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                <title>पश्चिम एशिया तनाव - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पश्चिम एशिया तनाव RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिकी हमलों के बावजूद अडिग ईरान : मिसाइल ताकत बरकरार, दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर बयान और हर सैन्य गतिविधि पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब केवल दो देशों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक प्रभुत्व की लड़ाई का रूप ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिकी हमलों ने उसकी कमर तोड़ दी है। लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्टें ही अब इन दावों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179243/irans-missile-power-intact-despite-us-attacks-not-ready-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images9.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर बयान और हर सैन्य गतिविधि पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब केवल दो देशों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक प्रभुत्व की लड़ाई का रूप ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है और अमेरिकी हमलों ने उसकी कमर तोड़ दी है। लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्टें ही अब इन दावों पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की मिसाइल क्षमता अब भी काफी हद तक सुरक्षित है और उसके अंडरग्राउंड नेटवर्क को अपेक्षित नुकसान नहीं पहुंचा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">खुफिया आकलनों के मुताबिक ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बचाने में सफल रहा है। इतना ही नहीं, उसके 90 प्रतिशत भूमिगत मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च नेटवर्क अब भी सक्रिय स्थिति में हैं। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि ईरान ने वर्षों से जिस रणनीतिक तैयारी पर काम किया था, वह अमेरिकी हमलों के बावजूद पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित मिसाइल ठिकानों तक ईरान ने दोबारा पहुंच बना ली है। यह वही क्षेत्र है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है। यदि यहां अस्थिरता बढ़ती है, तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसका असर पड़ सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अमेरिका की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती यही है कि वह तकनीकी और सैन्य रूप से दुनिया की सबसे शक्तिशाली ताकत होने के बावजूद ईरान की “असममित युद्ध नीति” को पूरी तरह समाप्त नहीं कर पा रहा। ईरान ने पारंपरिक युद्ध के बजाय ऐसे नेटवर्क तैयार किए हैं जो भूमिगत सुरंगों, मोबाइल लॉन्चरों और विकेंद्रीकृत मिसाइल ठिकानों पर आधारित हैं। यही कारण है कि अमेरिकी हमलों के बाद भी ईरान की जवाबी क्षमता खत्म नहीं हुई। रिपोर्टों के अनुसार उसके लगभग 70 प्रतिशत मोबाइल लॉन्चर सुरक्षित हैं। इन लॉन्चरों की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इन्हें किसी भी इलाके में ले जाकर अचानक हमला किया जा सकता है। इससे विरोधी देश लगातार अनिश्चितता और दबाव में रहते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान की रणनीति केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है। उसने पिछले दो दशकों में अपने रक्षा ढांचे को इस प्रकार विकसित किया है कि बाहरी हमलों की स्थिति में भी उसका कमांड और कंट्रोल सिस्टम सक्रिय बना रहे। अमेरिकी और इजरायली हमलों के खतरे को देखते हुए ईरान ने अपने मिसाइल नेटवर्क को पहाड़ों के भीतर और भूमिगत सुरंगों में स्थापित किया। यही वजह है कि अत्याधुनिक बमबारी के बावजूद अमेरिका उसकी पूरी सैन्य क्षमता को नष्ट नहीं कर पाया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ट्रम्प का यह कहना कि “ईरान के सामने केवल दो रास्ते हैं—समझौता या पूर्ण विनाश”, राजनीतिक रूप से भले ही आक्रामक संदेश हो, लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक जटिल दिखाई देती है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है। उसने समझौते के बदले युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंधों में राहत, जब्त संपत्तियों की वापसी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की मान्यता जैसी शर्तें रखी हैं। यह दिखाता है कि ईरान खुद को कमजोर स्थिति में नहीं मानता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान की इस निडरता के पीछे केवल सैन्य तैयारी ही नहीं, बल्कि उसकी वैचारिक और राजनीतिक सोच भी जिम्मेदार है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान ने खुद को पश्चिमी दबाव के खिलाफ प्रतिरोध की शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों, राजनीतिक अलगाव और सैन्य दबाव के बावजूद उसने अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को लगातार विकसित किया। यही कारण है कि अमेरिकी हमलों के बाद भी वहां की सत्ता व्यवस्था या सैन्य संरचना में कोई बड़ा टूटाव दिखाई नहीं देता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय पहलू भी है। ट्रम्प का चीन दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका चाहता है कि शी जिनपिंग ईरान पर दबाव डाले। चीन और ईरान के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक संबंध मजबूत रहे हैं। चीन पश्चिम एशिया में स्थिरता चाहता है क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। ऐसे में अमेरिका चीन को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि चीन खुलकर अमेरिकी रणनीति का समर्थन