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                <title>Administrative Accountability - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Administrative Accountability RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अतिक्रमण का जाल और रेंगती आम आदमी की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><span style="font-size:small;">शहरों की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और चमकते बाजारों से नहीं होती। किसी शहर की असली तस्वीर उसकी सड़कों, फुटपाथों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देती है। जब यही सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकास की चमक के पीछे आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे रेंगने लगती है। अतिक्रमण आज केवल सड़क किनारे दुकान लगाने या फुटपाथ पर सामान रखने तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। सड़क की जमीन पर कब्जा, नालियों के ऊपर निर्माण, फुटपाथों पर स्थायी दुकानें, पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल और गलियों तक में फैलते</span></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186145/the-web-of-encroachment-and-the-creeping-life-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas11.jpg" alt=""></a><br /><div><span style="font-size:small;">शहरों की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और चमकते बाजारों से नहीं होती। किसी शहर की असली तस्वीर उसकी सड़कों, फुटपाथों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देती है। जब यही सार्वजनिक स्थान अतिक्रमण की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकास की चमक के पीछे आम आदमी की जिंदगी धीरे-धीरे रेंगने लगती है। अतिक्रमण आज केवल सड़क किनारे दुकान लगाने या फुटपाथ पर सामान रखने तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। सड़क की जमीन पर कब्जा, नालियों के ऊपर निर्माण, फुटपाथों पर स्थायी दुकानें, पार्किंग के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल और गलियों तक में फैलते अवैध निर्माण ने शहरों की व्यवस्था को प्रभावित किया है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा उस नागरिक को भुगतना पड़ता है, जिसके पास न ताकत है, न प्रभाव और न ही व्यवस्था से लगातार संघर्ष करने का समय।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">सड़कें छोटी, समस्याएं बड़ी</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण का सबसे सीधा असर यातायात पर पड़ता है। जिस सड़क का निर्माण वाहनों और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए हुआ था, उसका एक बड़ा हिस्सा दुकानों, ठेलों, पार्किंग या निर्माण सामग्री की भेंट चढ़ जाता है। परिणामस्वरूप सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम होती जाती है और यातायात का दबाव बढ़ता जाता है। कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में घंटों लगना अब कई शहरों में असामान्य नहीं है। वाहन ईंधन जलाते रहते हैं, लोग समय गंवाते हैं और प्रदूषण बढ़ता रहता है। इस पूरी व्यवस्था की कीमत अंततः आम आदमी ही चुकाता है।</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">फुटपाथ गायब, पैदल यात्री परेशान</span></div>
<div><span style="font-size:small;">फुटपाथ का उद्देश्य पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता देना है। लेकिन जब फुटपाथ पर दुकानें, वाहन, विज्ञापन बोर्ड और अस्थायी निर्माण कब्जा कर लेते हैं, तो पैदल यात्री सड़क पर चलने के लिए मजबूर हो जाता है। बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और दिव्यांग नागरिक ऐसी स्थिति में सबसे अधिक परेशान होते हैं। सड़क पर चलते पैदल यात्री और तेज रफ्तार वाहनों का टकराव दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाता है। सवाल यह है कि जिस नागरिक के लिए फुटपाथ बनाया गया, उसे आखिर उसी फुटपाथ से हटने के लिए क्यों मजबूर होना पड़े?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जलभराव की समस्या को बढ़ाता अतिक्रमण</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण का एक गंभीर और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला परिणाम जलभराव है। नालियों और जलनिकासी के रास्तों पर निर्माण होने से बारिश का पानी अपना प्राकृतिक रास्ता नहीं पा पाता। कई जगह नालियां ढक दी जाती हैं या उनका आकार इतना छोटा कर दिया जाता है कि पानी का प्रवाह बाधित होने लगता है। बारिश होते ही सड़कें तालाब में बदल जाती हैं। घरों और दुकानों में पानी घुसता है, यातायात ठप होता है और नागरिकों को घंटों परेशानी उठानी पड़ती है। हर वर्ष जलभराव के बाद सफाई और नाला खुदाई की कवायद होती है, लेकिन यदि जलनिकासी के रास्तों पर कब्जे कायम रहें तो समस्या स्थायी रूप से कैसे समाप्त होगी?