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                <title>Public Awareness - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Public Awareness RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>प्रभारी मंत्री ने ग्राम पंचायत दुल्हा सुमाली में जन चौपाल में  सरकार की गिनाई 12 साल की उपलब्धि</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विकास खंड बर्डपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत दुल्हा सुमाली में रात्रि चौपाल में मुख्य अतिथि  मंत्री श्रम सेवायोजन एवं समन्वय विभाग उ0प्र0 सरकार/जनपद प्रभारी मंत्री  अनिल राजभर की अध्यक्षता में कार्यक्रम संपन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने कार्यक्रम में उपस्थित माता बहनों का उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण  हुए है देश एवं प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ समस्त पात्र</div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181348/the-minister-in-charge-counted-the-achievements-of-the-government"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781618592950.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विकास खंड बर्डपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत दुल्हा सुमाली में रात्रि चौपाल में मुख्य अतिथि  मंत्री श्रम सेवायोजन एवं समन्वय विभाग उ0प्र0 सरकार/जनपद प्रभारी मंत्री  अनिल राजभर की अध्यक्षता में कार्यक्रम संपन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने कार्यक्रम में उपस्थित माता बहनों का उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण  हुए है देश एवं प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ समस्त पात्र लाभार्थियों को दिया जा रहा है । प्रधानमंत्री  द्वारा 82 करोड लोगों को निशुल्क राशन दिया जा रहा है आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत 5 लाख तक का  निः शुल्क इलाज के सुविधा दी जा रही है जिन लोगों के पास अपना मकान नहीं है उन्हें पक्का मकान दिया जा रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा है सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के साथ कार्य कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व में प्रदेश में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है।  कार्यक्रम को जिलाध्यक्ष  भाजपा दीपक मौर्य,विधायक कपिलवस्तु  श्याम धनी राही  ने संबोधित किया। इस दौरान जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, एसएसपी डॉ.अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी  बलराम सिंह ने प्रभारी मंत्री का स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 रजत कुमार चौरसिया, उपजिलाधिकारी नौगढ़ राहुल सिंह, जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा, डीसी मनरेगा सन्दीप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह, खण्ड विकास अधिकारी बर्डपुर ओमप्रकाश यादव, ग्राम प्रधान नीतू पांडे, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिलीप पांडेय व अन्य  अधिकारी/कर्मचारी, लाभार्थी आदि उपस्थित रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 20:09:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रस्मअदायगी नहीं, जिम्मेदारी: भीषण गर्मी में पौधारोपण क्यों बन जाता है औपचारिकता?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रमों की भरमार दिखाई देती है। सरकारी कार्यालयों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर जगह पौधे लगाए जाते हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं। लेकिन इस वर्ष कानपुर समेत पूरे उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और लू के थपेड़े लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है—क्या इस भीषण गर्मी में लगाए गए नन्हे पौधे जीवित रह पाएंगे?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि बिना नियमित सिंचाई और देखभाल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180684/why-does-tree-planting-become-a-formality-in-the-scorching"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001974815.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रमों की भरमार दिखाई देती है। सरकारी कार्यालयों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर जगह पौधे लगाए जाते हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं। लेकिन इस वर्ष कानपुर समेत पूरे उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और लू के थपेड़े लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है—क्या इस भीषण गर्मी में लगाए गए नन्हे पौधे जीवित रह पाएंगे?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">वास्तविकता यह है कि बिना नियमित सिंचाई और देखभाल के अधिकांश पौधों का जीवित रहना बेहद कठिन है। केवल फोटो खिंचवाने या औपचारिकता निभाने के लिए पौधे लगाना पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि पौधों के साथ अन्याय है। यदि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल नहीं की जाती, तो वह कुछ ही दिनों में सूख जाता है और पूरा प्रयास निरर्थक हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी जमीनी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए "द कानपुर रिपोर्टर" की टीम ने निर्णय लिया है कि हम दिखावटी पौधारोपण से दूर रहेंगे और मानसून का इंतजार करेंगे। वर्षा ऋतु की पहली फुहार के साथ हमारी टीम शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम 50 छायादार एवं फलदार पौधे लगाएगी। इतना ही नहीं, हम इन पौधों के बड़े होने तक उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज समाज में अधिकांश लोग अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा, बैंक बैलेंस और संपत्ति जुटाने में पूरा जीवन लगा देते हैं। लेकिन शायद ही कोई उनके लिए स्वच्छ पर्यावरण और शुद्ध हवा की व्यवस्था करने के बारे में गंभीरता से सोचता है। यदि आने वाली पीढ़ी को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा ही उपलब्ध नहीं होगी, तो धन-संपत्ति का महत्व भी सीमित रह जाएगा। एक पेड़ केवल छाया ही नहीं देता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन, स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित भविष्य भी प्रदान करता है। इसलिए इस मानसून केवल पौधा लगाने का संकल्प न लें, बल्कि उसे वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी भी स्वीकार करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात कानपुर टीम की अपील</strong></div>
