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                <title>साइबर सुरक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>साइबर सुरक्षा RSS Feed</description>
                
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                <title>1800 करोड़ की ठगी के साये में बढ़ता साइबर खतरा और 100 करोड़ के प्लान से उम्मीद की नई शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने जहां आमजन के जीवन को आसान बनाया है वहीं इसके साथ एक गंभीर खतरा भी तेजी से बढ़ा है और वह है साइबर अपराध। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को सुविधा तो दी है लेकिन साथ ही उन्हें ठगी और धोखाधड़ी के नए जाल में भी फंसा दिया है। राजस्थान सहित पूरे देश में साइबर अपराधों की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी है वह चिंताजनक है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बीते पांच सालों में साइबर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177282/cyber-threat-is-increasing-in-the-shadow-of-fraud-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/cyber-fraud-2026-01-a69ca79d079be1821cfbba3b0c62ead0-3x2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने जहां आमजन के जीवन को आसान बनाया है वहीं इसके साथ एक गंभीर खतरा भी तेजी से बढ़ा है और वह है साइबर अपराध। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को सुविधा तो दी है लेकिन साथ ही उन्हें ठगी और धोखाधड़ी के नए जाल में भी फंसा दिया है। राजस्थान सहित पूरे देश में साइबर अपराधों की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी है वह चिंताजनक है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बीते पांच सालों में साइबर क्राइम के मामलों में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 4 लाख 49 हजार 182 शिकायतें दर्ज हुईं। यह संख्या केवल आंकड़ा नहीं बल्कि उस सामाजिक और आर्थिक संकट का संकेत है जो धीरे-धीरे गहराता जा रहा है। इन मामलों में करीब 1800 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है जो आम लोगों की मेहनत की कमाई पर सीधा हमला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर शिकायतों के निपटान की स्थिति पर नजर डालें तो 2 लाख 25 हजार 387 शिकायतों का निपटान किया गया है जबकि 2 लाख 23 हजार 795 मामलों में कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद 2 लाख 16 हजार 355 शिकायतें अभी भी प्रक्रिया में हैं और 4288 केस ऐसे हैं जो अब भी लंबित हैं। यह स्थिति बताती है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए वर्तमान व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल दर साल बढ़ते मामलों की तस्वीर और भी स्पष्ट संकेत देती है। वर्ष 2021 और 2022 में जहां शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी वहीं 2023 में यह तेजी से बढ़कर 63 हजार 765 तक पहुंच गई। 2024 में यह संख्या 94 हजार 409 हो गई और 2025 में 1 लाख 15 हजार 2 शिकायतें दर्ज हुईं। यह लगातार बढ़ता ग्राफ बताता है कि साइबर अपराधियों के तरीके अधिक संगठित और खतरनाक होते जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिर्फ शिकायतों की संख्या ही नहीं बल्कि ठगी की रकम भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2022 में 158.67 करोड़ रुपए की ठगी हुई जिसमें से केवल 11 करोड़ रुपए ही वापस हासिल किए जा सके। 2023 में ठगी की राशि बढ़कर 354.55 करोड़ हो गई और रिकवरी 39.33 करोड़ तक पहुंची। 2024 में यह आंकड़ा और भयावह हो गया जब 795.9 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई और 104.5 करोड़ रुपए की ही रिकवरी हो पाई। इससे यह स्पष्ट होता है कि ठगी की रकम बढ़ने के मुकाबले रिकवरी की दर अभी भी बहुत कम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन आंकड़ों के बीच राहत की एक उम्मीद भी दिखाई देती है जब 2025 में 76.87 करोड़ रुपए की राशि रिकवर की गई। हालांकि यह पूरी ठगी के मुकाबले कम है लेकिन यह संकेत देता है कि यदि प्रयासों को मजबूत किया जाए तो स्थिति में सुधार संभव है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए 100 करोड़ रुपए का एक बड़ा प्लान तैयार किया है। यह योजना केवल कागजी नहीं बल्कि एक मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके तहत एक रीजनल साइबर क्राइम सेंटर स्थापित किया जाएगा जो आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित स्टाफ के साथ काम करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सेंटर के लिए 52 पद स्वीकृत किए गए हैं जिनमें पुलिस उपाधीक्षक से लेकर कांस्टेबल तक के पद शामिल हैं। इसके अलावा लेखाधिकारी और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाएगी। हालांकि प्रस्तावित पदों की संख्या 275 बताई गई है लेकिन वर्तमान में स्वीकृत संख्या काफी कम है जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में स्टाफ की और जरूरत पड़ेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस योजना के तहत साइबर विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी जिन पर लगभग 30 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इन विशेषज्ञों की भूमिका बेहद अहम होगी क्योंकि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी नहीं बल्कि विश्लेषणात्मक चुनौती भी बन चुका है। डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे आधुनिक टूल्स के जरिए अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।