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                <title>Election Commission India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Election Commission India RSS Feed</description>
                
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                <title>असम-बंगाल में जनादेश की ‘चोरी’ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के "मिशन" के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बात कांग्रेस के "कुछ लोगों" और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">BJP पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसने असम में जीत की हैट्रिक लगाई है। राहुल गांधी ने 'एक्स'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178299/%E2%80%98theft%E2%80%99-of-mandate-in-assam-bengal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/pti04-18-2026-000263b-0_1776846837575_1776846860705_1776848940508.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के "मिशन" के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बात कांग्रेस के "कुछ लोगों" और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">BJP पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसने असम में जीत की हैट्रिक लगाई है। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कांग्रेस में कुछ लोग और अन्य लोग टीएमसी की हार पर खुश हो रहे हैं। उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझने की जरूरत है कि असम और बंगाल के जनादेश की चोरी भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने के अपने मिशन में भाजपा का एक बड़ा कदम है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "क्षुद्र राजनीति को किनारे रखें, यह किसी एक पार्टी या दूसरी पार्टी के बारे में नहीं है, यह भारत के बारे में है।"पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया था कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 100 सीटों की "लूट की है।"राहुल गांधी ने उनके दावे का समर्थन किया था और आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग की मदद से BJP ने असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव की चोरी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 23:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>“परिणाम चाहे जो हों, विजय लोकतंत्र की ही होगी”</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त उत्सव होते हैं। कल पांच राज्यों के चुनाव परिणाम घोषित होने जा रहे हैं। यह परिणाम किसी एक दल, नेता या गठबंधन के पक्ष या विपक्ष में जा सकते हैं, लेकिन एक सत्य अटल है। इन परिणामों के साथ जीत होगी भारत के लोकतंत्र की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र ऐसे ही नहीं कहा जाता।उसकी विशेषता है जनता की भागीदारी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया, तथा संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता। चुनाव</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178090/%E2%80%9Cwhatever-the-results-democracy-will-prevail%E2%80%9D"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त उत्सव होते हैं। कल पांच राज्यों के चुनाव परिणाम घोषित होने जा रहे हैं। यह परिणाम किसी एक दल, नेता या गठबंधन के पक्ष या विपक्ष में जा सकते हैं, लेकिन एक सत्य अटल है। इन परिणामों के साथ जीत होगी भारत के लोकतंत्र की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र ऐसे ही नहीं कहा जाता।उसकी विशेषता है जनता की भागीदारी, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया, तथा संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता। चुनाव आयोग,लोकल और केन्द्रीय सुरक्षा बल जैसे संस्थान इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सत्य तो यह है कि हर मतदाता जब अपने मताधिकार का प्रयोग करता है, तब वह केवल एक प्रतिनिधि नहीं चुनता, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव परिणामों के दिन अक्सर राजनीतिक दलों के लिए जीत-हार का लेखा-जोखा होता है। विजयी दल इसे जनादेश का सम्मान मानते हैं, जबकि पराजित दल आत्ममंथन करते हैं। परंतु इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जनता का विश्वास चुनाव प्रणाली में बना रहता है। यही विश्वास लोकतंत्र की असली पूंजी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक हैं। अलग-अलग विचारधाराओं, भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों के लोग एक ही प्रक्रिया में भाग लेते हैं और अपने मत से देश की दिशा तय करते हैं। यह विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी उल्लेखनीय है कि भारत में सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से होता है। यह परिपक्व लोकतंत्र की पहचान है। दुनिया के कई देशों में जहां चुनाव हिंसा में और अस्थिरता का कारण बनते हैं, वहीं भारत में यह प्रक्रिया एक उत्सव के रूप में देखी जाती है, छुट-पुट अप्रिय घटनाओं को छोड़कर।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, लोकतंत्र की यह सफलता केवल संस्थाओं या नेताओं की देन नहीं है। इसके मूल में है जागरूक और जिम्मेदार नागरिक। जब मतदाता जाति, धर्म, या अल्पकालिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में मतदान करता है, तब लोकतंत्र और अधिक सशक्त होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि हम चुनाव परिणामों को केवल जीत-हार के नजरिए से न देखें, बल्कि इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनः पुष्टि के रूप में स्वीकार करें। विजयी दलों को चाहिए कि वे जनादेश का सम्मान करते हुए जनकल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दें, और विपक्ष को चाहिए कि वह रचनात्मक भूमिका निभाते हुए लोकतंत्र को संतुलित बनाए रखे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, चुनाव परिणाम चाहे जो भी हों, भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और उसकी संस्थाओं की मजबूती ही सबसे बड़ी जीत है। यही वह शक्ति है जो भारत को विश्व में एक सशक्त, स्थिर और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में स्थापित करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निष्कर्षतः चार मई को जब परिणाम आएंगे, तब किसी दल की जीत और किसी की हार होगी, लेकिन सच्ची विजय उस विश्वास की होगी, जो करोड़ों भारतीयों ने अपने मत के माध्यम से लोकतंत्र में व्यक्त किया है। राजनैतिक दलों को भी सभी गिले शिकवे छोड़कर चुनाव परिणाम का सम्मान करना चाहिए।