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                <title>Fair Investigation - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Fair Investigation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>गौर के हालुआ में रसूखदार प्रधान के आगे नतमस्तक हुआ ब्लॉक प्रशासन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिले केगौरजिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल चलने के आरोपों ने गौर विकासखंड की ग्राम पंचायत हालुआ में कराए जा रहे पवन के खेत से बचाए सरहद तक चकबंद निर्माण कार्य (44 लेबर) को सवालों के घेरे में ला दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर कार्य की स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज विवरण में भारी अंतर है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कागजों पर करीब 44 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन का भुगतान कराने का खेल चल रहा है, जबकि मौके पर उतनी संख्या में मजदूर कार्य करते दिखाई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186167/in-the-situation-of-gaur-the-block-administration-bowed-before"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260823-wa0141.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिले केगौरजिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल चलने के आरोपों ने गौर विकासखंड की ग्राम पंचायत हालुआ में कराए जा रहे पवन के खेत से बचाए सरहद तक चकबंद निर्माण कार्य (44 लेबर) को सवालों के घेरे में ला दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर कार्य की स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज विवरण में भारी अंतर है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कागजों पर करीब 44 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन का भुगतान कराने का खेल चल रहा है, जबकि मौके पर उतनी संख्या में मजदूर कार्य करते दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हालुआ पंचायत में खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। उनका आरोप है कि यदि मस्टरोल और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि गरीब मजदूरों के हक की मजदूरी में गड़बड़ी की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>                                                          हालुआ पंचायत के मस्टरोल की जांच बनी चुनौती</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों के अनुसार, पवन के खेत से बचाए सरहद तक चकबंद निर्माण कार्य (44 लेबर) के मस्टरोल की जांच कर वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति का सत्यापन कराया जाना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान किया जाए तो स्थिति साफ हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि धरातल पर अपेक्षित गति से कार्य नहीं हो रहा, जबकि मस्टरोल में प्रतिदिन हाजिरी दर्ज की जा रही है। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने उच्चाधिकारियों से जांच की मांग की है। विकास के नाम पर मिलने वाली सरकारी निधि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गौर के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर हालुआ पंचायत में उठ रहे सवालों का जवाब लंबे समय तक लंबित रहता है। ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 18:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184359/growing-challenge-of-fake-cases-serious-questions-raised-on-alleged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं रहा तो बहुत बुरी तरह से घिर जाता है। एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के बढ़ते मुकदमे इसकी गवाही दे रहे हैं। कुछ ऐसे संगठित गिरोह भी हैं जो महिलाओं के द्वारा आदमियों को फंसवाते देखे गए हैं। हालांकि उन गिरोहों का पर्दाफाश होता है लेकिन तब तक आरोपी को सज़ा काटनी ही पड़ती है। इसी तरह एससी-एसटी एक्ट के कानून का दुरुपयोग वर्षों से हो रहा है लेकिन आज तक कितनी ही सरकारें आईं हों इनमें संसोधन नहीं हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान न्याय का अधिकार देता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे विशेष कानून बनाए गए जो समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों को सुरक्षा प्रदान कर सकें। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पॉक्सो कानून भी इसी सोच का परिणाम हैं। इन कानूनों ने अनेक पीड़ितों को न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है और समाज में अपराधियों के विरुद्ध कठोर संदेश दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक दूसरा पक्ष भी लगातार चर्चा में रहा है। कई लोग आरोप लगाते हैं कि व्यक्तिगत दुश्मनी, संपत्ति विवाद, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या पारिवारिक संघर्ष में इन कानूनों का दुरुपयोग कर झूठे मुक़दमे दर्ज कराए जाते हैं। यह मुद्दा अदालतों, विधि विशेषज्ञों और समाज के बीच लगातार बहस का विषय बना हुआ है। क्या सचमुच फर्जी मुकदमों की बाढ़ है?