति अपना असंतोष प्रदर्शित करने के लिए मतदान करने का आग्रह कर रहे हैं। नवलनया ने वीडियो संबोधन में कहा, “यह (आंदोलन) बहुत ही सरल एवं सुरक्षित क्रिया है, इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। इससे लाखों लोगों को अपने समान विचारधारा वाले सहयोगियों से रूबरू होने का मौका मिलेगा और यह एहसास करने में मदद मिलेगी कि हम अकेले नहीं हैं, ऐसे लोग हमारे साथ हैं जो युद्ध के खिलाफ हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं और अराजकता के खिलाफ हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Mar 2024 16:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जहाज चालक टीम मेम्बर में दो की मौत, हूती विद्रोहियों ने किया अटैक </title>
                                    <description><![CDATA[<p>यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार को अदन की खाड़ी में एक व्यापारिक जहाज पर मिसाइल से हमला किया, जिसमें चालक दल के दो सदस्यों की मौत हो गई। गाजा में हमास के खिलाफ इजराइल के युद्ध छेड़ने के बाद यह हूती विद्रोहियों का पहला हमला है जिसमें लोगों की जान गई है। हमला बारबाडोस के ध्वज वाले जहाज ‘ट्रू कॉन्फिडेंस’ पर हुआ। इस हमले के बाद एशिया और मध्य पूर्व को यूरोप से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संघर्ष बढ़ गया है, जिससे जहाजों की वैश्विक आवाजाही बाधित हो गई है।</p>
<p>ईरान समर्थित हूतियों ने नवंबर में हमले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139171/two-crew-members-killed-in-attack-by-houthi-rebels"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/houthi_large_0827_153.jpeg" alt=""></a><br /><p>यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार को अदन की खाड़ी में एक व्यापारिक जहाज पर मिसाइल से हमला किया, जिसमें चालक दल के दो सदस्यों की मौत हो गई। गाजा में हमास के खिलाफ इजराइल के युद्ध छेड़ने के बाद यह हूती विद्रोहियों का पहला हमला है जिसमें लोगों की जान गई है। हमला बारबाडोस के ध्वज वाले जहाज ‘ट्रू कॉन्फिडेंस’ पर हुआ। इस हमले के बाद एशिया और मध्य पूर्व को यूरोप से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संघर्ष बढ़ गया है, जिससे जहाजों की वैश्विक आवाजाही बाधित हो गई है।</p>
<p>ईरान समर्थित हूतियों ने नवंबर में हमले शुरू किए थे और अमेरिका ने जनवरी में हवाई हमलों का अभियान शुरू किया था। हालांकि अमेरिका अब तक विद्रोहियों के हमलों को रोक नहीं सका है।</p>
<p>इस बीच, ईरान ने बुधवार को घोषणा की कि वह अमेरिकी ऊर्जा कंपनी शेवरॉन कॉर्प को भेजे जा रहे पांच करोड़ डॉलर मूल्य के कुवैती कच्चे तेल को जब्त कर लेगा। यह कच्चा तेल उस टैंकर में है जिसे उसने करीब एक साल पहले जब्त किया था।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि अदन की खाड़ी में बुधवार को हुए हमले में बारबाडोस के ध्वज वाले ‘ट्रू कॉन्फिडेंस’ नामक मालवाहक पोत को निशाना बनाया गया। इसके बाद यमनी सैनिक होने का दावा करने वाले व्यक्तियों ने रेडियो पर इस हमले की सराहना की।</p>
<p>दो अमेरिकी अधिकारियों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि बैलिस्टिक मिसाइल हमले में जहाज पर सवार चालक दल के दो सदस्यों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 12:26:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाक के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सेना प्रमुख जनरल मुनीर से हुई मुलाकात </title>
                                    <description><![CDATA[<p>पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बुधवार को पहली बार मुलाकात की और पेशेवर तथा सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना ने एक दिन पहले ही शहबाज शरीफ को पद संभालने पर बधाई दी थी। सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री आवास परशहबाज शरीफ को बधाई देने के लिए मुलाकात की और देश के 24वें मुख्य कार्यकारी के रूप में पदभार संभालने के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।</p>