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 17:03:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वोट काउंटिंग के दौरान राज्य का नॉमिनी मौजूद रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177974/west-bengal-election-commission-told-supreme-court-that-the-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/ah2nk1so_supreme-court_625x300_26_january_25.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की बेंच पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र के तौर पर सिर्फ़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात करने के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने नायडू की यह बात रिकॉर्ड की। कि ECI उसके सर्कुलर का पूरी तरह पालन करेगा। इसलिए, उसने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ TMC की अपील पर कोई भी आदेश देने से मना कर दिया।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "SLP में आगे किसी आदेश की ज़रूरत नहीं है। हम मिस्टर नायडू की बात रिकॉर्ड करते हैं कि ECI के सर्कुलर का पूरी तरह से पालन किया जाए।मामले की आज अर्जेंट सुनवाई हुई क्योंकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने गुरुवार को याचिका खारिज कर दी थी।हाई कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट को राज्य सरकार या केंद्र सरकार से नियुक्त करना इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाई कोर्ट ने कहा, "इस कोर्ट को राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय PSU कर्मचारी से काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट नियुक्त करने में कोई गैर-कानूनी बात नहीं लगती।"इसने आगे कहा कि अगर TMC को लगता है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी BJP उम्मीदवारों का पक्ष ले रहे हैं, तो वह बाद में नतीजों को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर कर सकती है।इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 22:41:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आज़ाद भारत का सर्वाधिक मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के चौथे सबसे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर अब सबकी निगाहें चार मई को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। बिहार से शुरू हुए मतदाता सूची के शुद्धिकरण (पुनरीक्षण) के बाद वहां हुई बंपर वोटिंग ने मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया था। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177669/highest-voter-turnout-of-independent-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(2)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के चौथे सबसे बड़े राज्य पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान सम्पन्न होने के साथ ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों पर अब सबकी निगाहें चार मई को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं। बिहार से शुरू हुए मतदाता सूची के शुद्धिकरण (पुनरीक्षण) के बाद वहां हुई बंपर वोटिंग ने मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया था। इसी क्रम में चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में हजारों-लाखों मतदाता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न कर पाने के कारण सूची से बाहर हुए। इसके बावजूद इन पांचों राज्यों में रिकॉर्ड मतदान हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोकतांत्रिक चेतना और नागरिक सहभागिता का मजबूत संकेत है। यह स्थिति राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने वाली है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में इस बार लगभग </span>92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान दर्ज होना अपने आप में ऐतिहासिक है। यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जनादेश का सेहरा किसके सिर बंधता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता के बाद से पश्चिम बंगाल में कभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं बनी। यहां कांग्रेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वामपंथी दलों और पिछले डेढ़ दशक से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। इस बार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके परिणाम राज्य ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि भाजपा इस चुनाव में सफलता प्राप्त करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह उसके लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी और विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में लौटती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की सबसे मजबूत नेता के रूप में उभर सकती हैं। यह भी विचारणीय है कि बढ़ता मतदान प्रतिशत कहीं न कहीं मतदाताओं के बढ़ते विश्वास और लोकतंत्र में उनकी आस्था को दर्शाता है। चाहे इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक छवि और नेतृत्व का प्रभाव हो या स्थानीय मुद्दों की भूमिका एक बात स्पष्ट है कि देश का मतदाता अब पहले से अधिक जागरूक और सक्रिय हो चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">                                                                                                                                  <strong><span lang="hi" xml:lang="hi">                                   अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:16:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर हमला और चुनावी प्रक्रिया की साख पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी परिदृश्य ने एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जिस प्रक्रिया को संविधान ने जनता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति का माध्यम माना है, उसी प्रक्रिया के दौरान हिंसा, मारपीट, डराने-धमकाने और चुनावी मशीनों से छेड़छाड़ जैसे आरोप सामने आना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। हाल के घटनाक्रमों में भाजपा कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों पर हमले, बूथों पर तनाव और ईवीएम के साथ कथित छेड़छाड़ की खबरें इस बात का संकेत देती हैं कि चुनाव केवल मतदान का कार्य नहीं रह गया है बल्कि शक्ति प्रदर्शन का माध्यम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177582/attack-on-democracy-in-west-bengal-and-questions-on-credibility"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas19.