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                <title>Religious Tourism - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Religious Tourism RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आर डी प्रॉपर्टीज के तत्वावधान में लगा श्रद्धालुओं के लिए छठा वार्षिक भंडारा, हजारों भक्तों ने ग्रहण किया प्रसाद</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>गोवर्धन (मथुरा)-दीपक शर्मा </strong></blockquote><p style="text-align:justify;"><br /></p><p style="text-align:justify;"> गुरु पूर्णिमा मेले के पावन अवसर पर गिरिराज धाम गोवर्धन में श्रद्धा, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। लाखों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी गिरिराज महाराज के दर्शन और सप्तकोसीय परिक्रमा के लिए गोवर्धन पहुंच रहे हैं। पूरे परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और वातावरण "गिरिराज महाराज की जय", "राधे-राधे" तथा भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि से भक्तिमय बना हुआ है।</p><p style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया जा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184178/the-sixth-annual-bhandara-for-the-devotees-was-organized-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-27-at-20.58.51.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>गोवर्धन (मथुरा)-दीपक शर्मा </strong></blockquote><p style="text-align:justify;"><br /></p><p style="text-align:justify;"> गुरु पूर्णिमा मेले के पावन अवसर पर गिरिराज धाम गोवर्धन में श्रद्धा, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। लाखों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी गिरिराज महाराज के दर्शन और सप्तकोसीय परिक्रमा के लिए गोवर्धन पहुंच रहे हैं। पूरे परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और वातावरण "गिरिराज महाराज की जय", "राधे-राधे" तथा भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि से भक्तिमय बना हुआ है।</p><p style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया जा रहा है। इन्हीं सेवा कार्यों की श्रृंखला में आर डी प्रॉपर्टीज के तत्वावधान में श्रद्धालुओं के लिए छठे वार्षिक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में हजारों की संख्या में परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और आयोजकों की सेवा भावना की सराहना की।</p><p style="text-align:justify;">भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध एवं सात्विक भोजन की विशेष व्यवस्था की गई। इसके साथ ही भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए ठंडा पेयजल, छाछ, शरबत एवं अन्य आवश्यक सामग्री भी निःशुल्क वितरित की गई। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं ने इस सेवा को अत्यंत सराहनीय बताते हुए आयोजकों को धन्यवाद दिया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि लंबी परिक्रमा के दौरान ऐसे भंडारे उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और सेवा की यह परंपरा ब्रज की पहचान है।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/whatsapp-image-2026-07-27-at-20.58.50.jpeg" alt="गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया जा रहा है।" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">आर डी प्रॉपर्टीज के संस्थापक गुड्डा ठाकुर उर्फ सौदान सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों से लगातार यह विशाल भंडारा आयोजित किया जा रहा है और भविष्य में भी यह सेवा कार्य निरंतर जारी रहेगा। उनका कहना था कि ब्रज की सेवा और गिरिराज महाराज के भक्तों की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है।</p><p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल भोजन वितरण करना ही नहीं, बल्कि परिक्रमा करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक सेवा प्रदान करना है। इसी भावना के साथ सभी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और समर्पण से दिन-रात सेवा में जुटे हुए हैं। भंडारे में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का स्वागत प्रेम और आदर के साथ किया गया।</p><p style="text-align:justify;">इस सेवा कार्य को सफल बनाने में जयवीर चौधरी, नीतू ठाकुर, अजय कौशिक, ठाकुर मुकेश, हेम सिंह ठाकुर, राजेश ठाकुर, छोटू ठाकुर, माधव शर्मा, बीके ठाकुर, गोविंद ठाकुर सहित समस्त ब्रजवासियों का विशेष सहयोग रहा। सभी कार्यकर्ता भोजन वितरण, पेयजल व्यवस्था, छाछ एवं शरबत वितरण तथा श्रद्धालुओं की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरे उत्साह के साथ लगे रहे।</p><p style="text-align:justify;">भंडारे में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना लगा रहा। परिक्रमा करने वाले भक्तों ने भोजन प्रसाद ग्रहण करने के बाद आयोजकों को आशीर्वाद दिया और उनकी सेवा भावना की प्रशंसा की। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि ब्रज में आने पर उन्हें हर कदम पर सेवा और अपनापन देखने को मिलता है, जो इस भूमि की सबसे बड़ी विशेषता है।</p><p style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा एवं साफ-सफाई की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिक्रमा मार्ग पर निगरानी बनाए हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। स्वयंसेवी संस्थाएं भी प्रशासन के साथ मिलकर सेवा कार्यों में सहयोग कर रही हैं।