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                <title>ईरान अमेरिका तनाव - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ईरान अमेरिका तनाव RSS Feed</description>
                
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                <title>बहुत आपत्तिजनक हैं ट्रंप के असंयमित असभ्य बयान </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रम्प इन दिनों काफी असंयमित भाषा बोल रहे हैं। अमेरिकी नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को धमकाते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया. ट्रंप ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और पुलों पर हमले की चेतावनी दी. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा… होर्मुज स्ट्रेट खोलो, नहीं तो नर्क में जीओगे.'यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस सप्लाई रूट्स में से एक है,</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जो फरवरी के अंत में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175393/trumps-uncontrolled-rude-statements-are-very-objectionable"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/c0eb6ec0-68a6-11f0-83d0-5d68283eb47c.jpg.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रम्प इन दिनों काफी असंयमित भाषा बोल रहे हैं। अमेरिकी नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को धमकाते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया. ट्रंप ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और पुलों पर हमले की चेतावनी दी. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा… होर्मुज स्ट्रेट खोलो, नहीं तो नर्क में जीओगे.'यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस सप्लाई रूट्स में से एक है,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से लगभग बंद है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. ट्रंप ने होर्मुज को लेकर ईरान को कई बार धमकी दी है और इस समुद्री मार्ग को खोलने का अल्टीमेटम दे चुके हैं. उन्होंने होर्मुज को खोलने में अमेरिका की मदद नहीं करने के लिए यूरोपीय व नाटो सहयोगियों पर भी नाराजगी जताई है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप ने यहां तक चेतावनी दी कि अमेरिका नाटो से बाहर निकल सकता है. अपने इस पोस्ट में ट्रंप ने ईरान के लिए ऐसे अपशब्दों का इस्तेमाल किया, जिसकी किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष से उम्मीद नहीं की जाती. हालांकि हम जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप पर कभी कोई मुकदमा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दर्ज होगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। लेकिन इस समय उनकी भाषा में जो गिरावट स्पष्ट स्पष्ट परिलक्षित है, कम से कम उसका विश्व समुदाय को विरोध करना चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल ईरान पर अमेरिका और इजरायल को जंग छेड़े छह सप्ताह हो चुके हैं, जिसमें कई बार जीत का दावा करने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप जीत के लक्षण नहीं दिखा पाए। बल्कि बार-बार युद्धविराम की अवधि को बदलते हैं और साथ ही उनकी धमकियां भी बदल रही हैं। ईरान में सत्ता परिवर्तन के ऐलान से शुरु हुआ यह युद्ध अब नागरिकों को निशाने पर लेने की धमकियों पर उतर आया है। रविवार को ईस्टर के मौके पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टूथ पर ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि 48 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग खोलो वर्ना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप ने लिखा कि मंगलवार को ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर व्यापक हमले हो सकते हैं, और इसे संघर्ष का निर्णायक क्षण बताया। लेकिन यह सब इसी तरह की शालीन भाषा में नहीं लिखा गया, बल्कि उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल किया। और यह पहली बार नहीं है कि ट्रंप ने इस तरह सार्वजनिक तौर पर अपशब्द कहे हों। इससे पहले उन्हें पत्रकारों से चर्चा के दौरान या भाषण देते हुए भी अपशब्द बोलते देखा गया है। यह किसी लिहाज से स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और वैश्विक नेताओं को खुलकर इसकी भर्त्सना करना चाहिए। नरेन्द्र मोदी से इसकी शुरुआत हो तो कितना अच्छा रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिकी सीनेट के सदस्य और डेमोक्रेटिक पार्टी के ​वरिष्ठ नेता चक शूमर ने ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान को 'एक असंतुलित व्यक्ति की बकवास