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                <title>हिंदी न्यूज - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>हिंदी न्यूज RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कानपुर में अब तक नहीं मिला गंगा में डूबे दो किशोरों का सुराग, परिवार में कोहराम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नहाने के दौरान गंगाकी 18 जल राशि में समाये दो किशोरों का सुराग अभी तक नहीं मिल पाया है। घटना से उनके परिवार में कोहरा मचा हुआ है। यह घटना बीते सोमवार को महाराजपुर थाना क्षेत्र स्थित ड्योढ़ी गंगा घाट पर हुई थी। जहां सोमवार को गंगा में नहाने गए दो किशोर कृष्णा (16) और शिवा (17) लापता हो गए। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समाचार लिखे जाने तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। कल मंगलवार की तरह आज भी उनकी तलाश में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान जारी रहा।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185688/chaos-in-the-family-no-clue-found-yet-about-two"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002219325.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नहाने के दौरान गंगाकी 18 जल राशि में समाये दो किशोरों का सुराग अभी तक नहीं मिल पाया है। घटना से उनके परिवार में कोहरा मचा हुआ है। यह घटना बीते सोमवार को महाराजपुर थाना क्षेत्र स्थित ड्योढ़ी गंगा घाट पर हुई थी। जहां सोमवार को गंगा में नहाने गए दो किशोर कृष्णा (16) और शिवा (17) लापता हो गए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समाचार लिखे जाने तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। कल मंगलवार की तरह आज भी उनकी तलाश में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान जारी रहा। लेकिन सुराग तब भी नहीं मिल पाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुबह छह बजे पीएसी की टीमें मौके पर पहुंचीं और ड्योढ़ी, जमदा,शेखपुर, सफीपुर, नजफगढ़, नागापुर, डोमनपुर सहित उन्नाव के चंडिका घाट तक करीब 50 किलोमीटर के क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। दोपहर करीब दो बजे एनडीआरएफ की टीम भी कंपनी कमांडर अजय सिंह के नेतृत्व में घटनास्थल पर पहुंच खोजबीन शुरू की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एनडीआरएफ कंपनी कमांडर अजय सिंह ने बताया कि 30 लोगों की टीम डीप डाइवर्स के साथ रेस्क्यू अभियान में जुटी हैं। साथ ही दो स्टीमर की मदद से घटनास्थल के आसपास करीब 50 फीट चौड़े और 300 फीट लंबे क्षेत्र में लगातार खोजबीन के बाद भी दोनों लड़कों का कोई सुहाग नहीं मिल पाया है। जिसके फल स्वरूप परिजनों में भी कोहराम मचा हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 21:15:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लखनऊ आगमन पर भव्य स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लखनऊ आगमन पर राजधानी में उत्साह और स्वागत का अभूतपूर्व माहौल देखने को मिला। शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर कार्यकर्ताओं, व्यापारियों एवं सामाजिक संगठनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। जगह-जगह पुष्पवर्षा, फूल-मालाओं एवं स्वागत द्वारों के माध्यम से राष्ट्रीय अध्यक्ष का अभिनंदन किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष का काफिला सुबह लगभग 11:30 बजे लखनऊ एयरपोर्ट से रवाना होकर ट्रांसपोर्ट नगर, कृष्णा नगर, आलमबाग होते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचा। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, व्यापारी और आम नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने उत्साहपूर्वक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182716/grand-welcome-on-arrival-of-bjp-national-president-in-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/581885.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लखनऊ आगमन पर राजधानी में उत्साह और स्वागत का अभूतपूर्व माहौल देखने को मिला। शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर कार्यकर्ताओं, व्यापारियों एवं सामाजिक संगठनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। जगह-जगह पुष्पवर्षा, फूल-मालाओं एवं स्वागत द्वारों के माध्यम से राष्ट्रीय अध्यक्ष का अभिनंदन किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष का काफिला सुबह लगभग 11:30 बजे लखनऊ एयरपोर्ट से रवाना होकर ट्रांसपोर्ट नगर, कृष्णा नगर, आलमबाग होते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचा। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, व्यापारी और आम नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने उत्साहपूर्वक उनका स्वागत किया। इसी क्रम में लखनऊ व्यापार मंडल की ओर से भी राष्ट्रीय अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया गया। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ एवं मालाओं के साथ उनका अभिनंदन करते हुए संगठन की ओर से शुभकामनाएं व्यक्त कीं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वागत कार्यक्रम में लखनऊ व्यापार मंडल की महामंत्री सुमेश मिश्रा, लखनऊ व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सिख विचार मंच के अध्यक्ष गुरजीत छाबड़ा, लखनऊ व्यापार मंडल कैंट परिक्षेत्र के अध्यक्ष कपिल सिंह अरोड़ा, कैंट परिक्षेत्र के वरिष्ठ महामंत्री हर्षदीप सिंह, तथा कपूरथला युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज मिश्रा सहित व्यापार मंडल एवं भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सैकड़ों पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान पूरे मार्ग पर उत्साहपूर्ण वातावरण बना रहा। स्वागत में शामिल लोगों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का विश्वास व्यक्त किया। राजधानी में हुए इस भव्य स्वागत ने कार्यकर्ताओं और व्यापारियों के उत्साह एवं संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।यदि चाहें, मैं इसे दैनिक जागरण, अमर उजाला या हिन्दुस्तान जैसे समाचार पत्रों की शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:52:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल युग में हिंदी साहित्य की नई शुरुआत </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>जोधपुर।</strong> हिंदी और भारतीय भाषाओं के साहित्य को डिजिटल रूप में पाठकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से “हिंदीज़ा” ऐप का ऑनलाइन लॉन्च 14 जुलाई को किया जाएगा। यह ऐप साहित्य प्रेमियों के लिए एक ऐसा मंच होगा, जहाँ वे ई-बुक्स, डिजिटल पत्रिकाएँ और विभिन्न साहित्यिक रचनाएँ आसानी से पढ़ सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">“हिंदीज़ा” ऐप के संस्थापक जसराज बिश्नोई ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में पढ़ने की आदत को नई दिशा देने के लिए इस ऐप की शुरुआत की जा रही है। ऐप में उपन्यास, कहानियाँ, कविताएँ, प्रेरणादायक साहित्य, जीवनी तथा अन्य विषयों की पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। साथ ही “दैनिक निर्माण”</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182713/new-beginning-of-hindi-literature-in-digital-era-%E2%80%9Chindiza%E2%80%9D-app"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>जोधपुर।