</p><p style="text-align:justify;">ब्रजभूमि में गुरु पूर्णिमा का पर्व केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का भी प्रतीक माना जाता है। यहां आयोजित होने वाले भंडारे समाज में परोपकार और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। आर डी प्रॉपर्टीज द्वारा आयोजित छठा वार्षिक भंडारा भी इसी सेवा परंपरा का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने गिरिराज महाराज से सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार सेवा कार्यों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने भी आयोजकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसे सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और इन्हें आगे भी निरंतर जारी रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 21:16:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पनकी धाम रेलवे स्टेशन : आस्था, आधुनिकता और सुगम रेल यात्रा का नया प्रवेशद्वार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>दया शंकर त्रिपाठी।</strong></div>
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<div>उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर का पनकी धाम रेलवे स्टेशन अब केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि आधुनिक रेल अवसंरचना और धार्मिक आस्था के संगम का नया प्रतीक बन चुका है। </div>
<div>  </div>
<div>अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत लगभग ₹25 करोड़ की लागत से इसका व्यापक पुनर्विकास किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुगम यात्रा अनुभव मिल रहा है।</div>
<div>वर्ष 1981 में स्थापित पनकी धाम रेलवे स्टेशन का निर्माण कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करने तथा शहर के पश्चिमी एवं उपनगरीय क्षेत्रों को बेहतर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183356/panki-dham-railway-station-is-a-new-gateway-to-faith"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260713-wa0092.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div> </div>
<div><strong>दया शंकर त्रिपाठी।</strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर का पनकी धाम रेलवे स्टेशन अब केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि आधुनिक रेल अवसंरचना और धार्मिक आस्था के संगम का नया प्रतीक बन चुका है। </div>
<div> </div>
<div>अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत लगभग ₹25 करोड़ की लागत से इसका व्यापक पुनर्विकास किया गया है, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुगम यात्रा अनुभव मिल रहा है।</div>
<div>वर्ष 1981 में स्थापित पनकी धाम रेलवे स्टेशन का निर्माण कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करने तथा शहर के पश्चिमी एवं उपनगरीय क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। समय के साथ कानपुर के औद्योगिक विस्तार, नई आवासीय बस्तियों के विकास तथा प्रसिद्ध पंचमुखी श्री हनुमान मंदिर, पनकी धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने इस स्टेशन को शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल कर दिया।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>पुनर्विकास के बाद स्टेशन का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। यहां द्वि-मंजिला आधुनिक स्टेशन भवन, विशाल प्रतीक्षालय, एक्जीक्यूटिव लाउंज, रिटायरिंग रूम, आधुनिक टिकटिंग क्षेत्र, विस्तारित एवं  नए प्लेटफॉर्म शेल्टर, आधुनिक शौचालय, बेहतर पेयजल व्यवस्था तथा उन्नत यात्री सूचना प्रणाली विकसित की गई है। स्टेशन पर स्पष्ट साइनेज, डिजिटल सूचना डिस्प्ले और बेहतर प्रकाश व्यवस्था यात्रियों की सुविधा को और बढ़ाते हैं।</div>
<div>यात्रियों की सुगम आवाजाही के लिए 12 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज तथा 6 मीटर चौड़ा अतिरिक्त फुट ओवर ब्रिज बनाया गया है, जिसमें रैंप और लिफ्ट जैसी दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। स्टेशन परिसर के लगभग 4,500 वर्गमीटर क्षेत्र को सुव्यवस्थित सर्कुलेटिंग एरिया के रूप में विकसित किया गया है, जहां अलग-अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग, पार्किंग, हरित क्षेत्र और बाधारहित आवागमन की व्यवस्था की गई है।</div>
<div> </div>
<div>इस स्टेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसका धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप है। स्टेशन की वास्तुकला में पनकी धाम की आध्यात्मिक पहचान को प्रमुखता दी गई है। भवन के रंग, डिजाइन और कलात्मक तत्व स्थानीय संस्कृति तथा भगवान हनुमान की भक्ति परंपरा को दर्शाते हैं, जिससे यहां पहुंचने वाला प्रत्येक यात्री कानपुर की सांस्कृतिक विरासत का अनुभव कर सके।</div>
<div> </div>
