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                <title>Communal Harmony - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>बारावफात, रक्षाबंधन व जन्माष्टमी को लेकर खेसरहा थाने में पीस कमेटी की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  बांसी ( सिद्धार्थनगर) ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आगामी बारावफात, रक्षाबंधन एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने को लेकर गुरुवार को खेसरहा थाने में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्राम प्रधानों, संभ्रांत नागरिकों, जुलूस आयोजकों तथा हिंदू-मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरुओं और मौलवियों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  बैठक में पुलिस अधिकारियों ने त्योहारों के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। साथ ही उच्चाधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से उपस्थित लोगों को अवगत कराया गया और आपसी सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक थानाध्यक्ष अनूप कुमार मिश्र के नेतृत्व में आयोजित हुई। इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185817/peace-committee-meeting-in-khesraha-police-station-regarding-baravafat-rakshabandhan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1787233782870.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> बांसी ( सिद्धार्थनगर) ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आगामी बारावफात, रक्षाबंधन एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने को लेकर गुरुवार को खेसरहा थाने में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्राम प्रधानों, संभ्रांत नागरिकों, जुलूस आयोजकों तथा हिंदू-मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरुओं और मौलवियों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> बैठक में पुलिस अधिकारियों ने त्योहारों के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। साथ ही उच्चाधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से उपस्थित लोगों को अवगत कराया गया और आपसी सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक थानाध्यक्ष अनूप कुमार मिश्र के नेतृत्व में आयोजित हुई। इस दौरान थाना पुलिस के अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 19:37:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांसी कोतवाली में पीस कमेटी की बैठक सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बांसी (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>चेहल्लुम, श्रावण मास और बारावफात को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से रविवार को बांसी कोतवाली परिसर में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय पाठक ने की।</div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के आयोजकों, ग्राम प्रधानों, धर्मगुरुओं, संभ्रांत नागरिकों और ग्राम प्रहरियों ने भाग लिया। प्रभारी निरीक्षक ने शासन की गाइडलाइन से अवगत कराते हुए सभी से आपसी भाईचारे और शांति के साथ त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने उपस्थित लोगों की समस्याएं और सुझाव भी सुने तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184551/peace-committee-meeting-concluded-in-bansi-kotwali"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1785682071017.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बांसी (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>चेहल्लुम, श्रावण मास और बारावफात को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से रविवार को बांसी कोतवाली परिसर में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय पाठक ने की।</div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के आयोजकों, ग्राम प्रधानों, धर्मगुरुओं, संभ्रांत नागरिकों और ग्राम प्रहरियों ने भाग लिया। प्रभारी निरीक्षक ने शासन की गाइडलाइन से अवगत कराते हुए सभी से आपसी भाईचारे और शांति के साथ त्योहार मनाने की अपील की। उन्होंने उपस्थित लोगों की समस्याएं और सुझाव भी सुने तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने, अफवाह फैलाने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में एडवोकेट रामकृपाल मौर्य, गोपाल जी पाण्डेय, प्रमोद हिन्दू, भाजपा नगर महामंत्री धर्मेंद्र कुमार, अंगद वर्मा, विशाल सोनी, जमुना निषाद सहित भारी संख्या लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 20:23:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>याद ए सकीना बिन्तुल हुसैन में शहादत का ग़मगीन तज़केरा सुन अक़ीदतमंदों के छलके आंसू</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong>   हैदरी पत्थर गली शहनूर अलीगंज प्रयागराज की जानिब से शनिवार रात यादे सकीना बिन्तुल हुसैन (स.अ.) के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। कार्यक्रम में दिल्ली से आए मौलाना सैयद कल्बे रुशैद साहब क़िबला ने ख़िताब करते हुए हज़रत सकीना (स.अ.) की ज़िंदगी,सब्र और करबला के पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करबला का संदेश इंसानियत, सब्र और सच्चाई पर डटे रहने की सीख देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन ए पाक से हुई, जिसके बाद नज़राना-ए-अक़ीदत और मर्सिया पेश किया गया। कार्यक्रम में शहर और आसपास के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183810/hearing-the-sad-story-of-martyrdom-in-yaad-e-sakeena-bintul-hussain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260719-wa0062.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong>  हैदरी पत्थर गली शहनूर अलीगंज प्रयागराज की जानिब से शनिवार रात यादे सकीना बिन्तुल हुसैन (स.अ.) के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। कार्यक्रम में दिल्ली से आए मौलाना सैयद कल्बे रुशैद साहब क़िबला ने ख़िताब करते हुए हज़रत सकीना (स.अ.) की ज़िंदगी,सब्र और करबला के पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करबला का संदेश इंसानियत, सब्र और सच्चाई पर डटे रहने की सीख देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन ए पाक से हुई, जिसके बाद नज़राना-ए-अक़ीदत और मर्सिया पेश किया गया। कार्यक्रम में शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और पूरे अदब व एहतराम के साथ मजलिस को सुना।ताबूत ए सकीना व अलम भी निकाला गया।जिसकी जियारत को अक़ीदतमन्दों का सैलाब उमड़ पड़ा। अन्जुमन हैदरिया रानी मण्डी के नौहाख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ा।