बताया'. उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह रवैया अमेरिका के सहयोगियों को उससे दूर कर रहा है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के हालिया बयान को युद्ध अपराध की धमकी देने जैसा बताया. ट्रंप की पूर्व सहयोगी मार्जरी टेलर ग्रीन ने भी उनके बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति 'पागलपन' की स्थिति में हैं. उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के लोगों से दखल देने की अपील की. टेलर ग्रीन ने कहा कि यह युद्ध बिना उकसावे के शुरू किया गया और इससे निर्दोष लोगों की जान जा रही है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैसे संयुक्त राष्ट्र में  ईरानी ई मिशन ने ट्रंप की की नवीनतम टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में' नागरिकों के जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने' की धमकी दे रहे हैं। मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'यदि संयुक्त राष्ट्र की अंतरात्मा जीवित होती, तो वह युद्ध भड़काने तो वह युद्ध भड़काने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खुली और बेशर्म धमकी पर चुप नहीं रहती। ट्रंप इस क्षेत्र को एक अंतहीन युद्ध में घसीटना चाहते हैं।' इसमें कहा गया, 'यह नागरिकों को आतंकित करने के लिए प्रत्यक्ष और सार्वजनिक उकसावा है और युद्ध अपराध करने के इरादे का स्पष्ट प्रमाण है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें आगे कहा गया- 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सभी राज्यों का यह कानूनी दायित्व है कि वे युद्ध अपराधों के ऐसे जघन्य कृत्यों को रोकें। उन्हें अभी कार्रवाई करनी चाहिए। कल बहुत देर हो जाएगी।' वहीं ईरानी संसद के अध्यक्ष गलिबाफ ने कहा कि ट्रंप के 'लापरवाह कदमों से अमेरिका के हर परिवार को एक जीती-जागती नरक में धकेला जा रहा है, हमारा पूरा क्षेत्र जल उठेगा क्योंकि आप नेतन्याहू के आदेशों का पालन करने पर अड़े हैं।' गुलिबाफ के इस बयान से असहमत होने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि ट्रंप जिस तरह अपने बयान बदल रहे हैं, उसमें यही लगता है कि पटकथा कोई और लिख रहा है, केवल संवाद अदायगी ट्रंप की है। क्योंकि अपशब्द वाले बयान के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के एक पत्रकार से कहा, मुझे लगता है कि सोमवार को समझौता होने की अच्छी संभावना है, वे (ईरान) अभी बातचीत कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तो ट्रंप को लगता है कि ईरान अब भी उनसे बात कर समझौता करेगा, जबकि ईरान की सबसे बड़ी सैन्य कमांड यूनिट खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने कहा, 'अगर आम लोगों पर हमले दोहराए गए, तो हमारे अगले हमले और जवाबी कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और बड़े पैमाने पर होंगे।' ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान केवल धमका नहीं रहा है, अपनी बात पर अमल भी कर रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिका का साथ देने वाले खाड़ी देशों समेत इजरायल पर ईरान के हमलों को कोई रोक नहीं पा रहा है, वहीं अमेरिका के लड़ाकू विमानों पर हुए हमले और एक अमेरिकी पायलट के लापता होने की घटना ने भी जाहिर कर दिया है कि अमेरिका उतना भी ताकतवर देश नहीं है, जितना बड़ा उसका हौव्वा खड़ा किया गया है। ईरान की पहाड़ियों में लापता पायलट को बचाने का दावा ट्रंप ने किया है, हालांकि ईरान ने कहा है कि उसने बचाव के लिए आए सैन्य दस्ते पर भी हमला किया है। अब किसका दावा सही है और किसका गलत, यह तय नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना तो नजर आ ही रहा है कि इस युद्ध में अमेरिका को वैसी ही चोट पड़ रही है, जो पहले इराक, अफगानिस्तान, क्यूबा और वियतनाम में पड़ चुकी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको पता है कि 2019 में ट्रंप ने खुद एक पोस्ट में प. एशिया में अमेरिका की सैन्य दखलंदाजी और युद्ध को गलत ठहराया था, क्योंकि उसमें अरबों डॉलर खर्च हुए और सैनिकों का नुकसान हुआ। लेकिन अब संभवतः एपस्टीन फाइल्स के खुलासे के दबाव में ट्रंप ने पूरी दुनिया को युद्ध की बर्बादी में झोंक दिया है। अपनी गलती मानने की जगह रोजाना बेतुके, निर्लज्ज बयानों से उसे सही भी ठहरा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरान में परमाणु हथियार और सत्ता बदलने के नाम पर शुरु किया गया युद्ध मीनाब की मासूम बच्चियों का कातिल बना और उसके बाद ईरान की अधोसंरचना पर हमले ही किए जा रहे हैं, कम से कम 30 विश्वविद्यालयों और कई अस्पतालों, दवा कारखानों को बारुद से ढेर कर दिया गया है। यह सीधे-सीधे मानवता के खिलाफ अपराध है, जिसे रोकने के लिए वैश्विक समुदाय को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:20:36 +0530</pubDate>