</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण और भ्रष्टाचार का सवाल</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण केवल प्रशासनिक कमजोरी का परिणाम है या इसके पीछे किसी स्तर पर मिलीभगत भी है—यह सवाल बार-बार उठता है। किसी सड़क या सार्वजनिक जमीन पर एक दिन में स्थायी कब्जा नहीं हो जाता। पहले अस्थायी कब्जा होता है, फिर वह धीरे-धीरे स्थायी रूप लेता है और अंततः नागरिक उसे सामान्य स्थिति मानने लगते हैं।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">यदि नियम स्पष्ट हैं और सरकारी जमीन की निगरानी होती है तो वर्षों तक अवैध निर्माण कैसे खड़े रहते हैं? यदि कार्रवाई होती है तो कुछ समय बाद वही स्थान फिर अतिक्रमण से कैसे भर जाते हैं?</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">इन सवालों का जवाब केवल छोटे दुकानदार या ठेले वाले को दोषी ठहराकर नहीं दिया जा सकता। व्यवस्था को यह भी देखना होगा कि अतिक्रमण को पनपने का अवसर कौन देता है और कार्रवाई के बाद उसे दोबारा खड़ा होने से कौन रोकता है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">रोजगार बनाम व्यवस्था—समस्या का कठिन पक्ष</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का दूसरा पहलू भी है। बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले लोग अपनी आजीविका के लिए सार्वजनिक स्थानों पर निर्भर हैं। अचानक सामान हटाने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है। इसलिए समाधान केवल बुलडोजर या जबरन हटाने में नहीं है। प्रशासन को व्यवस्थित वेंडिंग जोन, वैकल्पिक बाजार और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था विकसित करनी होगी। गरीब की रोजी भी बचे और सार्वजनिक रास्ता भी—यह संतुलन ही वास्तविक प्रशासनिक सफलता होगी।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">कानून सबके लिए समान होना चाहिए</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में सबसे बड़ी आवश्यकता समानता की है। यदि गरीब की छोटी दुकान हटाई जाए लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति का बड़ा अवैध निर्माण वर्षों तक खड़ा रहे, तो नागरिकों का कानून और प्रशासन पर विश्वास कमजोर होता है।</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">कानून का अर्थ तभी है जब वह बिना भेदभाव लागू हो। सड़क पर कब्जा करने वाला चाहे छोटा दुकानदार हो या बड़ा कारोबारी, सार्वजनिक जमीन पर अवैध निर्माण करने वाला चाहे कोई भी हो—नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">शहर केवल वाहनों के लिए नहीं हैं</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">शहरी नियोजन में अक्सर सड़क चौड़ी करने, फ्लाईओवर बनाने और यातायात बढ़ाने पर जोर दिया जाता है, लेकिन पैदल चलने वाले नागरिक की जरूरतों को उतना महत्व नहीं मिलता। वास्तव में स्वस्थ शहर वह है जहां व्यक्ति सुरक्षित पैदल चल सके, सार्वजनिक परिवहन तक आसानी से पहुंच सके और बारिश के दिनों में जलभराव से न जूझे।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण हटाना केवल सड़क खाली कराने का अभियान नहीं होना चाहिए। यह शहर को नागरिकों के लिए वापस हासिल करने की प्रक्रिया होनी चाहिए।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">आम आदमी की जिंदगी कब तेज चलेगी?</span></div>
<div> </div>
<div><span style="font-size:small;">आज आम नागरिक का बड़ा हिस्सा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अनावश्यक समय यातायात, जाम, पार्किंग और जलभराव में गंवा देता है। जिस दूरी को कुछ मिनटों में पूरा होना चाहिए, वह घंटों में पूरी होती है। यही वह स्थिति है जिसे कहा जा सकता है—शहर बढ़ रहे हैं, लेकिन आम आदमी की जिंदगी रेंग रही है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक ईमानदारी और बेहतर शहरी नियोजन से ही संभव है। केवल अभियान चलाकर तस्वीर नहीं बदलेगी। अतिक्रमण हटाने के बाद उस स्थान का नियमित निरीक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड, स्पष्ट पार्किंग नीति, व्यवस्थित वेंडिंग जोन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी होगी।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">सड़कें जनता की हैं, फुटपाथ जनता के हैं, नालियां जनता के लिए हैं और सार्वजनिक जमीन भी जनता की संपत्ति है। जब इन पर कब्जा होता है तो नुकसान केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का होता है।</span></div>