100 करोड़ रुपए के इस प्लान में से लगभग 50 करोड़ रुपए संसाधनों और स्टाफ पर खर्च किए जाएंगे जबकि करीब 60 करोड़ रुपए भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास पर लगाए जाएंगे। यह निवेश इस बात का संकेत है कि सरकार अब साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देने लगी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पारंपरिक पुलिसिंग के तरीके अब साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। डिजिटल अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है और अपराधी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस भी तकनीकी रूप से सशक्त बने और आधुनिक उपकरणों का उपयोग करे। साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या का एक बड़ा कारण लोगों में जागरूकता की कमी भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई लोग फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक के जरिए ठगी का शिकार हो जाते हैं। बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी शेयरिंग, फेक कस्टमर केयर और सोशल मीडिया स्कैम जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यदि आमजन सतर्क रहें और बुनियादी साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करें तो इन अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी सरल और तेज बनाने की जरूरत है। एनसीआरपी जैसे प्लेटफॉर्म पर शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं लेकिन उनके निपटान में समय लग रहा है। यदि जांच प्रक्रिया को तेज किया जाए और तकनीकी सहायता बढ़ाई जाए तो पीड़ितों को जल्द राहत मिल सकती है।यह भी जरूरी है कि साइबर अपराधों के मामलों में राज्यों के बीच समन्वय बढ़े क्योंकि कई मामलों में अपराधी एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में एक मजबूत नेटवर्क और सूचना साझा करने की व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में शुरू किया जा रहा यह 100 करोड़ का प्लान यदि सही तरीके से लागू होता है तो यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। इससे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और आमजन का डिजिटल सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा। अंततः यह कहा जा सकता है कि साइबर अपराध केवल कानून व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और तकनीकी चुनौती भी है। इससे निपटने के लिए सरकार, पुलिस और आम नागरिक तीनों को मिलकर काम करना होगा। जहां एक ओर सरकार को मजबूत ढांचा तैयार करना होगा वहीं नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा। तभी 1800 करोड़ की ठगी जैसे आंकड़ों को भविष्य में कम किया जा सकेगा और डिजिटल भारत को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए व्यक्ति को मिली बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
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<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173640/big-relief-to-person-who-became-victim-of-online-fraud"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260319-wa0289.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसकी शिकायत संख्या 23103260049192 है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत प्राप्त होते ही थाना उतरांव पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ट्रांजेक्शन को ट्रैक करते हुए धनराशि को समय रहते होल्ड करवा दिया। लगातार प्रयासों और समन्वय के बाद पुलिस ने पूरी धनराशि को सुरक्षित रूप से वापस कराने में सफलता हासिल की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिनांक 19 मार्च 2026 को पूरी 1,47,000 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर रामचंद्र मिश्र और उनके परिजनों ने कमिश्नरेट प्रयागराज पुलिस तथा थाना उतरांव टीम का आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सराहनीय कार्य में पुलिसकर्मी  उपनिरीक्षक विक्की प्रसाद उपनिरीक्षक मानवेंद्र प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही वहीं पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेन-देन से सतर्क रहें तथा साइबर ठगी होने पर तुरंत NCRP पोर्टल या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:13:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज में फर्जी शिक्षा बोर्ड का भंडाफोड़, मुख्य संचालक गिरफ्तार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">। साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज की टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था संचालित कर फर्जी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र व अंकपत्र जारी करने वाले मुख्य संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था तथा पुलिस उपायुक्त गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देशन में और अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साइबर क्राइम</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173071/fake-education-board-busted-in-prayagraj-chief-director-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260309-wa0255.