<div>पनकी धाम स्थित प्रसिद्ध पंचमुखी श्री हनुमान मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां प्रत्येक मंगलवार, शनिवार और विशेष रूप से हनुमान जयंती के अवसर पर हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही पनकी क्षेत्र पनकी तापीय विद्युत परियोजना, औद्योगिक इकाइयों, चमड़ा, वस्त्र एवं होजरी उद्योग तथा आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों के कारण भी महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। ऐसे में आधुनिक स्टेशन स्थानीय उद्योग, व्यापार, रोजगार और धार्मिक पर्यटन—सभी को नई गति प्रदान करेगा।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 19:52:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री योगी के संभावित आगमन से गोविंद साहब धाम में हलचल तेज, तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>आलापुर, अंबेडकरनगर।</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आलापुर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र स्थित महात्मा गोविंद साहब की पावन तपोस्थली अहिरौली गोविंद साहब के संभावित दौरे को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि गोविंद साहब धाम पहुंचते हैं तो माना जा रहा है कि वह संत परंपरा और सामाजिक समरसता का संदेश देने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कर सकते हैं।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183208/due-to-the-possible-arrival-of-chief-minister-yogi-there"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1006298913-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>आलापुर, अंबेडकरनगर।</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आलापुर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र स्थित महात्मा गोविंद साहब की पावन तपोस्थली अहिरौली गोविंद साहब के संभावित दौरे को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि गोविंद साहब धाम पहुंचते हैं तो माना जा रहा है कि वह संत परंपरा और सामाजिक समरसता का संदेश देने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कर सकते हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि महात्मा गोविंद साहब की तपोस्थली का व्यापक कायाकल्प कराया जाएगा तथा इसे प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में विकसित करने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/1006298912-(1).jpg" alt="मुख्यमंत्री योगी के संभावित आगमन से गोविंद साहब धाम में हलचल तेज, तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू" width="453" height="302"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों को यह भी आशा है कि पूर्वांचल के ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध गोविंद साहब मेले को राजकीय मेले का दर्जा प्रदान करने की घोषणा हो सकती है। वर्षों से चली आ रही इस मांग के पूरी होने से धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बड़ा लाभ मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी के साथ रामनगर, कटेहरी और भीटी बाजार को नगर पंचायत बनाए जाने की चर्चाएं भी तेज हैं। विशेष रूप से रामनगर को नगर पंचायत बनाए जाने की सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शासन स्तर पर अंतिम स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के दौरान इस संबंध में महत्वपूर्ण घोषणा होने की उम्मीद जताई जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शनिवार को गोविंद साहब मेला समिति के अध्यक्ष भौमेन्द्र सिंह 'पप्पू', रामनगर के पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष अभिषेक निषाद, गोलू पाण्डेय सहित कई लोगों ने अहिरौली गोविंद साहब पहुंचकर महात्मा गोविंद साहब की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा संभावित कार्यक्रम को लेकर तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक तैयारियों पर चर्चा भी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से भी मुख्यमंत्री का संभावित दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंबेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटों पर आगामी चुनाव में भाजपा को मजबूत स्थिति में पहुंचाने के लिए संगठन लगातार सक्रिय है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर को पहले ही जिले का प्रभारी मंत्री बनाकर भाजपा नेतृत्व स्पष्ट राजनीतिक संकेत दे चुका है। ऐसे में गोविंद साहब धाम से मुख्यमंत्री का संभावित कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर तैयारियां संभावित दौरे को ध्यान में रखकर की जा रही हैं और क्षेत्रवासियों की निगाहें अब शासन की आधिकारिक सूचना पर टिकी हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:21:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>श्रुतधाम : ज्ञान, साधना और संस्कृति का जीवंत तीर्थ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय की धूल राजमहलों को ढँक सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शब्दों की ज्योति कभी नहीं बुझती। किसी समाज की सबसे अमूल्य निधि उसके ग्रंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी परंपरा और उसकी स्मृतियाँ होती हैं। जब ये बिखरने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केवल इतिहास नहीं खोता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मा भी मौन होने लगती है। ऐसे विरले तपस्थल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस अमूल्य विरासत को पुनः जीवन देकर पीढ़ियों तक पहुँचा दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल संस्थान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति के शाश्वत दीप बन जाते हैं। मध्यप्रदेश के बीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सागर स्थित</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनेकांत ज्ञान मंदिर (श्रुतधाम)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के शिष्य</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिगम्बर