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                <title>साइबर सुरक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>साइबर सुरक्षा RSS Feed</description>
                
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                <title>एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184373/anti-paper-leak-bill-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द करनी पड़ीं। इससे न केवल अभ्यर्थियों का समय और धन बर्बाद हुआ, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक विधेयक लाया, जिसे संसद की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है। पेपर लीक क्यों बना राष्ट्रीय चिंता का विषय?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />भारत में हर वर्ष करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर हमला है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, खरीदने, बेचने या प्रसारित करने को गंभीर अपराध माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />संगठित गिरोहों और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की कारावास और भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है।इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करने वालों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की गहन जांच के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। युवाओं को क्या मिलेगा लाभ? यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।<br />परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा। युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा। क्या केवल कानून बनाना पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके साथ-साथ कई अन्य सुधार भी आवश्यक हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए।</p>
<blockquote class="format2">
<p style="text-align:justify;"><br />डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जाए। परीक्षा केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से हो। परीक्षा कर्मचारियों का उचित सत्यापन किया जाए।<br />समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए। यदि कानून का क्रियान्वयन कमजोर रहा, तो कठोर दंड का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्यों की भूमिका अधिकांश भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकारें आयोजित करती हैं। इसलिए राज्यों को भी अपनी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस कानून का पूरा लाभ मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कानून का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।<br />एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संदेश देता है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार, परीक्षा एजेंसियां, जांच संस्थाएं और राज्य प्रशासन मिलकर इस कानून को ईमानदारी से लागू करें, तो लाखों युवाओं का विश्वास बहाल हो सकता है और प्रतियोगी परीक्षाएं वास्तव में निष्पक्ष एवं पारदर्शी बन सकती हैं। अंततः किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्ष चयन प्रणाली होती है, और उसे सुरक्षित रखना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर अपराध पर सख्त हुई सरकार, प्रदेश को साइबर सुरक्षा में नंबर-1 बनाने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184035/government-becomes-strict-on-cyber-crime-instructions-to-make-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-24-at-20.58.26.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रधानमंत्री की 'प्रगति (PRAGATI)' समीक्षा के तहत साइबर अपराध से जुड़े नौ प्राथमिकता बिंदुओं पर प्रदेश की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर स्थापित करने और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सुनियोजित एवं समन्वित प्रयास किए जाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करें तथा साइबर अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी की जाए और पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">साइबर जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए, जो साइबर अपराध मुख्यालय के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता सामग्री को विभाग के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य करेगा। उन्होंने सभी विभागों को इस संबंध में आवश्यक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की अधिसूचना शीघ्र जारी करने, ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को जल्द क्रियाशील बनाने तथा राज्यव्यापी 'ऑपरेशन साइबर वज्र (CyVajra)' को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति लोगों को लगातार जागरूक किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह ने बताया कि राज्य साइबर समन्वय केंद्र (UPS4C) की स्थापना का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसकी अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि एस4सी (S4C) के आठ में से छह घटक पहले ही संचालित हो चुके हैं, जबकि शेष दो पर कार्य तेजी से चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी जानकारी दी कि साइबर अपराध की त्वरित और स्थान-निरपेक्ष एफआईआर दर्ज करने के लिए विकसित किया जा रहा ई-जीरो एफआईआर तंत्र अंतिम चरण में है। शिकायत निवारण, धनराशि वापसी और समन्वय पोर्टलों के संचालन में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश में अग्रणी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में बताया गया कि राज्यव्यापी आसूचना आधारित अभियान 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत प्रारंभिक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता मिली है। वहीं, साइबर अपराध की जांच के लिए पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण में साइट्रेन (CyTrain) प्लेटफॉर्म के उपयोग के मामले में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य सचिव ने प्रदेश में साइबर अपराध के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार की गई जागरूकता सामग्री की भी सराहना की और निर्देश दिया कि इसे विभिन्न लक्षित समूहों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में सचिव गृह मोहित गुप्ता, पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) बी.के. सिंह, साइबर अपराध मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 21:14:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर ठगी के संगठित गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181429/organized-gang-of-cyber-fraud-busted-five-accused-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निकालने का काम कर रहे थे। इस संबंध में थाना सरिता विहार में एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज की गई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है जांच में इस गिरोह के तार मुंबई में दर्ज एक बड़े साइबर ठगी मामले से जुड़े पाए गए हैं। मुंबई के एक निजी कंपनी के साथ कथित सीईओ/व्हाट्सएप प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) धोखाधड़ी के जरिए करीब 10.40 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। यह रकम 3 जून से 15 जून 2026 के बीच 63 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से निकाली गई थी। इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच के दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रकरण के तहत की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूरे वित्तीय नेटवर्क में संदिग्ध लेनदेन की राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास 22 वंश 2 फैयाज आलम 22 अमित 28 और बलवीर कुमार 23 के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस कार्रवाई को थाना सरिता विहार के प्रभारी निरीक्षक युधवीर सिंह, उपनिरीक्षक वैभव सिंह, उपनिरीक्षक सतीश भाटी, बीसी नितेश, कांस्टेबल ओम प्रकाश और मनीष की टीम ने अंजाम दिया। अभियान का पर्यवेक्षण एसीपी अनिल शर्मा ने किया, जबकि पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-द्वितीय जसबीर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
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<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 21:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181198/interstate-cyber-gang-committing-fraud-in-the-name-of-digital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002002752.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह पिछले लगभग 03 वर्षों से सक्रिय था तथा देशभर में लगभग 2,500 लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है। ठगी की धनराशि के लेनदेन हेतु 450 से अधिक फर्जी एवं किराए के बैंक खातों का उपयोग किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियुक्तों के कब्जे से 05 मोबाइल फोन, 01 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 02 चेकबुक एवं 12 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। गिरोह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश में भी शिकायतें दर्ज हैं। गिरफ्तार अभियुक्त: अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार एवं कमल हैं। अभियुक्तों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 308(2), 318(4) एवं आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। उल्लेखनीय कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को ₹25,000 के नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता से साइबर ठगी के 3,800 रुपये पीड़ित को मिले वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong>  साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260609-wa0508.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong> साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने पर पता चला कि व्हाट्सएप अकाउंट हैक किया गया था और उनके साथ साइबर ठगी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने 12 मई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने पर थाना महराजगंज तराई की साइबर हेल्पडेस्क ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर आरोपी के खाते में पहुंची धनराशि को होल्ड करा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित बैंक को धनराशि वापस कराने के लिए एसओपी के अनुसार पत्राचार किया गया। बैंक द्वारा कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी 3,800 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रुपये वापस मिलने पर पीड़ित ने महराजगंज तराई पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई में साइबर हेल्पडेस्क के उपनिरीक्षक आदित्य कुमार, आरक्षी धीरज तिवारी तथा आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि वापस कराई जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर हेल्प डेस्क कोइरौना ने लौटाए 13 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179824/cyber-help-desk-koirauna-returned-rs-13-thousand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260521-wa0021.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179824/cyber-help-desk-koirauna-returned-rs-13-thousand</link>