</strong> हिंदी और भारतीय भाषाओं के साहित्य को डिजिटल रूप में पाठकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से “हिंदीज़ा” ऐप का ऑनलाइन लॉन्च 14 जुलाई को किया जाएगा। यह ऐप साहित्य प्रेमियों के लिए एक ऐसा मंच होगा, जहाँ वे ई-बुक्स, डिजिटल पत्रिकाएँ और विभिन्न साहित्यिक रचनाएँ आसानी से पढ़ सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">“हिंदीज़ा” ऐप के संस्थापक जसराज बिश्नोई ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में पढ़ने की आदत को नई दिशा देने के लिए इस ऐप की शुरुआत की जा रही है। ऐप में उपन्यास, कहानियाँ, कविताएँ, प्रेरणादायक साहित्य, जीवनी तथा अन्य विषयों की पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। साथ ही “दैनिक निर्माण” और “निर्माण पत्रिका” के अंक भी डिजिटल रूप में पढ़े जा सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि “हिंदीज़ा” केवल पाठकों के लिए ही नहीं, बल्कि नए लेखकों और रचनाकारों के लिए भी उपयोगी मंच बनेगा, जहाँ वे अपनी रचनाएँ और ई-बुक प्रकाशित कर सकेंगे। सरल और आकर्षक स्वरूप में तैयार किया गया यह ऐप पाठकों को कहीं भी और कभी भी पढ़ने की सुविधा देगा। साहित्य जगत में “हिंदीज़ा” ऐप के लॉन्च को लेकर उत्साह का वातावरण बना हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:49:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हितेंद्र शर्मा को मिली महरौली जिला भाजपा में महामंत्री की बड़ी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दक्षिणी दिल्ली-</strong> दिल्ली में नवनियुक्त दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने सभी जिलों की कार्यकारणी को जिला अध्यक्ष के साथ एव जिला प्रभारियों के बीच गठित की जिसमें जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी जिलों की टिम गठित हो गई है।इसी कड़ी में महरौली जिला अध्यक्ष रविन्द्र सोलंकी के नेतृत्व में भी नईं कार्यकारणी का गठन हुआ है जिसमें युवा कर्मठ हितेंद्र शर्मा जो कि छात्र जीवन से ही राजनीति कर रहे ओर लगातार भाजपा की विचारधारा से पिछले कई सालों से जुड़े हुए है और दक्षिणी दिल्ली में पार्टी के सिपाही बनकर हर मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182709/hitendra-sharma-got-the-big-responsibility-of-general-secretary-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260704-wa0003.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दक्षिणी दिल्ली-</strong> दिल्ली में नवनियुक्त दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने सभी जिलों की कार्यकारणी को जिला अध्यक्ष के साथ एव जिला प्रभारियों के बीच गठित की जिसमें जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में सभी जिलों की टिम गठित हो गई है।इसी कड़ी में महरौली जिला अध्यक्ष रविन्द्र सोलंकी के नेतृत्व में भी नईं कार्यकारणी का गठन हुआ है जिसमें युवा कर्मठ हितेंद्र शर्मा जो कि छात्र जीवन से ही राजनीति कर रहे ओर लगातार भाजपा की विचारधारा से पिछले कई सालों से जुड़े हुए है और दक्षिणी दिल्ली में पार्टी के सिपाही बनकर हर मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे है उनको इस बार महरौली जिला में जिला अध्यक्ष रविन्द्र सोलंकी की टिम में महामंत्री पद पर नियुक्त किया गया ओर दी गई है बड़ी जिम्मेदारी।आपको बता दे इससे पहले वह जिला महरौली में उपाध्यक्ष थे ओर उससे पहले वह मंत्री भी रख चुके है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फिर से पार्टी ने उनकी सक्रियता ओर पार्टी के प्रति लगन, मेहनत को देखते हुए फिर से महामंत्री का बड़ा पद दिया है।हितेंद्र शर्मा ने सभी शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद किया ओर उन्हें विश्वास दिलाया कि जो उम्मीद पार्टी को उनसे है उसपर खरा उतरूंगा ओर संगठन की हर कसौटी पर खरा उतर कर सेवा ही संकल्प के उद्येश्य के साथ कार्य करूंगा। महरौली जिला अध्यक्ष एव टिम के साथ संगठन को मजबूत करेंगे और भाजपा की विचारधाराओं एवं जनकल्याणी योजनाओं को जनजन तक पहुंचाने में अपना अहम योगदान देंगे। आगे उन्होंने कहा कि जो भी संगठन कार्य देगा उसको बखूबी से निभाएगे ओर जनता के साथ जुड़ कर उनका हमदर्द बनकर उनकी समस्या को हल करने का भी पूरा प्रयास संगठन ओर पार्टी के माध्यम से करते रहेंगे।  पुनः एक बार फिर से सभी शीर्ष नेतृत्व का आभार एव धन्यवाद करता हु।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:46:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रील बनाम रियल लाइफ </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आज आपको अभिनेता आमिर खान का टीवी शो सत्यमेव जयते  याद दिलाते हैं जिसमें वह हिन्दू मान्यताओं को केंद्र में रखते हुए आलोचना कर अपना ज्ञान बांटते थे  और सामाजिक न्याय एवं विज्ञान की व्याख्या करते नहीं थकते। वहीं आमिर खान ने एक वालीबुड फिल्म पीके बनायी और इसके जरिए हिन्दू धर्म की आस्था और श्रद्धा पर काफी उल्टा सीधा मनमाना फिल्माया और देवी देवताओं का मजाक उड़ाया लेकिन सेकुलरिज्म के नाम पर बहुसंख्यकों के धर्म और आस्था पर चोट करने के कल्चर को पैदा करने वाली तत्कालीन सरकार और उसके अधीनस्थ सेंसर बोर्ड ने फिल्म पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182704/reel-vs-real-life"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/aamir-khan-325_073012084046.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आपको अभिनेता आमिर खान का टीवी शो सत्यमेव जयते  याद दिलाते हैं जिसमें वह हिन्दू मान्यताओं को केंद्र में रखते हुए आलोचना कर अपना ज्ञान बांटते थे  और सामाजिक न्याय एवं विज्ञान की व्याख्या करते नहीं थकते। वहीं आमिर खान ने एक वालीबुड फिल्म पीके बनायी और इसके जरिए हिन्दू धर्म की आस्था और श्रद्धा पर काफी उल्टा सीधा मनमाना फिल्माया और देवी देवताओं का मजाक उड़ाया लेकिन सेकुलरिज्म के नाम पर बहुसंख्यकों के धर्म और आस्था पर चोट करने के कल्चर को पैदा करने वाली तत्कालीन सरकार और उसके अधीनस्थ सेंसर बोर्ड ने फिल्म पर आई आपत्तियों को दरकिनार कर फिल्म को प्रदर्शन की मंजूरी दी थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल अक्सर आरोप लगाया गया है कि आमिर पूरी तरह तास्सुबी और जेहादी जहनियत वाला अभिनेता है। इसने हिन्दू मान्यताओं पर तो प्रहार किया मजाक उड़ाया अनाप शनाप फिल्मांकन किया लेकिन कभी अपने इस्लाम धर्म के सम्बन्ध में एक शब्द एक दृश्य एक कमेंट तक कभी नहीं किया। इस जैहादी ने सभी हिन्दू युवतियों से निकाह किया। और तलाक दे दिया। इन से पैदा बच्चों के मुस्लिम नाम रखकर मुसलिम मजहब दिया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बॉलीवुड के ये स्वयंभू मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान तीसरी बार अपना घर बसाने जा रहे हैं. 61 साल की उम्र में वो अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट संग शादी करेंगे, जिनकी उनसे काफी पुरानी दोस्ती रही. आमिर और गौरी पिछले कुछ सालों से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे, मगर अब उन्होंने एक होने का फैसला किया है. 5 जुलाई, संडे को उनकी अपने ही घर में रजिस्टर्ड मैरिज होगी. आमिर के मुताबिक, वो एक छोटा सा सेलिब्रेशन रखेंगे, जिसमें उनके करीबी दोस्त और परिवार वाले ही मौजूद रहेंगे.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने अपनी पहली शादी साल 1986 में रीना दत्ता से की थी। इस शादी से उनके दो बच्चे- जुनैद खान और आइरा खान हैं। आपसी सहमति से साल 2002 में दोनों का तलाक हो गया था। उन्होंने साल 2005 में फिल्म निर्देशक किरण राव से दूसरी शादी की। इस जोड़े का एक बेटा, आजाद राव खान है। साल 2021 में दोनों ने तलाक ले लिया, लेकिन वे आज भी अच्छे दोस्त हैं।आमिर खान 5 जुलाई 2026 को अपनी पार्टनर गौरी स्प्रैट (गौरी खान) के साथ तीसरी शादी कर रहे है। यह एक बहुत ही सादा और निजी समारोह होगा , जिसमें उनके घर पर केवल करीबी परिवार और दोस्त ही शामिल होंगे। आमिर खान की होने वाली पार्टनर (और तीसरी पत्नी) गौरी स्प्रैट  किसी एक विशेष रूढ़िवादी धर्म को मानने के बजाय एक विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका परिवार बहु-सांस्कृतिक (मल्टी-कल्चरल) है - उनकी मां तमिल मूल की हैं और पिता ब्रिटिश-आयरिश मूल के है। उनके दादा फिलिप स्प्रैट ब्रिटिश लेखक और भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे, जो 1920 के दशक में भारत आए थे। गौरी स्प्रैट वर्तमान में 47 वर्ष की हैं, जिनका जन्म 21 अगस्त 1978 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था। गौरी स्प्रैट के बारे में कुछ मुख्य जानकारी वह 61 वर्षीय अभिनेता आमिर खान से उम्र में 14 साल छोटी है. वह बेंगलुरु की एक उद्यमी  और फैशन-लाइफस्टाइल प्रोफेशनल है। पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनकी मां तमिलियन और पिता आयरिश मूल के हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर फैंस और फिल्म इंडस्ट्री में काफी उत्सुकता है.  