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">। साइबर क्राइम थाना कमिश्नरेट प्रयागराज की टीम ने उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था संचालित कर फर्जी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र व अंकपत्र जारी करने वाले मुख्य संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी वेबसाइट के माध्यम से लोगों को झांसा देकर धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट प्रयागराज के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था तथा पुलिस उपायुक्त गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देशन में और अपर पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साइबर क्राइम थाना में दर्ज मुकदमा संख्या 38/2024 धारा 318(4), 319(2), 338, 336(3), 340(2), 111(2)(b) भारतीय न्याय संहिता तथा 66, 66(D), 74 आईटी एक्ट के तहत वांछित अभियुक्त राजमन गोंड पुत्र कैलाश नाथ गोंड निवासी ग्राम रवनिया थाना बरदह जनपद आजमगढ़ (हाल पता: क्रिस्टल अपार्टमेंट, A विंग फ्लैट नं-104, थाना चिनहट, लखनऊ) को गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त की उम्र करीब 37 वर्ष बताई गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा अन्य लोगों के सहयोग से उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था चलाई जा रही थी। यह लोग <a href="http://www.upsosb.ac.in/">www.upsosb.ac.in</a>⁠� और <a href="http://www.upsosb.org.in/">www.upsosb.org.in</a>⁠� सहित अन्य वेबसाइटों के माध्यम से फर्जी अंकपत्र और हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र जारी कर रहे थे। इन वेबसाइटों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की तस्वीरों का भी अवैध रूप से उपयोग किया गया था ताकि लोगों को संस्था असली लगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह व्यक्तिगत लाभ के लिए इस फर्जी संस्था का संचालन कर रहा था और वेबसाइट के जरिए लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराकर उनसे धन उगाही करता था। इस प्रकार वह कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक एप्पल आईफोन, एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन, तीन सिम कार्ड और 1500 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह, उपनिरीक्षक दीपक कुमार भाटी, कांस्टेबल अतुल कुमार त्रिवेदी, कांस्टेबल रूप सिंह, कांस्टेबल विवेक सिंह यादव तथा सर्विलांस सेल के कांस्टेबल प्रवीण कुमार मिश्रा शामिल रहे।।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"><div class="aQH"><div class="aZK" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 23:13:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस: सुरक्षित भारत का निर्माण</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#2d2d2d;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></strong></p>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रत्येक वर्ष 4 मार्च को भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का आयोजन हमें उस उत्तरदायित्व का बोध कराता है जो केवल सीमा पर तैनात प्रहरियों तक सीमित नहीं है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि जिसका विस्तार देश के प्रत्येक ग्राम</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">नगर और गलियों तक है। सुरक्षा एक व्यापक संकल्पना है जिसमें न केवल बाह्य शत्रुओं से रक्षा सम्मिलित है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वरन आंतरिक स्थिरता</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आर्थिक सुदृढ़ता और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव भी इसके अभिन्न अंग हैं। इस दिवस की पृष्ठभूमि अत्यंत गौरवमयी है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसकी नींव वर्ष 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172183/national-security-day-building-a-safe-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#2d2d2d;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रत्येक वर्ष 4 मार्च को भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का आयोजन हमें उस उत्तरदायित्व का बोध कराता है जो केवल सीमा पर तैनात प्रहरियों तक सीमित नहीं है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि जिसका विस्तार देश के प्रत्येक ग्राम</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">नगर और गलियों तक है। सुरक्षा एक व्यापक संकल्पना है जिसमें न केवल बाह्य शत्रुओं से रक्षा सम्मिलित है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वरन आंतरिक स्थिरता</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आर्थिक सुदृढ़ता और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव भी इसके अभिन्न अंग हैं। इस दिवस की पृष्ठभूमि अत्यंत गौरवमयी है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसकी नींव वर्ष 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा रखी गई थी। यह दिवस राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की ३६वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। हैदराबाद में स्थित यह गौरवशाली संस्थान दशकों से नागरिकों को आपदा प्रबंधन</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आतंकवाद के विरुद्ध प्रतिकार</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आभासी प्रहारों और प्राकृतिक आपदाओं के समय धैर्य एवं कौशल से कार्य करने का प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। वर्ष 2026 के परिप्रेक्ष्य में</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जब भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी धाक जमा रहा है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तब इस दिवस की महत्ता और भी बढ़ जाती है क्योंकि एक सशक्त राष्ट्र की आधारशिला उसकी सुरक्षा व्यवस्था की अभेद्यता पर टिकी होती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यदि हम भारत की सुरक्षा यात्रा के इतिहास का अवलोकन करें</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो यह संघर्ष और विजय की गाथाओं से परिपूर्ण है। 15 अगस्त 1947 को जब भारत ने पराधीनता की बेड़ियाँ काटीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो उसके साथ ही विभाजन की त्रासदी और सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रायोजित घुसपैठ की चुनौतियां भी सामने आईं। 