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                <title>सामाजिक समरसता - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सामाजिक समरसता RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अंबेडकर जयंती धूमधाम के साथ  मनाई गई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर / </strong>बिस्कोहार क्षेत्र के  ग्राम पंचायत नावडीह में बाबा साहेब  डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती बड़े  ही  धूमधाम के साथ मनाई गई  । हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा साहेब की  झांकी निकाल कर पूरे नगर का  भ्रमण कराया  गया, इस दौरान  बाबा साहेब  का नारा लगाते हुए उनके कार्य शैली का उद्बोधन करते हुए गरीबों के मसीहा से जाने जाते है गांव में  झांकी का भ्रमण कराते  हुए सिंगारजोत  के लिए निकला।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिसमें गांव की माता, बहनें,बच्चे और बूढ़े, नौजवान  ट्रैक्टर ट्राली, दो पहिया वाहन सभी लोगों ने नगर व क्षेत्र भ्रमण करने के लिए सिकंदरपुर,दखिनहवा  सिंगारजोत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176167/ambedkar-jayanti-celebrated-with-pomp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1776174711973.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर / </strong>बिस्कोहार क्षेत्र के  ग्राम पंचायत नावडीह में बाबा साहेब  डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती बड़े  ही  धूमधाम के साथ मनाई गई  । हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बाबा साहेब की  झांकी निकाल कर पूरे नगर का  भ्रमण कराया  गया, इस दौरान  बाबा साहेब  का नारा लगाते हुए उनके कार्य शैली का उद्बोधन करते हुए गरीबों के मसीहा से जाने जाते है गांव में  झांकी का भ्रमण कराते  हुए सिंगारजोत  के लिए निकला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिसमें गांव की माता, बहनें,बच्चे और बूढ़े, नौजवान  ट्रैक्टर ट्राली, दो पहिया वाहन सभी लोगों ने नगर व क्षेत्र भ्रमण करने के लिए सिकंदरपुर,दखिनहवा  सिंगारजोत होते हुए पुनः नावडीह  गांव वापस आए ।जिसमें  ग्राम वासियों के तरफ से शाम को बड़े हर्ष उल्लास के साथ बाबा  साहेब  के जन्म दिन पर केक काट कर जन्म दिन मनाया गया। इस मौके पर झीन सोनी, संतराम गौतम, कोषाध्यक्ष ,नानमुनु गौतम  , संतोष गौतम अध्यक्ष,गोकरण गौतम, कनिक राम गौतम, गोली गौतम,खदेरू गौतम , चिंकू चौधरी, आकाश गुप्ता, भगवत गौतम, परशुराम गौतम, चंद्रभान गौतम, लल्लू गौतम, पूजा गौतम, बहाऊ गौतम, सुग्रीव गौतम, रामफेर गौतम, बुध सागर गौतम, घिराऊ गौतम, नन्द किशोर, राम अच्छैबर चौधरी,अवधेश कुमार, इजहार, मिठ्ठू प्रजापति, दीपक कुमार गौतम रंजीत कुमार, राकेश कुमार, चेतराम गौतम आदि लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 19:57:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेठी में भाजपा द्वारा स्वच्छता अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> संगठन के निर्देशानुसार भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला के नेतृत्व में जनपद अमेठी के ग्राम सराय खेमा में स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई कर वातावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तत्पश्चात बाबा साहब की प्रतिमा का दूध से अभिषेक कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बाबा साहब के जीवन, संघर्ष और उनके द्वारा देश को दिए गए संविधान की महत्ता पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176034/cleanliness-campaign-by-bjp-in-amethi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/3-4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> संगठन के निर्देशानुसार भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला के नेतृत्व में जनपद अमेठी के ग्राम सराय खेमा में स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई कर वातावरण को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तत्पश्चात बाबा साहब की प्रतिमा का दूध से अभिषेक कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बाबा साहब के जीवन, संघर्ष और उनके द्वारा देश को दिए गए संविधान की महत्ता पर प्रकाश डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समाज के वंचित एवं शोषित वर्गों को समान अधिकार दिलाने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।कार्यक्रम में बाबा साहब से जुड़े “पंचतीर्थ” के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की गई तथा केंद्र व प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा उनके सम्मान और विचारों के संरक्षण हेतु किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा बाबा साहब के जीवन से जुड़े स्थलों को विकसित कर नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर स्वच्छता और सामाजिक समरसता का संकल्प लिया तथा बाबा साहब के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:59:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मय हो जीवन हमारा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सनातन संस्कृति में श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक पात्र या धार्मिक प्रतीक मात्र नहीं हैं, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के लिए मर्यादा, आदर्श और मानवीय मूल्यों के शाश्वत स्रोत हैं। जब हम "राममय जीवन" की परिकल्पना करते हैं, तो इसका अर्थ केवल कर्मकांड या नाम-जप तक सीमित नहीं है, अपितु इसका वास्तविक अर्थ अपने विचारों, कर्तव्यों, संबंधों और आचरण में राम के आदर्शों को स्थान देना है। राममय जीवन का तात्पर्य उस सत्य, करुणा, न्याय, समरसता और कर्तव्यपरायणता से युक्त जीवन को जीना है जो दूसरों के लिए भी प्रेरणा का पुंज बन सके।