मिली जानकारी के मुताबिक, सुपरस्टार की शादी में 150 के आसपास मेहमान होने की संभावना है. एक करीबी सूत्रों का कहना है, शादी में करीब 100 से 150 मेहमान शामिल होंगे. इसमें दोनों परिवारों के लोग, करीबी दोस्त और फिल्म इंडस्ट्री के कुछ खास लोग ही मौजूद रहेंगे. आमिर और गौरी ने खुद मेहमानों की लिस्ट तैयार की है और शादी के लंच का मेन्यू भी अपनी पसंद से चुना है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल फिर वही है कि आज तक आमिर खान उन मामलों पर क्यों नहीं बोलते जहां मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को रिश्तों में फंसाने के लिए अपनी पहचान छुपाते हैं, जिससे जबरन धर्म परिवर्तन और धोखा होता है? साथ ही, वे अपने ही समुदाय के उन सदस्यों को सलाह क्यों नहीं देते जिन्होंने मुस्लिम लड़कियों से प्यार करने के लिए हिंदू लड़कों की हत्या कर दी ? बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान  मुख्य रूप से उनके सामाजिक-राजनीतिक बयानों, फिल्मों में धार्मिक चित्रण, और उनकी व्यक्तिगत पसंदों को लेकर विवादास्पद रहें है। उन्हें अपने करियर में कई बार तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है।</div>
<div style="text-align:justify;">आपको याद दिला दें असहिष्णुता पर दिया गया बयान मुख्य विवाद का कारण बना था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2015 में आमिर खान ने देश में बढ़ती असहिष्णुता पर एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उनकी तत्कालीन पत्नी किरण राव को बच्चों की सुरक्षा के लिए भारत में डर लगता है और उन्होंने देश छोड़ने तक का विचार किया था।आलोचना का कारण: इस बयान को बड़े पैमाने पर 'राष्ट्र-विरोधी' और देश की छवि खराब करने वाला माना गया। इसके बाद उन्हें अतुल्य भारत इंक्रडिबल इंडिया Incredible India के ब्रांड एंबेसडर पद से भी हटा दिया गया था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह फिल्मों में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप'पीके'  फिल्म विवाद की जनक बनी। साल 2014 में आई फिल्म 'पीके' में हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक कर्मकांडों के चित्रण को लेकर उनकी भारी आलोचना हुई। आलोचकों और कई संगठनों ने उन पर 'हिंदू विरोधी' होने और 'लव जिहाद' को बढ़ावा देने के आरोप लगाए।बैंक विज्ञापन विवाद: साल 2022 में एक निजी बैंक के विज्ञापन में शादी के बाद दूल्हे को दुल्हन के घर जाते हुए दिखाया गया था, जिसे पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के खिलाफ बताकर उनकी आलोचना की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में तुर्किए  के राष्ट्रपति और प्रथम महिला से मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय विवाद में भी आमिर खान का नाम जुड़ गया। साल 2020 में अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान आमिर खान ने तुर्किए (तुर्की) के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगन की पत्नी (प्रथम महिला) से मुलाकात की थी।आलोचना का कारण: तुर्किए द्वारा कश्मीर और अन्य भू-राजनीतिक मुद्दों पर भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक रुख रखने के कारण, भारतीय नेटिजन्स ने आमिर की इस मुलाकात को असंवेदनशील माना और सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के बहिष्कार की मांग की। राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में भागीदारीनर्मदा बचाओ आंदोलन: साल 2006 में उन्होंने मेधा पाटकर के 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जो गुजरात में बांध निर्माण के खिलाफ था। इसके कारण गुजरात में उनकी फिल्म 'फना' का भारी विरोध और बहिष्कार हुआ था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फिल्म 'पीके' में, एक लालची पुजारी द्वारा दान पेटी से पैसे इकट्ठा करना, भगवान शिव के वेश में एक अभिनेता का डर के मारे भाग जाना, पत्थरों पर सिंदूर लगाकर लोगों को मूर्ख बनाना और हिंदू संतों को धोखेबाज के रूप में चित्रित करना, ये सभी दृश्य हिंदू धर्म को बदनाम करने वाले तरीके से दिखाए गए थे। यह दावा करना कि फिल्म 'पीके', जिसमें हिंदू धर्म की महानता को दर्शाने वाला एक भी दृश्य नहीं है, बल्कि धर्म का उपहास किया गया है, हिंदू विरोधी नहीं है, आमिर खान की बेईमानी और बेशर्मी का स्पष्ट उदाहरण है!</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टीवी शो में ज्ञान बांटने और बड़ी वैचारिकी व्यक्त करने वाला व्यक्ति निजी जीवन में कितना अलग और स्वार्थी व नारी शोषक हो सकता है इसका अंदाजा लगा पाना कितना कठिन हो सकता है और रील लाइफ व रियल लाइफ का अन्तर इससे समझा जा सकता है। कहा गया है कि "हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी /जिसको भी देखना है कई बार देखिए। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:37:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गैरकानूनी लॉटरी और सट्टे का धंधा करने वालों की गुंडागर्दी, पत्रकार को पीटा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना- </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गैरकानूनी लॉटरी और सट्टे का धंधा करने वाले शेरू नाम के एक बिजनेसमैन, उसके साथियों थंडू ,राम कृष्ण अरोड़ा और 10- 15 अन्य लोगों ने खबर खबर के लिए गए एक पत्रकार को बाधक बना कर बुरी तरह पीटने के बाद डराने धमकाने के साथ 17 हजार रुपए ले लिया। अवैध कारोबारी ने गुंडों की मदद से मनचाही बात बुलवा कर वीडियो भी बना लिया। घटना से मर्माहत पत्रकार ने इलाज व मेडिकल करवाने के बाद शुक्रवार को सी पी लुधियाना से मिलकर घटना की जानकारी देते हुए विधिक कार्यवाही किए जाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विदित हो कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182698/journalist-beaten-up-due-to-hooliganism-of-those-doing-illegal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1000930834.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना- </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गैरकानूनी लॉटरी और सट्टे का धंधा करने वाले शेरू नाम के एक बिजनेसमैन, उसके साथियों थंडू ,राम कृष्ण अरोड़ा और 10- 15 अन्य लोगों ने खबर खबर के लिए गए एक पत्रकार को बाधक बना कर बुरी तरह पीटने के बाद डराने धमकाने के साथ 17 हजार रुपए ले लिया। अवैध कारोबारी ने गुंडों की मदद से मनचाही बात बुलवा कर वीडियो भी बना लिया। घटना से मर्माहत पत्रकार ने इलाज व मेडिकल करवाने के बाद शुक्रवार को सी पी लुधियाना से मिलकर घटना की जानकारी देते हुए विधिक कार्यवाही किए जाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विदित हो कि बीते 1 जुलाई को पत्रकार अमन तिवारी अपने परिचित व्यक्ति जो दारा सट्टा में तीन लाख रुपए हारने के बाद काफी परेशान था, के बताए अनुसार अवैध कारोबारी के अड्डे पर पहुंच गए। वे स्थिति की वीडियोग्राफी कर पाते कि अवैध कारोबारी व उसके अन्य सहयोगियों ने शटर बंद कर उन्हें बल पूर्वक लगभग डेढ़ घंटा तक बैठाए रखा। इस दौरान उन्हें मार पीट कर प्रताड़ित करते हुए उनकी जेब से 7 हजार रुपए निकाल लिया और 10 हजार रुपए का पेटीएम भी करवा लिया। अवैध कारोबारी यहीं नही रुका उसने पत्रकार तिवारी से एक ब्लैंक चेक भी लिया और एक सादे कागज पर साइन भी करवाया । इस दौरान गुंडों से घिरे पत्रकार को भयाक्रांत होकर