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                <title>महंगाई - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>महंगाई RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कुरुक्षेत्र: राहुल को प्रतिरोध का नारा बनाएगा विपक्ष का चेहरा, 2029 में PM मोदी और नेता विपक्ष का सीधा मुकाबला।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181388/kurukshetra-will-make-rahul-a-slogan-of-resistance-face-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/43.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी के बीच ही सीधा मुकाबला होगा।नतीजतन राहुल गांधी खुद खुलकर मैदान में आ गये हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा कि अब देश में चुनावों की परंपरागत राजनीति से आगे प्रतिरोध की राजनीति का युग आ गया है। प्रतिरोध की राजनीति से राहुल गांधी का सीधा मतलब है कि मोदी सरकार को संसद के साथ-साथ विपक्ष अब सड़क पर भी घेरेगा। राहुल ने कहा कि सभी संस्थाएं सरकार के कब्जे में हैं और चुनावों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए कांग्रेस को प्रतिरोध की राजनीति के अपने पुराने दौर में लौटना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल ने सिर्फ एलान ही नहीं किया बल्कि उन्होंने प्रतिरोध की राजनीति की शुरुआत करते हुए सबसे पहले युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।इसकी शुरुआत वह कोटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना और दिल्ली में छात्र युवा सम्मेलन से कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा और एनडीए तो 2014 से ही चाहे लोकसभा हो या विधानसभा का चुनाव नरेंद्र मोदी को आगे करके उनके नाम पर ही हर चुनाव लड़ रहा है। सत्ता पक्ष के लिए नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और नाम चुनावों में जीत का सबसे बड़ा मंत्र है जबकि इसके विपरीत कांग्रेस मोदी के मुकाबले अपने किसी भी नेता को आगे करके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी इंडिया गठबंधन भी मोदी के मुकाबले बिना कोई चेहरा आगे लाए ही मैदान में उतरा था। लेकिन अब कांग्रेस जिस राह पर चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे यह साफ है कि अब उसे नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी को आगे करने में कोई गुरेज नहीं है। अब राहुल गांधी खुद आगे बढ़कर सरकार के खिलाफ होने वाली लड़ाई की कमान संसद के साथ सड़क पर भी संभालने के लिए तैयार हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उधर विपक्षी खेमे की तस्वीर अब खासी बदल गई है। हाल ही में हुए पांच विधानसभा चुनावों में प.बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के किले ढह गए और इसके पहले बिहार में तेजस्वी यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे भाजपा के हाथों हार चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस भी 2024 के बाद हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र और असम में भाजपा से हारी है लेकिन केरल में उसकी जीत और तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके सरकार में शामिल होने से पार्टी को फिर आक्सीजन मिल गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए अब मामला कांग्रेस और क्षत्रपों के बीच बराबरी का हो गया है और अब कोई भी क्षत्रप कांग्रेस को यह उलाहना नहीं दे सकता कि भाजपा का मुकाबला क्षेत्रीय दल ही सफलता पूर्वक कर पाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षत्रपों में अब झारखंड में हेमंत सोरेन अकेले ऐसे नेता हैं जो दो बार लगातार भाजपा को चुनावी मात दे चुके हैं और कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन है जबकि 2014</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2017</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2019 और 2022 में लगातार भाजपा के हाथों चुनावी हार झेल चुके अखिलेश यादव ने 2024 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी देकर फिर से 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए खम ठोंक रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब 2027 में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां चुनाव में भाजपा का सपा से मुकाबला होगा और कांग्रेस उसकी सहयोगी पार्टी होगी। वहीं पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा क्योंकि यहां भाजपा अभी अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है और अकाली दल के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले सारे राज्यों उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिमाचल प्रदेश</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होगा। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस बीआरएस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। यहां भी कांग्रेस मुख्य किरदार होगी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>*सपा का महंगाई, बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शनः तहसील तक नारेबाजी करते हुए पहुंचे, बोले- छात्र घर नहीं पहुंच पाते और पेपर लीक हो जाता है*</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> समाजवादी पार्टी विधानसभा क्षेत्र 302 शोहरतगढ़ द्वारा पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी  के नेतृत्व में तथा सपा जिलाध्यक्ष  लाल जी यादव  की अध्यक्षता में शोहरतगढ़ तहसील पर महंगाई, बेरोजगारी, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली के दामों में बड़े पैमाने पर मूल्य वृद्धि तथा डीजल पेट्रोल और रसोई गैस की भारी किल्लत, अघोषित बिजली कटौती, किसानों को खाद बीज तथा डीजल का ना मिल पाना, नीट परीक्षा पेपर लीक, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ,ध्वस्त कानून व्यवस्था, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  के परिवार पर नीच मानसिकता व अराजक तत्वों के</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181238/sps-protest-against-inflation-and-unemployment-reached-the-tehsil-shouting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781528894412.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> समाजवादी पार्टी विधानसभा क्षेत्र 302 शोहरतगढ़ द्वारा पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी  के नेतृत्व में तथा सपा जिलाध्यक्ष  लाल जी यादव  की अध्यक्षता में शोहरतगढ़ तहसील पर महंगाई, बेरोजगारी, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली के दामों में बड़े पैमाने पर मूल्य वृद्धि तथा डीजल पेट्रोल और रसोई गैस की भारी किल्लत, अघोषित बिजली कटौती, किसानों को खाद बीज तथा डीजल का ना मिल पाना, नीट परीक्षा पेपर लीक, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ,ध्वस्त कानून व्यवस्था, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  के परिवार पर नीच मानसिकता व अराजक तत्वों के द्वारा परिवार पर अभद्र व अशोभनीय टिप्पणी करने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग तथा भाजपा सरकार के जन विरोधी नीतियों के खिलाफ अपने हजारों समाजवादी पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ शोहरतगढ़ तहसील पर उप जिलाधिकारी के माध्यम से राजपाल  के नाम ज्ञापन देकर जन समस्याओं के समाधान की मांग किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">       पूर्व विधायक चौधरी अमर सिंह  ने संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है अपराधियों का बोलबाला है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए, अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है डीजल पेट्रोल रसोई गैस और बिजली के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर प्रदेश की जनता पर महंगाई का बोझ लाद दिया गया पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल है यह सरकार किसानों को खाद बीज और डीजल तक उपलब्ध नहीं कर पा रही है हमारी मांग है कि डीजल पेट्रोल और रसोई गैस बिजली की मूल्य वृद्धि वापस लिया जाए और इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, धान के बेहन डालने का समय चल रहा है किसानों को समय से खाद और डीजल उपलब्ध कराया जाए, नीट परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है और इस सरकार में पी डी ए आरक्षण का सबसे ज्यादा घोटाला हुआ है प्रदेश की जनता इस जन विरोधी सरकार को हटाने का मन बना चुकी है यह सरकार जनहित के हर मुद्दे पर विफल है 2027 का चुनाव देश और संविधान को बचाने का चुनाव है ।</div>
<div style="text-align:justify;">     धरना प्रदर्शन में प्रदेश सचिव बेचई, अफसर हुसैन रिजवी, राममिलन भारती, मुरलीधर मिश्रा, घिसियावन यादव, कमरूज्जमा खान, खलकुल्लाह खान, बहराइची प्रसाद प्रेमी, अब्दुल कलाम सिद्दीकी, हरिराम यादव, पारसनाथ विश्वकर्मा, रिंदु पासवान ,रामसेवक लोधी, शकील शाह, चंद्रभान पहलवान, घनश्याम जायसवाल, सुनीता गोस्वामी, मोहम्मद जावेद, चंद्रभूषण आर्य, सत्येंद्र यादव ,मोहम्मद यूनुस, नौशाद मलिक,हरिशंकर मौर्य, राम शंकर मौर्य, जलालुद्दीन खान, मनोज मिश्रा, चंचल रावत, राजकुमार चौधरी, सुनील वर्मा, शिव शंकर चौधरी, अभिरंजन चौधरी ,रामदास चौधरी ,माखन गुप्ता ,विजय सिंह चौधरी ,सुनील चौरसिया, शालिग्राम यादव, सुनील यादव, मोहम्मद अकरम ,मोहम्मद शमी ,मोहम्मद इश्तियाक, किशन पटेल ,अनूप चौधरी, पुनीत मिश्रा ,रामदेव चौधरी, बुलर यादव, रंजीत, पारस चौधरी, देव प्रकाश चौधरी, विंध्याचल चौधरी, नुरुल हुदा, रमेश लोधी, लाल जी चौधरी,  रामचरण चौधरी, संजय रस्तोगी ,अंगद यादव आदि  उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:55:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सपा का हल्ला बोल, कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता सरस सिंह </strong></span></p>
<p>  </p>