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी परिदृश्य ने एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जिस प्रक्रिया को संविधान ने जनता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति का माध्यम माना है, उसी प्रक्रिया के दौरान हिंसा, मारपीट, डराने-धमकाने और चुनावी मशीनों से छेड़छाड़ जैसे आरोप सामने आना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। हाल के घटनाक्रमों में भाजपा कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों पर हमले, बूथों पर तनाव और ईवीएम के साथ कथित छेड़छाड़ की खबरें इस बात का संकेत देती हैं कि चुनाव केवल मतदान का कार्य नहीं रह गया है बल्कि शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनता जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन घटनाओं के केंद्र में राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा तो है ही, लेकिन उससे भी अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या मतदाता वास्तव में बिना भय के अपना मताधिकार इस्तेमाल कर पा रहा है। भाजपा के कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों पर हिंसा फैलाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह स्थिति केवल राजनीतिक टकराव नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से बूथ स्तर पर एजेंटों को निशाना बनाया गया, उम्मीदवारों की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और खुलेआम मारपीट हुई, वह यह दर्शाता है कि कानून और व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतंत्र का मूल सिद्धांत यह है कि हर नागरिक बिना किसी दबाव के अपने मत का प्रयोग करे। लेकिन जब किसी पोलिंग एजेंट को घायल कर दिया जाता है या किसी उम्मीदवार को मतदान केंद्र के आसपास घेर लिया जाता है, तो यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर आघात है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे गंभीर आरोप ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ को लेकर सामने आए हैं। यदि किसी भी मतदान केंद्र पर किसी विशेष पार्टी के चुनाव चिन्ह के सामने टेप लगाया जाता है, तो यह केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि मतदाता की स्वतंत्रता को बाधित करने का प्रयास माना जाएगा। इस प्रकार की घटनाएं लोकतंत्र की आत्मा के विपरीत हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कहा है कि जहां भी ऐसी शिकायतें सही पाई जाएंगी, वहां पुनर्मतदान कराया जाएगा। यह कदम आवश्यक है, लेकिन इससे यह सवाल भी उठता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न ही क्यों हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीतिक बयानबाजी भी इस पूरे माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना रही है। ममता बानर के नेतृत्व वाली सरकार पर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराना संभव नहीं हो पा रहा है। वहीं सत्ताधारी दल इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताकर खारिज करता है। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली मुद्दा कहीं पीछे छूट जाता है, जो है आम मतदाता की सुरक्षा और स्वतंत्रता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं होता, बल्कि यह जनता के विश्वास का प्रतीक होता है। यदि इस प्रक्रिया में हिंसा और डर का माहौल हावी हो जाए, तो यह विश्वास कमजोर पड़ने लगता है। पश्चिम बंगाल में सामने आई घटनाएं यह संकेत देती हैं कि राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। किसी भी दल की जीत या हार से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी ध्यान देने योग्य है कि लोकतंत्र केवल संस्थाओं से नहीं चलता, बल्कि उसमें भाग लेने वाले सभी पक्षों की जिम्मेदारी होती है। राजनीतिक दलों, प्रशासन, सुरक्षा बलों और मतदाताओं सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होता है कि चुनाव एक उत्सव की तरह संपन्न हो, न कि संघर्ष के मैदान की तरह। जब कार्यकर्ता हिंसा का सहारा लेते हैं, तो वे अपने ही लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीतिक संस्कृति लंबे समय से संघर्ष और प्रतिस्पर्धा से भरी रही है। लेकिन आधुनिक लोकतंत्र में इस प्रकार की हिंसात्मक प्रवृत्तियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर यह साबित होता है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर हिंसा या तकनीकी छेड़छाड़ की गई, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है। केवल पुनर्मतदान कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषियों को सजा देना भी उतना ही जरूरी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू है जनता का भरोसा। जब लोग यह सुनते हैं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई या किसी पार्टी के कार्यकर्ताओं को मतदान से रोका गया, तो उनके मन में संदेह उत्पन्न होता है। यह संदेह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यदि जनता का विश्वास ही डगमगा जाए, तो चुनाव का महत्व कम हो जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसलिए आवश्यक है कि सभी पक्ष संयम बरतें और चुनाव आयोग को पूरी स्वतंत्रता और सहयोग दिया जाए। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त किया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके। साथ ही राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश देना चाहिए कि वे कानून का पालन करें और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः यह समझना होगा कि लोकतंत्र केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है। पश्चिम बंगाल में जो घटनाएं सामने आई हैं, वे केवल एक राज्य का मामला नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चेतावनी हैं। यदि हम इन घटनाओं से सबक नहीं लेते, तो भविष्य में ऐसी परिस्थितियां और अधिक गंभीर हो सकती हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोकतंत्र की रक्षा केवल कानून से नहीं बल्कि आचरण से होती है। जब तक राजनीतिक दल अपने व्यवहार में सुधार नहीं लाते और हिंसा से दूरी नहीं बनाते, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। अब समय आ गया है कि चुनाव को संघर्ष नहीं बल्कि विश्वास और सहभागिता का माध्यम बनाया जाए, ताकि भारत का लोकतंत्र और अधिक मजबूत बन सके।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कान्तिलाल मांडोत</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:25:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आचार संहिता: ईसी ने पीएम के बयान की जाँच की बात कही तो बीजेपी खड़गे के पीछे पड़ी!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> पीएम मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों की ईसीआई की जाँच की ख़बर आने के बीच ही बीजेपी ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री खड़गे के ख़िलाफ़ शिकायत करने ईसीआई पहुँच गए। इस बीच, ममता बनर्जी ने भी बंगाल में बीजेपी पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कई राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी एमसीसी तोड़ने का आरोप लगा रही हैं। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष की शिकायत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177025/when-ec-asked-to-investigate-pms-statement-bjp-went-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/69e76d9fabede-bjp-demands-apology-from-kharge-212914289-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> पीएम मोदी के देश के नाम संबोधन के बाद चुनावी आचार संहिता उल्लंघन के आरोपों की ईसीआई की जाँच की ख़बर आने के बीच ही बीजेपी ने अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। मोदी सरकार के बड़े-बड़े मंत्री खड़गे के ख़िलाफ़ शिकायत करने ईसीआई पहुँच गए। इस बीच, ममता बनर्जी ने भी बंगाल में बीजेपी पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट यानी एमसीसी तोड़ने का आरोप लगा रही हैं। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष की शिकायत की जांच करने का फैसला किया है। विपक्ष की शिकायत के बाद आयोग ने यह निर्णय लिया है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह संबोधन चुनाव के बीच मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्षी नेताओं, वामपंथी पार्टियों और क़रीब 700 एक्टिविस्टों व आम नागरिकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने सरकारी प्रसारक दूरदर्शन और आकाशवाणी का इस्तेमाल करके चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की।सीपीआई (एम) के महासचिव एम ए बेबी ने लिखा कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन चुनाव वाले राज्यों में जनमत प्रभावित करने वाला था। इससे चुनाव में बराबरी का मौका नहीं मिलता और लोकतंत्र की नींव हिल जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस शिकायत की जाँच मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट डिवीजन करेगा। बता दें कि मॉडल कोड 15 मार्च से लागू है और 4 मई तक रहेगा, जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती होगी।दूसरी ओर, बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। बुधवार को तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह शामिल थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निर्मला सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने तमिलनाडु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री को 'आतंकवादी' कहा, जो बहुत गलत और निंदनीय है। यह पूरे देश के लोगों के दिए गए जनादेश का अपमान है। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस हार के डर से निराश होकर ऐसा बोल रही है। बीजेपी ने मांग की कि खड़गे और कांग्रेस देश से माफी मांगें। किरेन रिजिजू ने इसे 'घृणित कृत्य' बताया और कहा कि चुनाव आयोग को इतनी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए कि आगे कोई प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहने की हिम्मत न करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खड़गे ने चेन्नई में कहा था कि मोदी लोकतंत्र को आतंकित कर रहे हैं, एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। बाद में उन्होंने सफाई दी थी कि उन्होंने शाब्दिक रूप से 'आतंकवादी' नहीं कहा, बल्कि उनका मतलब था कि वह 'आतंकित कर रहे हैं'। खड़गे ने कहा, 'वे लोगों और राजनीतिक पार्टियों को आतंकित (terrorise) कर रहे हैं। मैंने कभी यह नहीं कहा कि वे शाब्दिक रूप से आतंकवादी हैं।' उन्होंने जोड़ा कि मोदी सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबा रही है। बीजेपी ने मंगलवार को भी चुनाव आयोग को पत्र लिखकर खड़गे से सार्वजनिक माफी मांगने और उनके खिलाफ BNS की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:19:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल-तमिलनाडु में थमा चुनाव प्रचार, 23 अप्रैल को मतदान, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177019/election-campaign-stopped-in-west-bengal-tamil-nadu-strong-arrangements-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से 48 घंटे पहले मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होनी है, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए मतदान होने हैं। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार थमने से पहले दोनों राज्यों में शीर्ष नेताओं और उम्मीदवारों ने समर्थकों को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, चुनाव प्रचार थमने के बाद अब कोई भी राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार के समर्थन में जनसभा या रैली नहीं कर सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पश्चिम बंगाल की तो यहां इस बार दो चरणों में चुनाव संपन्न कराया जाना है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होना है। इस चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 मतदाता उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इन मतदाताओं में एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं अपने मत का इस्तेमाल करेंगी। आरक्षण को लेकर बने माहौल के बीच इस बार पश्चिम बंगाल में महिलाओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल में पहले चरण में जहां मतदान होने हैं, उनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल अंचल के पांच जिले शामिल हैं।इनमें मुर्शिदाबाद की 22, कूचबिहार की 9, जलपाईगुड़ी की 7, अलीपुरद्वार की 5, कलिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की 5, उत्तर दिनाजपुर की 9, दक्षिण दिनाजपुर की 6, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम ब‌र्द्धमान की 9, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, झारग्राम की 4, पुरुलिया की 9 और बांकुड़ा की 12 सीटें शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु  राज्य में सभी सीटों पर एक चरण में ही चुनाव संपन्न कराया जाना है। 23 अप्रैल को ही सभी 234 सीटों पर मतदान होना है। तमिलनाडु में इस बार 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव में कुल 5.73 करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों की किस्मत लिखेंगे।इस बार चुनाव में सबकी निगाहें अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके पर टिकी हैं, क्योंकि कई सीटों पर उनको लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है, इसलिए चुनाव में उनकी भूमिका काफी अहम हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 22:08:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधानसभा चुनाव 2026 का महायुद्ध तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सियासी संघर्ष अपने चरम पर जनादेश का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">विधानसभा चुनाव 2026 के तहत देश के दो बड़े और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।