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                <title>Suicide - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Suicide RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत,निष्पक्ष जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी।</strong> नैनी क्षेत्र के इंदलपुर ग्राम में जल संस्थान कर्मी इंद्रजीत भारतीया (30) की खुदकुशी के मामले में उसकी मां इन्द्रकली ने सवाल उठाया है। जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायती प्रार्थना पत्र देकर बेटे की मौत की जांच अपराध शाखा पुलिस से कराने की मांग की है।  मृतक आश्रित उसकी मां इन्द्रकली पत्नी स्वर्गीय हरिश्चंद्र ने जनसुनवाई पोर्टल में दर्ज कराई गई शिकायत में बेटे की हत्या किए जाने का शक जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञात हो कि 24 जनवरी 2026 की रात में इंद्रजीत भारतीया (30) पुत्र स्वर्गीय हरिश्चंद्र भारतीया का शव उसके कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला था। इंद्रजीत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171815/complaint-lodged-on-jansunwai-portal-demand-for-impartial-investigation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas49.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी।</strong> नैनी क्षेत्र के इंदलपुर ग्राम में जल संस्थान कर्मी इंद्रजीत भारतीया (30) की खुदकुशी के मामले में उसकी मां इन्द्रकली ने सवाल उठाया है। जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायती प्रार्थना पत्र देकर बेटे की मौत की जांच अपराध शाखा पुलिस से कराने की मांग की है।  मृतक आश्रित उसकी मां इन्द्रकली पत्नी स्वर्गीय हरिश्चंद्र ने जनसुनवाई पोर्टल में दर्ज कराई गई शिकायत में बेटे की हत्या किए जाने का शक जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञात हो कि 24 जनवरी 2026 की रात में इंद्रजीत भारतीया (30) पुत्र स्वर्गीय हरिश्चंद्र भारतीया का शव उसके कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला था। इंद्रजीत भारतीया जल संस्थान के इंदलपुर पानी की टंकी में तैनात रहा। उसकी मां इन्द्रकली ने बेटे की हत्या का शक जाहिर की है।  और मामले में निष्पक्ष जांच व एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 21:46:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में सुनार ने खुद को मारी गोली, इलाज के दौरान मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: हरियाणा के हिसार जिले में मंगलवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। शहर के व्यस्त इलाके गांधी चौक के पास एक ज्वेलर ने अपनी ही दुकान के अंदर खुद को गोली मार ली। गंभीर हालत में उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>मृतक की पहचान कपिल सोनी के रूप में</strong></p>
<p>पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान करीब 38 वर्षीय कपिल सोनी के रूप में हुई है। कपिल की गांधी चौक पर ज्वेलरी की दुकान है। वह रोज की तरह मंगलवार सुबह भी दुकान खोलने आया था।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165894/haryana-goldsmith-shot-himself-in-haryana-died-during-treatment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/haryana-news---2026-01-13t153611.824.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: हरियाणा के हिसार जिले में मंगलवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। शहर के व्यस्त इलाके गांधी चौक के पास एक ज्वेलर ने अपनी ही दुकान के अंदर खुद को गोली मार ली। गंभीर हालत में उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।</p>
<p><strong>मृतक की पहचान कपिल सोनी के रूप में</strong></p>
<p>पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान करीब 38 वर्षीय कपिल सोनी के रूप में हुई है। कपिल की गांधी चौक पर ज्वेलरी की दुकान है। वह रोज की तरह मंगलवार सुबह भी दुकान खोलने आया था।</p>
<p><strong>दोपहर 1 बजे के करीब उठाया खौफनाक कदम</strong></p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोपहर करीब 1 बजे कपिल दुकान के अंदर गया और वहां अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनते ही आसपास की दुकानों में अफरा-तफरी मच गई।</p>
<p><strong>पिता दुकान के बाहर बैठे थे</strong></p>
<p>बताया जा रहा है कि घटना के समय कपिल के पिता भगत सोनी दुकान के बाहर बैठे हुए थे। गोली की आवाज सुनते ही वे और आसपास के लोग अंदर पहुंचे, तब तक कपिल गंभीर रूप से घायल हो चुका था।</p>
<p><strong>अस्पताल में तोड़ा दम</strong></p>
<p>यल अवस्था में कपिल को तुरंत हिसार के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।</p>
<p><strong>पुलिस मौके पर, जांच शुरू</strong></p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, साथ ही लाइसेंसी हथियार से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 15:37:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में महिला की चाकू मारकर हत्या, आरोपी युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[<p></p>
<p><span class="cf1">Haryana News: हरियाणा</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">भिवानी</span> <span class="cf1">जिले</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">एक</span> <span class="cf1">सनसनीखेज</span> <span class="cf1">घटना</span> <span class="cf1">सामने</span> <span class="cf1">आई</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जहां</span> <span class="cf1">एक</span> <span class="cf1">महिला</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">चाकू</span><span class="cf1"> मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपी युवक ने दीवार से सिर मारकर आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने उसे पकड़ लिया। घटना </span><span class="cf1">भिवानी</span><span class="cf1"> शहर के </span><span class="cf1">हनुमान</span> <span class="cf1">गेट</span><span class="cf1"> इलाके की बताई जा रही है।</span></p>
<p><span class="cf1">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। घायल अवस्था </span><span class="cf1">में</span><span class="cf1"> युवक को तुरंत अस्पताल में </span><span class="cf1">भर्ती</span><span class="cf1"> कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा </span><span class="cf1">है</span><span class="cf1">। वहीं, महिला के शव को कब्जे में लेकर </span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164151/haryana-youth-accused-of-stabbing-woman-to-death-attempts-suicide"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/haryana-crime-news-(6).jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p><span class="cf1">Haryana News: हरियाणा</span> <span class="cf1">के</span> <span class="cf1">भिवानी</span> <span class="cf1">जिले</span> <span class="cf1">में</span> <span class="cf1">एक</span> <span class="cf1">सनसनीखेज</span> <span class="cf1">घटना</span> <span class="cf1">सामने</span> <span class="cf1">आई</span> <span class="cf1">है</span><span class="cf1">, </span><span class="cf1">जहां</span> <span class="cf1">एक</span> <span class="cf1">महिला</span> <span class="cf1">की</span> <span class="cf1">चाकू</span><span class="cf1"> मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपी युवक ने दीवार से सिर मारकर आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने उसे पकड़ लिया। घटना </span><span class="cf1">भिवानी</span><span class="cf1"> शहर के </span><span class="cf1">हनुमान</span> <span class="cf1">गेट</span><span class="cf1"> इलाके की बताई जा रही है।</span></p>
