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                <title>ईरान हमला - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ईरान हमला RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरान पर हमले तेज होंगे, ‘बड़ी लहर आनी बाकी’ – ट्रंप की नई चेतावनी; इस्फहान न्यूक्लियर साइट पर धमाके</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी और तेज हो सकती है और “बड़ी लहर आनी बाकी है।” एक इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना चार से पांच सप्ताह तक अभियान जारी रख सकती है। इसी बीच ईरान के इस्फहान स्थित परमाणु ठिकाने पर नए धमाकों की खबरें सामने आई हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘तीव्रता बनाए रखना मुश्किल नहीं’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के लिए लड़ाई की तीव्रता बनाए रखना कठिन नहीं होगा। उनका दावा है कि लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172291/attacks-on-iran-will-intensify-big-wave-yet-to-come"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/4a8d6460-fcf6-11f0-9c55-8bade468c676.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अभी और तेज हो सकती है और “बड़ी लहर आनी बाकी है।” एक इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना चार से पांच सप्ताह तक अभियान जारी रख सकती है। इसी बीच ईरान के इस्फहान स्थित परमाणु ठिकाने पर नए धमाकों की खबरें सामने आई हैं।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘तीव्रता बनाए रखना मुश्किल नहीं’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के लिए लड़ाई की तीव्रता बनाए रखना कठिन नहीं होगा। उनका दावा है कि लक्ष्य ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह निष्क्रिय करना है। हालांकि, उन्होंने सैन्य रणनीति के विस्तृत विवरण साझा नहीं किए।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>शासन परिवर्तन पर विरोधाभासी संकेत</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ईरान में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर ट्रंप के बयान अलग-अलग संकेत देते नजर आए। एक ओर उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के विशेष सैन्य बल, जिनमें <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Islamic Revolutionary Guard Corps</span></span> के अधिकारी शामिल हैं, अंततः जनता के सामने हथियार डाल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अपनाया गया मॉडल “आदर्श परिदृश्य” था। उन्होंने <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Nicolás Maduro</span></span> का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय उन्होंने विशेष बलों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, ईरान में सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके पास “तीन अच्छे विकल्प” हैं, लेकिन फिलहाल उनका खुलासा नहीं करेंगे।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>‘फैसला ईरानी जनता पर’</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार को हटाने का फैसला अंततः ईरानी जनता पर निर्भर करेगा। उनके मुताबिक, “वे वर्षों से बदलाव की बात कर रहे हैं, अब उन्हें अवसर मिलेगा।” यह बयान उनके पहले दिए गए वेनेजुएला मॉडल के संकेत से अलग माना जा रहा है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सार्वजनिक मंच से दूरी, सोशल मीडिया पर घोषणाएं</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मुख्य रूप से इंटरनेट मीडिया के जरिए साझा की है। तड़के जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने बड़े सैन्य हमले की घोषणा की। इसके बाद भी उनकी टिप्पणियां वीडियो संदेशों और चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत तक सीमित रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Ali Khamenei</span></span> को लेकर आई खबरों पर भी उन्होंने कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। बताया गया कि वह पाम बीच स्थित अपने निजी क्लब <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mar-a-Lago</span></span> में मौजूद थे और वहीं सीमित दायरे में जानकारी साझा की।