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                <title>Strait of Hormuz - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Strait of Hormuz RSS Feed</description>
                
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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177302/one-day-seminar-organized-on-strait-of-hormuz-gateway-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260426-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की रूपरेखा डाॅ. तरूण पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत की गई। संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश शीर्षक पर अपने विचार प्रस्तुत किये गये। आज की संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने भू-राजनीति एवं जलमार्गो के वर्चस्व पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भू-राजनीति में जल मार्गो का विशेष महत्व है क्योंकि यही जलमार्ग किसी देश की अर्थव्यवस्था का आधार बनते है। वर्तमान में ईरान एवं अमेरिका के मध्य चल रहे युद्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस समय पर फारस की खाड़ी एवं ओमान की खाड़ी के मध्य स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य एक ऐसा जल मार्ग है जहां से होकर विभिन्न देशो के लिए कच्चा तेल एवं गैस से लदे मालवाहक जहाज निकलते है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में चल रहे विवाद के कारण यहां से निकलने वाले मालवाहक जहाजो को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। जो कि आयात-निर्यात में बाधा उत्पन्न कर रहें है। जिससे विभिन्न देशो की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है।  शैक्षिक उन्नयन समिति के चेयरमैन ने अपने अविभाषण में होर्मुज जलडमरूमध्य के अतिरिक्त विश्व के अन्य महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर प्रकाश डाला। निदेशक महोदय ने ईरान आयातित तेल एवं गैस के बढ़ते हुए मूल्यों पर चिंता व्यक्त की।इस कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ प्रतिभागियों को पुरूस्कृत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संगोष्ठी के अन्त में प्रबन्ध समिति ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान भूगोल विभाग के दोनों प्रवक्ताओं को भी उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठी से छात्र-छात्राओं के चहुंमुखी विकास में सार्थक सिद्ध होती है। मंच संचालन भूगोल विभाग के प्रवक्ता राकेश कुमार ने किया । संगोष्ठी को सफल बनाने में डाॅ. आरती बंसल, प्रीती यादव, डाॅ. बृजेश नंदिनी, गोविन्द सिंह, रामलखन, संगीता चैहान का विशेष योगदान रहा। संगोष्ठी में डाॅ. के.के.अग्रवाल, डाॅ. के.के. मेहरोत्रा, डाॅ. रेशु जौहरी, मंयक षर्मा, शोभित अग्रवाल, अजीत सिंह, डाॅ. सुमित अग्रवाल, डाॅ. निशा परवीन, डाॅ. पूजा अग्रवाल, डाॅ. राजपाल वर्मा, प्रथमेश कुमार, प्रफुल्ल पाठक सहित तमाम स्टाफ मौजूद रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 18:09:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रंप का ऐलान- यूएस जल्द ही युद्ध से हट जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के खिलाफ चल रहे अपने सैन्य अभियान को खत्म कर सकता है। शायद दो से तीन हफ्तों के भीतर। यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले एक महीने से चल रहा यह युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट को हिला चुका है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वॉल स्ट्रीट जनरल ने मंगलवार को ही यह खबर दे दी थी कि ट्रंप को उनके नज़दीकी सलाहकारों ने ईरान युद्ध से जल्द से जल्द बाहर निकलने की सलाह दी है। ट्रंप आज बुधवार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174769/trumps-announcement-us-will-soon-withdraw-from-the-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/69cc4d63f2aff-donald-trump-announces-iran-war-end-314030551-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के खिलाफ चल रहे अपने सैन्य अभियान को खत्म कर सकता है। शायद दो से तीन हफ्तों के भीतर। यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले एक महीने से चल रहा यह युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट को हिला चुका है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वॉल स्ट्रीट जनरल ने मंगलवार को ही यह खबर दे दी थी कि ट्रंप को उनके नज़दीकी सलाहकारों ने ईरान युद्ध से जल्द से जल्द बाहर निकलने की सलाह दी है। ट्रंप आज बुधवार 1 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं, जिसमें वो सारी बातें साफ करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम बहुत जल्द वहां से निकल जाएंगे।” उन्होंने आगे जोड़ा कि यह वापसी “दो हफ्तों में, शायद दो या तीन हफ्तों में” हो सकती है। यह अब तक का उनका सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका इस सैन्य अभियान को समेटने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि इस युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी कूटनीतिक समझौते की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है… उन्हें मेरे साथ कोई समझौता करने की आवश्यकता नहीं है।<strong>”</strong></p>
