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                <title>रक्षा सहयोग - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>रक्षा सहयोग RSS Feed</description>
                
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                <title>स्लोवाकिया से फ्रांस तक भारत की कूटनीतिक शक्ति का विस्तार और वैश्विक मंच पर बढ़ता प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा भारत की सक्रिय और बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से भारत ने यूरोप के साथ अपने राजनीतिक आर्थिक तकनीकी और सामरिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत जिस प्रकार विश्व राजनीति के केंद्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है वह इस दौरे से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।</div>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181204/indias-diplomatic-power-expanding-from-slovakia-to-france-and-growing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/42.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा भारत की सक्रिय और बहुआयामी विदेश नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से भारत ने यूरोप के साथ अपने राजनीतिक आर्थिक तकनीकी और सामरिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास किया है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत जिस प्रकार विश्व राजनीति के केंद्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है वह इस दौरे से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।</div>
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<div>स्लोवाकिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक स्लोवाक रीति से ब्रेड और नमक भेंट कर स्वागत किया गया। यह वहां सम्मान आतिथ्य और मित्रता का प्रतीक माना जाता है। राजधानी ब्रातिस्लावा में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ उनकी मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की। प्रधानमंत्री मोदी ने फिको को भारत आने का निमंत्रण दिया और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं तथा दोनों देश नई संभावनाओं की तलाश में हैं।</div>
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<div>स्लोवाकिया मध्य यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है जिसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से औद्योगिक उत्पादन पर आधारित है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उसकी पहचान पूरे यूरोप में है। वोक्सवैगन किआ जगुआर लैंड रोवर और वोल्वो जैसी कंपनियों की उत्पादन इकाइयां वहां स्थित हैं। भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत से मोबाइल फोन वस्त्र ऑटोमोबाइल पुर्जे और अन्य तकनीकी उत्पादों का निर्यात किया जाता है जबकि भारत स्लोवाकिया से मशीनरी वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आयात करता है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच लगभग सत्रह हजार करोड़ रुपये का व्यापार इस बढ़ते आर्थिक सहयोग का प्रमाण है।</div>
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<div>स्लोवाकिया में नौ हजार से अधिक भारतीयों की उपस्थिति भी दोनों देशों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। सूचना प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय पेशेवर वहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। श्रमशक्ति की कमी से जूझ रहे स्लोवाकिया के लिए भारतीय कुशल मानव संसाधन एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर उभर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर भी संबंध मजबूत हो रहे हैं।</div>
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<div>फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई वार्ता ने भारत फ्रांस संबंधों को और अधिक व्यापक बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में रक्षा व्यापार प्रौद्योगिकी शिक्षा अंतरिक्ष और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों के बीच तेरह प्रमुख समझौते हुए जो आने वाले वर्षों में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।</div>
<div> </div>
<div>भारत और फ्रांस के संबंध लंबे समय से विश्वास और सहयोग पर आधारित रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने अक्सर भारत का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन से लेकर न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप में भारत के प्रवेश तक फ्रांस लगातार भारत के पक्ष में खड़ा रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं।</div>
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<div>रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है। राफेल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जैसे महत्वपूर्ण रक्षा समझौते इस साझेदारी की मजबूती को दर्शाते हैं। अब दोनों देशों ने सैन्य उपकरणों के सह डिजाइन सह विकास और सह उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। इससे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति को भी मजबूती मिलेगी।</div>
<div> </div>
<div>तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी भारत और फ्रांस के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। नीस में आयोजित भारत इनोवेट्स 2026 कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के स्टार्टअप उद्यमियों निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस का रिश्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि साझा दृष्टिकोण और साझा भविष्य पर आधारित है। उन्होंने भारत को दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप केंद्रों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय युवा नवाचार के माध्यम से वैश्विक समस्याओं के समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं।</div>
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<div>राष्ट्रपति मैक्रों ने भी भारत की नवाचार क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज दुनिया भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में खुले और सहयोगात्मक मॉडल का समर्थन किया तथा भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत केवल एक बाजार नहीं बल्कि तकनीकी विकास का वैश्विक भागीदार बनने जा रहा है।</div>
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<div>दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्वांटम कंप्यूटिंग जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। एआई गवर्नेंस के लिए संयुक्त कार्य समूह का गठन और डिजिटल विज्ञान केंद्र की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे भारत और फ्रांस वैश्विक तकनीकी परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।</div>
<div>शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नए अवसर खुल रहे हैं। फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने का निमंत्रण दिया गया है जबकि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए फ्रांस में नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच ज्ञान और कौशल का आदान प्रदान बढ़ेगा।</div>
<div> </div>
<div>प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। रूस यूक्रेन युद्ध मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी नई चुनौतियां विश्व व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में भारत एक जिम्मेदार और संतुलित वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत की विदेश नीति का उद्देश्य संवाद सहयोग और विकास को बढ़ावा देना है और यही संदेश इस यात्रा के माध्यम से भी सामने आया है।</div>
