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                <title>Family Support - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>दीवार गिरने से बुजुर्ग की मौत, एक हफ्ते से चल रहा था इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>उन्नाव।</strong> माखी थाना क्षेत्र के बरभौला गांव में एक सप्ताह पहले दीवार गिरने से घायल हुए 80 वर्षीय बुजुर्ग की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। गुरुवार को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।</div>
<div>  </div>
<div>जानकारी के अनुसार बरभौला गांव निवासी शिवकी पुत्र मेदा (80) करीब एक सप्ताह पहले अपने घर पर मौजूद थे। तभी अचानक कच्ची दीवार भरभराकर उनके ऊपर गिर गई। हादसे में वे मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें मलबे से बाहर निकालकर तत्काल जिला अस्पताल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186537/old-man-died-due-to-wall-collapse-treatment-was-going"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/19511441.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>उन्नाव।</strong> माखी थाना क्षेत्र के बरभौला गांव में एक सप्ताह पहले दीवार गिरने से घायल हुए 80 वर्षीय बुजुर्ग की जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। गुरुवार को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।</div>
<div> </div>
<div>जानकारी के अनुसार बरभौला गांव निवासी शिवकी पुत्र मेदा (80) करीब एक सप्ताह पहले अपने घर पर मौजूद थे। तभी अचानक कच्ची दीवार भरभराकर उनके ऊपर गिर गई। हादसे में वे मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें मलबे से बाहर निकालकर तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया था।</div>
<div> </div>
<div>चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए इलाज शुरू किया। करीब एक सप्ताह से उनका उपचार चल रहा था। परिजनों के अनुसार गुरुवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान मौत हो गई।</div>
<div> </div>
<div>सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। गुरुवार दोपहर परिजन शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।</div>
<div> </div>
<div>परिजनों ने बताया कि मृतक शिवकी की दो बेटियां हैं। वह लंबे समय से अपनी बेटियों के पास ही रहकर जीवन यापन कर रहे थे। अधिक उम्र होने के कारण वह घर पर ही रहते थे।</div>
<div> </div>
<div>परिजनों का कहना है कि हादसे में परिवार के मुखिया की मौत से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इलाज में काफी खर्च होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग की है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 18:30:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>UPSC में बलिया का परचम: मोनिका श्रीवास्तव ने हासिल की 16वीं रैंक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बलिया।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के ताजा परिणाम में बलिया जिले के पांच अभ्यर्थियों ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। इस बार पंदह ब्लॉक के खरसरा गांव की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक प्राप्त कर सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। वहीं गड़हांचल क्षेत्र के दौलतपुर गांव के रहने वाले रविशेखर सिंह ने 176वीं रैंक प्राप्त कर परिवार और जिले का मान बढ़ाया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा अनिंद्य पाण्डेय ने 158वीं रैंक, शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक और आदित्य कृष्ण तिवारी ने 540वीं रैंक हासिल कर जिले को गौरवान्वित किया है। लगातार दूसरे वर्ष</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172801/shankaracharya-leaves-for-lucknow-for-religious-war-to-declare-mother"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1000928399.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बलिया।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के ताजा परिणाम में बलिया जिले के पांच अभ्यर्थियों ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। इस बार पंदह ब्लॉक के खरसरा गांव की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने ऑल इंडिया 16वीं रैंक प्राप्त कर सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। वहीं गड़हांचल क्षेत्र के दौलतपुर गांव के रहने वाले रविशेखर सिंह ने 176वीं रैंक प्राप्त कर परिवार और जिले का मान बढ़ाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा अनिंद्य पाण्डेय ने 158वीं रैंक, शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक और आदित्य कृष्ण तिवारी ने 540वीं रैंक हासिल कर जिले को गौरवान्वित किया है। लगातार दूसरे वर्ष बलिया के युवाओं ने UPSC जैसी कठिन परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिछले वर्ष भी जिले की बेटी शक्ति दूबे ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त कर इतिहास रचा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>16वीं रैंक लाकर मोनिका ने बढ़ाया जिले का मान</strong></div>
<div style="text-align:justify;">पंदह ब्लॉक के खरसरा गांव की रहने वाली मोनिका श्रीवास्तव ने इस बार ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले उन्हें 455वीं रैंक मिली थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी।मोनिका की शुरुआती पढ़ाई बिहार के औरंगाबाद से हुई, जबकि उन्होंने IIT गुवाहाटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। तकनीकी क्षेत्र में बेहतर करियर की संभावनाओं के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और अंततः शानदार सफलता हासिल की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में वह भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में ट्रेनिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं। होली के मौके पर जब वह गांव आई हुई थीं, उसी दौरान उन्हें परिणाम घोषित होने और 16वीं रैंक मिलने की जानकारी मिली।उनके पिता ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव सेवानिवृत्त अभियंता हैं, जबकि मां भारती श्रीवास्तव औरंगाबाद (बिहार) में प्रधानाध्यापिका हैं। मोनिका ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और निरंतर मेहनत को दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>घर से ऑनलाइन पढ़ाई कर रविशेखर ने पाई सफलता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">गड़हांचल क्षेत्र के दौलतपुर गांव के रहने वाले रविशेखर सिंह ने UPSC में 176वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता दिलीप सिंह बलिया में असिस्टेंट पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।रविशेखर ने बताया कि उन्होंने घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बसंतपुर में, इंटरमीडिएट की पढ़ाई नागाजी माल्देपुर से और स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह उनका तीसरा प्रयास था और दूसरा इंटरव्यू था। वह रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई करते थे। रविशेखर ने कहा कि तैयारी करने वाले युवाओं को “सीरियस नहीं बल्कि सिन्सियर” रहना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मां की आंखों से छलके खुशी के आंसू</strong></div>
<div style="text-align:justify;">रविशेखर की मां पुष्पा देवी बेटे की सफलता की खबर सुनकर भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि रवि बचपन से ही मेधावी रहा है और पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा। उन्होंने कहा कि आज बेटे की सफलता से पूरे परिवार की वर्षों की मेहनत सफल हो गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अनिंद्य पाण्डेय ने सुधारी अपनी रैंक</div>
<div style="text-align:justify;">रामपुर निवासी कमलेश पाण्डेय के बेटे अनिंद्य पाण्डेय ने इस बार 158वीं रैंक हासिल की है। इससे पहले सिविल सेवा परीक्षा 2024 में उन्हें 271वीं रैंक मिली थी। इस बार उन्होंने सौ से अधिक स्थान की छलांग लगाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक हासिल की</div>
<div style="text-align:justify;">पियरौटा गांव की रहने वाली शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, शिक्षकों और लगातार मेहनत को दिया। शिक्षा ने कहा कि अगर व्यक्ति हार नहीं मानता और सही दिशा में प्रयास करता है तो सफलता जरूर मिलती है।</div>
<div style="text-align:justify;">मां के सपनों को पूरा करने निकले आदित्य</div>
<div style="text-align:justify;">चितबड़ागांव के रहने वाले आदित्य कृष्ण तिवारी ने दूसरे प्रयास में 540वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया और दो साल नौकरी भी की।</div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि अपनी अफसर मां के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने यह सफलता हासिल की और अपने परिवार का सपना पूरा किया।</div>
<div style="text-align:justify;">जिले में खुशी का माहौल</div>
<div style="text-align:justify;">UPSC के परिणाम आने के बाद बलिया जिले में खुशी की लहर है। इन युवाओं की सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। लोग लगातार इनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 23:29:36 +0530</pubDate>
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