<p style="text-align:justify;">ईरान युद्ध में बुरी तरह फँसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सहायता नहीं मिलने पर ब्रिटेन जैसे अपने सहयोगी देशों पर बौखला गए हैं। उनको धमकाते हुए उन्होंने चेताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कमी झेल रहे देशों के पास सिर्फ दो रास्ते हैं- या तो अमेरिका से तेल खरीदें, या खुद जाकर होर्मुज से तेल ले आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने सीधे अपने सहयोगी देशों से साफ़-साफ़ कह दिया है कि अमेरिका हमेशा उनकी मदद नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी अभियान में शामिल नहीं हुए, उन्हें अब खुद लड़ना सीखना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा,</p>
<p style="text-align:justify;">होर्मुज बंद होने से यूनाइटेड किंगडम जैसे जिन देशों को जेट फ्यूल नहीं मिल पा रहा है और जिसने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है, उनको मेरी सलाह है- नंबर 1 – अमेरिका से खरीदो, हमारे पास बहुत है। नंबर 2 – थोड़ी हिम्मत जुटाओ, होर्मुज जाओ और बस ले लो।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे लिखा, 'तुम्हें अब खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। अमेरिका अब तुम्हारी मदद नहीं करेगा, जैसा तुम हमारी मदद को नहीं आए थे। ईरान को क़रीब-क़रीब तबाह कर दिया गया है। मुश्किल काम हो गया। अब जाओ और अपना तेल खुद ले आओ!'</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सीमित सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन करता है। इस ब्लॉकेड से वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और 75 डॉलर प्रति बैरल से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। कई देशों में जेट फ्यूल और पेट्रोल की कमी हो गई है। कहा जा रहा है कि अमेरिका पर भी इसका असर पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ट्रंप ने पहले सहयोगी देशों से अपील की थी कि वे युद्धपोत भेजकर होर्मुज को सुरक्षित करें। लेकिन ब्रिटेन समेत बड़े मित्र देशों ने साफ़ इनकार कर दिया या ज़्यादा मदद नहीं की। अब ट्रंप नाराज़ हैं और कह रहे हैं कि अमेरिका अकेला सब नहीं संभालेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ईरान की संसद की एक अहम समिति ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल यानी टैक्स लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है। यह टोल ईरान की अपनी मुद्रा रियाल में लिया जाएगा। योजना में अमेरिका और इसराइल से जुड़े जहाजों पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। जो देश ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं, उनके जहाजों को भी रोकने की बात कही गई है। ईरान कह रहा है कि वह होर्मुज पर अपना संप्रभु अधिकार लागू कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज संकट और वैश्विक टकराव की नई दिशा क्या अमेरिका फंस गया है ईरान के जाल में</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब एक नए और जटिल मोड़ पर पहुंच चुका है जहां अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि रणनीति और वैश्विक प्रभाव का भी बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरुआत में जिस तेजी से जीत का दावा किया था वह अब उतना स्पष्ट नहीं दिख रहा है। अब उनका फोकस ईरान को कमजोर करने से हटकर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने पर आ गया है। यही बदलाव इस पूरे संघर्ष की दिशा और गंभीरता को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस संघर्ष के पहले</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173425/hormuz-crisis-and-new-direction-of-global-conflict-is-america"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब एक नए और जटिल मोड़ पर पहुंच चुका है जहां अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि रणनीति और वैश्विक प्रभाव का भी बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरुआत में जिस तेजी से जीत का दावा किया था वह अब उतना स्पष्ट नहीं दिख रहा है। अब उनका फोकस ईरान को कमजोर करने से हटकर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने पर आ गया है। यही बदलाव इस पूरे संघर्ष की दिशा और गंभीरता को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संघर्ष के पहले चरण में अमेरिका ने यह मान लिया था कि शुरुआती हमलों के बाद ईरान जल्दी झुक जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरान ने लगातार जवाबी हमले किए और वह भी कई देशों तक फैलाकर। इससे यह स्पष्ट हुआ कि ईरान केवल बचाव नहीं कर रहा बल्कि सक्रिय रणनीति के तहत क्षेत्रीय दबाव बना रहा है। अमेरिकी ठिकानों पर हमले और संचार तंत्र को नुकसान पहुंचाना इस बात का संकेत है कि ईरान तकनीकी और सैन्य स्तर पर तैयार था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार ईरान के पास अभी भी पर्याप्त संवर्धित यूरेनियम मौजूद है जिससे यह संकेत मिलता है कि वह दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका के शुरुआती हमले निर्णायक नहीं रहे।इस पूरे संघर्ष का सबसे अहम केंद्र होर्मुज स्ट्रेट बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की रीढ़ माना जाता है। यहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल और गैस गुजरती है। जब ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण स्थापित किया तो वैश्विक बाजार में तुरंत असर दिखाई दिया। तेल की कीमतों में तेजी आई और कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही वह कारण है कि ट्रम्प को अब अकेले लड़ना मुश्किल लग रहा है और उन्होंने नाटो के साथ साथ चीन और जापान जैसे देशों से मदद की अपील की है। यह कदम इस बात का संकेत है कि अमेरिका इस संकट को केवल अपनी सैन्य ताकत से हल नहीं कर पा रहा है।