आखिर में मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और इंसानियत की भलाई के लिए दुआ की गई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 21:57:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिलबिला में अखाड़ों को सम्मानित कर किया गया रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा,सोनावा अखाड़ा, शाहीन अखाड़ा, शाहीन गोड़े के अखाड़ों ने शुक्रवार को एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करनामें दिखाकर उपस्थित जनमानस को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। चिलबिला के सभी व्यापारियों ने जुलूस का स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतापगढ़ की गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखते हुए रामलीला समिति के संरक्षक समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, वरिष्ठ व्यवसायी सुनील अग्रवाल ने सम्मानित कर मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा, सोनावा अखाड़ा, शाही अखाड़ा गोड़े के जुलूस को रवाना किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शाहीन अखाड़ा गोड़े के जुलूस को अब्दुल जब्बार की अध्यक्षता में गोड़े से सैकड़ो की संख्या में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182551/akharas-were-honored-and-sent-off-in-chilbila"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260626-wa0076.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा,सोनावा अखाड़ा, शाहीन अखाड़ा, शाहीन गोड़े के अखाड़ों ने शुक्रवार को एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करनामें दिखाकर उपस्थित जनमानस को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। चिलबिला के सभी व्यापारियों ने जुलूस का स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतापगढ़ की गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखते हुए रामलीला समिति के संरक्षक समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, वरिष्ठ व्यवसायी सुनील अग्रवाल ने सम्मानित कर मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा, सोनावा अखाड़ा, शाही अखाड़ा गोड़े के जुलूस को रवाना किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शाहीन अखाड़ा गोड़े के जुलूस को अब्दुल जब्बार की अध्यक्षता में गोड़े से सैकड़ो की संख्या में जुलूस निकाला गया। हैरतअंगेज करनामें दिखाने वाले अखाड़े को शील्ड देकर समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, सुनील अग्रवाल ने सम्मानित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रामलीला समिति के संरक्षक रोशनलाल उमरवैश्य ने कहा कि प्रतापगढ़ जिले की गंगा जमुनी तहजीब आज भी कायम है।हम एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होते आ रहे हैं। सभी अखाड़ों के अध्यक्षों को सम्मानित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शाहीन अखाड़ा गोड़े के अध्यक्ष अब्दुल जब्बार ने कहा कि चिलबिला में हर वर्ष हिंदू भाइयों द्वारा जुलूस का स्वागत कर समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, सुनील अग्रवाल द्वारा सम्मानित कर रवाना किया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हम उन सब के प्रति आभार ज्ञापित करते हैं। पुलिस प्रशासन का बहुत ही बड़ा सहयोग रहा। इस मौके पर रविंद्र सिंह, छेदीलाल, संतोष कुमार, सुनील अग्रवाल, सूरज, अमन, जमील, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद इमरान, अबरार, पप्पू, मोहम्मद शाहिद, सुफियान, अब्दुल्ला, मोहम्मद इरशाद, अकरम हुसैन, असलम उस्ताद, रियाज आदि सैकड़ो की संख्या में चिलबिला के व्यापारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:45:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कश्मीर में गूंजते मंत्र और भाईचारे का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">कश्मीर को सदियों से विविध संस्कृतियों, परंपराओं और आस्थाओं की साझा भूमि के रूप में जाना जाता रहा है। यहाँ की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता से नहीं, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने से भी रही है जिसमें अलग-अलग समुदायों ने लंबे समय तक एक साथ जीवन बिताया। कश्मीरी पंडित और मुसलमानों के बीच पीढ़ियों से विकसित हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंध इस भूमि की सबसे बड़ी विशेषताओं में रहे हैं। हालांकि 1989 और 1990 के उथल-पुथल भरे दौर ने इस साझा जीवन को गहरी चोट पहुँचाई।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर देश के विभिन्न</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181763/mantras-and-message-of-brotherhood-resonating-in-kashmir"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas17.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">कश्मीर को सदियों से विविध संस्कृतियों, परंपराओं और आस्थाओं की साझा भूमि के रूप में जाना जाता रहा है। यहाँ की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता से नहीं, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने से भी रही है जिसमें अलग-अलग समुदायों ने लंबे समय तक एक साथ जीवन बिताया। कश्मीरी पंडित और मुसलमानों के बीच पीढ़ियों से विकसित हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंध इस भूमि की सबसे बड़ी विशेषताओं में रहे हैं। हालांकि 1989 और 1990 के उथल-पुथल भरे दौर ने इस साझा जीवन को गहरी चोट पहुँचाई।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़कर देश के विभिन्न भागों में विस्थापित जीवन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा। उस दौर की पीड़ा आज भी हजारों परिवारों की स्मृतियों में जीवित है। ऐसे समय में दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के मुर्रान गाँव से आई एक खबर ने अनेक लोगों के मन में आशा का संचार किया है। लगभग 36 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कश्मीरी पंडित अपनी कुलदेवी के मंदिर में हवन और पूजा-अर्चना के लिए लौटे और स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने उनका स्वागत कर भाईचारे का संदेश दिया।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">यह घटना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं थी, बल्कि यह उन भावनाओं का संगम थी जो दशकों से लोगों के भीतर कहीं दबकर रह गई थीं। जब वर्षों पहले अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग वापस अपने गाँव पहुँचे तो उनके सामने केवल मंदिर नहीं था, बल्कि उनकी स्मृतियाँ थीं, उनका बचपन था, उनके पूर्वजों की यादें थीं और वे रिश्ते थे जो समय और दूरी के बावजूद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए थे। अनेक परिवारों के लिए यह यात्रा अतीत और वर्तमान के बीच एक भावनात्मक पुल बन गई। जिन गलियों में उन्होंने बचपन बिताया था, जिन घरों के आँगनों में खेला था और जिन पड़ोसियों के साथ जीवन के सुख-दुख साझा किए थे, उन सबको फिर से देखना उनके लिए अत्यंत भावुक अनुभव रहा।