1962 के युद्ध ने हमें यह सिखाया कि सुरक्षा के प्रति शिथिलता घातक हो सकती है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसके पश्चात 1963 में नागरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण संस्थानों की रूपरेखा तैयार की गई। इसके उपरांत 1965 और 1971 के युद्धों ने भारतीय सैन्य बल की अदम्य शक्ति को सिद्ध किया और यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता है। इसी दूरदर्शिता के परिणामस्वरूप 1999 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का गठन हुआ</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्र की रक्षा हेतु रणनीतिक निर्णय लेती है। इतिहास गवाह है कि जब-जब राष्ट्र पर संकट आया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">चाहे वह 2004 की विनाशकारी सुनामी हो या 2008 का मुंबई आतंकी हमला</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रशिक्षित नागरिकों और स्वयंसेवकों ने सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मानवता की रक्षा की। वीरता और समर्पण की इसी परंपरा को सम्मानित करने हेतु केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष पुरस्कार वितरित किए जाते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो सुरक्षा को केवल एक सरकारी विभाग की जिम्मेदारी न मानकर इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्य से जोड़ते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आज के इस आधुनिक युग में सुरक्षा की परिभाषा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह गई है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि यह बहुआयामी और अत्यंत जटिल हो चुकी है। वर्तमान समय में भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार से संचालित आतंकवाद है। कश्मीर की शांत वादियों में अशांति फैलाने के उद्देश्य से विदेशी शक्तियों द्वारा समर्थित आतंकी संगठन निरंतर षड्यंत्र रचते रहते हैं। 2019 का पुलवामा प्रहार भारतीय सुरक्षा इतिहास का एक दुखद अध्याय था</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु इसके उत्तर में किए गए नियोजित वायु सेना के प्रहार ने विश्व को यह संदेश दिया कि नवीन भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने में भी सक्षम है। आतंकवाद के साथ-साथ आज </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आभासी सुरक्षा</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">या कंप्यूटर तंत्र की सुरक्षा एक अत्यंत गंभीर विषय बनकर उभरी है। जैसे-जैसे हम अंकीय क्रांति और वित्तीय लेन-देन के लिए अंतरजाल पर निर्भर हो रहे हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वैसे-वैसे विदेशी हैकर्स और शत्रु देशों द्वारा हमारे डेटा और महत्वपूर्ण सूचनाओं को चुराने के प्रयास बढ़ गए हैं। रूस और यूक्रेन के मध्य चले संघर्ष के उपरांत आभासी आक्रमणों की तीव्रता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। भारत जैसे विशाल देश में</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जहाँ करोड़ों लोग डिजिटल माध्यमों का प्रयोग कर रहे हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वहाँ एक छोटी सी तकनीकी चूक भी राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था को चोट पहुँचा सकती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद जैसी समस्याएं राष्ट्र की प्रगति में बाधक रही हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड के वनाच्छादित क्षेत्रों में सक्रिय उग्रवादी तत्व विकास कार्यों को रोकने का प्रयास करते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे निपटने के लिए सरकार निरंतर सामरिक और विकासात्मक रणनीतियों का समन्वय कर रही है। वहीं दूसरी ओर</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं पर पड़ोसी देशों की विस्तारवादी नीतियां और आक्रामकता एक सतत चिंता का विषय है। 2020 में गलवान घाटी में हुआ संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि शांति बनाए रखने के लिए भी सैन्य तत्परता अनिवार्य है। थल और नभ के साथ-साथ जलमार्ग की सुरक्षा भी भारत के लिए प्राणवायु के समान है। हिंद महासागर में विदेशी नौसेनाओं की बढ़ती हलचल और समुद्री डाकुओं का आतंक हमारे व्यापारिक हितों के लिए चुनौती है। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत ने चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (क्वाड) जैसे अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों के माध्यम से अपनी समुद्री उपस्थिति को सशक्त किया है। इसके अतिरिक्त</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक आपदाएं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जैसे हिमालयी क्षेत्रों में आने वाली बाढ़ और समुद्री चक्रवात</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुके हैं क्योंकि ये जन-धन की अपार हानि करते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इन सभी चुनौतियों का प्रत्युत्तर देने हेतु भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आत्मनिर्भर भारत</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अभियान के अंतर्गत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में हम स्वावलंबी बन रहे हैं। 