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                <title>पाकुड़िया - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पाकुड़िया RSS Feed</description>
                
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                <title>व्यक्तिगत अहम् को धर्म युद्ध बताना सनातन धर्म एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत : हिन्दू विचार मंच पाकुड़िया इकाई</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:-</strong>    495 वर्षों के उपरांत भारतवर्ष की पावन भूमि अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर देश की सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में भव्य-दिव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण एवं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा श्रीराम मूर्ति का विधिवत प्राण प्रतिष्ठा करने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती की आलोचना से लेकर मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम स्नान और इन दिनों व्यक्तिगत अहम् के अश्व पर सवार होकर शंकराचार्य ने गौ रक्षा के नाम पर योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध लखनऊ प्रस्थान को धर्म युद्ध बताकर सनातनियों में धर्म के प्रति संशय-भ्रम पैदा कर भारत की प्रगति को अवरुद्ध</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसे</div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172849/describing-personal-ego-as-a-religious-war-is-against-sanatan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/news-13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:-</strong>  495 वर्षों के उपरांत भारतवर्ष की पावन भूमि अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर देश की सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में भव्य-दिव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण एवं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा श्रीराम मूर्ति का विधिवत प्राण प्रतिष्ठा करने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती की आलोचना से लेकर मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम स्नान और इन दिनों व्यक्तिगत अहम् के अश्व पर सवार होकर शंकराचार्य ने गौ रक्षा के नाम पर योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध लखनऊ प्रस्थान को धर्म युद्ध बताकर सनातनियों में धर्म के प्रति संशय-भ्रम पैदा कर भारत की प्रगति को अवरुद्ध करने की कुचेष्टा करते दिख रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसे धर्म युद्ध कहना सनातन सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत ही नहीं अपितु राष्ट्र विरोधी तत्वों को बल प्रदान कर राष्ट्रीय प्रगति को अवरुद्ध करने की कुचेष्टा कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।स्मरण रहे सनातन धर्म कोई व्यक्ति नहीं है और न ही किसी के द्वारा थोपी गई मान्यता है। धर्म का व्यापक अर्थ कर्म है और धर्म वही है जो मानवीय हितों का संवर्धन करते हुए राष्ट्र की रक्षा-सुरक्षा में सहायक हो।क्या शंकराचार्य जी को यह प्रसंग ज्ञात नहीं है कि श्रीकृष्ण ने सूर्यपुत्र कर्ण को वध करने की आज्ञा दी जब वह अस्त्र-शस्त्र को रथ पर रख कीचड़ में फंसे रथ के पहिये को निकाल रहा था। तब कर्ण ने इसे अधर्म कहते हुए कृष्ण को धिक्कारा। तब योगेश्वर ने कर्ण को द्रौपदी के चीरहरण, अभिमन्यु वध आदि स्मरण कराते हुए धर्म की व्यापकता बताई, जिस पर कर्ण चुप हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शंकराचार्य कहते हैं कि वे ग्यारह मार्च को लखनऊ में शंख बजाकर गौरक्षा के लिए उद्घोष करेंगे जैसे महाभारत युद्ध को श्रीकृष्ण ने धर्म युद्ध कहा था। सनातन धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों में गौ माता का स्थान ऊँचा रहा है और आज भी है। यद्यपि सनातन परम्पराओं में जीव हत्या को पाप कहते हुए सभी जीवों की रक्षा करना धर्म कहा गया है।रघुवंशी महाराज शिवि ने तो एक कबूतर की रक्षा हेतु अपने प्राण अर्पित करने को तत्परता दिखाई थी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हिन्दू होने का प्रमाण मांगते हुए संन्यासी नहीं होने की बात कह दी। परन्तु उन्हें धर्म की व्यापकता के आलोक में दशरथ नंदन अयोध्या अधिपति श्रीरामचन्द्र जी के बाल्य, तरुण और अश्वमेध यज्ञ करने के उपरांत चक्रवर्ती सम्राट बनने तक के कालक्रमों पर गंभीरता से मंथन करते हुए धर्म के मर्म को समझना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या रामजी केवल पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन कर धर्म की व्यापकता और सार्थकता सिद्ध की, या प्रजापालन करते हुए आर्यावर्त और जम्बूद्वीप को मानव तथा राष्ट्र विरोधी तत्वों का संहार कर समृद्धि के शिखर पर पहुँचाया? वहीं श्रीराम ने माँ जानकी को वनवास देने के उपरांत क्या स्वयं संन्यासी जीवन नहीं जिया? केवल गेरुआ वस्त्र धारण करना ही संन्यास नहीं है। इसके साथ कामना और वासनाओं का पूर्ण परित्याग करना ही वास्तविक संन्यास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्दू कोई मत-पंथ नहीं है। हिन्दू एक विशाल जीवन शैली है और इसकी अवधारणा में सम्पूर्ण विश्व एक विशाल परिवार के रूप में समाया है जिसमें सबके कल्याण की कामना की गई है। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दर्शन में वे हिन्दू हैं चाहे वे किसी भी मत-पंथ या उपासना पद्धति को मानते हों, यदि उनकी राष्ट्रीय निष्ठा भारतीय राष्ट्र के प्रति समर्पित हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि प्राचीन वेदों, उपनिषदों और स्मृतियों में हिन्दू शब्द का उल्लेख नहीं मिलता है। तात्पर्य यह है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज जी को व्यक्तिगत अहम् का परित्याग कर योगी आदित्यनाथ जैसे कर्मनिष्ठ प्रशासक के विरुद्ध गौरक्षा के नाम पर प्रदेश को अस्थिर नहीं करना चाहिए। इससे न केवल सनातनी भ्रमित होंगे बल्कि भारत विरोधी लॉबी को भी सहारा मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहाँ तक गौमाता की रक्षा की बात है, इसकी चर्चा विपक्षी तथा सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं में कर समस्या का समाधान संविधान के तहत सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। योगी जी के प्रशासनिक काल में गौमाता को सुरक्षा तो मिल ही रही है, वहीं दूसरी ओर माता-बहनें भी स्वयं को सुरक्षित अनुभव करते हुए प्रगति की ओर बढ़ रही हैं। यदि कोई विचलित है तो वह भूमाफिया, अपराधी तथा अराष्ट्रीय तत्व हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को भी शंकराचार्य जी का पूरा सम्मान राष्ट्रहित में करना चाहिए ताकि भारतवर्ष की पावन धरा पर 7वीं से 13वीं सदी तक आक्रांताओं तथा उसके बाद देशी राजाओं की आपसी प्रतिस्पर्धा और द्वेष के कारण मुगल व अंग्रेजों के पराधीन काल में भारतीयों पर हुई यातनाओं से सबक लेते हुए हम भारतीय अपने स्वर्णिम अतीत से प्रेरणा लेकर भारतवर्ष को पुनः सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनाते हुए समृद्धि के शिखर पर पहुँचा सकें।</div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 17:59:48 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>अनावश्यक पक्की नाली व गार्डवालों का निर्माण कर सरकारी राशि का हो रहा है दुरुपयोग-ग्रामीण </title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:-</strong> पाकुड़िया प्रखण्ड के सुदूर विभिन्न पंचायतों के ग्रामीण इलाकों में अनावश्यक पक्की नाली एवम् गार्डवालों का निर्माण कर सरकारी राशि का दुरूपयोग करने की बातें ग्रामीणों द्वारा कही जाती रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही सूचनाओं के आलोक में बताया जा रहा है कि बिना स्थलीय जांच के अनावश्यक विशेष कर पक्की नालियां व गार्डवालों का निर्माण किया गया है। हालांकि आवश्यक स्थलों पर निर्माण को लोगों ने सराहना भी की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का मानना है कि पंचायत, पंचायत समिति, विधायक, सांसद, जिला परिषद या जिस विभाग की राशि हो वह सरकार की राशि है। सरकार</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171565/government-funds-are-being-misused-by-constructing-unnecessary-concrete-drains"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-116.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:-</strong> पाकुड़िया प्रखण्ड के सुदूर विभिन्न पंचायतों के ग्रामीण इलाकों में अनावश्यक पक्की नाली एवम् गार्डवालों का निर्माण कर सरकारी राशि का दुरूपयोग करने की बातें ग्रामीणों द्वारा कही जाती रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही सूचनाओं के आलोक में बताया जा रहा है कि बिना स्थलीय जांच के अनावश्यक विशेष कर पक्की नालियां व गार्डवालों का निर्माण किया गया है। हालांकि आवश्यक स्थलों पर निर्माण को लोगों ने सराहना भी की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का मानना है कि पंचायत, पंचायत समिति, विधायक, सांसद, जिला परिषद या जिस विभाग की राशि हो वह सरकार की राशि है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों का विकास सड़क, पक्की नाली, गार्डवाल आदि है लेकिन राशि की सही उपयोगिता के लिए सही व जनहित में स्थलों का चयन भी अत्यावश्यक बताया जाता रहा है। वहीं दूसरी ओर स्थलीय निरीक्षण के बिना ही विशेष रूप से पक्की नाली, गार्डवाल व पुलियों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाती है जिस कारण ऐसी योजनाएं ग्रामीणों के हित में नहीं होने से राशि का दुरूपयोग होता है जिससे ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने कहा कि इन दिनों विशेष रूप से कड़ी धूप व गर्मी के दिनों में सुदूर ग्रामीण इलाकों में जहां पेयजल का अभाव है और सरकारी नलकूपों में खराबी से पेयजल उपलब्ध होने में कठिनाई है वहां बेकार पड़े नलकूपों की पूरी मरम्मती कराने की चेष्टा हो। वहीं पंचायतों के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने कूपों का जीर्णोद्धार कराकर पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जाए और जहां आवश्यक हो जल निकासी का समाधान करते हुए वहां पक्की नालियों एवम् जरूरी हो तो गार्डवाल, पुलियों का निर्माण किया जाए जिससे सरकारी राशि का सदुपयोग जनहित में हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने विशेषकर महिलाओं ने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों को खराब नलकूपों को ठीक से मरम्मती कराने की बात कहने पर कहा जाता है कि फिलहाल फंड नहीं है और जल एवम् स्वच्छता विभाग से भी कई अवसरों पर सामान उपलब्ध नहीं होने की बातें ग्रामीणों को कही जाती हैं। फलतः अनेकों बार टोलेवासियों को चंदा लेकर प्राइवेट मिस्त्री से नलकूप की मरम्मती करानी पड़ती है। </div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 20:10:01 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>हाथी पांव से बचाव हेतु स्वास्थ्य कर्मियों ने ब्लॉक परिसर में कैंप कर खिलाई दवा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong> पाकुड़ जिला को फाइलेरिया मुक्त बनाने हेतु विगत 9 फरवरी प्रखंड विकास पदाधिकारी सोमनाथ बनर्जी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी भरत भूषण भगत, चिकित्सकों एवम् स्वास्थ्य कर्मियों ने पाकुड़िया प्रखंड को फाइलेरिया मुक्त करने के अभियान की घोषणा की और 10 से 25 फरवरी तक पाकुड़िया प्रखंड में लगभग एक लाख से अधिक लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य रख तत्परता से जुट गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस क्रम में 10 को प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में दवा खिलाई गई जबकि दूसरे दिन डोर-टू-डोर सेविकाओं तथा स्वास्थ्य सहियाओं ने दवा खिला कर लक्ष्य पाने में</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171201/to-protect-against-elephantiasis-health-workers-camped-in-the-block"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-213.