करेगा, इसकी संभावना कम दिखाई देती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान के मुद्दे ने वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित किया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। दुनिया के लगभग एक तिहाई समुद्री तेल व्यापार का रास्ता इसी क्षेत्र से गुजरता है। ईरान कई बार संकेत दे चुका है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाया गया तो वह इस मार्ग को बाधित कर सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की नीति अपना रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य संरचना का बचा रहना अमेरिकी रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है। अमेरिका ने इराक, अफगानिस्तान और लीबिया जैसे देशों में बड़े सैन्य अभियान चलाए, लेकिन लंबे समय में वहां स्थिरता स्थापित नहीं कर पाया। ईरान का मामला उससे भी अधिक जटिल है, क्योंकि यहां मजबूत राष्ट्रवादी भावना, संगठित सैन्य ढांचा और क्षेत्रीय सहयोगी नेटवर्क मौजूद हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती और इराक-सीरिया के कई सशस्त्र समूह ईरान के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा माने जाते हैं। इसलिए ईरान पर हमला केवल एक देश के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि पूरे क्षेत्रीय समीकरण को प्रभावित कर सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ईरान की मिसाइल क्षमता का बरकरार रहना यह भी दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध केवल हवाई हमलों से नहीं जीते जा सकते। तकनीकी श्रेष्ठता के बावजूद जमीनी तैयारी, नेटवर्क आधारित रक्षा और रणनीतिक धैर्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। ईरान ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि कोई देश लंबे समय तक योजनाबद्ध तरीके से अपनी रक्षा नीति तैयार करे तो वह महाशक्तियों के सामने भी टिक सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज की स्थिति में अमेरिका सैन्य दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान अपने अस्तित्व और संप्रभुता की लड़ाई के रूप में इसे प्रस्तुत कर रहा है। यही कारण है कि अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान के भीतर भय या आत्मसमर्पण का माहौल नहीं दिखाई देता। बल्कि उसकी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि वह लंबे संघर्ष के लिए तैयार है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में शांति फिलहाल दूर नजर आती है। यदि बातचीत का रास्ता नहीं निकला तो आने वाले समय में यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है। लेकिन फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अमेरिका के लगातार हमलों और धमकियों के बावजूद ईरान की सैन्य और राजनीतिक इच्छाशक्ति पूरी तरह टूटी नहीं है। उसकी मिसाइल क्षमता का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहना इस बात का प्रमाण है कि यह संघर्ष केवल ताकत का नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और राजनीतिक संकल्प का भी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 21:11:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>तैयारी ही विजय है: वैश्विक संकट में भारत का नेतृत्व मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब वैश्विक क्षितिज पर युद्ध और अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब किसी राष्ट्र की असली पहचान उसके साहस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी और दूरदर्शी नेतृत्व से होती है। लोकसभा में प्रधानमंत्री द्वारा पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर दिया गया संदेश इसी शक्ति और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। उनका संबोधन केवल एक सामान्य चेतावनी नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे राष्ट्र को सतर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठित और सशक्त बनाने वाला दृढ़ आह्वान था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिया कि यह संघर्ष सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसके प्रभाव पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे। ऐसे निर्णायक समय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174036/preparation-is-victory-indias-leadership-mantra-in-global-crisis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब वैश्विक क्षितिज पर युद्ध और अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब किसी राष्ट्र की असली पहचान उसके साहस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी और दूरदर्शी नेतृत्व से होती है। लोकसभा में प्रधानमंत्री द्वारा पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर दिया गया संदेश इसी शक्ति और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। उनका संबोधन केवल एक सामान्य चेतावनी नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे राष्ट्र को सतर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठित और सशक्त बनाने वाला दृढ़ आह्वान था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिया कि यह संघर्ष सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसके प्रभाव पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे। ऐसे निर्णायक समय में भारत को कोविड काल जैसी अनुशासित एकजुटता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सजगता और मजबूत तैयारी के साथ आगे बढ़ना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि हर चुनौती को अवसर में बदला जा सके और राष्ट्र की प्रगति अविरल बनी रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया का यह संघर्ष महज़ राजनीतिक टकराव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक गहराते वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकट की चेतावनी भी है। भारत जैसे तेजी से उभरते राष्ट्र के लिए यह स्थिति अत्यंत निर्णायक बन जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ऊर्जा ही विकास की धुरी है। ऐसे संवेदनशील समय में प्रधानमंत्री ने जिस आत्मविश्वास के साथ देश को आश्वस्त किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सरकार की दूरदर्शिता और ठोस रणनीति का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीते वर्षों में उठाए गए मजबूत और समयोचित कदम आज भारत को इस वैश्विक संकट के प्रभाव से सुरक्षित रखने में सक्षम हैं। ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने के लिए अपनाई गई नीतियां अब अपनी प्रभावशीलता सिद्ध कर रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाती हैं कि सही समय पर लिए गए निर्णय भविष्य की बड़ी चुनौतियों को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति आज उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। आयात के स्रोतों का विस्तार कर उन्हें अनेक देशों तक फैलाना एक ऐसी रणनीति रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने देश को किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने से मुक्त कर दिया है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में यह नीति भारत के लिए सुरक्षा कवच सिद्ध हो रही है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से संचालित हो रही हैं और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। सामरिक पेट्रोलियम भंडार का निर्माण इस दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने आपातकालीन परिस्थितियों में भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत बनने की नई शक्ति प्रदान की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू स्तर पर एलपीजी और अन्य आवश्यक ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के बावजूद आम नागरिकों को राहत पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सरकार की जनहितकारी सोच को दर्शाता है। कोविड काल के कठिन समय में जिस प्रकार आवश्यक वस्तुओं को नियंत्रित कीमतों पर उपलब्ध कराया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी संवेदनशील और जिम्मेदार नीति को आज भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। किसानों और आम परिवारों को आर्थिक दबाव से बचाना केवल एक नीति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह स्पष्ट करता है कि देश के विकास के साथ-साथ जनकल्याण को भी समान और सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां आज केवल प्रगति की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक मंच पर एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। सौर ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पवन ऊर्जा और जैव ईंधन के तीव्र विस्तार ने देश को पारंपरिक ईंधनों की निर्भरता से बड़ी हद तक मुक्त कर दिया है। इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की नीति ने एक ओर जहां विदेशी मुद्रा की भारी बचत सुनिश्चित की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर किसानों को आय के नए और स्थायी स्रोत प्रदान किए हैं। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेलवे के तीव्र विद्युतीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन ने ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों को नई गति दी है। ये सभी दूरदर्शी प्रयास आज के वैश्विक संकट के बीच भारत को मजबूती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता प्रदान कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जिस स्पष्टता और दृढ़ता के साथ देश को सचेत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह नेतृत्व की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी संकट में सबसे बड़ा खतरा बाहरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर की घबराहट और अफवाहें होती हैं। ऐसे समय में संयम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जागरूकता और जिम्मेदारी ही सबसे बड़ी ताकत बनती है। अपील की कि वे सतर्क रहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु विचलित न हों। सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कूटनीतिक स्तर पर भारत शांति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन और स्थिरता की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसकी वैश्विक जिम्मेदारी और बढ़ते प्रभाव का सशक्त प्रमाण है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को केवल एक नीति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। रणनीतिक भंडारण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और नवीकरणीय विकल्पों पर निरंतर जोर ने देश को एक मजबूत और स्थायी आधार प्रदान किया है। आज जब विश्व अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत की स्थिरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और मजबूती उसकी दूरदर्शी नीतियों की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह इस बात का प्रमाण है कि सुनियोजित रणनीति और दृढ़ संकल्प किसी भी बड़े संकट का सामना करने में सबसे प्रभावी हथियार होते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए भारत जिस तीव्र गति से नई ऊर्जा तकनीकों और संसाधनों की दिशा में आगे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह उसकी दूरदर्शिता और संकल्प का प्रमाण है। ग्रीन हाइड्रोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत परमाणु ऊर्जा और उच्च इथेनॉल मिश्रण जैसी महत्वाकांक्षी पहलें देश को न केवल आत्मनिर्भर बना रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर कर रही हैं। प्रधानमंत्री का यह आह्वान कि कोविड काल जैसी एकजुटता आज भी उतनी ही आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल वर्तमान संकट तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य की हर चुनौती के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन है। यह सत्य और भी सशक्त होकर सामने आता है कि जब पूरा राष्ट्र एकजुट होकर आगे बढ़ता है और नेतृत्व दृढ़ एवं दूरदर्शी होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब कोई भी संकट भारत की प्रगति की गति को थाम नहीं सकता।