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​श्रीराम का जीवन हमें</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174145/may-our-life-be-blessed-by-ram"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images11.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सनातन संस्कृति में श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक पात्र या धार्मिक प्रतीक मात्र नहीं हैं, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के लिए मर्यादा, आदर्श और मानवीय मूल्यों के शाश्वत स्रोत हैं। जब हम "राममय जीवन" की परिकल्पना करते हैं, तो इसका अर्थ केवल कर्मकांड या नाम-जप तक सीमित नहीं है, अपितु इसका वास्तविक अर्थ अपने विचारों, कर्तव्यों, संबंधों और आचरण में राम के आदर्शों को स्थान देना है। राममय जीवन का तात्पर्य उस सत्य, करुणा, न्याय, समरसता और कर्तव्यपरायणता से युक्त जीवन को जीना है जो दूसरों के लिए भी प्रेरणा का पुंज बन सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, मनुष्य को धर्म और कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। पिता के वचनों की रक्षा हेतु सहर्ष राज्य-त्याग, वनवास के कष्टों के बीच भी मित्रों के प्रति अटूट समर्पण, शत्रुओं के प्रति भी मर्यादित व्यवहार और विपरीत परिस्थितियों में भी संयमित आचरण आदि उनके चरित्र की वे विशेषताएँ हैं जो सिद्ध करती हैं कि मनुष्य को हर स्थिति में नैतिक श्रेष्ठता को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। आज के युग में, जहाँ स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा और नैतिक पतन की चुनौतियाँ प्रबल हैं, वहाँ राममय जीवन की आवश्यकता और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है।​</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस जीवन पद्धति का प्रथम आधार असत्य का परित्याग कर सत्य और शुचिता का वरण करना है। यदि मनुष्य अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सत्य को प्रतिष्ठापित करता है, तो परिवार और राष्ट्र में परस्पर विश्वास का वातावरण निर्मित होता है। वर्तमान दौर में प्रशासन, शिक्षा और राजनीति जैसे तमाम क्षेत्रों में भी इसी राममय दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि नैतिकता और पारदर्शिता की जड़ें मजबूत हो सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही, कर्तव्य और मर्यादा का पालन राममय जीवन का अनिवार्य अंग है। श्रीराम ने राजा होने के बावजूद स्वयं को मर्यादा के बंधन में रखा और लोकहित को सर्वोपरि माना। यही कारण है कि उनके शासन को 'रामराज्य' के रूप में एक आदर्श व्यवस्था माना गया, जिसका अर्थ किसी संकीर्ण मजहबी शासन से नहीं, बल्कि एक ऐसी न्यायपूर्ण, समतामूलक और लोककल्याणकारी व्यवस्था से है जहाँ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी सम्मान और सुरक्षा प्राप्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​राममय जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक समरसता और करुणा है। श्रीराम ने निषादराज को गले लगाकर और शबरी के जूठे बेर खाकर समाज को यह संदेश दिया कि मानवता की सेवा ही सर्वोपरि धर्म है। उन्होंने जाति, वर्ग, भाषा और संप्रदाय की सीमाओं को तोड़कर समावेशी समाज की नींव रखी। आज के खंडित समाज में सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय सद्भाव के लिए यह दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, राममय जीवन संयम और आत्मानुशासन की मांग करता है। श्रीराम ने भौतिक सुखों के बजाय त्याग को चुना, जो हमें सिखाता है कि वास्तविक सफलता आत्मबल और चरित्र की शुचिता से प्राप्त होती है। यदि हम अपने आचरण में राम के इन गुणों को सूक्ष्म रूप में भी स्थान दे सकें, तो व्यक्तिगत सुख और राष्ट्रीय उत्थान का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाएगा।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 17:23:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन एनडीए– सरकार लाओ, झारखंड बचाओ के संकल्प के साथ तेज़ हुई हम(एस) की सक्रियता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग, झारखंड:-</strong> हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) झारखंड द्वारा एनडीए की सरकार लाओ, झारखंड बचाओ के संकल्प के साथ प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों में तेज़ी देखी जा रही है। पार्टी के युवा प्रदेश अध्यक्ष हरे कृष्ण महाराज के नेतृत्व में संगठन लगातार जनसरोकार, सामाजिक समरसता और विकास के मुद्दों को लेकर सक्रिय अभियान चला रहा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को पटना में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन के समक्ष सदस्यता ग्रहण करने के बाद से ही हरे कृष्ण महाराज ने झारखंड की राजनीति में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173492/operation-nda-%E2%80%93-hamass-activity-intensified-with-the-resolve-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/news-32.