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong> पाकुड़ जिला को फाइलेरिया मुक्त बनाने हेतु विगत 9 फरवरी प्रखंड विकास पदाधिकारी सोमनाथ बनर्जी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी भरत भूषण भगत, चिकित्सकों एवम् स्वास्थ्य कर्मियों ने पाकुड़िया प्रखंड को फाइलेरिया मुक्त करने के अभियान की घोषणा की और 10 से 25 फरवरी तक पाकुड़िया प्रखंड में लगभग एक लाख से अधिक लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य रख तत्परता से जुट गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस क्रम में 10 को प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में दवा खिलाई गई जबकि दूसरे दिन डोर-टू-डोर सेविकाओं तथा स्वास्थ्य सहियाओं ने दवा खिला कर लक्ष्य पाने में जुटी हैं। विभिन्न सुदूर ग्रामीण इलाकों में फाइलेरिया की दवा खिलाते हुए देखा जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर 24 फरवरी को पाकुड़िया प्रखंड कार्यालय परिसर में स्वास्थ्य कर्मियों को फाइलेरिया (हाथी पांव) से बचाव हेतु दवा खिलाने में लगनशीलता से जुटे हुए देखा गया। हालांकि फाइलेरिया मुक्त करने में कितने लोगों को दवा खिलाई गई इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाई है।</div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 19:15:25 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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                <title>मौसम में बदलाव के संकेत से गहराने लगी है विभिन्न ग्रामीण इलाकों में पेय जल की समस्या</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखंड:-</strong> जल प्रकृति प्रदत्त सभी जीव धारियों के लिए अनुपम भेंट है जिस पर स्वतः सबों का अधिकार है परन्तु इस अनमोल उपहार को व्यवस्थित नहीं किए जाने से कृत्रिम जल संकट पैदा हो रहा है। इसके कारण लोगों की पेय जल की कठिनाइयां विशेष रूप से गर्मी के मौसम में प्रति वर्ष देखी जा रही हैं। हालांकि ठंड के दिनों में भी प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में सरकारी नलकूपों के खराब रहने के कारण कई क्षेत्रों में जल समस्या देखी गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बहरहाल गर्मी और धूप की आहट से प्रखंड के धावाडंगाल, तालवा, पलियादह के सोगले रोड</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171199/due-to-change-in-weather-the-problem-of-drinking-water"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-114.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखंड:-</strong> जल प्रकृति प्रदत्त सभी जीव धारियों के लिए अनुपम भेंट है जिस पर स्वतः सबों का अधिकार है परन्तु इस अनमोल उपहार को व्यवस्थित नहीं किए जाने से कृत्रिम जल संकट पैदा हो रहा है। इसके कारण लोगों की पेय जल की कठिनाइयां विशेष रूप से गर्मी के मौसम में प्रति वर्ष देखी जा रही हैं। हालांकि ठंड के दिनों में भी प्रखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में सरकारी नलकूपों के खराब रहने के कारण कई क्षेत्रों में जल समस्या देखी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बहरहाल गर्मी और धूप की आहट से प्रखंड के धावाडंगाल, तालवा, पलियादह के सोगले रोड टोला, पात पहाड़ी सड़क टोला, पात पहाड़ी माझी टोला सहित विभिन्न पंचायतों के ग्रामीण क्षेत्रों में पेय जल घटने की सूचना है। बताया जाता है कि जल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा पाकुड़िया प्रखंड के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जल कूप लगाए गए हैं लेकिन अनेक नलकूप और जल टंकियां खराब होने से पेय जल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके कारण विशेषकर गर्मी के दिनों में पेय जल की भीषण कठिनाइयों की आशंका ग्रामीण महिलाओं को दिख रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोगों का मानना है कि समय रहते यदि खराब पड़े नलकूपों और जल टंकियों की पूर्ण रूप से मरम्मत विभाग की ओर से करा दी जाए तो जल संकट की समस्या के समाधान में यह सहायक हो सकता है। जल एवं स्वच्छता विभाग को जल आपूर्ति की समस्याओं के निदानार्थ प्रखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर पेय जल आपूर्ति की पहल करनी चाहिए ताकि पेय जल की सुविधा ग्रामीणों को उपलब्ध हो सके।</div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 19:11:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नुकीले बिखरे स्टोन मेटल रोड पर आवागमन में होती है अत्यधिक कठिनाई : पूर्व मुखिया सखावत अली</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड :-</strong> पाकुड़िया प्रखण्ड अंतर्गत खाकसा पंचायत के मलिकपुर ग्राम की सड़क विगत कई वर्षों से ध्वस्त व जीर्ण रहने से लोगों के आवागमन में बड़ी कठिनाई होती रही है। उक्त जर्जर स्टोन मेटल पथ की महत्ता के संदर्भ में तेज-तर्रार पूर्व मुखिया ने बताया कि उक्त रोड से पलियादह, दोमुहानी, मलिकपुर, शिवरात, खजूरचुंआ ग्राम के अलावा सीमावर्ती राज्य बंगाल से भी लोग अपने निकट संबंधियों के यहाँ आते-जाते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सड़क वर्षों से ध्वस्त रहने एवं उस पर बिखरे नुकीले स्टोन मेटल के कारण साइकिल व बाइक चलाना जोखिम भरा है। नंगे पाँव चलने में पैरों के</div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171041/there-is-great-difficulty-in-movement-on-the-sharp-scattered"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-101.