<p>पाकिस्तान में आठ फरवरी को हुए आम चुनाव के लगभग एक महीने बाद शहबाज ने सोमवार को औपचारिक रूप से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139170/pakistan-prime-minister-shahbaz-sharif-met-army-chief-general-munir"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/licensed-image.jpg" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बुधवार को पहली बार मुलाकात की और पेशेवर तथा सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना ने एक दिन पहले ही शहबाज शरीफ को पद संभालने पर बधाई दी थी। सेना प्रमुख जनरल मुनीर ने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री आवास परशहबाज शरीफ को बधाई देने के लिए मुलाकात की और देश के 24वें मुख्य कार्यकारी के रूप में पदभार संभालने के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।</p>
<p>पाकिस्तान में आठ फरवरी को हुए आम चुनाव के लगभग एक महीने बाद शहबाज ने सोमवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बैठक के दौरान, पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा मामलों के पेशेवर मामलों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।</p>
<p>यह भी कहा गया कि बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा समेत अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर, सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री को उनके पदभार ग्रहण करने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।</p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 12:18:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुद के बुने हुए जाल में उलझ गया है पाकिस्तान, आये दिन हो रहे है आतंकी हमले </title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत का दुश्मन नम्बर 1 पाकिस्तान अब अपने ही कर्मों की सजा काट रहा है. आतंकवादियों की फैक्ट्री बन चुका पाकिस्तान अब खुद आतंकवाद का शिकार है. पाकिस्तान के मियांवली में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ है. आतंकवादी एयरबेस में घुस गए. सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुआ. ‘तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान’ नाम के संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. पाकिस्तानी सेना ने बताया कि तीन आतंकवादी मारे गए हैं, जबकि तीन अन्य अब भी सक्रिय हैं. इसके साथ ही हमले में तीन विमान, ईंधन भरने वाला टैंकर क्षतिग्रस्त हो गया है.</p>
<p>पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में शुक्रवार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136673/pakistan-is-entangled-in-its-own-web-terrorist-attacks-are"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/terror-attack-pakistan-1280-720-03-11-2023.webp" alt=""></a><br /><p>भारत का दुश्मन नम्बर 1 पाकिस्तान अब अपने ही कर्मों की सजा काट रहा है. आतंकवादियों की फैक्ट्री बन चुका पाकिस्तान अब खुद आतंकवाद का शिकार है. पाकिस्तान के मियांवली में एक बड़ा आतंकी हमला हुआ है. आतंकवादी एयरबेस में घुस गए. सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुआ. ‘तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान’ नाम के संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. पाकिस्तानी सेना ने बताया कि तीन आतंकवादी मारे गए हैं, जबकि तीन अन्य अब भी सक्रिय हैं. इसके साथ ही हमले में तीन विमान, ईंधन भरने वाला टैंकर क्षतिग्रस्त हो गया है.</p>
<p>पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में शुक्रवार को आतंकवादियों ने सेना की दो गाड़ियों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें कम से कम 14 सैनिक मारे गए. बलूचिस्तान में शुक्रवार को हुआ यह आतंकवादी हमला इस साल का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है, जिसमें पाकिस्तानी सेना के सबसे ज्यादा सैनिक मारे गए हैं. पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, आतंकवादियों ने यह हमला उस वक्त किया, जब सैनिकों की दो गाड़ियां पसनी से ग्वादर जिले के ओरमारा इलाके में जा रहे थे.</p>
