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                <title> Hindi news - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>रक्षा खर्च नहीं, राष्ट्रीय निवेश: भारत की शक्ति-निर्माण यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कुछ क्षण केवल घटित घटनाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनके बाद लिए गए निर्णायक फैसलों से अमर होते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण विजय के तुरंत बाद प्रस्तुत </span>₹7.85 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ का रक्षा बजट ऐसा ही एक निर्णायक क्षण है। यह बजट मात्र व्यय का विवरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की बदली हुई सामरिक दृष्टि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अडिग आत्मविश्वास और भविष्य की सशक्त तैयारी का स्पष्ट उद्घोष है। </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">की यह वृद्धि साफ संकेत देती है कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा किसी समझौते की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामर्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संकल्प और निर्णायक शक्ति की</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168055/national-investment-not-defense-spending-indias-power-building-journey"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/indias-defence-2025.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कुछ क्षण केवल घटित घटनाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनके बाद लिए गए निर्णायक फैसलों से अमर होते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण विजय के तुरंत बाद प्रस्तुत </span>₹7.85 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ का रक्षा बजट ऐसा ही एक निर्णायक क्षण है। यह बजट मात्र व्यय का विवरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की बदली हुई सामरिक दृष्टि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अडिग आत्मविश्वास और भविष्य की सशक्त तैयारी का स्पष्ट उद्घोष है। </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">की यह वृद्धि साफ संकेत देती है कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा किसी समझौते की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामर्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संकल्प और निर्णायक शक्ति की भाषा में परिभाषित होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले वर्ष के </span>₹6.81 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ की तुलना में यह वृद्धि असाधारण अवश्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु वर्तमान परिस्थितियों में पूरी तरह अनिवार्य भी है। विशेष रूप से पूंजीगत व्यय का </span>₹2.19 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ तक पहुंचना और उसमें </span>22% <span lang="hi" xml:lang="hi">की तेज छलांग यह दर्शाती है कि भारत अब तात्कालिक जरूरतों से ऊपर उठकर दीर्घकालिक शक्ति निर्माण की दिशा में आगे बढ़ चुका है। ऑपरेशन सिंदूर ने यह निर्विवाद रूप से सिद्ध कर दिया कि आधुनिक युद्ध में तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी और आत्मनिर्भरता ही विजय की कुंजी होती हैं। इसी कारण यह बजट आंकड़ों से आगे बढ़कर एक सशक्त रणनीतिक संदेश बन जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने जिस निर्णायक ढंग से दुश्मन के हवाई क्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की परंपरागत धारणाओं को बदल दिया। शत्रु ठिकानों का सटीक और प्रभावी विनाश तथा संघर्षविराम के लिए विवश करना केवल सैन्य सफलता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक चेतावनी थी। अब यह बजट उसी चेतावनी को स्थायी सामरिक शक्ति में रूपांतरित करने का साधन बन रहा है। प्रत्येक प्लेटफॉर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक प्रणाली और प्रत्येक हथियार को स्वदेशी बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक और दूरदर्शी कदम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा मंत्री द्वारा इसे “रणनीतिक अनिवार्यता” करार देना वर्तमान वैश्विक यथार्थ की सटीक और स्पष्ट व्याख्या है। मई </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">के सीमित किंतु तीव्र संघर्ष ने यह उजागर कर दिया कि आतंक और अस्थिरता की जड़ें पड़ोसी भूभागों में गहराई तक फैली हुई हैं। ऐसे वातावरण में केवल रक्षात्मक रुख पर्याप्त नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आक्रामक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम सैन्य शक्ति की नितांत आवश्यकता है। इसी रणनीतिक सोच के अनुरूप इस बजट में विमानन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एयरो इंजन और अगली पीढ़ी की युद्ध प्रणालियों पर विशेष और स्पष्ट बल दिया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विमान और एयरो इंजन के लिए </span>₹63,733 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ तथा नौसेना के बेड़े के लिए </span>₹25,023 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ का आवंटन भारत की बहु-आयामी और संतुलित सैन्य तैयारी का स्पष्ट संकेत है। अगली पीढ़ी के फाइटर जेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एईडब्ल्यू एंड सी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रणालियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एमएलआरएस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीवीआर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइलें और लोइटरिंग मुनिशन्स अब कागजी योजनाएं नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ठोस अधिग्रहण की प्राथमिक सूची में शामिल हो चुके हैं। कुल पूंजीगत बजट का </span>75% <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित किया जाना आत्मनिर्भर भारत की नीति को विचार से निकालकर ठोस जमीन पर स्थापित करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी रक्षा उत्पादन अब केवल एक आकांक्षा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सशक्त और स्थापित वास्तविकता का रूप ले चुका है। </span>₹1.39 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ से बढ़कर </span>₹1.64 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ तक घरेलू खरीद का विस्तार यह स्पष्ट करता है कि भारतीय रक्षा उद्योग पर सरकार का भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। डीआरडीओ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए </span>₹29,100 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ का आवंटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें </span>₹17,250 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ पूंजीगत अनुसंधान और विकास के लिए निर्धारित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की युद्ध तकनीकों की नींव रखता है। यह निवेश अनुसंधान प्रयोगशालाओं को सीधे रणभूमि की आवश्यकताओं से जोड़ने वाला साबित होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भरता की इस रणनीतिक यात्रा में निजी क्षेत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका लगातार अधिक निर्णायक होती जा रही है। रक्षा अनुसंधान बजट का </span>25% <span