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                <title>इलाहाबाद विश्वविद्यालय - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>इलाहाबाद विश्वविद्यालय RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ सैन्य गरिमा एवं राष्ट्रभक्ति के साथ आयोजित।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>15 यूपी बटालियन एनसीसी प्रयागराज के तत्वावधान में “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ चार दिवसीय कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत अत्यंत उत्साह, सैन्य अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। बटालियन मुख्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में एनसीसी कैडेट्स, एएनओ, पीआई स्टाफ तथा समस्त कॉम्बैटेंट एवं नॉन-कॉम्बैटेंट स्टाफ ने पूर्ण समर्पण एवं राष्ट्रीय गौरव के साथ सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए निर्दोष नागरिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पर्यटकों एवं निहत्थे नागरिकों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178639/first-anniversary-of-%E2%80%9Coperation-sindoor%E2%80%9D-organized-with-military-dignity-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260508-wa0123.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>15 यूपी बटालियन एनसीसी प्रयागराज के तत्वावधान में “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ चार दिवसीय कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत अत्यंत उत्साह, सैन्य अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई। बटालियन मुख्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में एनसीसी कैडेट्स, एएनओ, पीआई स्टाफ तथा समस्त कॉम्बैटेंट एवं नॉन-कॉम्बैटेंट स्टाफ ने पूर्ण समर्पण एवं राष्ट्रीय गौरव के साथ सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए निर्दोष नागरिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पर्यटकों एवं निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाकर एक वीभत्स आतंकी हमला किया गया था, जिसमें अनेक भारतीय न शहीदों की पुण्य स्मृति, दिवंगत आत्माओं की शांति तथा राष्ट्र की सुख- समृद्धि हेतु बटालियन परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य हवन-पूजन का आयोजन किया गया। उपस्थित कैडेट्स एवं स्टाफ ने राष्ट्र की सुरक्षा, एकता एवं शांति के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">15 यूपी बटालियन एनसीसी प्रयागराज की कमान अधिकारी कर्नल ऋतु श्रीवास्तव ने कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” भारतीय सैन्य शक्ति, साहस एवं राष्ट्र की अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व, साहस एवं राष्ट्रसेवा की भावना को जीवन में आत्मसात करने हेतु प्रेरित किया तथा कहा कि एनसीसी राष्ट्र निर्माण की वह सशक्त धारा है, जो युवाओं में कर्तव्यनिष्ठा एवं देशभक्ति का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंतर्गत चित्रकला एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय, नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय, नेशनल इंटर कॉलेज हंडिया , हंडिया पी जी कॉलेज एवं गोमती इण्टर कॉलेज फूलपुर के कैडेट्स एवं एएनओ ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, वीर सैनिकों के पराक्रम एवं मातृभूमि के प्रति समर्पण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कर्नल ऋतु श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों की रचनात्मक प्रतिभा एवं उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि एनसीसी केवल प्रशिक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के प्रति समर्पित, अनुशासित एवं उत्तरदायी नागरिकों के निर्माण का सशक्त मंच है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 20:47:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉ विभा पाण्डेय को पीएचडी की उपाधि मिलने पर हर्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर l</strong> गोल्हौरा क्षेत्र के ग्राम ढेढुआ की बेटी डॉ. विभा पाण्डेय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी की लहर है।डॉ. विभा पाण्डेय अवकाश प्राप्त निरीक्षक उत्तर प्रदेश पुलिस  सुधाकर पाण्डेय एवं  वेदमती पाण्डेय की सुपुत्री हैं। उनके भाई प्रभात पाण्डेय सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि बहन प्रतिभा पाण्डेय गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती बालिका विद्या मन्दिर, रायबरेली से इंटरमीडिएट तक प्राप्त की। इसके पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174249/joy-on-dr-vibha-pandey-getting-phd-degree"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1774530893612.