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                <title>Cultural heritage - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Cultural heritage RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भजन प्रवाह और कथक नृत्य ने बांधा समां, 22 गुरुजनों का हुआ सम्मान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में कलामंडपम् प्रेक्षागृह, कैसरबाग में भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन एवं भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “पद्म भूषण डॉ0 एस0एन0 रतनजंकर स्मृति गुरु सम्मान समारोह–2026” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संगीत, नृत्य और गुरु-शिष्य परंपरा की समृद्ध विरासत का सुंदर संगम देखने को मिला। समारोह का मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध सुरसाधक किशोर चतुर्वेदी की भावपूर्ण भजन प्रस्तुति “भजन प्रवाह” रही। उन्होंने “हे री सखी मंगल गौरी”, “राम नाम सुखदाई”, “अच्युतम् केशवम् कृष्ण दामोदरम्” तथा सावन पर आधारित मेघ मल्हार गीत प्रस्तुत कर पूरे सभागार को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी सुमधुर गायकी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184446/bhajan-flow-and-kathak-dance-enthralled-22-teachers-honored"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/641472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में कलामंडपम् प्रेक्षागृह, कैसरबाग में भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन एवं भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “पद्म भूषण डॉ0 एस0एन0 रतनजंकर स्मृति गुरु सम्मान समारोह–2026” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संगीत, नृत्य और गुरु-शिष्य परंपरा की समृद्ध विरासत का सुंदर संगम देखने को मिला। समारोह का मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध सुरसाधक किशोर चतुर्वेदी की भावपूर्ण भजन प्रस्तुति “भजन प्रवाह” रही। उन्होंने “हे री सखी मंगल गौरी”, “राम नाम सुखदाई”, “अच्युतम् केशवम् कृष्ण दामोदरम्” तथा सावन पर आधारित मेघ मल्हार गीत प्रस्तुत कर पूरे सभागार को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी सुमधुर गायकी से प्रभावित श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। इसके पश्चात विदुषी रेनु शर्मा के निर्देशन में “पुष्प वाटिका प्रसंग” पर आधारित समूह कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। कलाकारों की उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति, लयबद्धता और आकर्षक मंच-सज्जा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह के दौरान संगीत एवं कला जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 22 गुरुजनों को भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके योगदान को नमन करते हुए सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की अध्यक्षता भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 मांडवी सिंह ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संगीत, नृत्य और गुरु-शिष्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समारोह में मुख्य अतिथि डॉ0 राजेश सिंह, प्रमुख सचिव, विधान परिषद उत्तर प्रदेश तथा विशिष्ट अतिथि  राजेश जायसवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि, कलाकार, संगीत प्रेमी और श्रोतागण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन पूनम श्रीवास्तव ने किया। अंत में भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा भारद्वाज एवं सचिव गिरीश चन्द्र बहुगुणा ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। गरिमामय वातावरण में संपन्न यह समारोह संगीत और संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 19:14:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>याद ए सकीना बिन्तुल हुसैन में शहादत का ग़मगीन तज़केरा सुन अक़ीदतमंदों के छलके आंसू।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  हैदरी पत्थर गली शहनूर अलीगंज प्रयागराज की जानिब से शनिवार रात यादे सकीना बिन्तुल हुसैन (स.अ.) के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  कार्यक्रम में दिल्ली से आए मौलाना सैयद कल्बे रुशैद साहब क़िबला ने ख़िताब करते हुए हज़रत सकीना (स.अ.) की ज़िंदगी,सब्र और करबला के पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करबला का संदेश इंसानियत, सब्र और सच्चाई पर डटे रहने की सीख देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन ए पाक से हुई, जिसके बाद नज़राना-ए-अक़ीदत और मर्सिया पेश किया गया। कार्यक्रम में शहर और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183820/hearing-the-sad-story-of-martyrdom-in-yaad-e-sakina-bintul-hussain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/33.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> हैदरी पत्थर गली शहनूर अलीगंज प्रयागराज की जानिब से शनिवार रात यादे सकीना बिन्तुल हुसैन (स.अ.) के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> कार्यक्रम में दिल्ली से आए मौलाना सैयद कल्बे रुशैद साहब क़िबला ने ख़िताब करते हुए हज़रत सकीना (स.अ.) की ज़िंदगी,सब्र और करबला के पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करबला का संदेश इंसानियत, सब्र और सच्चाई पर डटे रहने की सीख देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन ए पाक से हुई, जिसके बाद नज़राना-ए-अक़ीदत और मर्सिया पेश किया गया। कार्यक्रम में शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और पूरे अदब व एहतराम के साथ मजलिस को सुना।ताबूत ए सकीना व अलम भी निकाला गया।जिसकी जियारत को अक़ीदतमन्दों का सैलाब उमड़ पड़ा। अन्जुमन हैदरिया रानी मण्डी के नौहाख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ा।आखिर में मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और इंसानियत की भलाई के लिए दुआ की गई।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:29:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>याद ए सकीना बिन्तुल हुसैन में शहादत का ग़मगीन तज़केरा सुन अक़ीदतमंदों के छलके आंसू</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong>   हैदरी पत्थर गली शहनूर अलीगंज प्रयागराज की जानिब से शनिवार रात यादे सकीना बिन्तुल हुसैन (स.