माफ़ी भी मांगनी पड़ी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित पत्रकार ने पुलिस कमिश्नर से की शिकायत पत्रकार तिवारी ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर स्थिति की जानकारी देते हुए उन्हें शिकायती प्रार्थना पत्र देकर विधिक कार्यवाही की मांग किया। जिसके क्रम में मामले की गंभीरता को समझते हुए सी पी लुधियाना ने जांच व कार्यवाही के लिए ए सी पी को जिम्मेदारी दी है। शिकायत करते समय पीड़ित पत्रकार ने पुलिस कमिश्नर को अवगत कराते हुए कहा है कि लुधियाना टिब्बा रोड पर शेरू नाम का एक आदमी बहुत ताकत से लॉटरी का धंधा करता है, जिसे पहले सेंट्रल MLA ने 3 नंबर थाने के इलाके से भगा दिया था और उसका गैरकानूनी सट्टे का धंधा बंद करा दिया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टिब्बा रोड पर उसकी दुकान है, लेकिन पिछले हफ्ते दारा सट्टे में हमारे एक परिचित भाई तीन लाख रुपये हार गए। उसने हमसे बात की और आपबीती सुनाते हुए कहा कि वह सुसाइड कर लेगा। मैंने उसे भरोसा दिलाया कि वह किसी बात से न डरे। उसे पुलिस कमिश्नर के सामने पेश करेंगे और उसकी गैरकानूनी दारा सट्टे की दुकानें भी बंद करा देंगे। *पीड़ित पत्रकार ने कहा कि वे 1 जुलाई को शाम करीब 4:30 बजे अवैध दुकान पर रिपोर्ट करने और आस-पास देखने गए थे। उन्होंने वहीं फोटो खींचने व वीडियो बनाने का प्रयास किया। अवैध कारोबारी व उसके लोगों ने उनका मोबाइल छीन लिया और थप्पड़ मारना शुरू कर दिया।अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उसके बाद, उन्हें करीब डेढ़ घंटे तक वहीं बैठाए रखा मौके पर मौजूद राम कृष्ण अरोड़ा ने किसी तरह बचाया और बाहर निकाला। अरोड़ा ने पत्रकार तिवारी से परिचय पुछते हुए कहा कि ये बहुत खतरनाक लोग हैं। उनका टीबा पुलिस स्टेशन पर 2 लाख रुपये महीने देता है। उसने कहा कि मैं तुम्हें यही समझा रहा हूँ। वे 5 मिनट में तुम्हारे खिलाफ लूट का केस कर देंगे। तिवारी ने कहा कि मैं थोड़ा डर गया क्योंकि मैं अकेला था और मैंने वहीं किया जो राम कृष्ण अरोड़ा ने कहा। मैंने उनसे 7000 रुपये कैश और 10000 रुपये पेटीएम में देने को कहा। मैंने अपने दोस्त से उनके कहे अनुसार 1 लाख रुपये देने को कहा। बदले में उन्होंने मुझसे एक कोरा कागज और एक साइन मांगा। उन्होंने ब्लिंग चेक ले लिया। इन तीनों का पुलिस रिकॉर्ड पहले भी खराब रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:21:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हे समाज, कुछ चेहरों की भूल पर हर बेटी को दोषी मत ठहराओ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि किसी मोहल्ले में एक घर की दीवार गिर जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या पूरा शहर जर्जर घोषित कर दिया जाता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि एक डॉक्टर लापरवाह निकल जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या पूरा चिकित्सा जगत अपराधी हो जाता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर आखिर सिया और सोनम जैसी आठ-दस लड़कियों के कुछ चर्चित मामलों को आधार बनाकर करोड़ों भारतीय बेटियों के चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाने का साहस समाज कहाँ से ले आता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आज सोशल मीडिया ने इसी अन्यायपूर्ण प्रवृत्ति को सामान्य बना दिया है। कुछ नामों को बार-बार दोहराइए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें वायरल कीजिए और फिर पूरी पीढ़ी को</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182696/hey-society-dont-blame-every-daughter-on-the-mistake-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि किसी मोहल्ले में एक घर की दीवार गिर जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या पूरा शहर जर्जर घोषित कर दिया जाता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि एक डॉक्टर लापरवाह निकल जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या पूरा चिकित्सा जगत अपराधी हो जाता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर आखिर सिया और सोनम जैसी आठ-दस लड़कियों के कुछ चर्चित मामलों को आधार बनाकर करोड़ों भारतीय बेटियों के चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाने का साहस समाज कहाँ से ले आता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आज सोशल मीडिया ने इसी अन्यायपूर्ण प्रवृत्ति को सामान्य बना दिया है। कुछ नामों को बार-बार दोहराइए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें वायरल कीजिए और फिर पूरी पीढ़ी को उसी रंग में रंग दीजिए। यही है </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सिया–सोनम सिंड्रोम</span>'—<span lang="hi" xml:lang="hi"> एक ऐसा दृष्टिदोष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ मुट्ठीभर परछाइयों को इतना फैलाया जाता है कि करोड़ों बेटियों की उजली धूप भी दिखाई देना बंद हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह केवल सोशल मीडिया का खेल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चयनात्मक दृष्टि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का परिणाम है। इतिहास बताता है कि जब भी समाज बदलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवर्तन से असहज लोग पूरे परिदृश्य को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपने पूर्वाग्रहों के अनुकूल कुछ उदाहरण चुनकर उन्हें ही सच साबित करने लगते हैं। आज बेटियाँ शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपालिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्यमिता और सामाजिक नेतृत्व तक हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। यही बदलाव कुछ लोगों को अखरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चेरी-पिकिंग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के सहारे कुछ वायरल घटनाओं को पूरी पीढ़ी का चेहरा बना देते हैं। प्रश्न यह है कि यदि कुछ लड़कियों की गलती से सभी लड़कियों का आकलन होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या यही कसौटी पुरुषों पर भी लागू होगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि उत्तर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह तर्क नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सुविधानुसार गढ़ा गया पूर्वाग्रह है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि जो बेटियाँ समाज को नई दिशा दे रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे शायद ही कभी बहस का विषय बनती हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणिमा सिन्हा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने कृत्रिम पैर के सहारे माउंट एवरेस्ट फतह कर अदम्य इच्छाशक्ति की मिसाल कायम की।