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                <title>इलाहाबाद विश्वविद्यालय - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>इलाहाबाद विश्वविद्यालय RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>देवनहरी के अमन पाल बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, बढ़ाया प्रयागराज का  मान </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">थरवई थाना क्षेत्र के देवनहरी गांव के होनहार युवा अमन पाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रयागराज जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, क्षेत्र और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और परिचितों ने अमन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">देवनहरी गांव निवासी अमन पाल ऐसे परिवार से आते हैं, जहां बचपन से ही देशसेवा और अनुशासन का वातावरण रहा है। उनके पिता महाराजदीन पाल पुलिस विभाग में घुड़सवार पुलिस</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181380/aman-pal-of-devnahari-became-lieutenant-in-indian-army-increased"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0087.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">थरवई थाना क्षेत्र के देवनहरी गांव के होनहार युवा अमन पाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रयागराज जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, क्षेत्र और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और परिचितों ने अमन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देवनहरी गांव निवासी अमन पाल ऐसे परिवार से आते हैं, जहां बचपन से ही देशसेवा और अनुशासन का वातावरण रहा है। उनके पिता महाराजदीन पाल पुलिस विभाग में घुड़सवार पुलिस के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुनीता पाल गृहणी हैं। वहीं उनके चाचा बाबादीन पाल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परिवार के सदस्यों की राष्ट्रसेवा से प्रेरित होकर अमन ने भी सेना में अधिकारी बनने का सपना देखा और उसे साकार कर दिखाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन पाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में प्राप्त की। बचपन से ही वे पढ़ाई में मेधावी और अनुशासित छात्र रहे हैं। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उत्कृष्ट अंकों के साथ उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीएससी में प्रवेश लिया। पढ़ाई के दौरान ही उनका लक्ष्य भारतीय सेना में अधिकारी बनने का था और उन्होंने इस दिशा में लगातार मेहनत जारी रखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीएससी द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत रहते हुए अमन ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। एनडीए में चयन के बाद उन्होंने कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपनी योग्यता, परिश्रम तथा दृढ़ संकल्प के बल पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद हासिल करने में सफलता प्राप्त की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन बताते हैं कि उनके पिता की तैनाती पुलिस लाइन में होने के कारण उनका बचपन कैंट क्षेत्र के वातावरण में बीता। वहां सेना के अधिकारियों की कार्यशैली, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को देखकर उनके मन में भी सेना में अधिकारी बनने की प्रेरणा जगी। यही प्रेरणा आगे चलकर उनके जीवन का लक्ष्य बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपनी सफलता पर अमन पाल ने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और शिक्षकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से भी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन की इस उपलब्धि से देवनहरी गांव में हर्ष व्याप्त है। ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने इसे पूरे इलाके के लिए गौरव  बताया है। लोगों का कहना है कि अमन की सफलता से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी देशसेवा और उच्च पदों पर पहुंचने की प्रेरणा मिलेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत और हिंदी प्रेम कामिल बुल्के के चिंतन का केंद्रीय भाव रहा : नीला प्रसाद </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>दया शंकर त्रिपाठी</strong></span>  </p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आज अपने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरा छात्र की स्मृति में प्रथम फादर बुल्के व्याख्यान का आयोजन हिंदी विभाग के सत्यप्रकाश मिश्र सभा कक्ष में किया गया.हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी विभाग के लिए यह गौरव और गर्व का क्षण है कि हम अपने विभाग के महानतम पुरा छात्र को याद कर रहे हैं . उनकी स्मृति को स्थाई करने के लिए विभाग में स्थापित होने वाली वीथिका की अनुमति प्रदान करने के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180376/love-for-india-and-hindi-was-the-central-idea-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260531-wa0127.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>दया शंकर त्रिपाठी</strong></span> </p>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आज अपने अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरा छात्र की स्मृति में प्रथम फादर बुल्के व्याख्यान का आयोजन हिंदी विभाग के सत्यप्रकाश मिश्र सभा कक्ष में किया गया.हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी विभाग के लिए यह गौरव और गर्व का क्षण है कि हम अपने विभाग के महानतम पुरा छात्र को याद कर रहे हैं . उनकी स्मृति को स्थाई करने के लिए विभाग में स्थापित होने वाली वीथिका की अनुमति प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव जी का सम्पूर्ण विभाग की ओर से आभार ज्ञापित करते हैं.इस अवसर पर आप सभी का हार्दिक स्वागत करते हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">हिंदी की सुपरिचित कथाकार नीला प्रसाद ने अपने व्याख्यान में फ़ादर कामिल बुल्के के जीवन-संघर्ष का विस्तृत उल्लेख किया। उनके हिंदी प्रेम, भारत प्रेम और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रति असीम लगाव को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि कामिल बुल्के ईसाई आध्यात्मिक साहित्य और हिंदी साहित्य के प्रति पुल की तरह थे। वे मानते थे कि हिंदी राष्ट्रीय एकता और समन्वय के लिए सबसे महत्वपूर्ण भाषा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि फ़ादर बुल्के साहित्यिक साधना को अपनी आध्यात्मिक साधना का हिस्सा मानते थे। हिंदी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ॰ धीरेन्द्र वर्मा को वे अपना प्रेरणा स्रोत मानते थे।इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिन्दी में शोध प्रबंध प्रस्तुत करने वाले वे पहले शोध छात्र रहे हैं.तत्कालीन कुलपति प्रो॰ अमरनाथ झा ने उनके लिए शोध-प्रबंध को हिंदी में प्रस्तुत करने के लिए नियम में बदलाव किया।</p>
<p style="text-align:justify;">फादर कामिल बुल्के रामकथा के विकास पर जीवन भर शोधकार्य करते रहे। यहाँ से मुक्त होने के बाद भी वे विभाग के शिक्षकों के निरंतर संपर्क में बने रहे। ईसा, तुलसी और रामकथा उनके साहित्य चिंतन एवं लेखन के केंद्र में थे।हिंदी कोश (अंग्रेजी-हिन्दी कोश) के निर्माण में डॉ.दिनेश्वर प्रसाद का उल्लेखनीय सहयोग रहा । उनमें सभी धर्मों के प्रति सम्मान भाव था। वे पारिवारिक और निजी रिश्तों को धर्म के दायरे से ऊपर उठकर महत्व देते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. प्रणय कृष्ण ने की.।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि गैर - सनातन परंपराओं ने रामकथा को कैसे ग्रहण किया - यह फ़ादर कामिल बुल्के अपने 'रामकथा' सम्बन्धी शोध में दिखाते हैं। डॉ॰ लोहिया ने भारत माता की संकल्पना में - राम का चरित्र, कृष्ण का हृदय, शिव का मस्तिष्क चाहा था.उन्होंने कहा कि न रामकथा एक है, न तुलसी। परंपराओं की बहुलता होती है। सारी परंपराओं को एक रंग में रंगने का प्रयास उचित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">धन्यवाद ज्ञापन करते हुए हिंदी विभाग के प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि यह खेद प्रकट करने का अवसर भी है कि अपने विभाग के इतने ख्यातिलब्ध पुराछात्र को पहले क्यों नहीं याद कर सके? विस्मृति के इस दौर में विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रतिष्ठित पुराछात्रों को, उनके योगदान को याद करना हमारा एक जरूरी कार्यभार होना चाहिए । फ़ादर कामिल बुल्के का भारत के गाँवों और जनपदीय बोलियों (लोक भाषाओं) से गहरा प्रेम था।उन्होंने कहा कि स्मृतियों से इतिहास बनता है। स्मृतियों को संरक्षित करना इतिहास लेखन के लिए ज़रूरी है।विभाग के हिंदी परिषद प्रकाशन से उनके पत्र, उनपर लिखे गये संस्मरण को प्रकाशित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्त में डॉ. सूर्यनारायण ने विभाग से प्रकाशित होने वाली पत्रिका का एक अंक फादर कामिल बुल्के पर केंद्रित करके निकालने का प्रस्ताव रखा.</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम का कुशल संचालन फादर कामिल बुल्के स्मृति वीथिका समिति के संयोजक प्रो. कुमार बीरेंद्र ने किया. अतिथियों का स्वागत प्रो.भूरेलाल ने किया.