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                <title>एलपीजी आपूर्ति - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>एलपीजी आपूर्ति RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा में एलपीजी वितरण को लेकर ‘तारीख पर तारीख</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि- </strong>श्रीभूमि, जिले के दुल्लभछड़ा क्षेत्र में रसोई गैस (एलपीजी) वितरण व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं में भारी असंतोष है। निर्धारित समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने और बार-बार ‘आज या कल’ कहकर समय टालने के आरोप संबंधित एजेंसी पर लगाए गए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि पिछले करीब एक महीने से गैस वितरण व्यवस्था में अनियमितता के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार, रामकृष्णनगर स्थित गाजी गैस एजेंसी की ओर से पहले प्रत्येक गुरुवार को दुल्लभछड़ा डाकघर के सामने नियमित रूप से एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जाते थे। हालांकि, करीब एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184997/date-on-date-regarding-lpg-distribution-in-dulabhchhada-of-shribhoomi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001692661.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि- </strong>श्रीभूमि, जिले के दुल्लभछड़ा क्षेत्र में रसोई गैस (एलपीजी) वितरण व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं में भारी असंतोष है। निर्धारित समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने और बार-बार ‘आज या कल’ कहकर समय टालने के आरोप संबंधित एजेंसी पर लगाए गए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि पिछले करीब एक महीने से गैस वितरण व्यवस्था में अनियमितता के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार, रामकृष्णनगर स्थित गाजी गैस एजेंसी की ओर से पहले प्रत्येक गुरुवार को दुल्लभछड़ा डाकघर के सामने नियमित रूप से एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जाते थे। हालांकि, करीब एक महीने से इस व्यवस्था में कथित तौर पर अनियमितता देखने को मिल रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस की आपूर्ति कब होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी भी उन्हें नहीं दी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपभोक्ताओं के मुताबिक, जब वे एजेंसी के अधिकारियों से गैस की आपूर्ति के संबंध में जानकारी लेते हैं तो कभी कहा जाता है कि ‘आज लोड हो रहा है’, तो कभी ‘कल आएगा’ कहकर उन्हें इंतजार करने को कहा जाता है। इस तरह कोई निश्चित तारीख या समय बताए बिना उपभोक्ताओं को बार-बार इंतजार कराया जाता है, लेकिन निर्धारित समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो पाती। इस स्थिति के कारण दूर-दराज के इलाकों से सिलेंडर लेने के लिए दुल्लभछड़ा पहुंचने वाले आम लोगों को विशेष रूप से परेशानी उठानी पड़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब अन्य क्षेत्रों में निर्धारित समय के अनुसार एलपीजी वितरण किया जा सकता है, तो दुल्लभछड़ा डाकघर के सामने नियमित रूप से गैस वितरण क्यों नहीं हो रहा है? स्थानीय उपभोक्ताओं ने आशंका जताई है कि संबंधित व्यवस्था में लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने और गैस आपूर्ति में कथित अनियमितता के वास्तविक कारणों का पता लगाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपभोक्ताओं ने मांग की है कि भविष्य में निर्धारित समय के अनुसार नियमित रूप से एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उपभोक्ता उत्पीड़न पर रोक लगाते हुए गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बरती जाए। स्थानीय लोगों ने जिला उपायुक्त (डीसी) का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करते हुए जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उपभोक्ताओं का कहना है कि लंबे समय से उन्हें गैस के लिए अनिश्चितता और इंतजार का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को मामले में हस्तक्षेप कर नियमित और समयबद्ध एलपीजी वितरण सुनिश्चित करना चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 22:11:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जनता पर आए न तपिश सरकार की बड़ी कोशिश और जनकल्याण की दिशा में मजबूत कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में जारी महासंग्राम ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने अनेक देशों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिका से लेकर यूरोप तक आम नागरिक महंगे पेट्रोल डीजल का बोझ झेलने को मजबूर हैं। कई देशों में कीमतों में भारी वृद्धि के कारण महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है और लोगों के दैनिक जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे कठिन समय में भारत सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता जनता को राहत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174389/governments-great-efforts-and-strong-steps-towards-public-welfare-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas18.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में जारी महासंग्राम ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने अनेक देशों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिका से लेकर यूरोप तक आम नागरिक महंगे पेट्रोल डीजल का बोझ झेलने को मजबूर हैं। कई देशों में कीमतों में भारी वृद्धि के कारण महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है और लोगों के दैनिक जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। ऐसे कठिन समय में भारत सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिसने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता जनता को राहत देना है न कि बोझ बढ़ाना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने उत्पाद कर में प्रति लीटर दस रुपये की कटौती का बड़ा फैसला किया है। यह कदम केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं बल्कि एक संवेदनशील शासन दृष्टिकोण का प्रतीक है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें सत्तर डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर एक सौ बाईस डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं तब इस तरह की राहत देना आसान नहीं होता। इसके बावजूद सरकार ने यह जोखिम उठाया ताकि आम आदमी पर महंगाई की मार न पड़े।