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                <title>कहां गए शांति के कपोत उड़ाने वाले?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की दुनिया बारूद से धधक रही  है। रूस-यूक्रेन  से लेकर मध्य पूर्व के रेगिस्तानों तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर तरफ मिसाइलों की गूँज है। शांति की बाते  अब सुनाई  नही देतीं। शांति के कपोत उड़ाने  वाले दिखाई देने बंद हो गए। युद्ध की विभिषिका के विरोध में प्रदर्शन करने और मोमबत्त्ती  जलाने वाले अब सड़कों से गायब है। युद्ध के विरोध के स्वर धीमे  ही नही हुए ,पूरी तरह खामोश  हो गए। बुद्ध के संदेश अब किताबों में ही बंद होकर रह गए है। युद्धों के विरोध की कही से बात नही उठ रही।  दुनिया में शांति स्थित करने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175385/where-have-those-who-fly-the-pigeons-of-peace-gone"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/pigeon.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की दुनिया बारूद से धधक रही  है। रूस-यूक्रेन  से लेकर मध्य पूर्व के रेगिस्तानों तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर तरफ मिसाइलों की गूँज है। शांति की बाते  अब सुनाई  नही देतीं। शांति के कपोत उड़ाने  वाले दिखाई देने बंद हो गए। युद्ध की विभिषिका के विरोध में प्रदर्शन करने और मोमबत्त्ती  जलाने वाले अब सड़कों से गायब है। युद्ध के विरोध के स्वर धीमे  ही नही हुए ,पूरी तरह खामोश  हो गए। बुद्ध के संदेश अब किताबों में ही बंद होकर रह गए है। युद्धों के विरोध की कही से बात नही उठ रही।  दुनिया में शांति स्थित करने के लिए बने संयुक्त  राष्ट्रसंघ  के मुंह पर टेप चिपक गया। वह देख  सकता है। न कुछ बोल सकता है।  न आदेश कर सकता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना देखिए कि इक्कीसवीं सदी में हम मंगल पर बस्तियां बसाने की बात कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ज़मीन के चंद टुकड़ों और आपसी वर्चस्व के लिए हज़ारों बेगुनाहों का खून बहाने से भी पीछे नहीं हट रहे। युद्ध चाहे रूस और यूक्रेन के बीच हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या इज़राइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव हो</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जीत के झंडे चाहे जिस देश के हाथ आएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हारती  हमेशा मानवता  है।  इन युद्ध में विजयी कोई भी हो, सदा पराजित तो मानव होती है। मरती बस इंसानियत है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि युद्ध कभी समस्या का समाधान नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह नई समस्याओं का जन्मदाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के समय  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी के कई  बार कहा कि दुनिया को युद्ध की नही , बुद्ध की जरूरत है। कई  मंचों से  उन्होंने यह मांग उठाई, किंतु किसी भी देश ने शांति का समर्थन नही किया। सब देश  गूंगे बन कर रह  गए।  आज भी  ये ही हाल है।  मरता  ईरान खाड़ी के उन देशों पर मिजाइल  और द्रोण  दाग कर तबाही मचा रहा है, जिनमे अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। अपनी बरबादी होते देख ये देश ईरान पर अमेरिकी हमलों का उस तरह विरोध नही कर रहे , जिस तरह कि करना चाहिए।   </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> रूस-यूक्रेन युद्ध के समय   जहाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट को जन्म दिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो मध्य पूर्व (इज़राइल-हमास-ईरान) के संघर्ष ने दुनिया को धार्मिक और कूटनीतिक ध्रुवीकरण के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इन लड़ाइयों में टैंकों की गड़गड़ाहट के बीच जो आवाज़ दब जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह है</span>—<span lang="hi" xml:lang="hi">एक मासूम बच्चे की चीख और एक बेबस माँ की कराह।