चीन और जापान से मदद मांगना एक रणनीतिक मजबूरी भी है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और उसकी अर्थव्यवस्था इस मार्ग पर निर्भर है। जापान भी ऊर्जा के लिए इस रास्ते पर निर्भर करता है। इसलिए अमेरिका चाहता है कि ये देश भी इस मिशन में शामिल हों ताकि एक वैश्विक दबाव बनाया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इन देशों की प्रतिक्रिया बहुत सतर्क रही है। कोई भी देश सीधे सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार नहीं दिख रहा। इसका मुख्य कारण जोखिम है। होर्मुज स्ट्रेट बेहद संकरा मार्ग है और यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का मतलब सीधा खतरा है। ईरान ने यहां समुद्री माइन्स बिछाने की रणनीति अपनाई है जो किसी भी जहाज के लिए जानलेवा हो सकती है।समुद्री माइन्स को हटाना आसान काम नहीं है। आधुनिक माइन्स को पहचानना मुश्किल होता है और उन्हें निष्क्रिय करना जोखिम भरा होता है। इसके अलावा ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन क्षमता भी है जिससे वह किसी भी ऑपरेशन को बाधित कर सकता है। इस कारण कोई भी देश अपनी नौसेना को सीधे खतरे में डालने से बच रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और बड़ी चुनौती है कई देशों की सेनाओं का एक साथ संचालन। अलग अलग देशों की तकनीक कम्युनिकेशन और रणनीति अलग होती है। ऐसे में संयुक्त ऑपरेशन करना बेहद जटिल हो जाता है। यही वजह है कि अब तक कोई ठोस सैन्य गठबंधन सामने नहीं आया है।इस संकट का एक और पहलू है इसका वैश्विक असर। दुनिया की लगभग बीस प्रतिशत तेल सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। अगर यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है। अगर सप्लाई बाधित होती है तो इसका सीधा असर पेट्रोल डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा। इससे आम लोगों के जीवन पर असर पड़ेगा और आर्थिक दबाव बढ़ेगा।भारत ने इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं ताकि भारतीय जहाज सुरक्षित रह सकें और सप्लाई बनी रहे। भारत न तो सीधे इस संघर्ष में शामिल होना चाहता है और न ही अपने हितों को नुकसान होने देना चाहता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते बल्कि आर्थिक और रणनीतिक नियंत्रण ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करके अमेरिका को एक ऐसी स्थिति में ला दिया है जहां उसे वैश्विक समर्थन की जरूरत पड़ रही है।अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब यह है कि वह बिना युद्ध को और बढ़ाए इस मार्ग को कैसे सुरक्षित बनाए। अगर संघर्ष और बढ़ता है तो इसमें और देश शामिल हो सकते हैं जिससे स्थिति और जटिल हो जाएगी।अंत में यह कहा जा सकता है कि यह संघर्ष अभी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंचा है। न तो अमेरिका पूरी तरह जीत पाया है और न ही ईरान पीछे हटने को तैयार है। होर्मुज स्ट्रेट इस टकराव का केंद्र बना हुआ है और जब तक इसका समाधान नहीं निकलता तब तक वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 20:10:10 +0530</pubDate>
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                <title>'खतरे में भारत की ऊर्जा सुरक्षा', राहुल गांधी बोले- अभी और खराब होंगे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। भारत के कुल तेल आयात का 40% से अधिक हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है, ऐसे में इस इलाके में बढ़ता तनाव देश के लिए चिंता का विषय है। एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के मामले में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।स्थिति इसलिए भी संवेदनशील हो गई है क्योंकि संघर्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172568/indias-energy-security-in-danger-rahul-gandhi-said-situation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images3.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बेहद अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। भारत के कुल तेल आयात का 40% से अधिक हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है, ऐसे में इस इलाके में बढ़ता तनाव देश के लिए चिंता का विषय है। एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के मामले में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।स्थिति इसलिए भी संवेदनशील हो गई है क्योंकि संघर्ष अब भारत के आसपास के क्षेत्र तक पहुंच गया है। हाल ही में हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की खबर सामने आई है।</p>
<p>ऐसे समय में, जब हालात तेजी से बदल रहे हैं और क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है, देश को मजबूत और स्थिर नेतृत्व की जरूरत है। लेकिन आरोप लगाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।मौजूदा हालात में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर भी असर पड़ सकता है और सरकार को इस पर स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 22:34:42 +0530</pubDate>
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