चुनाव प्रचार का लंबा और तीखा दौर समाप्त हो चुका है और अब पूरा ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है 23 अप्रैल को दोनों राज्यों में मतदान होना है जहां तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी और चार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176929/assembly-elections-2026-the-great-war-political-conflict-at-its"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">विधानसभा चुनाव 2026 के तहत देश के दो बड़े और राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल इस समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।चुनाव प्रचार का लंबा और तीखा दौर समाप्त हो चुका है और अब पूरा ध्यान मतदान पर केंद्रित हो गया है 23 अप्रैल को दोनों राज्यों में मतदान होना है जहां तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाएंगे वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके बाद 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी और चार मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे ।यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है बल्कि यह क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय राजनीति नेतृत्व की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे की भी बड़ी परीक्षा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल इस बार बेहद गर्म और प्रतिस्पर्धी रहा है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने लगभग साठ प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी ,जबकि भाजपा ने करीब चालीस प्रतिशत वोट लेकर खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में स्थापित किया था। इस बार भी यही दो दल आमने सामने हैं और दोनों ही पूरी ताकत के साथ जीत का दावा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा ने इस बार राज्य में आक्रामक प्रचार किया और भ्रष्टाचार घुसपैठ तथा कानून व्यवस्था को मुख्य मुद्दा बनाया वहीं ममता बनर्जी ने क्षेत्रीय अस्मिता विकास और सामाजिक योजनाओं को अपनी ताकत के रूप में पेश किया। उन्होंने भाजपा को बाहरी ताकत बताते हुए बंगाल की पहचान को बचाने की अपील की इस तरह चुनावी मुकाबला केवल नीतियों का नहीं बल्कि पहचान और विचारधारा का भी बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए करीब डेढ़ हजार उम्मीदवार मैदान में हैं और मतदाताओं की संख्या तीन करोड़ से अधिक है ।राज्य में मतदान प्रतिशत पारंपरिक रूप से काफी अधिक रहता है और इस बार भी अस्सी से पचासी प्रतिशत तक मतदान की संभावना जताई जा रही है। अधिक मतदान आमतौर पर राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है इसलिए सभी दलों की नजर मतदान प्रतिशत पर भी टिकी हुई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कई सख्त कदम उठाए हैं ,जिनमें मतदान से पहले रात के समय बाइक चलाने पर रोक भी शामिल है ,ताकि किसी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को रोका जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु की बात करें तो यहां का चुनावी परिदृश्य अलग होते हुए भी उतना ही रोचक और चुनौतीपूर्ण है ।राज्य में लंबे समय से द्रविड़ राजनीति का प्रभाव रहा है और इस बार भी मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कषगम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के बीच माना जा रहा है। सत्ताधारी द्रमुक अपने शासन के दौरान किए गए विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के आधार पर जनता से समर्थन मांग रही है जबकि अन्नाद्रमुक सत्ता विरोधी माहौल को भुनाने की कोशिश कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में लगी है और इस बार उसने कई सीटों पर गंभीरता से चुनाव लड़ा है। हालांकि तमिलनाडु में भाजपा अभी मुख्य मुकाबले में पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई है, लेकिन उसका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है ।इस चुनाव की एक खास बात अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी का प्रवेश है। जिसने खासकर युवाओं के बीच नई उम्मीद और उत्साह पैदा किया है ।कई सीटों पर यह पार्टी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है, जिससे चुनाव और अधिक दिलचस्प हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में इस बार चार हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं और पांच करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। पिछले चुनाव में यहां लगभग सत्तहत्तर प्रतिशत मतदान हुआ था और इस बार भी भारी मतदान की उम्मीद है महिलाओं और युवाओं की भूमिका इस चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है ।द्रमुक ने महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है ।वहीं युवा मतदाता रोजगार और विकास के मुद्दों को लेकर अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कांटे की टक्कर की बात करें तो पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला है जहां दोनों दलों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत कम हो सकता है ।कई सीटों पर परिणाम बेहद करीबी रहने की संभावना है। वाम दल और कांग्रेस भी मैदान में हैं लेकिन उनकी भूमिका सीमित मानी जा रही है।तमिलनाडु में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच सीधी टक्कर है ,लेकिन भाजपा और विजय की पार्टी जैसे अन्य दल भी कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ सकते हैं।जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है यही कारण है कि तमिलनाडु में इस बार परिणाम पूरी तरह से अनुमान के दायरे में नहीं हैं और किसी भी दल के लिए जीत आसान नहीं मानी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव प्रचार के दौरान दोनों राज्यों में तीखी बयानबाजी देखने को मिली पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चरम पर रहा ।भाजपा ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के आरोप लगाए जबकि ममता बनर्जी ने भाजपा पर राज्य की संस्कृति और पहचान को खतरे में डालने का आरोप लगाया तमिलनाडु में भी राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग जारी रही और नेताओं ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधाअब जब चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है तो जनता के पास शांत वातावरण में निर्णय लेने का अवसर है ।चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रचार थमने के बाद किसी भी प्रकार की रैली या सार्वजनिक गतिविधि पर प्रतिबंध रहेगा ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मत का उपयोग कर सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः चार मई को जब मतगणना होगी तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है और किस दल की रणनीति सफल रही है। यह चुनाव न केवल इन राज्यों की राजनीति को दिशा देगा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि दोनों राज्य देश की राजनीतिक धुरी में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं ।लोकतंत्र के इस महापर्व में अंतिम निर्णय जनता के हाथ में है और वही इस सियासी महासंग्राम का असली विजेता तय करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 19:12:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अन्तिम मतदाता सूची में शामिल नही हो सका है तो फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में पंजीकृत करा सकते</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिला अधिकारी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अन्तर्गत अन्तिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित कर दी गयी है। उक्त के संबंध में कलेक्टेªट सभागार में बैठक की गयी। बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में कुल मतदाता-1731516 है, जिसमें पुरूष मतदाता-949999 एवं महिला मतदाता-781508 तथा थर्ड जेण्डर मतदाता-9 है। उन्होने बताया कि जनपद का जेण्डर रेशियों 823 तथा ईपी रेशियों 57.73 है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि दावे एवं आपत्तिया प्राप्त करने की अन्तिम तिथि दिनॉक 06 मार्च 2026 की अवधि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175725/if-you-have-not-been-able-to-be-included-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260410-wa0053-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिला अधिकारी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अन्तर्गत अन्तिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित कर दी गयी है। उक्त के संबंध में कलेक्टेªट सभागार में बैठक की गयी। बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद में कुल मतदाता-1731516 है, जिसमें पुरूष मतदाता-949999 एवं महिला मतदाता-781508 तथा थर्ड जेण्डर मतदाता-9 है। उन्होने बताया कि जनपद का जेण्डर रेशियों 823 तथा ईपी रेशियों 57.73 है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि दावे एवं आपत्तिया प्राप्त करने की अन्तिम तिथि दिनॉक 06 मार्च 2026 की अवधि तक जनपद में 131053 फार्म-6 प्राप्त हुआ, जिसका शतप्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। उन्होने यह भी बताया कि 31 मार्च 2026 तक जनपद में कुल 134408 फार्म-06 ई-रोल अपडेट किए जा चुके है। उन्होने बताया कि कुल 418146 मतदाताओं को जारी नोटिस की सुनवाई की कार्यवाही जनपद स्तर पर हुयी, जिसमें अन्तिम प्रकाशन हेतु 413491 मतदाताओं को पात्र पाया गया तथा 4655 मतदाताओं को अपात्र पाते हुए फार्म-7 की कार्यवाही की गयी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि डीईओ पोर्टल पर अपलोड अन्तिम प्रकाशित मतदाता सूची का लिंक-<a href="https://basti.nic.in/final-publicotion-voter-list-2026/">https://basti.nic.in/final-publicotion-voter-list-2026/</a>  है। उन्होने यह भी बताया कि यदि जिनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो चुका है और यदि आपका नाम किसी कारणवश अन्तिम मतदाता सूची में शामिल नही हो सका है तो फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में पंजीकृत करा सकते है। बैठक में एडीएम/उप जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान, एसडीएम शत्रुध्न पाठक, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ओम प्रकाश, प्रधान सहायक अजय कुमार पाण्डेय, वरिष्ठ सहायक पीयूष गुप्ता एवं समस्त मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 19:41:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बलरामपुर में एसआईआर ने बदली मतदाताओं की संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर करीब छह माह तक चले विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर के बाद शुक्रवार को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। बलरामपुर में एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नई मतदाता सूची जारी होने के बाद बलरामपुर में विधानसभा का राजनीतिक समीकरण भी बदलेगा। जिले में 4,11,200 मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूची से कट गए है। अभियान में 1,38,928 नए मतदाता जोड़े गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नए वोटरों को जोड़ कर वर्तमान में चारों विधानसभा में 13,10,755 मतदाता बचे हैं। एसआईआर से पहले</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175717/sir-changed-the-number-of-voters-in-balrampur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/0e9cec30-ebd2-11f0-a422-4ba8a094a8fa.jpg.webp" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर करीब छह माह तक चले विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर के बाद शुक्रवार को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई। बलरामपुर में एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नई मतदाता सूची जारी होने के बाद बलरामपुर में विधानसभा का राजनीतिक समीकरण भी बदलेगा। जिले में 4,11,200 मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूची से कट गए है। अभियान में 1,38,928 नए मतदाता जोड़े गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नए वोटरों को जोड़ कर वर्तमान में चारों विधानसभा में 13,10,755 मतदाता बचे हैं। एसआईआर से पहले 15,83,027 मतदाता थे। मतदाता सूची में कुल 17.20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक मतदाता विधानसभा बलरामपुर में 87,850 और दूसरे स्थान पर विधानसभा उतरौला में 86,576 मतदाता के नाम सूची से हटे हैं। जिले में वृहद अभियान 166 दिनों तक चला है। सभी बूथों पर 1805 बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर दस्तक देकर मतदाता पुनरीक्षण का कार्य किया है। इसमें 291-तुलसीपुर विधानसभा में पहले 377387 मतदाता थे। 51999 मतदाताओं के नाम सूची से हटने पर 3,25,388 वोटर बचे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गैंसड़ी में 357518 वोटर थे, 45847 के नाम हटाने के बाद 3,11,671 मतदाता बचे हैं। उतरौला में 4,26,213 मतदाता थे, 86576 के नाम कटने के बाद 3,39,637 वोटर बचे हैं। बलरामपुर सदर में 4,21,909 मतदाता थे, 87,850 के नाम कटने से 3,34,059 मतदाता बचे हैं। चारों विधानसभा में अंतिम सूची के प्रकाशन में नए वोटरों को शामिल करने पर यह संख्या है।