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनीता कृष्णन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी सामाजिक कार्यकर्ता ने हैदराबाद में हजारों लड़कियों को ट्रैफिकिंग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं से बचाया तथा उन्हें नई जिंदगी दी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऐश्वर्या सागर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी युवा उद्यमी ग्रामीण लड़कियों को डिजिटल शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ रही हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इनके जैसी हजारों बेटियाँ प्रतिदिन समाज का भविष्य गढ़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी वे सुर्खियाँ नहीं बनतीं। वजह साफ है—योगदान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद बिकता है। मीडिया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म भी जानते हैं कि नकारात्मक खबरें अधिक क्लिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिक प्रतिक्रियाएँ और अधिक प्रसार बटोरती हैं। अच्छाई प्रायः शांत रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि बुराई शोर मचाती है। नतीजा यह कि समाज धीरे-धीरे शोर को सच और मौन को महत्वहीन मानने लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि वायरल वीडियो के शोर से बाहर निकलकर वास्तविक भारत को देखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है। भारतीय बेटियाँ आज उपलब्धियों के नए प्रतिमान गढ़ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उन्होंने कई बार पुरुष खिलाड़ियों से अधिक प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। डॉक्टर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंजीनियर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पायलट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैनिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान और प्रशासक के रूप में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एनएसएस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एनसीसी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के आँकड़े भी सामुदायिक सेवा में युवतियों की उल्लेखनीय सक्रियता का प्रमाण हैं। उच्च शिक्षा में उनका प्रवेश बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साक्षरता दर सुधर रही है और आर्थिक आत्मनिर्भरता का उनका संकल्प निरंतर मजबूत हो रहा है। फिर भी यदि समाज कुछ वायरल मामलों को ही पूरी सच्चाई मान ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह वास्तविकता की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी दृष्टि की विफलता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिया–सोनम सिंड्रोम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल बेटियों के साथ अन्याय नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज की निर्णय-क्षमता भी कुंद करता है। यह तथ्यों पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भावनाओं पर आधारित धारणा गढ़ता है। पूर्वाग्रह फैलाने वाले बार-बार वही उदाहरण सामने रखते हैं जो भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अविश्वास और आक्रोश को हवा दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि वे उन हजारों बेटियों को अनदेखा कर देते हैं जो परिवारों की आर्थिक शक्ति हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाँवों में शिक्षा पहुँचा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पतालों में जीवन बचा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोगशालाओं में शोध कर रही हैं और सीमाओं पर देश की रक्षा में जुटी हैं। सकारात्मक कहानियाँ कम दिखाई देती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वे उत्तेजना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेरणा जगाती हैं। जबकि राष्ट्र उत्तेजना से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेरणा से आगे बढ़ते हैं। इसलिए कुछ अपवादों को संपूर्ण सत्य बना देना समाज और उसके भविष्य—दोनों के साथ अन्याय है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि गलतियों को अनदेखा किया जाए। जो दोषी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे कानून के अनुसार दंड मिलना ही चाहिए—चाहे वह लड़की हो या लड़का। किंतु न्याय का तकाज़ा है कि सजा व्यक्ति को मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे वर्ग को नहीं। हर बेटी को सिया या सोनम मान लेना उतना ही अविवेकपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितना किसी एक पुरुष के अपराध के आधार पर समूचे पुरुष समाज को दोषी ठहराना। परिपक्व समाज वही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो व्यक्ति और समुदाय के बीच का अंतर समझे। बेटियों को संदेह की दीवारों में कैद करने के बजाय विश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवसर और सही मार्गदर्शन दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यही एक संतुलित और प्रगतिशील समाज की सबसे मजबूत नींव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि हम अपनी दृष्टि बदलें। किसी छोटे से अंधेरे को इतना विशाल बना देना कि पूरा सूरज ही ओझल हो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह यथार्थ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दृष्टिदोष है। इतिहास अपवादों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहुसंख्यक के योगदान से लिखा जाता है। सिया और सोनम जैसी घटनाएँ अपराध हो सकती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर वे भारतीय बेटियों का चरित्र-पत्र नहीं हैं। इस देश की पहचान उन लाखों बेटियों से बनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रयोगशालाओं में शोध कर रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेतों में श्रम कर रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमाओं पर डटी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टार्टअप खड़े कर रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अदालतों में न्याय की आवाज़ बन रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवारों का संबल हैं और विश्व मंच पर भारत का मान बढ़ा रही हैं। इसलिए आवश्यकता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">सिया–सोनम सिंड्रोम</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की बेटियों के वास्तविक स्वरूप को सामने लाने की है। आखिर कुछ परछाइयाँ कभी सूरज की पहचान नहीं बन सकतीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 19:17:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महुआ डाबर महोत्सव में गूंजा शहीदों का स्मरण, मशाल यात्रा से क्रांतिवीरों को दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय “महुआ डाबर महोत्सव-2026” के दूसरे दिन ऐतिहासिक क्रांति स्थल पर भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव में स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कई प्रेरणादायी आयोजन हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्मित आधे घंटे की ऐतिहासिक एवं मार्मिक ऑडियो डॉक्यूमेंट्री ‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ का श्रवण कराया गया। डॉक्यूमेंट्री सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे। इसमें ‘गैर-चिरागी’ महुआ डाबर के आम लोगों के अनुभवों के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180938/remembrance-of-martyrs-echoed-in-mahua-dabur-mahotsav-tribute-paid"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0028.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की अमर गाथा और गुमनाम शहीदों की स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय “महुआ डाबर महोत्सव-2026” के दूसरे दिन ऐतिहासिक क्रांति स्थल पर भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव में स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कई प्रेरणादायी आयोजन हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार द्वारा निर्मित आधे घंटे की ऐतिहासिक एवं मार्मिक ऑडियो डॉक्यूमेंट्री ‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ का श्रवण कराया गया। डॉक्यूमेंट्री सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे। इसमें ‘गैर-चिरागी’ महुआ डाबर के आम लोगों के अनुभवों के साथ महुआ डाबर का उत्खनन करने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार, महुआ डाबर संग्रहालय के निदेशक डॉ. शाह आलम राना तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन की पूर्व विशेष सचिव ईशा प्रिया के विचार शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘महुआ डाबर: निशां अभी बाक़ी हैं’ की स्क्रिप्ट एवं प्रस्तुति नवोदिता मिश्रा ने की है। वाचन स्वर रितु राजपूत तथा नाट्यांश स्वर मनोज मयंकर का है। गीत के रचयिता कर्नल