lang="hi" xml:lang="hi">इन क्षेत्रों के लिए खोलना नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिस्पर्धा और तकनीकी आत्मविश्वास को नई ऊर्जा प्रदान करता है। ड्रोन स्वार्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर डिफेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियां और स्पेस वारफेयर जैसी क्षमताएं अब भारत की प्राथमिक सामरिक सूची में शामिल हो चुकी हैं। यह बजट भारत को तकनीक का उपभोक्ता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सशक्त निर्माता और संभावित निर्यातक बनाने की दिशा में आगे बढ़ाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा निर्यात में लगातार हो रही वृद्धि इस नीति की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। भारत अब वैश्विक रक्षा बाजार में एक भरोसेमंद और सक्षम साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। राजस्व व्यय के लिए </span>₹3.65 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ और पेंशन के लिए </span>₹1.71 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ का प्रावधान यह दर्शाता है कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों का कल्याण भी उतनी ही प्राथमिकता में है। ईसीएचएस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में </span>45% <span lang="hi" xml:lang="hi">की बढ़ोतरी कर </span>₹12,100 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ का आवंटन सैनिक परिवारों के प्रति राष्ट्र की स्थायी और सशक्त प्रतिबद्धता को और मजबूती प्रदान करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक परिदृश्य पर दृष्टि डालें तो चीन का निरंतर सीमा दबाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान की अस्थिर और आक्रामक रणनीति तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भारत के समक्ष जटिल और बहुस्तरीय चुनौतियां खड़ी करता है। ऐसे परिवेश में जीडीपी का लगभग </span>2% <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा पर व्यय करना भारत को विश्व के शीर्ष रक्षा व्यय करने वाले देशों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करता है। क्वाड और आई</span>2<span lang="hi" xml:lang="hi">यू</span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका लगातार सशक्त हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यह रक्षा बजट उस भूमिका को आवश्यक सैन्य आधार और विश्वसनीयता प्रदान करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर ने यह निर्विवाद संदेश दिया कि शांति की सबसे ठोस और विश्वसनीय गारंटी सशक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सजग और सक्षम सेना ही होती है। यह रक्षा बजट उसी सीख को संकल्प से नीति में रूपांतरित करता है। सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन साधते हुए यह आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को ठोस गति प्रदान करता है। विकसित भारत</span>@2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">के दृष्टिकोण से जुड़ा यह बजट केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाले दशकों की राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव रखता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">₹7.85 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख करोड़ का यह रक्षा बजट भारत की नई सामरिक पहचान का स्पष्ट घोषणापत्र है। यह पहचान भय से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और सामर्थ्य से गढ़ी गई है। स्वदेशी हथियारों से सुसज्जित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी रूप से सक्षम और रणनीतिक रूप से एकजुट भारतीय सेनाएं आज राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बन चुकी हैं। हर रुपये में राष्ट्रभक्ति और हर निर्णय में अडिग संकल्प झलकता है। यह बजट स्पष्ट करता है कि भारत अब केवल परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया नहीं देता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपने भविष्य की दिशा स्वयं निर्धारित करता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 22:47:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बुद्ध कल भी प्रासंगिक थे और आगे भी प्रासंगिक रहेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलित कर एवं मॉ सरस्वती एवं गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सिद्धार्थनगर महोत्सव-2026 के तीसरे दिन शुक्रवार को शुभारम्भ किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सिद्धार्थनगर महोत्सव-2026 के कार्यक्रम में आने का मौका मिला और पिपरहवा स्तूप का दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह सबसे बड़ा बौद्ध तीर्थ स्थल है। पूरे विश्व में सबसे अधिक पूजा गौतम बुद्ध की होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गौतम बुद्ध ने शान्ति और अंहिसा का ज्ञान दिया। बुद्ध कल भी प्रासंगिक थे और आगे भी प्रासंगिक रहेंगे।प्रधानमंत्री कहते है हमने संसार को बुद्ध</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167708/buddha-was-relevant-yesterday-and-will-remain-relevant-in-future"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/1769775343115.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलित कर एवं मॉ सरस्वती एवं गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सिद्धार्थनगर महोत्सव-2026 के तीसरे दिन शुक्रवार को शुभारम्भ किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सिद्धार्थनगर महोत्सव-2026 के कार्यक्रम में आने का मौका मिला और पिपरहवा स्तूप का दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह सबसे बड़ा बौद्ध तीर्थ स्थल है। पूरे विश्व में सबसे अधिक पूजा गौतम बुद्ध की होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौतम बुद्ध ने शान्ति और अंहिसा का ज्ञान दिया। बुद्ध कल भी प्रासंगिक थे और आगे भी प्रासंगिक रहेंगे।प्रधानमंत्री कहते है हमने संसार को बुद्ध दिया है युद्ध नही। गौतम बुद्ध ने काला नमक चावल प्रसाद के रूप में दिया है। जिसकी पैकेजिंग कर पूरे विश्व में भेजा जा रहा है। डबल इंजन की सरकार में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के साथ काम कर रही है। 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र होगा। महिलाओं का सश्क्तिकरण होगा। युवाओं को रोजगार मिलेगा। विकास की झांकी दिखाई दे रही है। सिद्धार्थनगर को अग्रणी जनपद बनने से कोई नही रोक सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थनगर के विकास के लिए सरकार का खजाना समर्पित है। भगवान बुद्ध के अवशेष को मेरे नेतृत्व में रूस भेजा गया था। यह अवशेष पिपरहवा में खुदाई से निकला था। मै प्रयास करूंगा कि उसका अवशेष पिपरहवा में रखा जाये। बुद्ध के अनुयायी यहां पर दर्शन करने आयेगे। सिद्धार्थनगर का विकास कपिलवस्तु का विकास कोई रोक नही पायेगा। बुद्ध से जुड़े स्थानों को सड़क, रेज और हवाई मार्ग से जोड़ने का काम किया जा रहा है। विश्व में सबसे अधिक पर्यटक उत्तर प्रदेश में आते है। पिपरहवा के लिए प्रयास किया जायेगा जिससे यहां पर अधिक से अधिक पर्यटक आये। 