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध की सबसे बड़ी कीमत वे लोग चुकाते हैं जिनका राजनीति या सत्ता की लालसा से कोई लेना-देना नहीं होता। यूक्रेन के कीव से लेकर गाज़ा की गलियों और ईरान के गांव तक तक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हज़ारों औरतें और बच्चे मौत की नींद सो चुके हैं। जो उम्र खिलौनों से खेलने की थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस उम्र में बच्चे बमों के धमाकों को पहचानना सीख रहे हैं। हज़ारों बच्चे अनाथ हो चुके हैं और लाखों का भविष्य मलबे के नीचे दब गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध के दौरान महिलाओं को न केवल विस्थापन का दंश झेलना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वे शारीरिक और मानसिक हिंसा का सबसे आसान लक्ष्य बनती हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध केवल इंसान को नहीं मारता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सदियों से बनी-बनाई सभ्यताओं और बुनियादी ढांचे को भी नष्ट कर देता है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पतालों और रिहायशी इमारतों पर गिरते बम यह दर्शाते हैं कि आधुनिक समाज कितना "असंवेदनशील" हो चुका है। जब एक अस्पताल पर मिसाइल गिरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं ढहती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इंसानियत की आखिरी उम्मीद भी टूट जाती है। इन लड़ाइयों का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। रूस-यूक्रेन संघर्ष ने दुनिया भर में अनाज की आपूर्ति श्रृंखला</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को तोड़ दिया</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे गरीब देशों में भुखमरी का खतरा बढ़ गया। ईंधन की बढ़ती कीमतें और खाद्य पदार्थों की कमी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। जो खरबों डॉलर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में खर्च होने चाहिए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे आज आधुनिक हथियार और मिसाइलें बनाने में झोंके जा रहे हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध का एक और खामोश शिकार हमारा पर्यावरण है। हज़ारों टन गोला-बारूद का इस्तेमाल वायुमंडल को ज़हरीला बना रहा है। जंगलों की आग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री प्रदूषण और ज़मीन में धंसे बारूदी सुरंग </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आने वाली कई पीढ़ियों के लिए मौत का जाल बिछा रहे हैं। हम जिस धरती को बचाने की कसमें खाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी को युद्ध की आग में झोंक रहे हैं। संसाधनों को  बरबाद कर रहे हैं।जब हम टीवी पर बमबारी के दृश्य देखते हैं और उन्हें केवल एक "न्यूज़ अपडेट" की तरह छोड़ देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो समझ लीजिए कि हमारे भीतर की इंसानियत मर चुकी है। युद्ध हमें क्रूर बना देता है। हम मौतों को केवल </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आंकड़ों</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में गिनने लगते हैं। घृणा का यह बीज जो आज बोया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह भविष्य में और अधिक कट्टरपंथ और आतंकवाद को जन्म देगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका आज दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह बन गया है। उसने इराक पर यह कह कर हमला किया था कि उसके पास कैमिकल और अन्य  घातक शस्त्र है। इराक हार गया। सद्दाम हुसैन पकड़े ही नही गए, उन्हें फांसी हो गई, किंतु अमेरिका इराक से कुछ भी बरामद नही कर पाया। उसका सब झूंठा  प्रचार रहा। अब ईरान पर यह कह कर इस्राइल और अमेरिका ने हमला किया कि वह परमाणु बम बनाने के नजदीक है। उसकी इस शक्ति को  खत्म करना  है। हमले जारी है।  इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए  अपने मन की बात कह  दी कि उसे  ईरान के तेल पर कब्जा  करना  है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तीन </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जनवरी </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को अमेरिकी सेना ने एक सैन्य ऑपरेशन के  दौरान वेनेजुयला  </span> <span lang="hi" xml:lang="hi">के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को उनके देश (कराकस) से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नार्को-आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपों के बाद की गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया।</span> <span lang="hi" xml:lang="hi"> बहाना मादक पदार्थो  की तस्करी रोकना था किंतु   अब अमेरिकी राष्ट्र पति ट्रंप  कह रहे हैं कि </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वेनेजुयला  का तेल वे बेचेंगे।  