<p>प्रयागराज।समाजवादी पार्टी  ने मंगलवार को कथित पेपर लीक, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न तथा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और बाद में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता हाथों में बैनर, पोस्टर और पार्टी के झंडे लेकर एकत्र हुए। इसके बाद जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कार्यालय की ओर कूच किया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180524/sps-noise-against-paper-leak-inflation-and-unemployment-strong-demonstration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/screenshot_20260602-165545.facebook.png" alt=""></a><br /><p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता सरस सिंह </strong></span></p>
<p> </p>
<p>प्रयागराज।समाजवादी पार्टी  ने मंगलवार को कथित पेपर लीक, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न तथा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और बाद में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता हाथों में बैनर, पोस्टर और पार्टी के झंडे लेकर एकत्र हुए। इसके बाद जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कार्यालय की ओर कूच किया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए युवाओं, किसानों, महिलाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।</p>
<p>प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश सरकार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि बार-बार परीक्षा पत्र लीक होने से लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। युवा वर्षों तक मेहनत करने के बावजूद भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता न होने के कारण निराश और हताश हैं।</p>
<p>सपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय केवल घोषणाएं करने में व्यस्त है। इसके अलावा बढ़ती महंगाई के कारण आम जनता का जीवन कठिन होता जा रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं पर पड़ रहा है, जिससे लोगों की आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं।</p>
<p>महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी सपा नेताओं ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।</p>
<p>कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक चले प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इसके बाद सपा प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने, महंगाई नियंत्रित करने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 23:27:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो जून की रोटी : संघर्ष, सम्मान और समाज की जिम्मेदारी - पत्रकार सरस सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>"दो जून की रोटी"— यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का सबसे बड़ा सच है। जब कोई व्यक्ति कहता है कि उसे "दो जून की रोटी" कमानी है, तो उसके पीछे सिर्फ भोजन की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य की चिंता छिपी होती है।</p>
<p>भारत गांवों का देश है। यहां खेतों में पसीना बहाने वाला किसान, सड़क किनारे रिक्शा चलाने वाला मजदूर, ईंट-भट्ठों पर काम करने वाली महिलाएं, निर्माण स्थलों पर दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिक और छोटे दुकानदार— सभी का संघर्ष कहीं न कहीं दो जून की रोटी से जुड़ा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180484/june-2nd-bread-struggle-respect-and-responsibility-of-society"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/messenger_creation_7070006110035249701.jpeg" alt=""></a><br /><p>"दो जून की रोटी"— यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का सबसे बड़ा सच है। जब कोई व्यक्ति कहता है कि उसे "दो जून की रोटी" कमानी है, तो उसके पीछे सिर्फ भोजन की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य की चिंता छिपी होती है।</p>
<p>भारत गांवों का देश है। यहां खेतों में पसीना बहाने वाला किसान, सड़क किनारे रिक्शा चलाने वाला मजदूर, ईंट-भट्ठों पर काम करने वाली महिलाएं, निर्माण स्थलों पर दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिक और छोटे दुकानदार— सभी का संघर्ष कहीं न कहीं दो जून की रोटी से जुड़ा है। सुबह सूरज निकलने से पहले घर से निकलना और शाम को थके कदमों से लौटना, उनके जीवन की रोजमर्रा की कहानी है।</p>
<p>आज विज्ञान और तकनीक के इस आधुनिक युग में जहां एक ओर देश चांद और मंगल तक पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज का एक बड़ा वर्ग अभी भी पेट भरने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। महंगाई, बेरोजगारी और संसाधनों की असमानता ने गरीब और मध्यम वर्ग की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी किसी युद्ध जीतने से कम नहीं।</p>
<p>दो जून की रोटी केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। जब कोई बच्चा भूखे पेट सोता है, तो यह केवल उसके परिवार की विफलता नहीं होती, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के लिए चिंता का विषय होता है। भूख इंसान की सबसे बड़ी मजबूरी है और जब पेट खाली होता है तो सपने, शिक्षा और विकास की बातें पीछे छूट जाती हैं।</p>
