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                <title>Rural Education - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Rural Education RSS Feed</description>
                
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                <title>विद्यालय में घुसकर ताला तोड़ा, दस्तावेज व नकदी लेकर फरार; प्रबंधक ने एसपी से लगाई गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> शहर कोतवाली क्षेत्र के सियरापार (संभलपुर) स्थित किसान पूर्व माध्यमिक विद्यालय चमरौहा में घुसकर ताला तोड़ने, महत्वपूर्ण अभिलेख और नकदी चोरी करने का मामला सामने आया है। विद्यालय के प्रबंधक ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, चोरी गए सामान की बरामदगी और विद्यालय की सुरक्षा की मांग की है।शिकायत कर्ता के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के उद्देश्य से वर्ष 1980-81 में स्थापित विद्यालय को अस्थायी मान्यता वर्ष 1983 तथा स्थायी मान्यता वर्ष 1988 में प्राप्त हुई थी। वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश के चलते विद्यालय बंद है। इसी दौरान आरोप है कि</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181326/the-manager-entered-the-school-and-broke-the-lock-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0020.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> शहर कोतवाली क्षेत्र के सियरापार (संभलपुर) स्थित किसान पूर्व माध्यमिक विद्यालय चमरौहा में घुसकर ताला तोड़ने, महत्वपूर्ण अभिलेख और नकदी चोरी करने का मामला सामने आया है। विद्यालय के प्रबंधक ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, चोरी गए सामान की बरामदगी और विद्यालय की सुरक्षा की मांग की है।शिकायत कर्ता के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के उद्देश्य से वर्ष 1980-81 में स्थापित विद्यालय को अस्थायी मान्यता वर्ष 1983 तथा स्थायी मान्यता वर्ष 1988 में प्राप्त हुई थी। वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश के चलते विद्यालय बंद है। इसी दौरान आरोप है कि सियरापार निवासी विकास चौधरी, चंद्र प्रकाश चौधरी और लक्ष्मी चौधरी सहित अन्य लोग विद्यालय परिसर में घुस गए। आरोपियों ने पहले विद्यालय के बाहर लगा वर्षों पुराना बोर्ड उखाड़ लिया और फिर कार्यालय का ताला तोड़कर अंदर रखी अलमारी उठा ले गए।प्रबंधक का आरोप है कि अलमारी में विद्यालय के महत्वपूर्ण अभिलेख, एसआर रजिस्टर, छात्र उपस्थिति पंजिका, टीसी, अंकपत्र, अन्य आवश्यक दस्तावेज तथा करीब 4,200 रुपये नकद रखे थे। इसके अलावा मेज पर रखे पानी और चाय के बर्तन भी उठा ले जाने का आरोप लगाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी विद्यालय की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से यह कार्रवाई कर रहे हैं तथा विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। प्रबंधक ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस से शिकायत के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रबंधक ने एसपी से मांग की है कि प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को तत्काल मुकदमा दर्ज करने, चोरी गए सामान की बरामदगी कराने और विद्यालय की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए जाएं।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:49:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु शक्ति संपन्न भारत में कब होगी बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181062/when-will-girls-education-be-100-in-nuclear-power-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं वाला देश रहा है। तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे विश्वविद्यालयों ने विश्व को शिक्षा का प्रकाश दिया। वैदिक काल में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना था।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं ने सिद्ध किया था कि भारतीय संस्कृति में नारी शिक्षा का गौरवशाली इतिहास रहा है। किंतु मध्यकालीन सामाजिक रूढ़ियों और औपनिवेशिक शासन के प्रभाव से बालिका शिक्षा पिछड़ती चली गई। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली लागू की। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में ऐसे कर्मचारियों का वर्ग तैयार करना था जो अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक कार्यों को संचालित कर सके। आधुनिक विज्ञान और अंग्रेजी भाषा के प्रसार में इस शिक्षा प्रणाली का योगदान रहा, किंतु इसने भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण को काफी हद तक हाशिए पर पहुंचा दिया। उस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग नगण्य थी। समाज में बाल विवाह, पर्दा प्रथा और लैंगिक असमानता जैसी कुरीतियां लड़कियों की शिक्षा में बड़ी बाधा थीं।<br />समाज सुधारकों का योगदान</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">+<br />ऐसे कठिन समय में सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले ने बालिका शिक्षा की अलख जगाई। 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए पहला आधुनिक विद्यालय प्रारंभ किया।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा और सामाजिक सुधारों को नई दिशा दी। बाद में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना।<br />डॉ. अंबेडकर का प्रसिद्ध संदेश</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"<br />स्वतंत्र भारत में शिक्षा का विकास</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की साक्षरता दर लगभग 18 प्रतिशत थी। महिलाओं की साक्षरता तो 10 प्रतिशत से भी कम थी। संविधान निर्माताओं ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मूल आधार माना।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />समय-समय पर कोठारी आयोग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा नई शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास किए गए। इन प्रयासों से शिक्षा का दायरा बढ़ा और लड़कियों की विद्यालयों तक पहुंच बेहतर हुई।.आज भारत की साक्षरता दर 77 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है, जबकि महिला साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। यह प्रगति उत्साहजनक है, किंतु अभी भी पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता में अंतर बना हुआ है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों से सीख<br />विश्व में फिनलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों की शिक्षा व्यवस्था विश्व में आदर्श मानी जाती है। फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />फिनलैंड में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन कौशल विकसित करना है। वहां बच्चों पर अनावश्यक परीक्षा का दबाव नहीं होता। शिक्षकों को अत्यंत सम्मान और स्वायत्तता प्राप्त है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br /></div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"> बालिका और बालक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। सिंगापुर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा साधन बनाया। वहां विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। शिक्षा को उद्योगों और रोजगार से जोड़ा गया है।<br />जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अनुशासन, नैतिकता, समयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। परिणामस्वरूप ये देश सीमित प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद आर्थिक महाशक्ति बन गए।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत में प्रतिभा की कोई कमी कभी भी नहीं रही है, किंतु शिक्षा व्यवस्था अभी भी परीक्षा-केंद्रित बनी हुई है। रटंत प्रणाली, विद्यालयों की असमान गुणवत्ता, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों का अभाव आज भी चुनौतियां हैं।नई शिक्षा नीति 2020 ने इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। किंतु इसके वास्तविक लाभ तभी मिलेंगे जब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हो। बालिका शिक्षा का सत प्रतिशत होना इसलिए भी आवश्यक है कि शिक्षित बेटी, समृद्ध परिवार</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />एक शिक्षित महिला अपने परिवार को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्कार प्रदान करती है। वह अगली पीढ़ी की प्रथम शिक्षिका होती है।सामाजिक कुरीतियों का अंत भी।बाल विवाह, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं को समाप्त करने में शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि महिलाओं की शिक्षा में निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास को तीव्र गति देता है। यदि भारत की प्रत्येक बेटी शिक्षित होगी तो देश की उत्पादकता और आर्थिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />शिक्षित महिलाएं स्वास्थ्य, पोषण और परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक होती हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।<br />आज महिलाएं विज्ञान, अंतरिक्ष, प्रशासन, राजनीति, सेना और उद्यमिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। शिक्षा उन्हें नेतृत्व और नवाचार की शक्ति प्रदान करती है।</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />महापुरुषों की दृष्टि में नारी शिक्षा<br />स्वामी विवेकानंद ने कहा</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />"राष्ट्र की प्रगति का सबसे अच्छा मापदंड वहां की महिलाओं की स्थिति है।"डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का मत था कि<br />"महिलाओं का सशक्तिकरण और शिक्षा किसी राष्ट्र के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है।"पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था<br />"एक महिला को शिक्षित करना एक पीढ़ी को शिक्षित करना है।"</div><div dir="ltr" style="text-align:justify;"><br />इक्कीसवीं सदी ज्ञान, विज्ञान और नवाचार की सदी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश की प्रत्येक बेटी शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगी। शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक चेतना, आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय विकास का आधार है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली से लेकर नई शिक्षा नीति तक भारत ने लंबी यात्रा तय की है, किंतु अभी मंजिल दूर है। यदि सरकार, समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थान मिलकर बालिका शिक्षा को शत-प्रतिशत अनिवार्य बनाने का संकल्प लें, तो भारत न केवल विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति बनेगा, बल्कि सबसे विकसित और ज्ञानवान राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ा होगा।