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                <title>Election Commission India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Election Commission India RSS Feed</description>
                
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                <title>आचार संहिता: ईसी ने पीएम के बयान की जाँच की बात कही तो बीजेपी खड़गे के पीछे पड़ी!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> पीएम मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों की ईसीआई की जाँच की ख़बर आने के बीच ही बीजेपी ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री खड़गे के ख़िलाफ़ शिकायत करने ईसीआई पहुँच गए। इस बीच, ममता बनर्जी ने भी बंगाल में बीजेपी पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कई राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी एमसीसी तोड़ने का आरोप लगा रही हैं। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष की शिकायत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177025/when-ec-asked-to-investigate-pms-statement-bjp-went-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/69e76d9fabede-bjp-demands-apology-from-kharge-212914289-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> पीएम मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों की ईसीआई की जाँच की ख़बर आने के बीच ही बीजेपी ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री खड़गे के ख़िलाफ़ शिकायत करने ईसीआई पहुँच गए। इस बीच, ममता बनर्जी ने भी बंगाल में बीजेपी पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी एमसीसी तोड़ने का आरोप लगा रही हैं। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष की शिकायत की जांच करने का फैसला किया है। विपक्ष की शिकायत के बाद आयोग ने यह निर्णय लिया है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह संबोधन चुनाव के बीच मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्षी नेताओं, वामपंथी पार्टियों और क़रीब 700 एक्टिविस्टों व आम नागरिकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने सरकारी प्रसारक दूरदर्शन और आकाशवाणी का इस्तेमाल करके चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की।सीपीआई (एम) के महासचिव एम ए बेबी ने लिखा कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन चुनाव वाले राज्यों में जनमत प्रभावित करने वाला था। इससे चुनाव में बराबरी का मौका नहीं मिलता और लोकतंत्र की नींव हिल जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस शिकायत की जाँच मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट डिवीजन करेगा। बता दें कि मॉडल कोड 15 मार्च से लागू है और 4 मई तक रहेगा, जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती होगी।दूसरी ओर, बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। बुधवार को तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह शामिल थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निर्मला सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने तमिलनाडु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री को 'आतंकवादी' कहा, जो बहुत गलत और निंदनीय है। यह पूरे देश के लोगों के दिए गए जनादेश का अपमान है। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस हार के डर से निराश होकर ऐसा बोल रही है। बीजेपी ने मांग की कि खड़गे और कांग्रेस देश से माफी मांगें। किरेन रिजिजू ने इसे 'घृणित कृत्य' बताया और कहा कि चुनाव आयोग को इतनी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए कि आगे कोई प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहने की हिम्मत न करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खड़गे ने चेन्नई में कहा था कि मोदी लोकतंत्र को आतंकित कर रहे हैं, एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। बाद में उन्होंने सफाई दी थी कि उन्होंने शाब्दिक रूप से 'आतंकवादी' नहीं कहा, बल्कि उनका मतलब था कि वह 'आतंकित कर रहे हैं'। खड़गे ने कहा, 'वे लोगों और राजनीतिक पार्टियों को आतंकित (terrorise) कर रहे हैं। मैंने कभी यह नहीं कहा कि वे शाब्दिक रूप से आतंकवादी हैं।' उन्होंने जोड़ा कि मोदी सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबा रही है। बीजेपी ने मंगलवार को भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर खड़गे से सार्वजनिक माफी मांगने और उनके खिलाफ BNS की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:19:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु में थमा चुनाव प्रचार, 23 अप्रैल को मतदान, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177019/election-campaign-stopped-in-west-bengal-tamil-nadu-strong-arrangements-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद अब कोई भी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार के समर्थन में जनसभा या रैली नहीं कर सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पश्चिम बंगाल की तो यहां इस बार दो चरणों में चुनाव संपन्न कराया जाना है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होना है। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इन मतदाताओं में एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं अपने मत का इस्तेमाल करेंगी। आरक्षण को लेकर बने माहौल के बीच इस बार पश्चिम बंगाल में महिलाओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल में पहले चरण में जहां मतदान होने हैं, उनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल अंचल के पांच जिले शामिल हैं।