<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/52161/kantilal-mandot" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Kantilal Mandot - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/52161/rss</link>
                <description>Kantilal Mandot RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/41.jpg"                         length="239353"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाबालिग  को भगाने के मामले की लीपापोती में लगे चौकी प्रभारी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मैलानी खीरी-</strong>    मामला  पुलिस चौकी कुकुरा क्षेत्र के एक गांव का बताया  जाता है।जहाँ के निवासी एक मजदूरी पेशा व्यक्ति की 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री को  ग्राम बरौछा  निवासी  विक्रम पुत्र। बहला फुसलाकर कहीं लेकर  चले जाने की लिखित शिकायत  चौकी प्रभारी कुकुरा  को परिजनों  ने दी थी। काफी खोजबीन और जोर दबाव  से परिजन  अपनी नाबालिग पुत्री को  बरामद कर  सके  और घर  लाए।लकिन चौकी प्रभारी कुकुरा साहब ने  गुमशुदगी दर्ज करना तक उचित नहीं समझा था  और अभी तक  किसी मजिस्ट्रेट के सामने बयान कराना, और मेडिकल परीक्षण कराना  ही उचित  समझा जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नाबालिग के परिजनों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172351/outpost-in-charge-involved-in-covering-up-the-case-of-elopement"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/0.004.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मैलानी खीरी-</strong>  मामला  पुलिस चौकी कुकुरा क्षेत्र के एक गांव का बताया  जाता है।जहाँ के निवासी एक मजदूरी पेशा व्यक्ति की 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री को  ग्राम बरौछा  निवासी  विक्रम पुत्र। बहला फुसलाकर कहीं लेकर  चले जाने की लिखित शिकायत  चौकी प्रभारी कुकुरा  को परिजनों  ने दी थी। काफी खोजबीन और जोर दबाव  से परिजन  अपनी नाबालिग पुत्री को  बरामद कर  सके  और घर  लाए।लकिन चौकी प्रभारी कुकुरा साहब ने  गुमशुदगी दर्ज करना तक उचित नहीं समझा था  और अभी तक  किसी मजिस्ट्रेट के सामने बयान कराना, और मेडिकल परीक्षण कराना  ही उचित  समझा जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नाबालिग के परिजनों का आरोप है कि  इससे पहले भी  माह जनवरी 2026 में  उसकी इसी नाबालिग पुत्री को  लेकर कहीं चला गया था।तब भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।जिसके चलते  उक्त हौसले बुलंद   बार बार  घटना को अंजाम दे रहा है।और कुकुरा चौकी इनचार्ज  कार्रवाई  करने  की बजाय  मामले  की लीपापोती कर  विपक्षी से  मिलकर मामले को मैनेज करने  में लगे  है। प्रार्थना पत्र देने के आज कई दिन बाद भी  दोषी व्यक्ति को  गिरफ्तार नहीं किया गया और  न ही  पीडिता व उसकी  नाबालिग  पुत्री  का बयान ही कराया गया है।पीड़ित ने मामले की  शिकायत पुलिस अधीक्षक से कर   कार्रवाई किए जाने की मांग करने की  बात कही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172351/outpost-in-charge-involved-in-covering-up-the-case-of-elopement</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172351/outpost-in-charge-involved-in-covering-up-the-case-of-elopement</guid>
                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:42:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/0.004.jpg"                         length="199347"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर में युवक का शव  पेड़ से प्लास्टिक की रस्सी के सहारे  लटका हुआ मिला</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर</strong>, जिले के  मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के  ग्राम पंचायत रतनपुर निवासी अजीत कुमार उर्फ गोलू (20) पुत्र चंद्र प्रकाश  सोमवार शाम लगभग तीन बजे घर से खाना खाकर निकला, देर रात तक घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसके मोबाइल फोन पर संपर्क करना चाहा, लेकिन फ़ोन स्विच ऑफ बता रहा था, परिजनों ने गांव के इर्द गिर्द  काफी  खोजबीन किया न मिलने पर नात रिश्तेदारों के पास फोन लगाकर जानकारी प्राप्त किए लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंगलवार की  सुबह कुछ ग्रामीणों ने गांव के उत्तर स्थित बूढ़ी राप्ती नदी के समीप एक भिलोर के पेड़</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172349/in-siddharthnagar-the-body-of-a-youth-was-found-hanging"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1772538896114.