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">मुर्रान गाँव उन स्थानों में से एक है जहाँ कभी कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों का जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ था। दोनों समुदाय सामाजिक अवसरों, पारिवारिक आयोजनों और स्थानीय परंपराओं में सहभागिता करते थे। लेकिन 1989-90 के दौरान बढ़ी हिंसा और असुरक्षा की परिस्थितियों ने इस सामाजिक संतुलन को तोड़ दिया। बड़ी संख्या में पंडित परिवारों ने अपने घर, जमीन, व्यवसाय और सामाजिक परिवेश को छोड़कर पलायन किया। विस्थापन केवल भौगोलिक परिवर्तन नहीं होता, वह व्यक्ति की पहचान, स्मृतियों और सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित करता है। इसलिए जब कोई परिवार दशकों बाद अपने मूल स्थान पर लौटता है तो वह केवल एक जगह पर नहीं लौटता, बल्कि अपनी जड़ों और इतिहास से पुनः जुड़ने का प्रयास करता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">मुर्रान में आयोजित पूजा-अर्चना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष स्थानीय मुस्लिम समुदाय की भागीदारी रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्थानीय लोगों ने मंदिर परिसर की सफाई, व्यवस्था और आयोजन की तैयारियों में सहयोग दिया। उन्होंने लौटकर आए कश्मीरी पंडितों का स्वागत किया और उनके साथ संवाद स्थापित किया। यह सहयोग केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि उसमें उन पुराने रिश्तों की झलक दिखाई दी जो कभी इस क्षेत्र की सामान्य सामाजिक वास्तविकता हुआ करते थे।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">जब विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक and सांस्कृतिक आयोजनों का सम्मान करते हैं, तब समाज में विश्वास का वातावरण मजबूत होता है। मुर्रान की घटना इसी विश्वास की पुनर्स्थापना का संकेत देती है। कई लौटे हुए परिवारों ने अपने पुराने पड़ोसियों से मुलाकात की। वर्षों बाद हुए इन मिलनों में भावनाएँ स्वाभाविक रूप से उमड़ पड़ीं। कुछ लोगों ने उन दिनों को याद किया जब पूरा गाँव एक परिवार की तरह रहता था। कुछ ने अपने उन मित्रों को याद किया जिनके साथ उन्होंने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष बिताए थे। ऐसे अवसर यह दिखाते हैं कि राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मानवीय रिश्तों की स्मृतियाँ लंबे समय तक जीवित रहती हैं। यही स्मृतियाँ भविष्य में नए विश्वास का आधार भी बन सकती हैं।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">इस घटना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पुलवामा का नाम पिछले कई वर्षों तक आतंकवाद, हिंसा और तनाव से जुड़ी खबरों में प्रमुखता से आता रहा है। देश और दुनिया के अनेक लोगों के मन में पुलवामा की पहचान संघर्ष और अस्थिरता से जुड़ी रही है। ऐसे क्षेत्र से भाईचारे, सहयोग और सामाजिक सौहार्द की खबर सामने आना एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। यह बताता है कि किसी भी क्षेत्र की वास्तविकता केवल संघर्ष तक सीमित नहीं होती। वहाँ रहने वाले सामान्य लोग शांति, सम्मान और बेहतर भविष्य की आकांक्षा रखते हैं। मुर्रान की घटना इसी आकांक्षा का सार्वजनिक रूप से प्रकट होना है। कश्मीर का इतिहास साझा सांस्कृतिक विरासत का इतिहास रहा है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">यहाँ विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं ने एक-दूसरे को प्रभावित किया है। साहित्य, संगीत, भाषा, खानपान और सामाजिक व्यवहार में इस साझा विरासत की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। कश्मीरी पंडितों और मुसलमानों के बीच संबंध केवल पड़ोसी समुदायों के संबंध नहीं थे, बल्कि वे एक साझा सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी थे। विस्थापन के कारण इस पहचान को गंभीर क्षति पहुँची। इसलिए जब कोई धार्मिक आयोजन दोनों समुदायों को एक मंच पर लाता है तो वह केवल वर्तमान का नहीं, बल्कि उस साझा इतिहास का भी स्मरण कराता है जिसने कश्मीर की विशिष्ट पहचान को जन्म दिया था।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">हालाँकि इस सकारात्मक घटना के साथ कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी जुड़े हुए हैं। कश्मीरी पंडितों की स्थायी और सम्मानजनक घर-वापसी का मुद्दा आज भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है। हजारों परिवार अभी भी घाटी से बाहर रहते हैं। अनेक लोगों के सामने सुरक्षा, रोजगार, आवास और संपत्ति से जुड़े प्रश्न मौजूद हैं। कई परिवारों की नई पीढ़ियाँ उन स्थानों से दूर बड़ी हुई हैं जहाँ उनके पूर्वज रहते थे। उनके लिए वापसी का प्रश्न केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी है। इसलिए यदि व्यापक स्तर पर पुनर्वास की प्रक्रिया को सफल बनाना है तो उसके लिए दीर्घकालिक और ठोस नीतिगत प्रयास आवश्यक होंगे। सुरक्षा की भावना किसी भी पुनर्वास प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण शर्त होती है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">जो परिवार कभी असुरक्षा के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए थे, उनके मन में स्वाभाविक रूप से अनेक आशंकाएँ मौजूद हो सकती हैं। ऐसे में केवल सरकारी व्यवस्थाएँ ही नहीं, बल्कि स्थानीय समाज का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुर्रान में स्थानीय मुस्लिम समुदाय द्वारा प्रदर्शित सद्भाव इसी संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। जब पड़ोसी समुदाय स्वयं आगे बढ़कर विश्वास और स्वागत का संदेश देता है, तब पुनर्वास की संभावनाएँ अधिक मजबूत होती हैं।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">रोजगार और आर्थिक अवसर भी वापसी के प्रश्न से जुड़े हुए हैं। यदि किसी परिवार को अपने पैतृक स्थान पर लौटना है तो उसे सम्मानजनक जीवनयापन के साधनों की आवश्यकता होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत सुविधाएँ और आर्थिक अवसर किसी भी स्थायी पुनर्वास के अनिवार्य घटक हैं। इसलिए केवल भावनात्मक अपील पर्याप्त नहीं हो सकती। सामाजिक सद्भाव के साथ-साथ विकास और अवसरों का वातावरण भी आवश्यक है। मुर्रान की घटना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसने संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया है। लंबे समय तक चले संघर्ष और अविश्वास के बाद समाज में विश्वास का पुनर्निर्माण एक धीमी प्रक्रिया होती है। यह प्रक्रिया छोटे-छोटे कदमों से आगे बढ़ती है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">किसी मंदिर में आयोजित पूजा, किसी पुराने पड़ोसी से मुलाकात, किसी साझा स्मृति का पुनर्स्मरण या किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में सहभागिता जैसे प्रयास समाज को धीरे-धीरे निकट लाने का कार्य करते हैं। संवाद की यही प्रक्रिया भविष्य में