<p><span class="cf1">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। घायल अवस्था </span><span class="cf1">में</span><span class="cf1"> युवक को तुरंत अस्पताल में </span><span class="cf1">भर्ती</span><span class="cf1"> कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा </span><span class="cf1">है</span><span class="cf1">। वहीं, महिला के शव को कब्जे में लेकर </span><span class="cf1">पोस्टमार्टम</span><span class="cf1"> के लिए </span><span class="cf1">मॉर्च्युरी</span><span class="cf1"> में रखवाया गया है।</span></p>
<p><span class="cf1">पुलिस की शुरुआती जांच में यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच कर रही है। फिलहाल हत्या के कारणों और घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।</span></p>
<p><span class="cf1">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की सही तस्वीर सामने आ पाएगी। इलाके में घटना के बाद से दहशत का माहौल है।</span></p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/164151/haryana-youth-accused-of-stabbing-woman-to-death-attempts-suicide</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 11:46:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टूटती उम्मीदों का समाज और आत्महत्या का बढ़ता संकट, सभ्य समाज के लिए करुणाजनक स्थिति</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">स्कूल के बच्चों से लेकर सुरक्षाबलों के जवानों तक आत्महत्या की घटनाएं आज भारतीय समाज की सबसे पीड़ादायक और चिंताजनक सच्चाइयों में शामिल हो चुकी हैं। यह केवल किसी एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं होती बल्कि पूरे परिवार के लिए ऐसा कुठाराघात बन जाती है, जिसकी भरपाई जीवन भर नहीं हो पाती। हाल के वर्षों में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अब किसी एक वर्ग या आयु समूह तक सीमित नहीं रही, बल्कि किशोरों, युवाओं, विवाहित महिलाओं, कर्मचारियों और देश की सुरक्षा में तैनात जवानों तक फैली हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163503/a-society-of-broken-expectations-and-increasing-suicide-crisis-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/download-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">स्कूल के बच्चों से लेकर सुरक्षाबलों के जवानों तक आत्महत्या की घटनाएं आज भारतीय समाज की सबसे पीड़ादायक और चिंताजनक सच्चाइयों में शामिल हो चुकी हैं। यह केवल किसी एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं होती बल्कि पूरे परिवार के लिए ऐसा कुठाराघात बन जाती है, जिसकी भरपाई जीवन भर नहीं हो पाती। हाल के वर्षों में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अब किसी एक वर्ग या आयु समूह तक सीमित नहीं रही, बल्कि किशोरों, युवाओं, विवाहित महिलाओं, कर्मचारियों और देश की सुरक्षा में तैनात जवानों तक फैली हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन वर्षों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 438 जवानों ने आत्महत्या की। हालांकि सरकार का कहना है कि आत्महत्या के मामलों में हाल के वर्षों में कमी आई है। 2023 में जहां 157 आत्महत्याएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 133 रह गई। यह गिरावट राहत देने वाली लग सकती है, लेकिन समस्या की गंभीरता को कम नहीं करती। इसके साथ ही 2014 के बाद से अब तक 23,360 जवानों द्वारा इस्तीफा दिया जाना यह संकेत देता है कि सुरक्षाबलों के भीतर मानसिक दबाव, कार्यस्थल तनाव और पारिवारिक समस्याएं गहराई से मौजूद हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस्तीफों के आंकड़े भी चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। सबसे अधिक इस्तीफे सीमा सुरक्षा बल और असम राइफल्स से जुड़े हैं। बीएसएफ में 7,493, सीआरपीएफ में 7,456 और सीआईएसएफ में 4,137 जवानों ने सेवा छोड़ी। केवल 2025 तक ही 3,077 इस्तीफे दर्ज किए गए जिनमें से 1,157 बीएसएफ से हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि अनुशासन, देशसेवा और सम्मान के बावजूद जवान भी इंसान हैं, जिनकी भावनाएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां और मानसिक सीमाएं होती हैं। लगातार तनावपूर्ण ड्यूटी, लंबी तैनाती, परिवार से दूरी और पदोन्नति या छुट्टी से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे उन्हें भीतर से तोड़ देती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आत्महत्या की समस्या केवल सुरक्षाबलों तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2023 में देशभर में 1,71,418 लोगों ने आत्महत्या की। यह संख्या हर दिन औसतन 470 से अधिक मौतों को दर्शाती है। इन आत्महत्याओं का एक बड़ा कारण शादी और वैवाहिक जीवन से जुड़ी परेशानियां बताई गई हैं। वैवाहिक कलह, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, अवैध संबंधों का शक, तलाक की आशंका और सामाजिक दबाव कई लोगों को मानसिक रूप से इतना कमजोर बना देते हैं कि वे जीवन समाप्त करने जैसा कठोर कदम उठा लेते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं के लिए यह दौर विशेष रूप से निराशाजनक बनता जा रहा है। पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर होने के बावजूद सामाजिक अपेक्षाएं, पारिवारिक दबाव और रिश्तों में सम्मान की कमी उन्हें भीतर से तोड़ देती है। कई मामलों में महिलाएं लंबे समय तक मानसिक पीड़ा सहती रहती हैं, लेकिन समाज और परिवार उनकी वेदना को गंभीरता से नहीं लेता। जब कोई रास्ता नहीं दिखता, तब आत्महत्या उन्हें एकमात्र समाधान प्रतीत होने लगती है। इसे केवल व्यक्तिगत कमजोरी कहना नैतिक, कानूनी और संस्थागत विफलता को छिपाने जैसा है।</div>
<div style="text-align:justify;">सबसे अधिक चिंता का विषय किशोरावस्था में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्कूल जाने वाले बच्चे और टीनेजर आज जिस मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं, वह पहले कभी इतना गहरा नहीं था। पढ़ाई में प्रतिस्पर्धा, परीक्षा में अच्छे अंक लाने का दबाव, माता-पिता की अपेक्षाएं, सोशल मीडिया पर तुलना, साइबर बुलिंग और भावनात्मक अस्थिरता किशोरों को अंदर ही अंदर तोड़ रही है। इस उम्र में मस्तिष्क और भावनाएं दोनों विकास की अवस्था में होती हैं, इसलिए छोटी-छोटी असफलताएं भी उन्हें जीवन की सबसे बड़ी हार लगने लगती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई किशोर अपने माता-पिता से खुलकर बात नहीं कर पाते। डर रहता है कि डांट पड़ेगी, तुलना होगी या उनकी बातों को हल्के में लिया जाएगा। स्कूलों में काउंसलिंग की व्यवस्था अब भी सीमित है और जहां है भी, वहां मानसिक स्वास्थ्य को लेकर झिझक बनी रहती है। परिणामस्वरूप बच्चे अपने दर्द को भीतर दबाते रहते हैं, जो किसी एक क्षण में विस्फोट बनकर आत्महत्या का कारण बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आत्महत्या के कारणों पर गौर करें तो यह साफ दिखता है कि यह किसी एक वजह से नहीं होती। आर्थिक तंगी, बेरोजगारी, कर्ज, पारिवारिक कलह, प्रेम संबंधों में असफलता, सामाजिक अपमान, अकेलापन, अवसाद और नशे की लत जैसे कई कारण मिलकर व्यक्ति को इस अंधेरे रास्ते की ओर धकेलते हैं। किशोरों के मामले में पहचान का संकट, अस्वीकृति का डर और भविष्य को लेकर अनिश्चितता प्रमुख कारण बनते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल कानून बनाना या आंकड़े पेश करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत है लोगों के मन की वेदना को समझने की। परिवार को पहला सहारा बनना होगा। माता-पिता को बच्चों की उपलब्धियों के साथ-साथ उनकी असफलताओं को भी स्वीकार करना सीखना होगा। तुलना की जगह संवाद को महत्व देना होगा। स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि बच्चे अपनी भावनाओं को पहचानना और व्यक्त करना सीख सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकारी और निजी स्तर पर काउंसलिंग सेवाओं को सुलभ और सामान्य बनाना समय की मांग है। सुरक्षाबलों में नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच, तनाव प्रबंधन कार्यक्रम और परिवार से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील नीतियां अपनानी होंगी। जवानों को यह भरोसा दिया जाना चाहिए कि मानसिक परेशानी कमजोरी नहीं है, बल्कि एक मानवीय स्थिति है, जिसका समाधान संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं के लिए मजबूत सामाजिक समर्थन तंत्र तैयार करना होगा। घरेलू हिंसा और वैवाहिक उत्पीड़न के मामलों में त्वरित न्याय और सुरक्षित वातावरण देना जरूरी है। समाज को यह समझना होगा कि आत्महत्या किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आत्महत्या रोकथाम के उपाय तभी सफल हो सकते हैं जब हम संवेदनशीलता, संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दें। जीवन की किसी भी कठिन घड़ी में यह संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए कि वह अकेला नहीं है और उसकी पीड़ा सुनी जाएगी। उम्मीद की एक किरण कई बार किसी की पूरी जिंदगी बचा सकती है। जब समाज यह जिम्मेदारी समझेगा, तभी टूटती उम्मीदों के इस दौर में जीवन को फिर से संबल मिल सकेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 16:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बीएलओ का बीमा करवाये - निर्वाचन आयोग </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की समय-सीमा के चलते कार्य की अधिकता के कारण मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बीएलओ की आत्महत्या की खबरें आना वाकई बेहद दुखद है! एस आई आर कार्य के चलते बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की खबर भारत निर्वाचन आयोग के कानों तक पहुँची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आयोग द्वारा तत्काल राज्यों से बीएलओ के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई। निश्चय ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यों से बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद बीएलओ के हितार्थ कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय भी लिया जा सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत</span></p></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161623/get-blo-insured-election-commission"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download12.jpg" alt=""></a><br /><div>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की समय-सीमा के चलते कार्य की अधिकता के कारण मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बीएलओ की आत्महत्या की खबरें आना वाकई बेहद दुखद है! एस आई आर कार्य के चलते बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की खबर भारत निर्वाचन आयोग के कानों तक पहुँची</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आयोग द्वारा तत्काल राज्यों से बीएलओ के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई। निश्चय ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यों से बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद बीएलओ के हितार्थ कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय भी लिया जा सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत निर्वाचन आयोग से एक निवेदन एवं सुझाव है कि वह निर्वाचन कार्य में संलग्न देशभर के बीएलओ का बीमा करवाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी भी बीएलओ के साथ यदि कभी कोई घटना घटती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके परिवार को उसके नहीं रहने पर आर्थिक रूप से मजबूर नहीं होना पड़े। आज देशभर में अधिकांश बीएलओ शिक्षक हैं या फिर अन्य विभागों के तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें कुछ राज्य सरकार बीमा और पेंशन तक की सुविधा उचित रूप से नहीं दे पा रही हैं। फिर भी कर्मचारी सरकार के सभी कार्यों का पालन ईमानदारी से करते हैं ।</span> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के हर राज्य में सरकारी कर्मचारी अपनी क्षमता से अधिक कार्य करके सरकार की योजनाओं को जमीनी धरातल पर उतारते हैं। कुछ दो–पांच प्रतिशत कर्मचारी भले राजनीतिक शह के चलते अपने कार्य से बच जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह याद रखना चाहिए कि कर्मचारियों के बूते ही नौकरशाही चलती है। पिछले कुछ वर्षों से एक चलन बन गया है कि अव्वल आने की चाहत में कुछ जिलाधीश राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के हाथों पुरस्कृत होने की इच्छा में अपने कर्मचारियों पर क्षमता से कहीं अधिक कार्य करने का दबाव डालते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी मंशानुरूप कार्य नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों का या तो वेतन रोक लिया जाता है या फिर निलंबन किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों पर अपने ही अधिकारियों का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है और कर्मचारी परेशान होकर आत्महत्या तक को मजबूर हो जाते हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में बीएलओ की आत्महत्या के पीछे मुख्यतः यही कारण है कि जिले के एसी चेंबर में बैठने वाले और एसी गाड़ियों में घूमने वाले कुछ अधिकारी जमीन पर चलने वाले बीएलओ की मजबूरी नहीं समझ पाते और अनावश्यक कार्य का दबाव डालते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कर्मचारी आत्महत्या को मजबूर होते हैं ।</span>           </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">       भारत सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को चाहिए कि वर्षभर चलने वाले निर्वाचन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में संलग्न रहने वाले जमीनी स्तर के सभी बीएलओ कर्मचारियों का बीमा करवाया जाए और उनकी पदस्थ संस्था में राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान उनके कार्य का बोझ कम किया जाए। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिले की अफसरशाही को भी भौगोलिक स्थितियों के आधार पर अपने कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने की बजाय बढ़ाकर कार्य करने की नसीहत देना होगी। तभी बीएलओ और अन्य कर्मचारी निर्भीक होकर अपने कार्य को अधिक कुशलता से संपन्न करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आत्महत्या जैसी घटनाएँ नहीं होंगी और शासकीय विभागों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न नहीं लगेगा ।अतएव निर्वाचन कार्य में संलग्न देश के बीएलओ का निर्वाचन आयोग को बीमा करवाने पर विचार करना चाहिए।</span></p>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Nov 2025 16:39:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आर्थिक तंगी और पारिवारिक कलह के चलते संसार को अलविदा कह बैठे कानपुर के तीन लोग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>आर्थिक तंगी और उसकी वजह से ही पारिवारिक कलह के चलते तीन लोगों ने संसार को अलविदा कह दिया। आत्महत्या करने वाले तीनों लोगों की लाशों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद घटना की छानबीन भी शुरू कर दी है। वहीं उनके परिवार में कोहराम भी मचा हुआ है। आत्महत्या के रूप में असमय मौत को गले लगाने की यह घटनाएं पनकी, बर्रा व सचेंडी थानाक्षेत्र में अलग-अलग कारणों सें हुई। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  पहली घटना के बारे में मिली जानकारी के अनुसार बर्रा विश्वबैंक निवासी छक्की लाल (56) लोडर चालक थे, परिवार में पत्नी शांति व दो</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रविवार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161518/due-to-financial-crisis-and-family-discord-three-people-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>आर्थिक तंगी और उसकी वजह से ही पारिवारिक कलह के चलते तीन लोगों ने संसार को अलविदा कह दिया। आत्महत्या करने वाले तीनों लोगों की लाशों को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के बाद घटना की छानबीन भी शुरू कर दी है। वहीं उनके परिवार में कोहराम भी मचा हुआ है। आत्महत्या के रूप में असमय मौत को गले लगाने की यह घटनाएं पनकी, बर्रा व सचेंडी थानाक्षेत्र में अलग-अलग कारणों सें हुई। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पहली घटना के बारे में मिली जानकारी के अनुसार बर्रा विश्वबैंक निवासी छक्की लाल (56) लोडर चालक थे, परिवार में पत्नी शांति व दो बेटे अश्वनी और नीरज हैं। अश्वनी ने बताया कि पिता सांस की बीमारी से ग्रसित थे, जिसका इलाज चल रहा था। रविवार रात 8 बजे घर लौटने के बाद वह बेटे अंश व सोम के साथ खेल रहे थे। कुछ देर बाद वह बिना बताए घर से निकल गए। काफी देर तक वापस न आने पर तलाश शुरू की, लेकिन कोई पता नहीं चला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रविवार सुबह पनकी पुलिस को कपली गांव के पास ट्रेन की पटरी पर शव पड़ा मिला।  इसी तरह की दूसरी घटना के मुताबिक नौबस्ता के सिमरा गांव निवासी अविनाश पाल ऑटो पार्ट्स की दुकान में काम करते हैं। परिवार में 24 वर्षीय पत्नी सोनी, दो बच्चे अश्वनी और सात माह का बेटा है। परिजनों ने बताया कि रविवार को सोनी का पति अविनाश से खाना बनाने को लेकर झगड़ा हो गया, जिसके बाद पति सब्जी लेने बाजार चला गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बीच सोनी ने अपने सात माह के बेटे को सास को देकर फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली, जब पति सब्जी लेकर घर लौटा तो उन्हें घटना की जानकारी हुई। नौबस्ता थाना प्रभारी बहादुर सिंह ने बताया कि पति से विवाद के बाद पत्नी ने आत्महत्या की है। जबकि तीसरी घटना के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक सचेंडी के रामनारायण पुरवा निवासी ओम प्रकाश ट्रक ड्राइवर हैं। उनके परिवार में पत्नी, चार बेटे और एक शादीशुदा बेटी है। परिजनों ने बताया कि 20 वर्षीय बेटा विशाल ट्रक में क्लीनर का काम करता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रविवार रात को वह घर लौटा और अपने कमरे में सोने चला गया। आज सोमवार सुबह परिजन उठे तो उसका सब फंदे से लटकता हुआ मिला। घटना की जानकारी के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन तीनों घटनाओं का संबंध आर्थिक तंगी और इसी वजह से पारिवारिक कलह से जुड़ी बताई गई है । पुलिस ने तीनों की लाशों को पोस्टमार्टम भेजने के बाद घटना की छानबीन शुरू कर दी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 17:36:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहनशीलता का अभाव और बढ़ता आत्महत्या का संकट, बदलते समाज की बड़ी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज का समाज तेजी से बदल रहा है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, रिश्ते, करियर, और जीवनशैली हर स्तर पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इन परिवर्तनों का सबसे गहरा प्रभाव हमारे किशोरों, युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में टीनेजर्स और छात्र–छात्राओं में आत्महत्या की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखने को मिली है। कभी पढ़ाई का दबाव, कभी लव मैरेज में मतभेद, तो कभी पति–पत्नी के विवाद या सोशल मीडिया की आभासी वास्तविकताएं है।ये सभी कारण आज जीवन समाप्त करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सहनशीलता का अभाव  संकट की जड़ में छिपा बड़ा कारण है।सहनशीलता जिसका</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161499/lack-of-tolerance-and-increasing-suicide-crisis-is-a-big"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(2)5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज का समाज तेजी से बदल रहा है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, रिश्ते, करियर, और जीवनशैली हर स्तर पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इन परिवर्तनों का सबसे गहरा प्रभाव हमारे किशोरों, युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में टीनेजर्स और छात्र–छात्राओं में आत्महत्या की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखने को मिली है। कभी पढ़ाई का दबाव, कभी लव मैरेज में मतभेद, तो कभी पति–पत्नी के विवाद या सोशल मीडिया की आभासी वास्तविकताएं है।ये सभी कारण आज जीवन समाप्त करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहनशीलता का अभाव  संकट की जड़ में छिपा बड़ा कारण है।सहनशीलता जिसका अर्थ कठिन परिस्थितियों को धैर्य और समझदारी से संभालने की क्षमता है।आज की पीढ़ी में तेजी से घटती जा रही है।तकनीक और सोशल मीडिया ने जीवन को त्वरित बना दिया है। अब मनुष्य का धैर्य, प्रतीक्षा और संघर्ष जैसी मूल योग्यताएँ कमज़ोर पड़ रही हैं। हर चीज़ तुरंत चाहि।सफलता, मान्यता, प्यार, सराहना और समाधान। जब अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तब निराशा गहरी होती है। यह निराशा धीरे-धीरे अवसाद का रूप लेने लगती है और कई बार युवा इसे अंत का रास्ता समझ बैठते हैं। किशोरों और छात्रों में बढ़ती आत्महत्या का मुख्य कारण शिक्षा का दबाव सबसे बड़ा कारक रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिणाम आधारित शिक्षा का बोझ हम युवाओ पर जुल्म कर रहे है।आज छात्र सिर्फ पढ़ाई नहीं कर रहे, बल्कि प्रतिस्पर्धा की दौड़ में संघर्ष कर रहे हैं। बोर्ड का तनाव,कॉलेज प्रवेश का दबाव,करियर की अनिश्चितता, कोचिंग संस्थानों की रेसदोस्तों और समाज से तुलना यह सब एक छात्र के मन पर गहरा दबाव डालता है।नौंवी की छात्रा,दसवीं औरकिशोर वय के बच्चे दूसरी,तीसरी या पांचवी मंजिल से कूदकर जान देने की घटना हम हररोज अखबार में पढ़ते है।यह समाज पर काला कलंक है।शिक्षित समाज मे किसी कारणवश आत्महत्या करना तकलीफदेह है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असफलता समाज में एक कलंक की तरह देखी जाती है। बच्चे इस डर से घबरा जाते हैं कि वे माता–पिता, स्कूल या समाज की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरेंगे। यही दबाव कई बार उन्हें खुद को खत्म करने की ओर धकेल देता है। शहरों में अलगाव और अकेलापनअनेक छात्र घर से दूर हॉस्टल या किराए पर रहते हैं।जिससे अकेलापन, परिवार से दूरीऔरभावनात्मक सहयोग का अभाव इन कारणों से मानसिक तनाव बढ़ता है और नकारात्मक विचार मजबूत होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सोशल मीडिया की तुलना की बीमारी इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट जैसे माध्यमों पर दिखती परफेक्ट लाइफ युवा मन को भ्रमित कर देती है।वे अपने जीवन की तुलना दूसरों से करते हैं और खुद को असफल मान लेते हैं। टीनेजर्स में आत्महत्या का क्रेज  फैशन नहीं, गंभीर बीमारी है।समाज किस तरफ जा रहा है।आज किशोरों में आत्महत्या को कभी-कभी साहस आखिरी कदम या समाधान के रूप में देखा जाने लगा है, जो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। भावनात्मक परिपक्वता का अभाव बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किशोर मन तेजी से बदलता है। गुस्सा, प्रेम, असफलता और तनाव के समय वे निर्णय लेने में जल्दबाजी करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">भावनाओं पर नियंत्रण न होने से वे तत्काल प्रतिक्रिया में खतरनाक कदम उठा लेते हैं। लव रिलेशनशिप में टूटन12-18 वर्ष की उम्र में किशोर पहली बार प्रेम और आकर्षण की भावनाएँ महसूस करते हैं।ब्रेकअप या अस्वीकार किया जाना उनके लिए बड़ा सदमा होता है। वे इसे जीवन मृत्यु का प्रश्न समझ बैठते हैं।पति पत्नी के विवाद और आत्महत्या परिवार की टूटन का परिणाम है।