जैन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183196/shrutdhaam-is-a-vibrant-pilgrimage-site-of-knowledge-practice-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय की धूल राजमहलों को ढँक सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शब्दों की ज्योति कभी नहीं बुझती। किसी समाज की सबसे अमूल्य निधि उसके ग्रंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी परंपरा और उसकी स्मृतियाँ होती हैं। जब ये बिखरने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केवल इतिहास नहीं खोता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मा भी मौन होने लगती है। ऐसे विरले तपस्थल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस अमूल्य विरासत को पुनः जीवन देकर पीढ़ियों तक पहुँचा दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल संस्थान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति के शाश्वत दीप बन जाते हैं। मध्यप्रदेश के बीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सागर स्थित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनेकांत ज्ञान मंदिर (श्रुतधाम)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के शिष्य</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिगम्बर जैन मुनिश्री सरलसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में विकसित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी ही दिव्य ज्ञान-साधना का जीवंत आलोक है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुत की रक्षा नहीं</span></strong><strong>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुत का पुनर्जागरण</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब समय अपनी अमूल्य धरोहरों को विस्मृति के हवाले कर रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी </span>1992 <span lang="hi" xml:lang="hi">को श्रुतधाम एक मौन संकल्प बनकर प्रकट हुआ। यह किसी भवन का आरंभ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस चेतना का जागरण था जिसने श्रुत परंपरा को संग्रह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीढ़ियों के संस्कार का आधार माना। यहाँ इतिहास को अतीत की स्मृति बनाकर नहीं छोड़ा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान का पथप्रदर्शक बना दिया गया। स्थापना के साथ ही दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्ययन और प्रचार-प्रसार का सतत यज्ञ आरंभ हो गया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ दुर्लभ ग्रंथों ने फिर से जीवन पाया</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के </span>600 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक स्थलों से संजोए गए </span>30,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक दुर्लभ जैन ग्रंथ तथा </span>200 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक ताड़पत्र और प्राचीन पांडुलिपियाँ आज श्रुतधाम की अमूल्य निधि हैं। लगभग </span>1300 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष पुरानी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुभाषित रत्नावली</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और चार शताब्दी पुराना स्वर्णाक्षरित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भक्तामर स्तोत्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मात्र प्राचीन ग्रंथ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस सत्य के जीवंत प्रमाण हैं कि जहाँ संकल्प अडिग हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ काल भी ज्ञान की ज्योति मंद नहीं कर पाता।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ ग्रंथ बोलते हैं और पीढ़ियाँ सुनती हैं</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम की पहचान उसके संग्रह से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस चेतना से है जो ग्रंथों के ज्ञान को जीवन से जोड़ती है। यहाँ पांडुलिपियाँ केवल सुरक्षित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज की प्रेरणा हैं। ब्रह्मचारी संदीप सरल भैयाजी के मार्गदर्शन में आचार्यों की वाणी अतीत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान का आलोक बनकर प्रवाहित है। यहाँ युवा पीढ़ी को केवल ज्ञान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरित्र और आत्मजागरण का संस्कार मिलता है। संस्थान में प्राकृत भाषा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैन दर्शन और शास्त्र-अध्ययन की नियमित कक्षाएँ संचालित होती हैं। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से श्रुत-आराधना का प्रशिक्षण दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दूर-दूर के जिज्ञासु श्रावक लाभान्वित हो रहे हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हरित चेतना का आध्यात्मिक विस्तार</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम का विस्तार केवल शास्त्रों तक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति की गोद तक है। सहस्रों वृक्षों और चौबीस तीर्थंकरों से संबद्ध पावन वनस्पतियों के माध्यम से यह संदेश साकार होता है कि धर्म केवल उपासना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन-संस्कृति है। यहाँ पर्यावरण संरक्षण अभियान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साधना का सहज स्वरूप है। परिसर का विकसित वन क्षेत्र और जैविक खेती के प्रयास इस हरित चेतना को और सुदृढ़ करते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक संकल्प जिसने