<br />क्योंकि किसी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में नहीं, बल्कि उसकी शिक्षित बेटियों की आंखों में स्वप्न बनकर पलता है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक, स्तंभकार, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,<div>कविता,</div><div>संजीव-नी।<br />शिक्षा का कवच।<br /><br />शिक्षा का कवच।<br />कुछ देना ही तो आइये,<br />नन्हीं बालिकाओं को<br />स्वर्ण के गहने नहीं,<br />शिक्षा का कवच दें।<br />उनकी हथेलियों में<br />रोटी के साथ-साथ<br />कुछ अक्षर भी रख दें,<br />जो भूख से जुझतीं<br />उन्हें ज्ञान की कुंजी दें<br />अँधेरे बंद कमरों में<br />रोशन-दान बनती,<br />ज्ञान की रोशनी के लिए<br />बंद रास्तों पर<br />एक नया आकाश फैला देती,<br />उनकी आँखों में<br />सिर्फ़ स्वप्न ना रखें ,<br />उन तक पहुँचने के पंख भी दें।<br />उन्हें ज्ञान दें कि<br />अपने हिस्से की धूप<br />खुद चुन सकें।<br />किताबें जब उनके हांथों में होंगी,<br />तो सदियों के कई बोझ<br />आप उतर जाएँगे।<br />कलम उँगलियों से चलेंगीं<br />तक़दीर की कविता भी<br />लिखी जाएगी।<br />शिक्षित बालिका<br />अपना जीवन ही नहीं संवारती,<br />आने वाली पीढ़ियों के लिए<br />उजला दीप बन जाती।<br />आइये,<br />बेटी को शिक्षा का रक्षा-कवच दें,<br />ताकि वह<br />अपने सपनों, अपने अधिकारों<br />अपने अस्तित्व की रक्षा<br />स्वयं कर सके।<br /><br />संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिव्यांग छात्र की पीड़ा सुन भावुक हुए जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong>जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के समक्ष मानवता और संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। जनसुनवाई में प्राथमिक विद्यालय बंजरिया के छात्र रवि पटेल पुत्र कमलेश पटेल ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है तथा कक्षा-5 की छात्रवृत्ति की धनराशि अभी तक उसे प्राप्त नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दिव्यांग छात्र की स्थिति को देखकर जिलाधिकारी श्री गौड़ ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों को छात्र को तुरंत ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में जिलाधिकारी ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180980/district-magistrate-became-emotional-after-hearing-the-pain-of-disabled"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001717275.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong>जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के समक्ष मानवता और संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। जनसुनवाई में प्राथमिक विद्यालय बंजरिया के छात्र रवि पटेल पुत्र कमलेश पटेल ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है तथा कक्षा-5 की छात्रवृत्ति की धनराशि अभी तक उसे प्राप्त नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिव्यांग छात्र की स्थिति को देखकर जिलाधिकारी श्री गौड़ ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों को छात्र को तुरंत ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में जिलाधिकारी ने स्वयं अपने हाथों से रवि पटेल को ट्राइसाइकिल प्रदान की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि छात्र की लंबित छात्रवृत्ति की धनराशि का तत्काल सत्यापन कर उसे उसके बैंक खाते में प्रेषित कराना सुनिश्चित करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी की इस संवेदनशील एवं मानवीय पहल से छात्र रवि तथा उसके परिजनों के चेहरे पर खुशी झलक उठी। ट्राइसाइकिल प्राप्त होने पर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और उन्होंने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। जनसुनवाई में की गई यह पहल प्रशासन की जनकल्याणकारी एवं संवेदनशील कार्यशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:33:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीएचएसएनडी सत्र का डीएम ने किया निरीक्षण, कुपोषण और टीकाकरण की प्रगति परखी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर, </strong>जनपद में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन की पहल लगातार जारी है। इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने विकास खंड बलरामपुर के ग्राम पंचायत कलवारी में प्रोजेक्ट संवर्धन के अंतर्गत आयोजित वीएचएसएनडी (विलेज हेल्थ सैनिटेशन एंड न्यूट्रिशन डे) सत्र का निरीक्षण किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं के एएनसी रजिस्ट्रेशन, बच्चों एवं माताओं के टीकाकरण, ड्यू लिस्ट, पोषण संबंधी गतिविधियों तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की शत-प्रतिशत</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180963/dm-inspected-the-vhsnd-session-and-examined-the-progress-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260610-wa0455-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर, </strong>जनपद