<p>हालांकि सरकारों द्वारा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। राशन वितरण, मनरेगा, गरीब कल्याण योजनाएं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम लाखों लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं। लेकिन यह भी सच है कि जब तक हर व्यक्ति को सम्मानजनक रोजगार और पर्याप्त आय उपलब्ध नहीं होगी, तब तक दो जून की रोटी का संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकेगा।</p>
<p>समाज के सक्षम वर्ग की भी जिम्मेदारी है कि वह जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए। किसी भूखे को भोजन कराना केवल दान नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। हमें यह समझना होगा कि किसी की थाली में भोजन पहुंचाना, उसके जीवन में उम्मीद पहुंचाने जैसा है।</p>
<p>दो जून की रोटी की अहमियत वही समझ सकता है जिसने भूख की पीड़ा महसूस की हो। जिन लोगों के घरों में भोजन आसानी से उपलब्ध है, उन्हें कभी उन हाथों को भी देखना चाहिए जो दिनभर मेहनत करके भी अपने परिवार के लिए पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पाते। यह संवेदनशीलता ही एक बेहतर समाज की पहचान है।</p>
<p>अंततः, दो जून की रोटी केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि इंसान के सम्मान, आत्मनिर्भरता और जीवन के अधिकार का प्रतीक है। जब देश का हर नागरिक बिना किसी चिंता के अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने में सक्षम होगा, तभी सच्चे अर्थों में समृद्ध और विकसित भारत का सपना साकार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180484/june-2nd-bread-struggle-respect-and-responsibility-of-society</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 23:27:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी, 19 किलो सिलेंडर हुआ 42 रुपये महंगा।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>स्वतंत्र प्रभात रिपोर्ट </strong></span></p>
<p>प्रयागराज। आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बाद अब एलपीजी गैस के मोर्चे पर भी झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलो वाले कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद देश के विभिन्न महानगरों में कामर्शियल गैस सिलेंडर महंगा हो गया है।</p>
<p>नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलो वाले कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3113.50 रुपये हो गई है, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 3255.50 रुपये पहुंच गई है। इसके अलावा 5 किलो वाले एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180457/increase-in-the-price-of-commercial-lpg-cylinder-19-kg"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/screenshot_20260601-161535.google.png" alt=""></a><br /><p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>स्वतंत्र प्रभात रिपोर्ट </strong></span></p>
<p>प्रयागराज। आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बाद अब एलपीजी गैस के मोर्चे पर भी झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलो वाले कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद देश के विभिन्न महानगरों में कामर्शियल गैस सिलेंडर महंगा हो गया है।</p>
<p>नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलो वाले कामर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3113.50 रुपये हो गई है, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 3255.50 रुपये पहुंच गई है। इसके अलावा 5 किलो वाले एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडर के दाम में भी 11 रुपये की वृद्धि की गई है।</p>
<p>हालांकि राहत की बात यह है कि 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं पर तत्काल अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।</p>
<p><strong>होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ेगा असर</strong></p>
<p>कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है। ऐसे में कीमतों में हुई बढ़ोतरी से इन कारोबारों की संचालन लागत बढ़ेगी। व्यापारियों का कहना है कि गैस महंगी होने से खाद्य पदार्थों की उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार यदि कमर्शियल गैस की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो बाहर खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना है। शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में कैटरिंग सेवाएं भी महंगी हो सकती हैं।</p>
<p><strong>घरेलू उपभोक्ताओं को राहत</strong></p>
<p>तेल कंपनियों द्वारा घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किए जाने से करोड़ों परिवारों को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भविष्य में घरेलू गैस दरों पर भी पड़ सकता है।</p>