इतिहास बदल दिया</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम किसी भवन की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक विश्वास की रचना है। यह उस संकल्प का साकार रूप है जिसने सिद्ध किया कि समाज यदि अपनी ज्ञान-परंपरा का संरक्षण करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो खोई विरासत भी पुनः जीवंत हो उठती है। यह स्थल संतों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रावकों और समर्पित साधकों के सामूहिक पुरुषार्थ का साक्षी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने ऐसी चेतना जगाई है जो आज भी पीढ़ियों का पथ आलोकित कर रही है। परिसर में निर्माणाधीन भव्य मुक्ताकाश समवशरण मंदिर उसी दूरदृष्टि का प्रतीक है। </span>41 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार वर्गफुट में आकार ले रहा बुंदेलखंड का प्रथम मुक्ताकाश समवशरण मंदिर जैन परंपरा की भव्यता को नई ऊँचाई दे रहा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम : एक स्थान नहीं</span></strong><strong>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक सतत आंदोलन</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश के बीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सागर में स्थित श्रुतधाम आज केवल तीर्थ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय ज्ञान-परंपरा के पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक है। यहाँ अतीत भविष्य का पथ प्रशस्त करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास वर्तमान से संवाद करता है और श्रुत केवल पढ़ा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिया जाता है। इसी कारण श्रुतधाम भवन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक चेतना है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्था नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सतत प्रवाहित सांस्कृतिक अभियान है। जैन श्रुत परंपरा के पुनर्जीवन के साथ यह समूची भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण का भी सशक्त केंद्र बन चुका है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183196/shrutdhaam-is-a-vibrant-pilgrimage-site-of-knowledge-practice-and</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:06:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन महोत्सव : हरियाली का महापर्व, प्रकृति संरक्षण का राष्ट्रीय संकल्प और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारत की संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने वृक्षों को केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि देवतुल्य स्थान भी दिया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और आंवले जैसे वृक्षों की पूजा की परंपरा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज सदियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता आया है। आधुनिक समय में बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और अनियंत्रित विकास ने वनों के अस्तित्व को गंभीर चुनौती दी है। यही कारण है कि देश में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वन महोत्सव मनाया जाता है। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182280/van-mahotsav-is-a-great-festival-of-greenery-a-national"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas24.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत की संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने वृक्षों को केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि देवतुल्य स्थान भी दिया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और आंवले जैसे वृक्षों की पूजा की परंपरा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज सदियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता आया है। आधुनिक समय में बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और अनियंत्रित विकास ने वनों के अस्तित्व को गंभीर चुनौती दी है। यही कारण है कि देश में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वन महोत्सव मनाया जाता है। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का उत्सव है। इसका उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना, वनों के महत्व को समझाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण का निर्माण करना है।</div>
<div>वन महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1950 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल के. एम.मुंशी ने की थी। उनका मानना था कि यदि भारत को प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध बनाना है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है, तो जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करना होगा। तभी से यह अभियान पूरे देश में एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। आज स्कूलों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और ग्राम पंचायतों से लेकर शहरों तक लाखों लोग इस अभियान में भाग लेकर पौधे लगाते हैं और उनके संरक्षण का संकल्प लेते हैं।</div>