में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन की पहल लगातार जारी है। इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने विकास खंड बलरामपुर के ग्राम पंचायत कलवारी में प्रोजेक्ट संवर्धन के अंतर्गत आयोजित वीएचएसएनडी (विलेज हेल्थ सैनिटेशन एंड न्यूट्रिशन डे) सत्र का निरीक्षण किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं के एएनसी रजिस्ट्रेशन, बच्चों एवं माताओं के टीकाकरण, ड्यू लिस्ट, पोषण संबंधी गतिविधियों तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के चिन्हांकन और उनके पोषण सुधार के लिए चलाए जा रहे प्रयासों का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को आयरन की खुराक पिलाकर एनीमिया नियंत्रण और पोषण जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कुपोषण मुक्त जनपद बनाने के लिए सभी विभागों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने ग्राम कलवारी में नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन किया। आधुनिक एवं बालमैत्री सुविधाओं से युक्त इस केंद्र में बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए आकर्षक शैक्षिक पेंटिंग कराई गई हैं। केंद्र में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण के साथ बालमैत्री शौचालय की भी व्यवस्था की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रारंभिक बाल शिक्षा और पोषण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। ऐसे आधुनिक आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं पोषण के नए मॉडल के रूप में विकसित होंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में 19 नए आंगनबाड़ी केंद्र निर्माणाधीन हैं या पूर्णता की ओर हैं, जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।</div>
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<div style="text-align:justify;">कंपोजिट विद्यालय में डाइनिंग हाल का उद्घाटन</div>
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<div style="text-align:justify;">ग्राम पंचायत कलवारी में ग्राम पंचायत की पहल पर निर्मित कंपोजिट विद्यालय के डाइनिंग हाल का भी जिलाधिकारी ने उद्घाटन किया। डाइनिंग हाल बनने से अब छात्र-छात्राओं को मध्यान्ह भोजन स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण में उपलब्ध कराया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिव के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनसहभागिता से गांवों और विद्यालयों का समग्र विकास संभव है।</div>
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<div style="text-align:justify;">बच्चों से किया संवाद</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय के बच्चों से संवाद कर उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को नियमित अध्ययन और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को स्टडी टेबल एवं शिक्षण सामग्री वितरित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश रस्तोगी, खंड शिक्षा अधिकारी अशोक पाठक सहित स्वास्थ्य, शिक्षा एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:22:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब यह तस्वीर बदलनी चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नसमय बदला, तकनीक बदली, जीवन-शैली बदली, बाजार बदला और फैशन भी बदल गया। महिलाओं को उपभोक्तावादी संस्कृति ने विज्ञापनों और प्रदर्शन की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने के नए-नए तरीके खोज लिए। किंतु दुखद प्रश्न यह है कि क्या समाज की मूलभूत सोच बदली? क्या बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत हो गई? क्या दहेज प्रथा समाप्त हो गई? क्या स्त्री उत्पीड़न इतिहास बन गया?</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से इन प्रश्नों का उत्तर आज भी नकारात्मक है। अनेक समस्याएँ आज भी यथावत बनी हुई हैं, बल्कि कई मामलों में उन्होंने और अधिक विकराल रूप धारण कर लिया है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180674/now-this-picture-should-be-changed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नसमय बदला, तकनीक बदली, जीवन-शैली बदली, बाजार बदला और फैशन भी बदल गया। महिलाओं को उपभोक्तावादी संस्कृति ने विज्ञापनों और प्रदर्शन की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने के नए-नए तरीके खोज लिए। किंतु दुखद प्रश्न यह है कि क्या समाज की मूलभूत सोच बदली? क्या बालिका शिक्षा शत-प्रतिशत हो गई? क्या दहेज प्रथा समाप्त हो गई? क्या स्त्री उत्पीड़न इतिहास बन गया?</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से इन प्रश्नों का उत्तर आज भी नकारात्मक है। अनेक समस्याएँ आज भी यथावत बनी हुई हैं, बल्कि कई मामलों में उन्होंने और अधिक विकराल रूप धारण कर लिया है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में महिलाओं की स्थिति अभी भी अपेक्षित सम्मान और अवसरों से काफी दूर दिखाई देती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में सुधार तो हुआ है, किंतु वह इतना व्यापक नहीं है कि समाज को संतोष हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे बुजुर्ग कहा करते थे कि शिक्षा का प्रसार होगा तो समाज की कुरीतियाँ स्वतः समाप्त हो जाएँगी। स्त्रियाँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेंगी और बेटी को बोझ नहीं, अवसर माना जाएगा। कुछ क्षेत्रों में प्रगति अवश्य हुई है, किंतु धरातल पर तस्वीर अभी भी अधूरी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण  के अनुसार देश में 10 वर्ष या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर लगभग 46.4 प्रतिशत तक पहुँचा है, जो पहले 41 प्रतिशत था।</p>