अधिक व्यापक सामाजिक मेल-मिलाप का आधार बन सकती है। शांति और सद्भाव की खबरें अक्सर संघर्ष और हिंसा की खबरों जितनी चर्चा नहीं पातीं, जबकि समाजों के पुनर्निर्माण में ऐसे सकारात्मक उदाहरणों का महत्व अत्यंत अधिक होता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">मुर्रान की घटना यह दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोगों के भीतर सहअस्तित्व और सम्मान की भावना जीवित रह सकती है। यह भावना ही किसी समाज को आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है। कश्मीरी पंडितों की वापसी का प्रश्न केवल एक समुदाय का प्रश्न नहीं है। यह कश्मीर की बहुलतावादी पहचान, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। जब विभिन्न समुदाय सम्मान और सुरक्षा के साथ एक ही समाज में रहते हैं, तभी उस समाज की विविधता और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी को केवल पुनर्वास की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक पूर्णता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:32:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बस्ती जिले में कुल 1952 ताज़िया रखे जाएंगे जिसकी निगरानी के लिए 1400 सीसीटीवी कैमरे निगरानी में संपन्न होगा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में मोहर्रम को लेकर के पुलिस अलर्ट मोड में कहीं भी कोई अप्रिय घटना न होने पाए बस्ती जिले में कुल 1952 ताज़िया रखे जाएंगे जिसकी निगरानी के लिए 1400 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं जुलूस की संख्या 127 है पुलिस की ड्यूटी लग गई है सभी मजिस्ट्रेट की ड्यूटी और तैनात कर दी गई है।उक्त जानकारी जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना ने पत्रकारों को दी।</div>
<div style="text-align:justify;">                                                                                            </div>
<div style="text-align:justify;">जिला कलेक्ट्रेट सभागार में मोहर्रम को लेकर अधिकारियों ने पीस कमेटी के साथ बैठक की,बैठक में 10 दिन तक चलने वाले मोहर्रम त्योहार को लेकर थाना क्षेत्र वासियों से सुझाव मांगा गया,लोगो ने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181714/a-total-of-1952-tazias-will-be-kept-in-basti"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260620-wa0061.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में मोहर्रम को लेकर के पुलिस अलर्ट मोड में कहीं भी कोई अप्रिय घटना न होने पाए बस्ती जिले में कुल 1952 ताज़िया रखे जाएंगे जिसकी निगरानी के लिए 1400 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं जुलूस की संख्या 127 है पुलिस की ड्यूटी लग गई है सभी मजिस्ट्रेट की ड्यूटी और तैनात कर दी गई है।उक्त जानकारी जिलाधिकारी कृतिका ज्योत्सना ने पत्रकारों को दी।</div>
<div style="text-align:justify;">                                              </div>
<div style="text-align:justify;">जिला कलेक्ट्रेट सभागार में मोहर्रम को लेकर अधिकारियों ने पीस कमेटी के साथ बैठक की,बैठक में 10 दिन तक चलने वाले मोहर्रम त्योहार को लेकर थाना क्षेत्र वासियों से सुझाव मांगा गया,लोगो ने सुझाव साझा कर प्रशासन को अवगत कराया,प्रशाशन ने लोगों से मानक के विपरीत ताजिया की ऊंचाई समेत अन्य मद्दों को लेकर अपील किया है।</div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी श्रीमती ज्योत्सना ने बताया कि सभी थानों में पीस कमेटी की लगभग बैठक हो चुकी है</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:29:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोहर्रम के पहले जुम्मे पर चक फैजुल्ला की मस्जिद में नमाजियों को शरबत पिलाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मोहर्रम के मुबारक महीने के पहले जुम्मे के अवसर पर नैनी क्षेत्र के चक फैजुल्ला मोहल्ले स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के बाद नमाजियों और क्षेत्रवासियों को शरबत पिलाकर आपसी भाईचारे और मोहब्बत का संदेश दिया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और मोहर्रम की अहमियत पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के आयोजन में समाजसेवी तारिक आफताब, मोहम्मद आकिब, मौलाना शफीक साहब, सरफराज, अनीस अहमद, सज्जू खान, इस्लाम और हाशिम सहित अन्य लोगों ने सक्रिय सहयोग दिया।आयोजकों ने कहा कि मोहर्रम का महीना त्याग, सब्र और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181649/on-the-first-friday-of-moharram-sharbat-was-served-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0113.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात । </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मोहर्रम के मुबारक महीने के पहले जुम्मे के अवसर पर नैनी क्षेत्र के चक फैजुल्ला मोहल्ले स्थित मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने के बाद नमाजियों और क्षेत्रवासियों को शरबत पिलाकर आपसी भाईचारे और मोहब्बत का संदेश दिया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और मोहर्रम की अहमियत पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के आयोजन में समाजसेवी तारिक आफताब, मोहम्मद आकिब, मौलाना शफीक साहब, सरफराज, अनीस अहमद, सज्जू खान, इस्लाम और हाशिम सहित अन्य लोगों ने सक्रिय सहयोग दिया।आयोजकों ने कहा कि मोहर्रम का महीना त्याग, सब्र और इंसानियत का संदेश देता है तथा ऐसे आयोजन समाज में आपसी सौहार्द और एकता को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 20:54:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोहर्रम त्यौहार के दृष्टिगत जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों, धर्मगुरुओं, प्रबुद्ध नागरिकों के साथ की पीस कमेटी की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही  :–</strong>        आगामी त्यौहार मुहर्रम के दृष्टिगत कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के साथ पीस कमेटी की बैठक कर संबंधित अधिकारियों को त्यौहार के दौरान शांति/सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तथा ताजियादारों से ताजिया निकालने हेतु अनुमति लेने व शासन द्वारा जारी गाइडलाईन का अनुपालन करने के निर्देश दिया।<br />                    जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने समस्त नगर पालिका/नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि अपने-अपने नगरों में साफ-सफाई, पानी, शौचालय आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कराये। कर्बला, ताजिया वाले स्थानों के रास्ते को एसडीएम, अधिशासी अभियंता विद्युत, एसएचओ, अधिशासी अधिकारी क्वाडिनेशन कर भ्रमण कर<br />जिलाधिकारी</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181615/in-view-of-moharram-festival-district-magistrate-and-superintendent-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0015.