विवाहिक संबंधों में बढ़ते तनाव भी आत्महत्या का बड़ा कारण बन रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आजआर्थिक दबाव अहंकार मनमुटाव बातचीत की कमी अविश्वास ने अलग कर दिया है।इन समस्याओं ने रिश्तों को कमजोर कर दिया है। लव मैरेज में अक्सर अपेक्षाएँ अधिक होती हैं। जब वास्तविकता कल्पना से भिन्न होती है, तो टकराव बढ़ता है। रोजाना होने वाले झगड़े कई बार मानसिक स्वास्थ्य को इतने प्रभावित कर देते हैं कि लोग चरम निर्णय लेने लगते हैं। समाज में आत्महत्या को बढ़ावा देने वाले अन्य कारक भी है। किशोर नशे की गिरफ्त में आने पर जल्द गुस्सा करते हैं और मानसिक नियंत्रण खो देते हैं। परिवार में भावनात्मक दूरीभी कारणभूत है।अब संयुक्त परिवारों की जगह छोटे परिवार आ गए हैं।बच्चे मोबाइल में, माता–पिता नौकरी में व्यस्त  बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो रहा है।आर्थिक असमानता और बेरोजगारीमुख्य कारण है। युवाओं में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। मीडिया में आत्महत्या की खबरों की ग्लैमराइजेशन पर प्रभाव पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगातार समाचार चैनल और सोशल मीडिया पर इन घटनाओं की विस्तृत कवरेज इससे जुड़े जोखिम को बढ़ाती है। समाधान ढूंढना होगा। इस संकट से बाहर कैसे निकले? आत्महत्या रोकी जा सकती है। यदि परिवार, समाज, स्कूल और सरकार मिलकर प्रयास करें। परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।बच्चों से बात करें। बच्चों की भावनाओं को समझें। उन्हें सुनें ।गलतियों पर गुस्सा न करें, बल्कि समझाएं।किसी से  तुलना बंद करें।हर बच्चा अलग है।उसे अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने दें। असफलता को स्वीकार करना सिखाएं। असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।यह भाव बच्चों में बचपन से बनाना जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्कूल और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य ,सहायता, काउंसलिंग सेंटर,हेल्पलाइन,तनाव प्रबंधन कार्यशालाएँ,खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम और परीक्षा परिणाम पर संतुलित नीति से छात्रों पर दबाव कम किया जा सकता है।  समाज की जिम्मेदारी आत्महत्या के मामलों को सनसनीखेज बनाने से बचें। भावनात्मक सहयोग की संस्कृति विकसित करें।पड़ोस और समाज में संवाद बढ़ाएं।नशे को रोकने के लिए अभियान चलाएं। डिजिटल दुनिया के प्रति जागरूकता लाए।सोशल मीडिया की अवास्तविक दुनिया से बच्चों को परिचित कराना है।स्क्रीन टाइम कम करानाऔरपरिवार के साथ समय बढ़ाना है।इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकतादेनी है।आवश्यक होने पर  मनोचिकित्स काउंसलर मनोवैज्ञानिक से सहायता लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानसिक बीमारी भी उतनी ही वास्तविक है जितनी शारीरिक बीमारी।सहनशीलता बढ़ाना ही समाधान की कुंजी है।आज की पीढ़ी को तकनीक ने बहुत कुछ दिया है, परंतु उसने मनुष्य की भावनात्मक शक्ति और सहनशीलता को कमजोर भी किया है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम अपने बच्चों और युवाओं में,धैर्य ,सहनशीलता, जीवन कौशलऔर  भावनात्मक मजबूती विकसित करें। आत्महत्या कोई समाधान नहीं है।यह एक स्थायी समस्या के लिए अस्थायी निर्णय है। यदि परिवार, स्कूल और समाज सही समय पर सही कदम उठाएँ, तो लाखों जीवन बचाए जा सकते हैं। हमें एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें हर बच्चा, हर युवा और हर परिवार संकट के समय संवाद करें, समाधान ढूंढें, और जीवन को महत्व दें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 16:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घघसरा गांव में दिल दहला देने वाली घटना: 21 वर्षीय युवती ने लगाया फांसी, बंद कमरे में लटका मिला शव - पुलिस जांच में जुटी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर।</strong> सहजनवां थाना क्षेत्र के घघसरा गांव में शनिवार सुबह एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई जिसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। 21 वर्षीय युवती पूनम सैनी ने अपने ही कमरे में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। सुबह जब घरवालों ने दरवाजा खटखटाया और भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। कमरे के बगल बने जंगले से झांककर देखा गया तो पूनम दुपट्टे के सहारे पंखे से लटकी मिली।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सूचना पर सहजनवां थाना प्रभारी महेश कुमार चौबे, चौकी प्रभारी दुर्गेश कुमार सिंह तथा फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161283/heart-wrenching-incident-in-ghaghsara-village-21-year-old-girl-hanged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/p--3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोरखपुर।</strong> सहजनवां थाना क्षेत्र के घघसरा गांव में शनिवार सुबह एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई जिसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। 21 वर्षीय युवती पूनम सैनी ने अपने ही कमरे में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। सुबह जब घरवालों ने दरवाजा खटखटाया और भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। कमरे के बगल बने जंगले से झांककर देखा गया तो पूनम दुपट्टे के सहारे पंखे से लटकी मिली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूचना पर सहजनवां थाना प्रभारी महेश कुमार चौबे, चौकी प्रभारी दुर्गेश कुमार सिंह तथा फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की बारीकी से जांच की। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद पाया गया, जिससे प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य संकलित किए और परिजनों से पूछताछ की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मृतका के पिता प्रदीप सैनी के मुताबिक, शुक्रवार की रात पूनम परिवार के साथ भोजन करने के बाद हमेशा की तरह अपने कमरे में सोने चली गई थी। सुबह देर तक न जागने पर परिजनों ने आवाज देकर और दरवाजा खटखटाकर उसे जगाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। संदेह होने पर जब जंगले से अंदर देखा गया तो सभी स्तब्ध रह गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों ने बताया कि पूनम कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान रहती थी और अक्सर अकेले रहने लगी थी। हालांकि परिवारवालों को अंदेशा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी। इस घटना ने पूरे परिवार के साथ गांव के लोगों को भी गहरे दुख में डाल दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूनम के पिता ने पुलिस से किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न करने की मांग की और पंचायतnama कर शव को अंतिम संस्कार के लिए सौंपने की गुजारिश की। ग्रामीणों एवं सम्मानित व्यक्तियों की मौजूदगी में पुलिस ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए शव परिजनों के हवाले कर दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 17:15:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक बच्चे के सुसाइड के पीछे छूटे अनुत्तरित सवाल! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दिल्ली में एक बहुत दुखद घटना हुई है. सेंट कोलंबा स्कूल के 10वीं के छात्र शौर्य पाटिल ने मंगलवार (18 नवंबर) दोपहर आत्महत्या कर ली. स्कूल से निकलने के बाद वह सीधे मेट्रो स्टेशन गया और प्लेटफॉर्म से कूद गया. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को जानकारी दी. पुलिस को उसके स्कूल बैग में एक हाथ से लिखा सुसाइड नोट मिला.यह वारदात बच्चों के मनोविज्ञान को समझने में नाकाम स्कूल टीचर्स और अभिभावकों के लिए एक सबक है जो बच्चे के मनोभाव को समय रहते नहीं पहचानते और बच्चे को मौत के मुंह में धकेलने का अपराध जाने अनजाने में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161267/unanswered-questions-left-behind-by-a-childs-suicide"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(3).