उनकी मर्जी से बिकेगा। इस सब का मतलब साफ है कि दुनिया के संसाधनों पर अमेरिका की नजर है। वह किसी ने किसी बहाने उन पर कब्जा करना   चाहता है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  का एक बड़ा बयान सामने आया। ट्रंप ने कहा है कि अगर थोड़ा और समय मिला तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकता है और वहां से तेल लेकर बड़ा मुनाफा कमा सकता है। उनके इस बयान ने पहले से चल रहे संघर्ष को और संवेदनशील बना दिया है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते को बंद कर दिया है। इस कारण दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतों में तेजी देखी जा रही</span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संघर्ष अब सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहा है। अमेरिका और इस्राइल ने ईरान और लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी कई खाड़ी देशें पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हाल के दिनों में हमलों की संख्या कुछ कम हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पूरी तरह रुकी नहीं है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होने से इन्कार करने वाले ब्रिटेन जैसे वह  देश होर्मुज जलडमरूमध्य   के बंद होने  की वजह से जेट ईंधन नहीं पा रहे हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रप का  सुझाव है: पहला- अमेरिका से तेल खरीदो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे पास बहुत है। दूसरा- हिम्मत जुटाओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलडमरूमध्य पर जाओ और उसे अपने कब्जे में ले लो।  </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पूर्व महानिदेशक मोहम्मद अल बारदेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे का अल्टीमेटम जारी करने के बाद खाड़ी देशों से हस्तक्षेप करने की तत्काल अपील की है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्व आईएईए प्रमुख ने विनाशकारी सैन्य टकराव की संभावना का जिक्र किया। बारदेई ने एक्स पर एक पोस्ट में पड़ोसी खाड़ी देशों को संबोधित करते हुए कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">कृपया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक बार फिर अपनी पूरी ताकत झोंक दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले कि यह पागल शख्स इलाके को आग का गोला बना दे।"मोहम्मद अल बारदेई ने अपनी गुहार को वैश्विक मंच तक पहुंचाते हुए युद्ध को रोकने में अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। संयुक्त राष्ट्र के साथ रूस-चीन-फ्रांस को संबोधित एक अलग पोस्ट में उन्होंने पूछा कि क्या इस पागलपन को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है</span>?<br /><span lang="hi" xml:lang="hi"></span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध किसी समस्या का स्थायी हल नहीं है। इतिहास ने बार-बार सिखाया है कि युद्ध के मैदान में कभी कोई नहीं जीतता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस जो कम हारता है वह खुद को विजेता घोषित कर देता है। रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूक्रेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इज़राइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान या अमेरिका</span>—<span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ति का प्रदर्शन किसी को महान नहीं बनाता। महानता इस बात में है कि हम आने वाली पीढ़ी को एक ऐसी दुनिया दें जहाँ बारूद की गंध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भाईचारे की मिठास हो। एक बार और अमेरिका वियतनाम और अफगानिस्तान में जाकर अपना अंजाम देख चुका है। बाद में बहुत कुछ गंवाकर वहां से भाग आया। ये ईरान है। यहां  के गांव वाले, युवाओं और बच्चों ने भी अब शस्त्रों से दोस्ती कर ली है। हथियार संभाल लिए है। अमेरिका के दो हैलिकोप्टर को मार गिराने वाला एक मामूली गडरिया है। इस गडरिए को तो युद्ध कला भी नही आती । सिर्फ  इतना जानता है कि ये हैलिकोप्टर  हमलावर अमेरिका के है।  जिस देश की जनता इतनी जुझारू और लड़ाका  हो ,  जिसके गडरिये अमेरिका जैसे देश के दो− दो आधुनिकतम  हैलिकोप्टर गिरा दें,उसे हराना संभव  नहीं।   </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्रों को अपनी ज़िम्मेदारी  समझनी होगी । उन्हें  युद्ध के उन्माद को रोकना होगा। नहीं रोका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह दिन दूर नहीं जब </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इंसान</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बचेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसके भीतर की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इंसानियत</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी तरह दफन हो चुकी होगी। हमें यह समझना होगा कि धरती पर सरहदें हमने खींची हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुदरत ने नहीं। शांति की मेज़ पर बैठकर बात करना कमज़ोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सबसे