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:14:59 +0530</pubDate>
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                <title>खामेनेई के बाद की ईरान की रणनीति और भारत पर उसका असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><span style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#2d2d2d;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></p>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु और उसके बाद मोजतबा खामेनेई का सत्ता के केंद्र में आना ईरान के इतिहास का वह मोड़ है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी का रास्ता केवल संघर्ष और रणनीतिक आक्रामकता से होकर गुजरता है। ईरान की आगामी रणनीति अब केवल अस्तित्व बचाने की नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि अपने खोये हुए गौरव और नेतृत्व के अपमान का बदला लेने की है। अहमद वाहिदी जैसे कट्टरपंथी सैन्य रणनीतिकार के हाथों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कमान होने का सीधा अर्थ है कि ईरान अब "रणनीतिक धैर्य" की नीति को त्यागकर "प्रत्यक्ष प्रतिशोध" के युग में प्रवेश</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172010/irans-strategy-after-khamenei-and-its-impact-on-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1c7rr4sk_ayatollah-ali-khamenei-afp_625x300_01_march_26.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><span style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#2d2d2d;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु और उसके बाद मोजतबा खामेनेई का सत्ता के केंद्र में आना ईरान के इतिहास का वह मोड़ है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जहाँ से वापसी का रास्ता केवल संघर्ष और रणनीतिक आक्रामकता से होकर गुजरता है। ईरान की आगामी रणनीति अब केवल अस्तित्व बचाने की नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि अपने खोये हुए गौरव और नेतृत्व के अपमान का बदला लेने की है। अहमद वाहिदी जैसे कट्टरपंथी सैन्य रणनीतिकार के हाथों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कमान होने का सीधा अर्थ है कि ईरान अब "रणनीतिक धैर्य" की नीति को त्यागकर "प्रत्यक्ष प्रतिशोध" के युग में प्रवेश कर चुका है। मोजतबा खामेनेई के लिए चुनौती दोहरी है: उन्हें न केवल अपने पिता की विरासत को सुरक्षित रखना है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि देश के भीतर पनप रहे असंतोष और बाहर से हो रहे सैन्य प्रहारों के बीच एक संतुलन बनाना है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ईरान की अगली चालों में सबसे महत्वपूर्ण उसका परमाणु कार्यक्रम होगा। अंतरराष्ट्रीय दबाव और हमलों के बावजूद</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ईरान अब परमाणु हथियार की क्षमता को एक "अंतिम सुरक्षा कवच" के रूप में देख रहा है। 2025-26 के इस कालखंड में ईरान का 90 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन करना केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि एक भू-राजनीतिक ब्लैकमेल का हथियार है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो पश्चिम को सीधे टकराव से रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। क्षेत्रीय स्तर पर</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ईरान अपने "एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस" यानी हिजबुल्लाह</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">हूती और हमास को नई ऊर्जा और आधुनिक हथियारों से लैस करेगा ताकि इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर लगातार दबाव बना रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी ईरान का वह ब्रह्मास्त्र है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसे वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इस भीषण उथल-पुथल के बीच भारत की स्थिति अत्यंत नाजुक और चुनौतीपूर्ण हो गई है। भारत के लिए ईरान केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि पश्चिम और मध्य एशिया तक पहुँचने का प्रवेश द्वार है। ईरान में इस तरह का नेतृत्व परिवर्तन और युद्ध की स्थिति भारत की </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यानी रणनीतिक स्वायत्तता की कड़ी परीक्षा है। भारत ने हमेशा से एक संतुलनकारी शक्ति की भूमिका निभाई है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जहाँ उसने एक तरफ इजरायल के साथ गहरे रक्षा संबंध बनाए रखे हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक निवेशों के जरिए अपनी कनेक्टिविटी को सुरक्षित किया है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">खामेनेई के बाद यदि ईरान पूरी तरह से चीन और रूस के पाले में चला जाता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जैसा