अ.) के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। कार्यक्रम में दिल्ली से आए मौलाना सैयद कल्बे रुशैद साहब क़िबला ने ख़िताब करते हुए हज़रत सकीना (स.अ.) की ज़िंदगी,सब्र और करबला के पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करबला का संदेश इंसानियत, सब्र और सच्चाई पर डटे रहने की सीख देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन ए पाक से हुई, जिसके बाद नज़राना-ए-अक़ीदत और मर्सिया पेश किया गया। कार्यक्रम में शहर और आसपास के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183810/hearing-the-sad-story-of-martyrdom-in-yaad-e-sakeena-bintul-hussain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260719-wa0062.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong>  हैदरी पत्थर गली शहनूर अलीगंज प्रयागराज की जानिब से शनिवार रात यादे सकीना बिन्तुल हुसैन (स.अ.) के अवसर पर एक मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। कार्यक्रम में दिल्ली से आए मौलाना सैयद कल्बे रुशैद साहब क़िबला ने ख़िताब करते हुए हज़रत सकीना (स.अ.) की ज़िंदगी,सब्र और करबला के पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करबला का संदेश इंसानियत, सब्र और सच्चाई पर डटे रहने की सीख देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन ए पाक से हुई, जिसके बाद नज़राना-ए-अक़ीदत और मर्सिया पेश किया गया। कार्यक्रम में शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की और पूरे अदब व एहतराम के साथ मजलिस को सुना।ताबूत ए सकीना व अलम भी निकाला गया।जिसकी जियारत को अक़ीदतमन्दों का सैलाब उमड़ पड़ा। अन्जुमन हैदरिया रानी मण्डी के नौहाख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ा।आखिर में मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और इंसानियत की भलाई के लिए दुआ की गई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 21:57:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राज्यपाल ने इलाहाबाद संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका का किया उद्घाटन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभा। </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div>  </div>
<div>उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल एवं इलाहाबाद संग्रहालय समिति की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को इलाहाबाद संग्रहालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका का विधिवत उद्घाटन किया और वीथिका के पूर्ण डिजिटलीकरण के निर्देश दिए, ताकि साहित्य प्रेमी एवं शोधार्थी आधुनिक तकनीक के माध्यम से महान साहित्यकार के जीवन, कृतित्व और साहित्यिक योगदान से आसानी से परिचित हो सकें।</div>
<div>  </div>
<div>राज्यपाल ने वीथिका का अवलोकन करते हुए प्रदर्शित दुर्लभ साहित्यिक सामग्री, पांडुलिपियों, चित्रों एवं अन्य संग्रहों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से संग्रहालयों को अधिक आकर्षक और ज्ञानवर्धक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183570/the-governor-inaugurated-the-sumitranandan-pant-literary-gallery-in-allahabad"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260717-wa0160.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभा। </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल एवं इलाहाबाद संग्रहालय समिति की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को इलाहाबाद संग्रहालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका का विधिवत उद्घाटन किया और वीथिका के पूर्ण डिजिटलीकरण के निर्देश दिए, ताकि साहित्य प्रेमी एवं शोधार्थी आधुनिक तकनीक के माध्यम से महान साहित्यकार के जीवन, कृतित्व और साहित्यिक योगदान से आसानी से परिचित हो सकें।</div>
<div> </div>
<div>राज्यपाल ने वीथिका का अवलोकन करते हुए प्रदर्शित दुर्लभ साहित्यिक सामग्री, पांडुलिपियों, चित्रों एवं अन्य संग्रहों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से संग्रहालयों को अधिक आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनाया जाना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी भारतीय साहित्य और संस्कृति से जुड़ सके।</div>
<div> </div>
<div>दौरे के दौरान राज्यपाल ने संग्रहालय की अनुभव वीथिका का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने विभिन्न दिव्यांग विद्यालयों से आए बच्चों से आत्मीय संवाद किया, उनकी शिक्षा, रुचियों और आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली। बच्चों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनके उत्साह की सराहना करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांग बच्चों के लिए वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के शैक्षणिक एवं प्रेरणादायी भ्रमण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर राज्यपाल ने सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका पर आधारित कैटलॉग का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह कैटलॉग शोधार्थियों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए उपयोगी साबित होगा तथा पंत जी के साहित्य और व्यक्तित्व को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 19:58:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऐतिहासिक 150वें वर्ष की जनकपुरी भावना एस्टेट रोड पर सजेगी, बाबरपुर का नाम 'जनकपुरी' करने का प्रस्ताव; विधायक ने दिया सकारात्मक आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>आगरा |</strong> की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक जनकपुरी महोत्सव इस वर्ष अपने ऐतिहासिक 150वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस विशेष अवसर पर श्री रामलीला कमेटी, आगरा ने जनकपुरी महोत्सव के आयोजन के लिए सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट रोड का चयन किया है। आयोजन स्थल की आधिकारिक घोषणा के साथ ही पूरे सिकंदरा क्षेत्र में उत्साह, उल्लास और धार्मिक वातावरण देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताते हुए आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आगरा किला स्थित श्री रामलीला मैदान में आयोजित बैठक में श्री रामलीला कमेटी के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183373/the-historic-150th-year-janakpuri-bhavana-estate-road-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001102756-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>आगरा |</strong> की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक जनकपुरी महोत्सव इस वर्ष अपने ऐतिहासिक 150वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस विशेष अवसर पर श्री रामलीला कमेटी, आगरा ने जनकपुरी महोत्सव के आयोजन के लिए सिकंदरा स्थित भावना एस्टेट रोड का चयन किया है। आयोजन स्थल की आधिकारिक घोषणा के साथ ही पूरे सिकंदरा क्षेत्र में उत्साह, उल्लास और धार्मिक वातावरण देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताते हुए आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आगरा किला स्थित श्री रामलीला मैदान में आयोजित बैठक में श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने सिकंदरा अपार्टमेंट्स एसोसिएशन (SAA) के अध्यक्ष डॉ. जी.