2047 तक विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश बनेगा। प्रधानमंत्री ने यूरोप के बाजार आपके लिए खोल दिया है। भारत विश्व गुरू बनेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान उपमुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य द्वारा काला नमक चावल जोन का अवलोकन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक श्याम धनी राही, क्षेत्रीय अध्यक्ष गोरखपुर क्षेत्र  सहजानन्द राय, जिलाध्यक्ष भाजपा  कन्हैया पासवान, जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जी.एन., पुलिस अधीक्षक डा0 अभिषेक महाजन, सांसद प्रतिनिधि एस.पी.अग्रवाल, पूर्व विधायक  डा0 सतीश द्विवेदी, पूर्व विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 18:34:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Taiwan ने China को दिया एक और झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>नई ताइपे। </strong>चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए <strong>TikTok सहित छह चीनी मोबाइल ऐप्लिकेशनों पर शैक्षणिक परिसरों के इंटरनेट नेटवर्क पर प्रतिबंध</strong> लगा दिया है। ताइवान के शिक्षा मंत्रालय ने इन ऐप्स को <strong>डिजिटल और साइबर सुरक्षा के लिए खतरा</strong> बताया है।</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब स्कूलों, विश्वविद्यालयों और मंत्रालय से जुड़ी एजेंसियों में उपयोग होने वाले <strong>कैंपस नेटवर्क</strong>, जिनमें <strong>TANet और iTaiwan हॉटस्पॉट</strong> शामिल हैं, पर इन ऐप्स तक पहुंच पूरी तरह बंद रहेगी। इसके साथ ही, <strong>सरकारी और आधिकारिक उपकरणों</strong> पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167692/taiwan-gave-another-blow-to-china"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/taiwan-ने-china-को-दिया-एक-और-झटका.png" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk</strong></p>
<p><strong>नई ताइपे। </strong>चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ताइवान ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए <strong>TikTok सहित छह चीनी मोबाइल ऐप्लिकेशनों पर शैक्षणिक परिसरों के इंटरनेट नेटवर्क पर प्रतिबंध</strong> लगा दिया है। ताइवान के शिक्षा मंत्रालय ने इन ऐप्स को <strong>डिजिटल और साइबर सुरक्षा के लिए खतरा</strong> बताया है।</p>
<p>शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अब स्कूलों, विश्वविद्यालयों और मंत्रालय से जुड़ी एजेंसियों में उपयोग होने वाले <strong>कैंपस नेटवर्क</strong>, जिनमें <strong>TANet और iTaiwan हॉटस्पॉट</strong> शामिल हैं, पर इन ऐप्स तक पहुंच पूरी तरह बंद रहेगी। इसके साथ ही, <strong>सरकारी और आधिकारिक उपकरणों</strong> पर इन ऐप्स को डाउनलोड, इंस्टॉल और इस्तेमाल करने पर भी रोक लगा दी गई है।</p>
<h3>सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला</h3>
<p>शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि ताइवान के <strong>डिजिटल मामलों के मंत्रालय</strong> ने पिछले महीने इन छह चीनी ऐप्स को <strong>सूचना सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण</strong> घोषित किया था। मंत्रालय ने आम नागरिकों से भी अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की थी।</p>
<p>एक संवाददाता सम्मेलन में शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि <strong>TikTok पर हानिकारक और अनुचित सामग्री</strong> को लेकर कई देशों में जुर्माना लगाया जा चुका है, जिससे इसके सुरक्षा मानकों पर सवाल उठते हैं।</p>
<h3>बच्चों और युवाओं की सुरक्षा पर जोर</h3>
<p>शिक्षा उप मंत्री <strong>चू चुन-चांग</strong> ने कहा कि यह निर्णय<br /><strong>साइबर सुरक्षा प्रबंधन अधिनियम</strong> और<br /><strong>बाल एवं किशोर कल्याण एवं अधिकार संरक्षण अधिनियम</strong><br />के तहत लिया गया है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय वर्ष <strong>2014 से ही कैंपस नेटवर्क को अनुचित और हानिकारक सामग्री से सुरक्षित</strong> करता आ रहा है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों को शिक्षण गतिविधियों में <strong>उच्च जोखिम वाले एप्लिकेशनों</strong> के उपयोग से बचना चाहिए, ताकि छात्रों को सुरक्षित और उपयुक्त शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।</p>
<h3>क्या है TANet?</h3>
<p>TANet शिक्षा मंत्रालय द्वारा छात्रों और शिक्षकों को प्रदान की जाने वाली <strong>निःशुल्क इंटरनेट सेवा</strong> है। ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान में <strong>9,000 से अधिक iTaiwan हॉटस्पॉट</strong> हैं, जिनका संचालन डिजिटल मामलों के मंत्रालय द्वारा किया जाता है।</p>
<h3>मानसिक स्वास्थ्य पर भी फोकस</h3>
<p>मंत्रालय ने कहा कि युवाओं के <strong>मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी</strong> करना और उन्हें ऑनलाइन जीवन व वास्तविक दुनिया के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है। इसके लिए स्कूलों और अभिभावकों के साथ मिलकर बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के प्रयास जारी रहेंगे।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल <strong>ताइवान की साइबर सुरक्षा नीति</strong> को मजबूत करता है, बल्कि चीन के डिजिटल प्रभाव को सीमित करने की दिशा में भी एक अहम संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 18:01:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूरोपीय यूनियन एकीकृत अर्थव्यवस्था के लिए भारत स्वाभाविक विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच प्रस्तावित तथा प्रगति पर चल रहा व्यापक व्यापारिक समझौता केवल द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और अमेरिका की पारंपरिक आर्थिक व रणनीतिक प्रधानता को चुनौती देने वाले एक नए युग का संकेत भी है। शीत युद्ध के बाद लंबे समय तक अमेरिका ने वैश्विक व्यापार, निवेश, तकनीक और वित्तीय नियमों को अपने हितों के अनुसार परिभाषित किया, किंतु इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में परिस्थितियाँ तेजी से परिवर्तित हो रही हैं। चीन के उदय, रूस-पश्चिम टकराव, यूक्रेन युद्ध, आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन, संरक्षणवाद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167679/india-a-natural-choice-for-european-union-integrated-economy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/यूरोपीय-यूनियन-एकीकृत-अर्थव्यवस्था-के-लिए-भारत-स्वाभाविक-विकल्प.