<p style="text-align:justify;">यह सुधार उत्साहजनक है, किंतु इसका अर्थ यह भी है कि आधी से अधिक महिलाएँ अभी भी दस वर्ष की बुनियादी शिक्षा से वंचित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय छोड़ने वाली बालिकाओं की संख्या आज भी चिंता का विषय बनी हुई है।  शिक्षा के क्षेत्र में असमानता का एक कारण बाल विवाह, गरीबी, सामाजिक रूढ़ियाँ तथा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी हैं। अनेक परिवार आज भी पुत्र की शिक्षा को निवेश और पुत्री की शिक्षा को व्यय मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही सोच आगे चलकर दहेज जैसी कुप्रथा को जन्म देती और इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि शिक्षा और आधुनिकता के दावों के बीच दहेज का दानव आज भी जीवित है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में दहेज निषेध अधिनियम के अंतर्गत 15,489 मामले दर्ज किए गए तथा दहेज से संबंधित घटनाओं में 6,156 महिलाओं की मृत्यु हुई। अर्थात प्रतिदिन लगभग 17 महिलाओं ने दहेज की कीमत अपने जीवन से चुकाई। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की व्यापक तस्वीर भी चिंता उत्पन्न करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2023 में देशभर में महिलाओं के विरुद्ध लगभग 4.48 लाख अपराध दर्ज किए गए। इनमें सबसे बड़ी संख्या पति अथवा रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामलों की रही, जो कुल अपराधों का लगभग 30 प्रतिशत है। यह स्थिति केवल आँकड़ों की कहानी नहीं है; यह उन लाखों बेटियों, बहनों और माताओं की पीड़ा का दस्तावेज है जो आज भी भेदभाव, हिंसा और असमानता का सामना कर रही हैं। समाज सुधारिका सावित्रीबाई फुले ने कहा था यदि तुम शिक्षित हो जाओगे तो तुम्हें अपने अधिकारों का ज्ञान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं डॉ. भीमराव आंबेडकर का प्रसिद्ध कथन है कि किसी समाज की प्रगति का आकलन उसकी महिलाओं की प्रगति से किया जाना चाहिए। महात्मा गांधी ने भी कहा था यदि आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता है, किंतु यदि आप एक स्त्री को शिक्षित करते हैं तो पूरा परिवार शिक्षित होता है। इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद का मानना था कि जिस राष्ट्र ने अपनी स्त्रियों का सम्मान करना नहीं सीखा, वह कभी महान नहीं बन सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है; आवश्यक यह है कि बालिका शिक्षा को सामाजिक सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और समान अवसरों से जोड़ा जाए। जब तक बेटी को परिवार की उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा, जब तक विवाह को आर्थिक लेन-देन का माध्यम समझा जाएगा, तब तक दहेज की मानसिकता समाप्त नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि एक ओर हम महिला सशक्तिकरण के नारे लगाते हैं, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चलाते हैं, महिलाओं की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं, दूसरी ओर कन्या के जन्म पर चिंता और विवाह के समय दहेज की चर्चा अभी भी अनेक घरों में सामान्य बात मानी जाती है। यह दोहरा सामाजिक चरित्र हमारी सबसे बड़ी चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता केवल कानूनों की नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की है। विद्यालयों में लैंगिक समानता के संस्कार, परिवारों में बेटियों के प्रति समान व्यवहार, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, दहेज लेने-देने वालों का सामाजिक बहिष्कार तथा पंचायत स्तर तक जनजागरण अभियान ही वास्तविक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यदि हम सचमुच विकसित भारत का स्वप्न देखते हैं तो हमें यह स्वीकार करना होगा कि बालिका शिक्षा, स्त्री सम्मान और दहेज उन्मूलन केवल महिला मुद्दे नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रश्न हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस दिन हर बेटी निर्भय होकर शिक्षा प्राप्त करेगी, अपने जीवन के निर्णय स्वयं ले सकेगी और विवाह दहेज नहीं बल्कि समानता, सम्मान और प्रेम पर आधारित होगा, उसी दिन हम सच्चे अर्थों में आधुनिक, प्रगतिशील और सभ्य समाज कहलाने के अधिकारी होंगे। अब समय की आवश्यकता यह है  कि हम केवल परिवर्तन की प्रतीक्षा न करें, बल्कि स्वयं परिवर्तन बनें। क्योंकि बेटी का सम्मान ही समाज का सम्मान है, और स्त्री की प्रगति ही राष्ट्र की वास्तविक प्रगति है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:49:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विद्यालय में हुई नवीन शैक्षिक सत्र की शुरुवात,छात्रों का तिलक लगाकर किया अभिनन्दन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">नवीन शैक्षिक सत्र की शुरुवात हो गयी है।नए शैक्षिक सत्र के प्रारम्भ के अवसर पर विद्यालयों में छात्रों व शिक्षकों के बीच गजब का उत्साह देखने को मिला।छात्र नई कक्षाओं में प्रवेश पाकर चहकते दिखाई दिए वहीं शिक्षकों ने नवीन नामांकन के लिए गांव में नामांकन रैली निकाली व नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया गया।</div>