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड :-</strong> पाकुड़िया प्रखण्ड अंतर्गत खाकसा पंचायत के मलिकपुर ग्राम की सड़क विगत कई वर्षों से ध्वस्त व जीर्ण रहने से लोगों के आवागमन में बड़ी कठिनाई होती रही है। उक्त जर्जर स्टोन मेटल पथ की महत्ता के संदर्भ में तेज-तर्रार पूर्व मुखिया ने बताया कि उक्त रोड से पलियादह, दोमुहानी, मलिकपुर, शिवरात, खजूरचुंआ ग्राम के अलावा सीमावर्ती राज्य बंगाल से भी लोग अपने निकट संबंधियों के यहाँ आते-जाते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सड़क वर्षों से ध्वस्त रहने एवं उस पर बिखरे नुकीले स्टोन मेटल के कारण साइकिल व बाइक चलाना जोखिम भरा है। नंगे पाँव चलने में पैरों के कटने का डर बना रहता है। वर्षा के मौसम में मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। सखावत ने बताया कि लोग इसी रोड से रामपुरहाट बाजार जाकर सब्जियां तथा अन्य सामानों की खरीदारी करते रहे हैं। वहीं रामपुरहाट अस्पताल, बाजार और ट्रेन सेवा की सुविधा हेतु भी लोगों का आवागमन इसी पथ से होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अच्छी सड़क बन जाने पर लोग आसानी से ऑटो-टोटो से आवागमन कर सकेंगे। पूर्व मुखिया सहित मलिकपुर ग्राम के लोगों ने विधायक प्रोफेसर स्टेफन मरांडी से आवागमन की सुविधा के लिए इस जीर्ण पथ के निर्माण की मांग की है।</div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 19:54:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विष्णु महायज्ञ हेतु भूमि पूजन से लोगों में दिखी उल्लास की झलक</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong>यज्ञ सनातन संस्कृति की अमूल्य निधि है। यज्ञ पूर्णत: वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होते हुए इसके व्यापक अर्थ में संगतिकरण का भाव निहित है। यज्ञ केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं है अपितु लोक रंजन का सशक्त सेतु भी है। वहीं यज्ञ के वैज्ञानिक पक्ष की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि यज्ञ वेदी पर निर्मित हवन कुंड में होमी गई आम, पाकड़ आदि विभिन्न वृक्षों की समिधाएं व हवन सामग्रियों का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि देव-दानवों के अलावा याज्ञवल्क्य, पराशर, संदीपनी, अगस्त्य, विश्वामित्र सहित ऋषि-महर्षियों ने विधिवत यज्ञ</div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171035/glimpse-of-joy-seen-among-people-after-bhoomi-pujan-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-311.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong>यज्ञ सनातन संस्कृति की अमूल्य निधि है। यज्ञ पूर्णत: वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होते हुए इसके व्यापक अर्थ में संगतिकरण का भाव निहित है। यज्ञ केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं है अपितु लोक रंजन का सशक्त सेतु भी है। वहीं यज्ञ के वैज्ञानिक पक्ष की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि यज्ञ वेदी पर निर्मित हवन कुंड में होमी गई आम, पाकड़ आदि विभिन्न वृक्षों की समिधाएं व हवन सामग्रियों का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि देव-दानवों के अलावा याज्ञवल्क्य, पराशर, संदीपनी, अगस्त्य, विश्वामित्र सहित ऋषि-महर्षियों ने विधिवत यज्ञ का अनुष्ठान कर दुर्लभ सिद्धियां प्राप्त कीं। शास्रोक्त रीति-नीति से यज्ञ कर दशानन रावण और बड़े-बड़े राजाओं ने मनोवांछित फल प्राप्त किए। यज्ञ से देवों को बल मिलता है एवं वे प्रसन्न होकर मानव के सारे मनोरथ पूर्ण करते हैं।हालांकि सनातन सांस्कृतिक मूल्यों में उल्लेखित यज्ञ की महत्ता बताना संभव नहीं है। यदि इसके एक पक्ष संगतिकरण को भी हम साकार रूप में लें तो मानवीय हित को संबल मिलता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अस्तु, विगत कई वर्षों के उपरांत प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया स्थित रामलल्ला यज्ञ मैदान में पुनः विष्णु महायज्ञ के भव्य आयोजन किए जाने से प्रखण्डवासियों में अपूर्व उत्साह और उल्लास से प्रखण्ड का कण-कण रोमांचित होता दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर विष्णु महायज्ञ के आयोजन से पाकुड़िया प्रखण्ड में आध्यात्मिक सुगंध बिखरने से लोगों के मन-मस्तिष्क में अपूर्व उत्साह का संचार होगा जिससे मन प्रसन्न रहेगा। इससे लोगों में सामाजिक सद्भाव की वृद्धि होगी और नकारात्मक भाव का लोप होता दिखेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विष्णु यज्ञ के विशाल आयोजन और मनोरंजन की सामग्री आने तथा संध्या को बंगला, संथाली व लाल मोहन तिवारी की मनोहारी शैली में हिन्दी, बंगला, खोरठा भाषा में श्रीराम विवाह, शिव-पार्वती सहित कई आख्यायिकाओं की प्रस्तुतियों से प्रखण्डवासियों की उत्सुकता बढ़ती दिख रही है और 21 से 29 अप्रैल की वेला की प्रतीक्षा में लोग पलकें बिछाए बैठे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">यज्ञ समिति के उत्साही तरुणों के प्रति लोगों ने बधाई दी है और विश्वास जताया है कि वे विष्णु महायज्ञ के आयोजन में पूर्णत: सफल होंगे।</div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 19:46:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सहियाओं के मानदेय पर विधानसभा में उठा सवाल, सरकार देगी एकमुश्त 24 हजार रुपये </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong> झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सहियाओं के मानदेय का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विधायक स्टीफन मरांडी ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मईयां सम्मान योजना के तहत 2,500 रुपये दिए जाते हैं, जबकि स्वास्थ्य सहियाओं को मात्र 2,000 रुपये मानदेय मिलता है, जो अनुचित है। उन्होंने सहियाओं का मानदेय बढ़ाने की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले निर्मल महतो ने भी सहियाओं की समस्याओं को सदन में उठाते हुए कहा कि कोरोना काल में सहियाओं ने अभूतपूर्व कार्य किया है, इसके बावजूद वे अक्सर कम मानदेय को लेकर धरना देने को मजबूर</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170724/question-raised-in-the-assembly-on-the-honorarium-of-sahiyas"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-210.