तिलकराज और गायक डॉ. ग़ज़ल श्रीनिवास हैं। आकाशवाणी संवाददाता दीपांकर मिश्र, प्रस्तुति सहयोगी शिवाली एवं संयोजन राम अवतार बैरवा का रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के समापन पर महुआ डाबर के क्रांतिवीरों को मशालों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सैकड़ों युवाओं ने हाथों में जलती मशाल लेकर क्रांति स्थल की परिक्रमा की और शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर क्रांतिकारी वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि वर्ष 1857 में अंग्रेजों ने महुआ डाबर को ‘गैर-चिरागी’ घोषित कर यहां दीपक और चिराग जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। आज मशाल जलाकर यह संदेश दिया गया है कि शहीदों की स्मृति का चिराग 169 वर्ष बाद भी बुझा नहीं है। उन्होंने कहा कि मशाल क्रांति की वह ज्वाला है जो कभी बुझनी नहीं चाहिए। युवाओं को मशाल सौंपकर यह संकल्प दिलाया गया कि वे महुआ डाबर के गौरवशाली इतिहास को देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">आयोजकों ने बताया कि 10 जून को ‘शौर्य दिवस’ के अवसर पर सुबह शहीद स्थल पर सशस्त्र पुलिस गारद द्वारा सलामी दी जाएगी। इसके बाद ‘विरासत संरक्षण संकल्प सभा’ का आयोजन होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, इतिहास प्रेमियों, युवाओं एवं समाजसेवियों का विशेष सहयोग रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अतुल सिंह, नासिर खान, केपी राठौर, मोहम्मद कैफ, ऋतिक कुमार, सुनील पंडित, श्रवण कुमार, फ़कीर मोहम्मद, विनोद कुमार यादव, मुमताज़ खान, अनूप कुमार एडवोकेट, रमजान खान, धर्मेन्द्र, प्रणब मुखर्जी, आदिल खान, रामकेश गौतम, प्रभाकर चौधरी, नागेंद्र प्रताप</div>
<div style="text-align:justify;">आदि लोग मौजूद रहे.</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:49:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11जून को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती है!इस अवसर पर यह आलेख है</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>शाहजहाँपुर </strong>की मिट्टी ने 11 जून 1897 को मुझे जन्म दिया था। माँ का नाम मूलमती, पिता का नाम मुरलीधर। घर गरीब था, पर सीना गर्व से भरा था। दादा ग्वालियर से अकाल के दिनों में भागकर यहाँ आए थे। दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष देखा, इसलिए बचपन से ही मन में ठान लिया था कि इस गुलामी को उखाड़ फेंकना है।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तुम मुझे आज "सरफरोशी की तमन्ना" वाले शायर के नाम से जानते हो। पर मैं पहले क्रांतिकारी था, बाद में कवि बना। कलम और बंदूक दोनों मेरे हथियार थे। आज मैं तुम्हें वही रात सुनाऊँगा जिसने</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180928/11th-june-is-the-birth-anniversary-of-pandit-ram-prasad"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0050.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>शाहजहाँपुर </strong>की मिट्टी ने 11 जून 1897 को मुझे जन्म दिया था। माँ का नाम मूलमती, पिता का नाम मुरलीधर। घर गरीब था, पर सीना गर्व से भरा था। दादा ग्वालियर से अकाल के दिनों में भागकर यहाँ आए थे। दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष देखा, इसलिए बचपन से ही मन में ठान लिया था कि इस गुलामी को उखाड़ फेंकना है।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तुम मुझे आज "सरफरोशी की तमन्ना" वाले शायर के नाम से जानते हो। पर मैं पहले क्रांतिकारी था, बाद में कवि बना। कलम और बंदूक दोनों मेरे हथियार थे। आज मैं तुम्हें वही रात सुनाऊँगा जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी। 9 अगस्त 1925 की काकोरी की रात।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठो, ये कहानी छोटी नहीं है। ये वो दास्तान है जो खून, पसीने और मिट्टी की खुशबू से लिखी गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1925 का हिंदुस्तान देखो। अंग्रेज़ हर चीज़ पर टैक्स लगा रहे थे। नमक पर, कपड़े पर, रेल के टिकट पर। किसान की फसल सस्ते में लूट ली जाती, और उसी फसल को दुगने दाम पर बेचा जाता। लगान न दे पाने पर गाँव के गाँव उजड़ जाते थे। कांग्रेस वाले सत्याग्रह कर रहे थे, लाठी खा रहे थे, जेल जा रहे थे। मैं उनका सम्मान करता हूँ। गांधी जी का अहिंसा का रास्ता लाखों को जोड़ रहा था। पर मेरा दिल कहता था कि जो राज़ बंदूक के दम पर आया है, वो बंदूक के दम पर ही जाएगा।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1924 में हमने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन बनाई। मैं, चंद्रशेखर आज़ाद, अशफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी, सचिंद्र बख्शी, मनमथनाथ गुप्त। सबकी उम्र 25 से कम थी। पर हौसला पहाड़ से ऊँचा था। हमारा मकसद साफ था। अंग्रेजों के पास हथियार हैं, पैसा है, ताकत है। हमारे पास कुछ नहीं। तो हम उनका ही खजाना लूटेंगे। उसी पैसे से हथियार खरीदेंगे। उसी हथियार से क्रांति का अलाव जलाएंगे। लोग कहते थे ये डकैती है। मैं कहता हूँ, जब एक देश को लूटा जा रहा हो, तो लुटेरों से लूटना डकैती नहीं, कर्तव्य है।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मौका मिला 9 अगस्त 1925 को। लखनऊ से सहारनपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन रोज़ सरकारी खजाना ले जाती थी। लखनऊ, शाहजहाँपुर, बरेली, मुरादाबाद के सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह इसी ट्रेन में होती थी। गार्ड के डिब्बे में लोहे की पेटियाँ रखी होती थीं। वही हमारा निशाना था। काकोरी लखनऊ से 15 मील दूर एक छोटा स्टेशन है। हमने तय किया कि ट्रेन जैसे ही काकोरी पार करेगी, चेन खींचकर रोक देंगे। गार्ड का डिब्बा तोड़ेंगे, खजाना निकालेंगे और जंगल में गायब हो जाएंगे।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">टीम में दस लोग थे। मैं "राम" बनकर बैठा था। अशफाक "अहमद" बनकर। चंद्रशेखर आज़ाद हमारा बाहुबल था। राजेंद्र लाहिड़ी का दिमाग ठंडा था, निशाना पक्का था। मनमथनाथ सबसे छोटा था, पर हिम्मत में सबसे बड़ा। सचिंद्र बख्शी, मुरारी शर्मा, मुकुंदी लाल, केशव चक्रवर्ती भी साथ थे। हमने हफ्तों तक रिहर्सल की। शाहजहाँपुर के जंगलों में रात-रात भर अभ्यास किया। कैसे चेन खींचनी है, कैसे ताला तोड़ना है, कैसे भागना है। मैंने उस दिन अपनी डायरी में लिखा था: "अगर हम मर गए तो शहीद कहलाएँगे। अगर बच गए तो क्रांति का बीज बो देंगे।"</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">9 अगस्त की दोपहर। धूप आग बरसा रही थी। हम अलग-अलग स्टेशनों से ट्रेन में चढ़े। टिकट लेकर, आम मुसाफिर बनकर। ट्रेन चली। दिल की धड़कनें तेज थीं। पर चेहरे पर कोई भाव नहीं था। जैसे ही ट्रेन काकोरी स्टेशन पार कर जंगल की तरफ बढ़ी, मनमथनाथ ने चेन खींच दी। कड़क की आवाज़ आई। ट्रेन हिली और रुक गई। हम आठ लोग एक साथ उठे। गार्ड के डिब्बे की तरफ लपके। ताला तोड़ा। अंदर लोहे की पेटियाँ थीं। चंद्रशेखर ने रिवॉल्वर तान दी और कहा, "खोलो जल्दी!" गार्ड का चेहरा पीला पड़ गया। उसने कांपते हाथों से चाबी दे दी।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पेटियाँ खुलीं। नोटों की गड्डियाँ, सिक्के, सरकारी कागज। हमने अंदाजा लगाया, लगभग आठ हजार रुपये। आज के हिसाब से करीब पंद्रह लाख। लेकिन तभी गलती हो गई। शायद गार्ड ने ब्रेक छोड़ा, या ट्रेन अपने आप हिल गई। राजेंद्र ने जल्दी में एक पेटी धक्का देकर नीचे फेंक दी। धमाके की आवाज़ हुई। उसी धमाके में एक यात्री अहमद अली नीचे गिर गया। सिर पर चोट लगी और उसकी मौत हो गई। उस पल मेरा कलेजा बैठ गया। हम लुटेरे नहीं थे। हमारा मकसद किसी की जान लेना नहीं था। पर क्रांति में खून बहता ही है। उस दिन मैंने जाना कि आज़ादी की कीमत सिर्फ हमारा खून नहीं होता, कभी-कभी बेगुनाहों का खून भी बहता है। उस यात्री की मौत का बोझ आज भी मेरे सीने पर है। हमने जितना हो सका खजाना समेटा और जंगल में भागे। पीछे पुलिस की सीटी बज रही थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लूट के बाद हम बिखर गए। पर अंग्रेज़ों की सीआईडी कोई कम नहीं थी। गाँव-गाँव, घर-घर छान मारा। मुखबिरों को पैसा दिया गया। सबसे पहले राजेंद्र लाहिड़ी पकड़े गए। फिर मैं 1 नवंबर 1925 को शाहजहाँपुर में पकड़ा गया। अशफाक दिल्ली में गिरफ्तार हुआ। चंद्रशेखर आज़ाद बच निकले। वो 1931 तक लड़े, और जब चारों तरफ से घिर गए तो खुद को गोली मार ली। जिंदा पकड़े जाने से बेहतर मौत थी उनके लिए।