पी. अग्रवाल तथा चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों संजय गोयल और मनोज बंसल को जनकपुरी महोत्सव आयोजन का आधिकारिक स्वीकृति पत्र सौंपकर इसकी औपचारिक घोषणा की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सिकंदरा अपार्टमेंट्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ठाकुर राजा सिंह चौहान सहित वरिष्ठ सदस्य विश्वनाथ जुनेजा, अंकुश मित्तल, निशांत, राणा सुशील सिंह, अवनीत कुमार अवस्थी, अशोक कुमार गुप्ता (एडवोकेट), अनुज गुप्ता, अरुण गुप्ता, संतोष कटारा, धीरज अग्रवाल, प्रशांत बेरी, तिलक राज अरोड़ा सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बाबरपुर का नाम 'जनकपुरी' करने का प्रस्ताव</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान सिकंदरा अपार्टमेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को स्थायी स्वरूप देने के उद्देश्य से बाबरपुर का नाम बदलकर "जनकपुरी" किए जाने का प्रस्ताव विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल के समक्ष रखा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">प्रस्ताव पर विधायक ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि यदि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सहमति रहती है तो इसे नगर निगम की प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी को निर्देश दिए कि प्रस्ताव को नगर निगम की आगामी हाउस बैठक में प्रस्तुत कराया जाए। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रस्ताव के पारित होने तक वह स्वयं इसकी निगरानी करेंगे और आवश्यक स्तर पर पूरा सहयोग देंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">150वां वर्ष बनेगा ऐतिहासिक</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">श्री रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि जनकपुरी महोत्सव का 150वां वर्ष होने के कारण इस बार आयोजन को विशेष रूप से भव्य और आकर्षक बनाया जाएगा। भावना एस्टेट रोड को मिथिला की सांस्कृतिक झलक के अनुरूप सजाया जाएगा। आकर्षक विद्युत सज्जा, विशाल स्वागत द्वार, धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां, पारंपरिक अलंकरण, भक्ति संगीत और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जाएंगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आयोजन में शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए यातायात, सुरक्षा, पार्किंग, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जनकपुरी महोत्सव भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य विवाह प्रसंग पर आधारित उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है। पिछले डेढ़ शताब्दी से यह आयोजन आगरा की पहचान बना हुआ है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस वर्ष सिकंदरा में आयोजित होने वाला 150वां जनकपुरी महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। वहीं, बाबरपुर का नाम बदलकर "जनकपुरी" किए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। यदि नगर निगम में यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ सकता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 20:14:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>मुख्यमंत्री योगी के संभावित आगमन से गोविंद साहब धाम में हलचल तेज, तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>आलापुर, अंबेडकरनगर।</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आलापुर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र स्थित महात्मा गोविंद साहब की पावन तपोस्थली अहिरौली गोविंद साहब के संभावित दौरे को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि गोविंद साहब धाम पहुंचते हैं तो माना जा रहा है कि वह संत परंपरा और सामाजिक समरसता का संदेश देने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कर सकते हैं।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183208/due-to-the-possible-arrival-of-chief-minister-yogi-there"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1006298913-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>आलापुर, अंबेडकरनगर।</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आलापुर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र स्थित महात्मा गोविंद साहब की पावन तपोस्थली अहिरौली गोविंद साहब के संभावित दौरे को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यदि गोविंद साहब धाम पहुंचते हैं तो माना जा रहा है कि वह संत परंपरा और सामाजिक समरसता का संदेश देने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कर सकते हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि महात्मा गोविंद साहब की तपोस्थली का व्यापक कायाकल्प कराया जाएगा तथा इसे प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में विकसित करने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/1006298912-(1).jpg" alt="मुख्यमंत्री योगी के संभावित आगमन से गोविंद साहब धाम में हलचल तेज, तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू" width="453" height="302"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों को यह भी आशा है कि पूर्वांचल के ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध गोविंद साहब मेले को राजकीय मेले का दर्जा प्रदान करने की घोषणा हो सकती है। वर्षों से चली आ रही इस मांग के पूरी होने से धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बड़ा लाभ मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी के साथ रामनगर, कटेहरी और भीटी बाजार को नगर पंचायत बनाए जाने की चर्चाएं भी तेज हैं। विशेष रूप से रामनगर को नगर पंचायत बनाए जाने की सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शासन स्तर पर अंतिम स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के दौरान इस संबंध में महत्वपूर्ण घोषणा होने की उम्मीद जताई जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शनिवार को गोविंद साहब मेला समिति के अध्यक्ष भौमेन्द्र सिंह 'पप्पू', रामनगर के पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष अभिषेक निषाद, गोलू पाण्डेय सहित कई लोगों ने अहिरौली गोविंद साहब पहुंचकर महात्मा गोविंद साहब की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा संभावित कार्यक्रम को लेकर तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक तैयारियों पर चर्चा भी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से भी मुख्यमंत्री का संभावित दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंबेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटों पर आगामी चुनाव में भाजपा को मजबूत स्थिति में पहुंचाने के लिए संगठन लगातार सक्रिय है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर को पहले ही जिले का प्रभारी मंत्री बनाकर भाजपा नेतृत्व स्पष्ट राजनीतिक संकेत दे चुका है। ऐसे में गोविंद साहब धाम से मुख्यमंत्री का संभावित कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर तैयारियां संभावित दौरे को ध्यान में रखकर की जा रही हैं और क्षेत्रवासियों की निगाहें अब शासन की आधिकारिक सूचना पर टिकी हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:21:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रुतधाम : ज्ञान, साधना और संस्कृति का जीवंत तीर्थ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय की धूल राजमहलों को ढँक सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शब्दों की ज्योति कभी नहीं बुझती। किसी समाज की सबसे अमूल्य निधि उसके ग्रंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी परंपरा और उसकी स्मृतियाँ होती हैं। जब ये बिखरने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केवल इतिहास नहीं खोता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मा भी मौन होने लगती है। ऐसे विरले तपस्थल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस अमूल्य विरासत को पुनः जीवन देकर पीढ़ियों तक पहुँचा दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल संस्थान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति के शाश्वत दीप बन जाते हैं। मध्यप्रदेश के बीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सागर स्थित</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनेकांत ज्ञान मंदिर (श्रुतधाम)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के शिष्य</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिगम्बर जैन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183196/shrutdhaam-is-a-vibrant-pilgrimage-site-of-knowledge-practice-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय की धूल राजमहलों को ढँक सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शब्दों की ज्योति कभी नहीं बुझती। किसी समाज की सबसे अमूल्य निधि उसके ग्रंथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी परंपरा और उसकी स्मृतियाँ होती हैं। जब ये बिखरने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केवल इतिहास नहीं खोता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मा भी मौन होने लगती है। ऐसे विरले तपस्थल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस अमूल्य विरासत को पुनः जीवन देकर पीढ़ियों तक पहुँचा दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल संस्थान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति के शाश्वत दीप बन जाते हैं। मध्यप्रदेश के बीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सागर स्थित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनेकांत ज्ञान मंदिर (श्रुतधाम)</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के शिष्य</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दिगम्बर जैन मुनिश्री सरलसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में विकसित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी ही दिव्य ज्ञान-साधना का जीवंत आलोक है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुत की रक्षा नहीं</span></strong><strong>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुत का पुनर्जागरण</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब समय अपनी अमूल्य धरोहरों को विस्मृति के हवाले कर रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी </span>1992 <span lang="hi" xml:lang="hi">को श्रुतधाम एक मौन संकल्प बनकर प्रकट हुआ। यह किसी भवन का आरंभ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस चेतना का जागरण था जिसने श्रुत परंपरा को संग्रह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीढ़ियों के संस्कार का आधार माना। यहाँ इतिहास को अतीत की स्मृति बनाकर नहीं छोड़ा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान का पथप्रदर्शक बना दिया गया। स्थापना के साथ ही दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अध्ययन और प्रचार-प्रसार का सतत यज्ञ आरंभ हो गया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ दुर्लभ ग्रंथों ने फिर से जीवन पाया</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के </span>600 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक स्थलों से संजोए गए </span>30,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक दुर्लभ जैन ग्रंथ तथा </span>200 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक ताड़पत्र और प्राचीन पांडुलिपियाँ आज श्रुतधाम की अमूल्य निधि हैं। लगभग </span>1300 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष पुरानी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुभाषित रत्नावली</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और चार शताब्दी पुराना स्वर्णाक्षरित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भक्तामर स्तोत्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मात्र प्राचीन ग्रंथ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस सत्य के जीवंत प्रमाण हैं कि जहाँ संकल्प अडिग हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ काल भी ज्ञान की ज्योति मंद नहीं कर पाता।