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                <title>महिला प्रेरणा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>महिला प्रेरणा RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी हर काम से नहीं हटती पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
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<div style="text-align:justify;">        </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, मां पुरबिन का परिवार भरा-पूरा है। उनके एक पुत्र संतलाल लोधी हैं, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जबकि उनकी दो बेटियां विवाह के बाद अपने-अपने परिवारों में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार में बहू, दो नाती, दो नातिन और दो पनाती भी हैं। परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं और उनकी देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं, फिर भी मां पुरबिन आत्मनिर्भर जीवन जीना ही पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         बुजुर्ग मां पुरबिन की एक विशेष इच्छा भी है। वह चाहती हैं कि, अपने जीवनकाल में अपने एक अविवाहित नाती का विवाह अपनी आंखों से देखें। यही इच्छा उनके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। वह घर में झाड़ू लगाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य स्वयं करती हैं। पशुओं की देखभाल, गाय-भैंस का दूध निकालना, खैलर चलाकर मट्ठा तैयार करना, गोबर उठाना, चावल साफ करना तथा अपने हाथों से आटा गूंधकर मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाना उनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। उम्र के प्रभाव से उनकी कमर भले ही झुक गई हो, लेकिन उनके हौसले और कार्य करने की क्षमता में आज भी कोई कमी दिखाई नहीं देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        ग्रामीण परिवेश में सादगीपूर्ण जीवन, नियमित शारीरिक श्रम और अनुशासित दिनचर्या को ही वह अपनी अच्छी सेहत का राज मानती हैं। उनका कहना है कि, शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए लगातार काम करना जरूरी है। यही कारण है कि, परिवार के मना करने के बावजूद वह स्वयं अपने काम करना पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन बताती हैं कि, उनका बेटा ग्राम प्रधान होने के नाते उन्हें आराम करने की सलाह देता है, लेकिन वह मानती हैं कि, निष्क्रियता शरीर को कमजोर बना देती है। इसलिए वह अपने दैनिक कार्यों को ही व्यायाम और स्वास्थ्य का आधार मानती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आज के समय में, जब कम उम्र में ही लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, मां पुरबिन की जीवनशैली समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आती है। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता यह सिखाती है कि, नियमित श्रम, सकारात्मक सोच और सक्रिय जीवनशैली इंसान को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए रख सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन की यह प्रेरणादायी कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक मिसाल है। उनकी जीवटता और कर्मशीलता को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि, उम्र भले ही 90 पार कर जाए, लेकिन हौसले जवान हों तो जीवन की रफ्तार कभी नहीं थमती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिर खनकेंगी रसोई में करछियाँ।, बुंदेली शेफ सीज़न 4 का काउंटडाउन शुरू।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">इन दिनों बुंदेलखंड की कई रसोइयों में मसालों की खुशबू के साथ एक अलग तरह का उत्साह भी पक रहा है। कहीं नई रेसिपी पर प्रयोग हो रहे हैं, कहीं दादी-नानी के पुराने स्वाद फिर से याद किए जा रहे हैं, तो कहीं महिलाएँ अपनी सबसे खास डिश को और बेहतर बनाने में जुटी हैं। वजह है 'बुंदेली शेफ सीज़न 4', जिसका इंतजार, जो कि अब धीरे-धीरे एक उत्सव का रूप लेने लगा है। पिछले तीन सीज़न्स में अनगिनत सपनों को पहचान देने वाला यह मंच अब अपने अगले अध्याय की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही सम्पूर्ण</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180996/then-the-spoons-will-clink-in-the-kitchen"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001821886.