<div style="text-align:justify;">इस मानसून दिखावे से दूर रहें। अपने घर, मोहल्ले, विद्यालय, कार्यालय या आसपास उपलब्ध स्थानों पर ऐसे पौधे लगाएं जो भविष्य में घने छायादार और फलदार वृक्ष बन सकें। आने वाली पीढ़ी को विरासत में केवल कंक्रीट के मकान नहीं, बल्कि एक हरा-भरा और स्वस्थ भविष्य भी दें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:12:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनकुइया में जल अर्पण दिवस व विश्व जल दिवस पर भव्य समारोह,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260322-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला समन्वयक अश्विनी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह के दौरान जल संरक्षण और उसके महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय अपनाएं, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। आयोजन के अंत में जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को जागरूक किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:02:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहवीर योजना से भय को निकालने की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विचार-स्वतंत्र प्रभात </span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">            मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाने और दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों की जान बचाने के उद्देश्य से पिछले वर्ष अप्रैल से लागू की गई</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राहवीर योजना</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक धरातल पर कितनी सफल हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक वर्ष में महज </span>14 <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को ही शासन की ओर से इस योजना के अंतर्गत पुरस्कार राशि स्वीकृत हुई है । मध्य प्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य है जहां सर्वाधिक वाहन दुर्घटनाएं होती हैं। प्रदेश में प्रतिदिन </span>150 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक वाहन दुर्घटनाएं होती</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172841/need-to-remove-fear-from-rahveer-scheme"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas8.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" align="center"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विचार-स्वतंत्र प्रभात </span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">      मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में वाहन दुर्घटनाओं में कमी लाने और दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों की जान बचाने के उद्देश्य से पिछले वर्ष अप्रैल से लागू की गई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राहवीर योजना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक धरातल पर कितनी सफल हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक वर्ष में महज </span>14 <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को ही शासन की ओर से इस योजना के अंतर्गत पुरस्कार राशि स्वीकृत हुई है । मध्य प्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य है जहां सर्वाधिक वाहन दुर्घटनाएं होती हैं। प्रदेश में प्रतिदिन </span>150 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक वाहन दुर्घटनाएं होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें करीब </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को तत्काल इलाज उपलब्ध हो सके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस जनहितैषी सोच के साथ पिछले वर्ष अप्रैल में राहवीर योजना शुरू की गई। इसका उद्देश्य यह है कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा कर उसकी जान बचाने वाले व्यक्ति को शासन की ओर से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदान की जाए । निश्चित रूप से मध्य प्रदेश सरकार की यह योजना सराहनीय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन व्यापक प्रचार-प्रसार के अभाव और कानूनी तथा पुलिसिया कार्यवाही के भय के कारण आज भी कई लोग सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तड़पता छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">     इस जीवनदायिनी योजना को प्रभावी बनाने के लिए सरकार को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करना चाहिए और लोगों के मन से यह भय भी दूर करना चाहिए कि घायल व्यक्ति की मदद करने पर उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा । प्रदेश शासन को चाहिए कि दुर्घटना में किसी की जान बचाने वाले व्यक्ति को एक माह के भीतर ही राहवीर योजना की राशि प्रदान की जाए और जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया जाए। इससे समाज में लोगों का भय दूर होगा और घायलों के प्रति संवेदना भी बढ़ेगी । यदि सरकार चाहे तो राहवीर योजना का प्रचार-प्रसार स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के माध्यम से भी किया जा सकता है। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ग्रामीण से लेकर नगरीय क्षेत्रों तक विशेष प्रयास करने होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">      वर्तमान में वाहन दुर्घटना में सर्वाधिक शिकार युवा होते हे ! दुर्घटना में अधिकांश युवा के हताहत होने का एक कारण नशा कर तेज गति से वाहन चलाना भी सामने आता हे ! वही कुछ युवा जवानी के जोश में वाहनों द्रुतगति से चला कर अपना और दूसरों का जीवन खतरे में डालते हे ! शासन प्रशासन को विशेषकर तेज गति से वाहन चलाने वाले नाबालिग और युवा चालकों पर सख्ती बरतना बेहद जरूरी है । इसके अलावा जिला प्रशासन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए कि वह यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए। जिस जिले में दुर्घटनाओं का ग्राफ सबसे कम हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी शासन की ओर से प्रोत्साहन दिया जाए । यदि इन उपायों पर गंभीरता से अमल किया जाए तो निश्चित ही राहवीर योजना प्रदेश के लोगों के जीवन में वरदान साबित हो सकती है ।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:12:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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