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही  :–</strong>    आगामी त्यौहार मुहर्रम के दृष्टिगत कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के साथ पीस कमेटी की बैठक कर संबंधित अधिकारियों को त्यौहार के दौरान शांति/सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तथा ताजियादारों से ताजिया निकालने हेतु अनुमति लेने व शासन द्वारा जारी गाइडलाईन का अनुपालन करने के निर्देश दिया।<br />          जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने समस्त नगर पालिका/नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि अपने-अपने नगरों में साफ-सफाई, पानी, शौचालय आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कराये। कर्बला, ताजिया वाले स्थानों के रास्ते को एसडीएम, अधिशासी अभियंता विद्युत, एसएचओ, अधिशासी अधिकारी क्वाडिनेशन कर भ्रमण कर लें, ताकि कही कोई दिक्कत न होने पाये। उपस्थित ताजियादारों ने अपनी-अपनी समस्या रखी जिस पर जिलाधिकारी ने निस्तारण हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिया।<br />जिलाधिकारी ने कहा कि बैठक का मुख्य उददेश्य कानून एवं शांति व्यवस्था को कायम रखने के साथ-साथ आप लोगो कि यदि कोई समस्या है तो उनका समय रहते समाधान किया जाना है और कहा कि किसी भी प्रकार की कोई नई परंपरा की शुरुआत नहीं की जायेगी। उन्होने कहा कि त्योहारों को सौहार्दपूर्ण ढंग से मनाने की परंपरा हम सभी को बनाए रखनी है। त्योहारों का आनंद तभी है जब हम सब मिल बैठकर उस का आनंद लें। उन्होंने कहा कि जो लोग ताजिया निकालना चाह रहे हैं या पूर्व से निकालते आ रहे हैं वे सभी लोग ताजिया निकालने हेतु अपना आवेदन तहसील में जमा करा दें। आवेदन के साथ में जुलूस के दौरान आपके द्वारा तैनात किये गये स्वयं सेवकों की सूची मो0नं0 सहित उपलब्ध करा दें साथ ही आवेदन में यह भी सुनिश्चित करें कि ताजिया किन-किन मार्गों से होते हुए निकाला जायेगा जिससे कि प्रशासन और पुलिस बल को तैनात किया जा सके। बिना अनुमति के ताजिया/जुलूस किसी भी दशा में नहीं निकाला जायेगा। जो समय ताजिया निकालने हेतु निर्धारित किया गया है उसी के आधार पर ताजिया निकालना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अनुमति के दौरान ताजिये के आकार के संबंध में दी गई सूचना के उपरांत किसी भी प्रकार का फेर बदल न करें। जिलाधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया पर आने वाली भ्रमित खबरों पर ध्यान न दें और न ही किसी भ्रमित करने वाले ऑडियो/वीडियो को बिना किसी पुष्टि के किसी को भी हस्तांतरित न करें। इस तरीके की खबरों की सूचना तुरंत पुलिस और प्रशासन को दें जिससे समय रहते समस्या का समाधान किया जा सके।<br />पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने कहा कि जुलूस के साथ तथा जुलूस निकलने वाले मार्गों पर पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल तैनात रहेगा। ताजिया निकालने हेतु जो मार्ग निर्धारित किये गये हैं उन्हीं मार्गों का प्रयोग करें। बिना किसी सूचना के ताजिया निकालने वाले मार्ग में बदलाव न करें यदि ऐसा करते हैं तो यदि कोई घटना घटित होती है तो संबंधित स्वयं जिम्मेदार होगा और उसकी जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि कुछ अराजक तत्व जुलूस में शामिल होकर घटना को अंजाम देने का प्रयास कर सकते हैं। जिसके लिए आप स्वयं अपने स्तर से कुछ लोगों को देख-रेख हेतु तैनात कर दें कि कोई भी इस तरह का व्यक्ति जुलूस में शामिल न हो पाये और किसी अप्रिय घटना के घटित होने से बचा जा सके। शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से सभी को अवगत कराते हुए कहा कि जुलूस में किसी भी प्रकार का शस्त्र लेकर चलना सख्त मना है। तलवार, चाकू, छुरी आदि का प्रदर्शन नहीं होगा। सभी लोगों को शासन की गाइडलाइन का पालन करना होगा। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नही होगी। साथ ही अराजक तत्वों या किसी प्रकार का उपद्रव करने वाले की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की। रूट को लेकर भी सख्त चेतावनी दी गई कि निर्धारित रूट पर ही जुलूस निकाला जाए।<br />अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल व अपर जिलाधिकारी वि0 रा0 शुभांगी शुक्ला ने कहा कि पूर्व में निर्धारित परंपरा के अनुसार निर्धारित मार्गों का पुलिस व शासन द्वारा निरीक्षण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो ताजियादार हैं वह स्वयं ताजिया निकलने वाले मार्गों व कर्बला स्थल का अवलोकन एक बार स्वयं कर लें यदि कहीं पर कोई समस्या हो तो उससे अवगत करा दें।<br />बैठक के दौरान ताजिया/जुलूस निकालने वाले व्यक्तियों से ताजिया निकालने मार्गों, ताजिया के साइज, ताजिया निकलने का समय व दिनांक तथा अन्य कोई समस्या हो तो उसके संबंध में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। </div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 18:22:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बच्चा गांव में कल होगा भव्य जलसा, देश के नामचीन उलेमा करेंगे शिरकत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:- </strong>   मंडरो प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बच्चा गांव में कल 20 जून को चार मुहर्रम के अवसर पर एक भव्य धार्मिक जलसा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़े-बड़े औलामा-ए-कराम और इस्लामी विद्वान शिरकत करेंगे तथा दीन-ए-इस्लाम की शिक्षाओं पर रोशनी डालेंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बच्चा गांव के इमाम शाहबाज कमर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जलसा चार मुहर्रम की बरकत और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है और आयोजन की तैयारियां जोर-शोर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181523/a-grand-jalsa-will-be-held-in-bacha-village-tomorrow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-7.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मंडरो, साहिबगंज, झारखंड:- </strong>  मंडरो प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बच्चा गांव में कल 20 जून को चार मुहर्रम के अवसर पर एक भव्य धार्मिक जलसा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़े-बड़े औलामा-ए-कराम और इस्लामी विद्वान शिरकत करेंगे तथा दीन-ए-इस्लाम की शिक्षाओं पर रोशनी डालेंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बच्चा गांव के इमाम शाहबाज कमर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह जलसा चार मुहर्रम की बरकत और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है और आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जलसे में उलेमा-ए-कराम अपने बयान के माध्यम से इंसानियत, भाईचारा, अमन-शांति और इस्लामी तालीमात पर चर्चा करेंगे। आयोजन समिति ने क्षेत्र के लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर जलसे को कामयाब बनाने की अपील की है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों में जलसे को लेकर उत्साह का माहौल है और दूर-दराज के इलाकों से भी लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जलसा की तैयारी में सरदार शमशीर  अंसारी, मास्टर जावेद अंसारी,डॉक्टर रफ़ीक़ अंसारी, एकरामूल अंसारी, इस्लाम अंसारी, दिलदार अंसारी, जुहूरुद्दीन अंसारी, आसमोहम्मद अंसारी, अख्तर अंसारी, शाहबान अंसारी, एहसान अंसारी, महताब अंसारी, मुस्ताक अंसारी,आरिफ अंसारी, अब्दुल हलीम अंसारी, रेज़ाक़ अंसारी, खुर्शीद अंसारी,नसीम अंसारी, इस्माइल अंसारी, जब्बार अंसारी, जमशेद अंसारी, कलाम अंसारी, अब्दुल हाकिम अंसारी, इरसाद अंसारी, तारिक अनवर आदि की अहम भूमिका है।