<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/52758/who-is-ias-taruni-pandey" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>आईएएस तरुणी पांडे कौन हैं - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/52758/rss</link>
                <description>आईएएस तरुणी पांडे कौन हैं RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>IAS Success: डॉक्टर बनने का टूटा सपना, 120 दिन की तैयारी से तरुणी पांडे बनीं आईएएस अफसर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172451/ias-success-broken-dream-of-becoming-a-doctor-taruni-pandey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ias-success-story-(31).jpg" alt=""></a><br /><p>IAS Success Story: मिडिल क्लास परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी पांडे बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने एमबीबीएस में दाखिला भी ले लिया था और दूसरे साल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। जीवन के कई उतार-चढ़ावों के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में टॉपर्स की सूची में जगह बनाते हुए 14वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की मिसाल है।</p>
<h4><strong>पश्चिम बंगाल में जन्म, झारखंड में परवरिश</strong></h4>
<p>तरुणी का जन्म पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन में हुआ, लेकिन उनका बचपन झारखंड के जामताड़ा में बीता। सीमित संसाधनों वाले मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ीं तरुणी ने 10वीं तक की पढ़ाई प्राइवेट स्कूल में की। आर्थिक तंगी के कारण 10वीं के बाद उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा। बावजूद इसके, वे पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं।</p>
<h4><strong>एमबीबीएस अधूरा, फिर IGNOU से नई शुरुआत</strong></h4>
<p>12वीं के बाद उनका चयन सिक्किम के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए हो गया। डॉक्टर बनने का सपना सच होता नजर आ रहा था, लेकिन दूसरे वर्ष में अचानक तबीयत खराब होने के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी और घर लौटना पड़ा।</p>
<p>इसके बाद उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Indira Gandhi National Open University</span></span> (IGNOU) से ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। हालांकि उस समय तक उन्हें अपने जीवन की नई दिशा का अंदाजा नहीं था।</p>
<h4><strong>2016 का हादसा बना टर्निंग पॉइंट</strong></h4>
<p>साल 2016 में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी बड़ी बहन के पति, जो <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Central Reserve Police Force</span></span> (CRPF) में असिस्टेंट कमांडेंट थे, श्रीनगर में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।</p>
<p>बहन की नौकरी से जुड़े मामलों में अधिकारियों से मिलने के दौरान तरुणी को प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारी और प्रभाव का एहसास हुआ। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया।</p>
<h4><strong>बिना कोचिंग, सिर्फ 120 दिन की तैयारी</strong></h4>
<p>तरुणी ने कभी कोचिंग नहीं ली थी और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। आयु सीमा की वजह से यह उनका पहला और अंतिम प्रयास था। उन्होंने यूट्यूब वीडियो, नोट्स और किताबों की मदद से करीब 120 दिन तैयारी की।</p>
<p>साल 2021 में उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Union Public Service Commission</span></span> (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में 14वीं रैंक हासिल कर IAS कैडर प्राप्त किया।</p>
<p>रिजल्ट आने का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार पल बन गया। शाम को परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपनी मां के घर लौटने का इंतजार किया और फिर रात में परिवार को खुशखबरी दी। बहन की आंखों में आंसू थे, भाई को यकीन नहीं हो रहा था, मां खुशी से नाच रही थीं और पिता भावुक होकर रो पड़े।</p>
<p>तरुणी ने उन पलों को डिजिटल मेमोरी में कैद किया और आज भी उन्हें अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती हैं।</p>
<h4><strong>वर्तमान पद</strong></h4>
<p>वर्तमान में तरुणी पांडे दिल्ली स्थित संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत भारतीय संचार वित्त सेवा (IP&amp;TAFS) में ग्रुप ‘A’ अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सरकारी नौकरी</category>
                                            <category>शिक्षा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172451/ias-success-broken-dream-of-becoming-a-doctor-taruni-pandey</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172451/ias-success-broken-dream-of-becoming-a-doctor-taruni-pandey</guid>
                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 12:22:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/ias-success-story-%2831%29.jpg"                         length="132451"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        