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<div style="text-align:justify;">नवीन सत्र के आगाज के अवसर पर अभोली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रामचंदरपुर में शिक्षकों द्वारा छात्रों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा विद्यालय में नवीन नामांकन के लिए गांव में शिक्षकों व छात्रों द्वारा स्कूल चलो अभियान के बैनर व पोस्टर के साथ</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174863/new-academic-session-started-in-the-school-students-were-greeted"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/4.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">नवीन शैक्षिक सत्र की शुरुवात हो गयी है।नए शैक्षिक सत्र के प्रारम्भ के अवसर पर विद्यालयों में छात्रों व शिक्षकों के बीच गजब का उत्साह देखने को मिला।छात्र नई कक्षाओं में प्रवेश पाकर चहकते दिखाई दिए वहीं शिक्षकों ने नवीन नामांकन के लिए गांव में नामांकन रैली निकाली व नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया गया।</div>
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<div style="text-align:justify;">नवीन सत्र के आगाज के अवसर पर अभोली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रामचंदरपुर में शिक्षकों द्वारा छात्रों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा विद्यालय में नवीन नामांकन के लिए गांव में शिक्षकों व छात्रों द्वारा स्कूल चलो अभियान के बैनर व पोस्टर के साथ प्रेरक बोधवाक्यों की उद्घोषणा कर बच्चों को विद्यालय में नामांकन कराने हेतु प्रेरित किया गया।शिक्षण सत्र की शुरुवात के सुअवसर पर खण्ड शिक्षा अधिकारी वेद प्रकाश यादव द्वारा बच्चों को निशुल्क पाठ्यपुस्तको का वितरण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खण्ड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री शिवम पांडेय के निर्देशानुसार समस्त विद्यालयों में नवारम्भ उत्सव मनाया जा रहा है उन्होंने बच्चों को खूब मन लगाकर पढ़ने को प्रेरित किया और प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए उन्हें क्षेत्र के मेधावी प्रतियोगियों की तरह विद्यालय व शिक्षकों का नाम रौशन करने को कहा।इस अवसर पर प्रधानाध्यापक सन्तोष कुमार सिंह ने बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय आने के लिए निर्देशित किया।शिक्षक जगदीश चन्द्र श्रीवास्तव द्वारा छात्रों को नवीन पुस्तकों के पाठ्यक्रम से परिचित कराया गया।इस अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टॉफ अशोक कुमार,राजू जायसवाल उपस्थित रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:52:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार बच्चों को  गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रयासरत : विधायक विनय वर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>बढ़नी ब्लाक के परसा में स्थित बीआरसी पर सोमवार को ग्रामप्रधान/स्थानीय प्राधिकारी-निकाय सदस्य व प्रधानाध्यापक का ब्लाक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण समारोह का आयोजन किया गया।यह संगोष्ठी में डीबीटी के अन्तर्गत अभिभावक के खाते में भेजे गए 1200 रुपए का उपयोग,प्रेरणा पोर्टल,आपरेशन कायाकल्प एवं निपुण भारत मिशन पर विशेष चर्चा किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा ने कहा कि ग्राम प्रधान व अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अभिभावकों को एसएमसी,आउट आफ स्कूल बच्चों,दिव्यांग बालक एवं बालिका शिक्षा आदि विषयों पर जनसमुदाय को जागरूक एवं प्रेरित करने का प्रयास करना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173415/government-is-trying-to-provide-quality-education-to-children-mla"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1773670696236.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>बढ़नी ब्लाक के परसा में स्थित बीआरसी पर सोमवार को ग्रामप्रधान/स्थानीय प्राधिकारी-निकाय सदस्य व प्रधानाध्यापक का ब्लाक स्तरीय संगोष्ठी एवं उन्मुखीकरण समारोह का आयोजन किया गया।यह संगोष्ठी में डीबीटी के अन्तर्गत अभिभावक के खाते में भेजे गए 1200 रुपए का उपयोग,प्रेरणा पोर्टल,आपरेशन कायाकल्प एवं निपुण भारत मिशन पर विशेष चर्चा किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा ने कहा कि ग्राम प्रधान व अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अभिभावकों को एसएमसी,आउट आफ स्कूल बच्चों,दिव्यांग बालक एवं बालिका शिक्षा आदि विषयों पर जनसमुदाय को जागरूक एवं प्रेरित करने का प्रयास करना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा के उत्थान व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। डीबीटी के तहत अभिभावकों के खाते में 1200 रुपए बच्चों के ड्रेस,स्वेटर,जूता-मोजा,बैग व स्टेनरी खरीदने के लिए भेजा गया है।उन्होंने कहा कि आपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों का मरम्मत व सौन्दर्यीकरण किया जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी प्रकार निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विद्यालयों में सहायक सामग्रियों को उपलब्ध करवाया गया है।