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ ग्रंथ बोलते हैं और पीढ़ियाँ सुनती हैं</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम की पहचान उसके संग्रह से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस चेतना से है जो ग्रंथों के ज्ञान को जीवन से जोड़ती है। यहाँ पांडुलिपियाँ केवल सुरक्षित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज की प्रेरणा हैं। ब्रह्मचारी संदीप सरल भैयाजी के मार्गदर्शन में आचार्यों की वाणी अतीत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान का आलोक बनकर प्रवाहित है। यहाँ युवा पीढ़ी को केवल ज्ञान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चरित्र और आत्मजागरण का संस्कार मिलता है। संस्थान में प्राकृत भाषा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैन दर्शन और शास्त्र-अध्ययन की नियमित कक्षाएँ संचालित होती हैं। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से श्रुत-आराधना का प्रशिक्षण दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दूर-दूर के जिज्ञासु श्रावक लाभान्वित हो रहे हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हरित चेतना का आध्यात्मिक विस्तार</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम का विस्तार केवल शास्त्रों तक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति की गोद तक है। सहस्रों वृक्षों और चौबीस तीर्थंकरों से संबद्ध पावन वनस्पतियों के माध्यम से यह संदेश साकार होता है कि धर्म केवल उपासना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन-संस्कृति है। यहाँ पर्यावरण संरक्षण अभियान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साधना का सहज स्वरूप है। परिसर का विकसित वन क्षेत्र और जैविक खेती के प्रयास इस हरित चेतना को और सुदृढ़ करते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक संकल्प जिसने इतिहास बदल दिया</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम किसी भवन की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक विश्वास की रचना है। यह उस संकल्प का साकार रूप है जिसने सिद्ध किया कि समाज यदि अपनी ज्ञान-परंपरा का संरक्षण करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो खोई विरासत भी पुनः जीवंत हो उठती है। यह स्थल संतों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रावकों और समर्पित साधकों के सामूहिक पुरुषार्थ का साक्षी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने ऐसी चेतना जगाई है जो आज भी पीढ़ियों का पथ आलोकित कर रही है। परिसर में निर्माणाधीन भव्य मुक्ताकाश समवशरण मंदिर उसी दूरदृष्टि का प्रतीक है। </span>41 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार वर्गफुट में आकार ले रहा बुंदेलखंड का प्रथम मुक्ताकाश समवशरण मंदिर जैन परंपरा की भव्यता को नई ऊँचाई दे रहा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रुतधाम : एक स्थान नहीं</span></strong><strong>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">एक सतत आंदोलन</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश के बीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सागर में स्थित श्रुतधाम आज केवल तीर्थ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय ज्ञान-परंपरा के पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक है। यहाँ अतीत भविष्य का पथ प्रशस्त करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास वर्तमान से संवाद करता है और श्रुत केवल पढ़ा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिया जाता है। इसी कारण श्रुतधाम भवन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक चेतना है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्था नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सतत प्रवाहित सांस्कृतिक अभियान है। जैन श्रुत परंपरा के पुनर्जीवन के साथ यह समूची भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण का भी सशक्त केंद्र बन चुका है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:06:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चिलबिला में अखाड़ों को सम्मानित कर किया गया रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा,सोनावा अखाड़ा, शाहीन अखाड़ा, शाहीन गोड़े के अखाड़ों ने शुक्रवार को एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करनामें दिखाकर उपस्थित जनमानस को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। चिलबिला के सभी व्यापारियों ने जुलूस का स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतापगढ़ की गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखते हुए रामलीला समिति के संरक्षक समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, वरिष्ठ व्यवसायी सुनील अग्रवाल ने सम्मानित कर मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा, सोनावा अखाड़ा, शाही अखाड़ा गोड़े के जुलूस को रवाना किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शाहीन अखाड़ा गोड़े के जुलूस को अब्दुल जब्बार की अध्यक्षता में गोड़े से सैकड़ो की संख्या में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182551/akharas-were-honored-and-sent-off-in-chilbila"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260626-wa0076.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा,सोनावा अखाड़ा, शाहीन अखाड़ा, शाहीन गोड़े के अखाड़ों ने शुक्रवार को एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करनामें दिखाकर उपस्थित जनमानस को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। चिलबिला के सभी व्यापारियों ने जुलूस का स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रतापगढ़ की गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखते हुए रामलीला समिति के संरक्षक समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, वरिष्ठ व्यवसायी सुनील अग्रवाल ने सम्मानित कर मोहर्रम के जुलूस चिलबिला अखाड़ा, सोनावा अखाड़ा, शाही अखाड़ा गोड़े के जुलूस को रवाना किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शाहीन अखाड़ा गोड़े के जुलूस को अब्दुल जब्बार की अध्यक्षता में गोड़े से सैकड़ो की संख्या में जुलूस निकाला गया। हैरतअंगेज करनामें दिखाने वाले अखाड़े को शील्ड देकर समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, सुनील अग्रवाल ने सम्मानित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रामलीला समिति के संरक्षक रोशनलाल उमरवैश्य ने कहा कि प्रतापगढ़ जिले की गंगा जमुनी तहजीब आज भी कायम है।