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                <title>Peace and Humanity - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>कहां गए शांति के कपोत उड़ाने वाले?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की दुनिया बारूद से धधक रही  है। रूस-यूक्रेन  से लेकर मध्य पूर्व के रेगिस्तानों तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर तरफ मिसाइलों की गूँज है। शांति की बाते  अब सुनाई  नही देतीं। शांति के कपोत उड़ाने  वाले दिखाई देने बंद हो गए। युद्ध की विभिषिका के विरोध में प्रदर्शन करने और मोमबत्त्ती  जलाने वाले अब सड़कों से गायब है। युद्ध के विरोध के स्वर धीमे  ही नही हुए ,पूरी तरह खामोश  हो गए। बुद्ध के संदेश अब किताबों में ही बंद होकर रह गए है। युद्धों के विरोध की कही से बात नही उठ रही।  दुनिया में शांति स्थित करने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175385/where-have-those-who-fly-the-pigeons-of-peace-gone"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/pigeon.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की दुनिया बारूद से धधक रही  है। रूस-यूक्रेन  से लेकर मध्य पूर्व के रेगिस्तानों तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर तरफ मिसाइलों की गूँज है। शांति की बाते  अब सुनाई  नही देतीं। शांति के कपोत उड़ाने  वाले दिखाई देने बंद हो गए। युद्ध की विभिषिका के विरोध में प्रदर्शन करने और मोमबत्त्ती  जलाने वाले अब सड़कों से गायब है। युद्ध के विरोध के स्वर धीमे  ही नही हुए ,पूरी तरह खामोश  हो गए। बुद्ध के संदेश अब किताबों में ही बंद होकर रह गए है। युद्धों के विरोध की कही से बात नही उठ रही।  दुनिया में शांति स्थित करने के लिए बने संयुक्त  राष्ट्रसंघ  के मुंह पर टेप चिपक गया। वह देख  सकता है। न कुछ बोल सकता है।  न आदेश कर सकता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना देखिए कि इक्कीसवीं सदी में हम मंगल पर बस्तियां बसाने की बात कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ज़मीन के चंद टुकड़ों और आपसी वर्चस्व के लिए हज़ारों बेगुनाहों का खून बहाने से भी पीछे नहीं हट रहे। युद्ध चाहे रूस और यूक्रेन के बीच हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या इज़राइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव हो</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जीत के झंडे चाहे जिस देश के हाथ आएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हारती  हमेशा मानवता  है।  इन युद्ध में विजयी कोई भी हो, सदा पराजित तो मानव होती है। मरती बस इंसानियत है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि युद्ध कभी समस्या का समाधान नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह नई समस्याओं का जन्मदाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी के कई  बार कहा कि दुनिया को युद्ध की नही , बुद्ध की जरूरत है। कई  मंचों से  उन्होंने यह मांग उठाई, किंतु किसी भी देश ने शांति का समर्थन नही किया। सब देश  गूंगे बन कर रह  गए।  आज भी  ये ही हाल है।  मरता  ईरान खाड़ी के उन देशों पर मिजाइल  और द्रोण  दाग कर तबाही मचा रहा है, जिनमे अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। अपनी बरबादी होते देख ये देश ईरान पर अमेरिकी हमलों का उस तरह विरोध नही कर रहे , जिस तरह कि करना चाहिए।   </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> रूस-यूक्रेन युद्ध के समय   जहाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट को जन्म दिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो मध्य पूर्व (इज़राइल-हमास-ईरान) के संघर्ष ने दुनिया को धार्मिक और कूटनीतिक ध्रुवीकरण के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इन लड़ाइयों में टैंकों की गड़गड़ाहट के बीच जो आवाज़ दब जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह है</span>—<span lang="hi" xml:lang="hi">एक मासूम बच्चे की चीख और एक बेबस माँ की कराह।