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मुकदमा चला लखनऊ में। नाम दिया गया "काकोरी षड्यंत्र केस"। कठघरे में खड़े होकर मैंने जज से कहा: "हम चोर नहीं हैं। हम वो लोग हैं जो अपनी माँ भारत को आज़ाद कराना चाहते हैं। अगर इसके लिए फाँसी भी मिले, तो वो हमारे लिए माला है।" अदालत ने 40 लोगों पर मुकदमा चलाया। 16 को सज़ा हुई। मुझे, अशफाक उल्ला खाँ, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी को फाँसी की सज़ा सुनाई गई। फैसला सुनकर मैं हँस पड़ा। "मौत से डरते तो हम 14 साल की उम्र में आर्य समाज न ज्वाइन करते।" मुकदमे के दौरान हमने कोर्ट को ही अपना मंच बना लिया। हर पेशी पर देशभक्ति के नारे लगते थे। "इंकलाब ज़िंदाबाद" की गूँज पूरे लखनऊ में सुनाई देती थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मुझे गोरखपुर जेल की कोठरी नंबर 11 में रखा गया। फाँसी 19 दिसंबर 1927 को तय हुई। मेरे पास 40 दिन थे। मैं रोया नहीं। माफी नहीं माँगी। मैंने कलम उठाई। पेंसिल से 120 पन्ने लिखे। मेरी आत्मकथा _कातिल की कलम से_। मैंने लिखा कि कैसे मेरा दादा अकाल में ग्वालियर छोड़कर आया था। कैसे माँ ने मुझे भूखे पेट सुलाया था। कैसे 14 साल की उम्र में स्वामी दयानंद सरस्वती की _सत्यार्थ प्रकाश_ ने मेरे अंदर आग लगा दी थी। कैसे मैंने "मैनपुरी षड्यंत्र" में हिस्सा लिया था 1918 में।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">रात को नींद नहीं आती थी। अशफाक पास वाली कोठरी में था। हम दीवार के उस पार बात करते थे। एक रात मैंने उससे कहा, "अशफाक, अगर हम बच गए तो साथ मिलकर मदरसा खोलेंगे। जहाँ हिंदू-मुस्लिम दोनों पढ़ेंगे।" उसने जवाब दिया, "बिस्मिल भाई, हम बचेंगे नहीं। लेकिन हमारे मरने के बाद हिंदुस्तान देखेगा कि हिंदू-मुस्लिम एक साथ मर सकते हैं।" उसी जेल में मैंने "मेरा रंग दे बसंती चोला" लिखा।  </div><div style="text-align:justify;">_"मेरा रंग दे बसंती चोला,  </div><div style="text-align:justify;">माय रंग दे बसंती चोला।"_  </div><div style="text-align:justify;">सोचो, जिसे कल फाँसी होनी है, वो बसंत की बात कर रहा है। मौत से डरने वाला ऐसा नहीं लिखता। जेल में मुझे रोज़ गीता पढ़ने का मौका मिलता था। मैंने पाया कि गीता में भी कर्म और त्याग की बात है। कृष्ण ने अर्जुन से कहा था, "कर्म करो, फल की चिंता मत करो।" वही मैं कर रहा था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोग पूछते हैं, हिंदू-मुस्लिम एक साथ कैसे लड़ सकते हैं? मैं कहता हूँ, देखो अशफाक को। अशफाक उल्ला खाँ शाहजहाँपुर का ही था। उसकी उम्र मुझसे दो साल छोटी थी। जब पहली बार मिला था, तो लगा जैसे बरसों का साथी हो। वो उर्दू का शायर था। मैं हिंदी का। वो कुरान पढ़ता था, मैं गीता। पर जब देश की बात आती, तो हम एक थे। काकोरी की रात उसने मुझसे कहा था, "बिस्मिल भाई, अगर आज हम मर गए तो हिंदुस्तान देखेगा कि हिंदू-मुस्लिम अलग नहीं हैं।" और वही हुआ। 19 दिसंबर 1927 को हम एक साथ फाँसी पर चढ़े। अशफाक की आखिरी ख्वाहिश थी कि उसकी लाश को शाहजहाँपुर में दफनाया जाए। अंग्रेजों ने मना कर दिया। उसे फैजाबाद में दफनाया गया। आज भी उसकी मजार पर हिंदू-मुस्लिम दोनों चादर चढ़ाते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">18 दिसंबर की रात जेलर आया। बोला, "बिस्मिल, कल सुबह छह बजे फाँसी है।" मैंने नहाया, नए कपड़े पहने, गीता का पाठ किया। अशफाक ने कुरान पढ़ी। रोशन सिंह ने गुरुवाणी गाई। रात को मैंने आखिरी शेर लिखा:  </div><div style="text-align:justify;">_"अगर एक झटके में कुर्बानी दे दूँ तो क्या है,  </div><div style="text-align:justify;">बार-बार मरूँ वतन पर यही आरजू है।"_  </div><div style="text-align:justify;">सुबह पाँच बजे दरवाजा खुला। मैं बाहर निकला। फाँसी का तख्ता तैयार था। जेलर ने पूछा, "आखिरी इच्छा?" मैंने कहा, "मेरे शरीर को तिरंगे में लपेट देना। और हाँ, मेरे मरने के बाद मेरी कविताएँ मत जलाना।" फंदा मेरे गले में डाला गया। मैंने ऊपर देखा। आसमान साफ था। और मेरे मुँह से निकला:  </div><div style="text-align:justify;">_"देश हित पैदा हुए हैं, देश पर मर जाएंगे।  </div><div style="text-align:justify;">मरते-मरते देश को ज़िंदा मगर कर जाएंगे।"_  </div><div style="text-align:justify;">धड़ाम की आवाज़ आई। और सब शांत हो गया। उसी दिन अशफाक, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी भी फाँसी पर चढ़े। चार नौजवान। चार धर्म। एक मकसद।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हमारी फाँसी ने हिंदुस्तान को झकझोर दिया। अखबारों में लिखा गया, "चार नौजवान, चार धर्म, एक मकसद"। हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बन गई हमारी फाँसी। काकोरी के बाद क्रांति की आग और भड़क गई। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन बनाई। भगत सिंह कहते थे, "बिस्मिल का खून बेकार नहीं जाएगा।" उन्होंने "मेरा रंग दे बसंती चोला" को अपना नारा बनाया। लाहौर षड्यंत्र केस में फाँसी से पहले वही गीत गाया था। 1947 में जब आज़ादी मिली, तो नेहरू ने लाल किले से कहा था कि आज़ादी में उन अनाम शहीदों का खून शामिल है जिनके नाम इतिहास में नहीं लिखे गए। मेरा नाम लिखा गया। पर मैं अनाम रहना पसंद करता। क्योंकि क्रांति किसी एक नाम से नहीं होती।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज 2025 है। हिंदुस्तान आज़ाद है। पर मैं देखता हूँ कि तुम लोग आपस में लड़ रहे हो। हिंदू-मुस्लिम, जाति-धर्म, भाषा-प्रांत। अशफाक और मैं अगर आज ज़िंदा होते, तो हमारा पहला काम ये होता कि तुम्हें समझाते। दुश्मन बाहर नहीं, अंदर है। नफरत ही असली अंग्रेज है। मेरी कविता याद रखो:  </div><div style="text-align:justify;">_"देश हित पैदा हुए हैं, देश पर मर जाएंगे।"_  </div><div style="text-align:justify;">देश हित मतलब सिर्फ सीमा पर लड़ना नहीं। देश हित मतलब भूखे को खाना खिलाना, बीमार का इलाज करना, लड़की को पढ़ाना। अगर तुम ऐसा करोगे, तो मेरी फाँसी बेकार नहीं जाएगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">काकोरी कांड में हमने आठ हजार रुपये लूटे थे। पर जो हमने लूटा वो पैसा नहीं था। हमने अंग्रेजों का डर लूटा था। हमने नौजवानों का खौफ तोड़ा था। हमने साबित किया कि 20-25 साल के लड़के भी साम्राज्य को चुनौती दे सकते हैं। आज तुम मोबाइल चलाते हो, मैं कलम चलाता था। ज़माना बदला है, लेकिन दुश्मन वही है। अन्याय, गरीबी, नफरत। मेरी कलम अब तुम्हारे हाथ में है। लिखो। बोलो। लड़ो। लेकिन याद रखो, बंदूक से पहले दिल जीतना ज़रूरी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जेल में मैंने कई गीत लिखे। कुछ छपे, कुछ खो गए। "सरफरोशी की तमन्ना" तो तुम जानते ही हो। पर एक और गीत था जो मैं अक्सर गाता था:  </div><div style="text-align:justify;">_"वतन पर जो फिदा होगा,  </div><div style="text-align:justify;">अमर वो नौजवान होगा।  </div><div style="text-align:justify;">रहेगा याद दुनिया में,  </div><div style="text-align:justify;">वही बेनामो-निशान होगा।"_  </div><div style="text-align:justify;">मैं चाहता था कि नौजवान डरना छोड़ दे। मरना नहीं, जीना सीखे। पर ऐसे जीना जो गुलामी में न हो। भगत सिंह ने लिखा था कि वो मेरी कविताएँ पढ़कर ही क्रांतिकारी बना। अगर मेरी एक कविता ने भगत सिंह को बना दिया, तो मेरा जीवन सफल है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मैं रामप्रसाद बिस्मिल। शाहजहाँपुर का बेटा। हिंदुस्तान का दीवाना। 