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>रणनीति और पारदर्शिता पर सवाल</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">हमले से पहले भी ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से विस्तृत रणनीतिक तर्क पेश नहीं किए थे। अब लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से की जा रही घोषणाओं के चलते उनकी रणनीति और पारदर्शिता को लेकर विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 21:49:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या अमेरिका-ईजराइल युद्ध नीति महाभारत कालीन कौरव-पांडव युद्ध से प्रेरित है?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​​पश्चिम एशिया में गहराता वर्तमान सैन्य गतिरोध और लैटिन अमेरिका से लेकर ईरान तक सत्ता परिवर्तन की हालिया रणनीतियां अनायास ही महाभारत के उस प्रसंग की याद दिलाती हैं, जहाँ युद्ध केवल शौर्य से नहीं बल्कि शत्रु के नेतृत्व को पंगु बनाने की सूक्ष्म कूटनीति से लड़ा जाता था। आधुनिक सैन्य शब्दावली में जिसे 'लीडरशिप डिकैपिटेशन' कहा जाता है, उसका बीज हमें कुरुक्षेत्र के मैदान में मिलता है, जब दुर्योधन ने युधिष्ठिर को बंदी बनाकर युद्ध को एक झटके में समाप्त करने की योजना बनाई थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वो बात अलग है कि श्रीकृष्ण होते हुए यह योजना विफल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172188/is-america-israel-war-policy-inspired-by-the-kaurava-pandava-war-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/24745.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​​पश्चिम एशिया में गहराता वर्तमान सैन्य गतिरोध और लैटिन अमेरिका से लेकर ईरान तक सत्ता परिवर्तन की हालिया रणनीतियां अनायास ही महाभारत के उस प्रसंग की याद दिलाती हैं, जहाँ युद्ध केवल शौर्य से नहीं बल्कि शत्रु के नेतृत्व को पंगु बनाने की सूक्ष्म कूटनीति से लड़ा जाता था। आधुनिक सैन्य शब्दावली में जिसे 'लीडरशिप डिकैपिटेशन' कहा जाता है, उसका बीज हमें कुरुक्षेत्र के मैदान में मिलता है, जब दुर्योधन ने युधिष्ठिर को बंदी बनाकर युद्ध को एक झटके में समाप्त करने की योजना बनाई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वो बात अलग है कि श्रीकृष्ण होते हुए यह योजना विफल हुई ,पर अभिमन्यु के रूप में बहुत बड़े योद्धा को खोना पड़ा। आज अमेरिका और इजरायल की रणनीतियों में भी प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के बजाय शीर्ष नेतृत्व को लक्ष्य बनाने, सत्ता परिवर्तन सुनिश्चित करने या राजनीतिक अलगाव पैदा करने के तत्व प्रधान दिखाई देते हैं। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी किसी राष्ट्र के शीर्ष प्रतीक को हटाया गया, युद्ध का परिणाम निर्णायक रूप से बदल गया। वर्ष 2003 में इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की गिरफ्तारी और 1989 में पनामा के राष्ट्रपति मैनुअल नोरीएगा को बंदी बनाया जाना इसके पुराने उदाहरण हैं, किंतु वर्ष 2026 की घटनाओं ने इस परिपाटी को और अधिक आक्रामक बना दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​हाल ही में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंदी बनाना और उसके पश्चात 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर भीषण मिसाइल हमला कर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को मौत के घाट उतारना, इसी 'नेतृत्व विनाश' की नीति का चरमोत्कर्ष है। इन घटनाओं ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि अब 'अभय' माने जाने वाले नेतृत्व के सुरक्षित घेरे भी आधुनिक तकनीक और खुफिया ऑपरेशन्स के सामने बेबस हैं। सामरिक होड़ के बीच संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय कानून एक नैतिक सीमा रेखा जरूर खींचते हैं, पर शक्तिशाली राष्ट्रों के लिए ये नियम अब गौण प्रतीत होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) किसी भी सदस्य राष्ट्र की संप्रभुता के उल्लंघन को वर्जित करता है और सैन्य कार्रवाई को केवल अनुच्छेद 51 के तहत 'आत्मरक्षा' की स्थिति में ही वैध मानता है। इसके इतर किसी राष्ट्राध्यक्ष को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है, लेकिन व्यावहारिक राजनीति में महाशक्तियाँ अक्सर 'आतंकवाद-निरोध' या 'रासायनिक या जैविक हथियारों की उपस्थिति','परमाणु अप्रसार' जैसे तर्कों का सहारा लेकर इन नियमों की व्याख्या अपने हितों के अनुरूप करती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भविष्य की आशंकाएं अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों के युग में भी 'नेतृत्व विनाश' की यह नीति सुरक्षित है? अयातुल्ला खामेनेई की हत्या और मादुरो की गिरफ्तारी से अमेरिका और इजरायल ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि आधुनिक युद्ध अब किसी भी मर्यादा को लांघ सकते हैं। चीन और रूस जैसी महाशक्तियां भविष्य में इस पर क्या रुख अपनाती हैं, यह देखना शेष है, लेकिन छोटे राष्ट्रों को अब यह चिंता सताने लगी है कि कब कोई शक्तिशाली देश उन्हें अपने अधीन बना ले या उनके नेतृत्व को मिटा दे। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक धरोहरों को निशाना बनाना प्रतिबंधित है, पर इक्कीसवीं सदी के युद्धों ने साबित कर दिया है कि शक्तिशाली राष्ट्रों के लिए न तो इन नियमों का कोई बंधन है और न ही उन्हें यूएन की निंदा की चिंता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महाभारत हमें अंततः यही सिखाता है कि चतुर रणनीतियों और नियमों के उल्लंघन से युद्ध तो जीता जा सकता है, किंतु प्रतिशोध और सत्ता-लालसा पर आधारित जीत कभी स्थायी शांति नहीं लाती। आज विश्व समुदाय के सामने चुनौती कुरुक्षेत्र की इस पुनरावृत्ति को रोकने और अंतरराष्ट्रीय विधि के शासन को पुनर्जीवित करने की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:20:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान का 27 अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा, कतर- यूएई में धमाके</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के कई अहम सैन्य परिसरों पर हमले किए हैं। यह जानकारी अल जजीरा की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरानी सरकारी मीडिया का भी उल्लेख किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172129/after-confirmation-of-khameneis-death-iran-claims-to-attack-27"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/खामेनेई-की-मौत-की-पुष्टि-के-बाद-ईरान-का-27-अमेरिकी-ठिकानों-पर-हमले-का-दावा,-कतर--यूएई-में-धमाके.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मिडिल ईस्ट में मौजूद 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के कई अहम सैन्य परिसरों पर हमले किए हैं। यह जानकारी अल जजीरा की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरानी सरकारी मीडिया का भी उल्लेख किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने कहा है कि वह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई बमबारी के जवाब में “छठी लहर” के तहत कार्रवाई कर रहा है। बयान में कहा गया है कि “विस्तृत मिसाइल और ड्रोन हमले” इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">IRGC ने दावा किया कि 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा इजरायल का तेल नोफ एयरबेस, तेल अवीव स्थित सेना का कमांड मुख्यालय हाकिर्या, और उसी शहर में स्थित एक बड़े रक्षा औद्योगिक परिसर को निशाना बनाया गया।IRGC ने यह भी चेतावनी दी कि ईरानी बल “लगातार और कठोर बदले की कार्रवाई” करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बीच कतर की राजधानी दोहा से कई धमाकों की आवाजें सुने जाने की खबर है। स्थानीय निवासियों के हवाले से बताया गया कि शहर के ऊपर आसमान में कम से कम 11 विस्फोटों की आवाज सुनी गई।बाद में कतर के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की कि ईरानी हमलों के बाद कुल 16 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त आठ घायलों की पुष्टि के बाद कुल संख्या 16 हो गई। साथ ही विभिन्न इलाकों में “सीमित भौतिक नुकसान” की भी जानकारी दी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इजरायल में सायरन बचने की खबरें है। वहीं, इजरायल के चैनल 12 ने रिपोर्ट किया कि ईरान की ओर से मिसाइल लॉन्च किए जाने के कारण देशभर में एयर अटैक सायरन बजने की आशंका है। इससे इजरायल में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं।अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में भी ईरानी हमलों का असर देखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव ने अब खाड़ी क्षेत्र को भी सीधे तौर पर प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कतर और यूएई जैसे देशों में धमाकों और आगजनी की घटनाओं ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:42:23 +0530</pubDate>
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