<div> </div>
<div>फ्रांस में आयोजित होने वाली जी सेवन शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी भी विशेष महत्व रखती है। यद्यपि भारत जी सेवन का सदस्य नहीं है फिर भी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। जी सेवन देशों के साथ भारत का संवाद यह दर्शाता है कि विश्व समुदाय आज भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक सुरक्षा आर्थिक सहयोग ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत की राय को गंभीरता से सुना जा रहा है।</div>
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<div>प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा इस बात का प्रमाण है कि भारत आज केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बन चुका है। यूरोप के साथ मजबूत होते संबंध भारत को नई आर्थिक तकनीकी और सामरिक संभावनाएं प्रदान कर रहे हैं। वहीं भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण निर्णयों में उसकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली होगी। यह दौरा भारत की उसी उभरती वैश्विक पहचान का सशक्त प्रतीक है।</div>
<div>        <strong>   *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:15:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>भारत कनाडा संबंधों का नया स्वर्णिम अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत और कनाडा के रिश्तों में हालिया उच्चस्तरीय वार्ता के बाद एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। इस मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई और कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। विशेष रूप से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर हुआ समझौता इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172347/new-golden-chapter-of-india-canada-relations"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/भारत-कनाडा-संबंधों-का-नया-स्वर्णिम-अध्याय.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत और कनाडा के रिश्तों में हालिया उच्चस्तरीय वार्ता के बाद एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। इस मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई और कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। विशेष रूप से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर हुआ समझौता इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक के रूप में महत्वपूर्ण रही। पिछले वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले थे, किंतु इस बैठक ने यह संकेत दिया कि दोनों देश परिपक्व कूटनीतिक दृष्टिकोण के साथ भविष्य की ओर बढ़ना चाहते हैं। बातचीत में पारस्परिक विश्वास, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने पर बल दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूरेनियम आपूर्ति समझौता इस यात्रा का केंद्रीय बिंदु रहा। करीब 2.6 अरब डॉलर यानी लगभग 23,784 करोड़ रुपए के इस करार के तहत कनाडा अगले दस वर्षों तक भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। कनाडा विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में से एक है और भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है। भारत पहले से ही 2013 में लागू हुए न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के तहत कनाडा से यूरेनियम प्राप्त करता रहा है, किंतु इस नई दीर्घकालिक व्यवस्था से स्थिरता और भरोसे की नई नींव पड़ी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग केवल कच्चे यूरेनियम की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर तकनीकों के विकास में भी सहयोग की बात कही है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तकनीकी लाभ मिलेगा और ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य साकार हो सकेगा। जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन में कमी की वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बीच यह सहयोग भारत की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी को नई गति देने का निर्णय लिया गया है। समुद्री क्षेत्र जागरूकता, रक्षा उद्योगों में सहयोग और सैन्य आदान-प्रदान जैसे पहलुओं पर सहमति जताई गई। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता को मानवता के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए दोनों नेताओं ने इनसे निपटने के लिए घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक दृष्टि से भी यह बैठक अहम रही। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान दोनों देशों के बीच लगभग 8 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जो भविष्य में और तेजी से बढ़ सकता है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कनाडा प्राकृतिक संसाधनों, प्रौद्योगिकी और निवेश क्षमता के लिए जाना जाता है। ऐसे में दोनों की पूरक अर्थव्यवस्थाएं व्यापक अवसर पैदा कर सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बातचीत शुरू करने की घोषणा की गई है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो व्यापार और निवेश के नए द्वार खुलेंगे। भारतीय उद्योगों को कनाडाई बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी और कनाडाई कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में अवसर प्राप्त होंगे। कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मूल्यवर्धन पर सहयोग से किसानों और कृषि उद्योग को लाभ हो सकता है। भारत में दालों की मांग को देखते हुए कनाडा के पल्स प्रोटीन क्षेत्र में सहयोग विशेष महत्व रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में क्रिकेट के टी20 प्रारूप का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे टी20 में त्वरित निर्णय और मजबूत साझेदारी से मैच जीते जाते हैं, वैसे ही भारत और कनाडा मिलकर भविष्य का निर्माण करेंगे। यह टिप्पणी केवल सांकेतिक नहीं थी, बल्कि इस बात का संकेत थी कि दोनों देश तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सक्रिय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों की समान सोच सामने आई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि वह विश्व में शांति और स्थिरता चाहता है तथा हर समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। यह रुख भारत की पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जो संतुलन और कूटनीतिक समाधान पर जोर देती है।द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद भारत के लिए वैश्विक परमाणु व्यापार के रास्ते खुले थे। उसी क्रम में 2013 का भारत-कनाडा परमाणु सहयोग समझौता लागू हुआ। हालिया करार उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है, जिसने दोनों देशों के संबंधों को और गहराई दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यह बैठक केवल एक आर्थिक समझौते तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजनीतिक विश्वास, रणनीतिक साझेदारी और दीर्घकालिक सहयोग की नई दिशा तय की है। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार विस्तार और वैश्विक शांति के मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और कनाडा भविष्य में बहुआयामी संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए अवसरों और स्थिरता का नया मार्ग प्रशस्त कर सकती </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:31:34 +0530</pubDate>
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