30 साल की उम्र में फाँसी पर चढ़ गया। पर मेरे शब्द आज भी ज़िंदा हैं। अगर तुम "सरफरोशी की तमन्ना" गुनगुनाओगे, तो मैं मरा नहीं कहलाऊँगा।  </div><div style="text-align:justify;">_"सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,  </div><div style="text-align:justify;">देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-कातिल में है।"_  </div><div style="text-align:justify;">मेरी कहानी खत्म हुई। अब तुम्हारी शुरू होती है। तुम क्या करोगे? क्या तुम भी देश के लिए कुछ करोगे? या सिर्फ इतिहास पढ़कर भूल जाओगे? फैसला तुम्हारा है।</div></div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"><div class="hp"><br /></div><div class="eqJbab cZD3Qb"><br /></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:34:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>व्यापार मंडल चुनाव पुन:कराने की उठी मांग।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज,।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नैनी बाजार व्यापार मंडल के पुन:चुनाव को लेकर पूर्व पार्षद विनय जायसवाल बाबा सहित व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार मंडल के कार्यकारिणी सदस्यों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शीघ्र चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की गई।</div><div style="text-align:justify;">ज्ञापन कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी, लाल जी. जायसवाल,मंगला केशरवानी, गनेशी वर्मा,मुकेश भारतीया (पूर्व पार्षद), हरिकिशन तिवारी (बबलू) एवं दिलीप केशरवानी को सौंपा गया।इस अवसर पर मुख्य कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी ने बताया कि व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।जल्द ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पुनः चुनाव कराने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180922/demand-was-raised-to-re-hold-trade-board-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260608-wa0093-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज,।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नैनी बाजार व्यापार मंडल के पुन:चुनाव को लेकर पूर्व पार्षद विनय जायसवाल बाबा सहित व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार मंडल के कार्यकारिणी सदस्यों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शीघ्र चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की गई।</div><div style="text-align:justify;">ज्ञापन कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी, लाल जी. जायसवाल,मंगला केशरवानी, गनेशी वर्मा,मुकेश भारतीया (पूर्व पार्षद), हरिकिशन तिवारी (बबलू) एवं दिलीप केशरवानी को सौंपा गया।इस अवसर पर मुख्य कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी ने बताया कि व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।जल्द ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पुनः चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी,ताकि व्यापारियों को नया नेतृत्व मिल सके और संगठन की गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित होती रहें।ज्ञापन सौंपने वालों में विनय जायसवाल (बाबा), विक्की सोनी, पप्पू मास्टर, सुनील जायसवाल, मिलन डेमरी,दशरथ जायसवाल, बेटू जायसवाल, फूलचंद्र केशरवानी, अशोक केशरवानी, अंकुर तथा मोनू पासी प्रमुख रूप से शामिल रहे।</div><div style="text-align:justify;">व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि व्यापार मंडल का चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से जल्द संपन्न कराया जाएगा,जिससे व्यापारियों की समस्याओं के समाधान और संगठन को मजबूती मिल सके।इस मुद्दे पर मौजूदा व्यापार मंडल अध्यक्ष राकेश जायसवाल से स्वतंत्र प्रभात संवाददाता ने जब फोन से बातचीत की तो उन्हों ने कहा की हम तो चाहते है की चुनाव हो लेकीन जो पुराना ब्योरा है पहले उसको व्यापारियों के सामने सार्वजनिक करे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:15:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>विख्यात कथावाचक राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज को मिली महामंडलेश्वर की उपाधि</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>अपनी ओजस्वी वाणी, मधुर कथा शैली एवं आध्यात्मिक प्रवचनों से देशभर के श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर करने वाले विख्यात कथावाचक राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज को अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा के प्रमुख जगद्गुरु श्री सच्चिदानंदन बाल प्रभु जी महाराज ने उन्हें प्रदान की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर आयोजित धार्मिक समारोह में संत समाज, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति में यह घोषणा की गई। संत समाज ने इसे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक चेतना के क्षेत्र में राज ऋषि माधव मुकुंद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180918/famous-storyteller-raj-rishi-madhav-mukund-maharaj-got-the-title"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001988605.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>अपनी ओजस्वी वाणी, मधुर कथा शैली एवं आध्यात्मिक प्रवचनों से देशभर के श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर करने वाले विख्यात कथावाचक राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज को अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा के प्रमुख जगद्गुरु श्री सच्चिदानंदन बाल प्रभु जी महाराज ने उन्हें प्रदान की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर आयोजित धार्मिक समारोह में संत समाज, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति में यह घोषणा की गई। संत समाज ने इसे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक चेतना के क्षेत्र में राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों का सम्मान बताया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज वर्षों से श्रीमद्भागवत कथा, धार्मिक प्रवचनों एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संदेश देते आ रहे हैं। उनकी कथाओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और उनके विचारों से प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उनकी लोकप्रियता देश के विभिन्न राज्यों तक फैली हुई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">महामंडलेश्वर की उपाधि मिलने के बाद उनके अनुयायियों और भक्तों में हर्ष का माहौल है। श्रद्धालुओं ने इसे उनके आध्यात्मिक जीवन, धर्म सेवा और समाज के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। इस अवसर पर उपस्थित संतों ने कहा कि राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज के नेतृत्व में सनातन संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक जागरण और समाज में आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार को नई गति मिलेगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उपाधि ग्रहण करने के पश्चात राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज ने सभी संतों, गुरुजनों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए सेवा, साधना और धर्म प्रचार की जिम्मेदारी को और अधिक बढ़ाता है। उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार एवं मानव कल्याण के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:43:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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