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध की सबसे बड़ी कीमत वे लोग चुकाते हैं जिनका राजनीति या सत्ता की लालसा से कोई लेना-देना नहीं होता। यूक्रेन के कीव से लेकर गाज़ा की गलियों और ईरान के गांव तक तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हज़ारों औरतें और बच्चे मौत की नींद सो चुके हैं। जो उम्र खिलौनों से खेलने की थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस उम्र में बच्चे बमों के धमाकों को पहचानना सीख रहे हैं। हज़ारों बच्चे अनाथ हो चुके हैं और लाखों का भविष्य मलबे के नीचे दब गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध के दौरान महिलाओं को न केवल विस्थापन का दंश झेलना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वे शारीरिक और मानसिक हिंसा का सबसे आसान लक्ष्य बनती हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध केवल इंसान को नहीं मारता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सदियों से बनी-बनाई सभ्यताओं और बुनियादी ढांचे को भी नष्ट कर देता है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पतालों और रिहायशी इमारतों पर गिरते बम यह दर्शाते हैं कि आधुनिक समाज कितना "असंवेदनशील" हो चुका है। जब एक अस्पताल पर मिसाइल गिरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं ढहती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इंसानियत की आखिरी उम्मीद भी टूट जाती है। इन लड़ाइयों का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। रूस-यूक्रेन संघर्ष ने दुनिया भर में अनाज की आपूर्ति श्रृंखला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को तोड़ दिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे गरीब देशों में भुखमरी का खतरा बढ़ गया। ईंधन की बढ़ती कीमतें और खाद्य पदार्थों की कमी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। जो खरबों डॉलर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में खर्च होने चाहिए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे आज आधुनिक हथियार और मिसाइलें बनाने में झोंके जा रहे हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध का एक और खामोश शिकार हमारा पर्यावरण है। हज़ारों टन गोला-बारूद का इस्तेमाल वायुमंडल को ज़हरीला बना रहा है। जंगलों की आग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री प्रदूषण और ज़मीन में धंसे बारूदी सुरंग </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आने वाली कई पीढ़ियों के लिए मौत का जाल बिछा रहे हैं। हम जिस धरती को बचाने की कसमें खाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी को युद्ध की आग में झोंक रहे हैं। संसाधनों को  बरबाद कर रहे हैं।जब हम टीवी पर बमबारी के दृश्य देखते हैं और उन्हें केवल एक "न्यूज़ अपडेट" की तरह छोड़ देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो समझ लीजिए कि हमारे भीतर की इंसानियत मर चुकी है। युद्ध हमें क्रूर बना देता है। हम मौतों को केवल </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़ों</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में गिनने लगते हैं। घृणा का यह बीज जो आज बोया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भविष्य में और अधिक कट्टरपंथ और आतंकवाद को जन्म देगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका आज दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह बन गया है। उसने इराक पर यह कह कर हमला किया था कि उसके पास कैमिकल और अन्य  घातक शस्त्र है। इराक हार गया। सद्दाम हुसैन पकड़े ही नही गए, उन्हें फांसी हो गई, किंतु अमेरिका इराक से कुछ भी बरामद नही कर पाया। उसका सब झूंठा  प्रचार रहा। अब ईरान पर यह कह कर इस्राइल और अमेरिका ने हमला किया कि वह परमाणु बम बनाने के नजदीक है। उसकी इस शक्ति को  खत्म करना  है। हमले जारी है।  इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए  अपने मन की बात कह  दी कि उसे  ईरान के तेल पर कब्जा  करना  है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तीन </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को अमेरिकी सेना ने एक सैन्य ऑपरेशन के  दौरान वेनेजुयला  </span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को उनके देश (कराकस) से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नार्को-आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपों के बाद की गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi"> बहाना मादक पदार्थो  की तस्करी रोकना था किंतु   अब अमेरिकी राष्ट्र पति ट्रंप  कह रहे हैं कि </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वेनेजुयला  का तेल वे बेचेंगे।  