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong> झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सहियाओं के मानदेय का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विधायक स्टीफन मरांडी ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मईयां सम्मान योजना के तहत 2,500 रुपये दिए जाते हैं, जबकि स्वास्थ्य सहियाओं को मात्र 2,000 रुपये मानदेय मिलता है, जो अनुचित है। उन्होंने सहियाओं का मानदेय बढ़ाने की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले निर्मल महतो ने भी सहियाओं की समस्याओं को सदन में उठाते हुए कहा कि कोरोना काल में सहियाओं ने अभूतपूर्व कार्य किया है, इसके बावजूद वे अक्सर कम मानदेय को लेकर धरना देने को मजबूर रहती हैं। उन्होंने सहियाओं को कम से कम 10,000 रुपये मासिक मानदेय देने की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने जवाब में कहा कि राज्य में कुल 39,964 सहिया कार्यरत हैं और सरकार उनके प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि कोरोना अवधि के दौरान एक सहिया, रेनी देवी, की मृत्यु भी हुई थी। मंत्री ने कहा कि वर्तमान में एक सहिया की औसत मासिक आय लगभग 12,000 रुपये है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंसारी ने घोषणा की कि सरकार 8 मार्च को राज्य की 42,000 सहियाओं को एकमुश्त 24,000 रुपये प्रदान करेगी। सरकार का कहना है कि यह कदम सहियाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।</div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 20:44:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>फुटबॉल प्रतियोगिता के फ़ाइनल में पहुंची झामुमो केंद्रीय कमेटी सदस्य उपासना मरांडी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong>   नावा मार्सल क्लब पंचायत फूलझीझिरी ग्राम दलदली खेदामारा के तत्वाधान में दलदली मैदान में तीन दिवसीय फाइनल फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। फाइनल फुटबॉल मैच का उद्घाटन मुख्य अतिथि झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी, प्रखंड उपाध्यक्ष अशोक भगत, मुखिया बिनय सोरेन ने संयुक्त रूप से खिलाड़ियों से हाथ मिलाकर परिचय प्राप्त कर एवं फुटबॉल  को उछाल कर किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पहुंचे हुए मुख्य अतिथियों का क्लब के अध्यक्ष सहित अन्य सदस्यों ने फूल माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत कर सम्मानित किया। केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी ने अपने संबोधन में ने कहा कि खेल एक ऐसा प्लेटफॉर्म</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170722/jmm-central-committee-member-upasana-marandi-reached-the-final-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-111.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong>  नावा मार्सल क्लब पंचायत फूलझीझिरी ग्राम दलदली खेदामारा के तत्वाधान में दलदली मैदान में तीन दिवसीय फाइनल फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। फाइनल फुटबॉल मैच का उद्घाटन मुख्य अतिथि झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी, प्रखंड उपाध्यक्ष अशोक भगत, मुखिया बिनय सोरेन ने संयुक्त रूप से खिलाड़ियों से हाथ मिलाकर परिचय प्राप्त कर एवं फुटबॉल  को उछाल कर किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहुंचे हुए मुख्य अतिथियों का क्लब के अध्यक्ष सहित अन्य सदस्यों ने फूल माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत कर सम्मानित किया। केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी ने अपने संबोधन में ने कहा कि खेल एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो युवाओं को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाता है। वहीं फाइनल फुटबॉल मैच हिरणपुर देवा टीम  एवं सपदहा के बीच खेला गया। जिसमे हिरणपुर देवा टीम ने सपादहा को एक गोल से हराकर जीत हासिल की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों ने बताया कि प्रतियोगिता में कुल 24 टीमों ने हिस्सा लिया है। जिसके फाईनल में विजेता टीम हिरणपुर देवा को प्रथम पुरस्कार बड़ा खस्सी , द्वितीय पुरस्कार सपादहा को एक छोटा खस्सी प्राइज स्वरूप दिया गया । मौके पर महिला मोर्चा प्रखंड अध्यक्ष शुभसिनी मुर्मू, सिल्वन्ति मुर्मू  अजीमुद्दीन अंसारी, पूर्व मुखिया गोमस्ता हेमब्रोम, बबलू मास्टर, कायलु अंसारी सहित अन्य झामुमो कार्यकर्त्ता एवं सैकड़ों खेलप्रेमी मौजूद थे।</div>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 20:41:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मंजरों से लदा आम वृक्ष आम फसलें अधिक होने की सम्भावना से कृषकों में छाया उल्लास</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखण्ड:- </strong>प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आम वृक्षों पर घने मंजरों से किसान आशान्वित हैं कि विगत साल की भांति इस वर्ष भी आम की फसलों की पैदावार अधिक हो सकती है। यद्यपि कृषकों का मानना है कि असमय बारिश व आंधी चली तो आम फसलों को क्षति होने की सम्भावनाएँ हैं। बहरहाल फिलहाल आम के मंजरों से लदा वृक्ष दिख रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य सरकार की तरफ से भी पाकुड़िया प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर फलदार पौधा, विशेष रूप से आम के कई प्रजातियों के पौधों का रोपण कराया गया है।