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग, झारखंड:-</strong> हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) झारखंड द्वारा एनडीए की सरकार लाओ, झारखंड बचाओ के संकल्प के साथ प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों में तेज़ी देखी जा रही है। पार्टी के युवा प्रदेश अध्यक्ष हरे कृष्ण महाराज के नेतृत्व में संगठन लगातार जनसरोकार, सामाजिक समरसता और विकास के मुद्दों को लेकर सक्रिय अभियान चला रहा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को पटना में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन के समक्ष सदस्यता ग्रहण करने के बाद से ही हरे कृष्ण महाराज ने झारखंड की राजनीति में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद 25 जनवरी को रांची के अमलताश, अशोक नगर में आयोजित सदस्यता अभियान के जरिए उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी राज्य में NDA सरकार बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाने को प्रतिबद्ध है। पार्टी द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में जहां सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया गया, वहीं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को सम्मानित कर नारी सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई गई। भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त हरे कृष्ण महाराज अपने अनुशासन और समर्पण के साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाल ही में हजारीबाग में आयोजित दावत-ए-इफ्तार में उनकी सहभागिता को कौमी एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बताया गया। हजारीबाग में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रामनवमी, रमज़ान और होली जैसे सभी पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सम्मान के साथ मनाए जाने चाहिए। उन्होंने समाज में विवादित बयानों से बचते हुए विकास और जनहित के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की। वर्तमान में नई दिल्ली प्रवास के दौरान हरे कृष्ण महाराज ने पार्टी के संस्थापक, केंद्रीय मंत्री एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से शिष्टाचार भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान झारखंड की आगामी राजनीतिक रणनीति, रामनवमी आयोजन, युवा विकास और प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। प्रेस विज्ञप्ति में विश्वास जताया गया कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) झारखंड में युवाओं, महिलाओं और किसानों को साथ लेकर विकासोन्मुख और समावेशी राजनीति की नई दिशा स्थापित करेगा। अंत में कहा गया कि संगठन आने वाले समय में राज्य में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगा और जनकल्याण में अहम भूमिका निभाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 18:43:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय नवसंवत्सर का स्वर्णिम आरंभ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173466/golden-beginning-of-indian-new-year"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindu-new-year-2025.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष भारतीय संस्कृति का वह जीवंत प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल समय के परिवर्तन का संकेत नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन के मूल्यों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का संदेश भी लेकर आता है। जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब यह केवल एक तिथि नहीं रहती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नई शुरुआत का उद्घोष बन जाती है। भारतीय पंचांग के अनुसार यही वह क्षण है जब एक नए संवत्सर का आरंभ होता है और प्रकृति स्वयं नवजीवन के रंगों से भर उठती है। यह नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह केवल गणनात्मक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रकृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खगोल और मानव जीवन के गहरे संबंधों पर आधारित है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का आधार विक्रम संवत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक प्राचीन कालगणना प्रणाली है और आज भी भारत तथा नेपाल के कई भागों में प्रचलित है। यह पंचांग चंद्र और सूर्य दोनों की गति पर आधारित होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे लूनी सोलर कैलेंडर कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए समय-समय पर अतिरिक्त माह अर्थात अधिमास को भी जोड़ता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ऋतुओं और पर्वों का संतुलन बना रहे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारतीय ऋषियों ने समय की गणना को केवल गणित नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन और प्रकृति के समन्वय के रूप में देखा था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह दिन सृष्टि के आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि हिन्दू नववर्ष को केवल सामाजिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन मनुष्य को अपने जीवन की दिशा पर पुनर्विचार करने</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने और आत्मशुद्धि का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2026 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में हिन्दू नववर्ष </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">19 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को प्रारंभ होकर विक्रम संवत </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">2083 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का आरंभ करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक विशेष वर्ष भी माना जा रहा है क्योंकि इसमें अधिमास के कारण </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">13 </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महीने होंगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह तथ्य इस बात को और भी रोचक बनाता है कि भारतीय कालगणना कितनी सूक्ष्म और वैज्ञानिक रही है। यह नववर्ष वसंत ऋतु के आगमन के साथ आता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब प्रकृति में नवपल्लव फूटते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फूल खिलते हैं और वातावरण में एक नई ताजगी का संचार होता है। यह दृश्य स्वयं इस बात का प्रतीक है कि जीवन में परिवर्तन और नवाचार अनिवार्य हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की सांस्कृतिक विविधता इस पर्व में अत्यंत सुंदर रूप से झलकती है। देश के विभिन्न भागों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बंगाल में पोइला बैसाख और सिंधी समाज में चेती चांद।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नाम भले ही अलग हों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु सभी में एक ही भावना निहित है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई शुरुआत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का स्वागत। यही विविधता भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो एकता में अनेकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को भी सुदृढ़ करता है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नए वस्त्र धारण करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार के साथ मिलकर विशेष भोजन का आनंद लेते हैं। घरों को फूलों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आम के पत्तों और रंगोली से सजाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक होता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सब केवल परंपरा नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया भी है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो व्यक्ति को पुराने नकारात्मक अनुभवों को छोड़कर नए सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर्व का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका आध्यात्मिक स्वरूप है। चैत्र नवरात्रि का आरंभ भी इसी दिन से होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। यह साधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्म-अनुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम और आत्मबल को विकसित करने का माध्यम है। उपवास</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ध्यान और जप के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करना सीखता है और जीवन के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल बाहरी उत्सव नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आंतरिक परिवर्तन का भी अवसर है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत होता है। बीते हुए वर्ष की गलतियों और अनुभवों से सीख लेकर हम नए वर्ष में बेहतर निर्णय ले सकते हैं। यह पर्व हमें आशा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और सकारात्मकता का संदेश देता है। यह हमें यह याद दिलाता है कि समय चक्र निरंतर चलता रहता है और हर नया वर्ष हमें स्वयं को सुधारने और आगे बढ़ने का अवसर देता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक समय में जब वैश्वीकरण और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हिन्दू नववर्ष का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है और हमारी पहचान को मजबूत करता है। यह युवा पीढ़ी को यह समझने का अवसर देता है कि हमारी परंपराएं केवल अतीत की धरोहर नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ ही</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा देता है। वसंत ऋतु में शरीर और मन दोनों में एक नई ऊर्जा का संचार होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस समय वातावरण शुद्ध होता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सूर्य की किरणें शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं और जीवन में संतुलन स्थापित करने का अवसर मिलता है। इस प्रकार हिन्दू नववर्ष केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज के डिजिटल युग में भी हिन्दू नववर्ष अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह पर्व नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है और लोग इसे नए उत्साह के साथ मना रहे हैं। यह परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय का उदाहरण है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां प्राचीन मूल्य आधुनिक साधनों के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः हिन्दू नववर्ष एक ऐसा पर्व है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमें जीवन के मूल सिद्धांतों की याद दिलाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">—</span><span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संयम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मकता और निरंतर विकास। यह केवल एक तिथि का परिवर्तन नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर है। जब हम इस दिन नए संकल्प लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह केवल व्यक्तिगत नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति की दिशा में भी एक कदम होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस नववर्ष पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी संस्कृति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंपराओं और मूल्यों को संजोकर रखेंगे और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएंगे। यही हिन्दू नववर्ष का वास्तविक संदेश है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"><span style="font-family:'Times New Roman', serif;"> </span></span><span lang="hi" xml:lang="hi">नवीनता के साथ परंपरा का सम्मान और जीवन में संतुलन का मार्ग। यही वह सवेरा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो केवल एक वर्ष का नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे जीवन का मार्गदर्शन करता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173466/golden-beginning-of-indian-new-year</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:55:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्यापार मंडल नैनी द्वारा होली मिलन समारोह सम्पन्न हुआ </title>
                                    <description><![CDATA[<div>  </div>
<div><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong></div>
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<div>व्यापार मंडल नैनी के तत्वावधान में स्टेशन रोड, नैनी में होली मिलन समारोह, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सहभोज का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।</div>
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<div>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर प्रयागराज उमेश चन्द्र गणेश केसरीवानी जी रहे।</div>
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<div>उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को होली की शुभकामनाएँ देते हुए आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और व्यापारियों की एकता को और मजबूत बनाने का संदेश दिया।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. रीता बहुगुणा जोशी</div>
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<div>(पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री), संजय गुप्ता (महानगर अध्यक्ष, भाजपा), पूजा पाल (विधायक</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172948/holi-milan-ceremony-was-completed-by-trade-board-naini"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260308-wa0260.jpg" alt=""></a><br /><div> </div>
<div><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong></div>
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<div>व्यापार मंडल नैनी के तत्वावधान में स्टेशन रोड, नैनी में होली मिलन समारोह, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सहभोज का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।</div>
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<div>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर प्रयागराज उमेश चन्द्र गणेश केसरीवानी जी रहे।</div>
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<div>उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को होली की शुभकामनाएँ देते हुए आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और व्यापारियों की एकता को और मजबूत बनाने का संदेश दिया।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. रीता बहुगुणा जोशी</div>
<div> </div>
<div>(पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री), संजय गुप्ता (महानगर अध्यक्ष, भाजपा), पूजा पाल (विधायक चायल), अभिलाषा गुप्ता नंदी (पूर्व महापौर प्रयागराज),  सनातनी अखाड़ा), मुरारी लाल अग्रवाल (पूर्व डिप्टी मेयर) तथा पद्म नारायण जायसवाल (अध्यक्ष ए.के. जायसवाल सभा)</div>
<div> </div>