</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:59:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिंसा के दुष्चक्र से बाहर निकलने के लिए भरोसे संवाद और न्याय की सबसे बड़ी जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर भारत का सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मणिपुर पिछले कई वर्षों से अशांति और हिंसा की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक बार फिर कांगपोकपी जिले में हुई दर्दनाक घटना ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर की आग कब बुझेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हथियारबंद हमलावरों द्वारा एक गांव पर किए गए हमले में चर्च से जुड़े तीन लोगों की हत्या कर दी गई जिनमें सात माह की गर्भवती महिला भी शामिल थी। कई लोग घायल हुए और अनेक घर जलकर राख हो गए। यह घटना केवल तीन व्यक्तियों की मृत्यु भर नहीं है बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180759/the-biggest-need-for-trust-dialogue-and-justice-is-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/shutterstock_2461989209-scaled.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर भारत का सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य मणिपुर पिछले कई वर्षों से अशांति और हिंसा की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक बार फिर कांगपोकपी जिले में हुई दर्दनाक घटना ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर मणिपुर की आग कब बुझेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हथियारबंद हमलावरों द्वारा एक गांव पर किए गए हमले में चर्च से जुड़े तीन लोगों की हत्या कर दी गई जिनमें सात माह की गर्भवती महिला भी शामिल थी। कई लोग घायल हुए और अनेक घर जलकर राख हो गए। यह घटना केवल तीन व्यक्तियों की मृत्यु भर नहीं है बल्कि उस गहरे सामाजिक विभाजन और अविश्वास का प्रतीक है जिसने मणिपुर को लंबे समय से अपनी गिरफ्त में ले रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की समस्या को केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे ऐतिहासिक विवाद जातीय असुरक्षाएं राजनीतिक मतभेद और संसाधनों पर अधिकार को लेकर लंबे समय से चली आ रही प्रतिस्पर्धा भी शामिल है। राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच संबंध समय के साथ जटिल होते गए हैं। जब भी कोई हिंसक घटना होती है तो उसका प्रभाव केवल प्रभावित परिवारों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा हो जाता है। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। व्यापार और रोजगार पर असर पड़ता है। सामान्य जनजीवन बाधित हो जाता है और विकास की गति थम जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल की घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि हिंसा का कोई धर्म जाति या समुदाय नहीं होता। गोली और आग केवल जान लेती है। वह यह नहीं देखती कि सामने कौन है और उसकी पहचान क्या है। जब एक गर्भवती महिला हिंसा का शिकार होती है तो उसके साथ एक अजन्मा जीवन भी समाप्त हो जाता है। यह किसी भी सभ्य समाज के लिए गहरी पीड़ा और आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। ऐसे समय में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर में लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने दोनों प्रमुख समुदायों के बीच अविश्वास की ऐसी खाई पैदा कर दी है जिसे केवल सुरक्षा बलों की तैनाती से नहीं भरा जा सकता। सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है क्योंकि नागरिकों की रक्षा राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन स्थायी शांति केवल हथियारों के बल पर स्थापित नहीं की जा सकती। शांति तब आती है जब लोग एक दूसरे को दुश्मन नहीं बल्कि पड़ोसी और साथी नागरिक के रूप में देखने लगते हैं। इसके लिए संवाद और मेलमिलाप की प्रक्रिया को मजबूत करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिसमें सभी समुदाय अपनी बात खुलकर रख सकें और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए। केवल राजनीतिक बयान पर्याप्त नहीं हैं। जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली के ठोस प्रयास आवश्यक हैं। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उन्हें न्याय मिलना चाहिए। दोषियों की पहचान कर निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए। जब लोगों को यह भरोसा होगा कि कानून सभी के लिए समान है तभी व्यवस्था में विश्वास लौटेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि केवल सरकार के प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। समाज के विभिन्न वर्गों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। धार्मिक संगठन सामाजिक संस्थाएं बुद्धिजीवी युवा और स्थानीय नेतृत्व शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चर्च मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल केवल पूजा के केंद्र नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाले मंच भी बन सकते हैं। यदि विभिन्न समुदायों के धार्मिक और सामाजिक नेता मिलकर शांति का संदेश दें तो उसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की वर्तमान स्थिति यह भी बताती है कि अफवाहें और नफरत फैलाने वाली सूचनाएं कितनी खतरनाक हो सकती हैं। डिजिटल युग में सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी तेजी से फैलती है और लोगों की भावनाओं को भड़का सकती है। इसलिए जिम्मेदार संवाद और तथ्य आधारित जानकारी का प्रसार अत्यंत आवश्यक है। मीडिया को भी अपनी भूमिका संतुलित और संवेदनशील ढंग से निभानी होगी ताकि तनाव कम हो और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं को हिंसा से दूर रखना भी समय की मांग है। संघर्ष और अशांति का सबसे अधिक प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ता है। यदि उन्हें शिक्षा रोजगार और सकारात्मक अवसर नहीं मिलेंगे तो वे निराशा और कट्टरता की ओर बढ़ सकते हैं। इसलिए