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">इन दिनों बुंदेलखंड की कई रसोइयों में मसालों की खुशबू के साथ एक अलग तरह का उत्साह भी पक रहा है। कहीं नई रेसिपी पर प्रयोग हो रहे हैं, कहीं दादी-नानी के पुराने स्वाद फिर से याद किए जा रहे हैं, तो कहीं महिलाएँ अपनी सबसे खास डिश को और बेहतर बनाने में जुटी हैं। वजह है 'बुंदेली शेफ सीज़न 4', जिसका इंतजार, जो कि अब धीरे-धीरे एक उत्सव का रूप लेने लगा है। पिछले तीन सीज़न्स में अनगिनत सपनों को पहचान देने वाला यह मंच अब अपने अगले अध्याय की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही सम्पूर्ण बुंदेलखंड में स्वाद, हुनर और आत्मविश्वास की नई हलचल महसूस की जा सकती है। बुंदेलखंड 24x7 द्वारा आयोजित इस लोकप्रिय ऑनलाइन कुकिंग प्रतियोगिता का पहला ऑडिशन 25 जून को आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दूसरा ऑडिशन 10 जुलाई और तीसरा ऑडिशन 20 जुलाई को होगा। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उपरोक्त ऑडिशन राउंड्स में बुंदेलखंड की महिला प्रतिभाएँ अपनी सबसे खास रेसिपीज़ और अनूठे स्वाद का जादू बिखेरेंगी। इन पड़ावों से गुजरकर 15 प्रतिभागी जुलाई के अंतिम सप्ताह में होने वाले क्वार्टर फाइनल तक पहुँचेंगी, जहाँ मुकाबला और भी दिलचस्प हो जाएगा। इसके बाद अगस्त के पहले सप्ताह में सेमी फाइनल का रोमांच देखने को मिलेगा, जिसमें 8 चयनित प्रतिभागियों के साथ 3 वाइल्ड कार्ड एंट्री भी अपनी किस्मत आजमाएँगी। और फिर अगस्त के अंत में होने वाले भव्य ग्रैंड फिनाले में 5 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों के बीच बुंदेली शेफ सीज़न 4 का ताज हासिल करने जंग होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बुंदेलखंड 24x7 के फाउंडर डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा, "जब कोई महिला अपनी पसंदीदा डिश बनाती है, तो उसमें सिर्फ मसालें नहीं, बल्कि अपने अनुभव, अपने संस्कार और अपने ममत्व का मिश्रण भी घोलती है। 'बुंदेली शेफ' उन्हीं भावनाओं को सम्मान देने का मंच है। पिछले तीन सीज़न्स में हमने देखा है कि इस प्रतियोगिता ने सिर्फ विजेता नहीं दिए, बल्कि आत्मविश्वास से भरी ऐसी कहानियाँ दी हैं, जिन्होंने पूरे बुंदेलखंड को प्रेरित किया है। सीज़न 4 में भी हम ऐसे ही नए चेहरों की तलाश में हैं, जिनके हाथों का स्वाद और जिनके सपनों की उड़ान दूर तक जाए।"</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पिछले तीन सीज़न्स ने यह साबित किया है कि कभी-कभी पहचान की शुरुआत रसोई से भी होती है। जिन हाथों ने वर्षों तक परिवार के लिए प्रेम से भोजन बनाया, उन्हीं हाथों ने इस मंच पर आकर अपनी अलग पहचान भी बनाई। शमिता सिंह, ज़हीदा परवीन और शाजिदा अमीर इसकी सबसे खूबसूरत मिसाल हैं। कभी प्रतियोगी के रूप में मंच पर खड़ी ये महिलाएँ आज उन सैकड़ों प्रतिभागियों की प्रेरणा बन चुकी हैं, जो अपने हुनर को घर की चौखट से निकालकर एक बड़े मंच तक ले जाना चाहती हैं।</div><div style="text-align:justify;">असली बात यह है कि 'बुंदेली शेफ' अब सिर्फ एक कुकिंग प्रतियोगिता नहीं रह गया है। यह उस विश्वास का नाम बन चुका है, जो कहता है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या बड़े मंच की मोहताज नहीं होती। कभी किसी छोटे-से गाँव की रसोई से उठने वाली खुशबू भी सम्पूर्ण बुंदेलखंड की पहचान बन सकती है। शायद यही वजह है कि सीज़न 4 की शुरुआत के साथ ही पूरे क्षेत्र में उत्सुकता और इंतजार का स्वाद एक बार फिर घुलने लगा है।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:23:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक सफीना हुसैन को ‘टाइम वुमन ऑफ द ईयर 2026’ में  किया गया शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong>  “एजुकेट गर्ल्स” की संस्थापक सफीना हुसैन को टाइम वुमेन ऑफ द ईयर 2026 की सूची में शामिल किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर बदलाव लाने वाली और समानता के लिए काम कर रही महिलाओं को दिया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन 16 वैश्विक सम्मानित महिलाओं में से एक हैं। इस सूची में अभिनेत्री टियाना टेलर, जिन्होंने ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ में शानदार प्रदर्शन से हॉलीवुड में सराहना पाई; सिडनी मैक्लॉघलिन, ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और रिकॉर्ड तोड़ने वाली खिलाड़ी, जो ट्रैक और फील्ड में उत्कृष्टता की नई परिभाषा दे रही हैं; ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रसिद्ध</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171831/educate-girls-founder-safina-hussain-included-in-time-woman-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260227-wa0209.