हम एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होते आ रहे हैं। सभी अखाड़ों के अध्यक्षों को सम्मानित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शाहीन अखाड़ा गोड़े के अध्यक्ष अब्दुल जब्बार ने कहा कि चिलबिला में हर वर्ष हिंदू भाइयों द्वारा जुलूस का स्वागत कर समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य, सुनील अग्रवाल द्वारा सम्मानित कर रवाना किया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हम उन सब के प्रति आभार ज्ञापित करते हैं। पुलिस प्रशासन का बहुत ही बड़ा सहयोग रहा। इस मौके पर रविंद्र सिंह, छेदीलाल, संतोष कुमार, सुनील अग्रवाल, सूरज, अमन, जमील, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद इमरान, अबरार, पप्पू, मोहम्मद शाहिद, सुफियान, अब्दुल्ला, मोहम्मद इरशाद, अकरम हुसैन, असलम उस्ताद, रियाज आदि सैकड़ो की संख्या में चिलबिला के व्यापारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:45:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन महोत्सव : हरियाली का महापर्व, प्रकृति संरक्षण का राष्ट्रीय संकल्प और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारत की संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने वृक्षों को केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि देवतुल्य स्थान भी दिया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और आंवले जैसे वृक्षों की पूजा की परंपरा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज सदियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता आया है। आधुनिक समय में बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और अनियंत्रित विकास ने वनों के अस्तित्व को गंभीर चुनौती दी है। यही कारण है कि देश में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वन महोत्सव मनाया जाता है। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182280/van-mahotsav-is-a-great-festival-of-greenery-a-national"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas24.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत की संस्कृति में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने वृक्षों को केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि देवतुल्य स्थान भी दिया है। पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और आंवले जैसे वृक्षों की पूजा की परंपरा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय समाज सदियों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता आया है। आधुनिक समय में बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और अनियंत्रित विकास ने वनों के अस्तित्व को गंभीर चुनौती दी है। यही कारण है कि देश में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वन महोत्सव मनाया जाता है। यह केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का उत्सव है। इसका उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना, वनों के महत्व को समझाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण का निर्माण करना है।</div>
<div>वन महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1950 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल के. एम.मुंशी ने की थी। उनका मानना था कि यदि भारत को प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध बनाना है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है, तो जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करना होगा। तभी से यह अभियान पूरे देश में एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। आज स्कूलों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और ग्राम पंचायतों से लेकर शहरों तक लाखों लोग इस अभियान में भाग लेकर पौधे लगाते हैं और उनके संरक्षण का संकल्प लेते हैं।</div>
<div>वन केवल पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि पृथ्वी पर जीवन के सबसे बड़े आधार हैं। यदि वन न हों तो मानव सभ्यता का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा। वन हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिसे हम प्रत्येक क्षण सांस के रूप में ग्रहण करते हैं। यही वन वातावरण में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन की गति को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बढ़ते वैश्विक तापमान, हीट वेव और असामान्य मौसम की घटनाओं के बीच वन पृथ्वी के प्राकृतिक वातानुकूलक के रूप में कार्य करते हैं। वे वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं, मिट्टी की नमी बनाए रखते हैं और नदियों, तालाबों तथा भूजल स्रोतों को जीवित रखने में सहायता करते हैं।</div>
<div>वनों का आर्थिक महत्व भी अत्यंत व्यापक है। देश की करोड़ों आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वनों पर निर्भर है। लकड़ी, औषधीय पौधे, फल, गोंद, शहद, लाख, बांस तथा अनेक वन उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। भारत की आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में प्रयुक्त अधिकांश जड़ी-बूटियां वनों से ही प्राप्त होती हैं। वन पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। वन अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास हैं। यदि वन नष्ट होंगे तो जैव विविधता भी समाप्त होने लगेगी और अनेक दुर्लभ जीव-जन्तियां हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएंगी।</div>
