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                <title>Rural Health Initiative - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Rural Health Initiative RSS Feed</description>
                
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                <title>घर-घर पहुंच रहा पोषण अभियान, कुपोषित बच्चों के परिवारों को दिया जा रहा विशेष मार्गदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में प्रस्तावित "सुपोषण बस्ती अभियान" के अंतर्गत गुरुवार को बाल विकास परियोजना विक्रमजोत एवं गौर की टीमों ने गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों के घर-घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने बच्चों के अभिभावकों से संवाद स्थापित कर उन्हें सरकार द्वारा संचालित पोषण योजनाओं की जानकारी दी। बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) विक्रमजोत बलराम सिंह के नेतृत्व में परियोजना क्षेत्र के लगभग 22 अति कुपोषित बच्चों के घरों का भ्रमण किया गया। वहीं बाल विकास परियोजना गौर की टीम ने 16 कुपोषित बच्चों</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181010/nutrition-campaign-reaching-every-home-special-guidance-being-given-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0057.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में प्रस्तावित "सुपोषण बस्ती अभियान" के अंतर्गत गुरुवार को बाल विकास परियोजना विक्रमजोत एवं गौर की टीमों ने गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों के घर-घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने बच्चों के अभिभावकों से संवाद स्थापित कर उन्हें सरकार द्वारा संचालित पोषण योजनाओं की जानकारी दी। बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) विक्रमजोत बलराम सिंह के नेतृत्व में परियोजना क्षेत्र के लगभग 22 अति कुपोषित बच्चों के घरों का भ्रमण किया गया। वहीं बाल विकास परियोजना गौर की टीम ने 16 कुपोषित बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया। सीडीपीओ बलराम सिंह ने बताया कि मंडलायुक्त बस्ती, जिलाधिकारी बस्ती, मुख्य विकास अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशन में शीघ्र ही "सुपोषण बस्ती अभियान" प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विशेष वृद्धि निगरानी सप्ताह के दौरान जिले में लगभग 4500 से अधिक अति कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। अभियान का उद्देश्य इन बच्चों के परिवारों तक पहुंचकर उनमें विश्वास पैदा करना तथा उन्हें कुपोषण मुक्त बनाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र भदोही में मुख्य सेविका सरिता सिंह, कुमुद सिंह तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री कृष्णावती सिंह एवं सहायिका लक्ष्मी देवी के साथ टीम ने कुपोषित बालक समर के घर पहुंचकर उसके माता-पिता एवं परिजनों को संतुलित आहार, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी दी। परिवार को जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा तैयार डाइट चार्ट भी उपलब्ध कराया गया। सीडीपीओ ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों के माध्यम से अतिरिक्त पोषाहार उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने बच्चों को केला खिलाकर उनकी भोजन ग्रहण करने की क्षमता का आकलन किया तथा परिवारों को सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों, मौसमी फल एवं हरी सब्जियों के नियमित सेवन के लिए प्रेरित किया। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध छह प्रकार की आवश्यक दवाओं के नियमित सेवन पर भी बल दिया गया। टीम ने फूलडी, महरनिया, शंकरपुर सहित विभिन्न गांवों में कुपोषित बच्चों अनमोल, हर्षिता, रियांश, इकरा एवं अरबिक के परिवारों से मुलाकात कर स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए। सीडीपीओ बलराम सिंह ने बताया कि अभियान के अंतर्गत घर-घर भ्रमण के बाद बच्चों की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी तथा आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उन्हें कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने में अभिभावकों एवं ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना गौर की मुख्य सेविका गीता सिंह सहित विभागीय कर्मियों ने भी क्षेत्र के कुपोषित बच्चों के घर पहुंचकर परिवारों को पोषण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:02:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और