इनमें मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की 9, जलपाईगुड़ी की 7, अलीपुरद्वार की 5, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की 5, उत्तर दिनाजपुर की 9, दक्षिण दिनाजपुर की 6, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम ब‌र्द्धमान की 9, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झारग्राम की 4, पुरुलिया की 9 और बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु  राज्य में सभी सीटों पर एक चरण में ही चुनाव संपन्न कराया जाना है। 23 अप्रैल को ही सभी 234 सीटों पर मतदान होना है। तमिलनाडु में इस बार 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव में कुल 5.73 करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों की किस्मत लिखेंगे।इस बार चुनाव में सबकी निगाहें अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके पर टिकी हैं, क्योंकि कई सीटों पर उनको लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है, इसलिए चुनाव में उनकी भूमिका काफी अहम हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:08:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विधानसभा चुनाव 2026 का महायुद्ध तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सियासी संघर्ष अपने चरम पर जनादेश का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">विधानसभा चुनाव 2026 के तहत देश के दो बड़े और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।चुनाव प्रचार का लंबा और तीखा दौर समाप्त हो चुका है और अब पूरा ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है 23 अप्रैल को दोनों राज्यों में मतदान होना है जहां तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी और चार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176929/assembly-elections-2026-the-great-war-political-conflict-at-its"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">विधानसभा चुनाव 2026 के तहत देश के दो बड़े और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।चुनाव प्रचार का लंबा और तीखा दौर समाप्त हो चुका है और अब पूरा ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है 23 अप्रैल को दोनों राज्यों में मतदान होना है जहां तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी और चार मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे ।यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है बल्कि यह क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय राजनीति नेतृत्व की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे की भी बड़ी परीक्षा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल इस बार बेहद गर्म और प्रतिस्पर्धी रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग साठ प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी ,जबकि भाजपा ने करीब चालीस प्रतिशत वोट लेकर खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया था। इस बार भी यही दो दल आमने सामने हैं और दोनों ही पूरी ताकत के साथ जीत का दावा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा ने इस बार राज्य में आक्रामक प्रचार किया और भ्रष्टाचार घुसपैठ तथा कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाया वहीं ममता बनर्जी ने क्षेत्रीय अस्मिता विकास और सामाजिक योजनाओं को अपनी ताकत के रूप में पेश किया। उन्होंने भाजपा को बाहरी ताकत बताते हुए बंगाल की पहचान को बचाने की अपील की इस तरह चुनावी मुकाबला केवल नीतियों का नहीं बल्कि पहचान और विचारधारा का भी बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए करीब डेढ़ हजार उम्मीदवार मैदान में हैं और मतदाताओं की संख्या तीन करोड़ से अधिक है ।राज्य में मतदान प्रतिशत पारंपरिक रूप से काफी अधिक रहता है और इस बार भी अस्सी से पचासी प्रतिशत तक मतदान की संभावना जताई जा रही है। अधिक मतदान आमतौर पर राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है इसलिए सभी दलों की नजर मतदान प्रतिशत पर भी टिकी हुई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कई सख्त कदम उठाए हैं ,जिनमें मतदान से पहले रात के समय बाइक चलाने पर रोक भी शामिल है ,ताकि किसी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को रोका जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु की बात करें तो यहां का चुनावी परिदृश्य अलग होते हुए भी उतना ही रोचक और चुनौतीपूर्ण है ।राज्य में लंबे समय से द्रविड़ राजनीति का प्रभाव रहा है और इस बार भी मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कषगम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के बीच माना जा रहा है। सत्ताधारी द्रमुक अपने शासन के दौरान किए गए विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के आधार पर जनता से समर्थन मांग रही है जबकि अन्नाद्रमुक सत्ता विरोधी माहौल को भुनाने की कोशिश कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में लगी है और इस बार उसने कई सीटों पर गंभीरता से चुनाव लड़ा है। हालांकि तमिलनाडु में भाजपा अभी मुख्य मुकाबले में पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई है, लेकिन उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है ।इस चुनाव की एक खास बात अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी का प्रवेश है। जिसने खासकर युवाओं के बीच नई उम्मीद और उत्साह पैदा किया है ।कई सीटों पर यह पार्टी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है, जिससे चुनाव और अधिक दिलचस्प हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में इस बार चार हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं और पांच करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पिछले चुनाव में यहां लगभग सत्तहत्तर प्रतिशत मतदान हुआ था और इस बार भी भारी मतदान की उम्मीद है महिलाओं और युवाओं की भूमिका इस चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है ।