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                <title>Women's commission - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Women's commission RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग से कई मामलों में तेज़ी से कार्रवाई हुई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला</strong>,  NCW आपके द्वार’ पहल के तहत पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग में कई लंबे समय से पेंडिंग मामलों में तेज़ी से और सही दखल देखा गया, जिससे महिलाओं को समय पर न्याय दिलाने के कमीशन के वादे को फिर से पक्का किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान, नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन, सुश्री विजया रहाटकर ने खुद महिलाओं और उनके परिवारों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, हैरेसमेंट और जांच में लंबे समय तक देरी से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।</div>
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<div style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181548/public-hearing-of-national-commission-for-women-in-patiala-led"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000910051.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पटियाला</strong>,  NCW आपके द्वार’ पहल के तहत पटियाला में नेशनल कमीशन फॉर विमेन की पब्लिक हियरिंग में कई लंबे समय से पेंडिंग मामलों में तेज़ी से और सही दखल देखा गया, जिससे महिलाओं को समय पर न्याय दिलाने के कमीशन के वादे को फिर से पक्का किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान, नेशनल कमीशन फॉर विमेन की चेयरपर्सन, सुश्री विजया रहाटकर ने खुद महिलाओं और उनके परिवारों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा, हैरेसमेंट और जांच में लंबे समय तक देरी से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल और SSP वरुण शर्मा के नेतृत्व में पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा की गई तुरंत कार्रवाई की तारीफ करते हुए, सुश्री रहाटकर ने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों और कमीशन के बीच तालमेल से न्याय देने वाले सिस्टम में जनता का भरोसा मजबूत होता है, जिसमें पीड़ितों को बहुत ज़रूरी राहत देने के लिए समय पर दखल देना भी शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-कनाडा में NRI महिला पर बेरहमी से हमले के मामले में FIR दर्ज</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कमीशन के सामने लाए गए सबसे गंभीर मामलों में से एक एक जवान लड़की के माता-पिता से जुड़ा था, जिस पर 2024 में कनाडा में उसके पति ने बेरहमी से हमला किया था, जिससे उसके दिमाग में गंभीर चोटें आईं। पीड़ित का कनाडा में इलाज चल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार ने कमीशन को बताया कि हालांकि कनाडा में क्रिमिनल केस दर्ज था, लेकिन आरोपी पति भारत भाग गया था। लगभग दो साल तक लोकल अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद, उन्हें मामले में ज़रूरी तरक्की नहीं मिली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत को गंभीरता से लेते हुए, माननीय चेयरपर्सन ने पटियाला के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने और 24 घंटे के अंदर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने तुरंत आरोपी पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) के संबंधित नियमों के तहत FIR दर्ज कर ली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-पीछा करने और मारपीट के मामले में सख्त धाराएं जोड़ी गईं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और मामले में, एक जवान लड़की ने कमीशन को बताया कि उस पर और उसके परिवार पर उन लोगों ने हिंसक हमला किया जो कथित तौर पर उसका पीछा कर रहे थे और उसे परेशान कर रहे थे। FIR पहले ही दर्ज हो चुकी थी, लेकिन शिकायत करने वाली ने आरोप लगाया कि सही कानूनी नियमों का इस्तेमाल नहीं किया गया और उसे धमकियां और डराया-धमकाया जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के बाद, सुश्री राहतकर ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत करने वाली का बयान तुरंत रिकॉर्ड करने और संबंधित नियमों को लागू करने की जांच करने का निर्देश दिया। पुलिस ने बाद में कमीशन को बताया कि शिकायत करने वाले के बयान के अनुसार FIR को अपडेट और बेहतर बनाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">-लंबे समय से लंबित लापता महिला के मामले में जांच के नए कदम</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कमीशन ने एक मां की याचिका पर भी सुनवाई की, जिसकी शादीशुदा बेटी 2022 से लापता है। शिकायत करने वाली ने लापता महिला के पति और उसके पार्टनर के शामिल होने की आशंका जताई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह देखते हुए कि मामला कई सालों से सुलझा नहीं है, माननीय चेयरपर्सन ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को जांच में तेजी लाने और बिना देर किए सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया। निर्देशों का पालन करते हुए, पुलिस ने कमीशन को बताया कि पति का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मांगा गया है ताकि आगे की जांच की जा सके और मामले को आगे बढ़ाया जा सके। -सीधे