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दिल्ली में एक बहुत दुखद घटना हुई है. सेंट कोलंबा स्कूल के 10वीं के छात्र शौर्य पाटिल ने मंगलवार (18 नवंबर) दोपहर आत्महत्या कर ली. स्कूल से निकलने के बाद वह सीधे मेट्रो स्टेशन गया और प्लेटफॉर्म से कूद गया. वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को जानकारी दी. पुलिस को उसके स्कूल बैग में एक हाथ से लिखा सुसाइड नोट मिला.यह वारदात बच्चों के मनोविज्ञान को समझने में नाकाम स्कूल टीचर्स और अभिभावकों के लिए एक सबक है जो बच्चे के मनोभाव को समय रहते नहीं पहचानते और बच्चे को मौत के मुंह में धकेलने का अपराध जाने अनजाने में करते हैं। आपको बता दें कि इस घटना से राजधानी में शोक की लहर दौड़ गई है. यह दर्दनाक घटना बुधवार 19 नवंबर को पश्चिमी दिल्ली के राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन पर हुई. छात्र की पहचान शौर्य प्रदीप पाटिल के रूप में हुई है, जो सेंट कोलंबस स्कूल में 10वीं कक्षा का छात्र था. पुलिस को शौर्य के बैग से एक सुसाइड नोट मिला है. डेढ़ पन्ने के इस नोट में उसने अपने स्कूल के शिक्षकों और प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूरे मामले को समझने पर पता चलता है कि शौर्य ऐसा किशोर था जो बहुत संवेदनशील और कर्तव्य बोध से भरा था शौर्य मरने के बाद भी अपने अंगों को किसी जरूरत मंद के लिए देने की सोच लिख गया यह छात्र बेहद संवेदनशील और जिम्मेदार प्रवृति का था लेकिन सभी छात्रों के साथ कठोरता और दुर्व्यवहार करने वाले टीचर उसे लगातार मानसिक उत्पीड़न करते रहे उसके आंसुओं को भी नही समझ पाए उल्टा ताना मारा जितना रोना है रो ले हम पर कोई असर नहीं होता है। ऐसे टीचर्स को जो बच्चों की ह्रदय की भावनाओं को ठेस पहुचा कर उत्पीड़न करते हैं किसने चयन व नियुक्त किया? क्या ऐसे टीचर बच्चों के भविष्य और जीवन से खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं? </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें शौर्य के पिता ने आरोप लगाया कि उनका बेटा महीनों से स्कूल में उसके साथ हो रहे व्यवहार से जूझ रहा था.शौर्य के पिता प्रदीप पाटिल का कहना है कि उनका बेटा लगभग एक साल से टीचरों की डांट, बदसलूकी और अपमान झेल रहा था. कुछ दिन पहले डांस प्रैक्टिस के दौरान जब वह स्टेज पर गिर गया तो एक टीचर ने ताना मारते हुए कहा, “जितना रोना है रो लो, मुझे फर्क नहीं पड़ता.” इस घटना के बाद शौर्य काफी दुखी हो गया. घरवालों ने शिकायत की तो स्कूल ने उल्टा उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट देने और स्कूल से निकालने की धमकी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> पिता ने कहा, 'वह मुझे और मेरी पत्नी को बताता था कि टीचर्स उसे हर छोटी-छोटी बात पर डांटते थे और उसे मानसिक रूप से आहत करते थे. हमने कई बार मौखिक रूप से शिकायत की, लेकिन वे नहीं माने.' उन्होंने कहा कि दसवीं कक्षा की परीक्षाएं नज़दीक आने के कारण उन्होंने हमने स्कूल बदलने से परहेज किया. शौर्य के पिता ने कहा, 'उसकी परीक्षाएं एक-दो महीने में होने वाली थीं. बीस अंक स्कूल से मिलते हैं. मैं किसी भी तरह की परेशानी नहीं चाहता था.' पिता ने आगे कहा कि परिवार ने लड़के को आश्वासन दिया था कि परीक्षाएं खत्म होने के बाद उसका दाखिला किसी दूसरे स्कूल में करा दिया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शौर्य के बैग से पुलिस को डेढ़ पन्ने का सुसाइड नोट मिला. उसमें उसने टीचर्स और स्कूल मैनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगाए. उसने लिखा, 'स्कूल वालों ने इतना बोला कि मुझे यह करना पड़ा... स्कूल की टीचर है ही ऐसी, क्या बोलूं…' नोट में उसने अपने माता-पिता और भाई से माफी भी मांगी. शौर्य के सुसाइड नोट से उसके संवेदनशील ह्रदय का पता चलता है जिसे व्यवसायिक स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर नहीं समझ सके या यह कहना चाहिए कि बच्चे की संवेदनशीलता को अपने व्यवहार से लगातार चोटिल करते रहे। उसने लिखा 'मेरे पेरेंट्स ने बहुत कुछ किया… आई एम सॉरी… मैं उन्हें कुछ नहीं दे पाया. अगर किसी को जरूरत हो तो मेरे अंग दान कर देना।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुसाइड नोट में आरोपों के आधार पर पुलिस ने सेंट कोलंबस स्कूल की प्रिंसिपल अपराजिता पाल और तीन शिक्षिकाओं- मन्‍नू कालरा (कोऑर्डिनेटर), युक्ति महाजन (एसएसटी टीचर) और जूली वर्गीस के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इन पर मानसिक उत्पीड़न और बच्चे को लगातार प्रताड़ित करने के आरोप हैं. सुसाइड नोट में शौर्य ने लिखा.. यदि मेरे शरीर का कोई भी हिस्सा काम करता हो या काम करने की स्थिति में बचे तो कृपया इसे किसी ऐसे व्यक्ति को दान करें जिसे वास्तव में इसकी जरूरत हो.मेरे माता-पिता ने बहुत कुछ किया, आई एम सॉरी मैं उनको कुछ नहीं दे पाया, सॉरी भैया मैं बदतमीज था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सॉरी मम्मी आपका इतनी बार दिल तोड़ा. अब आखिरी बार दिल तोड़ूंगा. स्कूल के टीचर्स अब हैं ही ऐसे कि क्या बोलूं. युक्ति मैम, पाल मैम, मनु कालरा मैम. मेरी आखिरी इच्छा है कि इनके ऊपर एक्शन लिया जाए. मैं नहीं चाहता कोई और बच्चा मेरी तरह कुछ करे. अब कृपया इससे आगे का मत पढ़ो. केवल मेरे परिवार के सदस्यों के लिए है.... सॉरी भैया मैंने गाली दी, आपसे बहस की. जो बड़े भाई का सम्मान करना चाहिए था वो नहीं किया. वेरी सॉरी पापा, आप मुझसे वेप के लिए कभी माफ़ नहीं करोगे और करना भी नहीं चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुझे अच्छा इंसान बनना चाहिए था आपके जैसा. मम्मी आप ही हो जिसने मुझे सपोर्ट किया. ऐसे पार्थ भैया को भी और पापा को भी करते हैं. कॉल करें.... मुझे खेद है लेकिन सेंट कोलंबा के शिक्षकों ने ऐसा किया है मेरे साथ' राजा गार्डन मेट्रो पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 107 (उकसाने) के तहत FIR दर्ज की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बच्चे की सुसाइड की सवाल पीछे छोड़ती है इतना होनहार, शांत और पढ़ाई में आगे रहने वाला बच्चा इतना टूट कैसे गया. इस घटना को लिखते हुए इस आलेख के लेखक की आंखे भी सजल हो गई हैं। कहां से आती है ऐसी हैवानियत भरी सोच जो किसी निर्दोष छात्र को भीतर तक तोड़ने वाला मानसिक प्रताड़ना देती है? प्रिंसिपल अपने अधीनस्थ टीचर्स के बच्चों के साथ दुर्व्यवहार पर नोटिस क्यों नहीं लेते? क्या निजी स्कूल सिर्फ पैसे कमाने का व्यवसाय मात्र हैं? यदि बच्चा किसी मानसिक अवसाद मे जा रहा था तो समय रहते उसकी काउंसलिंग क्यों नहीं की गई?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीएसई और आइएसई बोर्ड की मान्यता के लिए स्कूल में मेडिकल सुविधा अनिवार्य है फिर बच्चे की मानसिकता पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? शौर्य की मौत की सवाल छोड़ गयी है यह उन अभिभावकों के लिए भी जो बच्चों को सिर्फ नंबर गेम में उलझा कर इंजीनियर डाक्टर बनाने का सपना देखते हैं लेकिन बच्चे के स्वाभाविक विकास और भावनाओं को नही पहचानते। कोई स्कूल कोचिंग किसी बच्चे को कलक्टर या अफसर बनाने की फैक्टरी नही है हर बच्चा अपना मौलिक योग्यता लेकर पैदा होता है यूपीएससी का कोचिंग देने वाले टीचर खुद क्वालिफाई नही कर पाए तभी कोचिंग में पढ़ा रहे हैं। टीचर्स को बच्चों के प्रति जागरूक और संवेदनशील होना चाहिए ताकि किसी बगिया के अधखिले फूल की असमय मौत न हो!