<p>दो दिन पहले ही पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान के सांबास इलाके में 6 आतंकियों को मार गिराया था. माना जा रहा है कि आतंकियों ने इसी कार्रवाई का बदला लिया है. अफगानिस्तान की तालिबानी सत्ता डूरंड लाइन बॉर्डर पर पाकिस्तान को चुनौती दे रही है. पाक-अफगान बॉर्डर पर आतंकी गतिविधियों में लगातार इजाफा हो रहा है. पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा पर जबरदस्त तनाव चल रहा है. पाकिस्तान के आर्थिक संकट और अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बीच प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) इस्लामाबाद के लिए संभावित खतरे के रूप में लगातार उभर रहा है, जिसे देखते हुए इस्लामाबाद में सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखने के सख्त आदेश जारी किया गया है.</p>
<p>पाकिस्तान खुद आतंक की पाठशाला चलाता रहा. यही नहीं अफगानिस्तान में जो तालिबानी आतंकी कैम्प आज फलफूल रहे हैं. उनमें से कई की ट्रेनिंग खुद पाकिस्तान में ही हुई है लेकिन अब यही तालिबानी आतंकी संगठन पाकिस्तान के लिए खतरा बन गए हैं. इसी खतरे को भांपते हुए पाकिस्तान ने डूरंड लाइन बॉर्डर पर बड़ी संख्या में आर्मी की तैनात कर दी है. आज वहां एक लाख से ज्यादा पाक आर्मी तैनात है.</p>
<p>पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जो बॉर्डर है उसे डूरंड लाइन कहा जाता है. पाकिस्तान इसे बाउंड्री लाइन मानता है, लेकिन तालिबान खैबर पख्तूनख्वा राज्य को अपना हिस्सा मानता है. अफगानिस्तान की सल्तनत पर तालिबान का कब्जा करने के साथ ही तालिबानियों ने डूरंड लाइन को मानने से इंकार किया और यहीं से आतंकवाद को फैलाना शुरू कर दिया. कांटेदार फेंसिंग को क्रॉस करके आए दिन आतंकी हमले किए जाने लगे. तालिबान ने वहां मौजूद पाकिस्तानी चेक पोस्ट्स को उड़ा दिया. इस इलाके में कई पाकिस्तानी फौजी मारे जा चुके हैं और कई तालिबान के कब्जे में हैं.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Nov 2023 16:20:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्लादिमीर पुतिन  के फैसले से बढ़ा  परमाणु हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International news:</strong>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के रूस के अनुसमर्थन को रद्द करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए। 1996 की संधि परमाणु हथियारों के लाइव परीक्षणों सहित सभी परमाणु विस्फोटों को गैरकानूनी घोषित करती है, हालांकि यह कभी लागू नहीं हुई क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सहित कुछ प्रमुख देशों ने कभी इसकी पुष्टि नहीं की। पश्चिम ने रूस पर पिछले फरवरी में यूक्रेन पर हमला शुरू करने के बाद से लापरवाह परमाणु बयानबाजी का आरोप लगाया है।</p>
<p><br />पुतिन ने पिछले सप्ताह बैलिस्टिक मिसाइल अभ्यास का निरीक्षण किया था, जिसे रक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136616/vladimir-putins-decision-increases-the-risk-of-nuclear-attack"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/putin_large_1544_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International news:</strong>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के रूस के अनुसमर्थन को रद्द करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए। 1996 की संधि परमाणु हथियारों के लाइव परीक्षणों सहित सभी परमाणु विस्फोटों को गैरकानूनी घोषित करती है, हालांकि यह कभी लागू नहीं हुई क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सहित कुछ प्रमुख देशों ने कभी इसकी पुष्टि नहीं की। पश्चिम ने रूस पर पिछले फरवरी में यूक्रेन पर हमला शुरू करने के बाद से लापरवाह परमाणु बयानबाजी का आरोप लगाया है।</p>
<p><br />पुतिन ने पिछले सप्ताह बैलिस्टिक मिसाइल अभ्यास का निरीक्षण किया था, जिसे रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने एक अज्ञात दुश्मन के खिलाफ बड़े पैमाने पर जवाबी परमाणु हमले के लिए अभ्यास बताया था। पुतिन ने पिछले महीने यह भी कहा था कि वह "यह कहने के लिए तैयार नहीं हैं" कि रूस लाइव परमाणु परीक्षण करेगा या नहीं। संधि को रद्द करने का विधेयक पिछले महीने फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया में रूस की संसद से पारित हुआ। संसदीय सुनवाई के दौरान, राज्य ड्यूमा के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन ने कहा कि संधि को रद्द करने का कदम परमाणु हथियारों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के संशयवाद और अशिष्ट रवैये की प्रतिक्रिया थी।</p>