समग्र स्वास्थ्य जागरूकता हेतु असम विश्वविद्यालय की डिजिटल पहल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> श्रीभूमि-</strong> गत 28 फरवरी को Assam University ने ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘ईपिक्स इन आईईईई’ परियोजना के अंतर्गत ‘रूरल एजुकेशनल एडवांसमेंट फॉर कम्युनिटी हेल्थ (रीच)’ नामक एक डिजिटल पहल की शुरुआत की। शनिवार को बरजलेन्गा स्थित Vivekananda Kendra Vidyalaya में आयोजित कार्यक्रम में इस वेबऐप का औपचारिक शुभारंभ किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तकनीक-आधारित और समुदाय-केंद्रित इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं तथा पोषण संबंधी ज्ञान की कमी को दूर करना है। कार्यक्रम में वेबऐप का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजीव मोहन पंथ ने किया। इस अवसर पर रोजकांदी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172063/assam-universitys-digital-initiative-for-nutrition-and-holistic-health-awareness"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001341317.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> श्रीभूमि-</strong> गत 28 फरवरी को Assam University ने ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘ईपिक्स इन आईईईई’ परियोजना के अंतर्गत ‘रूरल एजुकेशनल एडवांसमेंट फॉर कम्युनिटी हेल्थ (रीच)’ नामक एक डिजिटल पहल की शुरुआत की। शनिवार को बरजलेन्गा स्थित Vivekananda Kendra Vidyalaya में आयोजित कार्यक्रम में इस वेबऐप का औपचारिक शुभारंभ किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तकनीक-आधारित और समुदाय-केंद्रित इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं तथा पोषण संबंधी ज्ञान की कमी को दूर करना है। कार्यक्रम में वेबऐप का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजीव मोहन पंथ ने किया। इस अवसर पर रोजकांदी चाय बागान के महाप्रबंधक ईश्वरभाई उबाडिया, प्रौद्योगिकी विद्यालय के अधिष्ठाता प्रोफेसर सुदीप्त राय तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य पार्थसारथी देव सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। लगभग 120 अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में कुलपति प्रोफेसर पंथ ने कहा कि विश्वविद्यालयों को पारंपरिक विस्तार गतिविधियों से आगे बढ़कर सामाजिक रूप से उत्तरदायी, टिकाऊ और पुनरावृत्त योग्य तकनीक-आधारित पहलें करनी चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान समय में लगभग 95 प्रतिशत बीमारियाँ जीवनशैली से संबंधित कारणों से उत्पन्न होती हैं, इसलिए निवारक स्वास्थ्य शिक्षा अत्यंत आवश्यक है।ईश्वरभाई उबाडिया ने इस परियोजना को चाय बागान और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दूरदर्शी पहल बताया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">‘रीच–ईपिक्स’ परियोजना अंतर्विभागीय शैक्षणिक सहयोग और विद्यार्थियों की सामाजिक उत्तरदायित्वपूर्ण नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। परियोजना के सलाहकार प्रोफेसर मौसुम हांडिक, तकनीकी प्रमुख डॉ. अर्णब पाल और समन्वयक डॉ. लालजो एस. थांगजम के नेतृत्व में इसका क्रियान्वयन किया गया। छात्र कमलेश देवनाथ, सृजिनजय दास और अवंतिका लांगथासा ने वेबऐप के डिजाइन, विकास और सामुदायिक प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ‘सिटिजन फाउंडेशन’ नामक स्वैच्छिक संस्था के समन्वयक नवकिशोर आकुराव ने स्थानीय भागीदार के रूप में सहयोग प्रदान किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार ‘रीच’ वेबऐप की प्रमुख विशेषता यह है कि इसकी सिफारिशें स्थानीय सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भ पर आधारित हैं। सामान्य पोषण ऐप की तरह पूर्व-निर्धारित आहार सूची देने के बजाय यह बरजलेन्गा बाजार और बराक घाटी में उपलब्ध खाद्य सामग्रियों के आधार पर स्वास्थ्य और पोषण संबंधी सलाह प्रदान करता है। इससे कम लागत, सांस्कृतिक अनुकूलता और व्यवहारिक उपयोग सुनिश्चित होगा।डिजिटल नवाचार के माध्यम से ग्रामीण समुदाय को स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में सशक्त बनाने की यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘विकसित भारत 2047’ के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप भी मानी जा रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 19:53:12 +0530</pubDate>
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