<div>वन केवल पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि पृथ्वी पर जीवन के सबसे बड़े आधार हैं। यदि वन न हों तो मानव सभ्यता का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। वन हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिसे हम प्रत्येक क्षण सांस के रूप में ग्रहण करते हैं। यही वन वातावरण में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन की गति को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बढ़ते वैश्विक तापमान, हीट वेव और असामान्य मौसम की घटनाओं के बीच वन पृथ्वी के प्राकृतिक वातानुकूलक के रूप में कार्य करते हैं। वे वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं, मिट्टी की नमी बनाए रखते हैं और नदियों, तालाबों तथा भूजल स्रोतों को जीवित रखने में सहायता करते हैं।</div>
<div>वनों का आर्थिक महत्व भी अत्यंत व्यापक है। देश की करोड़ों आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वनों पर निर्भर है। लकड़ी, औषधीय पौधे, फल, गोंद, शहद, लाख, बांस तथा अनेक वन उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। भारत की आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में प्रयुक्त अधिकांश जड़ी-बूटियां वनों से ही प्राप्त होती हैं। वन पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। वन अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास हैं। यदि वन नष्ट होंगे तो जैव विविधता भी समाप्त होने लगेगी और अनेक दुर्लभ जीव-जन्तियां हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी।</div>
<div>लेकिन दुर्भाग्य से विकास की अंधी दौड़ में वनों की लगातार कटाई हो रही है। सड़क निर्माण, औद्योगिक परियोजनाएं, खनन, अवैध लकड़ी कटाई और अनियोजित शहरी विस्तार के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में वृक्ष समाप्त हो रहे हैं। इसका दुष्परिणाम आज पूरी दुनिया भुगत रही है। तापमान लगातार बढ़ रहा है, वर्षा का स्वरूप बदल रहा है, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएं अधिक विनाशकारी होती जा रही हैं। मिट्टी का कटाव बढ़ने से कृषि भूमि की उर्वरता कम हो रही है। भूजल स्तर नीचे जा रहा है और अनेक क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। वनों के नष्ट होने से वन्यजीव मानव बस्तियों की ओर आने को विवश हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ रहा है।</div>
<div>वनों की कमी का सबसे बड़ा प्रभाव पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ता है। यदि वृक्ष कम होंगे तो वायु में प्रदूषण बढ़ेगा, ऑक्सीजन का स्तर घटेगा और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जाएगी। इससे जलवायु परिवर्तन और अधिक गंभीर होगा। आज महानगरों में बढ़ता प्रदूषण, असहनीय गर्मी और स्वच्छ हवा का संकट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हमने प्रकृति के साथ संतुलन खो दिया है। इसलिए वन महोत्सव केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ टूटते संबंधों को फिर से जोड़ने का प्रयास है।</div>
<div>वन महोत्सव मनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों में यह भावना विकसित करना है कि केवल एक दिन पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। जब तक पौधा एक मजबूत वृक्ष नहीं बन जाता, तब तक उसकी सुरक्षा, सिंचाई और संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। यदि लगाए गए पौधे जीवित नहीं रहेंगे तो वृक्षारोपण अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। इसी सोच के साथ अब विभिन्न राज्यों में जियो टैगिंग, निगरानी और जनभागीदारी पर विशेष बल दिया जा रहा है ताकि लगाए गए पौधों की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित की जा सके।</div>
<div>हाल के वर्षों में "एक पेड़ मां के नाम" जैसे अभियान ने वन महोत्सव को एक भावनात्मक स्वरूप भी दिया है। जब कोई व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में पौधा लगाता है, तो वह केवल पर्यावरण की सेवा नहीं करता, बल्कि उस पौधे से जीवनभर का भावनात्मक रिश्ता भी जोड़ लेता है। इसी प्रकार कई राज्य सरकारें मुफ्त पौधों का वितरण, वृक्ष रथ, हरित अभियान और जनसहभागिता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ रही हैं। दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किया गया "ट्री ऑन व्हील" अभियान इसी दिशा में एक अभिनव पहल है, जिसके माध्यम से पौधे लोगों के घरों तक पहुंचाए जा रहे हैं ताकि वृक्षारोपण को और अधिक सरल तथा व्यापक बनाया जा सके।</div>
<div>पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से वन महोत्सव अत्यंत अनुकूल और आवश्यक अभियान है। यह लोगों को केवल पौधे लगाने के लिए प्रेरित नहीं करता, बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी देता है। एक विकसित राष्ट्र वही होता है जो आर्थिक प्रगति के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का भी संरक्षण करे। यदि विकास के नाम पर केवल कंक्रीट के जंगल खड़े किए जाएंगे और प्राकृतिक जंगल समाप्त कर दिए जाएंगे, तो भविष्य में मानव जीवन स्वयं संकट में पड़ जाएगा। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</div>
<div>आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वन महोत्सव जैसे अभियान पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। यदि देश का प्रत्येक नागरिक हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखे, तो करोड़ों नए वृक्ष देश की हरियाली को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इससे स्वच्छ हवा, पर्याप्त वर्षा, जैव विविधता का संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।</div>
