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                <title>property dispute case - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>property dispute case RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>संगमरमर मस्जिद ध्वस्तीकरण विवाद पहुंचा इलाहाबाद हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड सर्कुलेटिंग एरिया में स्थित संगमरमर मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक दायरे में पहुंच गया है। मस्जिद कमेटी ने रेलवे द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है और नोटिस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">याचिका में कमेटी की ओर से कहा गया है कि संबंधित संपत्ति वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज है, इसलिए बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करना अवैध है। कमेटी ने अदालत से आग्रह किया है कि मामले की सुनवाई तक किसी भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177249/marble-mosque-demolition-dispute-reached-allahabad-high-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260425-wa0263.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> प्रयागराज जंक्शन के सिटी साइड सर्कुलेटिंग एरिया में स्थित संगमरमर मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक दायरे में पहुंच गया है। मस्जिद कमेटी ने रेलवे द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है और नोटिस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">याचिका में कमेटी की ओर से कहा गया है कि संबंधित संपत्ति वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज है, इसलिए बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करना अवैध है। कमेटी ने अदालत से आग्रह किया है कि मामले की सुनवाई तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए, जिससे धार्मिक स्थल को नुकसान न पहुंचे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, रेलवे प्रशासन ने अपने पक्ष में कहा है कि उक्त ढांचा रेलवे की भूमि पर स्थित है और स्टेशन क्षेत्र के पुनर्विकास व यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए इसे हटाना आवश्यक है। रेलवे का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई हैं और संबंधित पक्ष को पहले ही नोटिस देकर 27 अप्रैल तक परिसर खाली करने का समय दिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले के तूल पकड़ने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। दोनों पक्षों के दावों के बीच अब निगाहें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि वक्फ रिकॉर्ड और भूमि स्वामित्व के दस्तावेज इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। अब यह देखना अहम होगा कि अदालत इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या फिलहाल ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई जाती है या नहीं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 18:13:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अनीता आडवाणी का दावा खारिज, राजेश खन्ना संग संबंध को 'विवाह' मानने से इनकार: बॉम्बे हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने संबंध को विवाह का दर्जा देने की मांग की थी। जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने अनीता आडवाणी द्वारा दायर प्रथम अपील को खारिज करते हुए 2017 में मुंबई के डिंडोशी सिविल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सिविल कोर्ट ने उनके मुकदमे को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अनीता आडवाणी का दावा था कि वह राजेश खन्ना के साथ लगभग एक दशक तक लिव-इन संबंध में रहीं और वर्ष 2012 में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174918/anita-advanis-claim-rejected-bombay-high-court-refuses-to-consider"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/who-is-anita-advani-and-why-court-reject-her-marriage-with-rajesh-khanna-1775108573604.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री अनीता आडवाणी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अपने संबंध को विवाह का दर्जा देने की मांग की थी। जस्टिस शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने अनीता आडवाणी द्वारा दायर प्रथम अपील को खारिज करते हुए 2017 में मुंबई के डिंडोशी सिविल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। सिविल कोर्ट ने उनके मुकदमे को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अनीता आडवाणी का दावा था कि वह राजेश खन्ना के साथ लगभग एक दशक तक लिव-इन संबंध में रहीं और वर्ष 2012 में उनके निधन तक उनके साथ रह रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि खन्ना ने गुप्त रूप से उनके सिर पर सिंदूर लगाकर उनसे विवाह किया था। हालांकि, इस दावे का विरोध राजेश खन्ना की विधिक पत्नी डिंपल कपाड़िया, उनकी बेटी ट्विंकल खन्ना और दामाद अक्षय कुमार ने किया। परिवार ने न तो विवाह और न ही लिव-इन संबंध के दावे को स्वीकार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">अनीता आडवाणी ने यह भी आरोप लगाया था कि राजेश खन्ना की मृत्यु के बाद उन्हें उनके 'आशीर्वाद' बंगले से जबरन बेदखल कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत कपाड़िया परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हालांकि, वर्ष 2015 में हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने उस कार्यवाही को रद्द कर दिया था और यह पाया था कि उनका संबंध 'विवाह के समान' नहीं था। हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि अनीता आडवाणी के दावे को कानूनन मान्यता नहीं दी जा सकती और उनके तथा राजेश खन्ना के संबंध को विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>महाराष्ट्र/गोवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 19:19:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'न्याय नहीं, देरी व दबाव के लिए हो रहे कई मुकदमे', मुकदमों की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते मुकदमों को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अदालतों में दाखिल हो रहे कई मामले न्याय पाने की वास्तविक इच्छा से कम और कार्यवाही में देरी करने, विरोधियों को परेशान करने तथा न्यायिक समय बर्बाद करने के उद्देश्य से अधिक प्रेरित दिखाई देते हैं।