<div>सहित कई गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं होली के गीतों पर रंगारंग कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>"अमित अभिनया म्यूजिकल ग्रुप" द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम ने माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम के आयोजक एवं व्यापार मंडल नैनी के अध्यक्ष राकेश जायसवाल ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता को बढ़ाने का कार्य करते हैं।</div>
<div> </div>
<div>अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने सहभोज का आनंद लिया और कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।</div>
<div> </div>
<div>इस कार्यक्रम में राजीव वर्मा (गुड्डू भाई), हाशिम, घनश्याम जायसवाल, धर्मराज पटेल, राजेश शर्मा,नाजिम खान ,भुवर जायसवाल ,रणजीत सिंह,सुभाष केशरवानी,रणविजय सिंह डब्बू,मोनू जायसवाल,योगेश चौरसिया,पिंटू जैन आदि लोग उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
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<div class="hq gt"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 01:00:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>होली: परिवार, समाज और राष्ट्र का हो लेने का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत उत्सव है। यह ऐसा पर्व है जो व्यक्ति को परिवार से, परिवार को समाज से और समाज को राष्ट्र की व्यापक चेतना से जोड़ देता है। ‘हो लेना’ अर्थात् स्वयं को अहंकार, भेदभाव और संकीर्णताओं से मुक्त कर समष्टि के साथ एकात्म कर लेना।होली इसी भाव की अभिव्यक्ति है।</div>
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<div style="text-align:justify;">परिवार के स्तर पर होली स्नेह, क्षमा और पुनर्संयोजन का पर्व है। वर्षभर की व्यस्तता, मतभेद और मौन इस दिन रंगों में घुलकर समाप्त हो जाते हैं। बड़े-बुजुर्गों के चरणों में गुलाल, बच्चों की खिलखिलाहट,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171876/holi-is-the-festival-of-coming-together-of-family-society"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत उत्सव है। यह ऐसा पर्व है जो व्यक्ति को परिवार से, परिवार को समाज से और समाज को राष्ट्र की व्यापक चेतना से जोड़ देता है। ‘हो लेना’ अर्थात् स्वयं को अहंकार, भेदभाव और संकीर्णताओं से मुक्त कर समष्टि के साथ एकात्म कर लेना।होली इसी भाव की अभिव्यक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार के स्तर पर होली स्नेह, क्षमा और पुनर्संयोजन का पर्व है। वर्षभर की व्यस्तता, मतभेद और मौन इस दिन रंगों में घुलकर समाप्त हो जाते हैं। बड़े-बुजुर्गों के चरणों में गुलाल, बच्चों की खिलखिलाहट, घर-आंगन में गूंजते फाग आदि सब मिलकर पारिवारिक संबंधों में नई ऊष्मा भर देते हैं। होलिका-दहन की अग्नि प्रतीक है कि ईर्ष्या, क्रोध और कटुता जलकर राख हो जाए और परिवार प्रेम के रंग में रंग जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज के स्तर पर होली समानता और समरसता का संदेश देती है। इस दिन रंग जाति, वर्ग, भाषा और आर्थिक भेद नहीं देखते। सब एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।यह व्यवहारिक रूप से सामाजिक समता का पाठ है। लोकगीत, नृत्य, ढोल-नगाड़े और सामूहिक उल्लास समाज को जोड़ते हैं। होली यह सिखाती है कि सामाजिक जीवन में संवाद, हास्य और सहभागिता कितनी आवश्यक है; कठोरता नहीं, बल्कि अपनत्व समाज को मजबूत बनाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्तर पर होली सांस्कृतिक एकता का उत्सव है। विविधताओं से भरे भारत में यह पर्व उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक समान भाव से मनाया जाता है।कहीं फाग, कहीं शिगमो, कहीं रंगपंचमी के रूप में। अलग-अलग परंपराएँ होते हुए भी उत्सव का मूल भाव एक है: आनंद, मेल-मिलाप और नवसृजन। यह सांस्कृतिक एकात्मता ही राष्ट्र की आत्मा है। होली हमें याद दिलाती है कि हमारी विविधता विभाजन नहीं, बल्कि शक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का आध्यात्मिक संकेत भी उतना ही गहरा है। यह ऋतु परिवर्तन का पर्व है।</div>
<div style="text-align:justify;">वसंत के आगमन के साथ जीवन में नई ऊर्जा का संचार। रंग यहाँ केवल बाह्य नहीं, आंतरिक भी हैं</div>
<div style="text-align:justify;">-विवेक,  करुणा, साहस और सत्य के रंग। होलिका-दहन असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है; प्रह्लाद की कथा हमें बताती है कि आस्था और नैतिकता अंततः विजयी होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में होली का संदेश और भी प्रासंगिक है। जब समाज में वैमनस्य, अविश्वास और तनाव बढ़ रहा हो, तब होली हमें ‘हो लेने’ का मार्ग दिखाती है,परिवार के लिए समय निकालने का, समाज के प्रति संवेदनशील होने का और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहने का। यह पर्व हमें संयम, सौहार्द और पर्यावरण-संवेदनशीलता के साथ उत्सव मनाने की प्रेरणा भी देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, होली रंग लगाने का नहीं, रंग बनने का पर्व है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रेम का, एकता का और राष्ट्रभाव का। जब व्यक्ति परिवार में, परिवार समाज में और समाज राष्ट्र में ‘हो’ जाता है, तभी होली अपने पूर्ण अर्थ में साकार होती है। यही होली का शाश्वत संदेश है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 17:51:59 +0530</pubDate>
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