कंपोजिट विद्यालय बढ़नी की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। प्राथमिक विद्यालय हलौरा की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान नृत्य प्रस्तुत किया।इस दौरान बीईओ अरुण कुमार,प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र यादव, प्रधान यशोदानंदन मिश्र,मुख्तार अहमद,डा.आशुतोष सिंह,निसार अहमद,राहुल पाण्डेय,महेंद्र मिश्र,हरिनारायण शुक्ल, ध्रुव कुमार आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:48:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक में गेहूं खरीद केंद्र क्यों लड़ियां  मुख्यालय पर खोलने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात </div><div style="text-align:justify;">बरेली</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक विकास खंड भदपुरा के प्रांगण में आयोजित की गई इस बैठक में चार सूत्रीय ज्ञापन खंड विकास अधिकारी को सोपा गया जिस*भदपुरा में एस एम सी और प्र अ उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  विकास क्षेत्र भदपुरा में विभागीय निर्देशानुसार विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष और प्रधानाध्यापकों की एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया ।</div><div style="text-align:justify;">कार्यशाला का आगाज खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष द्वीप प्रज्वलित कर किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यशाला का सफल संचालन ए आर पी डाॅ मधुरेश दीक्षित द्वारा किया गया। कार्यशाला में एस एम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173041/why-are-there-fights-in-the-monthly-meeting-of-bharatiya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1.-------अ1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात </div><div style="text-align:justify;">बरेली</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक विकास खंड भदपुरा के प्रांगण में आयोजित की गई इस बैठक में चार सूत्रीय ज्ञापन खंड विकास अधिकारी को सोपा गया जिस*भदपुरा में एस एम सी और प्र अ उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> विकास क्षेत्र भदपुरा में विभागीय निर्देशानुसार विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष और प्रधानाध्यापकों की एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया ।</div><div style="text-align:justify;">कार्यशाला का आगाज खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष द्वीप प्रज्वलित कर किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यशाला का सफल संचालन ए आर पी डाॅ मधुरेश दीक्षित द्वारा किया गया। कार्यशाला में एस एम सी सदस्यों और प्रधानाध्यपकों के कार्य दायित्वों ,विभागीय योजनाओं ,निपुण भारत आदि पर विस्तृत चर्चा की गयी। सन्दर्भदाता मनीष कुमार ,अनिल कुमार ,आशुतोष कुमार ,रामबृज मौर्या कै साथ अमिता कुमारी ,मालती राठौर ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में ओम बाबू, सुधांशू, गुलफाम आदि का सहयोग रहा।में सर्वप्रथम किसानों के हितों को देखते हुए यूनियन ने गेहूं खरीद के लिए क्यों लड़िया मुख्यालय पर केंद्र खोलने की मांग सर्वप्रथम उठाई गई ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">क्योंकि कई वर्षों से इन केदो को एसी जगह के नाम से खोल दिया जाता है जहां पर कोई भी किसान अपना गेहूं बेचने के लिए नहीं जा सकता इसलिए भारतीय किसान यूनियन ने अभी से मांग की है  इसी क्रम में बजाज चीनी मिल से गन्ना भुगतान कराए जाने आवारा पशुओं को पकड़वाने एवं पात्र लोगों के राशन कार्ड बनवाने समेत चार सूत्रीय ज्ञापन खंड विकास अधिकारी भदपुरा रामशंकर सिंह पटेल को सोपा गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इस मौके पर रोशन लाल राम प्रकाश लाल बहादुर प्यारेलाल नन्हेंलाल मनोहर लाल रामेश्वर दयाल बाबूराम कृष्ण पाल राम बहादुर बुद्ध पाल हीरालाल गंगवार सेवाराम ताराचंद समेत भारी संख्या में किस कर उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 22:09:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक सफीना हुसैन को ‘टाइम वुमन ऑफ द ईयर 2026’ में  किया गया शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong>  “एजुकेट गर्ल्स” की संस्थापक सफीना हुसैन को टाइम वुमेन ऑफ द ईयर 2026 की सूची में शामिल किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर बदलाव लाने वाली और समानता के लिए काम कर रही महिलाओं को दिया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन 16 वैश्विक सम्मानित महिलाओं में से एक हैं। इस सूची में अभिनेत्री टियाना टेलर, जिन्होंने ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ में शानदार प्रदर्शन से हॉलीवुड में सराहना पाई; सिडनी मैक्लॉघलिन, ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और रिकॉर्ड तोड़ने वाली खिलाड़ी, जो ट्रैक और फील्ड में उत्कृष्टता की नई परिभाषा दे रही हैं; ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रसिद्ध</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171831/educate-girls-founder-safina-hussain-included-in-time-woman-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260227-wa0209.