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि सरकार का अभिगम पूरी तरह जनतालक्षी है। सरकार यह समझती है कि ईंधन की कीमतों का सीधा असर हर वस्तु और सेवा पर पड़ता है। यदि पेट्रोल डीजल महंगा होगा तो परिवहन लागत बढ़ेगी और उसके साथ ही खाद्यान्न से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी। इस स्थिति से बचाने के लिए सरकार ने अपने राजस्व में कटौती सहने का रास्ता चुना। अनुमान है कि इस फैसले से सरकार को हर पंद्रह दिनों में हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा। इसके बावजूद यह निर्णय लिया गया क्योंकि प्राथमिकता जनता की राहत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार ने केवल कर में कटौती ही नहीं की बल्कि ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को बढ़ाकर सत्तर प्रतिशत तक करने का निर्णय इसका एक बड़ा उदाहरण है। इससे उद्योगों को आवश्यक ऊर्जा उपलब्ध होगी और उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। विशेष रूप से स्टील ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल जैसे श्रम आधारित उद्योगों को इसका लाभ मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर सुरक्षित रहेंगे और आर्थिक गतिविधियां सुचारु रूप से चलती रहेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब दुनिया के कई देश ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं तब भारत में पर्याप्त भंडार बनाए रखना भी सरकार की दूरदर्शिता को दर्शाता है। देश के पास साठ दिनों से अधिक का पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है। यह स्थिति आम नागरिकों में विश्वास पैदा करती है और घबराहट को रोकती है। सरकार ने बार बार यह स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है और लोगों को अनावश्यक रूप से भंडारण करने की आवश्यकता नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे परिदृश्य में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है और वह है अफवाहों पर नियंत्रण। संकट के समय अफवाहें स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। कुछ स्थानों पर पेट्रोल पंपों पर भीड़ देखी गई लेकिन सरकार ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह घबराहट बेबुनियाद है। ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी भी प्रकार का लॉकडाउन या प्रतिबंध लागू करने की कोई योजना नहीं है। इस तरह के स्पष्ट संदेश से जनता में विश्वास कायम हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार के इस दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उसने केवल वर्तमान संकट को संभालने पर ही ध्यान नहीं दिया बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी तैयारी की है। निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय इसी दिशा में एक कदम है। इससे देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। यह निर्णय उद्योग और उपभोक्ता दोनों के हितों को संतुलित करने का प्रयास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार ने इस संकट को एक अवसर के रूप में लिया है जिसमें वह अपनी नीतियों के माध्यम से जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साबित कर सके। जब पूरी दुनिया महंगाई और अस्थिरता से जूझ रही है तब भारत ने एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया है। यहां सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि आम नागरिक को कम से कम परेशानी हो और आर्थिक गतिविधियां भी बाधित न हों।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस नीति का सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। जब जनता को यह महसूस होता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है तब समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लोग अधिक जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करते हैं और संकट का सामना करने में सहयोग करते हैं। यही कारण है कि सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें और अनावश्यक घबराहट से बचें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह स्पष्ट होता है कि यह निर्णय केवल आर्थिक गणना का परिणाम नहीं है बल्कि एक व्यापक सोच का हिस्सा है जिसमें जनता की भलाई सर्वोपरि है। सरकार ने यह दिखाया है कि कठिन परिस्थितियों में भी जनहित को प्राथमिकता दी जा सकती है। भले ही इससे सरकारी खजाने पर दबाव पड़े लेकिन यदि इससे करोड़ों लोगों को राहत मिलती है तो यह एक सार्थक और न्यायसंगत निर्णय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया है कि मजबूत नेतृत्व और संवेदनशील नीति निर्माण के माध्यम से किसी भी वैश्विक संकट का प्रभाव कम किया जा सकता है। भारत ने यह साबित किया है कि वह न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखता है बल्कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भी स्थिरता का उदाहरण बन सकता है। जनता पर आए न तपिश यह केवल एक नारा नहीं बल्कि एक सशक्त संकल्प है जिसे सरकार अपने निर्णयों के माध्यम से साकार कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 18:45:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'खतरे में भारत की ऊर्जा सुरक्षा', राहुल गांधी बोले- अभी और खराब होंगे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। भारत के कुल तेल आयात का 40% से अधिक हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है, ऐसे में इस इलाके में बढ़ता तनाव देश के लिए चिंता का विषय है। एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के मामले में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।स्थिति इसलिए भी संवेदनशील हो गई है क्योंकि संघर्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172568/indias-energy-security-in-danger-rahul-gandhi-said-situation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। भारत के कुल तेल आयात का 40% से अधिक हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है, ऐसे में इस इलाके में बढ़ता तनाव देश के लिए चिंता का विषय है। एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के मामले में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।स्थिति इसलिए भी संवेदनशील हो गई है क्योंकि संघर्ष अब भारत के आसपास के क्षेत्र तक पहुंच गया है। हाल ही में हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की खबर सामने आई है।</p>
<p>ऐसे समय में, जब हालात तेजी से बदल रहे हैं और क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है, देश को मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है। लेकिन आरोप लगाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।मौजूदा हालात में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर भी असर पड़ सकता है और सरकार को इस पर स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 22:34:42 +0530</pubDate>
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