बड़ी बहादुरी है। वक्त आ गया है कि हम "हथियारों की होड़" को छोड़कर "मानवता की जोड़" पर ध्यान दें। वरना इतिहास हमें उन लोगों के रूप में याद रखेगा ,जिनके पास सब कुछ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस एक-दूसरे के लिए दया और प्रेम नहीं था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 17:59:09 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप का ऐलान- यूएस जल्द ही युद्ध से हट जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के खिलाफ चल रहे अपने सैन्य अभियान को खत्म कर सकता है। शायद दो से तीन हफ्तों के भीतर। यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले एक महीने से चल रहा यह युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट को हिला चुका है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वॉल स्ट्रीट जनरल ने मंगलवार को ही यह खबर दे दी थी कि ट्रंप को उनके नज़दीकी सलाहकारों ने ईरान युद्ध से जल्द से जल्द बाहर निकलने की सलाह दी है। ट्रंप आज बुधवार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174769/trumps-announcement-us-will-soon-withdraw-from-the-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/69cc4d63f2aff-donald-trump-announces-iran-war-end-314030551-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के खिलाफ चल रहे अपने सैन्य अभियान को खत्म कर सकता है। शायद दो से तीन हफ्तों के भीतर। यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले एक महीने से चल रहा यह युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट को हिला चुका है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि वॉल स्ट्रीट जनरल ने मंगलवार को ही यह खबर दे दी थी कि ट्रंप को उनके नज़दीकी सलाहकारों ने ईरान युद्ध से जल्द से जल्द बाहर निकलने की सलाह दी है। ट्रंप आज बुधवार 1 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं, जिसमें वो सारी बातें साफ करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम बहुत जल्द वहां से निकल जाएंगे।” उन्होंने आगे जोड़ा कि यह वापसी “दो हफ्तों में, शायद दो या तीन हफ्तों में” हो सकती है। यह अब तक का उनका सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका इस सैन्य अभियान को समेटने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि इस युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी कूटनीतिक समझौते की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है… उन्हें मेरे साथ कोई समझौता करने की आवश्यकता नहीं है।<strong>”</strong></p>
<p style="text-align:justify;">ईरान युद्ध में बुरी तरह फँसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सहायता नहीं मिलने पर ब्रिटेन जैसे अपने सहयोगी देशों पर बौखला गए हैं। उनको धमकाते हुए उन्होंने चेताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कमी झेल रहे देशों के पास सिर्फ दो रास्ते हैं- या तो अमेरिका से तेल खरीदें, या खुद जाकर होर्मुज से तेल ले आएं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने सीधे अपने सहयोगी देशों से साफ़-साफ़ कह दिया है कि अमेरिका हमेशा उनकी मदद नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी अभियान में शामिल नहीं हुए, उन्हें अब खुद लड़ना सीखना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा,</p>
<p style="text-align:justify;">होर्मुज बंद होने से यूनाइटेड किंगडम जैसे जिन देशों को जेट फ्यूल नहीं मिल पा रहा है और जिसने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है, उनको मेरी सलाह है- नंबर 1 – अमेरिका से खरीदो, हमारे पास बहुत है। नंबर 2 – थोड़ी हिम्मत जुटाओ, होर्मुज जाओ और बस ले लो।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे लिखा, 'तुम्हें अब खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। अमेरिका अब तुम्हारी मदद नहीं करेगा, जैसा तुम हमारी मदद को नहीं आए थे। ईरान को क़रीब-क़रीब तबाह कर दिया गया है। मुश्किल काम हो गया। अब जाओ और अपना तेल खुद ले आओ!'