<p>कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब महंगाई पहले से ही आम लोगों और व्यापारिक वर्ग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अब सभी की नजरें आने वाले महीनों में ईंधन और गैस की कीमतों पर टिकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 17:34:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बढ़ती कीमतों से बिगड़ी मध्यवर्गीय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने लगभग प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने विशेष रूप से भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक संरचना को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल केवल वाहन चलाने के साधन नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ हैं। परिवहन, कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र लगभग सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डीजल की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। देश में अधिकांश माल ढुलाई ट्रकों के माध्यम से होती है। जब डीजल महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि खाद्यान्न, फल-सब्जियां, दूध, दालें, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें स्वतः बढ़ने लगती हैं। व्यापारी अतिरिक्त लागत का भार अंततः उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। इस प्रकार महंगाई का एक ऐसा चक्र प्रारंभ हो जाता है, जिससे सामान्य नागरिक बच नहीं पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय मध्यम वर्ग पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने उसकी मासिक आय और व्यय के संतुलन को और बिगाड़ दिया है। जिन परिवारों के पास निजी वाहन हैं, उनके लिए कार्यालय, विद्यालय और अन्य आवश्यक यात्राओं का खर्च बढ़ गया है। वहीं रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप परिवारों को अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच समझौता करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई का सामाजिक प्रभाव भी कम गंभीर नहीं है। जब आय स्थिर हो और खर्च लगातार बढ़ता जाए, तो परिवारों में तनाव बढ़ने लगता है। आर्थिक दबाव पारिवारिक संबंधों, सामाजिक सहभागिता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मध्यम वर्ग, जो समाज की स्थिरता और विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, स्वयं असुरक्षा और भविष्य की चिंताओं से घिर जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुआ है। डीजल से चलने वाले पंप, ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की लागत बढ़ने से खेती महंगी हो गई है। उत्पादन लागत बढ़ने पर किसान अपनी उपज का उचित मूल्य चाहते हैं, जिससे बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस प्रकार महंगाई का प्रभाव खेत से लेकर थाली तक दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थशास्त्री लंबे समय से कहते रहे हैं कि ऊर्जा की कीमतें किसी भी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने अनेक अवसरों पर ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया था। वहीं अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भी विकास को केवल आय वृद्धि नहीं बल्कि जीवन-स्तर की गुणवत्ता से जोड़कर देखा है। यदि बढ़ती महंगाई लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं को प्रभावित करती है, तो विकास का वास्तविक लाभ समाज तक नहीं पहुंच पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्ष की राजनीति के स्थान पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक प्रयास करने होंगे। सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और विद्युत वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोलियम पर निर्भरता कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती पेट्रोलियम कीमतें केवल आर्थिक समस्या नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई हैं। युद्धों और वैश्विक तनावों की कीमत अंततः आम नागरिक चुकाता है। इसलिए विश्व शांति, ऊर्जा सुरक्षा और संतुलित आर्थिक नीतियां ही मध्यम वर्ग को राहत प्रदान कर सकती हैं। जब तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक महंगाई का दबाव भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करता रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:43:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल 87 तो डीजल 91 पैसे महंगा, 10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल के दाम में </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi">  पैसे प्रति लीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल में </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi">  पैसे प्रति लीटर और सीएनजी में </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi">  रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीते </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi">  दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi">  मई को पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी के दाम में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi">  रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके</span>19</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179980/petrol-became-costlier-by-87-paise-and-diesel-by-91"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/petrol-1-2.