दखल से समय पर न्याय पक्का करना</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन मामलों में देखी गई तेज़ कार्रवाई ‘नेशनल कमीशन फॉर विमेन एट योर डोरस्टेप’ पहल के ज़रिए कमीशन की ज़मीनी स्तर पर पहुँच का असर दिखाती है, जिसका मकसद न्याय व्यवस्था को महिलाओं के करीब लाना और यह पक्का करना है कि उनकी चिंताओं को बिना किसी देरी के दूर किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चेयरपर्सन श्रीमती विजया रहाटकर ने दोहराया कि हर शिकायत न्याय व्यवस्था में एक महिला के भरोसे को दिखाती है और इसे तुरंत, निष्पक्ष और गंभीरता से निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नेशनल कमीशन फॉर विमेन महिलाओं से जुड़े मामलों की जवाबदेही, असरदार फ़ॉलो-अप और समय पर समाधान पक्का करने के लिए राज्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कमीशन ने पब्लिक हियरिंग के दौरान दिए गए निर्देशों पर तुरंत कार्रवाई करने में पंजाब पुलिस और ज़िला प्रशासन द्वारा दिए गए सहयोग का भी स्वागत किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:12:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मर्यादा लांघकर त्योहार को न करें बदनाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171880/do-not-defame-the-festival-by-crossing-limits"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas50.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास बढ़ती है और वैमनस्य दूर होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन आधुनिक समय में इसकी नैतिक और मर्यादित छवि धूमिल होती जा रही है। अश्लील भोजपुरी एवं द्विअर्थी गीत, तेज डीजे, जबरन छूना और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार ने इसे विवादास्पद बना दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जीजा–साली तथा भाभी–देवर जैसे रिश्तों की मर्यादा भंग करने वाली हरकतें निंदनीय हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भोजपुरी होली गीत ऐसे परोसे जा रहे हैं, जिनमें रिश्तों को यौनिकता के चश्मे से देखा जाता है। इससे परिवारों में शर्मिंदगी फैलती है और भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति की बदनामी भी होती है, जो एक बड़ी क्षति है। भोजपुरी में होली के लोकगीतों और होलिका-गायन की मधुर एवं समृद्ध परंपरा रही है, जो अब धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय परंपरा में कुछ रिश्ते हास्य-व्यंग्य और हल्की छेड़छाड़ वाले माने जाते हैं, किंतु यह सब हमेशा सीमित और सम्मानजनक होना चाहिए। भोजपुरी या हिंदी होली गीतों में जीजा–साली या भाभी–देवर के संबंधों को द्विअर्थी, अश्लील और यौनिक संदर्भों में प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे गीतों का परिवार में तथा सड़कों पर बजना शर्मिंदगी का कारण बनता है और महिलाएँ असहज महसूस करती हैं। इन दिनों महिलाएँ कहीं भी यात्रा करने से डरती हैं, क्योंकि वे अपने ही समाज में असुरक्षित महसूस करती हैं। होली के बहाने जबरन छूना, अनचाहा गले लगना, शारीरिक छेड़छाड़ या अश्लील टिप्पणी करना घोर निंदनीय है। कई मामलों में यह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज सोशल मीडिया भी अश्लील सामग्री परोसकर युवाओं को भड़काने और रिश्तों की मर्यादा लांघने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है, जो हमारे पवित्र त्योहार को बदरंग बना रही है। दूसरी ओर, शहरीकरण और पश्चिमी प्रभाव से पारंपरिक मूल्यों का क्षरण बढ़ रहा है। जहाँ पहले परिवार में सामूहिक रूप से होली खेली जाती थी, वहीं अब यह कई स्थानों पर सार्वजनिक हुड़दंग और अराजकता का रूप ले लेती है। इन गलत प्रवृत्तियों का प्रभाव बच्चों पर भी पड़ रहा है। बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं; वे जो देखते और सुनते हैं, वही सीखते हैं। अश्लील गीत और हिंसक व्यवहार उन्हें गलत मूल्य सिखाते हैं, जो भविष्य में समाज के लिए घातक हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली की इस विकृति का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। महिलाओं की असुरक्षा सबसे बड़ी समस्या बन गई है। अश्लील गीतों और “बुरा न मानो, होली है” जैसे नारों का प्रयोग असहमति की अनदेखी करने का बहाना बन गया है, जो कई बार यौन उत्पीड़न की सीमा पार कर जाता है। लैंगिक वर्चस्व का प्रदर्शन और मर्यादा का उल्लंघन होली जैसे उत्सव की भावना को सबसे अधिक कलंकित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए इस होली को उत्साहपूर्वक मनाइए, किंतु मर्यादा की सीमाओं में रहकर। शोर-शराबा, जबरदस्ती रंग लगाना या किसी को असुविधा पहुँचाना त्योहार की भावना के विपरीत है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भावनाओं का विशेष ध्यान रखें। बिहार पुलिस और महिला आयोग ने इस वर्ष अश्लील गीतों पर प्राथमिकी दर्ज करने तथा ड्रोन निगरानी तक की व्यवस्था की है, जो एक सकारात्मक कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का वास्तविक रंग प्रेम, एकता और पवित्रता में है। इसे विकृतियों से मुक्त रखकर हम न केवल त्योहार की मिठास बचाएँगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज का निर्माण भी करेंगे। इस प्रकार होली की पवित्रता, बंधुत्व और मिठास बनाए रखें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:03:47 +0530</pubDate>
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