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                <title>Reading Culture - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Reading Culture RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बुद्ध, संत कबीर और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना ही फेडरेशन का उद्देश्य : प्रो. सुमन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/बहादुरगढ़ ।</strong> डॉ. भीमराव आंबेडकर फेडरेशन ऑफ सोशल जस्टिस पंजीकृत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. हंसराज सुमन का हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित ओमैक्स सिटी में फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. फौजी इंडिया ने बहुजन समाज के महानायकों से संबंधित चार पुस्तकों का सेट भेंटकर स्वागत किया। इस अवसर पर कैप्टन अभिषेक, कर्नल ईशान, बलवान सिंह रेढ़ू, अनिल कुमार रेढ़ू, जय भगवान और राजू सहित अन्य लोग मौजूद रहे। डॉ. फौजी इंडिया ने कहा कि उनके कार्यालय में आने वाले प्रत्येक बुद्धिजीवी और आंबेडकरवादी का पुस्तकों का सेट भेंटकर स्वागत किया जाता है। उनका उद्देश्य केवल पुस्तकें उपहार देना नहीं, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183916/the-objective-of-the-federation-is-to-spread-the-ideas"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260721-wa0004-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/बहादुरगढ़ ।</strong> डॉ. भीमराव आंबेडकर फेडरेशन ऑफ सोशल जस्टिस पंजीकृत के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. हंसराज सुमन का हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित ओमैक्स सिटी में फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. फौजी इंडिया ने बहुजन समाज के महानायकों से संबंधित चार पुस्तकों का सेट भेंटकर स्वागत किया। इस अवसर पर कैप्टन अभिषेक, कर्नल ईशान, बलवान सिंह रेढ़ू, अनिल कुमार रेढ़ू, जय भगवान और राजू सहित अन्य लोग मौजूद रहे। डॉ. फौजी इंडिया ने कहा कि उनके कार्यालय में आने वाले प्रत्येक बुद्धिजीवी और आंबेडकरवादी का पुस्तकों का सेट भेंटकर स्वागत किया जाता है। उनका उद्देश्य केवल पुस्तकें उपहार देना नहीं, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इन पुस्तकों को शोकेस या पुस्तकालय की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं पढ़ने और दूसरों को पढ़ने के लिए देने की आवश्यकता है, ताकि युवा पीढ़ी बहुजन महापुरुषों के संघर्ष, विचारों और सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर उन्हें अपने जीवन में उतार सके।उन्होंने बताया कि ओमैक्स सिटी में बहुजन समाज के बुद्धिजीवियों का एक ऐसा मंच तैयार किया गया है, जो जरूरतमंद और गरीब बच्चों की शिक्षा तथा आर्थिक सहायता के लिए निरंतर कार्य करता है।डॉ. फौजी इंडिया ने प्रो. सुमन को 'भारत का संविधान', 'बहुजनों के महानायक एवं समाज सुधारक', 'जाने इतिहास : बाबा साहेब का जीवन संघर्ष' तथा 'बुद्ध धम्म ज्ञान प्रश्नोत्तरी' पुस्तकें भेंट कीं। उन्होंने कहा कि उन्हें अच्छी पुस्तकें पढ़ने का विशेष शौक है और वे ऐसी पुस्तकें चुनकर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं, जिनसे युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुस्तकों का अवलोकन करते हुए प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि 'बहुजनों के महानायक एवं समाज सुधारक' पुस्तक में सम्राट अशोक, संत कबीर, संत रविदास, गुरु घासीदास, महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, झलकारी बाई, डॉ. भीमराव आंबेडकर, माता रमाबाई, शहीद भगत सिंह, शहीद ऊधम सिंह, बिरसा मुंडा, मान्यवर कांशीराम सहित अनेक महापुरुषों के जीवन, संघर्ष और समाजहित में किए गए कार्यों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने 'भारत का संविधान' पुस्तक का उल्लेख करते हुए बताया कि संविधान सभा की पहली बैठक, प्रारूप समिति के गठन, संविधान निर्माण की प्रक्रिया तथा इसे तैयार करने में लगे दो वर्ष, 11 माह और 18 दिन की विस्तृत जानकारी पुस्तक में दी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ भारतीय संविधान विश्व के सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक दस्तावेजों में से एक है।