द्रमुक ने महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है ।वहीं युवा मतदाता रोजगार और विकास के मुद्दों को लेकर अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कांटे की टक्कर की बात करें तो पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला है जहां दोनों दलों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत कम हो सकता है ।कई सीटों पर परिणाम बेहद करीबी रहने की संभावना है। वाम दल और कांग्रेस भी मैदान में हैं लेकिन उनकी भूमिका सीमित मानी जा रही है।तमिलनाडु में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच सीधी टक्कर है ,लेकिन भाजपा और विजय की पार्टी जैसे अन्य दल भी कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ सकते हैं।जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है यही कारण है कि तमिलनाडु में इस बार परिणाम पूरी तरह से अनुमान के दायरे में नहीं हैं और किसी भी दल के लिए जीत आसान नहीं मानी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार के दौरान दोनों राज्यों में तीखी बयानबाजी देखने को मिली पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चरम पर रहा ।भाजपा ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के आरोप लगाए जबकि ममता बनर्जी ने भाजपा पर राज्य की संस्कृति और पहचान को खतरे में डालने का आरोप लगाया तमिलनाडु में भी राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग जारी रही और नेताओं ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधाअब जब चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है तो जनता के पास शांत वातावरण में निर्णय लेने का अवसर है ।चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रचार थमने के बाद किसी भी प्रकार की रैली या सार्वजनिक गतिविधि पर प्रतिबंध रहेगा ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मत का उपयोग कर सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः चार मई को जब मतगणना होगी तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है और किस दल की रणनीति सफल रही है। यह चुनाव न केवल इन राज्यों की राजनीति को दिशा देगा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि दोनों राज्य देश की राजनीतिक धुरी में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं ।लोकतंत्र के इस महापर्व में अंतिम निर्णय जनता के हाथ में है और वही इस सियासी महासंग्राम का असली विजेता तय करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:12:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अन्तिम मतदाता सूची में शामिल नही हो सका है तो फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में पंजीकृत करा सकते</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिला अधिकारी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अन्तर्गत अन्तिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित कर दी गयी है। उक्त के संबंध में कलेक्टेªट सभागार में बैठक की गयी। बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में कुल मतदाता-1731516 है, जिसमें पुरूष मतदाता-949999 एवं महिला मतदाता-781508 तथा थर्ड जेण्डर मतदाता-9 है। उन्होने बताया कि जनपद का जेण्डर रेशियों 823 तथा ईपी रेशियों 57.73 है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि दावे एवं आपत्तिया प्राप्त करने की अन्तिम तिथि दिनॉक 06 मार्च 2026 की अवधि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175725/if-you-have-not-been-able-to-be-included-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260410-wa0053-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिला अधिकारी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अन्तर्गत अन्तिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित कर दी गयी है। उक्त के संबंध में कलेक्टेªट सभागार में बैठक की गयी। बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में कुल मतदाता-1731516 है, जिसमें पुरूष मतदाता-949999 एवं महिला मतदाता-781508 तथा थर्ड जेण्डर मतदाता-9 है। उन्होने बताया कि जनपद का जेण्डर रेशियों 823 तथा ईपी रेशियों 57.73 है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि दावे एवं आपत्तिया प्राप्त करने की अन्तिम तिथि दिनॉक 06 मार्च 2026 की अवधि तक जनपद में 131053 फार्म-6 प्राप्त हुआ, जिसका शतप्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। उन्होने यह भी बताया कि 31 मार्च 2026 तक जनपद में कुल 134408 फार्म-06 ई-रोल अपडेट किए जा चुके है। उन्होने बताया कि कुल 418146 मतदाताओं को जारी नोटिस की सुनवाई की कार्यवाही जनपद स्तर पर हुयी, जिसमें अन्तिम प्रकाशन हेतु 413491 मतदाताओं को पात्र पाया गया तथा 4655 मतदाताओं को अपात्र पाते हुए फार्म-7 की कार्यवाही की गयी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि डीईओ पोर्टल पर अपलोड अन्तिम प्रकाशित मतदाता सूची का लिंक-<a href="https://basti.nic.in/final-publicotion-voter-list-2026/">https://basti.nic.in/final-publicotion-voter-list-2026/</a>  है। उन्होने यह भी बताया कि यदि जिनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो चुका है और यदि आपका नाम किसी कारणवश अन्तिम मतदाता सूची में शामिल नही हो सका है तो फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में पंजीकृत करा सकते है। बैठक में एडीएम/उप जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान, एसडीएम शत्रुध्न पाठक, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ओम प्रकाश, प्रधान सहायक अजय कुमार पाण्डेय, वरिष्ठ सहायक पीयूष गुप्ता एवं समस्त मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 19:41:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बलरामपुर में एसआईआर ने बदली मतदाताओं की संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर करीब छह माह तक चले विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर के बाद शुक्रवार को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। बलरामपुर में एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नई मतदाता सूची जारी होने के बाद बलरामपुर में विधानसभा का राजनीतिक समीकरण भी बदलेगा। जिले में 4,11,200 मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूची से कट गए है। अभियान में 1,38,928 नए मतदाता जोड़े गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नए वोटरों को जोड़ कर वर्तमान में चारों विधानसभा में 13,10,755 मतदाता बचे हैं। एसआईआर से पहले</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175717/sir-changed-the-number-of-voters-in-balrampur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/0e9cec30-ebd2-11f0-a422-4ba8a094a8fa.jpg.webp" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर करीब छह माह तक चले विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर के बाद शुक्रवार को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। बलरामपुर में एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नई मतदाता सूची जारी होने के बाद बलरामपुर में विधानसभा का राजनीतिक समीकरण भी बदलेगा। जिले में 4,11,200 मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूची से कट गए है। अभियान में 1,38,928 नए मतदाता जोड़े गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नए वोटरों को जोड़ कर वर्तमान में चारों विधानसभा में 13,10,755 मतदाता बचे हैं। एसआईआर से पहले 15,83,027 मतदाता थे। मतदाता सूची में कुल 17.20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक मतदाता विधानसभा बलरामपुर में 87,850 और दूसरे स्थान पर विधानसभा उतरौला में 86,576 मतदाता के नाम सूची से हटे हैं। जिले में वृहद अभियान 166 दिनों तक चला है। सभी बूथों पर 1805 बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर दस्तक देकर मतदाता पुनरीक्षण का कार्य किया है। इसमें 291-तुलसीपुर विधानसभा में पहले 377387 मतदाता थे। 51999 मतदाताओं के नाम सूची से हटने पर 3,25,388 वोटर बचे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गैंसड़ी में 357518 वोटर थे, 45847 के नाम हटाने के बाद 3,11,671 मतदाता बचे हैं। उतरौला में 4,26,213 मतदाता थे, 86576 के नाम कटने के बाद 3,39,637 वोटर बचे हैं। बलरामपुर सदर में 4,21,909 मतदाता थे, 87,850 के नाम कटने से 3,34,059 मतदाता बचे हैं। चारों विधानसभा में अंतिम सूची के प्रकाशन में नए वोटरों को शामिल करने पर यह संख्या है।जिला निर्वाचन अधिकारी विपिन कुमार जैन ने कहा कि मतदाताओं के नाम कटने का मुख्य कारण डुप्लीकेशन (दोहराव) का विलोपन तथा ऐसे निवासियों के नाम हटाना है, जो अब जनपद में निवास नहीं कर रहे हैं। इससे मतदाता सूची अब पहले से अधिक शुद्ध और वास्तविक हो गई है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175717/sir-changed-the-number-of-voters-in-balrampur</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 19:21:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रिकॉर्ड मतदान, बदलता भारत — लोकतंत्र अब जनता की मुट्ठी में</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी इतिहास शोर से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतारों में खड़ी खामोश भीड़ के संकल्प से लिखा जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा ही दिन था। असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल और पुडुचेरी में भोर से पहले ही मतदान केंद्रों के बाहर जनसैलाब उमड़ पड़ा। कहीं भीगे हाथों में छाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं तपती सुबह से पहले ही चेहरों पर जिद चमक रही थी। कोई कांपते कदमों और झुकी कमर के साथ पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई पहली बार वोट देने का उत्साह आंखों में लिए खड़ा था। चेहरे अलग थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषाएं अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिस्थितियां अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबको एक ही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175691/record-turnout-is-changing-india-%E2%80%93-democracy-now-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी इतिहास शोर से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतारों में खड़ी खामोश भीड़ के संकल्प से लिखा जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा ही दिन था। असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल और पुडुचेरी में भोर से पहले ही मतदान केंद्रों के बाहर जनसैलाब उमड़ पड़ा। कहीं भीगे हाथों में छाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं तपती सुबह से पहले ही चेहरों पर जिद चमक रही थी। कोई कांपते कदमों और झुकी कमर के साथ पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई पहली बार वोट देने का उत्साह आंखों में लिए खड़ा था। चेहरे अलग थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषाएं अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिस्थितियां अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबको एक ही विश्वास जोड़ रहा था—लोकतंत्र को और मजबूत करने का विश्वास। शाम तक आंकड़ों ने बता दिया कि जनता ने केवल मतदान नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लोकतंत्र के पक्ष में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चुनाव आयोग के अनुसार मतदान समाप्ति से एक घंटे पहले (शाम </span>5 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे तक) के आंकड़े चौंकाने वाले ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लोकतंत्र की नई ताकत का ऐलान करने वाले हैं—असम में </span>84.42 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में </span>75.01 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत और पुडुचेरी में </span>86.92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान। ये केवल संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस जागते भारत की तस्वीर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब राजनीति को दूर से देखना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे अपनी मुट्ठी में लेना चाहता है। लगभग </span>5.3 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ मतदाताओं की इस भागीदारी ने साफ कर दिया कि जनता अब भाषणों और नारों के पीछे चलने वाली भीड़ नहीं रही। वह सवाल करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब मांगती है और अपने वोट से बता रही है कि सत्ता का असली मालिक नागरिक है। यही वजह है कि ये चुनाव केवल तीन राज्यों की घटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक भविष्य की दिशा बन गए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असम में इस बार का चुनाव कई अर्थों में ऐतिहासिक रहा। </span>126 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों वाले राज्य में </span>84.42 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। </span>2023 <span lang="hi" xml:lang="hi">के परिसीमन के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच यह पहला चुनाव था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए लोगों की भागीदारी भी बढ़ी। भाजपा-एनडीए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सत्ता बचाने में जुटा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कांग्रेस और अन्य दल वापसी की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि मतदाता दलों से अधिक अपने मुद्दों पर केंद्रित दिखा। भूमि अधिकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और विकास जैसे सवाल लोगों को बूथ तक ले आए। डलगांव जैसे क्षेत्रों में </span>94 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक मतदान ने बता दिया कि असम अब केवल सरकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपना भविष्य चुन रहा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असम की जनता ने इस बार केवल वोट नहीं डाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपनी राजनीतिक चेतना भी दिखा दी। पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घुसपैठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमाई तनाव और अवसरों की कमी से लंबे समय तक जूझते रहे इस राज्य ने साफ कर दिया कि अब उसे केवल वादे नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठोस जवाब चाहिए। गांवों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहाड़ी इलाकों और सीमा से लगे क्षेत्रों में जिस तरह महिलाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्ग और युवा मतदान के लिए निकले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने साबित कर दिया कि लोकतंत्र की ताकत शहरों तक सीमित नहीं है। असम ने यह भी दिखाया कि पूर्वोत्तर अब राष्ट्रीय राजनीति का किनारा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसकी दिशा तय करने वाली मजबूत आवाज बन चुका है। वहां की जनता ने बता दिया कि लोकतंत्र सबसे मजबूत तब होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सबसे दूर बैठा नागरिक भी अपने वोट की कीमत समझने लगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में तस्वीर अलग थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संदेश उतना ही मजबूत। </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर हुए चुनाव में </span>75.01 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। यह आंकड़ा असम और पुडुचेरी से कम जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक केरल में यह भागीदारी अपने आप में असाधारण है। एलडीएफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूडीएफ और भाजपा गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबले ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया। पलक्कड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोझीकोड और कई जिलों में </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत के आसपास मतदान हुआ। स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण और महंगाई जैसे मुद्दों पर जनता ने खुलकर अपनी राय दी। यहां मतदाता केवल दल नहीं देखता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनके काम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों और भविष्य की दिशा को भी परखता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केरल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वहां लोकतंत्र केवल प्रक्रिया नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक संस्कृति बन चुका है। बारिश के बावजूद बूथों पर लगी लंबी कतारों ने बता दिया कि यहां का नागरिक मतदान को अधिकार से अधिक कर्तव्य मानता है। बड़ी संख्या में महिलाएं और पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदान के लिए पहुंचे। युवाओं ने बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी शिक्षा और बेहतर अवसरों के सवाल उठाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि महिलाओं ने स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी। केरल के मतदाता ने साफ कर दिया कि अब राजनीति केवल विचारधारा तक सीमित नहीं रहेगी। जनता का विश्वास उसी दल को मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन चुनावों में अगर किसी ने पूरे देश को सबसे ज्यादा चौंकाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह पुडुचेरी था। केवल </span>9.