जिला निर्वाचन अधिकारी विपिन कुमार जैन ने कहा कि मतदाताओं के नाम कटने का मुख्य कारण डुप्लीकेशन (दोहराव) का विलोपन तथा ऐसे निवासियों के नाम हटाना है, जो अब जनपद में निवास नहीं कर रहे हैं। इससे मतदाता सूची अब पहले से अधिक शुद्ध और वास्तविक हो गई है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 19:21:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>रिकॉर्ड मतदान, बदलता भारत — लोकतंत्र अब जनता की मुट्ठी में</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी इतिहास शोर से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतारों में खड़ी खामोश भीड़ के संकल्प से लिखा जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा ही दिन था। असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल और पुडुचेरी में भोर से पहले ही मतदान केंद्रों के बाहर जनसैलाब उमड़ पड़ा। कहीं भीगे हाथों में छाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं तपती सुबह से पहले ही चेहरों पर जिद चमक रही थी। कोई कांपते कदमों और झुकी कमर के साथ पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई पहली बार वोट देने का उत्साह आंखों में लिए खड़ा था। चेहरे अलग थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषाएं अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिस्थितियां अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबको एक ही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175691/record-turnout-is-changing-india-%E2%80%93-democracy-now-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी इतिहास शोर से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कतारों में खड़ी खामोश भीड़ के संकल्प से लिखा जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसा ही दिन था। असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल और पुडुचेरी में भोर से पहले ही मतदान केंद्रों के बाहर जनसैलाब उमड़ पड़ा। कहीं भीगे हाथों में छाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं तपती सुबह से पहले ही चेहरों पर जिद चमक रही थी। कोई कांपते कदमों और झुकी कमर के साथ पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई पहली बार वोट देने का उत्साह आंखों में लिए खड़ा था। चेहरे अलग थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाषाएं अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिस्थितियां अलग थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबको एक ही विश्वास जोड़ रहा था—लोकतंत्र को और मजबूत करने का विश्वास। शाम तक आंकड़ों ने बता दिया कि जनता ने केवल मतदान नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लोकतंत्र के पक्ष में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चुनाव आयोग के अनुसार मतदान समाप्ति से एक घंटे पहले (शाम </span>5 <span lang="hi" xml:lang="hi">बजे तक) के आंकड़े चौंकाने वाले ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लोकतंत्र की नई ताकत का ऐलान करने वाले हैं—असम में </span>84.42 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में </span>75.01 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत और पुडुचेरी में </span>86.92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान। ये केवल संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस जागते भारत की तस्वीर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब राजनीति को दूर से देखना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे अपनी मुट्ठी में लेना चाहता है। लगभग </span>5.3 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ मतदाताओं की इस भागीदारी ने साफ कर दिया कि जनता अब भाषणों और नारों के पीछे चलने वाली भीड़ नहीं रही। वह सवाल करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाब मांगती है और अपने वोट से बता रही है कि सत्ता का असली मालिक नागरिक है। यही वजह है कि ये चुनाव केवल तीन राज्यों की घटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक भविष्य की दिशा बन गए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असम में इस बार का चुनाव कई अर्थों में ऐतिहासिक रहा। </span>126 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों वाले राज्य में </span>84.42 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। </span>2023 <span lang="hi" xml:lang="hi">के परिसीमन के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच यह पहला चुनाव था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए लोगों की भागीदारी भी बढ़ी। भाजपा-एनडीए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सत्ता बचाने में जुटा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कांग्रेस और अन्य दल वापसी की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि मतदाता दलों से अधिक अपने मुद्दों पर केंद्रित दिखा। भूमि अधिकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और विकास जैसे सवाल लोगों को बूथ तक ले आए। डलगांव जैसे क्षेत्रों में </span>94 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक मतदान ने बता दिया कि असम अब केवल सरकार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपना भविष्य चुन रहा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असम की जनता ने इस बार केवल वोट नहीं डाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपनी राजनीतिक चेतना भी दिखा दी। पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घुसपैठ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमाई तनाव और अवसरों की कमी से लंबे समय तक जूझते रहे इस राज्य ने साफ कर दिया कि अब उसे केवल वादे नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठोस जवाब चाहिए। गांवों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहाड़ी इलाकों और सीमा से लगे क्षेत्रों में जिस तरह महिलाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुजुर्ग और युवा मतदान के लिए निकले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने साबित कर दिया कि लोकतंत्र की ताकत शहरों तक सीमित नहीं है। असम ने यह भी दिखाया कि पूर्वोत्तर अब राष्ट्रीय राजनीति का किनारा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसकी दिशा तय करने वाली मजबूत आवाज बन चुका है। वहां की जनता ने बता दिया कि लोकतंत्र सबसे मजबूत तब होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सबसे दूर बैठा नागरिक भी अपने वोट की कीमत समझने लगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में तस्वीर अलग थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संदेश उतना ही मजबूत। </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर हुए चुनाव में </span>75.01 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। यह आंकड़ा असम और पुडुचेरी से कम जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक केरल में यह भागीदारी अपने आप में असाधारण है। एलडीएफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूडीएफ और भाजपा गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबले ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया। पलक्कड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोझीकोड और कई जिलों में </span>80 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत के आसपास मतदान हुआ। स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण और महंगाई जैसे मुद्दों पर जनता ने खुलकर अपनी राय दी। यहां मतदाता केवल दल नहीं देखता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनके काम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों और भविष्य की दिशा को भी परखता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केरल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वहां लोकतंत्र केवल प्रक्रिया नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक संस्कृति बन चुका है। बारिश के बावजूद बूथों पर लगी लंबी कतारों ने बता दिया कि यहां का नागरिक मतदान को अधिकार से अधिक कर्तव्य मानता है। बड़ी संख्या में महिलाएं और पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदान के लिए पहुंचे। युवाओं ने बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी शिक्षा और बेहतर अवसरों के सवाल उठाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि महिलाओं ने स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी। केरल के मतदाता ने साफ कर दिया कि अब राजनीति केवल विचारधारा तक सीमित नहीं रहेगी। जनता का विश्वास उसी दल को मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन चुनावों में अगर किसी ने पूरे देश को सबसे ज्यादा चौंकाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह पुडुचेरी था। केवल </span>9.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख मतदाताओं वाले इस छोटे केंद्र शासित प्रदेश में </span>86.92 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत मतदान ने लोकतंत्र की नई मिसाल कायम कर दी। </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों वाले पुडुचेरी में एनडीए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस-डीएमके गठबंधन और अन्य दलों के बीच मुकाबला था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबसे बड़ी जीत जनता की भागीदारी की रही। कराईकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुडुचेरी और आसपास के इलाकों में सुबह से शाम तक मतदान केंद्रों पर भीड़ उमड़ी रही। स्थानीय रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी सुविधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और स्वायत्तता जैसे मुद्दों ने लोगों को बूथ तक पहुंचाया। इस छोटे प्रदेश ने पूरे देश को बता दिया कि लोकतंत्र की ताकत आबादी से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिकों की जागरूकता से तय होती है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल और पुडुचेरी के चुनावों ने भारत को एक बड़ा संदेश दिया है। चुनाव आयोग की तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कड़ी सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईवीएम पर बढ़ा भरोसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अभियान और सोशल मीडिया से बढ़ी जागरूकता ने मतदान को जन-आंदोलन बना दिया। लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि भारत का मतदाता अब बदल चुका है। वह चुप रहने वाला नागरिक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य के प्रति सजग प्रहरी बन गया है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई को नतीजे आएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारें बनेंगी और समीकरण बदलेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इन चुनावों की सबसे बड़ी जीत पहले ही सामने आ चुकी है। वह जीत है जनता का यह विश्वास कि उसकी उंगली पर लगी स्याही केवल निशान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:12:26 +0530</pubDate>
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                <title>बंगाल चुनाव: 'यहां से दफा हो जाओ', टीएमसी नेताओं से चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175582/bengal-elections-get-lost-from-here-tmc-leaders-make-serious"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/vkfbk1c5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन उनमें से किसी का भी न तो जवाब दिया गया और न ही कोई संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में गंभीर मामला है, क्योंकि एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चिट्ठियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">ओ’ब्रायन के मुताबिक, बैठक सुबह करीब 10 बजकर 2 मिनट पर शुरू हुई और 7-8 मिनट में ही खत्म हो गई। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनका संबंध भारतीय जनता पार्टी से है। उन्होंने ऐसे 6 उदाहरण चुनाव आयोग के सामने रखे और कहा कि इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्तियों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर इस तरह के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव हो पाएंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने ये मुद्दे उठाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें बीच में रोक दिया और कथित तौर पर "यहां से निकल जाओ" कह दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेरेक ओ’ब्रायन ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अपने 22 साल के राजनीतिक करियर और 16 साल के संसदीय अनुभव में उन्होंने कभी भी किसी संवैधानिक संस्था के साथ ऐसी स्थिति नहीं देखी। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग के पास बैठक का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि सच सामने आ सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका प्रतिनिधिमंडल बाहर निकल रहा था, तब उनके एक सहयोगी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई दी कि वे भारत के इतिहास में पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनके खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में हटाने के नोटिस दिए गए हैं।ओ’ब्रायन ने आगे बताया कि इस मुद्दे को लेकर सभी विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब वे बैठक में पहुंचे, तो शुरुआत में ही यह कहा गया कि उनका प्रतिनिधिमंडल अधिकृत नहीं है, जबकि वे पूरी तरह अधिकृत होकर गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने मुद्दे रखने शुरू किए, तो उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया गया।ओ’ब्रायन ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता बेहद जरूरी है और अगर इस पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चिंता की बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:17:34 +0530</pubDate>
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