</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य रुप से अधिष्ठाता महाविद्यालय विकास प्रो. अजय जैतली, प्रो. हैरम्ब चतुर्वेदी, प्रो. अनीता गोपेश,प्रो चन्दा देवी,हरीशचंद्र पाण्डे, असरार गाँधी, प्रियदर्शन मालवीय, प्रो. शिवप्रसाद शुक्ला, प्रो. राकेश सिंह, प्रो. सरोज सिंह,आनंद मालवीय, प्रवीण शेखर, प्रो. बसंत त्रिपाठी, मनोज पाण्डेय, डॉ. मीना कुमारी, डॉ. जनार्दन, डॉ. प्रेमशंकर, रूपम मिश्र, डॉ. दीनानाथ, डॉ. सुजीत कुमार सिंह,डॉ. सुरभि त्रिपाठी,डॉ बृजेश यादव, डॉ. अमितेश कुमार, डॉ. लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता, डॉ. संतोष कुमार सिंह, प्रतिमा सिंह, शिवांगी गोयल सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 21:26:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ सैन्य गरिमा एवं राष्ट्रभक्ति के साथ आयोजित।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>15 यूपी बटालियन एनसीसी प्रयागराज के तत्वावधान में “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ चार दिवसीय कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत अत्यंत उत्साह, सैन्य अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। बटालियन मुख्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में एनसीसी कैडेट्स, एएनओ, पीआई स्टाफ तथा समस्त कॉम्बैटेंट एवं नॉन-कॉम्बैटेंट स्टाफ ने पूर्ण समर्पण एवं राष्ट्रीय गौरव के साथ सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए निर्दोष नागरिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पर्यटकों एवं निहत्थे नागरिकों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178639/first-anniversary-of-%E2%80%9Coperation-sindoor%E2%80%9D-organized-with-military-dignity-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260508-wa0123.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>15 यूपी बटालियन एनसीसी प्रयागराज के तत्वावधान में “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ चार दिवसीय कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत अत्यंत उत्साह, सैन्य अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। बटालियन मुख्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में एनसीसी कैडेट्स, एएनओ, पीआई स्टाफ तथा समस्त कॉम्बैटेंट एवं नॉन-कॉम्बैटेंट स्टाफ ने पूर्ण समर्पण एवं राष्ट्रीय गौरव के साथ सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए निर्दोष नागरिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पर्यटकों एवं निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाकर एक वीभत्स आतंकी हमला किया गया था, जिसमें अनेक भारतीय न शहीदों की पुण्य स्मृति, दिवंगत आत्माओं की शांति तथा राष्ट्र की सुख- समृद्धि हेतु बटालियन परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य हवन-पूजन का आयोजन किया गया। उपस्थित कैडेट्स एवं स्टाफ ने राष्ट्र की सुरक्षा, एकता एवं शांति के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी प्रयागराज की कमान अधिकारी कर्नल ऋतु श्रीवास्तव ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” भारतीय सैन्य शक्ति, साहस एवं राष्ट्र की अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व, साहस एवं राष्ट्रसेवा की भावना को जीवन में आत्मसात करने हेतु प्रेरित किया तथा कहा कि एनसीसी राष्ट्र निर्माण की वह सशक्त धारा है, जो युवाओं में कर्तव्यनिष्ठा एवं देशभक्ति का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंतर्गत चित्रकला एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय, नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय, नेशनल इंटर कॉलेज हंडिया , हंडिया पी जी कॉलेज एवं गोमती इण्टर कॉलेज फूलपुर के कैडेट्स एवं एएनओ ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, वीर सैनिकों के पराक्रम एवं मातृभूमि के प्रति समर्पण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कर्नल ऋतु श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों की रचनात्मक प्रतिभा एवं उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि एनसीसी केवल प्रशिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के प्रति समर्पित, अनुशासित एवं उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण का सशक्त मंच है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 20:47:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉ विभा पाण्डेय को पीएचडी की उपाधि मिलने पर हर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर l</strong> गोल्हौरा क्षेत्र के ग्राम ढेढुआ की बेटी डॉ. विभा पाण्डेय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी की लहर है।