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                <title>Global Market Volatility - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>मध्यपूर्व की जंग और विश्व व्यवस्था पर मंडराता संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में छिड़ी इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच की भीषण सैन्य टकराहट ने वैश्विक राजनीति को अस्थिर कर दिया है। इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर की गई एयरस्ट्राइक तथा उसके जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने से यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि बहुस्तरीय क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो इसके दूरगामी प्रभाव पूरी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172014/middle-east-war-and-the-crisis-looming-on-the-world"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/मध्यपूर्व-की-जंग-और-विश्व-व्यवस्था-पर-मंडराता-संकट.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में छिड़ी इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच की भीषण सैन्य टकराहट ने वैश्विक राजनीति को अस्थिर कर दिया है। इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर की गई एयरस्ट्राइक तथा उसके जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने से यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि बहुस्तरीय क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो इसके दूरगामी प्रभाव पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आगे की स्थिति बेहद संवेदनशील है। ईरान यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बनाता है तो ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक धमनियां प्रभावित होंगी। यह मार्ग विश्व के बड़े हिस्से के कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। यदि इस मार्ग पर सैन्य गतिविधि बढ़ती है या आवागमन बाधित होता है तो ऊर्जा संकट गहरा सकता है। इससे न केवल तेल की कीमतों में उछाल आएगा बल्कि परिवहन लागत और उत्पादन लागत भी बढ़ेगी। ऊर्जा पर निर्भर उद्योगों में महंगाई का दबाव बढ़ेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यापार पर इसका असर बहुआयामी होगा। खाड़ी क्षेत्र एशिया यूरोप और अफ्रीका के बीच एक प्रमुख व्यापारिक सेतु है। दुबई दोहा रियाद जैसे शहर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स के बड़े केंद्र हैं। यदि हवाई क्षेत्र बंद होते हैं और समुद्री मार्ग असुरक्षित होते हैं तो कंटेनर शिपिंग और एयर कार्गो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ेगा जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे। वैश्विक सप्लाई चेन जो पहले ही महामारी और अन्य भू राजनीतिक संकटों से जूझ चुकी है वह फिर से बाधित हो सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स ऑटोमोबाइल फार्मास्यूटिकल्स और खाद्य तेल जैसे क्षेत्रों में कीमतें बढ़ने की आशंका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे देशों के लिए स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक हो सकती है क्योंकि ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। यदि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो चालू खाता घाटा और मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ेगा। सरकारों को ईंधन सब्सिडी या करों में राहत देने जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं जिससे राजकोषीय संतुलन प्रभावित होगा। साथ ही खाड़ी देशों में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और उनकी आय पर भी असर पड़ सकता है जिससे रेमिटेंस में कमी आ सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉलर की कीमत पर भी इस युद्ध का गहरा प्रभाव पड़ सकता है। परंपरागत रूप से वैश्विक संकट के समय निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं और अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित मुद्रा माना जाता है। इसलिए शुरुआती चरण में डॉलर की मांग बढ़ सकती है जिससे अन्य मुद्राओं के मुकाबले उसकी कीमत मजबूत हो सकती है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं दबाव में आ सकती हैं और उनके केंद्रीय बैंकों को विनिमय दर स्थिर रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। हालांकि यदि युद्ध लंबा चलता है और अमेरिका सीधे बड़े पैमाने पर सैन्य संलिप्तता बढ़ाता है तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी राजकोषीय दबाव बढ़ेगा। रक्षा व्यय में वृद्धि और वैश्विक व्यापार में गिरावट का असर अमेरिकी विकास दर पर पड़ सकता है जिससे दीर्घकाल में डॉलर की मजबूती सीमित हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोना और अन्य सुरक्षित निवेश साधनों में तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशक जोखिम से बचने के लिए शेयर बाजार से पूंजी निकालकर सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश कर सकते हैं। इससे शेयर बाजारों में गिरावट और अस्थिरता बढ़ेगी। तेल उत्पादक देशों की आय बढ़ सकती है यदि कीमतें ऊंची रहती हैं लेकिन आयातक देशों के लिए यह महंगाई और आर्थिक दबाव का कारण बनेगा। वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों की नीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर हो सकते हैं क्योंकि एक ओर महंगाई का खतरा होगा और दूसरी ओर विकास दर में गिरावट का जोखिम।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक स्तर पर भी इस संघर्ष के दूरगामी परिणाम होंगे। यदि रूस और चीन जैसे देश अप्रत्यक्ष रूप से ईरान का समर्थन करते हैं और पश्चिमी देश इजराइल के साथ खड़े रहते हैं तो वैश्विक ध्रुवीकरण और गहरा सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका कसौटी पर होगी। कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं यदि समय रहते मजबूत नहीं की गईं तो यह युद्ध क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर व्यापक भू राजनीतिक संघर्ष में बदल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या पक्ष वार्ता की मेज पर लौटते हैं या सैन्य कार्रवाई को और तेज करते हैं। यदि मिसाइल हमले और जवाबी हमले जारी रहते हैं तो तेल मार्गों और व्यापारिक नेटवर्क पर खतरा बना रहेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी की आशंका से जूझ रही है ऐसे में यह युद्ध उसे और कमजोर कर सकता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह जरूरी है कि वह तत्काल तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में ठोस प्रयास करे क्योंकि इस संघर्ष का दायरा जितना बढ़ेगा उसका प्रभाव उतना ही गहरा और व्यापक होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:16:21 +0530</pubDate>
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