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                <title>India Middle East relations - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>India Middle East relations RSS Feed</description>
                
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                <title>विश्व युद्ध की आहट और मानवता के सामने खड़ा विनाश का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दुनिया आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां शक्ति प्रदर्शन और प्रतिशोध की राजनीति मानवता के भविष्य पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव केवल दो देशों का संघर्ष नहीं रहा बल्कि यह पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन गया है। जिस तरह से एक के बाद एक मिसाइल हमले ड्रोन हमले और बमबारी हो रही है उससे यह आशंका गहराने लगी है कि कहीं यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप न ले ले। युद्ध का इतिहास हमेशा यही बताता है कि इसकी आग में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172607/the-sound-of-world-war-and-the-crisis-of-destruction"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/644bb59398ef7.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दुनिया आज एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां शक्ति प्रदर्शन और प्रतिशोध की राजनीति मानवता के भविष्य पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव केवल दो देशों का संघर्ष नहीं रहा बल्कि यह पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन गया है। जिस तरह से एक के बाद एक मिसाइल हमले ड्रोन हमले और बमबारी हो रही है उससे यह आशंका गहराने लगी है कि कहीं यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप न ले ले। युद्ध का इतिहास हमेशा यही बताता है कि इसकी आग में केवल सैनिक ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी झुलसते हैं और सभ्यता को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल के दिनों में समुद्र और आसमान दोनों ही युद्ध के मैदान बन गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। युद्धपोतों पर हमले तेल टैंकरों को निशाना बनाना और बड़े शहरों पर बमबारी यह संकेत देते हैं कि स्थिति लगातार खतरनाक होती जा रही है। इन हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है और हजारों लोग घायल हो चुके हैं। सबसे दुखद पहलू यह है कि इन संघर्षों में मरने वाले अधिकांश लोग वे होते हैं जिनका युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं होता। वे केवल आम नागरिक होते हैं जो शांति से अपना जीवन जीना चाहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युद्ध केवल मानव जीवन को ही नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक संरचना को भी गहरे स्तर पर प्रभावित करता है। जब बड़े देश युद्ध में उलझते हैं तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। व्यापार रुक जाता है तेल और ऊर्जा की कीमतें बढ़ जाती हैं और वैश्विक बाजार अस्थिर हो जाते हैं। वर्तमान संघर्ष में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व का क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा स्रोतों में से एक है। यदि यहां युद्ध लंबा चलता है तो तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी और इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। यदि युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं या आपूर्ति बाधित होती है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेंगी जिससे परिवहन महंगा होगा और इसका प्रभाव आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाएगी और विकास की गति प्रभावित हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा मध्य पूर्व के देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। ये लोग वहां से अपने परिवारों के लिए पैसा भेजते हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि युद्ध की स्थिति गंभीर हो जाती है तो इन भारतीयों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कई बार ऐसे हालात में लोगों को अपने काम छोड़कर वापस लौटना पड़ता है जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक संकट आ सकता है। इसलिए भारत के लिए यह जरूरी है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए शांति की दिशा में योगदान दे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युद्ध का एक और गंभीर प्रभाव पर्यावरण पर पड़ता है। जब तेल टैंकरों पर हमले होते हैं या समुद्र में तेल का रिसाव होता है तो समुद्री जीवन को भारी नुकसान पहुंचता है। समुद्र में रहने वाले जीवों की बड़ी संख्या नष्ट हो जाती है और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को गहरा आघात पहुंचता है। इसके अलावा बमबारी और मिसाइल हमलों से शहरों का बुनियादी ढांचा नष्ट हो जाता है। अस्पताल स्कूल सड़कें और घर तबाह हो जाते हैं। इन सबको दोबारा बनाने में वर्षों लग जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास गवाह है कि युद्ध कभी भी स्थायी समाधान नहीं देता। पहले और दूसरे विश्व युद्ध ने पूरी मानवता को विनाश का भयावह अनुभव कराया था। करोड़ों लोग मारे गए और कई देशों की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई। उसके बाद ही दुनिया ने शांति और सहयोग के महत्व को समझा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का गठन किया गया ताकि ऐसे संघर्षों को रोका जा सके। लेकिन आज भी जब बड़े देश शक्ति प्रदर्शन में लगे रहते हैं तो ऐसा लगता है कि इतिहास से सबक पूरी तरह नहीं लिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दुनिया के कई देश इस समय शांति की अपील कर रहे हैं। भारत भी लगातार यह कहता रहा है कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से ही संभव है। यदि सभी देश संयम और धैर्य का परिचय दें तो टकराव को कम किया जा सकता है। कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से विवादों को सुलझाना ही सभ्य और जिम्मेदार समाज की पहचान है।</div>