<div>अंततः, वन महोत्सव केवल एक सप्ताह का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनभर निभाए जाने वाला संकल्प है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव सभ्यता का संरक्षण है। यदि हम आज वृक्षों को बचाएंगे और नए वृक्ष लगाएंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, निर्मल जल, संतुलित जलवायु और समृद्ध प्राकृतिक धरोहर मिल सकेगी। इसलिए आइए, वन महोत्सव को केवल उत्सव न मानकर जनआंदोलन बनाएं और एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जहां हरियाली ही समृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की पहचान बने।</div>
<div>           *कांतिलाल मांडोत*</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:50:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पचदेवरा के प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार का हुआ भूमिपूजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पचदेवरा स्थित प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत 1 करोड़ 80 लाख रुपये की परियोजना का शनिवार को विधि-विधान के साथ भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद प्रवीण पटेल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। पचदेवरा का यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मंदिर का स्वरूप और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182278/bhoomipujan-for-the-renovation-of-the-ancient-temple-of-pachdevra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260627-wa01141.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पचदेवरा स्थित प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत 1 करोड़ 80 लाख रुपये की परियोजना का शनिवार को विधि-विधान के साथ भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद प्रवीण पटेल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। पचदेवरा का यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मंदिर का स्वरूप और अधिक भव्य एवं आकर्षक होगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वीकृत धनराशि से मंदिर के जीर्णोद्धार, परिसर के सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, मार्ग एवं अन्य आवश्यक विकास कार्य कराए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भूमिपूजन कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पर्यटन विभाग के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन, ग्राम प्रधान, क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में मंदिर परिसर में सुख-समृद्धि एवं क्षेत्र के विकास की कामना के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई। स्थानीय लोगों ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सरकार एवं जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल बताया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182278/bhoomipujan-for-the-renovation-of-the-ancient-temple-of-pachdevra</link>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:37:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने 365 मंदिरों व कुआं का किया निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा नगर पंचायत बिस्कोहर के 365 मन्दिरों/कुओं का निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा  नगर पंचायत बिस्कोहर में स्थित मन्दिरों व कुओं को देखा गया। पुरातात्विक महत्व के दृष्टिगत नगर पंचायत बिस्कोहर के 365 मन्दिरों/कुओं का जीर्णोद्वार कराने हेतु पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे रिपोर्ट शासन को प्रेषित किया गया है। पर्यटन विभाग द्वारा इसके जीर्णोद्वार का कार्य कराया जायेगा। </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी इटवा कुणाल, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत बिस्कोहर अखिलेश कुमार दीक्षित व अन्य संबधित उपस्थित थे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;">  </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;">  </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp">  </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181085/district-magistrate-inspected-365-temples-and-wells"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781274135687.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा नगर पंचायत बिस्कोहर के 365 मन्दिरों/कुओं का निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी0एन0 द्वारा  नगर पंचायत बिस्कोहर में स्थित मन्दिरों व कुओं को देखा गया। पुरातात्विक महत्व के दृष्टिगत नगर पंचायत बिस्कोहर के 365 मन्दिरों/कुओं का जीर्णोद्वार कराने हेतु पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे रिपोर्ट शासन को प्रेषित किया गया है। पर्यटन विभाग द्वारा इसके जीर्णोद्वार का कार्य कराया जायेगा। </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी इटवा कुणाल, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत बिस्कोहर अखिलेश कुमार दीक्षित व अन्य संबधित उपस्थित थे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181085/district-magistrate-inspected-365-temples-and-wells</link>