उनकी मर्जी से बिकेगा। इस सब का मतलब साफ है कि दुनिया के संसाधनों पर अमेरिका की नजर है। वह किसी ने किसी बहाने उन पर कब्जा करना   चाहता है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  का एक बड़ा बयान सामने आया। ट्रंप ने कहा है कि अगर थोड़ा और समय मिला तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है और वहां से तेल लेकर बड़ा मुनाफा कमा सकता है। उनके इस बयान ने पहले से चल रहे संघर्ष को और संवेदनशील बना दिया है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को बंद कर दिया है। इस कारण दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतों में तेजी देखी जा रही</span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संघर्ष अब सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहा है। अमेरिका और इस्राइल ने ईरान और लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी कई खाड़ी देशें पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हाल के दिनों में हमलों की संख्या कुछ कम हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पूरी तरह रुकी नहीं है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होने से इन्कार करने वाले ब्रिटेन जैसे वह  देश होर्मुज जलडमरूमध्य   के बंद होने  की वजह से जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रप का  सुझाव है: पहला- अमेरिका से तेल खरीदो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे पास बहुत है। दूसरा- हिम्मत जुटाओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलडमरूमध्य पर जाओ और उसे अपने कब्जे में ले लो।  </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पूर्व महानिदेशक मोहम्मद अल बारदेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे का अल्टीमेटम जारी करने के बाद खाड़ी देशों से हस्तक्षेप करने की तत्काल अपील की है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्व आईएईए प्रमुख ने विनाशकारी सैन्य टकराव की संभावना का जिक्र किया। बारदेई ने एक्स पर एक पोस्ट में पड़ोसी खाड़ी देशों को संबोधित करते हुए कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">कृपया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक बार फिर अपनी पूरी ताकत झोंक दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले कि यह पागल शख्स इलाके को आग का गोला बना दे।"मोहम्मद अल बारदेई ने अपनी गुहार को वैश्विक मंच तक पहुंचाते हुए युद्ध को रोकने में अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। संयुक्त राष्ट्र के साथ रूस-चीन-फ्रांस को संबोधित एक अलग पोस्ट में उन्होंने पूछा कि क्या इस पागलपन को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है</span>?<br /><span lang="hi" xml:lang="hi"></span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध किसी समस्या का स्थायी हल नहीं है। इतिहास ने बार-बार सिखाया है कि युद्ध के मैदान में कभी कोई नहीं जीतता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस जो कम हारता है वह खुद को विजेता घोषित कर देता है। रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूक्रेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इज़राइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान या अमेरिका</span>—<span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ति का प्रदर्शन किसी को महान नहीं बनाता। महानता इस बात में है कि हम आने वाली पीढ़ी को एक ऐसी दुनिया दें जहाँ बारूद की गंध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भाईचारे की मिठास हो। एक बार और अमेरिका वियतनाम और अफगानिस्तान में जाकर अपना अंजाम देख चुका है। बाद में बहुत कुछ गंवाकर वहां से भाग आया। ये ईरान है। यहां  के गांव वाले, युवाओं और बच्चों ने भी अब शस्त्रों से दोस्ती कर ली है। हथियार संभाल लिए है। अमेरिका के दो हैलिकोप्टर को मार गिराने वाला एक मामूली गडरिया है। इस गडरिए को तो युद्ध कला भी नही आती । सिर्फ  इतना जानता है कि ये हैलिकोप्टर  हमलावर अमेरिका के है।  जिस देश की जनता इतनी जुझारू और लड़ाका  हो ,  जिसके गडरिये अमेरिका जैसे देश के दो− दो आधुनिकतम  हैलिकोप्टर गिरा दें,उसे हराना संभव  नहीं।   </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्रों को अपनी ज़िम्मेदारी  समझनी होगी । उन्हें  युद्ध के उन्माद को रोकना होगा। नहीं रोका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह दिन दूर नहीं जब </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इंसान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बचेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसके भीतर की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इंसानियत</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी तरह दफन हो चुकी होगी। हमें यह समझना होगा कि धरती पर सरहदें हमने खींची हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुदरत ने नहीं। शांति की मेज़ पर बैठकर बात करना कमज़ोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सबसे बड़ी बहादुरी है। वक्त आ गया है कि हम "हथियारों की होड़" को छोड़कर "मानवता की जोड़" पर ध्यान दें। वरना इतिहास हमें उन लोगों के रूप में याद रखेगा ,जिनके पास सब कुछ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस एक-दूसरे के लिए दया और प्रेम नहीं था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 17:59:09 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व शान्ति का दिव्यास्त्र अहिंसा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मानव सभ्यता का इतिहास जितना पुराना है उतना ही पुराना संघर्ष और हिंसा का इतिहास भी है। मनुष्य ने विज्ञान में प्रगति की है तकनीक में उन्नति की है और आकाश से लेकर समुद्र की गहराइयों तक अपने कदम बढ़ा दिए हैं। परन्तु एक सत्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था कि यदि मानव के भीतर करुणा और अहिंसा नहीं है तो उसकी सारी प्रगति अधूरी है। आज विश्व के अनेक देशों में युद्ध और संघर्ष का वातावरण बना हुआ है। बड़े राष्ट्र अपनी शक्ति और प्रभुत्व दिखाने के लिए छोटे देशों पर दबाव बना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172609/nonviolence-the-divine-weapon-of-world-peace"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मानव सभ्यता का इतिहास जितना पुराना है उतना ही पुराना संघर्ष और हिंसा का इतिहास भी है। मनुष्य ने विज्ञान में प्रगति की है तकनीक में उन्नति की है और आकाश से लेकर समुद्र की गहराइयों तक अपने कदम बढ़ा दिए हैं। परन्तु एक सत्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था कि यदि मानव के भीतर करुणा और अहिंसा नहीं है तो उसकी सारी प्रगति अधूरी है। आज विश्व के अनेक देशों में युद्ध और संघर्ष का वातावरण बना हुआ है। बड़े राष्ट्र अपनी शक्ति और प्रभुत्व दिखाने के लिए छोटे देशों पर दबाव बना रहे हैं। परिणाम यह हो रहा है कि निर्दोष लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है और मानवता पीड़ा से कराह रही है। ऐसे समय में संसार को यदि कोई सच्चा मार्ग दिखा सकता है तो वह है अहिंसा का मार्ग।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानव जीवन में धर्म का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान माना गया है। धर्म केवल पूजा पाठ या किसी विशेष सम्प्रदाय का नाम नहीं है बल्कि वह जीवन की वह चेतना है जो मनुष्य को मानव बनाती है। धर्म हमें संयम सिखाता है करुणा सिखाता है और दूसरों के जीवन के प्रति सम्मान करना सिखाता है। जब मनुष्य धर्म से दूर हो जाता है तब उसके जीवन में स्वार्थ अहंकार और हिंसा का प्रवेश हो जाता है। यही कारण है कि आज संसार के अनेक हिस्सों में अशान्ति का वातावरण दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा को भारतीय संस्कृति ने सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्वीकार किया है। अहिंसा का अर्थ केवल किसी को शारीरिक रूप से चोट न पहुँचाना ही नहीं है बल्कि किसी भी प्राणी के प्रति मन वचन और कर्म से पीड़ा न पहुँचाना भी है। यह एक ऐसी भावना है जो मानव के भीतर दया और प्रेम का विस्तार करती है। जब मनुष्य अपने भीतर करुणा को जगाता है तब उसके भीतर से क्रोध और घृणा स्वतः समाप्त होने लगती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास इस बात का साक्षी है कि हिंसा ने कभी भी स्थायी समाधान नहीं दिया। युद्ध चाहे किसी भी कारण से किया गया हो उसका परिणाम केवल विनाश ही रहा है। युद्ध में केवल सैनिक ही नहीं मरते बल्कि असंख्य निर्दोष नागरिक भी अपनी जान गंवा देते हैं। बच्चों का बचपन छिन जाता है माताओं की गोद सूनी हो जाती है और पूरे समाज की