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कहना कि अधिकांश एससी-एसटी या पॉक्सो के मामले फर्जी हैं, उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के आधार पर उचित नहीं होगा। कई मामलों में जांच के बाद आरोप सिद्ध नहीं हो पाते, लेकिन इसका कारण हमेशा झूठा मुकदमा नहीं होता। कमजोर जांच, पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव, गवाहों का मुकर जाना, समझौते का दबाव या लंबी न्यायिक प्रक्रिया भी इसके कारण हो सकते हैं। हालाँकि, विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में यह भी स्वीकार किया है कि कुछ मामलों में कानूनों का दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए यह विषय संतुलित दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। निर्दोष व्यक्ति पर मुकदमे का प्रभाव- यदि कोई व्यक्ति वास्तव में झूठे मुकदमे में फँस जाता है, तो उसका प्रभाव केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, नौकरी पर संकट आ सकता है, आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजरता है। वर्षों तक मुकदमा चलने के बाद यदि वह निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी खोया हुआ समय और सम्मान आसानी से वापस नहीं आता। दूसरी ओर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एससी-एसटी कानून और पॉक्सो अधिनियम लाखों वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। भारत में जातीय उत्पीड़न और बच्चों के साथ यौन अपराध आज भी गंभीर समस्या हैं। यदि इन कानूनों को कमजोर किया जाए या हर शिकायत को संदेह की दृष्टि से देखा जाए, तो वास्तविक पीड़ित न्याय पाने से वंचित हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसलिए चुनौती यह नहीं है कि कानून समाप्त कर दिए जाएँ, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका सही और निष्पक्ष उपयोग हो। देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। विशेष कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों की संख्या बढ़ने से न्यायिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सुनवाई में देरी के कारण न तो पीड़ित को समय पर न्याय मिल पाता है और न ही निर्दोष व्यक्ति को शीघ्र राहत। तेज और वैज्ञानिक जांच, पर्याप्त न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा समयबद्ध सुनवाई इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सरकार की जिम्मेदारी केवल कठोर कानून बनाना नहीं है, बल्कि उनकी निष्पक्ष क्रियान्वयन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। यदि कहीं झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं यदि वास्तविक पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर न्याय मिलना चाहिए। इस विषय पर कई विधि विशेषज्ञ निम्न सुधारों की आवश्यकता बताते हैं— निष्पक्ष और वैज्ञानिक पुलिस जांच। फॉरेंसिक साक्ष्यों का अधिक उपयोग। विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाना।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण। यदि अदालत यह पाए कि शिकायत जानबूझकर झूठी और दुर्भावनापूर्ण थी, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई। पुलिस और अभियोजन अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण। "सरकार और अदालतें धृतराष्ट्र बनी हुई हैं" जैसी अभिव्यक्ति एक राजनीतिक और भावनात्मक टिप्पणी हो सकती है, लेकिन वास्तविक समाधान तथ्यों और संस्थागत सुधारों में निहित है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में दो सिद्धांत समान रूप से महत्वपूर्ण हैं—दोषी को दंड मिले और निर्दोष को अनावश्यक दंड या उत्पीड़न न झेलना पड़े। इसलिए आवश्यकता न तो कानूनों को कमजोर करने की है और न ही हर शिकायत को झूठा मानने की। आवश्यकता ऐसी न्याय व्यवस्था की है जो वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाए, निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत बनाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:55:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मलिहाबाद में जमीन विवाद को लेकर पीड़ित परिवार ने लगाया पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप, जान का खतरा बताया</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>मलिहाबाद, लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">मलिहाबाद क्षेत्र के ग्राम रामपुर बस्ती में जमीन विवाद का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पुलिस लीपापोती कर रही है और उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी जान का खतरा बना हुआ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार के अनुसार, परिवार के सदस्य करन रावत, धर्म रावत, राजवीर रावत, नैना रावत  इस विवाद से प्रभावित हैं। उनका आरोप है कि गांव में जहां</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184305/the-victims-family-accused-the-police-of-pressurizing-them-regarding"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-29-at-21.42.46.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>मलिहाबाद, लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">मलिहाबाद क्षेत्र के ग्राम रामपुर बस्ती में जमीन विवाद का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पुलिस लीपापोती कर रही है और उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी जान का खतरा बना हुआ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार के अनुसार, परिवार के सदस्य करन रावत, धर्म रावत, राजवीर रावत, नैना रावत  इस विवाद से प्रभावित हैं। उनका आरोप है कि गांव में जहां एक बिस्वा जमीन की कीमत करीब 5 लाख रुपये है, वहीं उनके बड़े भाई को शराब पिलाकर बहला-फुसलाकर बेहद कम कीमत पर जमीन का बैनामा करा लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/whatsapp-image-2026-07-29-at-21.42.54.jpeg" alt="मलिहाबाद में जमीन विवाद को लेकर पीड़ित परिवार ने लगाया पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप, जान का खतरा बताया" width="1200" height="800"></img></p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ितों ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में ग्राम प्रधान रामशंकर की भूमिका संदिग्ध रही और उन्होंने साजिश के तहत जमीन का बैनामा कराया। और पूरा पैसा हड़प कर लिया उनका कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष आर्थिक एवं दस्तावेजी जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवार का यह भी आरोप है कि मलिहाबाद थाने में मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि एक दरोगा, जिसका वर्तमान में संबंधित हल्के से तबादला हो चुका है, फिर भी उन्हें फोन कर थाने बुला रहा है और जांच के नाम पर दबाव बना रहा है। पीड़ितों ने सवाल उठाया कि यदि जांच दस्तावेजों और बैंक खातों से संबंधित है तो उन्हें बार-बार थाने बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले में बैंक खातों, जमीन के बैनामे और अन्य दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार धमकाया जा रहा है, जिससे परिवार भय के माहौल में जी रहा है l मामले की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 16:38:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