</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 16:39:17 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सागौन के पेड़ से लटकता मिला व्यक्ति का शव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिषखोप टोला पेड़ारी निवासी  44 वर्षीय रामदास पुत्र जगदेव का शव गांव से दक्षिण सीवान में स्थित सागौन के पेड़ से रस्सी के सहारे लटकता हुआ शव मिला है। सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस व फोरेंसिक टीम ने जांच-पड़ताल के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जानकारी के मुताबिक परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिषखोप टोला पेड़ारी निवासी रामदास पुत्र जगदेव का सोमवार की रात किसी बात को लेकर उनकी पत्नी से कहासुनी हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि सोमवार की रात करीब 10 बजे पत्नी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158947/dead-body-of-a-person-found-hanging-from-a-teak"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/तीसरा,,,3..jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिषखोप टोला पेड़ारी निवासी  44 वर्षीय रामदास पुत्र जगदेव का शव गांव से दक्षिण सीवान में स्थित सागौन के पेड़ से रस्सी के सहारे लटकता हुआ शव मिला है। सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस व फोरेंसिक टीम ने जांच-पड़ताल के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जानकारी के मुताबिक परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिषखोप टोला पेड़ारी निवासी रामदास पुत्र जगदेव का सोमवार की रात किसी बात को लेकर उनकी पत्नी से कहासुनी हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि सोमवार की रात करीब 10 बजे पत्नी से नाराज होकर रामदास घर से निकल गया। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन किया लेकिन कहीं पता नही चला। वहीं मंगलवार की सुबह सीवान के तरफ जा रहे कुछ युवकों ने सागौन के पेड़ से लटकता हुआ शव देखा। युवकों के शोर मचाने पर मौके पर ग्रामीण इकठ्ठा हो गए। सूचना पर रोती-बिलखती पहुंची पत्नी मंजू ने शव का शिनाख्त की। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस व फोरेंसिक टीम ने जांच-पड़ताल के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 18:31:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>संघर्ष से किनारा - जरा जरा सी चुनौती पर दे रहे हैं जान! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आजकल लोग जरा जरा सी बात पर सुसाइड कर रहे है। देश में विभिन्न कारणों से सभी वर्गों के लोगों में आत्महत्या करने की मनोवृत्ति बहुत तेजी से बढ़ रही हैं जिससे बड़ी संख्या में परिवार उजड़ रहे हैं। अधिकांश परिवारों के इकलोते चिराग असमय बुझ रहें हैं। आपको बता दें कि आए दिन आत्महत्या के मामलों की झड़ी लगी है इस मे प्रशासनिक अधिकारी पुलिस अधिकारी से लेकर आम आदमी तक जिंदगी की जंग से हार कर सुसाइड कर रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले दिनों एडीजीपी वाई पूरण कुमार ने गोली मार खुदकुशी कर ली। चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में घर के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158516/refraining-from-conflict-sacrificing-life-for-the-slightest-challenge"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आजकल लोग जरा जरा सी बात पर सुसाइड कर रहे है। देश में विभिन्न कारणों से सभी वर्गों के लोगों में आत्महत्या करने की मनोवृत्ति बहुत तेजी से बढ़ रही हैं जिससे बड़ी संख्या में परिवार उजड़ रहे हैं। अधिकांश परिवारों के इकलोते चिराग असमय बुझ रहें हैं। आपको बता दें कि आए दिन आत्महत्या के मामलों की झड़ी लगी है इस मे प्रशासनिक अधिकारी पुलिस अधिकारी से लेकर आम आदमी तक जिंदगी की जंग से हार कर सुसाइड कर रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले दिनों एडीजीपी वाई पूरण कुमार ने गोली मार खुदकुशी कर ली। चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में घर के बेसमेंट में बने कमरे में पीएसओ की सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारी गई। आठ पेज का सुसाइड नोट, एक दिन पहले लिखी गई वसीयत भी मिली है। एक दिन पहले रिश्वत मांगने के मामले में उनका सुरक्षाकर्मी गिरफ्तार हुआ था।एडीजीपी जैसे स्तर पर तैनात अधिकारी भी यदि सुसाइड जैसा कायरता भरा कदम उठाता है तो समाज में गहरे तक टूट रहे आत्मविश्वास धैर्य और संघर्ष की नैतिक साहस की समीक्षा की जानी चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एडीजपी आईपीएस वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद हरियाणा पुलिस महकमा में हड़कंप मचा हुआ है। आईपीएस पूरन कुमार के बाद एएसआई संदीप लाठर ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। रोहतक आईजी ऑफ‍िस की साइबर सेल में तैनात एएसआई संदीप लाठर ने छह दिन बाद अपने सिर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली।एएसआई ने एडीजीपी पूरन सिंह पर तमाम आरोप सुसाइड नोट में लगाएं हैं। लेकिन सवाल फिर ज्यों का त्यों है कि आखिर ये लोग यदि विभागीय कार्यप्रणाली से या उच्च पदस्थ अधिकारियों के व्यवहार से परेशान थे तो अदालत क्यों नहीं गए? क्या समर्थ सक्षम आइपीएस अधिकारी को भी देश की न्याय व्यवस्था या उच्चधिकारियों पर भरोसा नहीं है? </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब कुछ और वारदातों पर नजर डालिए महाराष्ट्र के सातारा ज़िले में 28 वर्षीय महिला डॉक्टर की रहस्यमयी आत्महत्या ने पूरे राज्य को हिला दिया है. इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. पुलिस ने आरोपी पुलिस उपनिरीक्षक गोपाल बदाने को गिरफ्तार कर लिया है, जिस पर पीड़िता ने यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगाए थे. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें 'सतारा' (महाराष्ट्र) में 'फलटन' तहसील के एक सरकारी अस्पताल की इस महिला डाक्टर ने आत्महत्या कर ली। अपनी हथेली पर लिखे सुसाइड नोट में डाक्टर ने एक पुलिस उप निरीक्षक 'गोपाल बदाने' पर उसके साथ कई बार बलात्कार करने और 'प्रशांत बांकर' नामक एक अन्य पुलिस कर्मी पर उसे मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए हैं। सरकारी सेवा में पदस्थ एक डाक्टर भी यदि किसी अप्रिय घटना का शिकार बन जाने पर देश की अदालतों पर भरोसा नहीं कर रहा है कि उसे न्याय मिलेगा तो यह बेहद चिंता जनक है ।इसी तरह कुछ और वारदातों से आपको अवगत कराते है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">'देवरिया' (उत्तर प्रदेश) में अपनी 6 वर्षीय बेटी के बलात्कार से आहत उसके पिता ने आत्महत्या कर ली। बलात्कार करने वाला इसी बच्ची के पिता का मित्र था जो उनके साथ एक ही मकान में किराए पर रहता था। 'कोटा' (राजस्थान) में 'सरकारी मैडीकल कालेज' में एम.बी.बी.एस. की तीसरे वर्ष की छात्रा 'प्राची मीणा' ने हाल ही में सम्पन्न परीक्षा में कम अंक पाने के कारण डिप्रैशन में आत्महत्या कर ली। 'मध्य मुम्बई' में 'सोनू बराई' नामक युवक ने अपनी प्रेमिका 'मनीषा यादव' को मिलने के बहाने बुलाया। 'सोनू बराई' को संदेह था कि 'मनीषा' के किसी दूसरे युवक से अवैध सम्बन्ध हैं। इस कारण दोनों में झगड़ा हुआ और फिर 'सोनू' ने चाकू से उसे मार डालने के बाद स्वयं भी अपना गला रेत कर अपने जीवन का अंत कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>'एर्नाकुलम' (केरल) में 'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)'</strong></div>