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> “एजुकेट गर्ल्स” की संस्थापक सफीना हुसैन को टाइम वुमेन ऑफ द ईयर 2026 की सूची में शामिल किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर बदलाव लाने वाली और समानता के लिए काम कर रही महिलाओं को दिया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन 16 वैश्विक सम्मानित महिलाओं में से एक हैं। इस सूची में अभिनेत्री टियाना टेलर, जिन्होंने ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ में शानदार प्रदर्शन से हॉलीवुड में सराहना पाई; सिडनी मैक्लॉघलिन, ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और रिकॉर्ड तोड़ने वाली खिलाड़ी, जो ट्रैक और फील्ड में उत्कृष्टता की नई परिभाषा दे रही हैं; ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रसिद्ध अभिनेत्री और निर्माता लूसी ल्यू; और टीवी, फिल्म और थिएटर में काम करने वाली जानी-मानी अभिनेत्री और गायिका शर्ली ली राल्फ जैसी हस्तियाँ शामिल हैं। ‘टाइम वुमन ऑफ द ईयर’ के सम्मान के रूप में यह पहचान सफीना हुसैन के मिशन को वैश्विक स्तर पर पहचान देती है, जो शिक्षा में लिंग अंतर को कम करने के लिए काम कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन ने वर्ष 2007 में एजुकेट गर्ल्स संस्था की स्थापना की, ताकि भारत के ग्रामीण, दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों की समस्या का समाधान किया जा सके। राजस्थान के कुछ गाँवों से शुरू हुआ यह प्रयास अब भारत में लड़कियों की शिक्षा को समर्थन देने वाले सबसे बड़े समुदाय-आधारित प्रयासों में से एक बन चुका है, जो 30,000 से अधिक गाँवों और 12 राज्यों तक पहुँच स्थापित कर चुका है। सफीना हुसैन ने टाइम के इंटरव्यू में कहा, “पहले दिन से लेकर आज तक, हमारा ध्यान सिर्फ पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों पर रहा है, क्योंकि यह मेरा खुद का अनुभव है। मुझे पता है कि पीछे रह जाने पर कैसा लगता है।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह सम्मान सफीना हुसैन और एजुकेट गर्ल्स के लिए एक अद्भुत साल के बाद आया है। वर्ष 2025 में, इस संस्था ने रमन मैगसेसे पुरस्कार (जिसे अक्सर एशिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है) जीतने वाली पहली भारतीय संस्था बनने का गौरव हासिल किया। इसके अलावा, संस्था ने अपने टीईडी ऑडिशियस प्रोजेक्ट के लक्ष्य को पूरा किया और 20 लाख से अधिक पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों को फिर से शिक्षा में लौटने में मदद की। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सफीना 'एवरी लास्ट गर्ल: अ जर्नी टू एजुकेट इंडियाज़ फॉरगॉटन डॉटर्स' नामक किताब की लेखिका भी हैं, जो जनवरी में प्रकाशित हुई थी। इस पुस्तक में उन्होंने अपने व्यक्तिगत सफर को भारत के सबसे वंचित समुदायों की लड़कियों की कहानियों के साथ जोड़ा है। इसमें जमीन स्तर पर उन रुकावटों का वर्णन है, जो लाखों लड़कियों को स्कूल से दूर रखती हैं और उन समाधानों का भी जिक्र है, जो उन्हें फिर से पढ़ाई में लौटने में मदद करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सम्मान के बारे में बात करते हुए सफीना हुसैन ने कहा, “मुझे यह सम्मान मिलने पर बहुत सम्मान और कृतज्ञता महसूस हो रही है। यह सम्मान भारत में लड़कियों की शिक्षा के लिए चल रहे आंदोलन पर ध्यान आकर्षित करता है और हमारी लड़कियों के साहस, धैर्य और अपना भविष्य बनाने के मजबूत संकल्प को उजागर करता है। यह सम्मान हमारे संकल्प को और मजबूत करता है कि हम वर्ष 2035 तक दस मिलियन (एक करोड़) और लड़कियों तक पहुँच स्थापित करेंगे और हर लड़की को आवाज, चुनाव का अधिकार और आत्मनिर्भरता दिलाएँगे।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गायत्री नायर लोबो, सीईओ, एजुकेट गर्ल्स ने कहा, यह सम्मान सरकार और स्थानीय समुदायों के साथ लगातार सहयोग के महत्व को दिखाता है। उन्होंने कहा, “हमें बहुत गर्व है कि भारत के ग्रामीण इलाकों की 20 लाख से अधिक लड़कियों को फिर से शिक्षा में वापस लाने के विज़न के लिए टाइम के वैश्विक मंच पर सफीना हुसैन को सम्मानित किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> यह महत्वपूर्ण सम्मान उन लड़कियों तक पहुँच स्थापित करने के लिए चल रही निरंतर साझेदारी के महत्व को रेखांकित करता है, जो अभी-भी शिक्षा से दूर हैं और उन्हें पढ़ाई में बनाए रखने और सफल बनाने के प्रयासों को मजबूत करता है। यह सम्मान हमारे 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों, हजारों लैंगिक समानता समर्थकों, भागीदारों और सहयोगियों के समर्पण को भी दर्शाता है, जिनकी मेहनत से यह काम संभव हो पाया है।”  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन और एजुकेट गर्ल्स को मिली यह पहचान लड़कियों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के उनके मिशन का एक नया पड़ाव है। इस साल की टाइम वुमन ऑफ द ईयर सूची में टाइम उन हस्तियों को सम्मानित कर रहा है, जिनके बारे में उसका मानना है कि वे “2026 में महिलाओं और लड़कियों के सामने आने वाली सबसे गंभीर समस्याओं पर काम कर रहे हैं।” टाइम 10 मार्च को लॉस एंजेलेस में होने वाले ‘वुमन ऑफ द ईयर लीडरशिप फोरम’ और ‘वुमन ऑफ द ईयर गाला’ में 2026 की वुमन ऑफ द ईयर पुरस्कार का जश्न मनाएगा। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:08:50 +0530</pubDate>
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