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख मतदाताओं वाले इस छोटे केंद्र शासित प्रदेश में </span>86.92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान ने लोकतंत्र की नई मिसाल कायम कर दी। </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों वाले पुडुचेरी में एनडीए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस-डीएमके गठबंधन और अन्य दलों के बीच मुकाबला था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबसे बड़ी जीत जनता की भागीदारी की रही। कराईकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुडुचेरी और आसपास के इलाकों में सुबह से शाम तक मतदान केंद्रों पर भीड़ उमड़ी रही। स्थानीय रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी सुविधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और स्वायत्तता जैसे मुद्दों ने लोगों को बूथ तक पहुंचाया। इस छोटे प्रदेश ने पूरे देश को बता दिया कि लोकतंत्र की ताकत आबादी से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिकों की जागरूकता से तय होती है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल और पुडुचेरी के चुनावों ने भारत को एक बड़ा संदेश दिया है। चुनाव आयोग की तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कड़ी सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईवीएम पर बढ़ा भरोसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अभियान और सोशल मीडिया से बढ़ी जागरूकता ने मतदान को जन-आंदोलन बना दिया। लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि भारत का मतदाता अब बदल चुका है। वह चुप रहने वाला नागरिक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य के प्रति सजग प्रहरी बन गया है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई को नतीजे आएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारें बनेंगी और समीकरण बदलेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इन चुनावों की सबसे बड़ी जीत पहले ही सामने आ चुकी है। वह जीत है जनता का यह विश्वास कि उसकी उंगली पर लगी स्याही केवल निशान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175691/record-turnout-is-changing-india-%E2%80%93-democracy-now-in-the</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:12:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बंगाल चुनाव: 'यहां से दफा हो जाओ', टीएमसी नेताओं से चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175582/bengal-elections-get-lost-from-here-tmc-leaders-make-serious"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/vkfbk1c5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन उनमें से किसी का भी न तो जवाब दिया गया और न ही कोई संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में गंभीर मामला है, क्योंकि एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चिट्ठियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ओ’ब्रायन के मुताबिक, बैठक सुबह करीब 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू हुई और 7-8 मिनट में ही खत्म हो गई। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनका संबंध भारतीय जनता पार्टी से है। उन्होंने ऐसे 6 उदाहरण चुनाव आयोग के सामने रखे और कहा कि इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्तियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर इस तरह के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव हो पाएंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने ये मुद्दे उठाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें बीच में रोक दिया और कथित तौर पर "यहां से निकल जाओ" कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अपने 22 साल के राजनीतिक करियर और 16 साल के संसदीय अनुभव में उन्होंने कभी भी किसी संवैधानिक संस्था के साथ ऐसी स्थिति नहीं देखी। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग के पास बैठक का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि सच सामने आ सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका प्रतिनिधिमंडल बाहर निकल रहा था, तब उनके एक सहयोगी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई दी कि वे भारत के इतिहास में पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनके खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में हटाने के नोटिस दिए गए हैं।ओ’ब्रायन ने आगे बताया कि इस मुद्दे को लेकर सभी विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब वे बैठक में पहुंचे, तो शुरुआत में ही यह कहा गया कि उनका प्रतिनिधिमंडल अधिकृत नहीं है, जबकि वे पूरी तरह अधिकृत होकर गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने मुद्दे रखने शुरू किए, तो उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया गया।ओ’ब्रायन ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता बेहद जरूरी है और अगर इस पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चिंता की बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शंकराचार्य के अपमान से बुद्धिजीवी लोग भाजपा को सबक सिखाना चाहते हैं - अखिलेश यादव </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि पूजनीय शंकराचार्य जी का जबसे अपमान हुआ है, बहुत सारे बुद्धिजीवी लोग भारतीय जनता पार्टी को सबक सिखाना चाहते हैं, उस दिशा में कोई भी हमारा साथ देगा तो हम लोग उसका साथ देंगे। अखिलेश यादव आज कानपुर के नौबस्ता गल्ला मंडी में स्व. रंजन सिंह यादव उर्फ लाला पहलवान के यहां श्रद्धांजलि एवं शोक संवेदना प्रकट करने आए थे।</p>