<div>लेकिन दुर्भाग्य से विकास की अंधी दौड़ में वनों की लगातार कटाई हो रही है। सड़क निर्माण, औद्योगिक परियोजनाएं, खनन, अवैध लकड़ी कटाई और अनियोजित शहरी विस्तार के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में वृक्ष समाप्त हो रहे हैं। इसका दुष्परिणाम आज पूरी दुनिया भुगत रही है। तापमान लगातार बढ़ रहा है, वर्षा का स्वरूप बदल रहा है, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएं अधिक विनाशकारी होती जा रही हैं। मिट्टी का कटाव बढ़ने से कृषि भूमि की उर्वरता कम हो रही है। भूजल स्तर नीचे जा रहा है और अनेक क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। वनों के नष्ट होने से वन्यजीव मानव बस्तियों की ओर आने को विवश हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ रहा है।</div>
<div>वनों की कमी का सबसे बड़ा प्रभाव पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ता है। यदि वृक्ष कम होंगे तो वायु में प्रदूषण बढ़ेगा, ऑक्सीजन का स्तर घटेगा और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती जाएगी। इससे जलवायु परिवर्तन और अधिक गंभीर होगा। आज महानगरों में बढ़ता प्रदूषण, असहनीय गर्मी और स्वच्छ हवा का संकट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हमने प्रकृति के साथ संतुलन खो दिया है। इसलिए वन महोत्सव केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ टूटते संबंधों को फिर से जोड़ने का प्रयास है।</div>
<div>वन महोत्सव मनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों में यह भावना विकसित करना है कि केवल एक दिन पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। जब तक पौधा एक मजबूत वृक्ष नहीं बन जाता, तब तक उसकी सुरक्षा, सिंचाई और संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। यदि लगाए गए पौधे जीवित नहीं रहेंगे तो वृक्षारोपण अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। इसी सोच के साथ अब विभिन्न राज्यों में जियो टैगिंग, निगरानी और जनभागीदारी पर विशेष बल दिया जा रहा है ताकि लगाए गए पौधों की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित की जा सके।</div>
<div>हाल के वर्षों में "एक पेड़ मां के नाम" जैसे अभियान ने वन महोत्सव को एक भावनात्मक स्वरूप भी दिया है। जब कोई व्यक्ति अपनी मां के सम्मान में पौधा लगाता है, तो वह केवल पर्यावरण की सेवा नहीं करता, बल्कि उस पौधे से जीवनभर का भावनात्मक रिश्ता भी जोड़ लेता है। इसी प्रकार कई राज्य सरकारें मुफ्त पौधों का वितरण, वृक्ष रथ, हरित अभियान और जनसहभागिता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ रही हैं। दिल्ली सरकार द्वारा शुरू किया गया "ट्री ऑन व्हील" अभियान इसी दिशा में एक अभिनव पहल है, जिसके माध्यम से पौधे लोगों के घरों तक पहुंचाए जा रहे हैं ताकि वृक्षारोपण को और अधिक सरल तथा व्यापक बनाया जा सके।</div>
<div>पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से वन महोत्सव अत्यंत अनुकूल और आवश्यक अभियान है। यह लोगों को केवल पौधे लगाने के लिए प्रेरित नहीं करता, बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी देता है। एक विकसित राष्ट्र वही होता है जो आर्थिक प्रगति के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का भी संरक्षण करे। यदि विकास के नाम पर केवल कंक्रीट के जंगल खड़े किए जाएंगे और प्राकृतिक जंगल समाप्त कर दिए जाएंगे, तो भविष्य में मानव जीवन स्वयं संकट में पड़ जाएगा। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</div>
<div>आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वन महोत्सव जैसे अभियान पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। यदि देश का प्रत्येक नागरिक हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखे, तो करोड़ों नए वृक्ष देश की हरियाली को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इससे स्वच्छ हवा, पर्याप्त वर्षा, जैव विविधता का संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।</div>
<div>अंततः, वन महोत्सव केवल एक सप्ताह का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनभर निभाए जाने वाला संकल्प है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव सभ्यता का संरक्षण है। यदि हम आज वृक्षों को बचाएंगे और नए वृक्ष लगाएंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, निर्मल जल, संतुलित जलवायु और समृद्ध प्राकृतिक धरोहर मिल सकेगी। इसलिए आइए, वन महोत्सव को केवल उत्सव न मानकर जनआंदोलन बनाएं और एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जहां हरियाली ही समृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की पहचान बने।</div>
<div>           *कांतिलाल मांडोत*</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:50:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पचदेवरा के प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार का हुआ भूमिपूजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पचदेवरा स्थित प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत 1 करोड़ 80 लाख रुपये की परियोजना का शनिवार को विधि-विधान के साथ भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद प्रवीण पटेल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। पचदेवरा का यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मंदिर का स्वरूप और</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182278/bhoomipujan-for-the-renovation-of-the-ancient-temple-of-pachdevra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260627-wa01141.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पचदेवरा स्थित प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत 1 करोड़ 80 लाख रुपये की परियोजना का शनिवार को विधि-विधान के साथ भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद प्रवीण पटेल ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। पचदेवरा का यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद मंदिर का स्वरूप और अधिक भव्य एवं आकर्षक होगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वीकृत धनराशि से मंदिर के जीर्णोद्धार, परिसर के सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, मार्ग एवं अन्य आवश्यक विकास कार्य कराए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भूमिपूजन कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पर्यटन विभाग के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन, ग्राम प्रधान, क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में मंदिर परिसर में सुख-समृद्धि एवं क्षेत्र के विकास की कामना के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई। स्थानीय लोगों ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सरकार एवं जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल बताया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:37:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम, कलाकारों ने बांधा समां</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  विश्व संगीत दिवस के अवसर पर रविवार सायंकाल प्रयाग संगीत समिति के मेहता प्रेक्षागृह में शिव शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में लोक-संस्कृति आधारित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकगीत, लोकनृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी प्रयागराज की धर्मपत्नी डॉ. अंकिता राज उपस्थित रहीं। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि लोक-संस्कृति हमारी समृद्ध विरासत है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।कार्यक्रम में मोहनी श्रीवास्तव, शिखा</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182082/artists-enthrall-folk-cultural-presentations"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260624-wa0107.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> विश्व संगीत दिवस के अवसर पर रविवार सायंकाल प्रयाग संगीत समिति के मेहता प्रेक्षागृह में शिव शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में लोक-संस्कृति आधारित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकगीत, लोकनृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी प्रयागराज की धर्मपत्नी डॉ. अंकिता राज उपस्थित रहीं। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि लोक-संस्कृति हमारी समृद्ध विरासत है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।कार्यक्रम में मोहनी श्रीवास्तव, शिखा सिंह, रागिनी श्रीवास्तव, पूर्णिमा गौड़, पूर्वी मिश्रा, यशी यादव, निधि कुशवाहा, आंचल कुशवाहा, शिल्पा कुशवाहा, शीलू द्विवेदी, प्रियंका अग्रहरि, खुशी आर्य, श्रद्धा श्रीवास्तव, अनूपा मिश्रा एवं रंजना त्रिपाठी सहित अनेक कलाकारों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रेक्षागृह में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। विश्व संगीत दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम लोक-संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुआ।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:47:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज में विश्व संगीत दिवस पर लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयाग संगीत समिति के मेहता प्रेक्षा गृह में रविवार सायंकाल विश्व संगीत दिवस के अवसर पर शिव शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में लोक-संस्कृति परक भव्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी प्रयागराज की धर्मपत्नी डॉ. अंकिता राज की उपस्थिति रही।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. अंकिता राज ने छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए प्रयागराज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने हेतु हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने संस्था के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181991/folk-cultural-presentations-on-world-music-day-in-prayagraj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260622-wa0086.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयाग संगीत समिति के मेहता प्रेक्षा गृह में रविवार सायंकाल विश्व संगीत दिवस के अवसर पर शिव शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में लोक-संस्कृति परक भव्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी प्रयागराज की धर्मपत्नी डॉ. अंकिता राज की उपस्थिति रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. अंकिता राज ने छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए प्रयागराज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने हेतु हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने संस्था के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर डी पी ओ प्रयागराज सर्वजीत सिंह,सचिव  प्रयाग संगीत समिति   अरुण  एवं राजकीय बाल शिशु गृह की अधीक्षक डॉ. प्रज्ञा सिंह सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। राजकीय बाल शिशु गृह के बच्चों ने श्री सूरज के निर्देशन में ईश्वर वंदना प्रस्तुत की। इसके पश्चात चैती और कजरी की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यंजना आर्ट एंड कल्चरल सोसायटी द्वारा शांभवी शुक्ला के निर्देशन में कथक नृत्य “जय जय जननी” एवं मीरा के भजनों पर आधारित सुंदर प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं ‘शुरुआत’ संस्था के अंतर्गत श्री अभिषेक शुक्ला के निर्देशन में कार्यशाला में प्रशिक्षित बच्चों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से सभी का मन जीत लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोक गायिका मोहिनी श्रीवास्तव ने “तोहरो बालम कप्तान हो” की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया, जबकि शुभ्रा मालवीय द्वारा “राम जी से पूछे जनकपुर की नारी” की भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरस्वती संगीतालय  के निदेशक  चंद्रकांत मालवीय के निर्देशन में छात्र-छात्राओं ने भी आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन प्रियांशु श्रीवास्तव एवं श्वेता श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर संस्था के निदेशक श्लोक रंजन श्रीवास्तव, अलीशा फिलिप्स , सविनय श्रीवास्तव ,‘शुरुआत’ संस्था के निदेशक अभिषेक शुक्ला, मिथिलेश राही सहित शिव शक्ति फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंत में संस्था की संरक्षिका डॉक्टर मधु रानी शुक्ला ने समस्त अतिथियों का आभार व्यक्त किया एवं संयोजक अमित श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, दर्शकों एवं प्रशिक्षकों का सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए बताया कि शिव शक्ति फाउंडेशन का उद्देश्य प्रतिभाशाली बच्चों को मंच प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन करना है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:01:54 +0530</pubDate>
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