विकास और शांति को एक दूसरे का पूरक मानते हुए आगे बढ़ना होगा। स्कूलों कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर का इतिहास केवल संघर्ष का इतिहास नहीं है। यह सांस्कृतिक विविधता परंपराओं और सहअस्तित्व की समृद्ध विरासत का भी इतिहास है। सदियों से विभिन्न समुदायों ने यहां साथ रहकर अपनी पहचान को विकसित किया है। आज आवश्यकता इस बात की है कि उस साझा विरासत को याद किया जाए और उसे भविष्य की नींव बनाया जाए। विभाजन की राजनीति और हिंसा का रास्ता अंततः सभी को नुकसान पहुंचाता है जबकि संवाद और सहयोग सभी के लिए बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांगपोकपी की घटना ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है। निर्दोष लोगों की हत्या और घरों का जलना केवल समाचार नहीं बल्कि उन परिवारों का असहनीय दर्द है जिनकी दुनिया एक पल में बदल गई। इस पीड़ा को समझना और उससे सीख लेना जरूरी है। यदि हर नई घटना के बाद केवल शोक व्यक्त किया जाए और फिर सब कुछ पहले जैसा चलता रहे तो समाधान कभी नहीं निकलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर की आग तब बुझेगी जब भय की जगह विश्वास लेगा। जब प्रतिशोध की जगह संवाद होगा। जब राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ सामाजिक सहभागिता भी जुड़ेगी। जब हर समुदाय यह महसूस करेगा कि उसकी सुरक्षा सम्मान और अधिकार सुरक्षित हैं। और सबसे महत्वपूर्ण तब जब इंसान की पहचान किसी जातीय या सामुदायिक खांचे से पहले एक नागरिक और एक मानव के रूप में की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शांति कोई एक दिन में हासिल होने वाली उपलब्धि नहीं है। यह धैर्य समझदारी और निरंतर प्रयासों का परिणाम होती है। मणिपुर को आज इसी सामूहिक संकल्प की आवश्यकता है। सरकार समाज और दोनों समुदायों को मिलकर आगे बढ़ना होगा। हिंसा का प्रत्येक नया अध्याय राज्य को और पीछे धकेलता है जबकि सुलह और संवाद का हर कदम उसे स्थायी शांति और विकास की दिशा में आगे ले जाता है। अब समय आ गया है कि बंदूक की आवाज को बातचीत की आवाज से बदला जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां एक सुरक्षित शांत और समृद्ध मणिपुर देख सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 19:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह बर्बरता भरी जहरीली मानसिकता कहां से जन्म लेती है? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180375/where-does-this-barbaric-poisonous-mentality-originate-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/6a19794db4168-tension-in-the-area-following-the-murder-of-17-year-old-surya-chauhan-photo-itg-293224395-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक बेहद सनसनीखेज और कलेजा कँपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ खोड़ा थाना क्षेत्र में बकरीद के दिन एक 17 वर्षीय हिंदू किशोर, सूर्या चौहान की उसके ही पूर्व परिचित मुस्लिम दोस्तों ने बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले कट्टरपंथी हमलावरों ने पीड़ित से पूछा, “क्या तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि यह कहते ही उन्होंने सूर्या पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान तड़प-तड़प कर इस हिंदू लड़के ने दम तोड़ दिया। पुलिस की प्राथमिकी इस पूरी खौफनाक साजिश की गवाही दे रही है। पुलिस ने रविवार के तड़के मुख्य आरोपी असद को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है इस से पहले 3 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया और 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें मृतक सूर्या चौहान मूल रूप से एटा का रहने वाला था। वह नवनीत विहार, खोड़ा में अपनी माँ, बड़े भाई यश चौहान और छोटी बहन के साथ रहता था। उसके पिता कौशलेंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। सूर्या 11वीं कक्षा का छात्र था। जानकारी के मुताबिक, करीब 8 महीने पहले सूर्या का पड़ोस में रहने वाले असद नाम के युवक से किसी बात पर मामूली विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए असद ने बकरीद के पवित्र दिन को चुना। 28 मई की दोपहर को असद ने सूर्या को फोन किया। उसने सूर्या को बकरीद की पार्टी के बहाने मिलने के लिए चौधरी स्कूल के पास वाली गली नंबर 2 में बुलाया। सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ असद से मिलने पहुँचा था। विक्की और आयुष ने आँखों देखा हाल बताते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। विक्की ने बताया कि जैसे ही वे गली में पहुँचे, वहाँ पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक समेत 5 से 6 मुस्लिम युवक हथियारों के साथ घात लगाकर बैठे थे बताया जा रहा है कि आते ही उन्होंने सूर्या को चारों तरफ से दबोच लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक और हिंसक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या कभी बकरा हलाल होते देखा है? चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपितों ने चिल्लाते हुए कहा कि आज बकरीद है और आज कुर्बानी इस हिंदू लड़के की देंगे। यह कहते ही सभी आरोपितों ने सूर्या पर बड़े चाकुओं से हमला बोल दिया। उन्होंने सूर्या के पेट, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ कई वार किए। हमला इतना बर्बर था कि चाकुओं की गोदने की वजह से सूर्या की आंतें तक बाहर आ गईं।मौके पर चीख-पुकार और शोर मच गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोर सुनकर पास ही मौजूद सूर्या का भाई यश चौहान और उसकी माँ दौड़ते हुए घटना स्थल की तरफ भागे। परिजनों को अपनी तरफ आता देख सभी मुस्लिम हमलावर खून से लथपथ सूर्या को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गएपरिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सूर्या को नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल लेकर पहुँचे। वहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद अगले दिन यानी 29 मई को दोपहर करीब 12 बजे सूर्या ने दम तोड़ दिया। सूर्या की मौत की खबर जैसे ही खोड़ा इलाके में फैली, वहाँ भारी रोष और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार अपने बेटे को याद कर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। खोड़ा नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी और विभिन्न हिंदू संगठनों के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए मृतक के भाई यश चौहान द्वारा दी गई तहरीर जानलेवा हमला कर हत्या करने के प्रयास के संबंध में दर्ज कराई गई थी प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 28 मई को दोपहर करीब 3:30 बजे शिकायतकर्ता का भाई सूर्या अपने दोस्त आयुष (पुत्र मनोज भारती, निवासी नवनीत विहार, खोड़ा) के साथ जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तभी खोड़ा की शर्मा डेरी वाली गली में लोकप्रिय विहार का रहने वाला अशद (पुत्र नवाब) मिला।