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच प्रस्तावित तथा प्रगति पर चल रहा व्यापक व्यापारिक समझौता केवल द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और अमेरिका की पारंपरिक आर्थिक व रणनीतिक प्रधानता को चुनौती देने वाले एक नए युग का संकेत भी है। शीत युद्ध के बाद लंबे समय तक अमेरिका ने वैश्विक व्यापार, निवेश, तकनीक और वित्तीय नियमों को अपने हितों के अनुसार परिभाषित किया, किंतु इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में परिस्थितियाँ तेजी से परिवर्तित हो रही हैं। चीन के उदय, रूस-पश्चिम टकराव, यूक्रेन युद्ध, आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन, संरक्षणवाद की वापसी और वैश्विक दक्षिण की बढ़ती मुखरता ने अमेरिका की एकछत्र भूमिका को सीमित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस परिदृश्य में भारत और यूरोपीय यूनियन का निकट आना अमेरिका के लिए केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी गहरे निहितार्थ रखता है। यूरोपीय यूनियन विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जबकि भारत तीव्र गति से उभरता हुआ विशाल उपभोक्ता बाजार, युवा जनसंख्या और तकनीकी क्षमता वाला देश है। इन दोनों का व्यापारिक गठबंधन वैश्विक व्यापार के प्रवाह को एशिया और यूरोप के बीच पुनः केंद्रित कर सकता है, जिससे अमेरिका की मध्यस्थ भूमिका आंशिक रूप से कमजोर हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापारिक संबंध सुदृढ़ हैं, किंतु ट्रंप काल से लेकर बाइडेन प्रशासन तक संरक्षणवादी प्रवृत्तियाँ, कार्बन टैक्स, सब्सिडी आधारित औद्योगिक नीतियाँ और तकनीकी नियंत्रणों ने पारस्परिक अविश्वास को जन्म दिया है। ऐसे में यूरोप वैकल्पिक साझेदारों की तलाश में है और भारत उसके लिए एक स्वाभाविक विकल्प बनकर उभरता है। भारत के साथ व्यापारिक समझौता यूरोप को न केवल सस्ते श्रम और बड़े बाजार तक पहुँच देता है बल्कि चीन पर उसकी निर्भरता को भी कम करता है, जो अमेरिका की रणनीति से मेल तो खाता है, किंतु यदि यह प्रक्रिया अमेरिका को दरकिनार कर आगे बढ़ती है तो वाशिंगटन के लिए चिंता का विषय बन जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत–यूरोपीय यूनियन समझौते से फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएँ, हरित ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, डिजिटल व्यापार और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अमेरिका की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत घट सकती है। विशेष रूप से डिजिटल व्यापार और डेटा गवर्नेंस के क्षेत्र में यूरोपीय यूनियन के सख्त नियम और भारत की संप्रभु डेटा नीति मिलकर अमेरिकी टेक कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती दे सकती हैं, जो लंबे समय से वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था पर हावी रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, यदि यूरोपीय निवेश भारत की विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करता है तो अमेरिका की ‘री-शोरिंग’ और ‘फ्रेंड-शोरिंग’ रणनीतियों को अप्रत्यक्ष झटका लग सकता है, क्योंकि वैश्विक पूंजी एक वैकल्पिक आकर्षक गंतव्य की ओर प्रवाहित होगी। भू-राजनीतिक दृष्टि से भी यह समझौता अमेरिका को पुनर्विचार के लिए विवश करता है, क्योंकि भारत अब केवल क्वाड या इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक स्तंभ भर नहीं रह जाता, बल्कि वह स्वतंत्र आर्थिक ध्रुव के रूप में अपनी पहचान मजबूत करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की यह स्वायत्तता अमेरिका के लिए द्वैध भाव उत्पन्न करती है।एक तरफ वह भारत को चीन के प्रतिरोध में आवश्यक साझेदार मानता है, दूसरी ओर वह भारत के अत्यधिक आत्मनिर्भर और बहुआयामी होते जाने से अपने प्रभाव क्षेत्र के सीमित होने की आशंका से भी काफी भयभीत है। यूरोपीय यूनियन के साथ भारत का गहरा आर्थिक संबंध यह संकेत देता है कि भारत किसी एक शक्ति गुट में बंधने के बजाय बहुपक्षीय संतुलन की नीति पर चल रहा है, जो अमेरिकी विदेश नीति की पारंपरिक अपेक्षाओं से भिन्न है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही, डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक दबाव बन सकता है, यदि भारत और यूरोप व्यापार में वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों, स्थानीय मुद्राओं या डिजिटल करेंसी जैसे विकल्पों पर विचार करते हैं। यद्यपि यह प्रक्रिया धीमी होगी, किंतु इसके संकेत मात्र से ही अमेरिका की वित्तीय प्रधानता को लेकर विमर्श तेज होता है। अमेरिका के लिए यह समझौता एक चेतावनी भी है कि यदि वह अपने सहयोगियों के साथ व्यापारिक संबंधों में अधिक लचीलापन, पारदर्शिता और साझेदारी का भाव नहीं अपनाता, तो वे नए विकल्प खोजने को विवश होंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">यह अतिशयोक्ति होगा कि भारत यूरोपीय यूनियन व्यापारिक समझौता अमेरिका को पूर्णतः हाशिये पर धकेल देगा, क्योंकि अमेरिका अब भी तकनीक, रक्षा, वित्त और नवाचार में अग्रणी है, किंतु इतना स्पष्ट है कि उसकी निर्विवाद केंद्रीयता अब पहले जैसी नहीं रही। अंततः यह समझौता उस बदलती वैश्विक वास्तविकता का प्रतीक है जहाँ शक्तियाँ टकराव से अधिक संतुलन, निर्भरता से अधिक विविधता और अधीनता से अधिक स्वायत्तता की ओर अग्रसर हैं। इस प्रक्रिया में अमेरिका को स्वयं को अनुकूलित करना होगा, न कि केवल नियंत्रक की भूमिका में बने रहने का आग्रह करना होगा।इस समझौते से यह भी आशंका बनती है कि भारत के साथ अमेरिका का व्यापारिक संबंध नए दृष्टिकोण से नए समीकरणों में पदार्पित हो सकता है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 17:32:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संकल्प संस्था द्वारा 77 वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विवेक शर्मा ब्यूरोचीफ टूण्डला</strong></p>
<p><strong>टूण्डला-</strong></p>
<p>77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर संकल्प संस्था द्वारा भारत माता चौक पर ध्वजा रोहण किया गया उसके वाद भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक द्वारा अतिथियों को माला पहनाकर एवं शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एन.पी. सक्सेना, विनोद गुप्ता , राकेश यादव, दयाशंकर, डॉ. योगेन्द्र अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं पत्रकार मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों का भी सम्मान किया गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167626/77th-republic-day-was-celebrated-with-great-enthusiasm-by-sankalp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img_20260129_190113.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विवेक शर्मा ब्यूरोचीफ टूण्डला</strong></p>
<p><strong>टूण्डला-</strong></p>
<p>77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर संकल्प संस्था द्वारा भारत माता चौक पर ध्वजा रोहण किया गया उसके वाद भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक द्वारा अतिथियों को माला पहनाकर एवं शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एन.पी. सक्सेना, विनोद गुप्ता , राकेश यादव, दयाशंकर, डॉ. योगेन्द्र अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं पत्रकार मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों का भी सम्मान किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 20:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीसीआई एक्सप्रेस फाउंडेशन जयपुर फुट एवं पुनर्वास केंद्र लखनऊ में 1 वर्ष से जारी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div><br /><strong>लखनऊ। </strong></div>
<div>  </div>
<div>राजधानी लखनऊ के टीसीआई एक्सप्रेस फाउंडेशन द्वारा संचालित जयपुर फुट एवं पुनर्वास केंद्र लखनऊ में बीते एक वर्ष से दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सेवाएँ लगातार दी जा रही हैं। इसी क्रम में केंद्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टर पवन नेहरा ने स्वतंत्र प्रभात मीडिया की टीम से खास बातचीत की। बातचीत के दौरान डॉक्टर पवन नेहरा ने अपने लगभग 20 वर्षों के चिकित्सा और पुनर्वास क्षेत्र के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनका सफर भारत से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक रहा है, जहाँ उन्होंने दिव्यांगजनों के पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</div>
<div>  </div>