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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 19:30:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत हजारीबाग में लगे शिविर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग, झारखंड:-</strong> राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग द्वारा सोमवार को जिले के कई क्षेत्रों में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत चलाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर का आयोजन केरेडारी प्रखंड के सलगा पंचायत, बरही प्रखंड के +2 उच्च विद्यालय बरही और राजकीय मध्य विद्यालय बरही समेत अन्य स्थानों पर किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग ध्रुव चंद्र मिश्रा के निर्देश पर तथा सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178964/camps-organized-in-hazaribagh-under-90-day-legal-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/news-71.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग, झारखंड:-</strong> राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) हजारीबाग द्वारा सोमवार को जिले के कई क्षेत्रों में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत चलाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर का आयोजन केरेडारी प्रखंड के सलगा पंचायत, बरही प्रखंड के +2 उच्च विद्यालय बरही और राजकीय मध्य विद्यालय बरही समेत अन्य स्थानों पर किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार हजारीबाग ध्रुव चंद्र मिश्रा के निर्देश पर तथा सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी की देखरेख में संपन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर में अधिकार मित्रों ने बच्चों और ग्रामीणों को बाल विवाह, बाल श्रम और साइबर क्राइम से बचाव की जानकारी दी। साथ ही लोगों को टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस नंबर पर कॉल कर लोग घर बैठे मुफ्त में कानूनी सलाह और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने बताया कि यह अभियान लगातार 90 दिनों तक चलाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, महिलाएं, पुरुष और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अधिकार मित्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:34:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीमा से पूंजी तक सख्ती: राष्ट्रीय सुरक्षा के नए दौर में भारत का स्पष्ट संदेश-भरोसे से पहले सतर्कता जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी आर्थिक नीतियां अब केवल विकास के आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण से संचालित होंगी। विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में हालिया सख्ती इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है, जो न केवल आर्थिक ढांचे को सुरक्षित बनाने की कोशिश है, बल्कि उन खतरों के प्रति जागरूकता भी दर्शाता है जो सीमाओं के पार से अदृश्य रूप में देश में प्रवेश कर सकते हैं। पाकिस्तान से आने वाले निवेश पर सीधी पाबंदी और सरकार की पूर्व अनुमति को अनिवार्य बनाना इसी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178325/strictness-from-border-to-capital-indias-clear-message-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01633.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी आर्थिक नीतियां अब केवल विकास के आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक दृष्टिकोण से संचालित होंगी। विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में हालिया सख्ती इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है, जो न केवल आर्थिक ढांचे को सुरक्षित बनाने की कोशिश है, बल्कि उन खतरों के प्रति जागरूकता भी दर्शाता है जो सीमाओं के पार से अदृश्य रूप में देश में प्रवेश कर सकते हैं। पाकिस्तान से आने वाले निवेश पर सीधी पाबंदी और सरकार की पूर्व अनुमति को अनिवार्य बनाना इसी सोच का हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है। वर्षों से भारत आतंकवाद, घुसपैठ और आर्थिक गतिविधियों के जरिए अस्थिरता फैलाने के प्रयासों का सामना करता रहा है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि निवेश जैसे संवेदनशील माध्यमों का दुरुपयोग न हो। पैसा केवल विकास का साधन नहीं होता, वह प्रभाव और नियंत्रण का माध्यम भी बन सकता है। यदि उस पर निगरानी न हो, तो यह राष्ट्रीय हितों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार का यह निर्णय खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। जिन देशों की भारत के साथ भूमि सीमा लगती है, उन सभी के लिए यही नियम लागू होंगे। इसका मतलब यह है कि अब कोई भी निवेश, चाहे वह सीधे आए या किसी तीसरे देश के जरिए, उसकी पूरी जांच होगी। ‘बेनिफिशियल ओनर’ यानी वास्तविक मालिक की पहचान पर जोर देकर सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि निवेश के पीछे छिपे वास्तविक स्रोत को उजागर किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कदम के पीछे की सबसे बड़ी चिंता राष्ट्रीय सुरक्षा है। रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्र केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का विदेशी हस्तक्षेप, खासकर उन देशों से जिनके साथ भारत के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए इन क्षेत्रों में पाकिस्तान से निवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना एक स्वाभाविक और आवश्यक निर्णय माना जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान ने कई बार भारत के खिलाफ अप्रत्यक्ष तरीकों का सहारा लिया है। आतंकवाद को समर्थन, हवाला के जरिए फंडिंग, और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देना—ये सब ऐसे उदाहरण हैं जिनके कारण भारत को हमेशा सतर्क रहना पड़ा है। ऐसे में यह उम्मीद करना कि आर्थिक निवेश के जरिए कोई खतरा नहीं होगा, वास्तविकता से आंख मूंदने जैसा होगा। इसलिए यह जरूरी है कि हर निवेश को केवल आर्थिक अवसर के रूप में न देखा जाए, बल्कि उसके संभावित प्रभावों का भी आकलन किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां यह समझना भी जरूरी है कि भारत का यह कदम किसी देश के खिलाफ नफरत या भेदभाव पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक व्यावहारिक और सुरक्षा-केंद्रित नीति है। हर देश अपने हितों की रक्षा के लिए ऐसे कदम उठाता है। अमेरिका, चीन और यूरोप के कई देश भी संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी निवेश को लेकर सख्त नियम रखते हैं। ऐसे में भारत का यह निर्णय वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप ही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन इस पूरे परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत को अब भावनात्मक नहीं, बल्कि यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाना होगा। पाकिस्तान के साथ संबंधों का इतिहास विश्वास से अधिक अविश्वास का रहा है। हर बार जब संवाद और सहयोग की बात हुई, किसी न किसी रूप में विश्वास को ठेस पहुंची। ऐसे में आर्थिक संबंधों में भी सतर्कता बरतना आवश्यक हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और दुनिया भर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। ऐसे में यह जरूरी है कि निवेश के दरवाजे खुले रहें, लेकिन उन पर मजबूत चौकीदारी भी हो। यह संतुलन ही भारत को सुरक्षित और मजबूत बनाएगा। सरकार का यह कदम इसी संतुलन को स्थापित करने की दिशा में एक प्रयास है।</div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि देश के भीतर आर्थिक पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए। केवल नियम बना देना पर्याप्त नहीं होता, उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। हवाला जैसे अवैध माध्यमों पर कड़ी नजर रखना, संदिग्ध लेन-देन की पहचान करना और समय रहते कार्रवाई करना—ये सब ऐसे उपाय हैं जो इस नीति को सफल बनाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज का दौर केवल पारंपरिक युद्धों का नहीं है, बल्कि आर्थिक और साइबर युद्धों का भी है। ऐसे में निवेश, तकनीक और डेटा—ये सब नए हथियार बन चुके हैं। यदि इन पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो यह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसलिए भारत का यह कदम समय की मांग भी है और भविष्य की तैयारी भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह विकास और सुरक्षा के बीच किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। आर्थिक प्रगति तभी सार्थक है जब वह सुरक्षित और स्थायी हो। पाकिस्तान जैसे देश पर आंख मूंदकर भरोसा करना न केवल नासमझी होगी, बल्कि जोखिम भी। इसलिए सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत को आगे बढ़ना है, लेकिन पूरी जागरूकता और मजबूती के साथ। यह निर्णय उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो यह बताता है कि अब देश केवल अवसरों को नहीं, बल्कि खतरों को भी उतनी ही गंभीरता से देख रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">       <strong>*कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:16:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक साल बाद पीड़ित को वापस मिले 7500 रुपये, पुलिस की सक्रियता से मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हलिया, मीरजापुर।</strong> थाना क्षेत्र के ग्राम परसिया खुर्द निवासी राजपति के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस कराया है। एक वर्ष बाद धनराशि मिलते ही पीड़ित के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 03 अप्रैल 2025 को राजपति के साथ 7500 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। किसी अज्ञात साइबर ठग द्वारा उनके खाते से यह धनराशि निकाल ली गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थाना अध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव के नितृत्व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178038/after-one-year-the-victim-got-back-rs-7500-relief"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001516489.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हलिया, मीरजापुर।</strong> थाना क्षेत्र के ग्राम परसिया खुर्द निवासी राजपति के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस कराया है। एक वर्ष बाद धनराशि मिलते ही पीड़ित के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 03 अप्रैल 2025 को राजपति के साथ 7500 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। किसी अज्ञात साइबर ठग द्वारा उनके खाते से यह धनराशि निकाल ली गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थाना अध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव के नितृत्व में साईबर सेल में तैनात कास्टेबल विश्वनाथ प्रताप ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संबंधित खातों और लेन देन की पड़ताल की तथा लगातार प्रयास जारी रखा। पुलिस की सक्रियता और सतत प्रयासों के चलते अंत : सफलता हाथ लगी।