अशद ने अचानक सूर्या के साथ गाली-गलौज करते हुए झगड़ा शुरू कर दिया और फिर जान से मारने की नीयत से उसके पेट में चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में सूर्या गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना स्थल पर मौजूद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में इस हत्या को लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन से माँग की है कि सभी फरार आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। हिंदू समाज का कहना है कि यह केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज की सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। विभिन्न संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य आरोपित असद समेत सभी दोषियों के घरों पर तुरंत बुलडोजर नहीं चलाया गया और उन्हें सख्त सजा नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रण में बता रही है और मुख्य आरोपित की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि यूपी के गाजियाबाद और इस से सटे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आस-पास के क्षेत्रों में हत्या के कुछ हालिया मामलों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस जांच और आधिकारिक रिपोर्टों में इन घटनाओं को सुनियोजित या समुदाय-विशिष्ट घृणा  के बजाय मुख्य रूप से आकस्मिक विवादों, पुरानी दुश्मनी या आपसी रंजिश का परिणाम बताया गया है।आपको दो माह पहले जेजे कालोनी उत्तम नगर की नृशंसता भरी वारदात याद होगी यहां हिन्दू त्योहार होली के दिन रंग-बिरंगे पानी के छींटे पड़ने और गुब्बारा लगने को लेकर दो समुदाय से जुड़े परिवारों के बीच विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना में 26 वर्षीय तरुण कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी दिन यानि होली के दिन ही सिगरेट के विवाद में सूरज नामक 26 वर्षीय हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में सादिक नामक आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई की। और अब दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बकरीद के दिन एक 16 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की उसके ही परिचित दोस्त अशद ने साथियों के साथ मिलकर चाकू गोदकर हत्या कर दी गई है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यकीनन मौजूदा वारदात नाबालिग में लड़के सूर्या की बकरीद के दिन जिस तरह आतातायी हमलावरों ने हत्या की है वह अराजक व कम्युनल अपराधियों के बढ़ते हौसले का सबूत है घटना पर दुख जताते हुए और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए मृतक की मां ने कहा, "मैं घर पर नहीं थी, ड्यूटी पर थी। किसी ने मुझे फोन करके बताया कि मेरे बेटे को चाकू मार दिया गया है। जब मैं आई, तो मैंने शाम 7 बजे के करीब अपने बेटे का चेहरा देखा।  मुझे इंसाफ़ चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल पहुंचने के बाद जो कुछ देखा, उसे याद करते हुए मृतक की मौसी सुनीता ने कहा, "मैं सबसे पहले अस्पताल गई थी। मैंने उन्हें वहां देखा। वे यह साबित करना चाहते थे कि पहले बकरे की कुर्बानी दी और अब वे इंसान की कुर्बानी देंगे। बकरीद के दिन मेरे बच्चे को धोखे से घर से बुलाया गया। फिर उससे पूछा गया कि बकरा कैसे काटा जाता है। हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता? हमारे बच्चों ने कभी खून-खराबा नहीं देखा। वे क्या कहते? यही कहते कि उन्होंने कभी नहीं देखा। फिर उसके पेट में चाकू घोंप दिया गया और उसकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल यह है कि इस तरह की दरिंदगी और बर्बरता की सोच को कौन उकसा रहा है? बकरीद से दो दिन पहले ही गाजियाबाद से सटे हापुड़ जनपद के पिलखुवा में एक शनिदेव प्रतिमा को एक समुदाय विशेष के एक जेहादी ने तोड़ दिया बाद में सीसीटीवी कैमरे के जरिए मिले सबूत से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी मनमानी घृणा और विद्वेष की बातें बहुलता से वायरल हो रहीं हैं यह एक स्वस्थ समाज की संरचना को तोड़ रहा है और परस्पर जहरीली सोच तैयार कर रहा है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए और इस जहर की फसल को बीजनाश करनी चाहिए ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
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                <title>रमजान माह में जुमे की नमाज अदा, अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआ</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पवित्र रमजान माह के दौरान शुक्रवार को कस्बा सहित आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने जुमे की नमाज अदा की। मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर देश और समाज में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के दौरान कस्बे का माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण बना रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कस्बे की चिक मंडी स्थित जामा मस्जिद, कांचमील मस्जिद, बड़ी मस्जिद, मोहम्मदिया मस्जिद और अल्ला नगर स्थित मस्जिद सहित अन्य इबादतगाहों में नमाज अदा करने के लिए दोपहर से ही नमाजियों का पहुंचना शुरू हो गया था। नमाज के समय मस्जिदों में काफी भीड़ रही। लोगों ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173230/offered-friday-prayers-in-the-month-of-ramadan-and-prayed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260313-wa0239-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पवित्र रमजान माह के दौरान शुक्रवार को कस्बा सहित आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने जुमे की नमाज अदा की। मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर देश और समाज में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के दौरान कस्बे का माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण बना रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कस्बे की चिक मंडी स्थित जामा मस्जिद, कांचमील मस्जिद, बड़ी मस्जिद, मोहम्मदिया मस्जिद और अल्ला नगर स्थित मस्जिद सहित अन्य इबादतगाहों में नमाज अदा करने के लिए दोपहर से ही नमाजियों का पहुंचना शुरू हो गया था। नमाज के समय मस्जिदों में काफी भीड़ रही। लोगों ने रमजान की बरकत और समाज में आपसी सौहार्द बनाए रखने की दुआ की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। जुमे की नमाज को देखते हुए मस्जिदों और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रमुख स्थानों पर पुलिस कर्मी मुस्तैदी से ड्यूटी करते दिखाई दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि जुमे की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 19:15:43 +0530</pubDate>
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