जाने इतिहास : बाबा साहेब का जीवन संघर्ष' पुस्तक के बारे में प्रो. सुमन ने कहा कि इसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर के संघर्ष, विचारों और सामाजिक योगदान को सरल एवं संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं 'बुद्ध धम्म ज्ञान प्रश्नोत्तरी' पुस्तक में भगवान बुद्ध, भारतीय संविधान और बहुजन महापुरुषों से जुड़े प्रश्नोत्तर एवं सामान्य ज्ञान को रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और अंधविश्वास से दूर रहने की प्रेरणा देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर फेडरेशन ऑफ सोशल जस्टिस का मुख्य उद्देश्य भगवान बुद्ध, संत कबीर और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में बहुजन समाज के अनेक महापुरुषों के योगदान को पर्याप्त स्थान नहीं मिला। झलकारी बाई, मातादीन वाल्मीकि, संत गाडगे महाराज, अवंतीबाई लोधी, अहिल्याबाई होल्कर, बिरसा मुंडा और अन्य अनेक विभूतियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के इतिहासकारों और साहित्यकारों द्वारा लिखे गए साहित्य के माध्यम से समाज का वास्तविक इतिहास अब धीरे-धीरे लोगों तक पहुंच रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 22:19:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा विशेष व्याख्यान का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. धीरेन्द्र वर्मा शताब्दी सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. जिसका विषय 'सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' था. मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह थी तथा अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने की. मुख्य अतिथि के रुप में कला संकाय के डीन प्रो. वी. के. राय उपस्थित थे.कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं प्रस्तावना डॉ. दीनानाथ मौर्य ने रखी , कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. संतोष भदौरिया ने किया.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171833/special-lecture-organized-by-allahabad-university-on-the-role-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001619430.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. धीरेन्द्र वर्मा शताब्दी सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. जिसका विषय 'सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' था. मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह थी तथा अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने की. मुख्य अतिथि के रुप में कला संकाय के डीन प्रो. वी. के. राय उपस्थित थे.कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं प्रस्तावना डॉ. दीनानाथ मौर्य ने रखी , कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. संतोष भदौरिया ने किया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने एक परिचयात्मक वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि सं 2024 में प्रेमचंद की जयंती पर 'किताबें कुछ कहना चाहती हैं 'पुस्तकालय की शुरुआत निजी प्रयास से हुई थी। पुस्तकालय का कुशल संचालन शोधार्थियों द्वारा अबाधित रूप से किया जाता रहा है। इस पुस्तकालय में सभी विधाओं की पुस्तकें उपलब्ध हैं। प्रोफेसर भदौरिया ने पुस्तकालय के लिए शुभचिंतक शिक्षकों व विद्यार्थियों का आभार ज्ञापित करने के क्रम में बताया कि प्रो.राजेंद्र कुमार ने पुस्तकालय हेतु किताबें दी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ० सूर्यनारायण सिंह, डॉ० दीनानाथ मौर्य, प्रो.