<div style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने पत्रकारों से कहा कि जैसे बीबीसी संस्था चलती है वैसे पत्रकारों की संस्था बनाने का काम करेंगे जिले जिले में, जिससे आप किसी पर निर्भर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175528/intellectuals-want-to-teach-a-lesson-to-bjp-by-insulting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001810442.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि पूजनीय शंकराचार्य जी का जबसे अपमान हुआ है, बहुत सारे बुद्धिजीवी लोग भारतीय जनता पार्टी को सबक सिखाना चाहते हैं, उस दिशा में कोई भी हमारा साथ देगा तो हम लोग उसका साथ देंगे। अखिलेश यादव आज कानपुर के नौबस्ता गल्ला मंडी में स्व. रंजन सिंह यादव उर्फ लाला पहलवान के यहां श्रद्धांजलि एवं शोक संवेदना प्रकट करने आए थे।</p>
<div style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने पत्रकारों से कहा कि जैसे बीबीसी संस्था चलती है वैसे पत्रकारों की संस्था बनाने का काम करेंगे जिले जिले में, जिससे आप किसी पर निर्भर न हो, आप स्वतंत्र रहो। उन्होंने कहा कि "मुख्यमंत्री जी अपने ही संसद का मजाक उड़ा रहे हैं। अभी तक तो पता था कि वनस्पति से स्ट्रेस हटाते हैं लेकिन अब पता चला उनके सांसद ही उनका स्ट्रेस दूर करते हैं।"</div>
<div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन रहित होगा तो न्याय होगा। इलेक्शन कमिशन भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है। कानपुर के किडनी कांड पर चर्चा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि"अभी कुछ दिन पहले कोडीन भाई आए थे कालीन भाई के बाद, अब सुनने में आया है किडनी भाई। कहीं ऐसा न हो ओटीटी पर गांजा गंज भी बन जाए।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमारी विदेश नीति चौपट कर दी है। एक बार को लग रहा था भारत विश्व गुरु होगा लेकिन इधर पाकिस्तान अपनी फॉरेन पॉलिसी को मजबूत कर रहा है।"जो जोश और उत्साह दिखाई दे रहा है यह बता रहा है कि जनता बदलाव चाहती है। बदलाव के साथ-साथ बुरे दिन जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि"गरीब को न ही इलाज मिल रहा है न समय पर इलाज मिल रहा है, उसका परिणाम है कि उन्हें दर दर भटकना पड़ रहा है। समाजवादी सरकार आएगी तो उनका फ्री इलाज होगा।"PDA से घबराकर बीजेपी वालों को समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">PDA के लोग एकजुट हो गए हैं, अधिकार और सम्मान मांग रहे हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि बाबा साहब की प्रतिमाओं को सबसे ज्यादा किसी ने तोड़ा तो बीजेपी ने।"PDA प्रहरी ने एक व्यक्ति पकड़ा जिसका वोट बीजेपी के लोग कटवा रहे थे। बीजेपी के लोगों ने दस्तखत न करने वाले से नकली दस्तखत करवाए, लेकिन इलेक्शन कमीशन ने कोई भी कार्रवाई नहीं करी।"शिक्षामित्रों को कोई भी न्याय दिला सकता है तो समाजवादी लोग हैं।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में जो फिल्म बनी थी एक वो रिलीज होने से पहले ही फ्लॉप हो गई। अब एक नए किरदार आए हैं धुआं-धर, हर दिन उत्तर प्रदेश में गांजा पकड़ा जा रहा है। सड़कों पर गड्ढों पर चर्चा करते हुए अखिलेश ने कहा कि"जब मुख्यमंत्री जी खुद ही इंजीनियर बन जाएंगे, जब सरकार ही कमीशन लेगी तो सड़क की गुणवत्ता कैसे रहेगी।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 19:15:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांच राज्यों के चुनाव में कानून व्यवस्था सबसे बड़ी कसौटी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174550/law-and-order-is-the-biggest-criterion-in-the-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_20260325_1748291.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि राज्य में प्रशासनिक तंत्र निष्पक्ष नहीं है और मतदाताओं को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। इन आरोपों के बाद मामला भारत निर्वाचन आयोग तक पहुंच चुका है। यह स्थिति कानून व्यवस्था की दृष्टि से चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि जब सत्तारूढ़ दल पर ही इस प्रकार के आरोप लगते हैं तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया है। राज्य में पहले भी चुनावों के दौरान हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बार भी पूरक मतदाता सूची को लेकर असमंजस और लाखों नामों पर विचाराधीन स्थिति ने प्रशासनिक चुनौती को और बढ़ा दिया है। स्पष्ट है कि बंगाल में कानून व्यवस्था चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और इसे संभालना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर के राज्य असम में भी स्थिति पूरी तरह शांत नहीं कही जा सकती। यहां कांग्रेस और एआईयूडीएफ कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की घटना सामने आई है, जिसने चुनावी माहौल में तनाव का संकेत दिया है। यह घटना दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कभी-कभी टकराव का रूप ले लेती है। हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ पक्ष लगातार यह दावा कर रहा है कि कानून व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाएं चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में स्थिति अपेक्षाकृत शांत दिखती है, लेकिन यहां भी राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हैं। नामांकन, रैलियां और जनसंपर्क कार्यक्रमों के बीच प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कहीं भी अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बने। विभिन्न दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी जरूर तेज है, परंतु अभी तक बड़े स्तर पर हिंसक घटनाओं की खबर नहीं है। यह राज्य परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण चुनावों के लिए जाना जाता है, लेकिन सतर्कता यहां भी जरूरी है क्योंकि चुनावी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दक्षिण भारत के ही केरल में चुनावी प्रक्रिया एक अलग ही स्वरूप में नजर आती है। यहां राजनीतिक चेतना उच्च स्तर की मानी जाती है और मतदाता सक्रिय रूप से भागीदारी करते हैं। इस बार भी बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा शुरू की गई है, जो लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि यहां प्रत्यक्ष हिंसा की घटनाएं कम देखने को मिलती हैं, फिर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और वैचारिक टकराव लगातार जारी रहता है। कानून व्यवस्था की दृष्टि से राज्य अपेक्षाकृत संतुलित नजर आता है, लेकिन प्रशासन को पूरी सतर्कता बनाए रखनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां सीमित दायरे में होती हैं, लेकिन यहां भी राजनीतिक समीकरण काफी जटिल होते हैं। छोटे क्षेत्रफल के बावजूद यहां गठबंधन राजनीति का प्रभाव अधिक है। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है, क्योंकि छोटी घटनाएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। हालांकि अब तक यहां से किसी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं है, लेकिन चुनावी माहौल को देखते हुए सावधानी आवश्यक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन पांचों राज्यों की स्थिति का समग्र विश्लेषण यह बताता है कि जहां एक ओर लोकतंत्र का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है। चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं होते, बल्कि यह जनता के विश्वास और प्रशासन की निष्पक्षता की भी परीक्षा होते हैं। यदि मतदाता भयमुक्त होकर मतदान नहीं कर पाएंगे तो चुनाव का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीतिक दलों को भी यह समझना होगा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। प्रशासन और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका इस समय सबसे अहम हो जाती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि इन चुनावों में जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा है। कानून व्यवस्था की स्थिति ही तय करेगी कि यह चुनाव लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनेंगे या फिर अव्यवस्था की मिसाल। देश की नजरें इन पांच राज्यों पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:43:39 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों की ‘मनी पावर’ पर रोक लगाने की याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने 26 फरवरी को राजनीतिक दलों द्वारा अनियंत्रित चुनावी खर्च को चुनौती देने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा.मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह नोटिस जारी किया. पीठ ने कहा कि यह मामला जटिल संवैधानिक सवाल उठाता है और छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि राजनीतिक दलों द्वारा ‘मनी पावर’ का बेलगाम इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172131/supreme-court-seeks-response-from-election-commission-on-petition-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/सुप्रीम-कोर्ट-ने-राजनीतिक-दलों-की-‘मनी-पावर’-पर-रोक-लगाने-की-याचिका-पर-चुनाव-आयोग-से-जवाब-मांगा.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने 26 फरवरी को राजनीतिक दलों द्वारा अनियंत्रित चुनावी खर्च को चुनौती देने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा.मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह नोटिस जारी किया. पीठ ने कहा कि यह मामला जटिल संवैधानिक सवाल उठाता है और छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि राजनीतिक दलों द्वारा ‘मनी पावर’ का बेलगाम इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मूल भावना पर आघात करता है.सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने अन्य देशों में चुनावी खर्च की सीमाओं का उल्लेख करते हुए ऐसे नियामक उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए.उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में भी खर्च पर सीमाएं हैं, लेकिन उम्मीदवारों के मित्रों का क्या?’ उन्होंने आगे संभावित संवैधानिक चिंताओं को भी उठाया, यह सवाल करते हुए कि क्या खर्च पर रोक लगाने से संविधान के आर्टिकल 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भौतिक सहयोग के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके जवाब में भूषण ने चुनावी बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत पहले ही अनियंत्रित राजनीतिक फंडिंग के लोकतंत्र पर पड़ने वाले विकृत प्रभाव को स्वीकार कर चुकी है.राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च पर सीमा तय करने की मांग वाली इसी तरह की एक याचिका, जिसे एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने दायर किया था, जनवरी 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट से वापस ले ली गई थी, ताकि नई याचिका दाखिल की जा सके.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा चुनावी बॉन्ड योजना को सर्वसम्मति से रद्द किए जाने के बाद वर्तमान याचिका का महत्व और बढ़ गया है.15 फरवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से चुनावी बॉन्ड योजना को ‘असंवैधानिक’ करार दिया था. शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था कि यह योजना राजनीतिक दलों को मिलने वाली फंडिंग का खुलासा करने में विफल रहने के कारण संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करती है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके परिणामस्वरूप, सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी अधिनियम, आयकर अधिनियम और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में चुनावी बॉन्ड से संबंधित प्रावधानों को भी अमान्य कर दिया था. इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने चुनावी बॉन्ड के खरीदारों और प्राप्तकर्ताओं की जानकारी भी सार्वजनिक करने का आदेश दिया था.</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:47:04 +0530</pubDate>
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