इस संबंध में थानाध्यक्ष ने बताया कि साइबर अपराधों के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>1800 करोड़ की ठगी के साये में बढ़ता साइबर खतरा और 100 करोड़ के प्लान से उम्मीद की नई शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने जहां आमजन के जीवन को आसान बनाया है वहीं इसके साथ एक गंभीर खतरा भी तेजी से बढ़ा है और वह है साइबर अपराध। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को सुविधा तो दी है लेकिन साथ ही उन्हें ठगी और धोखाधड़ी के नए जाल में भी फंसा दिया है। राजस्थान सहित पूरे देश में साइबर अपराधों की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी है वह चिंताजनक है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बीते पांच सालों में साइबर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177282/cyber-threat-is-increasing-in-the-shadow-of-fraud-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/cyber-fraud-2026-01-a69ca79d079be1821cfbba3b0c62ead0-3x2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने जहां आमजन के जीवन को आसान बनाया है वहीं इसके साथ एक गंभीर खतरा भी तेजी से बढ़ा है और वह है साइबर अपराध। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों को सुविधा तो दी है लेकिन साथ ही उन्हें ठगी और धोखाधड़ी के नए जाल में भी फंसा दिया है। राजस्थान सहित पूरे देश में साइबर अपराधों की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ी है वह चिंताजनक है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बीते पांच सालों में साइबर क्राइम के मामलों में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 4 लाख 49 हजार 182 शिकायतें दर्ज हुईं। यह संख्या केवल आंकड़ा नहीं बल्कि उस सामाजिक और आर्थिक संकट का संकेत है जो धीरे-धीरे गहराता जा रहा है। इन मामलों में करीब 1800 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है जो आम लोगों की मेहनत की कमाई पर सीधा हमला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर शिकायतों के निपटान की स्थिति पर नजर डालें तो 2 लाख 25 हजार 387 शिकायतों का निपटान किया गया है जबकि 2 लाख 23 हजार 795 मामलों में कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद 2 लाख 16 हजार 355 शिकायतें अभी भी प्रक्रिया में हैं और 4288 केस ऐसे हैं जो अब भी लंबित हैं। यह स्थिति बताती है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए वर्तमान व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल दर साल बढ़ते मामलों की तस्वीर और भी स्पष्ट संकेत देती है। वर्ष 2021 और 2022 में जहां शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी वहीं 2023 में यह तेजी से बढ़कर 63 हजार 765 तक पहुंच गई। 2024 में यह संख्या 94 हजार 409 हो गई और 2025 में 1 लाख 15 हजार 2 शिकायतें दर्ज हुईं। यह लगातार बढ़ता ग्राफ बताता है कि साइबर अपराधियों के तरीके अधिक संगठित और खतरनाक होते जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिर्फ शिकायतों की संख्या ही नहीं बल्कि ठगी की रकम भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2022 में 158.67 करोड़ रुपए की ठगी हुई जिसमें से केवल 11 करोड़ रुपए ही वापस हासिल किए जा सके। 2023 में ठगी की राशि बढ़कर 354.55 करोड़ हो गई और रिकवरी 39.33 करोड़ तक पहुंची। 2024 में यह आंकड़ा और भयावह हो गया जब 795.9 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई और 104.5 करोड़ रुपए की ही रिकवरी हो पाई। इससे यह स्पष्ट होता है कि ठगी की रकम बढ़ने के मुकाबले रिकवरी की दर अभी भी बहुत कम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन आंकड़ों के बीच राहत की एक उम्मीद भी दिखाई देती है जब 2025 में 76.87 करोड़ रुपए की राशि रिकवर की गई। हालांकि यह पूरी ठगी के मुकाबले कम है लेकिन यह संकेत देता है कि यदि प्रयासों को मजबूत किया जाए तो स्थिति में सुधार संभव है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए 100 करोड़ रुपए का एक बड़ा प्लान तैयार किया है। यह योजना केवल कागजी नहीं बल्कि एक मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके तहत एक रीजनल साइबर क्राइम सेंटर स्थापित किया जाएगा जो आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित स्टाफ के साथ काम करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सेंटर के लिए 52 पद स्वीकृत किए गए हैं जिनमें पुलिस उपाधीक्षक से लेकर कांस्टेबल तक के पद शामिल हैं। इसके अलावा लेखाधिकारी और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाएगी। हालांकि प्रस्तावित पदों की संख्या 275 बताई गई है लेकिन वर्तमान में स्वीकृत संख्या काफी कम है जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में स्टाफ की और जरूरत पड़ेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस योजना के तहत साइबर विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी जिन पर लगभग 30 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इन विशेषज्ञों की भूमिका बेहद अहम होगी क्योंकि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी नहीं बल्कि विश्लेषणात्मक चुनौती भी बन चुका है। डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे आधुनिक टूल्स के जरिए अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।