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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 21:02:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong> कसारी रामगढ़ स्थित भिखारी बाबा आश्रम परिसर में वृहस्पतिवार को सातवें दिन विराट रुद्र महायज्ञ में यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान जयकारे से समूचा परिसर गुंजायमान हो गया। शिव मंदिर में दूध से रुद्राभिषेक पूजन भी कराया गया। वृंदावन से आई बाल कथा वाचिका धानी शास्त्री ने भागवत कथा का रसपान कराया। वहीं भजन संध्या में वाराणसी से आए राष्ट्रीय बाल कलाकार श्री राम कृष्ण, श्री राधा कृष्ण व श्री राधे कृष्ण ने एक से बढ़कर एक भजन, गीत व गजल सुनाया। वहीं वृंदावन से आए कलाकारों की रासलीला</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180990/crowd-of-devotees-gathered-to-circumambulate-the-yagya-mandap"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001716465.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong> कसारी रामगढ़ स्थित भिखारी बाबा आश्रम परिसर में वृहस्पतिवार को सातवें दिन विराट रुद्र महायज्ञ में यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान जयकारे से समूचा परिसर गुंजायमान हो गया। शिव मंदिर में दूध से रुद्राभिषेक पूजन भी कराया गया। वृंदावन से आई बाल कथा वाचिका धानी शास्त्री ने भागवत कथा का रसपान कराया। वहीं भजन संध्या में वाराणसी से आए राष्ट्रीय बाल कलाकार श्री राम कृष्ण, श्री राधा कृष्ण व श्री राधे कृष्ण ने एक से बढ़कर एक भजन, गीत व गजल सुनाया। वहीं वृंदावन से आए कलाकारों की रासलीला देखने को भारी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। प्रकृति रक्षा के लिए 251 जड़ी बूटियों से निर्मित हवन सामग्री से आहुति दी गई। प्रतिदिन चलने वाले विशाल भंडारा में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के आयोजक भिक्षुक भिखारी जंगली दास दीनबंधु रमाशंकर गिरी जी महाराज ने बताया कि आचार्यगण गोपालधर द्विवेदी, राजेश कुमार पाठक, हरिओम द्विवेदी व अमरेश तिवारी द्वारा विराट रूद्र महायज्ञ एवं पूजन कार्य कराया जा रहा है। प्रतिदिन शिव मंदिर में दूध, गंगाजल से रुद्राभिषेक पूजन कराया जा रहा है। प्रकृति रक्षा के लिए 251 जड़ी बूटियों से निर्मित हवन सामग्री से आहुति दी जा रही है। प्रतिदिन चलने वाले विशाल भंडारा में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य यजमान दिनेश, उषा देवी, रूपा गुप्ता, देवेंद्र कुमार, चिंता मौर्य, उर्मिला देवी, विमला देवी, शशि देवी, विजय सिंह, मनीष कुमार, कृति सागर, शुभराम महाराज, परमानंद, रमेश कुमार, प्रहलाद, रामखेलावन, किरन मोदवाल, मानवी, संगीता, मुन्ना बाबा, केवलानंद महाराज, आनंद ओझा, राकेश पाठक, कालो देवी, डॉक्टर विजय, हीरा सिंह, संजय अग्रवाल, चांदनी अग्रवाल, संगीता, राजेश आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:56:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मां ज्वाला देवी धाम सिद्धपीठ के पर्यटन विकास हेतु 96.96 लाख ₹ की स्वीकृति मिली</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> जनपद के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां ज्वाला देवी धाम सिद्धपीठ के पर्यटन विकास को लेकर बड़ी सौगात मिली है। जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि नगर पंचायत मानिकपुर स्थित इस सिद्धपीठ के समग्र विकास हेतु शासन द्वारा 96.96 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि यह स्वीकृति धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी गई है। मां ज्वाला देवी धाम में वर्ष भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, विशेषकर नवरात्रि और अन्य पर्वों के दौरान यहां भारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172059/approval-of-%E2%82%B9-9696-lakh-was-received-for-tourism-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260301-wa0065.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> जनपद के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां ज्वाला देवी धाम सिद्धपीठ के पर्यटन विकास को लेकर बड़ी सौगात मिली है। जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने बताया कि नगर पंचायत मानिकपुर स्थित इस सिद्धपीठ के समग्र विकास हेतु शासन द्वारा 96.96 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि यह स्वीकृति धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी गई है। मां ज्वाला देवी धाम में वर्ष भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, विशेषकर नवरात्रि और अन्य पर्वों के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। स्वीकृत धनराशि से धाम परिसर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिये यात्री हाल का निर्माण, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु वाटर टैंक एवं वाटर कूलर की स्थापना, परिसर की स्वच्छता बनाये रखने के लिये डस्टबिन की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के लिये शौचालय निर्माण, आवागमन को सुगम बनाने हेतु इण्टरलाकिंग, जल आपूर्ति, साइनेज आदि के कार्य कराये जायेगें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि इन कार्यों के पूर्ण होने से धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और व्यवस्थित सुविधाएं मिलेंगी। इससे न केवल धार्मिक आस्था को सम्मान मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया है कि कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए समयबद्ध ढंग से निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172059/approval-of-%E2%82%B9-9696-lakh-was-received-for-tourism-development</link>
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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 19:47:02 +0530</pubDate>
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