</p><p style="text-align:justify;">अदालत ने साफ किया कि न्यायिक व्यवस्था का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल वास्तविक और गंभीर विवादों का समाधान करना है, न कि बार-बार या बेतुके दावों को बढ़ावा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174775/many-cases-are-happening-for-delay-and-pressure-not-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/supream-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते मुकदमों को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अदालतों में दाखिल हो रहे कई मामले न्याय पाने की वास्तविक इच्छा से कम और कार्यवाही में देरी करने, विरोधियों को परेशान करने तथा न्यायिक समय बर्बाद करने के उद्देश्य से अधिक प्रेरित दिखाई देते हैं।</p><p style="text-align:justify;">अदालत ने साफ किया कि न्यायिक व्यवस्था का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल वास्तविक और गंभीर विवादों का समाधान करना है, न कि बार-बार या बेतुके दावों को बढ़ावा देना।</p><p style="text-align:justify;">यदि कोई पक्ष जानबूझकर निरर्थक या परेशान करने वाले मुकदमे दायर करता है, तो अदालत ऐसे मामलों को खारिज करने के साथ-साथ जुर्माना भी लगा सकती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी एक विवाद को अलग-अलग तरीकों से बार-बार उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एक बार जब कोई मामला सक्षम अदालत में पूरी तरह सुना और तय हो जाता है, तो उसी मुद्दे को दोबारा उठाना न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ है। इससे न केवल अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है, बल्कि अन्य मामलों में न्याय मिलने में भी देरी होती है।</p><p style="text-align:justify;">देश भर में लगभग 5.5 करोड़ केस लंबित हैं, जिनमें ज्यादातर निचली अदालतों में हैं। सर्वोच्च न्यायालय में 10 वर्ष से ज्यादा समय से 698 से अधिक जनहित याचिकाएं लंबित हैं। वहीं कुल 3500 जनहित याचिकाएं आजतक सुनवाई का इंतजार कर रहीं हैं। जिन्हें पिछले 42 वर्षों में भी नहीं निपटाया जा सका।</p><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट  ने यह टिप्पणी एक सिविल अपील को खारिज करते हुए की । मामला हैदराबाद के हिमायत नगर स्थित एक संपत्ति विवाद से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, हालांकि उसके कुछ तर्कों से असहमति भी जताई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:40:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने कहा- परिसर खाली होते ही खत्म हो जाते हैं किरायेदार के सभी अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परिसर को खाली करने के साथ ही किरायेदार के सभी विधिक अधिकार खत्म हो जाते हैं। उसे बेदखली का नोटिस दिए जाने की जरूरत नहीं होती। किरायेदार के हक तभी तक कायम रहते हैं, जब तक वह किराया देते हुए बेदखली के आदेश का सामना करता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वाराणसी के फरमान इलाही की याचिका खारिज करते हुए दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">याची ने दालमंडी में चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दी थी। दावा किया गया कि याची कुंडिगढ़ टोला दालमंडी स्थित मकान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172680/high-court-said-%E2%80%93-all-the-rights-of-the-tenant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परिसर को खाली करने के साथ ही किरायेदार के सभी विधिक अधिकार खत्म हो जाते हैं। उसे बेदखली का नोटिस दिए जाने की जरूरत नहीं होती। किरायेदार के हक तभी तक कायम रहते हैं, जब तक वह किराया देते हुए बेदखली के आदेश का सामना करता है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वाराणसी के फरमान इलाही की याचिका खारिज करते हुए दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">याची ने दालमंडी में चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दी थी। दावा किया गया कि याची कुंडिगढ़ टोला दालमंडी स्थित मकान में किरायेदार था। राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण करने से पहले उसे धारा 21 के तहत नोटिस देना चाहिए था। वह संपत्ति से जुड़ा हितबद्ध पक्षकार है। उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, राज्य सरकार की अधिवक्ता श्रुति मालवीय ने कहा कि याची किरायेदार है और उसके पास संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है।याची ने जानबूझकर आंशिक रूप से ध्वस्त की गई संपत्ति की तस्वीरें प्रस्तुत कीं, ताकि अंतरिम राहत प्राप्त की जा सके। वास्तव में संपत्ति पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। तस्वीरों में कोई तिथि या समय नहीं है, इसलिए उन्हें विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने वाराणसी शहर के दालमंडी क्षेत्र में सड़क को चौड़ा करने के लिए 30 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया था। इसमें जमीन को स्वामियों की सहमति से खरीदने का प्रावधान था। शहनवाज खान घर के मालिक थे, उन्होंने राज्यपाल के पक्ष में बिक्री पत्र निष्पादित किया और कब्जा सौंप दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 22:20:27 +0530</pubDate>
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