<div>डॉ0 पवन नेहरा ने खास</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163453/tci-express-foundation-jaipur-foot-and-rehabilitation-center-in-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/125288dfd.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div><br /><strong>लखनऊ। </strong></div>
<div> </div>
<div>राजधानी लखनऊ के टीसीआई एक्सप्रेस फाउंडेशन द्वारा संचालित जयपुर फुट एवं पुनर्वास केंद्र लखनऊ में बीते एक वर्ष से दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सेवाएँ लगातार दी जा रही हैं। इसी क्रम में केंद्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉक्टर पवन नेहरा ने स्वतंत्र प्रभात मीडिया की टीम से खास बातचीत की। बातचीत के दौरान डॉक्टर पवन नेहरा ने अपने लगभग 20 वर्षों के चिकित्सा और पुनर्वास क्षेत्र के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उनका सफर भारत से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक रहा है, जहाँ उन्होंने दिव्यांगजनों के पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।</div>
<div> </div>
<div>डॉ0 पवन नेहरा ने खास तौर पर युवाओं को मेडिकल और रिहैबिलिटेशन क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र न केवल करियर का बेहतर विकल्प है, बल्कि समाज सेवा का भी एक सशक्त माध्यम है। इसके साथ ही उन्होंने सरकार और समाज को संदेश देते हुए कहा कि दिव्यांगजनों को दया की नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच और सम्मान के साथ देखने की आवश्यकता है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।</div>
</div>
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<div class="adL"> </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 21:54:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिले के स्वास्थ्य विभाग मे नोडल एवं सह नोडल को हटाए जाने से स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र / </strong>उत्तर प्रदेश जिले के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों अब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार लगातार निजी हॉस्पिटल की जांच में गुटबाजी का मामला सुनने में आता रहा है लेकिन इस विषय को लेकर अब तक कोई अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं था ,लेकिन शुक्रवार को निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने सह नोडल और पटल सहायक पर मनमानी का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं प्रभारी सीएमओ डॉ0 पंकज कुमार राय ने उनका इस्तीफा मंजूर करते हुए सह नोडल डॉ0 गुरु</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167291/there-was-a-stir-in-the-health-department-due-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/1001097952.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र / </strong>उत्तर प्रदेश जिले के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों अब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार लगातार निजी हॉस्पिटल की जांच में गुटबाजी का मामला सुनने में आता रहा है लेकिन इस विषय को लेकर अब तक कोई अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं था ,लेकिन शुक्रवार को निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने सह नोडल और पटल सहायक पर मनमानी का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं प्रभारी सीएमओ डॉ0 पंकज कुमार राय ने उनका इस्तीफा मंजूर करते हुए सह नोडल डॉ0 गुरु प्रसाद को भी पद से हटा दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं कुछ दिनों पूर्व छापेमारी करने बभनी गए सह नोडल अधिकारी ने भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अवैध हॉस्पिटल संचालकों के मिलीभगत को भी स्वीकार किया था वहीं निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अवैध रूप से संचालित कई निजी अस्पताल, पैथलाजी के खिलाफ कार्रवाई की। यह बात विभाग में तैनात कुछ कर्मियों को नागवार लगी और उनका मनोबल तोड़ने का कार्य शुरु कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहीं नहीं सह नोडल और पटल सहायक भी मनमानी कर रहे थे। उनकी मनमानी से तंग आकर उन्होंने निजी अस्पताल के नोडल अधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया। डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद ने सीएमओ को दिए पत्र में आरोप लगाया कि सह नोडल अधिकारी और पटल सहायक द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के मनमाने ढंग से छापेमारी किया जा रहा है। अब आगे देखना होगा कि नये नोडल अधिकारी नियुक्त किये जाने पर स्वास्थ्य विभाग में झोलाछाप डॉक्टर व अबैध नर्सिंग होम पर लगाम लग पायेगा या ऐसे ही गरीब आदिवासी शिकार बनते रहेंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jan 2026 18:29:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनरेगा गरीब मजलूमों व ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है - डॉ नीरज</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत शनिवार को सदर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड  24,सदर बाजार में जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं एसआईआर जिला कोऑर्डिनेटर रामशिरोमणि वर्मा के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन एवं मनरेगा बचाओ संग्राम से संबंधित महत्वपूर्ण चौपाल का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने की। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष डॉ.नीरज त्रिपाठी एवं जिला उपाध्यक्ष रामशिरोमणि वर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि मनरेगा गरीब, मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वर्तमान सरकार लगातार मनरेगा को कमजोर करने की साजिश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167147/mnrega-is-the-backbone-of-poor-people-and-rural-economy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260124-wa0116.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत शनिवार को सदर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड  24,सदर बाजार में जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं एसआईआर जिला कोऑर्डिनेटर रामशिरोमणि वर्मा के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन एवं मनरेगा बचाओ संग्राम से संबंधित महत्वपूर्ण चौपाल का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने की। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष डॉ.