<div><span style="font-size:small;">जरूरत इस बात की है कि शहरों को अतिक्रमण मुक्त करने की मुहिम को केवल दिखावटी कार्रवाई न बनाया जाए। प्रशासन को गरीब की आजीविका और नागरिकों के अधिकार—दोनों के बीच संतुलन कायम करना होगा। तभी शहरों की सड़कें खुलेंगी, जलभराव घटेगा, यातायात सुधरेगा और सबसे महत्वपूर्ण—आम आदमी की जिंदगी रेंगने के बजाय आगे बढ़ सकेगी।</span></div>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 21:36:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती PWD में 27 साल से जमे अधिकारी पर गंभीर आरोप, पत्नी की फर्म और 65 लाख के लेन-देन की जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181126/serious-allegations-against-officer-stuck-in-basti-pwd-for-27"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260613-wa0095.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में भ्रष्टाचार का जिन्न 27साल बाद बाहर निकल कर आया अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग और तत्कालीन प्रभारी मंत्री प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले को पत्र देकर  गृह जनपद बस्ती में विगत 26-27 वर्षों से तैनात  अधीक्षण अभियन्ता लोक निर्माण विभाग कार्यालय वृत्त बस्ती में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र पुत्र  राम सेवक पर अनियमितता के  अनेक गंभीर आरोप लगाते हुये उनके स्थानान्तरण और  सतर्कता विभाग से  उच्च स्तरीय जाँच कराये जाने की मांग किया है.भेजे पत्र में  अपना दल एस के प्रदेश सचिव मुख्य संगठन संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात  प्रेमचन्द्र  द्वारा ठेकेदारों व कर्मचारियों का लगातार दोहन किया जा रहा है तथा सरकारी अभिलेखों में भी फेरबदल किये जाने की शिकायत पूर्व में जन प्रतिनिधियों द्वारा की जाती रही है परन्तु  प्रेमचन्द्र की  ऊँची पहुँच के कारण मण्डलीय कार्यालय पर तैनाती लेते रहे हैं, जिससे इनके भ्रष्टाचार एवं कागजी हेरफेर के कारण सरकारी कार्यों में भी गोपनीयता भंग की जाती रही है.</div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस को जारी विज्ञप्ति में संजय सिंह पगार ने कहा है कि  प्रेमचन्द्र ने अपनी सेवा अवधि का लगभग 90 प्रतिशत समय बस्ती वृत्त, बस्ती कार्यालय में ही व्यतीत किया है. बाबू पद से लेकर प्रशासनिक अधिकारी पद तक की उनकी अधिकांश सेवा बस्ती मण्डल में ही रही है. इतने लंबे समय तक एक ही मंडलीय कार्यालय में तैनाती से प्रशासनिक निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विभागीय कार्यप्रणाली की गोपनीयता पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं.</div>
<div style="text-align:justify;">बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन यह भी पढ़ें: बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी से नाराज व्यापारी, बस्ती में प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन</div>
<div style="text-align:justify;">पत्नी की फर्म के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप</div>
<div style="text-align:justify;">श्री पगार ने बताया कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपने पद एवं प्रभाव का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारी व्यवस्था में हस्तक्षेप किया जाता रहा है. आरोप है कि उनके द्वारा कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने, विभागीय गोपनीय सूचनाओं को प्रभावित करने तथा ई-टेण्डरिंग प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव डालने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई गई है. इसके अतिरिक्त यह भी गंभीर आरोप है कि  प्रेमचन्द्र द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती सीमा के नाम से संचालित फर्म मेसर्स बुद्धा इंटरप्राइजेज का उपयोग स्वयं एवं अपने परिवार के सदस्यों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है. उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उक्त फर्म की प्रोपराइटर श्रीमती सीमा है, जिसका पता रौतापार, गांधी नगर, बस्ती दर्शाया गया है. उक्त फर्म का  यूनियन बैंक में है.तीन साल में खाते से 65 लाख का लेन-देन, जांच की उठी मांग</div>
<div style="text-align:justify;">उपलब्ध बैंक विवरण के अनुसार पिछले लगभग तीन वर्षों में उक्त फर्म के खाते में लगभग 65 लाख रुपये की क्रेडिट एवं डेबिट प्रविष्टियां पाई गई हैं, जिससे लेन-देन की प्रकृति, धन के स्रोत तथा संबंधित ठेकेदारों से संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है. आरोप है कि वे अपने पूर्व कार्यकाल से संबंधित अभिलेखों, कथित अनियमितताओं एवं आने वाली निविदा/ई-टेण्डरिंग प्रक्रियाओं हस्तक्षेप बनाए रखने के उद्देश्य से उसी कार्यालय में बने रहना चाहते हैं. प्रेमचन्द्र ने अपना आलीशान मकान लखनऊ में बनवा लिया है.</div>