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल के दाम में </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल में </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर और सीएनजी में </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीते </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी के दाम में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे और डीजल </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे महंगा हुआ। लगातार बढ़ोतरी के चलते पिछले </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये तक का इजाफा हो चुका है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीएनजी के दाम भी दूसरी बार बढ़ाए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत </span>98.64<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से बढ़कर </span>99.51<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल का दाम </span>91.58<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से बढ़कर </span>92.49<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इसके अलावा सीएनजी अब </span>81.09<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार बड़ रहे तेल की कीमतों को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने एक पर एक पोस्ट में लिखा है कि महंगाई मैन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने पेट्रोल-डीजल पर </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए बढ़ा दिए। आज फिर पेट्रोल </span>94<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे और डीजल </span>95<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे महंगा कर दिया गया। मोदी को बस तेल कंपनियों के फायदे की चिंता है. एक तरफ जहां दुनियाभर की सरकारें अपनी जनता को राहत दे रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार जनता को ही लूटने में लगी है। कभी तो जनता के भले के बारे में सोच लो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब तक पूंजीपतियों का फायदा कराते रहोगे</span>?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:26:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महंगाई और बेकारी में मजदूरों को बनाया जा रहा गुलाम - दिनकर</title>
                                    <description><![CDATA[ठेका मजदूर यूनियन का डिबुलगंज में हुआ 22 वां जिला सम्मेलन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148959/laborers-are-being-made-slaves-in-inflation-and-unemployment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img_20250223_191846.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अजयंत सिंह ( संवाददाता) </strong></p>
<p><strong>अनपरा/ सोनभद्र-</strong></p>
<p style="text-align:justify;">ठेका मजदूर यूनियन के वार्षिक सम्मेलन की तैयारी में अनपरा, ओबरा समेत कई उद्योगों में किए गए सर्वे में साफ दिखा कि महंगाई और बेकारी ने मजदूरों के हालात को बेहद खराब कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी क्रय शक्ति कमजोर हुई है और जीवन जीने की मजबूरी में वह कर्ज के भंवर जाल में फंस रहे है। मजदूरों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें आधुनिक गुलामी में धकेला जा रहा है। श्रम कानूनों में मिले अधिकारों को खत्म करने के लिए लेबर कोड लाना और काम के घंटे 12 करना इसी का हिस्सा है। लोकतांत्रिक अधिकारों को लगातार छीना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे मुल्क में तानाशाही कायम है। अपने अधिकारों के लिए बोलना भी गुनाह हो गया है। उक्त बातें डिबुलगंज के रोटरी क्लब मैदान में आज हुए ठेका मजदूर यूनियन के 22 वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व श्रम बंधु व एआईपीएफ प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने कहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दस साल से न्यूनतम वेतन का वेज रिवीजन नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">कानून विरुद्ध एक ही स्थान पर बेहद कम मजदूरी पर मजदूरों से ठेका प्रथा में काम कराया जा रहा है। न्यूनतम मजदूरी समेत मजदूरों को हासिल विधिक अधिकार भी नहीं सुनिश्चित किये गए है। हालात इतने बदतर हैं कि मजदूरों को आम तौर पर सुरक्षा उपकरण भी मुहैया नहीं कराये जाते। कहा कि आज के बेहद चुनौतिपूर्ण माहौल में मजदूरों का मुख्य कार्यभार कि इससे निपटने के लिए बड़े पैमाने पर संवाद कार्यक्रम व वैचारिक अभियान चलाने का है।</p>