डॉ. विभा पाण्डेय अवकाश प्राप्त निरीक्षक उत्तर प्रदेश पुलिस  सुधाकर पाण्डेय एवं  वेदमती पाण्डेय की सुपुत्री हैं। उनके भाई प्रभात पाण्डेय सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि बहन प्रतिभा पाण्डेय गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती बालिका विद्या मन्दिर, रायबरेली से इंटरमीडिएट तक प्राप्त की। इसके पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174249/joy-on-dr-vibha-pandey-getting-phd-degree"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1774530893612.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर l</strong> गोल्हौरा क्षेत्र के ग्राम ढेढुआ की बेटी डॉ. विभा पाण्डेय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी की लहर है।डॉ. विभा पाण्डेय अवकाश प्राप्त निरीक्षक उत्तर प्रदेश पुलिस  सुधाकर पाण्डेय एवं  वेदमती पाण्डेय की सुपुत्री हैं। उनके भाई प्रभात पाण्डेय सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि बहन प्रतिभा पाण्डेय गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती बालिका विद्या मन्दिर, रायबरेली से इंटरमीडिएट तक प्राप्त की। इसके पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत स्नातक (बी.म्यूज.) एवं प्रदर्शन कला में परास्नातक (एम.पी.ए.) की उपाधि हासिल की। आगे बढ़ते हुए उन्होंने संगीत विषय में शोध कार्य पूर्ण कर पीएचडी की डिग्री अर्जित की।वर्तमान में डॉ. विभा पाण्डेय वाराणसी में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (संगीत गायन) के पद पर कार्यरत हैं और विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा दे रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीएचडी उपाधि प्राप्ति के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पं. प्रेम कुमार मलिक, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. विशाल जैन सहित अन्य शिक्षाविद उपस्थित रहे। डॉ. विभा पाण्डेय की सफलता पर हरीश कुमार मिश्रा, प्रेम कुमार मिश्रा, राकेश त्रिपाठी, विकास पाण्डेय, जय यादव, गिरजेश मणि, रविकांत पाण्डेय, राकेश त्रिपाठी, शिवानंद पाण्डेय, देवानंद पाण्डेय सहित अनेक लोगों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 19:27:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा विशेष व्याख्यान का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. धीरेन्द्र वर्मा शताब्दी सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. जिसका विषय 'सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' था. मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह थी तथा अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने की. मुख्य अतिथि के रुप में कला संकाय के डीन प्रो. वी. के. राय उपस्थित थे.कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं प्रस्तावना डॉ. दीनानाथ मौर्य ने रखी , कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. संतोष भदौरिया ने किया.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171833/special-lecture-organized-by-allahabad-university-on-the-role-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001619430.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. धीरेन्द्र वर्मा शताब्दी सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. जिसका विषय 'सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' था. मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह थी तथा अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने की. मुख्य अतिथि के रुप में कला संकाय के डीन प्रो. वी. के. राय उपस्थित थे.कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं प्रस्तावना डॉ. दीनानाथ मौर्य ने रखी , कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. संतोष भदौरिया ने किया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने एक परिचयात्मक वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि सं 2024 में प्रेमचंद की जयंती पर 'किताबें कुछ कहना चाहती हैं 'पुस्तकालय की शुरुआत निजी प्रयास से हुई थी। पुस्तकालय का कुशल संचालन शोधार्थियों द्वारा अबाधित रूप से किया जाता रहा है। इस पुस्तकालय में सभी विधाओं की पुस्तकें उपलब्ध हैं। प्रोफेसर भदौरिया ने पुस्तकालय के लिए शुभचिंतक शिक्षकों व विद्यार्थियों का आभार ज्ञापित करने के क्रम में बताया कि प्रो.राजेंद्र कुमार ने पुस्तकालय हेतु किताबें दी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ० सूर्यनारायण सिंह, डॉ० दीनानाथ मौर्य, प्रो.