</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सीमित सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन करता है। इस ब्लॉकेड से वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और 75 डॉलर प्रति बैरल से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। कई देशों में जेट फ्यूल और पेट्रोल की कमी हो गई है। कहा जा रहा है कि अमेरिका पर भी इसका असर पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ट्रंप ने पहले सहयोगी देशों से अपील की थी कि वे युद्धपोत भेजकर होर्मुज को सुरक्षित करें। लेकिन ब्रिटेन समेत बड़े मित्र देशों ने साफ़ इनकार कर दिया या ज़्यादा मदद नहीं की। अब ट्रंप नाराज़ हैं और कह रहे हैं कि अमेरिका अकेला सब नहीं संभालेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच ईरान की संसद की एक अहम समिति ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल यानी टैक्स लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है। यह टोल ईरान की अपनी मुद्रा रियाल में लिया जाएगा। योजना में अमेरिका और इसराइल से जुड़े जहाजों पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। जो देश ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं, उनके जहाजों को भी रोकने की बात कही गई है। ईरान कह रहा है कि वह होर्मुज पर अपना संप्रभु अधिकार लागू कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:27:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>'हॉय, ट्रंप यू आर फायर्ड' 48 घंटे से पहले ही ईरान ने यूएस राष्ट्रपति का उड़ाया मजाक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> ईरानी जनरल ज़ुल्फ़कारी ने चेतावनी दी कि ईरानी ऊर्जा ढांचे पर अमेरिका का कोई हमला अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ऊर्जा तथा तकनीकी सुविधाओं पर जवाबी हमलों को ट्रिगर करेगा। यह बयान यूएस राष्ट्रपति ट्रंप की 48 घंटे वाली धमकी के बाद आया है। सैन्य अधिकारी ने रविवार रात को टीवी संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का मज़ाक उड़ाया और उनके प्रसिद्ध रियलिटी-टीवी कैचफ्रेज़ को दोहराकर इस्लामिक गणराज्य के ढांचे के खिलाफ व्हाइट हाउस की हालिया धमकियों को खारिज कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रवक्ता सेकंड ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम ज़ुल्फ़कारी ने वीडियो में अमेरिकी प्रशासन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174005/even-before-48-hours-iran-made-fun-of-the-us"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_1774238569126_360.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> ईरानी जनरल ज़ुल्फ़कारी ने चेतावनी दी कि ईरानी ऊर्जा ढांचे पर अमेरिका का कोई हमला अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ऊर्जा तथा तकनीकी सुविधाओं पर जवाबी हमलों को ट्रिगर करेगा। यह बयान यूएस राष्ट्रपति ट्रंप की 48 घंटे वाली धमकी के बाद आया है। सैन्य अधिकारी ने रविवार रात को टीवी संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का मज़ाक उड़ाया और उनके प्रसिद्ध रियलिटी-टीवी कैचफ्रेज़ को दोहराकर इस्लामिक गणराज्य के ढांचे के खिलाफ व्हाइट हाउस की हालिया धमकियों को खारिज कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स के प्रवक्ता सेकंड ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम ज़ुल्फ़कारी ने वीडियो में अमेरिकी प्रशासन को सीधे संबोधित किया, जो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है। यह तंज वाशिंगटन की ओर से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के अवरोध को लेकर जारी 48 घंटे की अल्टीमेटम के बाद आया है। जनरल ज़ुल्फकारी ने कहा- "हाय ट्रंप, यू आर फायर्ड (आप हटा दिए गए)। आपको यह वाक्य अच्छी तरह पता है।"  जनरल ने अपने बयान को राष्ट्रपति के अक्सर सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होने वाले साइन-ऑफ की नकल करके समाप्त किया: "इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह व्यंग्य ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट का सीधा जवाब था, जिसमें राष्ट्रपति ने धमकी दी थी कि अगर रणनीतिक जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए दोबारा नहीं खोला गया तो ईरान के पावर प्लांट्स को "नष्ट" कर दिया जाएगा। ।व्हाइट हाउस द्वारा तय की गई 48 घंटे की समयसीमा ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को उच्च सतर्कता की स्थिति में डाल दिया है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल का मार्ग है, वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी गतिरोध में केंद्रीय फ्लैशपॉइंट बना हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज़ुल्फ़कारी ने आगे चेतावनी दी कि ईरान के ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र पर कोई हमला अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों से जुड़े व्यापक लक्ष्यों के खिलाफ तत्काल जवाबी कार्रवाई को ट्रिगर करेगा। "अगर दुश्मन द्वारा ईरान के ईंधन और ऊर्जा ढांचे पर हमला किया जाता है, तो अमेरिका और क्षेत्र में शासन से जुड़ी सभी ऊर्जा ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियां और डिसैलिनेशन सुविधाएं निशाना बनाई जाएंगी।" उन्होंने कहा, यह