<p style="text-align:justify;">उम्मीद है कि सम्मेलन इसे साकार करने के लिए कार्यनीति बनायेगा।रोजगार अधिकार अभियान के कोऑर्डिनेटर राजेश सचान ने कहा कि यदि देश के 200 बड़े कॉर्पोरेट घरानों पर संपत्ति व उत्तराधिकार टैक्स लगाया जाए तो ठेका मजदूरों को पक्की नौकरी, आंगनबाड़ी, आशा समेत मानदेय व संविदा कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतनमान दिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं देश के प्रख्यात अर्थशास्त्रियों का तो यह कहना है कि इस टैक्स से प्राप्त धन से देश के हर नागरिक के गरिमापूर्ण जीवन के संवैधानिक अधिकार की गारंटी, शिक्षा-स्वास्थ्य, रोजगार को सुनिश्चित करना, एक करोड़ खाली सरकारी पदों को भरने और नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा जैसे सवालों को हल किया जा सकता है।इन ज्वलंत मुद्दों को लेकर देशभर के छात्र युवा संगठनों, मजदूर, किसान आंदोलनों और समाज सरोकारी लोगों द्वारा चलाए जा रहे रोजगार अधिकार अभियान से जुड़ने की अपील की।   </p>
<p style="text-align:justify;">सम्मेलन में एक वर्ष के वार्षिक कामकाज की रिपोर्ट मंत्री तेजधारी गुप्ता ने रखी जिस पर विभिन्न उद्योगों से आए हुए प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखें। रिपोर्ट सर्वसम्मति से पारित की गई। इसके बाद हुए सांगठनिक सत्र में कृपाशंकर पनिका को पुन: अध्यक्ष और तेजधारी गुप्ता को मंत्री चुना गया। इसके अलावा तीरथराज यादव को उपाध्यक्ष, मोहन प्रसाद को संयुक्त मंत्री, मंगरु प्रसाद गोंड को प्रचार मंत्री, इंद्रदेव खरवार को कोषाध्यक्ष और शेख इम्तियाज को कार्यालय मंत्री चुना गया। सम्मेलन की अध्यक्षता कृपाशंकर पनिका ने और संचालन तेजधारी गुप्ता ने किया। सम्मेलन को सामाजिक कार्यकर्ता रामधनी विश्वकर्मा, एआईपीएफ जिला सचिव इंद्रदेव खरवार, युवा मंच की जिला संयोजक सविता गोंड, अध्यक्ष रूबी गोंड, युवा मंच नेता इंजीनियर राम कृष्ण बैगा, मजदूर किसान मंच के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गोंड, प्रशांत दूबे, ज्ञानवेंद्र सिंह, मसीदुल्लाह अंसारी, विनोद यादव, राम चन्द्र पटेल आदि ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में मुनेश्वर पनिका और राजकुमारी गोंड ने जन गीतों को प्रस्तुत किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 21:46:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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                <title>देश में महंगाई आसमान छू  रही है</title>
                                    <description><![CDATA[<div>देश में महंगाई आसमान छू  रही है, बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, केंद्र की भाजपा सरकार में अच्छे दिनों का सब्जबाग दिखाकर देश का बुरा हाल कर दिया ।</div>
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<div>यह बातें जिला कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष डॉ राजेंद्र कुमार दुबे राजन ,प्रदेश सचिव वसीम अंसारी, वरिष्ठ कांग्रेसी हसनैन अंसारी जी ने संयुक्त रूप से कहीं ।वह बुधवार को गिरधरपुर स्थित जिला कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे ।</div>
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<div>उन्होंने मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल की विफलताओं को रेखांकित करती हुई बुकलेट भी जारी की ।उन्होंने कहा कि देश में अमीरों की अमीरी बड़ी जबकि गरीब</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129859/inflation-is-skyrocketing-in-the-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/महंगाई.jpg" alt=""></a><br /><div>देश में महंगाई आसमान छू  रही है, बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, केंद्र की भाजपा सरकार में अच्छे दिनों का सब्जबाग दिखाकर देश का बुरा हाल कर दिया ।</div>
<div> </div>
<div>यह बातें जिला कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष डॉ राजेंद्र कुमार दुबे राजन ,प्रदेश सचिव वसीम अंसारी, वरिष्ठ कांग्रेसी हसनैन अंसारी जी ने संयुक्त रूप से कहीं ।वह बुधवार को गिरधरपुर स्थित जिला कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे ।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल की विफलताओं को रेखांकित करती हुई बुकलेट भी जारी की ।उन्होंने कहा कि देश में अमीरों की अमीरी बड़ी जबकि गरीब और गरीब हुए हैं ,देश की संपत्तियों को बेचा जा रहा है ,आर्थिक विषमताएं  बढ़ रही है, 2014 के बाद से सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी ने काले धन को तो खत्म नहीं किया बल्कि छोटे व्यवसायियों पर करारी चोट पड़ी ।दलितों अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों में भी वृद्धि हुई है ।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जाति जनगणना की मांग को की नजर अंदाज किया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि क्या किसानों की आय दोगुनी हुई ,देश की सीमाओं के लिए असुरक्षा भरे दिन है,महामारी की विभीषिका में मजदूरों के दर बदर भटकने के दिन और संवैधानिक संस्थाओं के लिए दमन भरे दिन परोसे गए हैं। मोदी सरकार ने 9 साल में देश के लिए कुछ हासिल नहीं किया, वह सिर्फ अपने पूंजीपति दोस्तों के लिए अच्छे दिन लेकर आए हैं।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर युवा जिला अध्यक्ष नाजिम अली ,हरीशचंद्र दूबे,परवेज हाशमी  भी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 19:31:05 +0530</pubDate>
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