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर l</strong> गोल्हौरा क्षेत्र के ग्राम ढेढुआ की बेटी डॉ. विभा पाण्डेय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी की लहर है।डॉ. विभा पाण्डेय अवकाश प्राप्त निरीक्षक उत्तर प्रदेश पुलिस  सुधाकर पाण्डेय एवं  वेदमती पाण्डेय की सुपुत्री हैं। उनके भाई प्रभात पाण्डेय सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि बहन प्रतिभा पाण्डेय गोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती बालिका विद्या मन्दिर, रायबरेली से इंटरमीडिएट तक प्राप्त की। इसके पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगीत स्नातक (बी.म्यूज.) एवं प्रदर्शन कला में परास्नातक (एम.पी.ए.) की उपाधि हासिल की। आगे बढ़ते हुए उन्होंने संगीत विषय में शोध कार्य पूर्ण कर पीएचडी की डिग्री अर्जित की।वर्तमान में डॉ. विभा पाण्डेय वाराणसी में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (संगीत गायन) के पद पर कार्यरत हैं और विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा दे रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीएचडी उपाधि प्राप्ति के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संगीत एवं प्रदर्शन कला विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पं. प्रेम कुमार मलिक, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. विशाल जैन सहित अन्य शिक्षाविद उपस्थित रहे। डॉ. विभा पाण्डेय की सफलता पर हरीश कुमार मिश्रा, प्रेम कुमार मिश्रा, राकेश त्रिपाठी, विकास पाण्डेय, जय यादव, गिरजेश मणि, रविकांत पाण्डेय, राकेश त्रिपाठी, शिवानंद पाण्डेय, देवानंद पाण्डेय सहित अनेक लोगों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 19:27:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा विशेष व्याख्यान का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. धीरेन्द्र वर्मा शताब्दी सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. जिसका विषय 'सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' था. मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह थी तथा अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने की. मुख्य अतिथि के रुप में कला संकाय के डीन प्रो. वी. के. राय उपस्थित थे.कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं प्रस्तावना डॉ. दीनानाथ मौर्य ने रखी , कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. संतोष भदौरिया ने किया.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171833/special-lecture-organized-by-allahabad-university-on-the-role-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001619430.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. धीरेन्द्र वर्मा शताब्दी सभागार में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. जिसका विषय 'सामाजिक बदलाव में किताब की भूमिका' था. मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह थी तथा अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव ने की. मुख्य अतिथि के रुप में कला संकाय के डीन प्रो. वी. के. राय उपस्थित थे.कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं प्रस्तावना डॉ. दीनानाथ मौर्य ने रखी , कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. संतोष भदौरिया ने किया.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के प्रारम्भ में संयोजक प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने एक परिचयात्मक वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि सं 2024 में प्रेमचंद की जयंती पर 'किताबें कुछ कहना चाहती हैं 'पुस्तकालय की शुरुआत निजी प्रयास से हुई थी। पुस्तकालय का कुशल संचालन शोधार्थियों द्वारा अबाधित रूप से किया जाता रहा है। इस पुस्तकालय में सभी विधाओं की पुस्तकें उपलब्ध हैं। प्रोफेसर भदौरिया ने पुस्तकालय के लिए शुभचिंतक शिक्षकों व विद्यार्थियों का आभार ज्ञापित करने के क्रम में बताया कि प्रो.राजेंद्र कुमार ने पुस्तकालय हेतु किताबें दी</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ० सूर्यनारायण सिंह, डॉ० दीनानाथ मौर्य, प्रो.