नीरज त्रिपाठी एवं जिला उपाध्यक्ष रामशिरोमणि वर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि मनरेगा गरीब, मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वर्तमान सरकार लगातार मनरेगा को कमजोर करने की साजिश कर रही है एवं मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं, जिसे कांग्रेस किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी। मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में पूरी तरह बहाल करना हमारी प्रमुख मांग है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर मनरेगा जिला कोऑर्डिनेटर रवि भूषण सिन्हा एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी पट्टी सुनीता सिंह पटेल ने संयुक्त रूप से कहा कि मनरेगा कानून मजदूरों का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है। वीवी ग्राम जी कानून को तत्काल रद्द किया जाए तथा मनरेगा को पूर्ण रूप से बहाल कर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। कांग्रेस पार्टी मजदूरों की आवाज़ को सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाएगी और गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस सेवादल के जिला अध्यक्ष महेन्द्र शुक्ल एवं जिला कांग्रेस प्रवक्ता मासूम हैदर ने संयुक्त रूप कहा कि एसआईआर के जरिए भाजपा चुनाव आयोग से मिली भगत कर लोकतंत्र पर चोट पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार छीनना और मजदूरों के हाथ से काम वापस लेना भाजपा का सबसे बड़ा छल व कपट है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पौने तीन करोड़ मतदाताओं का नाम एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से हटाया गया है। भाजपा सरकार संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर मुख्य रूप से सामाजिक भागीदारी संवैधानिक अधिकार मंच के जिला अध्यक्ष एडवोकेट ऋषिराम वर्मा, कोषाध्यक्ष वेदान्त तिवारी, पिछड़ा वर्ग विभाग के जिला अध्यक्ष राजेन्द्र वर्मा,सुधीर तिवारी,कपिल ओझा,ओम प्रकाश सरोज, हजारी लाल वर्मा,मण्डल अध्यक्ष शुभम शुक्ल,देवमणि पाण्डेय, नूर आलम, सुभाष चंद्र वर्मा, कौशल सिंह,वीरेंद्र कुमार, रामचंद्र पटेल, मोहम्मद इदरीश, एल.बी पटेल, दयाशंकर सिंह, घनश्याम यादव, सुनील वर्मा, रामकरन वर्मा, अरविंद वर्मा, कृष्ण बहादुर पटेल, सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 19:41:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन विभाग की दोहरे मापदण्ड से उपजते सवाल </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दिनेश चौधरी की रिपोर्ट </strong></div>
<div>
<div class="gs">
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<div class="ii gt">
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<div><strong>उमरिया --</strong> उमरिया जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र में पिछले माह कथली नदी के किनारे बाघ की हत्या के मामले में दोषी वन कर्मचारियों के ऊपर अब तक कार्यवाही नहीं किये जाने से वन मंडलाधिकारी की कार्यवाही पर तीखे सवाल खड़े करके रख दिया है, जबकि नौरोजाबाद परिक्षेत्र के कल्दा बीट में राजस्व भूमि पर खैर के वृक्षों की कटाई को अवैध मानते हुए वन मंडलाधिकारी ने वन रक्षक और वन पाल को निलंबित करने का फरमान जारी किया गया है। इतना ही नही इसी तरह नौरोजाबाद परिक्षेत्र के मनेरी बीट में राजस्व गाँव  करौंदी के</div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167135/questions-arising-from-double-standards-of-forest-department"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img_20260124_164024.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दिनेश चौधरी की रिपोर्ट </strong></div>
<div>
<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;">
<div> </div>
<div><strong>उमरिया --</strong> उमरिया जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र में पिछले माह कथली नदी के किनारे बाघ की हत्या के मामले में दोषी वन कर्मचारियों के ऊपर अब तक कार्यवाही नहीं किये जाने से वन मंडलाधिकारी की कार्यवाही पर तीखे सवाल खड़े करके रख दिया है, जबकि नौरोजाबाद परिक्षेत्र के कल्दा बीट में राजस्व भूमि पर खैर के वृक्षों की कटाई को अवैध मानते हुए वन मंडलाधिकारी ने वन रक्षक और वन पाल को निलंबित करने का फरमान जारी किया गया है। इतना ही नही इसी तरह नौरोजाबाद परिक्षेत्र के मनेरी बीट में राजस्व गाँव  करौंदी के खेत से दो सागौन  वृक्ष का मामले में भी विभाग चुप्पी साधे बैठा हुआ है।</div>
<div> </div>
<div>ज्ञात होवे की चंदिया वन परिक्षेत्र के अन्तर्गत पिछले 12 दिसंबर 2025 को कथली नदी के किनारे बिजली के करेंट से एक बाघ की हत्या का मामला दर्ज किया गया था, वन विभाग ने बाघ के हत्या के लिए छह आरोपियों को पकड कर न्यायालय भेंज दिया, साथ ही इस मामले में दोषी पाये गये वन कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी जांच में विभाग के कतिपय कर्मचारियों को दोषी पाया गया था।</div>
<div> </div>
<div>जिसकी जांच प्रतिवेदन वन परिक्षेत्राधिकारी और उप वन मंडलाधिकारी उमरिया की अनुशंसा सहित वन मंडलाधिकारी उमरिया के दफ्तर में पिछले एक माह से धूल खा रही है, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही न होने से अधिकारियों पर कतिपय कर्मचारियों को बचाने के आरोप लगाये जा रहे हैं। नौरोजाबाद परिक्षेत्र के कल्दा बीट के कर्मचारियों के ऊपर हुई कार्यवाही से वन विभाग को  कटघरे में खड़ा करता है , विभागीय कार्यवाही में इस तरह की असमानता बरतने के पीछे राज क्या छिपा है।</div>
<div> </div>
<div>विदित होवे की बाघ एक राष्ट्रीय पशु है और उसके रख रखाव के लिए बाघ अभयारण्य बनाकर पाल रही है और उसके हत्या के लिए दोषियों को जहाँ एक ओर जेल की हवा खा रहे हैं उसी मामले में विभागीय कर्मचारियों के दोष साबित होने के बाद  कार्यवाही न किया जाना विभाग के आला अधिकारी की कार्यवाही को न सिर्फ सवालों के घेरे में बताया जा रहा है,उन पर पक्षपात और विसंगति पूर्ण कार्यवाही के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।इस संदर्भ में वन मंडलाधिकारी विवेक सिंह  से दूरभाष पर 9407199140 से संपर्क किया गया लेकिन नेटवर्क न होने के कारण बात नहीं हो पायी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/167135/questions-arising-from-double-standards-of-forest-department</link>
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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 19:09:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय एकता के महायज्ञ को पूरा करने के लिए संकल्प ले, आगे आये</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस केवल एक तारीख नहीं है, यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का उत्सव है। यह वह ऐतिहासिक दिन है जब भारत ने स्वयं को केवल आज़ाद राष्ट्र ही नहीं बल्कि एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। इस दिन हमने अपने संविधान को अपनाया, जिसने हमें अधिकार ही नहीं दिए बल्कि कर्तव्यों की याद भी दिलाई। गणतंत्र दिवस हमें यह समझाता है कि राष्ट्र केवल सरकार से नहीं बनता, बल्कि हर नागरिक के आचरण, सोच और कर्म से बनता है। यही दिन लोकतंत्र की भावना का सम्मान करने, संविधान के मूल्यों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167127/come-forward-with-a-resolution-to-complete-the-great-sacrifice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/hindi-divas35.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस केवल एक तारीख नहीं है, यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का उत्सव है। यह वह ऐतिहासिक दिन है जब भारत ने स्वयं को केवल आज़ाद राष्ट्र ही नहीं बल्कि एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। इस दिन हमने अपने संविधान को अपनाया, जिसने हमें अधिकार ही नहीं दिए बल्कि कर्तव्यों की याद भी दिलाई। गणतंत्र दिवस हमें यह समझाता है कि राष्ट्र केवल सरकार से नहीं बनता, बल्कि हर नागरिक के आचरण, सोच और कर्म से बनता है। यही दिन लोकतंत्र की भावना का सम्मान करने, संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका पर आत्ममंथन करने का अवसर देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, उसकी एकता और उसकी विविधता से है। गणतंत्र दिवस पर हम केवल परेड, झांकियों और तिरंगे को देखकर भावुक नहीं होते, बल्कि उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को भी याद करते हैं जिन्होंने इस देश की मिट्टी को अपने रक्त से सींचा। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद, अशफाक उल्ला खाँ, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे वीरों ने हँसते-हँसते फाँसी का फंदा चुना। गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के बल पर साम्राज्यवाद की नींव हिला दी। जलियाँवाला बाग की अमानवीय घटना आज भी हमें याद दिलाती है कि आज़ादी कितनी भारी कीमत चुकाकर मिली है। अंग्रेजों की गोलियाँ हमारे शरीर को छलनी कर सकती थीं, लेकिन हमारे हौसलों को नहीं। उसी संघर्ष का परिणाम है कि आज हमारा तिरंगा स्वतंत्र आकाश में गर्व से लहरा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गणतंत्र दिवस हमें केवल अतीत पर गर्व करने के लिए नहीं, बल्कि वर्तमान की समीक्षा और भविष्य की दिशा तय करने के लिए प्रेरित करता है। स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस, यदि हम इन्हें केवल औपचारिक उत्सव बनाकर संतुष्ट हो जाएँ तो यह उन बलिदानों के साथ अन्याय होगा। ऐसे राष्ट्रीय पर्व मूल्यांकन दिवस होने चाहिए, जब हम खुले मस्तिष्क और शांत हृदय से यह सोचें कि हमने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और नैतिक स्तर पर क्या हासिल किया और क्या करना अभी बाकी है। हमें स्वयं से पूछना चाहिए कि क्या हम संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्शों को अपने जीवन में उतार पाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">राम के जीवन का एक प्रसंग हमें वचन की महत्ता समझाता है। दिए हुए वचन को निभाने के लिए राम ने राजपाट तक त्याग दिया। आज जब राजनीति में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और वे पूरे नहीं होते, तब राम का जीवन हमें आत्मचिंतन के लिए विवश करता है। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और सत्ता सेवा का माध्यम होनी चाहिए, स्वार्थ का नहीं। नेता और सरकार यदि राम के चरित्र से प्रेरणा लें तो शासन का स्वरूप अपने आप बदल सकता है। प्रजा से राजा है, राजा से प्रजा नहीं, यह भावना यदि व्यवहार में उतर जाए तो शासन जनकल्याण का सच्चा माध्यम बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांधी जी ने स्वतंत्र भारत का जो सपना देखा था, उसका केंद्र रामराज्य था। रामराज्य का अर्थ किसी धार्मिक शासन से नहीं बल्कि सद्गुणों के साम्राज्य से है, जहाँ सत्य, न्याय, करुणा और नैतिकता सर्वोपरि हों। आज स्वतंत्रता के दशकों बाद भी हम गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, असमानता और सामाजिक विषमता जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सत्ता का मोह और स्वार्थ इन समस्याओं को और गहरा कर देता है। गणतंत्र दिवस पर यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि शासन व्यवस्था जनकल्याण की भावना से संचालित हो और नागरिक भी अपने आचरण से राष्ट्र को मजबूत बनाएँ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गरीबी उन्मूलन आज भी भारत के सामने एक बड़ी चुनौती है। केवल सरकारी योजनाओं से ही गरीबी समाप्त नहीं होगी, इसके लिए समाज और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार और समान अवसर ही गरीबी के स्थायी समाधान हैं। गणतंत्र दिवस हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हम अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं। क्या हम किसी ज़रूरतमंद बच्चे की पढ़ाई में सहयोग कर सकते हैं, क्या हम ईमानदारी से कर देकर राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं, क्या हम अपने काम में उत्कृष्टता लाकर देश की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। जब हर नागरिक अपने कर्तव्य को समझेगा, तभी गरीबी जैसी समस्याओं पर विजय संभव होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गणतंत्र केवल शासन की एक प्रणाली नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अधिकार देता है। वोट देना केवल अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। जागरूक और विवेकपूर्ण मतदान से ही स्वस्थ लोकतंत्र बनता है। गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमें जाति, धर्म या तात्कालिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में निर्णय लेने चाहिए। लोकतंत्र तभी उपयोगी है जब उसमें जनता की आवाज़ सशक्त हो और शासन जवाबदेह हो। संविधान ने हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, लेकिन उसके साथ यह दायित्व भी दिया है कि हम उसका प्रयोग जिम्मेदारी से करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विदेशी व्यापार और विदेश नीति में संतुलित और दूरदर्शी बदलाव भारत को आर्थिक और सामरिक रूप से शक्तिशाली बना सकते हैं। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प केवल नारा नहीं बल्कि व्यवहार में उतरने वाली सोच है। स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देकर, नवाचार को प्रोत्साहित करके और वैश्विक मंचों पर आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखकर भारत विश्वगुरु की दिशा में आगे बढ़ सकता है। गणतंत्र दिवस पर यह संकल्प दोहराना आवश्यक है कि भारत न केवल आर्थिक महाशक्ति बने बल्कि नैतिक नेतृत्व भी प्रदान करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार के दायित्व और नागरिकों के कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। सरकार का कर्तव्य है कि वह पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील शासन दे, वहीं नागरिकों का कर्तव्य है कि वे कानून का पालन करें, सामाजिक सद्भाव बनाए रखें और राष्ट्रहित में योगदान दें। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सम्मान, सामाजिक समरसता जैसे विषय केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी हैं। गणतंत्र दिवस पर आम नागरिक यह संकल्प ले सकता है कि वह संविधान का सम्मान करेगा, दूसरों के अधिकारों का आदर करेगा और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज जब हम तिरंगे को सलामी देते हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि यह ध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारे त्याग, संघर्ष और उम्मीदों का प्रतीक है। न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्श केवल संविधान की प्रस्तावना तक सीमित न रहें, बल्कि हमारे व्यवहार का हिस्सा बनें। गणतंत्र दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम आत्ममंथन करें, संकल्प लें और कर्मपथ पर आगे बढ़ें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में यही कहा जा सकता है कि गणतंत्र हमारे लिए तभी उपयोगी है जब हम उसे जीएँ, समझें और निभाएँ। यह दिन हमें अतीत के बलिदानों को नमन करने, वर्तमान की जिम्मेदारियों को समझने और भविष्य के भारत का सपना देखने की प्रेरणा देता है। आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम एक सजग, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनेंगे, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे और भारत को सशक्त, समृद्ध और गौरवशाली बनाने में अपना योगदान देंगे। तिरंगे को सलाम, संविधान को प्रणाम और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट कदम बढ़ाएँ। जय हिंद, जय भारत।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 18:46:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गुवाहाटी में नाथ योगी समुदाय के कई संगठनों की संयुक पहल में  किया प्रदर्शन, कामरूप जिला प्रशासन के जरिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">असम प्रदेश योगी सम्मेलन और नाथ योगी छात्र संस्था की संयुक्त पहल में नाथ योगी युवा परिषद, नाथ योगी जातीय परिषद, नाथ योगी पुरोहित सम्मेलन और नाथ योगी महिला सम्मेलन के असम के सहयोग में आज राज्य के राजधानी के निकट गुवाहाटी के चचल में धरना प्रदर्शन किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>असम के अलग-अलग हिस्सों से पांच सौ से अधिक </strong></div>