100 करोड़ रुपए के इस प्लान में से लगभग 50 करोड़ रुपए संसाधनों और स्टाफ पर खर्च किए जाएंगे जबकि करीब 60 करोड़ रुपए भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास पर लगाए जाएंगे। यह निवेश इस बात का संकेत है कि सरकार अब साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देने लगी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पारंपरिक पुलिसिंग के तरीके अब साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। डिजिटल अपराधों की प्रकृति तेजी से बदल रही है और अपराधी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस भी तकनीकी रूप से सशक्त बने और आधुनिक उपकरणों का उपयोग करे। साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या का एक बड़ा कारण लोगों में जागरूकता की कमी भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई लोग फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक के जरिए ठगी का शिकार हो जाते हैं। बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी शेयरिंग, फेक कस्टमर केयर और सोशल मीडिया स्कैम जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यदि आमजन सतर्क रहें और बुनियादी साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करें तो इन अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी सरल और तेज बनाने की जरूरत है। एनसीआरपी जैसे प्लेटफॉर्म पर शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं लेकिन उनके निपटान में समय लग रहा है। यदि जांच प्रक्रिया को तेज किया जाए और तकनीकी सहायता बढ़ाई जाए तो पीड़ितों को जल्द राहत मिल सकती है।यह भी जरूरी है कि साइबर अपराधों के मामलों में राज्यों के बीच समन्वय बढ़े क्योंकि कई मामलों में अपराधी एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे में एक मजबूत नेटवर्क और सूचना साझा करने की व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में शुरू किया जा रहा यह 100 करोड़ का प्लान यदि सही तरीके से लागू होता है तो यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। इससे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और आमजन का डिजिटल सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा। अंततः यह कहा जा सकता है कि साइबर अपराध केवल कानून व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और तकनीकी चुनौती भी है। इससे निपटने के लिए सरकार, पुलिस और आम नागरिक तीनों को मिलकर काम करना होगा। जहां एक ओर सरकार को मजबूत ढांचा तैयार करना होगा वहीं नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा। तभी 1800 करोड़ की ठगी जैसे आंकड़ों को भविष्य में कम किया जा सकेगा और डिजिटल भारत को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:45:54 +0530</pubDate>
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                <title>ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए व्यक्ति को मिली बड़ी राहत</title>
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
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<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173640/big-relief-to-person-who-became-victim-of-online-fraud"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260319-wa0289.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> थाना उतरांव पुलिस टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार हुए एक व्यक्ति की पूरी धनराशि वापस कराकर सराहनीय कार्य किया है। इस सफलता से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि आम जनता में भी पुलिस के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना उतरांव क्षेत्र के ग्राम सराय इस्माइल (सदरेपुर) निवासी रामचंद्र मिश्र, पुत्र स्वर्गीय रमाकांत मिश्र के बैंक खाते से दिनांक 21 जनवरी 2026 को अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी कर कुल 1,47,000 रुपये की धनराशि निकाल ली गई थी। घटना के बाद पीड़ित ने तुरंत NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसकी शिकायत संख्या 23103260049192 है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत प्राप्त होते ही थाना उतरांव पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने संबंधित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ट्रांजेक्शन को ट्रैक करते हुए धनराशि को समय रहते होल्ड करवा दिया। लगातार प्रयासों और समन्वय के बाद पुलिस ने पूरी धनराशि को सुरक्षित रूप से वापस कराने में सफलता हासिल की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिनांक 19 मार्च 2026 को पूरी 1,47,000 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर रामचंद्र मिश्र और उनके परिजनों ने कमिश्नरेट प्रयागराज पुलिस तथा थाना उतरांव टीम का आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सराहनीय कार्य में पुलिसकर्मी  उपनिरीक्षक विक्की प्रसाद उपनिरीक्षक मानवेंद्र प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही वहीं पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेन-देन से सतर्क रहें तथा साइबर ठगी होने पर तुरंत NCRP पोर्टल या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 20:13:31 +0530</pubDate>
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