<div style="text-align:justify;">की स्थानीय समिति के पूर्व सचिव 'पंकजाक्षन' ने आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार 'पंकजाक्षन' ने यह कदम आर्थिक कारणों से डिप्रैशन का शिकार होने के परिणामस्वरूप उठाया। 'लाडवा' (हरियाणा) के 'बपदा' गांव में 6 महीने की गर्भवती महिला 'काजल' ने घर में फंदा लगा कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतका की बहनों के अनुसार 22 अक्तूबर, 2023 को विवाह के बाद से ही 'काजल' अपने ससुराल में दुखी थी। 'गनौर' (हरियाणा) के गांव 'नया बांस' में दहेज प्रताड़ना से तंग आकर 'रवीना' नामक एक महिला ने फंदा लगा कर अपनी जान दे दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मृतका के मायके वालों का आरोप है कि विवाह के बाद से ही उसे लगातार ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था 'रायपुर (छत्तीसगढ़) में 25 वर्षीय नवविवाहिता 'मंजूषा गोस्वामी' ने अपने पति आशीष द्वारा किसी बात पर नाराज होकर उसे थप्पड़ मार देने से आहत होकर फांसी लगा ली 'अलवर' (राजस्थान) के गांव 'बहला' में पैसों को लेकर अपने पिता से विवाद के चलते 'राहुल जाटव' नामक युवक ने अपनी पत्नी की साड़ी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोयम्बटूर' (तमिलनाडु) में ' डिफैंस सिक्योरिटी कोर 'के जवान' एस. सानू'ने 'सुल्लूर' एयरफोर्स स्टेशन में अपने सर्विस रिवाल्वर से स्वयं को गोली मार ली। उसकी पत्नी का कहना है कि वह तनाव में था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये तो मात्र कुछ दिनों में सामने आई घटनाएं हैं। इन्हीं से अनुमान लगाया जा सकता है कि एक वर्ष में कितने लोग अपनी जान गंवा लेते होंगे। ज्यादातर करियर, दुर्व्यवहार, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, विवाह, काम सम्बन्धी तनाव, प्रेम प्रसंग, बलात्कार आदि समस्याएं आत्महत्याओं के कारण बन रही हैं। इनका एक मुख्य कारण संयुक्त परिवारों का न होना भी है।परिवार में कोई बड़ा-बुजुर्ग, माता-पिता आदि न होने के कारण अवसादग्रस्त व्यक्ति ऐसा कदम उठाने को प्रेरित हो जाता है और अपने पीछे परिवार को रोता-बिलखता छोड़ जाता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए बच्चों को बचपन से ही मानसिक तौर पर मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि वह किसी भी स्थिति में धैर्य नहीं टूटना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल कोविड के बाद आम आदमी में जीवन के प्रति हताशा की सोच बन रही है लोग छोटे छोटे विवाद को लेकर जान देने पर आमादा हो जाते हैं अधिकारी व्यापारी किसान सेवारत लोगों से लेकर छात्र और नाबालिग भी जीवन से हताश होकर आत्महत्या कर रहे हैं समाज शास्त्रियों के लिए यह शोध का विषय है कि आखिर जीवन के प्रति इतनी हताशा कहां से आ रही है?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 15:28:33 +0530</pubDate>
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                <title>भारत मे पुरुष आयोग का गठन जल्द करे - भारत सरकार  </title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">   वर्तमान आधुनिक युग मे आज अमूमन आम हो या खास बड़े हो या छोटे या आमिर हो या गरीब परिवारों मे सबसे बड़ी समस्या वेचारिक भिन्नता कि हे जिसके चलते आज आम घरों मे भोतिक सुख सुविधा ओर विलासिता की सबकुछ वस्तुए होने के बाद भी बड़ी संख्या मे स्त्री हो या पुरुष अपने ही घर के अंदर कुंठित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रताड़ित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उदास ओर अकेलापन  महसूस करता हे ! इसी वैचारिक भिन्नता के चलते आज घरों मे क्लेश होना आम बात हो गई हे ! आज देश की अदालतों मे इसी  वैचारिक भिन्नता के चलते ही परिवार टूटने के कारण</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156874/mens-commission-should-be-constituted-in-india-soon-government"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  वर्तमान आधुनिक युग मे आज अमूमन आम हो या खास बड़े हो या छोटे या आमिर हो या गरीब परिवारों मे सबसे बड़ी समस्या वेचारिक भिन्नता कि हे जिसके चलते आज आम घरों मे भोतिक सुख सुविधा ओर विलासिता की सबकुछ वस्तुए होने के बाद भी बड़ी संख्या मे स्त्री हो या पुरुष अपने ही घर के अंदर कुंठित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रताड़ित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उदास ओर अकेलापन  महसूस करता हे ! इसी वैचारिक भिन्नता के चलते आज घरों मे क्लेश होना आम बात हो गई हे ! आज देश की अदालतों मे इसी  वैचारिक भिन्नता के चलते ही परिवार टूटने के कारण सर्वाधिक तलाक ओर पारिवारिक संपत्ति  के केस अदालतों मे लंबित हे ! स्त्री हो या पुरुष दोनों को ही जब इस देश मे स्वतंत्रता पूर्वक जीने का अधिकार समान हे तो फिर दोनों को ही अपनी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार क्यों नहीं हे </span>? </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिस प्रकार महिलाओं के हितों रक्षा करने ओर उनको बढ़ावा देने के उद्देश से जिस प्रकार से राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया हे उसी प्रकार से देश मे राष्ट्रीय पुरुष आयोग का भी गठन भी किया जाना चाहिए था किन्तु वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए देश मे पुरुष आयोग का गठन किया जाना एक नितांत आवश्यकता हे ! देश जेसे जेसे संपन्न आधुनिक ओर हाइटेक होता जा रहा हे वेसे वेसे पारिवारिक कलह तनाव अनिद्रा आज देश के लोगों की गंभीर समस्या का रूप धारण करता जा रहा हे !</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> बेशक जिस प्रकार से इस आधुनिक युग मे महिलाओं के हितार्थ अपनी बात रखने हेतू ओर उन्हें न्याय दिलाने हेतू  राष्ट्रीय महिला  आयोग कार्य करता हे उसी तर्ज पर पुरुष मन की बात समझने सुनने हेतू  भी पुरुष आयोग का होना बेहद जरूरी हे ! पारिवारिक तनाव के चलते देश मे अमूमन रोज ही पुरुषों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं कि बढ़ोतरी  इस बात कि ओर भी इंगित किया जाता हे कि उसके मन कि बात सुनने वाला उसकी तकलीफ को समझने वाला न कोई घर परिवार ओर सरकार के सिस्टम मे था जिसके चलते आत्महत्या जेसे घातक कदम उठाने से भी अब युवा पुरुष हिचकते नहीं हे ! </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> बेकोल आज की नारी सब पर भारी  हे ओर यह देश के लिए बड़े गर्व कि भी बात हे कि  हिंदुस्तान मे कभी चार दीवारी मे कैद रहने वाली नारिया आज आधुनिक युग मे देश के सर्वोच्च पद से लेकर हर क्षेत्र मे पुरुषों  कि बराबरी से कार्य कर रही हे ! अब इस देश मे गाव हो या शहर नारी खुद अपने बूते आत्मनिर्भर होकर खड़ी हुई हे जिसके चलते वह अब अपने अनुसार अपना जीवन जीना चाहती हे ओर यही वजह आज घरों मे महिला पुरुष ओर बच्चों कि वेचारिक भिन्नता का सबसे बड़ा कारण भी बनता रहा हे ! देश मे आज उच्च  शिक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घरों मे पारिवारिक विघटन होना विकसित होते भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करता हे !</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> आज देश मे आदमी जितना ज्यादा शिक्षित ओर संपन्न होता जा रहा हे तो अपराध भी उतने ही हाईटेक होते जा रहे हे ! पहले हर अपराध के पीछे पुरुष का हाथ होता था ओर उसे उसके जघन्य अपराधों के लिए फांसी तक कि सजा इस देश के कानून ने दी  हे लेकिन आज के आधुनिक युग मे महिलाएं भी अपराध को अंजाम देने मे पुरुषों से पीछे नहीं रही हे ! इस देश मे दर्जनों प्रकरण ऐसे अभी सामने आए जिसमें महिलाओं द्वारा साजिश रचकर अपने ही पति या परिवार के लोगों की आत्महत्या कि गई या फिर अपनी ही पत्नी कि प्रताड़ना से तंग आकर दर्जनों पुरुषों को आत्महत्या  करने पर मजबूर कर देना इस ओर इंगित करता हे कि आज देश मे परिवार वेचारिक बारूद के ढेर पर टीके हे ओर आज यह कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि कब तक इन रिश्तों मे मिठास कायम रहेगी !</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> देश मे बढ़ते पारिवारिक विघटन को रोकना हे ओर सभी धर्मों जाती के परिवारों मे शांति ओर प्रेम का वातावरण बना रहे तो महिलाओ कि तरह पुरुषों को भी अपने मन कि बात कहने का अपने दुख दर्दों को बया करने का ओर घोर निराशा मे भी उम्मीदों कि लो जगाने वाला मंच की  नितांत आवश्यकता हे ! अत :भारत सरकार से निवेदन हे कि राष्ट्रीय महिला आयोग की तरह ही देश मे राष्ट्रीय पुरुष आयोग का गठन यथाशीघ्र किया जाए ताकि पुरुष भी अपने  मन कि बात से अपने दिल के दर्द  से देश को अवगत करा सके !</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 16:09:30 +0530</pubDate>
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