2026 तक हमारा लक्ष्य है कि भारतीय सेना द्वारा प्रयोग किए जाने वाले 70 प्रतिशत अस्त्र-शस्त्र स्वदेशी हों। तेजस जैसे युद्धक विमान और अग्नि जैसी शक्तिशाली प्रक्षेपास्त्र प्रणालियां भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">साइबर सुरक्षा संचालन केंद्रों</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">की स्थापना की गई है जो चौबीसों घंटे हमारे आभासी अंतरिक्ष की निगरानी करते हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपनी त्वरित कार्यप्रणाली से आपदाओं के समय होने वाली क्षति को न्यूनतम करने में सफलता प्राप्त की है। सरकार ने शिक्षा के स्तर पर भी सुरक्षा बोध को अनिवार्य बनाने का प्रयास किया है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में राष्ट्रीय कैडेट कोर और राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से युवाओं को अनुशासन और राष्ट्र रक्षा का पाठ पढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनियाँ और संगोष्ठियाँ सामान्य नागरिकों को उन खतरों के प्रति सचेत करती हैं जिनसे वे अनभिज्ञ हो सकते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">परंतु</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्रश्न यह उठता है कि एक सामान्य नागरिक इस महायज्ञ में क्या आहुति दे सकता है</span><span>? </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सुरक्षा का प्रथम नियम </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सजगता</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">है। एक जागरूक नागरिक समाज की आँखें और कान होता है। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी लावारिस वस्तु या संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को देना एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। अंकीय जगत में सुरक्षा बरतने के लिए जटिल कूटशब्दों का प्रयोग करना</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अपरिचित संदेशों से सावधान रहना और वित्तीय जानकारी को गोपनीय रखना आज के युग की अनिवार्य आवश्यकता है। इसके साथ ही</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">प्राकृतिक आपदाओं के समय घबराने के स्थान पर पूर्व-तैयारी रखना</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जैसे प्राथमिक चिकित्सा किट और आवश्यक वस्तुओं का संचय करना</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ सामान्य नागरिकों ने अपनी सूझबूझ से बड़े संकटों को टाला है। मुंबई के आतंकी हमलों के दौरान स्थानीय टैक्सी चालकों और होटल कर्मियों ने जिस साहस का परिचय दिया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वह सेना के पराक्रम से कम नहीं था। अतः</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सुरक्षा का मार्ग व्यक्तिगत अनुशासन से होकर राष्ट्र के गौरव तक जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भविष्य की ओर दृष्टि डालें तो आने वाला समय कृत्रिम मेधा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मानवरहित विमानों (ड्रोन) और क्वांटम संगणना का है। ये तकनीकें जहाँ सुरक्षा को अभेद्य बनाएंगी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वहीं नई चुनौतियां भी प्रस्तुत करेंगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित की जा रही कृत्रिम मेधा प्रणालियां सीमाओं पर बिना मानवीय हस्तक्षेप के निगरानी रखने में सक्षम होंगी। अंतरिक्ष की सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने 2019 के एंटी-सैटेलाइट परीक्षण के माध्यम से अपनी धाक जमाई है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे यह सुनिश्चित हुआ है कि हमारे संचार उपग्रह अंतरिक्ष में भी सुरक्षित हैं। भविष्य की सुरक्षा केवल शस्त्रों से नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि श्रेष्ठतम तकनीक और अटूट एकता से सुनिश्चित होगी। आर्थिक विषमता और सामाजिक भेदभाव भी कभी-कभी आंतरिक विद्रोह का कारण बनते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इसलिए वास्तविक सुरक्षा तभी संभव है जब देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास के फल पहुँचें और वह स्वयं को राष्ट्र की मुख्यधारा का हिस्सा समझे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">निष्कर्षतः</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस एक ऐसा अवसर है जो हमें आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम एक ऐसे देश के निवासी हैं जिसकी सीमाएं हिमालय की चोटियों से लेकर हिंद महासागर की गहराइयों तक फैली हैं। इसकी रक्षा का दायित्व केवल उन वीरों का नहीं है जो शून्य से नीचे के तापमान में सीमाओं पर प्रहरी बने खड़े हैं</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि यह हमारा सामूहिक धर्म है। प्रधानमंत्री के शब्दों में</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सुरक्षा एक साझा संकल्प है। जब तक राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को देश का प्रथम रक्षक नहीं मानेगा</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तब तक पूर्ण सुरक्षा की कल्पना अधूरी है। आइए</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इस पावन दिवस पर हम यह प्रतिज्ञा लें कि हम सदैव सजग रहेंगे</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">विधि-व्यवस्था का सम्मान करेंगे और अपने आचरण से राष्ट्र की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखेंगे। सतर्क भारत ही समर्थ भारत है और समर्थ भारत ही विश्व शांति का अग्रदूत बन सकता है। जय हिंद</span><span style="font-size:11pt;line-height:115%;font-family:Calibri, 'sans-serif';">, </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जय भारत।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172183/national-security-day-building-a-safe-india</link>
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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:02:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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