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> “एजुकेट गर्ल्स” की संस्थापक सफीना हुसैन को टाइम वुमेन ऑफ द ईयर 2026 की सूची में शामिल किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर बदलाव लाने वाली और समानता के लिए काम कर रही महिलाओं को दिया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन 16 वैश्विक सम्मानित महिलाओं में से एक हैं। इस सूची में अभिनेत्री टियाना टेलर, जिन्होंने ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ में शानदार प्रदर्शन से हॉलीवुड में सराहना पाई; सिडनी मैक्लॉघलिन, ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और रिकॉर्ड तोड़ने वाली खिलाड़ी, जो ट्रैक और फील्ड में उत्कृष्टता की नई परिभाषा दे रही हैं; ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रसिद्ध अभिनेत्री और निर्माता लूसी ल्यू; और टीवी, फिल्म और थिएटर में काम करने वाली जानी-मानी अभिनेत्री और गायिका शर्ली ली राल्फ जैसी हस्तियाँ शामिल हैं। ‘टाइम वुमन ऑफ द ईयर’ के सम्मान के रूप में यह पहचान सफीना हुसैन के मिशन को वैश्विक स्तर पर पहचान देती है, जो शिक्षा में लिंग अंतर को कम करने के लिए काम कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन ने वर्ष 2007 में एजुकेट गर्ल्स संस्था की स्थापना की, ताकि भारत के ग्रामीण, दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों की समस्या का समाधान किया जा सके। राजस्थान के कुछ गाँवों से शुरू हुआ यह प्रयास अब भारत में लड़कियों की शिक्षा को समर्थन देने वाले सबसे बड़े समुदाय-आधारित प्रयासों में से एक बन चुका है, जो 30,000 से अधिक गाँवों और 12 राज्यों तक पहुँच स्थापित कर चुका है। सफीना हुसैन ने टाइम के इंटरव्यू में कहा, “पहले दिन से लेकर आज तक, हमारा ध्यान सिर्फ पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों पर रहा है, क्योंकि यह मेरा खुद का अनुभव है। मुझे पता है कि पीछे रह जाने पर कैसा लगता है।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह सम्मान सफीना हुसैन और एजुकेट गर्ल्स के लिए एक अद्भुत साल के बाद आया है। वर्ष 2025 में, इस संस्था ने रमन मैगसेसे पुरस्कार (जिसे अक्सर एशिया का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है) जीतने वाली पहली भारतीय संस्था बनने का गौरव हासिल किया। इसके अलावा, संस्था ने अपने टीईडी ऑडिशियस प्रोजेक्ट के लक्ष्य को पूरा किया और 20 लाख से अधिक पढ़ाई से दूर रहने वाली लड़कियों को फिर से शिक्षा में लौटने में मदद की। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सफीना 'एवरी लास्ट गर्ल: अ जर्नी टू एजुकेट इंडियाज़ फॉरगॉटन डॉटर्स' नामक किताब की लेखिका भी हैं, जो जनवरी में प्रकाशित हुई थी। इस पुस्तक में उन्होंने अपने व्यक्तिगत सफर को भारत के सबसे वंचित समुदायों की लड़कियों की कहानियों के साथ जोड़ा है। इसमें जमीन स्तर पर उन रुकावटों का वर्णन है, जो लाखों लड़कियों को स्कूल से दूर रखती हैं और उन समाधानों का भी जिक्र है, जो उन्हें फिर से पढ़ाई में लौटने में मदद करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस सम्मान के बारे में बात करते हुए सफीना हुसैन ने कहा, “मुझे यह सम्मान मिलने पर बहुत सम्मान और कृतज्ञता महसूस हो रही है। यह सम्मान भारत में लड़कियों की शिक्षा के लिए चल रहे आंदोलन पर ध्यान आकर्षित करता है और हमारी लड़कियों के साहस, धैर्य और अपना भविष्य बनाने के मजबूत संकल्प को उजागर करता है। यह सम्मान हमारे संकल्प को और मजबूत करता है कि हम वर्ष 2035 तक दस मिलियन (एक करोड़) और लड़कियों तक पहुँच स्थापित करेंगे और हर लड़की को आवाज, चुनाव का अधिकार और आत्मनिर्भरता दिलाएँगे।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गायत्री नायर लोबो, सीईओ, एजुकेट गर्ल्स ने कहा, यह सम्मान सरकार और स्थानीय समुदायों के साथ लगातार सहयोग के महत्व को दिखाता है। उन्होंने कहा, “हमें बहुत गर्व है कि भारत के ग्रामीण इलाकों की 20 लाख से अधिक लड़कियों को फिर से शिक्षा में वापस लाने के विज़न के लिए टाइम के वैश्विक मंच पर सफीना हुसैन को सम्मानित किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> यह महत्वपूर्ण सम्मान उन लड़कियों तक पहुँच स्थापित करने के लिए चल रही निरंतर साझेदारी के महत्व को रेखांकित करता है, जो अभी-भी शिक्षा से दूर हैं और उन्हें पढ़ाई में बनाए रखने और सफल बनाने के प्रयासों को मजबूत करता है। यह सम्मान हमारे 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों, हजारों लैंगिक समानता समर्थकों, भागीदारों और सहयोगियों के समर्पण को भी दर्शाता है, जिनकी मेहनत से यह काम संभव हो पाया है।”  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सफीना हुसैन और एजुकेट गर्ल्स को मिली यह पहचान लड़कियों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के उनके मिशन का एक नया पड़ाव है। इस साल की टाइम वुमन ऑफ द ईयर सूची में टाइम उन हस्तियों को सम्मानित कर रहा है, जिनके बारे में उसका मानना है कि वे “2026 में महिलाओं और लड़कियों के सामने आने वाली सबसे गंभीर समस्याओं पर काम कर रहे हैं।” टाइम 10 मार्च को लॉस एंजेलेस में होने वाले ‘वुमन ऑफ द ईयर लीडरशिप फोरम’ और ‘वुमन ऑफ द ईयर गाला’ में 2026 की वुमन ऑफ द ईयर पुरस्कार का जश्न मनाएगा। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:08:50 +0530</pubDate>
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