कि वर्तमान संकेतों से लग रहा है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो भारत के लिए अपनी स्वायत्तता बनाए रखना कठिन होगा। अमेरिका और इजरायल के साथ भारत की बढ़ती निकटता के बीच ईरान का नया कट्टरपंथी नेतृत्व नई दिल्ली को संदेह की दृष्टि से देख सकता है। यदि ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगते हैं या वह पूर्ण युद्ध में उलझता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो चाबहार बंदरगाह और </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर</span><span>'<span>  </span></span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जैसे प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा सकते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुँचने का सबसे छोटा और सस्ता रास्ता हैं। भारत की विदेश नीति के लिए यह वह समय है जब उसे "गुटनिरपेक्षता 2.0" के सिद्धांतों पर चलते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि वह किसी एक पक्ष का मोहरा न बने।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ईरान का संकट भारत के लिए एक आर्थिक सुनामी की तरह हो सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। यद्यपि भारत ने हाल के वर्षों में रूस और खाड़ी देशों से तेल आयात बढ़ाकर अपनी निर्भरता को विविधीकृत किया है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">लेकिन मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार की सैन्य अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे भारत का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और घरेलू स्तर पर महंगाई अनियंत्रित हो जाएगी। इसके अलावा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इराक और सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाला तेल भी इसी अशांत क्षेत्र से होकर गुजरता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे भारत की आपूर्ति श्रृंखला टूटने का खतरा है। ऊर्जा सुरक्षा केवल तेल की उपलब्धता तक सीमित नहीं है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि इसकी कीमत की स्थिरता पर भी निर्भर करती है। ईरान की अस्थिरता भारत के निवेश और भविष्य की गैस पाइपलाइन परियोजनाओं को भी अनिश्चितता की ओर धकेलती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सामाजिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो ईरान और पश्चिम के बीच बढ़ता तनाव भारत के भीतर के जनसांख्यिकीय संतुलन और प्रवासी सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय काम करते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिनकी सुरक्षा और वहां से आने वाला प्रेषण (</span><span>Remittance) </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यदि युद्ध फैलता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो इन भारतीयों की सुरक्षित वापसी एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती होगी। साथ ही</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ईरान की कट्टरपंथी रणनीति का प्रभाव क्षेत्र के अन्य कट्टरपंथी समूहों पर भी पड़ सकता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिससे भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए नए खतरे पैदा हो सकते हैं। भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करना होगा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">विशेषकर अरब सागर में जहाँ हूती विद्रोही व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं। भारतीय नौसेना को अब केवल अपनी सीमाओं की नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए एक सक्रिय सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभानी होगी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अंततः</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">खामेनेई के बाद का ईरान एक ऐसा ज्वालामुखी है जिसके फटने का असर वाशिंगटन से लेकर नई दिल्ली तक महसूस किया जाएगा। मोजतबा खामेनेई और अहमद वाहिदी की जोड़ी ईरान को एक सैन्यीकृत धार्मिक शासन की ओर ले जा रही है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो कूटनीति से अधिक शक्ति प्रदर्शन में विश्वास रखता है। भारत के लिए आगामी समय बहुत ही संभलकर चलने का है। उसे अपनी </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">रणनीतिक स्वायत्तता</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">को ढाल बनाकर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी होगी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भले ही इसके लिए उसे कठिन कूटनीतिक फैसले लेने पड़ें।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi"> भारत को चाहिए कि वह ईरान के नए नेतृत्व के साथ अनौपचारिक माध्यमों से संवाद बनाए रखे और साथ ही अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को और अधिक मजबूत करे। ईरान का यह संकट वैश्विक व्यवस्था के पुनर्निर्धारण का संकेत है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">और भारत को इस बदलती व्यवस्था में एक दर्शक के बजाय एक निर्णायक भूमिका निभानी होगी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ताकि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई आंच न आए। ईरान की अगली चालें केवल उसके भविष्य को ही नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि भारत की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी नई दिशा देंगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:07:14 +0530</pubDate>
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