अब्दुल बिस्मिल्लाह, श्री पंकज चतुर्वेदी, श्री असरार गाँधी, श्री संजय पाण्डेय डॉ० जनार्दन आदि ने लाइब्रेरी के लिए बहुमूल्य पुस्तकें तथा मेरे शोध छात्र डॉ० अम्बरीश शुक्ल ने उन्हें सहेजने के लिए आलमारी भेंट की। शोध छात्रा उजाला यादव ने हाल ही में लगभग पांच हजार की नई किताबें भेंट की। प्रदर्शनी सहयोग के लिए प्रोफेसर भदौरिया ने अनु प्रिया , हरिओम कुमार,अभिषेक, धर्मवीर, जगदीश, सोम, रिया, पारस, ज्योति, श्वेता, सृष्टि, पारस के कार्य को सराहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तत्पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय कला संकाय के डीन एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो० वी के राय नेकहा कि दरअसल किताबें जो कहना चाहती हैं और प्रदर्शनी जो कहना चाहती हैं उन दोनों में एक तारतम्यता है। किताबें हमारी सोच को विकसित करने, हमारी काया को अमूर्त से मूर्त रूप देने का कार्य करती हैं। किताबें क्या कहना चाहती हैं इस बात का उत्तर देते हुए वे कहते हैं कि “किताबें कहना चाहती हैं कि यदि तुम मेरे पास आओगे तो मैं तुम्हारे जीवन का दिशा निर्देश करूंगी।” प्रो० वी के राय के अनुसार बड़े सा बड़ा बदलाव लाने में किताबें सक्षम हैं। हमारी सोच में परिवर्तन उसमें क्रांतिकारी भावना लाने का काम भी किताबें करती आ रही हैं। वे अपनी बात को उदाहरण द्वारा पुष्ट करते हुए कहते हैं कि हिंद स्वराज जो 1909 में लिखी गई, उसका स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक प्रभाव पड़ा। इस दृष्टि से पुस्तकें संप्रेषण का सबसे सशक्त माध्यम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेष व्याख्यान की मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि समाज के बदलाव में किताबों ने बड़ी भूमिका निभाई है। वह सामाजिक परिवर्तन में किताबों की भूमिका एवं महत्व पर अपनी राय रखते हुए कहती हैं कि निश्चित ही इस सामाजिक परिवर्तन के युग में किताबें नए रूप में आएंगी। प्रो.अर्चना 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की बात करते हुए कहती हैं कि उस समय किताबें तो एक छोटा समुदाय ही लिख रहा था परन्तु एक बड़ा तबका किताबों को पढ़ रहा था। जिससे सामाजिक चेतना के साथ- साथ अस्मिता और आकांक्षा का निर्माण हो रहा था। लेखक इतिहास से प्रतीक को लेकर किताबों में उसे नए अर्थ में प्रयोग कर रहा था। उस समय पाठक पुस्तक की समीक्षा भी करते थे और एक समृद्ध बहस भी होती थी जिससे नया क्रिएशन होता था। उस समय अंबेडकर जो लिख रहे थे उसका निचले तबके तक पहुंच बनाने के लिए अनुवाद किया जा रहा था.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किताबों द्वारा अस्मिता निर्माण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक ओर आंबेडकर के विचारों को ट्रांसलेट किया जा रहा था तो दूसरी ओर हमारी अस्मिता के लिए भी लिखा जा रहा था। भारतीय समाज में स्त्री विमर्श से संबंधित कई पुस्तकें लिखी गई.महादेवी वर्मा से लेकर आज तक। हमारे समाज में किताबों ने लोगों के सपनो को जगाया है। सामाजिक परिवर्तन डिजिटलाइजेशन और बाज़ार से भी  हुआ है उसमें किताबों पर बाजार से उतना खतरा नहीं है। गाजीपुर और आजमगढ़ में पुस्तक मेला लगता है तो पाठक किताबों को छूते है जो उनके अंदर क्यूरियोसिटी जगाते हैं। जिस समाज में सेक्सुअलिटी जैसे विषयों पर बातचीत नहीं होती उसको भी अपना विषय बनाती हैं। पढ़ने की संस्कृति पुस्तक पुस्तिकाओं की समाज में हमेशा जरूरत बनी रहेंगी। किताबें कभी अप्रासंगिक नहीं होती हैं, वे नए रूप में हमारे सामने आती रहेंगी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रोफेसर लालसा यादव ने किताबों के महत्व को प्रतिपादित किया। वे कहती हैं कि - 'पढ़ते समय हो सकता है किताबें बोझिल लगेंगी लेकिन अंततः किताबें आपको सुकून देती हैं, आपकी भाषा को समृद्ध करती हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि कई बार विद्यार्थी ज्ञान होते हुए भी उत्तर देने में सक्षम नहीं होते हैं, कारण यह कि ज्ञान को वे संयोजित नहीं कर पा रहे हैं। किताबें पढ़ने से बातों को संयोजित करने का गुण आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विशेष रुप से विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव, जी बी पंत संस्थान से प्रो. अर्चना सिंह, संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया,प्रो. शिव प्रसाद शुक्ल प्रो. कल्पना वर्मा, प्रो. राकेश सिंह,प्रो राजेश गर्ग,श्री प्रवीण शेखर, श्री संजय पाण्डेय डॉ. दीनानाथ मौर्य, डॉ. अमितेश कुमार,डॉ. जनार्दन सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:11:08 +0530</pubDate>
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