<div style="text-align:justify;">नाथ योगी पुरुष और महिलाएं एकत्रित होकर अपने संवैधानिक अधिकारों की मांगो को  प्ले कार्ड लेकर  जिन पर अलग-अलग मांगें लिखी थीं: असम के मूलनिवासी नाथ योगि समुदाय को पूर्ण आरक्षण श्रेणी का दर्जा देना,</div>
<div style="text-align:justify;">नाथ योगी सैटेलाइट ऑटोनॉमस काउंसिल असम गठन कर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167125/demonstration-took-place-in-guwahati-in-joint-initiative-of-several"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/1000470411.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">असम प्रदेश योगी सम्मेलन और नाथ योगी छात्र संस्था की संयुक्त पहल में नाथ योगी युवा परिषद, नाथ योगी जातीय परिषद, नाथ योगी पुरोहित सम्मेलन और नाथ योगी महिला सम्मेलन के असम के सहयोग में आज राज्य के राजधानी के निकट गुवाहाटी के चचल में धरना प्रदर्शन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>असम के अलग-अलग हिस्सों से पांच सौ से अधिक </strong></div>
<div style="text-align:justify;">नाथ योगी पुरुष और महिलाएं एकत्रित होकर अपने संवैधानिक अधिकारों की मांगो को  प्ले कार्ड लेकर  जिन पर अलग-अलग मांगें लिखी थीं: असम के मूलनिवासी नाथ योगि समुदाय को पूर्ण आरक्षण श्रेणी का दर्जा देना,</div>
<div style="text-align:justify;">नाथ योगी सैटेलाइट ऑटोनॉमस काउंसिल असम गठन कर देना,  ट्राइबल बेल्ट और ब्लॉकों के साथ-साथ जनजाति ऑटोनॉमस काउंसिल के इलाकों में रहने वाले नाथ योगियों को ज़मीन के अधिकार देना, मुख्यमंत्री के किए वादे पूरे करना, हमें न्याय चाहिए, हर हर महादेव आदि नारेबाजी से माहौल गर्म करते हुए दिखाई दी।</div>
<div style="text-align:justify;">गैरतलब हे की असम में नाथ योगी समुदाय ने साल 2012  से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन एवं लोकतांत्रिक आन्दोलन के जरिए सरकार से असम में रहने वाले मूलनिवासी नाथ योगियों के लिए 1098 में राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए भूमि के अधिसूचना को कानून में तब्दील कर पूर्ण तरह से आरक्षित वर्ग का मर्यादा देना और नाथ योगी सैटेलाइट ऑटोनॉमस काउंसिल असम बनाने की मांग कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/1000470476.jpg" alt="1000470476" width="483" height="322"></img>लेकिन पहले के सरकार की तरह अब के भाजपा सरकार ने भी नाथ योगी समुदाय के समस्याओं को अनसुनी कर ने की आरोप लगाकर दुःख जताते हुए समुदाय के लोगों ने संयुक्त प्रयास में  25 दिसंबर 2025 से समग्र असम में  मोशाल रेली निकाल कर प्रदर्शन किया । आज की धरने स्थल से नाथ योगी संगठनों की नेतृत्व ने फिर सरकार से नाथ योगी समुदाय के मूल मांगों रखी एवं मुख्यमंत्री को 2026 के असम विधानसभा चुनाव से पहले समुदाय से किए अपने वादे पूरे करने की अपील की, नहीं तो असम में रहने वाले 40 लाख से ज़्यादा शांतिप्रिय नाथ योगी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए पूरे असम में तेज़ लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेंगे । धरने स्थल में कामरूप जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित होने पर अधिकारी के जरिए असम के मुख्यमंत्री डॉ हेमंत बिस्वा शर्मा को 21 मांगो वाले एक लिखित ज्ञापन भेजा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 18:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>मनरेगा में फर्जी हाजिरी लगाकर किया जा रहा फर्जीवाड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत महदेइया में मनरेगा योजना के तहत कुला खुदाई कार्य करवाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक उक्त कार्य को सम्पन्न हुए करीब बीस दिन बीत गए लेकिन विभागीय मॉनिटरिंग ना होने के कारण आज भी अवैध रूप से उक्त कार्यदाई स्थल पर 37 मनरेगा श्रमिकों की फर्जी हाजिरी लगाकर धनादोहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उक्त कुला खुदाई कार्य करीब बीस दिन पूर्व ही सम्पन्न हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर विभागीय अधिकारी समय-समय पर मनरेगा का माॅनिटरिंग करते रहें तो एक बड़ा फर्जीवाड़ा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167025/fraud-is-being-done-by-putting-fake-attendance-in-mnrega"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/0.0043.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज।</strong> नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत महदेइया में मनरेगा योजना के तहत कुला खुदाई कार्य करवाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक उक्त कार्य को सम्पन्न हुए करीब बीस दिन बीत गए लेकिन विभागीय मॉनिटरिंग ना होने के कारण आज भी अवैध रूप से उक्त कार्यदाई स्थल पर 37 मनरेगा श्रमिकों की फर्जी हाजिरी लगाकर धनादोहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उक्त कुला खुदाई कार्य करीब बीस दिन पूर्व ही सम्पन्न हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर विभागीय अधिकारी समय-समय पर मनरेगा का माॅनिटरिंग करते रहें तो एक बड़ा फर्जीवाड़ा को रोका जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक नौतनवां ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत महदेइया में शिव के खेत से पूरब सिरपत के खेत तक कुला खुदाई कार्य करवाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक मौके पर उक्त कार्य को सम्पन्न हुए करीब बीस दिन बीत चुके हैं लेकिन एनएमएमएस पोर्टल पर आज भी कार्यदायी स्थल पर  मनरेगा श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त कार्य में मस्टरोल संख्या 6926 से 6929 तक जारी कर 37 मनरेगा श्रमिकों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर एनएमएमएस पोर्टल पर सेंध लगाया जा रहा है। ऐसे में जिले के तेज तर्रार जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा द्वारा लगातार मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है लेकिन वहीं नौतनवां ब्लाक क्षेत्र में बिना किसी डर के मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। वहीं मनरेगा में फर्जीवाड़ा को लेकर स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से इसकी जांच कर कार्यवाही की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मनरेगा में धांधली रोकने को लेकर लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है ऐसे में यदि मनरेगा में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है तो इसकी जांच कर विभागीय कार्यवाही की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 18:55:02 +0530</pubDate>
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