अब्दुल बिस्मिल्लाह, श्री पंकज चतुर्वेदी, श्री असरार गाँधी, श्री संजय पाण्डेय डॉ० जनार्दन आदि ने लाइब्रेरी के लिए बहुमूल्य पुस्तकें तथा मेरे शोध छात्र डॉ० अम्बरीश शुक्ल ने उन्हें सहेजने के लिए आलमारी भेंट की। शोध छात्रा उजाला यादव ने हाल ही में लगभग पांच हजार की नई किताबें भेंट की। प्रदर्शनी सहयोग के लिए प्रोफेसर भदौरिया ने अनु प्रिया , हरिओम कुमार,अभिषेक, धर्मवीर, जगदीश, सोम, रिया, पारस, ज्योति, श्वेता, सृष्टि, पारस के कार्य को सराहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तत्पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय कला संकाय के डीन एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो० वी के राय नेकहा कि दरअसल किताबें जो कहना चाहती हैं और प्रदर्शनी जो कहना चाहती हैं उन दोनों में एक तारतम्यता है। किताबें हमारी सोच को विकसित करने, हमारी काया को अमूर्त से मूर्त रूप देने का कार्य करती हैं। किताबें क्या कहना चाहती हैं इस बात का उत्तर देते हुए वे कहते हैं कि “किताबें कहना चाहती हैं कि यदि तुम मेरे पास आओगे तो मैं तुम्हारे जीवन का दिशा निर्देश करूंगी।” प्रो० वी के राय के अनुसार बड़े सा बड़ा बदलाव लाने में किताबें सक्षम हैं। हमारी सोच में परिवर्तन उसमें क्रांतिकारी भावना लाने का काम भी किताबें करती आ रही हैं। वे अपनी बात को उदाहरण द्वारा पुष्ट करते हुए कहते हैं कि हिंद स्वराज जो 1909 में लिखी गई, उसका स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक प्रभाव पड़ा। इस दृष्टि से पुस्तकें संप्रेषण का सबसे सशक्त माध्यम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेष व्याख्यान की मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि समाज के बदलाव में किताबों ने बड़ी भूमिका निभाई है। वह सामाजिक परिवर्तन में किताबों की भूमिका एवं महत्व पर अपनी राय रखते हुए कहती हैं कि निश्चित ही इस सामाजिक परिवर्तन के युग में किताबें नए रूप में आएंगी। प्रो.अर्चना 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की बात करते हुए कहती हैं कि उस समय किताबें तो एक छोटा समुदाय ही लिख रहा था परन्तु एक बड़ा तबका किताबों को पढ़ रहा था। जिससे सामाजिक चेतना के साथ- साथ अस्मिता और आकांक्षा का निर्माण हो रहा था। लेखक इतिहास से प्रतीक को लेकर किताबों में उसे नए अर्थ में प्रयोग कर रहा था। उस समय पाठक पुस्तक की समीक्षा भी करते थे और एक समृद्ध बहस भी होती थी जिससे नया क्रिएशन होता था। उस समय अंबेडकर जो लिख रहे थे उसका निचले तबके तक पहुंच बनाने के लिए अनुवाद किया जा रहा था.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किताबों द्वारा अस्मिता निर्माण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक ओर आंबेडकर के विचारों को ट्रांसलेट किया जा रहा था तो दूसरी ओर हमारी अस्मिता के लिए भी लिखा जा रहा था। भारतीय समाज में स्त्री विमर्श से संबंधित कई पुस्तकें लिखी गई.महादेवी वर्मा से लेकर आज तक। हमारे समाज में किताबों ने लोगों के सपनो को जगाया है। सामाजिक परिवर्तन डिजिटलाइजेशन और बाज़ार से भी  हुआ है उसमें किताबों पर बाजार से उतना खतरा नहीं है। गाजीपुर और आजमगढ़ में पुस्तक मेला लगता है तो पाठक किताबों को छूते है जो उनके अंदर क्यूरियोसिटी जगाते हैं। जिस समाज में सेक्सुअलिटी जैसे विषयों पर बातचीत नहीं होती उसको भी अपना विषय बनाती हैं। पढ़ने की संस्कृति पुस्तक पुस्तिकाओं की समाज में हमेशा जरूरत बनी रहेंगी। किताबें कभी अप्रासंगिक नहीं होती हैं, वे नए रूप में हमारे सामने आती रहेंगी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रोफेसर लालसा यादव ने किताबों के महत्व को प्रतिपादित किया। वे कहती हैं कि - 'पढ़ते समय हो सकता है किताबें बोझिल लगेंगी लेकिन अंततः किताबें आपको सुकून देती हैं, आपकी भाषा को समृद्ध करती हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि कई बार विद्यार्थी ज्ञान होते हुए भी उत्तर देने में सक्षम नहीं होते हैं, कारण यह कि ज्ञान को वे संयोजित नहीं कर पा रहे हैं। किताबें पढ़ने से बातों को संयोजित करने का गुण आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विशेष रुप से विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव, जी बी पंत संस्थान से प्रो. अर्चना सिंह, संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया,प्रो. शिव प्रसाद शुक्ल प्रो. कल्पना वर्मा, प्रो. राकेश सिंह,प्रो राजेश गर्ग,श्री प्रवीण शेखर, श्री संजय पाण्डेय डॉ. दीनानाथ मौर्य, डॉ. अमितेश कुमार,डॉ. जनार्दन सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:11:08 +0530</pubDate>
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