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर</strong>, जिले के  मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के  ग्राम पंचायत रतनपुर निवासी अजीत कुमार उर्फ गोलू (20) पुत्र चंद्र प्रकाश  सोमवार शाम लगभग तीन बजे घर से खाना खाकर निकला, देर रात तक घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसके मोबाइल फोन पर संपर्क करना चाहा, लेकिन फ़ोन स्विच ऑफ बता रहा था, परिजनों ने गांव के इर्द गिर्द  काफी  खोजबीन किया न मिलने पर नात रिश्तेदारों के पास फोन लगाकर जानकारी प्राप्त किए लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंगलवार की  सुबह कुछ ग्रामीणों ने गांव के उत्तर स्थित बूढ़ी राप्ती नदी के समीप एक भिलोर के पेड़ से लटकता शव देखा तो, उसके गले में प्लास्टिक की रस्सी के सहारे  लटका हुआ देखकर लोग करीब से जाकर पहचान किया तो उसकी पहचान  अजीत कुमार उर्फ गोलू के रूप में हुई, इसकी सूचना  परिजनों को दी , सूचना पाकर स्वजन घटना स्थल पर पहुंचकर देखा तो जैसे पांव तले जमीन खिसक गई हो,   आस- पास के ग्रामीण घटना की सूचना पाकर भारी संख्या में पहुंच गए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">घटना की सूचना  पुलिस को दी गई,सूचना पर पहुंची पुलिस  जांच में जुट गई, लाश को पेड़ से नीचे उतरवाया, पंचनामा भरकर  पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया ।थानाध्यक्ष राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि मृतक के पिता के तहरीर प्राप्त हुई घटना की सूचना पाकर मौके पर मय फोर्स पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरवाकर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज  दिया गया है, जांच में पुलिस पूरी तरह से जुटी हुई है, हत्या के कारण का पता अभी तक नहीं लग पाया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172349/in-siddharthnagar-the-body-of-a-youth-was-found-hanging</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172349/in-siddharthnagar-the-body-of-a-youth-was-found-hanging</guid>
                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:36:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1772538896114.jpg"                         length="80897"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत कनाडा संबंधों का नया स्वर्णिम अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत और कनाडा के रिश्तों में हालिया उच्चस्तरीय वार्ता के बाद एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। इस मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई और कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। विशेष रूप से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर हुआ समझौता इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172347/new-golden-chapter-of-india-canada-relations"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/भारत-कनाडा-संबंधों-का-नया-स्वर्णिम-अध्याय.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत और कनाडा के रिश्तों में हालिया उच्चस्तरीय वार्ता के बाद एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। इस मुलाकात में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, कृषि और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई और कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। विशेष रूप से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर हुआ समझौता इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक के रूप में महत्वपूर्ण रही। पिछले वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले थे, किंतु इस बैठक ने यह संकेत दिया कि दोनों देश परिपक्व कूटनीतिक दृष्टिकोण के साथ भविष्य की ओर बढ़ना चाहते हैं। बातचीत में पारस्परिक विश्वास, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने पर बल दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यूरेनियम आपूर्ति समझौता इस यात्रा का केंद्रीय बिंदु रहा। करीब 2.6 अरब डॉलर यानी लगभग 23,784 करोड़ रुपए के इस करार के तहत कनाडा अगले दस वर्षों तक भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। कनाडा विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में से एक है और भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है। भारत पहले से ही 2013 में लागू हुए न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के तहत कनाडा से यूरेनियम प्राप्त करता रहा है, किंतु इस नई दीर्घकालिक व्यवस्था से स्थिरता और भरोसे की नई नींव पड़ी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग केवल कच्चे यूरेनियम की आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों और उन्नत रिएक्टर तकनीकों के विकास में भी सहयोग की बात कही है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तकनीकी लाभ मिलेगा और ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य साकार हो सकेगा। जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन में कमी की वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बीच यह सहयोग भारत की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी को नई गति देने का निर्णय लिया गया है। समुद्री क्षेत्र जागरूकता, रक्षा उद्योगों में सहयोग और सैन्य आदान-प्रदान जैसे पहलुओं पर सहमति जताई गई। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता को मानवता के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए दोनों नेताओं ने इनसे निपटने के लिए घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक दृष्टि से भी यह बैठक अहम रही। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान दोनों देशों के बीच लगभग 8 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जो भविष्य में और तेजी से बढ़ सकता है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कनाडा प्राकृतिक संसाधनों, प्रौद्योगिकी और निवेश क्षमता के लिए जाना जाता है। ऐसे में दोनों की पूरक अर्थव्यवस्थाएं व्यापक अवसर पैदा कर सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बातचीत शुरू करने की घोषणा की गई है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो व्यापार और निवेश के नए द्वार खुलेंगे। भारतीय उद्योगों को कनाडाई बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी और कनाडाई कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार में अवसर प्राप्त होंगे। कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में मूल्यवर्धन पर सहयोग से किसानों और कृषि उद्योग को लाभ हो सकता है। भारत में दालों की मांग को देखते हुए कनाडा के पल्स प्रोटीन क्षेत्र में सहयोग विशेष महत्व रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में क्रिकेट के टी20 प्रारूप का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे टी20 में त्वरित निर्णय और मजबूत साझेदारी से मैच जीते जाते हैं, वैसे ही भारत और कनाडा मिलकर भविष्य का निर्माण करेंगे। यह टिप्पणी केवल सांकेतिक नहीं थी, बल्कि इस बात का संकेत थी कि दोनों देश तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सक्रिय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों देशों की समान सोच सामने आई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि वह विश्व में शांति और स्थिरता चाहता है तथा हर समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। यह रुख भारत की पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जो संतुलन और कूटनीतिक समाधान पर जोर देती है।द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद भारत के लिए वैश्विक परमाणु व्यापार के रास्ते खुले थे। उसी क्रम में 2013 का भारत-कनाडा परमाणु सहयोग समझौता लागू हुआ। हालिया करार उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है, जिसने दोनों देशों के संबंधों को और गहराई दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यह बैठक केवल एक आर्थिक समझौते तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजनीतिक विश्वास, रणनीतिक साझेदारी और दीर्घकालिक सहयोग की नई दिशा तय की है। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार विस्तार और वैश्विक शांति के मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत और कनाडा भविष्य में बहुआयामी संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए अवसरों और स्थिरता का नया मार्ग प्रशस्त कर सकती </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172347/new-golden-chapter-of-india-canada-relations</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172347/new-golden-chapter-of-india-canada-relations</guid>
                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:31:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF.jpg"                         length="98000"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 मार्च संत तुकाराम महाराज की जन्मजयंती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को दिशा दी है। जब भी धर्म और नैतिकता पर संकट आया तब किसी न किसी महापुरुष ने जन्म लेकर जनमानस को जागृत किया। सत्रहवीं शताब्दी में महाराष्ट्र की पावन भूमि देहू में ऐसे ही एक तेजस्वी संत का अवतरण हुआ जिन्हें हम संत तुकाराम महाराज के नाम से जानते हैं। उनकी जयंती का पावन अवसर हमें उनके जीवन आदर्शों और राष्ट्रहितकारी संदेशों को स्मरण करने का अवसर देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संत तुकाराम महाराज मराठी संस्कृति के प्राण हैं। उन्होंने भक्ति को केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे जनजीवन से जोड़ा। उनका</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172342/5-march-birth-anniversary-of-saint-tukaram-maharaj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1_1544100710.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को दिशा दी है। जब भी धर्म और नैतिकता पर संकट आया तब किसी न किसी महापुरुष ने जन्म लेकर जनमानस को जागृत किया। सत्रहवीं शताब्दी में महाराष्ट्र की पावन भूमि देहू में ऐसे ही एक तेजस्वी संत का अवतरण हुआ जिन्हें हम संत तुकाराम महाराज के नाम से जानते हैं। उनकी जयंती का पावन अवसर हमें उनके जीवन आदर्शों और राष्ट्रहितकारी संदेशों को स्मरण करने का अवसर देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संत तुकाराम महाराज मराठी संस्कृति के प्राण हैं। उन्होंने भक्ति को केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रखा बल्कि उसे जनजीवन से जोड़ा। उनका संपूर्ण जीवन भगवान विठ्ठल की अनन्य भक्ति में समर्पित था। वे वारकरी परंपरा के उज्ज्वल नक्षत्र थे और पंढरपुर के विठोबा को अपना आराध्य मानते थे। उनकी वाणी में ऐसी सरलता और आत्मीयता थी कि सामान्य किसान व्यापारी स्त्री पुरुष सभी उनके अभंग गाकर आत्मिक आनंद का अनुभव करते थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तुकाराम महाराज ने अपने अभंगों के माध्यम से समाज को जागृत किया। उन्होंने आडंबर और पाखंड का विरोध किया। उनका स्पष्ट संदेश था कि केवल बाहरी कर्मकांड से मन की शुद्धि नहीं होती। यदि भीतर से मन निर्मल न हो तो तीर्थयात्रा भी व्यर्थ है। कद्दू की कथा इसी