<div style="text-align:justify;">इस प्रकार की शिकायतें पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय स्तर पर उठाई जाती रही हैं. हाल ही में भी कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा  प्रेमचन्द्र के विरुद्ध शासन स्तर पर लिखित शिकायतें प्रेषित की गई, जिसके क्रम में शासन द्वारा धारा 7 के अंतर्गत मुख्य अभियंता, बस्ती से रिपोर्ट मांगी गई. किंतु मुख्य अभियंता, बस्ती  आनन्द कुमार द्वारा एक माह से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद शासन को अपेक्षित रिपोर्ट प्रेषित नहीं की गई. जबकि शासन की प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी गंभीर शिकायत के क्रम में संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त कर स्थानांतरण अथवा अन्य विभागीय कार्रवाई की जाती है.</div>
<div style="text-align:justify;">स्थानांतरण प्रक्रिया की पूर्व निर्धारित समय-सीमा 31 मई तक थी, परंतु रिपोर्ट समय से न भेजे जाने के कारण आवश्यक कार्रवाई प्रभावित हुई. वर्तमान में शासन द्वारा स्थानांतरण प्रक्रिया की समय-सीमा 30 जून तक बढ़ा दी गई है, इसलिए जनहित एवं प्रशासनिक पारदर्शिता की दृष्टि से यह आवश्यक है कि मुख्य अभियंता स्तर से लंबित रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजी जाए तथा प्रेमचन्द्र का स्थानांतरण करते हुए उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए.</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 18:55:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>थाना अध्यक्ष विवेक वर्मा के नेतृत्व में थाना दिवस संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>शुकुल बाजार।</strong> थाना परिसर में आयोजित थाना दिवस का आयोजन थाना अध्यक्ष विवेक वर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस दौरान फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया तथा संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश दिए गए।थाना दिवस में कुल 16 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 12 शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित तथा 4 शिकायतें पुलिस विभाग से जुड़ी रहीं। पुलिस से संबंधित एक प्रकरण का मौके पर ही गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से निस्तारण कर दिया गया, जिससे फरियादी ने संतोष व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शेष शिकायतों के शीघ्र और प्रभावी निस्तारण के लिए पुलिस एवं राजस्व विभाग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171918/police-station-day-concluded-under-the-leadership-of-police-station"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1-13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>शुकुल बाजार।</strong> थाना परिसर में आयोजित थाना दिवस का आयोजन थाना अध्यक्ष विवेक वर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस दौरान फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया तथा संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश दिए गए।थाना दिवस में कुल 16 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें 12 शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित तथा 4 शिकायतें पुलिस विभाग से जुड़ी रहीं। पुलिस से संबंधित एक प्रकरण का मौके पर ही गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से निस्तारण कर दिया गया, जिससे फरियादी ने संतोष व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शेष शिकायतों के शीघ्र और प्रभावी निस्तारण के लिए पुलिस एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया गया है। गठित टीमें मौके पर जाकर जांच कर निर्धारित समयावधि में शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करेंगी।इस अवसर पर राजस्व निरीक्षक संतराम, राजस्व निरीक्षक अमरनाथ पांडे सहित राजस्व विभाग की टीम एवं थाना पुलिस के कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि आमजन की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा तथा पारदर्शिता बनाए रखते हुए न्यायसंगत कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान थाना अध्यक्ष द्वारा फरियादियों के उठने बैठने और जलपान का उत्तम प्रबंध कराया गया फरियादियों द्वारा बताया गया कि थाना स्तर पर सक्षम अधिकारियों द्वारा सभी समस्याओं का गुणवत्ता पूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से निस्तारण कराया जाता है जिसके चलते जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालय के चक्कर लगाने से निजात मिलती है। जिससे जहां धन की बचत होती है वही समय की भी बचत होती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 19:16:26 +0530</pubDate>
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