खुशियाँ समाप्त हो जाती हैं। युद्ध समाप्त होने के बाद भी उसके घाव वर्षों तक समाज को पीड़ा देते रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज दुनिया के कई देशों में युद्ध की आग जल रही है। कहीं सीमा विवाद के नाम पर संघर्ष हो रहा है तो कहीं सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। बड़े देश अपनी सैन्य शक्ति और आर्थिक ताकत के बल पर छोटे देशों को दबाने की कोशिश करते हैं। यह प्रवृत्ति मानवता के लिए अत्यन्त खतरनाक है। जब शक्तिशाली राष्ट्र अपने अहंकार में आकर कमजोर देशों पर आक्रमण करते हैं तो उसका सबसे अधिक दुष्परिणाम उन निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है जिनका उस संघर्ष से कोई सम्बन्ध ही नहीं होता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युद्ध में मरने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी का बेटा होता है किसी का पिता होता है और किसी का जीवन साथी होता है। जब बम और मिसाइलें गिरती हैं तो वे केवल भवनों को ही नष्ट नहीं करतीं बल्कि हजारों सपनों को भी मिटा देती हैं। युद्ध की विभीषिका से केवल सैनिक ही नहीं बल्कि सामान्य नागरिक भी प्रभावित होते हैं। भूख गरीबी और विस्थापन जैसी समस्याएँ जन्म लेती हैं और पूरा समाज संकट में घिर जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानवता के लिए यह अत्यन्त पीड़ादायक स्थिति है कि आज भी दुनिया में समस्याओं का समाधान हिंसा और युद्ध के माध्यम से खोजा जा रहा है। जबकि इतिहास बार बार यह सिद्ध कर चुका है कि हिंसा से केवल हिंसा ही जन्म लेती है। जब एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र पर आक्रमण करता है तो प्रतिशोध की भावना जन्म लेती है और संघर्ष की श्रृंखला लम्बी होती चली जाती है। इस प्रकार हिंसा का यह चक्र कभी समाप्त नहीं होता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे समय में संसार को अहिंसा के मार्ग की ओर लौटने की आवश्यकता है। अहिंसा केवल एक आदर्श नहीं बल्कि एक शक्तिशाली नीति है जो समाज को स्थायी शान्ति की ओर ले जा सकती है। भारत के महान नेता महात्मा गांधी ने इसी अहिंसा के मार्ग को अपनाकर विश्व को एक नई दिशा दी थी। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि बिना हथियार उठाए भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया जा सकता है और सत्य तथा अहिंसा के बल पर विजय प्राप्त की जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अहिंसा का मार्ग साहस और धैर्य का मार्ग है। यह कमजोर लोगों का नहीं बल्कि महान आत्मबल वाले लोगों का मार्ग है। जो व्यक्ति या राष्ट्र अपने भीतर आत्मविश्वास और नैतिक शक्ति रखते हैं वही अहिंसा को अपनाने का साहस कर सकते हैं। अहिंसा हमें यह सिखाती है कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद और समझदारी से किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व के सभी देशों को यह समझना होगा कि युद्ध और हथियारों की दौड़ से किसी का भला नहीं होने वाला। यदि मानवता को सुरक्षित रखना है तो राष्ट्रों को परस्पर विश्वास और सहयोग की भावना विकसित करनी होगी। शक्ति का उपयोग विनाश के लिए नहीं बल्कि मानव कल्याण के लिए होना चाहिए।आज आवश्यकता इस बात की है कि विश्व के नेता और समाज के बुद्धिजीवी मिलकर शान्ति का संदेश फैलाएँ। शिक्षा और संस्कार के माध्यम से नई पीढ़ी को यह सिखाया जाए कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। जब तक मानव के भीतर करुणा और सहानुभूति का भाव नहीं जागेगा तब तक शान्ति की स्थापना सम्भव नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि मानव जाति को अपने भविष्य को सुरक्षित बनाना है तो उसे अहिंसा को अपनाना ही होगा। यही वह मार्ग है जो भय और संघर्ष से भरे संसार को शान्ति और सुख की ओर ले जा सकता है। हिंसा का मार्ग विनाश की ओर ले जाता है जबकि अहिंसा का मार्ग सृजन और विकास की ओर।इसलिए आज समय की पुकार है कि हम सब मिलकर अहिंसा के संदेश को स्वीकार करें और मानवता की रक्षा के लिए आगे आएँ। जब मनुष्य के हृदय में करुणा और प्रेम का दीपक जल उठेगा तब ही विश्व में सच्ची शान्ति स्थापित हो सकेगी। अहिंसा ही वह दिव्य शक्ति है जो युद्ध की आग को बुझाकर संसार को सुख और शान्ति का मार्ग दिखा सकती है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 19:04:06 +0530</pubDate>
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