</div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170527/mango-tree-laden-with-mango-trees-joy-among-the-farmers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-110.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखण्ड:- </strong>प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में आम वृक्षों पर घने मंजरों से किसान आशान्वित हैं कि विगत साल की भांति इस वर्ष भी आम की फसलों की पैदावार अधिक हो सकती है। यद्यपि कृषकों का मानना है कि असमय बारिश व आंधी चली तो आम फसलों को क्षति होने की सम्भावनाएँ हैं। बहरहाल फिलहाल आम के मंजरों से लदा वृक्ष दिख रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य सरकार की तरफ से भी पाकुड़िया प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर फलदार पौधा, विशेष रूप से आम के कई प्रजातियों के पौधों का रोपण कराया गया है। पिछले साल प्रखण्ड कार्यालय परिसर पाकुड़िया में विभिन्न प्रकार की आम फसलों की प्रदर्शनी आयोजित कर किसानों को प्रोत्साहित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों प्रखण्ड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हिमसागर, लंगड़ा आदि के अलावा स्थानीय आमों की पैदावार भी अच्छी होती दिख रही है। लखीपोखर, कचूवाबथान, चूनपाड़ा, रामघाटी, राजवाड़ी, झरिया आदि गांवों के आम की मिठास से पाकुड़िया बाजार सुगंधित होता रहा है। प्रखण्ड के किसानों का मानना है कि आम की फसलें अच्छी होने पर वर्षा भी पर्याप्त होने की सम्भावना रहती है। वर्षा समय पर तथा कृषि के अनुकूल हो तो किसानों के साथ लोगों की खुशहाली भी बढ़ेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम स्वास्थ्यवर्धक है और लोग इसे कई प्रकार से सेवन करते रहे हैं। जानकार बताते हैं कि फलों का राजा आम श्रीलंका का प्रसिद्ध फल है। जब माता सीता जी की खोज में पवन पुत्र हनुमान जी लंका गए और माता से भेंट कर सभी समाचार सुनाए, इस बीच बजरंगबली को भूख लगने पर माता से आज्ञा लेकर वे अपनी भूख मिटाने के लिए बगिया जाकर क्षुधा शांत की तथा आम फलों को भारत की ओर फेंक दिया। तभी से फलों का राजा आम भारत भूमि को मिठास से सुगंधित करता रहा है। फलों का राजा आम हमारे लिए स्वास्थ्यवर्धक और गुणकारी फल है। इसका सेवन करना बुद्धिमानी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर इस मौसम में साजन का वृक्ष भी सफेद फूलों से आच्छादित दिख रहा है। किसानों ने बताया कि साजन की पत्तियां काफी गुणकारी हैं और साजन जिसे इन क्षेत्रों में लोग सोंटी कहते हैं, उसकी सब्जी बड़े ही स्वादिष्ट होती है। लोगों का कहना है कि साजन के फूल और आम के वृक्षों पर मंजर आने का संकेत वर्षा के मौसम के लिए विशेष रूप से अच्छा माना जाता रहा है।</div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:53:50 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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            <item>
                <title>सनातन सांस्कृतिक मूल्यों में राष्ट्र सर्वोपरि – हिन्दु विचार मंच, पाकुड़िया इकाई</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखण्ड:-</strong> आर्यावर्त या भारत वर्ष के चक्रवर्ती सम्राटों ने कभी किसी राष्ट्र पर आक्रमण नहीं किया। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के आलोक में राष्ट्रीय भाव को सर्वोपरि मानकर भारतीय राष्ट्र को समृद्धि की शिखर पर पहुंचाया। वहीं सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने पूर्णतः राष्ट्रीय भावना के आलोक में शासन करते हुए भारत की समृद्धि को गति प्रदान की और यूनानी शासक सिकंदर को पराजित कर यह सिद्ध कर दिया कि भारत अकारण किसी राष्ट्र पर आक्रमण नहीं करने की नीति पर अडिग है, लेकिन किसी ने मातृभूमि भारत वर्ष पर आक्रमण करने का साहस किया तो उसे पराजय होना</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170403/nation-supreme-in-eternal-cultural-values-%E2%80%93-hindu-vichar-manch"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-38.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखण्ड:-</strong> आर्यावर्त या भारत वर्ष के चक्रवर्ती सम्राटों ने कभी किसी राष्ट्र पर आक्रमण नहीं किया। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के आलोक में राष्ट्रीय भाव को सर्वोपरि मानकर भारतीय राष्ट्र को समृद्धि की शिखर पर पहुंचाया। वहीं सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने पूर्णतः राष्ट्रीय भावना के आलोक में शासन करते हुए भारत की समृद्धि को गति प्रदान की और यूनानी शासक सिकंदर को पराजित कर यह सिद्ध कर दिया कि भारत अकारण किसी राष्ट्र पर आक्रमण नहीं करने की नीति पर अडिग है, लेकिन किसी ने मातृभूमि भारत वर्ष पर आक्रमण करने का साहस किया तो उसे पराजय होना पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु देश का दुर्भाग्य रहा कि भारत वर्ष में शक्तिशाली सम्राट नहीं रहने से 7वीं सदी में विदेशी मुस्लिम आक्रांता मीर कासिम, मुहम्मद गोरी, गजनवी, बख्तियार खिलजी जैसे आक्रांताओं ने भारत की भूमि पर अकारण आक्रमण कर अपार धन–संपदा की लूटपाट की। यद्यपि स्वतंत्र भारत के वामपंथी इतिहासकारों ने इन मुस्लिम आक्रांताओं, विदेशी मुगल कालीन औरंगजेब और अंग्रेज शासकों के अमानवीय कृत्यों का इतिहास में उल्लेख न कर आक्रांताओं का महिमामंडन किया। भारत के वीर सपूतों शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप सहित वीर नायकों की उपेक्षा कर उन्हें नीचा दिखाने की कुचेष्टा करते हुए राष्ट्रीय भाव का शोषण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अस्तु, 7वीं से 20वीं सदी तक पूरे तेरह सौ वर्षों तक पराधीन रहे भारत वर्ष को