<p><br />हालाँकि यह कभी लागू नहीं हुआ, इस समझौते को परमाणु शक्तियों फ्रांस और ब्रिटेन सहित 178 देशों द्वारा अनुमोदित किया गया था, और इसका प्रतीकात्मक मूल्य है। इसके समर्थकों का कहना है कि इसने परमाणु हथियारों के लाइव परीक्षणों के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय मानदंड स्थापित किया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि प्रमुख परमाणु शक्तियों के अनुसमर्थन के बिना समझौते की संभावना अवास्तविक है। पुतिन के पहली बार राष्ट्रपति बनने के छह महीने बाद जून 2000 में रूस की संसद ने समझौते को मंजूरी दे दी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 15:51:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
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                <title> पाकिस्तान के  प्रांत शहर में लगा 'स्मॉग इमरजेंसी'</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International news: </strong>भारत के पड़ोसी मुल्क में प्रदूषण से बुरा हाल है। पाकिस्तान का लाहौर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पर काबिज है। अब पाकिस्तान की पंजाब कार्यवाहक सरकार ने 127 मिलियन की आबादी वाले प्रांत में स्मॉग आपातकाल लगा दिया है। प्रांतीय राजधानी दुनिया भर में सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बनी हुई है। सरकार का यह फैसला लगातार खतरनाक वायु गुणवत्ता सूचकांक के कारण लाहौर में तुरंत स्मॉग आपातकाल लगाने के लाहौर उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में आया है।</p>
<p>एलएचसी के न्यायाधीश शाहिद करीम ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/136609/smog-emergency-in-provincial-city-of-pakistan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-11/smog-emergency_large_1327_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International news: </strong>भारत के पड़ोसी मुल्क में प्रदूषण से बुरा हाल है। पाकिस्तान का लाहौर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप पर काबिज है। अब पाकिस्तान की पंजाब कार्यवाहक सरकार ने 127 मिलियन की आबादी वाले प्रांत में स्मॉग आपातकाल लगा दिया है। प्रांतीय राजधानी दुनिया भर में सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बनी हुई है। सरकार का यह फैसला लगातार खतरनाक वायु गुणवत्ता सूचकांक के कारण लाहौर में तुरंत स्मॉग आपातकाल लगाने के लाहौर उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में आया है।</p>
<p>एलएचसी के न्यायाधीश शाहिद करीम ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में विफलता के लिए लाहौर आयुक्त को फटकार लगाई। न्यायधीश ने कहा कि स्मॉग मेरी व्यक्तिगत समस्या नहीं है बल्कि यह हमारे बच्चों के जीवन के लिए चिंता का विषय है। आप लाहौर नगर के संरक्षक हैं। देखिए, आपने इसके साथ क्या किया है, आपको लाहौर की स्थिति पर शर्म आनी चाहिए। खतरनाक वायु गुणवत्ता की स्थिति के कारण लाहौर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बना हुआ है। वैश्विक वायु गुणवत्ता निगरानी मंच www.iqair.com की रिपोर्ट के अनुसार, प्रांतीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 447 तक पहुंच गया। AQI 50 से नीचे होने पर हवा में सांस लेना सुरक्षित माना जाता है।</p>
<p><br />गौरतलब है कि लाहौर को किसी जमाने में बागों का शहर कहा जाता था। 16वीं से 19वीं शताब्दी के बीच मुगल काल के दौरान यहां बड़ी संख्या में बाग थे। लेकिन तेजी से शहरीकरण और बढ़ती आबादी की वजह से अब शहर में बहुत कम हरियाली बची है। लाहौर को कराची के बाद पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता है। इसे पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी का भी तमगा प्राप्त है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 15:45:52 +0530</pubDate>
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