जोर देते हुए कि "युद्ध के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ईरान की रक्षा परिषद ने सोमवार को सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि अगर ईरान के तटों या द्वीपों पर हमला हुआ तो वह पूरे फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछाकर उसे अवरुद्ध कर देगी। फ़ार्स न्यूज़ के अनुसार, उच्च स्तरीय सुरक्षा निकाय के बयान में कहा गया है, "युद्धरत देशों के अलावा अन्य देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का एकमात्र रास्ता ईरान के साथ समन्वय करना है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा परिषद ने कहा, "ईरानी तटों या द्वीपों पर हमला करने के किसी भी शत्रु प्रयास" के परिणामस्वरूप "फारस की खाड़ी और तटों के सभी पहुंच मार्गों और संचार लाइनों में विभिन्न नौसैनिक बारूदी सुरंगें बिछाई जाएंगी।" इसमें आगे कहा गया है, "पूरी फारस की खाड़ी प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो जाएगी, और इसकी जिम्मेदारी धमकी देने वाले की होगी।"</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 20:52:52 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच भीषण जंग, जानें भारत ने इस पर क्या कहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती सैन्य टकराव की स्थिति ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला दिया है। दोनों पक्षों की ओर से जारी हमलों और पलटवार ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। इस बीच भारत ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत ने जताई चिंता, संयम बरतने की अपील</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम चिंताजनक हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171980/fierce-war-between-iran-and-israel-america-know-what-india-said"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/amerika-uddh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका की बढ़ती सैन्य टकराव की स्थिति ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला दिया है। दोनों पक्षों की ओर से जारी हमलों और पलटवार ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। इस बीच भारत ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारत ने जताई चिंता, संयम बरतने की अपील</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम चिंताजनक हैं। मंत्रालय ने सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने से बचने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। साथ ही सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किए जाने पर जोर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावासों और मिशनों के माध्यम से नागरिकों से संपर्क बनाए रखा गया है और उन्हें सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने तथा आपात स्थिति में मिशन से संपर्क करने की सलाह दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>लगातार हमलों से बिगड़े हालात</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में हालात तब और बिगड़ गए जब इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले किए गए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए इजराइल के साथ-साथ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा प्रभाव भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>नेतन्याहू का कड़ा बयान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा कि इन कार्रवाइयों से ईरान के लोगों को अपना भविष्य तय करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां की सरकार लंबे समय से इजराइल और अमेरिका के खिलाफ शत्रुता रखती रही है। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिनका उद्देश्य इजराइल को नुकसान पहुंचाना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>अनावश्यक यात्रा से बचें</p>
</li>
<li>
<p>स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें</p>
</li>
<li>
<p>भारतीय दूतावास से संपर्क में रहें</p>
</li>
<li>
<p>आपात स्थिति में तुरंत सहायता लें</p>
</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>वैश्विक चिंता बढ़ी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। कई देशों ने संयम बरतने और संघर्ष को फैलने से रोकने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>यूरोप</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/171980/fierce-war-between-iran-and-israel-america-know-what-india-said</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 21:47:59 +0530</pubDate>
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