अंग्रेजों की कुटिल नीति के तहत मजहब के आधार पर पाकिस्तान का गठन करा कर अस्थिर किया गया और वे पलायन कर गए। वहीं दूसरी ओर अंग्रेजों द्वारा सनातन धर्म और संस्कृति को विकृत करने के उपरांत स्वतंत्र भारत की सरकारों ने भी सनातन सांस्कृतिक मूल्यों की उपेक्षा की। फलस्वरूप आर्य–अनार्य, धर्म एवं जातीय विभाजन की नीति ने भारतीय राष्ट्रीय भावना को क्षति पहुंचाई और राष्ट्रीय हित में गंभीर मंथन न करने के कारण भारत की पावन धरा पर साम्प्रदायिक तथा जातीय–क्षेत्रीय भेद बढ़ते रहे जिससे विकसित धारा लंबे समय तक प्रभावित हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि भारतीय प्रजातांत्रिक राष्ट्र में पहली बार सनातन सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित पूर्ण बहुमत से भाजपा की केंद्रीय सरकार गठित हुई। लेकिन वर्षों तक सत्ता में रही कांग्रेस के नेता राहुल गांधी नरेंद्र मोदी की सरकार को सूट–बूट की सरकार, राफेल, चौकीदार चोर तथा हिन्दुओं को हिंसक बताते हुए लोकसभा में देवी–देवताओं पर तथ्यविहीन विषय उठाते रहे। मोदी की आड़ में भारत वर्ष को लांछित करते हुए राष्ट्र विरोधियों को सह देते रहे। यद्यपि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘संविधान बदलने’ जैसे नैरेटिव से भाजपा को कम सीटें मिलीं और एनडीए गठबंधन की सरकार बनी, जबकि कांग्रेस को लाभ हुआ तथा राहुल विपक्ष के नेता बने।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु अब तक विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी बिना प्रमाणिक तथ्यों के आधार पर लोकसभा की कार्यवाही बाधित करते रहे हैं। पुनः लोकसभा में पूर्व सेना अध्यक्ष नरवणे के नाम पर भारतीय सेना का मनोबल तोड़ने की चर्चा कर राहुल कार्यवाही बाधित करते दिखे, जबकि नरवणे की पुस्तक अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है, यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में कह चुके हैं। इससे पहले भी विपक्षी नेता कई अवसरों पर बिना प्रमाणिक विषयों को उठाकर कार्यवाही बाधित करते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों पुनः चीन के संदर्भ में सरकार को घेरने का प्रयास हो रहा है, परन्तु क्या देश के लोगों, विशेषकर जेन–जी को यह जानने का अधिकार नहीं है कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शासनकाल में चीन ने बड़े पैमाने पर भारतीय भूमि को कैसे हड़प लिया? तिब्बत के विषय पर नेहरू मौन क्यों रहे? वहीं दूसरी ओर भारत के अभिन्न अंग जम्मू–कश्मीर राज्य पर पाकिस्तान ने 1948 में अकारण आक्रमण कर उसे अपने अधीन कर लिया और नेहरू सरकार कुछ नहीं कर सकी — क्यों? जिसका दंश भारत आज तक झेल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता बड़े गर्व से कहते हैं कि इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को दो भागों में बांटकर बांग्लादेश का निर्माण कराया, पर वे यह नहीं बताते कि 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण कराने के बाद बिना शर्त वापस क्यों कर दिया? जबकि पाकिस्तान के कब्जे में 55 भारतीय सैनिकों को क्यों नहीं छुड़ा सकीं ‘लोह–महिला’ श्रीमती गांधी? वहीं सिमला समझौते में भारत को क्या हासिल हुआ — इसका जवाब भी देश राहुल से जानना चाहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ होने वाले अमानवीय और घृणित अपराधों पर विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ओवैसी मौन क्यों हैं? वहीं हामास जैसे आतंकियों के समर्थन में नारे लगाने वालों पर भी वे चुप रहते हैं। भारत वर्ष में केवल राजनीतिक लाभ हेतु हिन्दुओं को विभिन्न जातियों में बांट कर देश की विकसित धारा को बाधित करने वाले विपक्षी दलों को नई पीढ़ी को बताना चाहिए कि क्या यह जातीय विभाजन भारत और संविधान विरोधी मानसिकता नहीं है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यद्यपि हिन्दु विचार मंच किसी राजनीतिक पार्टी का पक्ष या विरोध नहीं करता, पर सनातन सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों के विपरीत मानसिकता का प्रखर प्रतिरोध करता रहेगा। सनातन संस्कृति में मातृभूमि को सर्वोपरि मानकर उसकी रक्षा–सुरक्षा करना सम्राटों का परम धर्म माना गया है। इसी हेतु श्रीराम ने मातृभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर बताया है। विश्व में भारत वर्ष ही एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जो मातृभूमि को माता कहता है। सनातन संस्कृति में भारत की धरा केवल भूखण्ड नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु स्वतंत्रता के पश्चात कांग्रेस की सरकारों ने सनातन संस्कृति, धर्म व मूल्य की उपेक्षा करते हुए वोट प्राप्ति हेतु ‘धर्म’ यानी कर्तव्य को मजहब/रिलीजन के समकक्ष रख दिया, जिससे ‘राष्ट्रीय धर्म’ की भावना कमजोर होती चली गई। इसके कारण जातीय तथा क्षेत्रीय भाव बढ़े और भारत की सामूहिक प्रगति बाधित हुई।भारत वर्ष की पावन धरा पर विभिन्न मत, पंथ, मजहब और रिलीजन के अनुयायी रहते हैं और सभी को अपना पंथ–मत पालन करते हुए भारतीय राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना रखनी चाहिए — यही है राष्ट्रीय भाव।