<div style="text-align:justify;">आज जरूरत इस बात की है कि दुनिया के शक्तिशाली देश अपनी जिम्मेदारी को समझें। शक्ति का उपयोग विनाश के लिए नहीं बल्कि शांति और स्थिरता के लिए होना चाहिए। यदि युद्ध की आग और फैलती है तो इसका परिणाम केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा। ऐसे में यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध की दिशा में कदम न बन जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानवता का भविष्य तभी सुरक्षित रह सकता है जब देश आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का रास्ता अपनाएं। युद्ध केवल विनाश को जन्म देता है जबकि शांति विकास और समृद्धि का मार्ग खोलती है। इसलिए समय की मांग है कि सभी देश संयम बरतें और युद्ध के बजाय शांति और सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाएं। यही मानवता के हित में होगा और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और बेहतर दुनिया की नींव रखेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:59:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>सोनिया गांधी बोलीं- खामेनेई की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की लक्षित हत्या के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है और इसे तटस्थता नहीं कहा जा सकता।</p><p style="text-align:justify;">'इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि एक मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की हत्या एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में हुई। उन्होंने इसे उस समय अंजाम दी गई कार्रवाई बताया जब वार्ताएं जारी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172393/sonia-gandhi-said-modi-governments-silence-on-khameneis-murder-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/soniagandhionalikhameneideath-1772519081.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की लक्षित हत्या के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है और इसे तटस्थता नहीं कहा जा सकता।</p><p style="text-align:justify;">'इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि एक मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की हत्या एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में हुई। उन्होंने इसे उस समय अंजाम दी गई कार्रवाई बताया जब वार्ताएं जारी थीं।</p><p style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने कहा कि किसी सत्तारूढ़ राष्ट्राध्यक्ष की इस तरह की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर विघटन का संकेत है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की।सोनिया गांधी बोलीं- खामेनेई की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है</p><p style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या की निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में अमेरिका-इजरायल के हमलों का उल्लेख किए बिना केवल ईरान की यूएई पर जवाबी कार्रवाई की आलोचना की।</p><p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि बाद में प्रधानमंत्री ने गहरी चिंता जताई और संवाद और कूटनीति की सामान्य बात कही, जबकि हमलों से पहले यही प्रक्रिया जारी थी।</p><p style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने अपने लेख में संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का जिक्र किया। उनके मुताबिक, बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के और कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या करना उस भावना के विपरीत है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाती है।</p><p style="text-align:justify;"> उन्होंने तर्क दिया कि अगर ऐसे मामलों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर से सिद्धांत आधारित आपत्ति दर्ज नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय मानकों का क्षरण सामान्य होता जाएगा।</p><p style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने यह भी उल्लेख किया कि हत्या से 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इजरायल दौरे से लौटे थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति समर्थन दोहराया था। जब वैश्विक दक्षिण के कई देश और ब्रिक्स साझेदार दूरी बनाए हुए थे, उस समय भारत का यह रुख गलत संदेश दे सकता है। उन्होंने कहा कि इससे भारत की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 21:01:33 +0530</pubDate>
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