सत्य को प्रकट करती है कि बाहरी स्नान से कड़वाहट नहीं जाती जब तक भीतर परिवर्तन न हो। यह शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मराठी भाषा को जनभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में उनका अप्रतिम योगदान है। उन्होंने संस्कृत के गूढ़ तत्वों को सरल मराठी में व्यक्त किया ताकि सामान्य जन भी धर्म के गूढ़ रहस्यों को समझ सके। उनके अभंग केवल भक्ति गीत नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति के घोष थे। उन्होंने जाति अहंकार और ऊंच नीच की भावना का विरोध किया। उनके समागम में हर वर्ग का व्यक्ति समान भाव से बैठता था। यही भारतीय संस्कृति की आत्मा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देशहित में संत का दायित्व केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं होता। संत समाज का नैतिक प्रहरी होता है। तुकाराम महाराज ने अपने समय की विकृतियों को पहचाना और समाज को सजग किया। उन्होंने परिश्रम ईमानदारी और करुणा का संदेश दिया। उनका जीवन सादगी का प्रतीक था। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों से गुजरे परंतु कभी ईश्वर भक्ति और मानव सेवा से विमुख नहीं हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी वाणी में राष्ट्रचेतना की झलक भी मिलती है। जिस काल में वे रहे उसी समय महाराष्ट्र में स्वराज्य की भावना जागृत हो रही थी। संतों की शिक्षाओं ने जनमानस में आत्मविश्वास और स्वाभिमान जगाया। भक्ति के माध्यम से उन्होंने लोगों को भीतरी शक्ति दी। जब मन मजबूत होता है तभी समाज और राष्ट्र मजबूत बनता है। इस दृष्टि से तुकाराम महाराज का योगदान अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रनिर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तुकाराम महाराज की एक विशेषता थी कि वे विरोध और अपमान के बावजूद क्षमा और प्रेम का मार्ग नहीं छोड़ते थे। जिन लोगों ने उनका विरोध किया वे भी अंततः उनकी महानता से प्रभावित होकर उनके शिष्य बने। यह उनके चरित्र की विशालता को दर्शाता है। उन्होंने कभी प्रतिशोध का मार्ग नहीं अपनाया बल्कि प्रेम से सबको जीता। यही सच्चे संत की पहचान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी वाणी में करुणा और समता का संदेश है। वे कहते हैं कि सच्चा ब्राह्मण वही है जो ब्रह्म को जानता है। इस कथन में सामाजिक समरसता का गूढ़ संदेश छिपा है। उन्होंने कर्म और गुण को महत्व दिया न कि जन्म को। इस प्रकार उन्होंने समाज को विभाजन से बचाने का प्रयास किया। आज जब समाज में भेदभाव और कटुता की प्रवृत्तियां दिखाई देती हैं तब तुकाराम महाराज की शिक्षा और भी आवश्यक हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तुकाराम महाराज के जीवन का एक अत्यंत प्रेरक प्रसंग उनका वैकुंठ गमन माना जाता है। वारकरी परंपरा में यह विश्वास है कि वे शरीर सहित भगवान के धाम को प्रस्थान कर गए। इस प्रसंग का आध्यात्मिक महत्व यह है कि संत का जीवन और मृत्यु दोनों लोककल्याण के लिए होते हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि जो व्यक्ति पूर्ण समर्पण और निष्काम भक्ति करता है उसे ईश्वर की प्राप्ति अवश्य होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मराठी संस्कृति में तुकाराम बीज और उनकी जयंती बड़े श्रद्धाभाव से मनाई जाती है। देहू और पंढरपुर में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। हजारों वारकरी उनके अभंग गाते हुए उनकी स्मृति को प्रणाम करते हैं। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। इन अवसरों पर समाज सेवा और सत्संग के माध्यम से उनके आदर्शों को जनजन तक पहुंचाया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता है कि हम तुकाराम महाराज की शिक्षाओं को केवल स्मरण तक सीमित न रखें बल्कि अपने जीवन में उतारें। तीर्थयात्रा का वास्तविक अर्थ मन की यात्रा है। यदि हम अपने भीतर की कड़वाहट ईर्ष्या और द्वेष को त्याग दें तो वही सच्ची जयंती मनाना होगा। राष्ट्रहित तभी सुरक्षित रहेगा जब नागरिक नैतिक और संवेदनशील होंगे। संतों की वाणी हमें यही प्रेरणा देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संत तुकाराम महाराज ने दिखाया कि भक्ति और समाज सुधार एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने धर्म को जीवन का आधार बनाया परंतु उसे मानव सेवा से जोड़ा। उनका संदेश है कि ईश्वर हर हृदय में निवास करता है इसलिए किसी से घृणा न करो। यही विचार भारत की सनातन संस्कृति की आत्मा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी जयंती पर हम संकल्प लें कि सत्य प्रेम और करुणा को अपने जीवन का आधार बनाएंगे। मराठी संस्कृति के इस अमर संत ने हमें जो आध्यात्मिक और सामाजिक धरोहर दी है वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी। राष्ट्रचेतना के इस महान गायक को शत शत नमन।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172342/5-march-birth-anniversary-of-saint-tukaram-maharaj</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/172342/5-march-birth-anniversary-of-saint-tukaram-maharaj</guid>
                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:22:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1_1544100710.jpg"                         length="97112"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        