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन दिनों बाबर, टीपू सुल्तान और ‘वंदे मातरम्’ गीत पर राष्ट्रीय बहस टीवी चैनलों पर चल रही है। क्या स्वतंत्र भारत में आक्रमणकारियों का गुणगान उचित है? वहीं भारत माता के प्रति समर्पण के भाव से पूरित ‘वंदे मातरम्’ गीत क्या देशवासियों में राष्ट्रीय भावना को प्रेरित नहीं करता? यह गीत किसी का विरोधी कैसे हो सकता है? राष्ट्रीय भावना में ही भारत के विकसित होने के बीज निहित हैं। </div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 20:25:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुन्दरपुर माझी टोला में जल टंकी और नल कूपों से पेयजल की आपूर्ति नहीं होने से बढ़ी कठिनाई</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:- </strong>जल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा निर्मित जल टंकियों और बड़े पैमाने पर बनाए गए नल कूपों की पूर्ण मरम्मति नहीं की जाने तथा जल टंकियों से पेयजल की आपूर्ति नहीं होने की सूचना के बाद भी विभिन्न ग्रामीण इलाकों में ठंड के मौसम में जल की आपूर्ति नहीं होने से कठिनाई बढ़ी। हालांकि ठंड के दिनों में लोग दूसरे टोले तथा दूर से जल लाकर उपयोग करते रहे हैं, लेकिन गर्मी और कड़ी धूप में लोगों के समक्ष पेयजल की कठिनाइयां बढ़ती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में पाकुड़िया प्रखंड के राजपोखर पंचायत के ग्राम श्यामसुंदरपुर माझी टोला</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170244/difficulty-increased-due-to-non-supply-of-drinking-water-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-19.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:- </strong>जल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा निर्मित जल टंकियों और बड़े पैमाने पर बनाए गए नल कूपों की पूर्ण मरम्मति नहीं की जाने तथा जल टंकियों से पेयजल की आपूर्ति नहीं होने की सूचना के बाद भी विभिन्न ग्रामीण इलाकों में ठंड के मौसम में जल की आपूर्ति नहीं होने से कठिनाई बढ़ी। हालांकि ठंड के दिनों में लोग दूसरे टोले तथा दूर से जल लाकर उपयोग करते रहे हैं, लेकिन गर्मी और कड़ी धूप में लोगों के समक्ष पेयजल की कठिनाइयां बढ़ती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में पाकुड़िया प्रखंड के राजपोखर पंचायत के ग्राम श्यामसुंदरपुर माझी टोला में जल टंकी तथा नल कूप की खराबी के कारण टोलेवासियों को फिलहाल दूर से पेयजल लाना पड़ता है। 17 फरवरी को टोले की महिलाओं ने बताया कि बहुत दिनों से जल टंकी से जल की आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे स्थान से पानी लाना पड़ता है, जबकि नल कूप बिल्कुल खराब पड़ा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं प्रखंड मुख्यालय पाकुड़िया स्थित चांय पाड़ा परमेश्वर धर्मशाला तथा बांध पोखर के निकट जल टंकी से जल आपूर्ति बहुत दिनों से बाधित देखी गई। लोगों का मानना है कि मौसम के बदलाव के साथ पेयजल की कठिनाइयां बढ़ती हैं। जल एवं स्वच्छता विभाग को स्थल निरीक्षण कर सभी नल कूपों और जल टंकियों को ठीक करना चाहिए ताकि पेयजल की सुविधा उपलब्ध हो सके। </div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 20:21:45 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्रीय कमेटी सदस्य उपासना मरांडी ने किया इनायत अस्पताल का उद्धघाटन</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong> झामुमो केंद्रीय कमेटी सदस्य उपासना मरांडी ने मंगलवार को पाकुड़िया के सिद्धू -कान्हू मोड़ से भगतपड़ा जाने वाले सड़क पर इनायत हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उपासना मरांडी ने विधिवत रूप से फीता काटकर इनायत हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। अपने सम्बोधन मे उपासना मरांडी ने कहा कि इस तरह के हॉस्पिटल का पाकुड़िया को आवश्यकता थी। अब पाकुड़िया प्रखंड के लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने संचालक से हॉस्पिटल में सेवा भाव से कार्य करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसे व्यवसायिक रुप ना देकर सेवा भाव से कार्य करें</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170095/central-committee-member-upasana-marandi-inaugurated-inayat-hospital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-27.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:- </strong> झामुमो केंद्रीय कमेटी सदस्य उपासना मरांडी ने मंगलवार को पाकुड़िया के सिद्धू -कान्हू मोड़ से भगतपड़ा जाने वाले सड़क पर इनायत हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उपासना मरांडी ने विधिवत रूप से फीता काटकर इनायत हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। अपने सम्बोधन मे उपासना मरांडी ने कहा कि इस तरह के हॉस्पिटल का पाकुड़िया को आवश्यकता थी। अब पाकुड़िया प्रखंड के लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने संचालक से हॉस्पिटल में सेवा भाव से कार्य करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसे व्यवसायिक रुप ना देकर सेवा भाव से कार्य करें ताकि लोगों को इस हॉस्पिटल की सेवा मिल सके। गरीबों का सेवा ही करना सबसे बड़ा धर्म है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अस्पताल के तरफ से अगर बीच बीच मे एक दिन गरीब का इलाज नि:शुल्क किया जाये तो इससे बड़ा कार्य कोई नहीं है। गरीब मरीज पैसे के अभाव में अपना इलाज बेहतर तरीका से नहीं करा सकते हैं। जिससे गरीबों को इलाज कराने में काफी राहत मिलेगी। अस्पताल के व्यवस्थापक मोहम्मद मारूफ ने कहा कि एक ही छत के नीचे सभी रोगों के डॉक्टरी जांच की जाएगी । मरीजों को इलाज के लिए इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ व फिजीशियन की भी व्यवस्था की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अनुभवी डॉक्टर द्वारा लोगों का इलाज किया जाएगा। इस अस्पताल में ऑर्थो, मेडिसिन, पैथोलॉजी और ओटी की सुविधा उपलब्ध है। डॉक्टर के रूप मे डॉ तन्मय चक्रवत्ती एम डी, डॉ. डी कर ग्यानॉलोजिस्ट, डॉ एम पाण्डेय जेनरल फिजिशयन, डॉ अब्दुल जेनरल फिजिशयन उपलब्ध हैं। ब्इस मौके पर हाजी शौकत अली, हाजी ईसाहक़ अंसारी, हाजी मुंसेफुल अंसारी, अल्ताफ हसन, मारूफ अंसारी, आजाजुल अंसारी, अप्सरुल अंसारी, साईदुर रहमान, सरफराज अंसारी समेत अन्य उपस्थित थे। </div>]]>
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                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 19:44:29 +0530</pubDate>
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