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                <title>बीस दिन में दो बेटों की मौत से उजड़ा परिवार, बनपुरवा में संदिग्ध मौतों से सनसनी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
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<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हंडिया थाना क्षेत्र के बनपुरवा गांव में बीस दिनों के भीतर एक ही परिवार के दो सगे भाइयों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। लगातार हुई इन घटनाओं से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और मां की गोद सूनी हो गई। गांव में मातम के साथ-साथ लोगों में भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, 9 जून को परिवार के छोटे बेटे एवं नवविवाहित संतोष कुमार का शव गांव के बाहर नीम के पेड़ से फंदे के सहारे लटका मिला था।</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182674/family-devastated-by-death-of-two-sons-in-twenty-days"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img_20260703_194720.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हंडिया थाना क्षेत्र के बनपुरवा गांव में बीस दिनों के भीतर एक ही परिवार के दो सगे भाइयों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। लगातार हुई इन घटनाओं से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और मां की गोद सूनी हो गई। गांव में मातम के साथ-साथ लोगों में भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, 9 जून को परिवार के छोटे बेटे एवं नवविवाहित संतोष कुमार का शव गांव के बाहर नीम के पेड़ से फंदे के सहारे लटका मिला था। उस समय भी परिजनों ने घटना को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई थी। हालांकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। परिवार अभी इस गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि 3 जुलाई को बड़े भाई सुशील कुमार का शव घर के टीन शेड वाले कमरे में दुपट्टे के सहारे लटका मिला। लगातार दो भाइयों की मौत से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मृतकों के परिजनों का आरोप है कि दोनों भाइयों की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है। मृतकों के भाई ने स्थानीय विधायक समेत पांच लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर देकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि पहली घटना की निष्पक्ष जांच समय पर होती तो शायद दूसरी घटना टाली जा सकती थी। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाकर जाम समाप्त कराया और भरोसा दिलाया कि मामले की हर पहलू से निष्पक्ष जांच की जाएगी। </div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 22:04:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत,निष्पक्ष जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी।</strong> नैनी क्षेत्र के इंदलपुर ग्राम में जल संस्थान कर्मी इंद्रजीत भारतीया (30) की खुदकुशी के मामले में उसकी मां इन्द्रकली ने सवाल उठाया है। जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायती प्रार्थना पत्र देकर बेटे की मौत की जांच अपराध शाखा पुलिस से कराने की मांग की है।  मृतक आश्रित उसकी मां इन्द्रकली पत्नी स्वर्गीय हरिश्चंद्र ने जनसुनवाई पोर्टल में दर्ज कराई गई शिकायत में बेटे की हत्या किए जाने का शक जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञात हो कि 24 जनवरी 2026 की रात में इंद्रजीत भारतीया (30) पुत्र स्वर्गीय हरिश्चंद्र भारतीया का शव उसके कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला था। इंद्रजीत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171815/complaint-lodged-on-jansunwai-portal-demand-for-impartial-investigation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas49.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी।</strong> नैनी क्षेत्र के इंदलपुर ग्राम में जल संस्थान कर्मी इंद्रजीत भारतीया (30) की खुदकुशी के मामले में उसकी मां इन्द्रकली ने सवाल उठाया है। जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायती प्रार्थना पत्र देकर बेटे की मौत की जांच अपराध शाखा पुलिस से कराने की मांग की है।  मृतक आश्रित उसकी मां इन्द्रकली पत्नी स्वर्गीय हरिश्चंद्र ने जनसुनवाई पोर्टल में दर्ज कराई गई शिकायत में बेटे की हत्या किए जाने का शक जताया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञात हो कि 24 जनवरी 2026 की रात में इंद्रजीत भारतीया (30) पुत्र स्वर्गीय हरिश्चंद्र भारतीया का शव उसके कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला था। इंद्रजीत भारतीया जल संस्थान के इंदलपुर पानी की टंकी में तैनात रहा। उसकी मां इन्द्रकली ने बेटे की हत्या का शक जाहिर की है।  और मामले में निष्पक्ष जांच व एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/171815/complaint-lodged-on-jansunwai-portal-demand-for-impartial-investigation</link>
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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 21:46:41 +0530</pubDate>
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