अब्दुल बिस्मिल्लाह, श्री पंकज चतुर्वेदी, श्री असरार गाँधी, श्री संजय पाण्डेय डॉ० जनार्दन आदि ने लाइब्रेरी के लिए बहुमूल्य पुस्तकें तथा मेरे शोध छात्र डॉ० अम्बरीश शुक्ल ने उन्हें सहेजने के लिए आलमारी भेंट की। शोध छात्रा उजाला यादव ने हाल ही में लगभग पांच हजार की नई किताबें भेंट की। प्रदर्शनी सहयोग के लिए प्रोफेसर भदौरिया ने अनु प्रिया , हरिओम कुमार,अभिषेक, धर्मवीर, जगदीश, सोम, रिया, पारस, ज्योति, श्वेता, सृष्टि, पारस के कार्य को सराहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तत्पश्चात इलाहाबाद विश्वविद्यालय कला संकाय के डीन एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो० वी के राय नेकहा कि दरअसल किताबें जो कहना चाहती हैं और प्रदर्शनी जो कहना चाहती हैं उन दोनों में एक तारतम्यता है। किताबें हमारी सोच को विकसित करने, हमारी काया को अमूर्त से मूर्त रूप देने का कार्य करती हैं। किताबें क्या कहना चाहती हैं इस बात का उत्तर देते हुए वे कहते हैं कि “किताबें कहना चाहती हैं कि यदि तुम मेरे पास आओगे तो मैं तुम्हारे जीवन का दिशा निर्देश करूंगी।” प्रो० वी के राय के अनुसार बड़े सा बड़ा बदलाव लाने में किताबें सक्षम हैं। हमारी सोच में परिवर्तन उसमें क्रांतिकारी भावना लाने का काम भी किताबें करती आ रही हैं। वे अपनी बात को उदाहरण द्वारा पुष्ट करते हुए कहते हैं कि हिंद स्वराज जो 1909 में लिखी गई, उसका स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक प्रभाव पड़ा। इस दृष्टि से पुस्तकें संप्रेषण का सबसे सशक्त माध्यम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेष व्याख्यान की मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना सिंह ने कहा कि समाज के बदलाव में किताबों ने बड़ी भूमिका निभाई है। वह सामाजिक परिवर्तन में किताबों की भूमिका एवं महत्व पर अपनी राय रखते हुए कहती हैं कि निश्चित ही इस सामाजिक परिवर्तन के युग में किताबें नए रूप में आएंगी। प्रो.अर्चना 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की बात करते हुए कहती हैं कि उस समय किताबें तो एक छोटा समुदाय ही लिख रहा था परन्तु एक बड़ा तबका किताबों को पढ़ रहा था। जिससे सामाजिक चेतना के साथ- साथ अस्मिता और आकांक्षा का निर्माण हो रहा था। लेखक इतिहास से प्रतीक को लेकर किताबों में उसे नए अर्थ में प्रयोग कर रहा था। उस समय पाठक पुस्तक की समीक्षा भी करते थे और एक समृद्ध बहस भी होती थी जिससे नया क्रिएशन होता था। उस समय अंबेडकर जो लिख रहे थे उसका निचले तबके तक पहुंच बनाने के लिए अनुवाद किया जा रहा था.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किताबों द्वारा अस्मिता निर्माण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक ओर आंबेडकर के विचारों को ट्रांसलेट किया जा रहा था तो दूसरी ओर हमारी अस्मिता के लिए भी लिखा जा रहा था। भारतीय समाज में स्त्री विमर्श से संबंधित कई पुस्तकें लिखी गई.महादेवी वर्मा से लेकर आज तक। हमारे समाज में किताबों ने लोगों के सपनो को जगाया है। सामाजिक परिवर्तन डिजिटलाइजेशन और बाज़ार से भी  हुआ है उसमें किताबों पर बाजार से उतना खतरा नहीं है। गाजीपुर और आजमगढ़ में पुस्तक मेला लगता है तो पाठक किताबों को छूते है जो उनके अंदर क्यूरियोसिटी जगाते हैं। जिस समाज में सेक्सुअलिटी जैसे विषयों पर बातचीत नहीं होती उसको भी अपना विषय बनाती हैं। पढ़ने की संस्कृति पुस्तक पुस्तिकाओं की समाज में हमेशा जरूरत बनी रहेंगी। किताबें कभी अप्रासंगिक नहीं होती हैं, वे नए रूप में हमारे सामने आती रहेंगी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रोफेसर लालसा यादव ने किताबों के महत्व को प्रतिपादित किया। वे कहती हैं कि - 'पढ़ते समय हो सकता है किताबें बोझिल लगेंगी लेकिन अंततः किताबें आपको सुकून देती हैं, आपकी भाषा को समृद्ध करती हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि कई बार विद्यार्थी ज्ञान होते हुए भी उत्तर देने में सक्षम नहीं होते हैं, कारण यह कि ज्ञान को वे संयोजित नहीं कर पा रहे हैं। किताबें पढ़ने से बातों को संयोजित करने का गुण आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विशेष रुप से विभाग की अध्यक्ष प्रो. लालसा यादव, जी बी पंत संस्थान से प्रो. अर्चना सिंह, संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया,प्रो. शिव प्रसाद शुक्ल प्रो. कल्पना वर्मा, प्रो. राकेश सिंह,प्रो राजेश गर्ग,श्री प्रवीण शेखर, श्री संजय पाण्डेय डॉ. दीनानाथ मौर्य, डॉ. अमितेश कुमार,डॉ. जनार्दन सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी शामिल रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:11:08 +0530</pubDate>
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