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                <title>Religious Event Siddharthnagar - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Religious Event Siddharthnagar RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भांडेर का आयोजन, प्रसाद वितरण</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर-</strong> जिले के जोगिया क्षेत्र में  मां जोगमाया मंदिर  के पावन प्रांगण में  आस्था और सेवा का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। केंद्रीय संयुक्त सचिव शिक्षा मंत्रालय गोविंद जायसवाल  द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया । इस अवसर पर गोविंद जायसवाल और उनके परिवार द्वारा पूजन किया गया गोविंद जायसवाल  ने अपनी पत्नी चंदन चौधरी आईपीएस, बच्चों के साथ जोगमाया मंदिर में माथा टेका भंडारे का आयोजन करते हुए उन्होंने कहा की माता की कृपा सदैव हमारे पुरे परिवार पर बनी रहे और माता सभी भक्तों  का कल्याण करें उन्होंने लोगों  को प्रसाद वितरण किया भंडारे में सैकड़ो</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175029/organization-of-bhander-and-distribution-of-prasad"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1775224695344.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर-</strong> जिले के जोगिया क्षेत्र में  मां जोगमाया मंदिर  के पावन प्रांगण में  आस्था और सेवा का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। केंद्रीय संयुक्त सचिव शिक्षा मंत्रालय गोविंद जायसवाल  द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया । इस अवसर पर गोविंद जायसवाल और उनके परिवार द्वारा पूजन किया गया गोविंद जायसवाल  ने अपनी पत्नी चंदन चौधरी आईपीएस, बच्चों के साथ जोगमाया मंदिर में माथा टेका भंडारे का आयोजन करते हुए उन्होंने कहा की माता की कृपा सदैव हमारे पुरे परिवार पर बनी रहे और माता सभी भक्तों  का कल्याण करें उन्होंने लोगों  को प्रसाद वितरण किया भंडारे में सैकड़ो की संख्या में आए भक्तों ने मां का आशीर्वाद लिया और प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर कविता साहनी, शिवमंगल साहनी आदि मौजूद रहे। </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:28:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दूसरों के दुख हरने वाला ही ईश्वर की कृपा  का  योग्य  हैं   -  कैलाश नाथ तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div>
<div>  <strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर । </strong></div>
<div>  </div>
<div>  </div>
<div>नगर पंचायत बिस्कोहर के भरौली कैथोलिया में चल रहे पांच दिवसीय गायत्री महायज्ञ व संगीतमय पावन प्रज्ञा पुराण कथा के तीसरे दिन शनिवार की शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने प्रज्ञा पुराण की महिमा बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करता है और दूसरों के सुख से सुखी होता है, वही ईश्वर की कृपा का सच्चा अधिकारी बनता है।</div>
<div>  </div>
<div>  </div>
<div>उन्होंने कहा कि मानव जन्म ईश्वर का अनमोल उपहार है, जो बार-बार नहीं मिलता। इसलिए मनुष्य को अपने</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172846/only-the-one-who-removes-the-suffering-of-others-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1772971138098.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div>
<div> <strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर । </strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>नगर पंचायत बिस्कोहर के भरौली कैथोलिया में चल रहे पांच दिवसीय गायत्री महायज्ञ व संगीतमय पावन प्रज्ञा पुराण कथा के तीसरे दिन शनिवार की शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने प्रज्ञा पुराण की महिमा बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करता है और दूसरों के सुख से सुखी होता है, वही ईश्वर की कृपा का सच्चा अधिकारी बनता है।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि मानव जन्म ईश्वर का अनमोल उपहार है, जो बार-बार नहीं मिलता। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन को सद्कर्मों में लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कर्मों के फल से कोई भी बच नहीं सकता, मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल अवश्य मिलता है।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>कथा के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन स्वयं एक प्रत्यक्ष देवता है, जिसकी सच्चे मन से साधना और पूजा करने पर मनुष्य के सभी कार्य सफल हो सकते हैं। प्रज्ञा का अर्थ सद्बुद्धि से है, जो कभी विचलित न हो। जब मनुष्य के भीतर प्रज्ञा का जागरण होता है, तभी वह महानता के मार्ग पर आगे बढ़ता है।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम के अंत में मां गायत्री व प्रज्ञा पुराण की आरती की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती में भाग लिया।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> इस मौके पर मिठाई लाल यादव, द्वारपाल चौरसिया, गोवर्धन यादव, जगदम्बा प्रसाद, मस्तराम यादव, वासुदेव पांडेय आदर्श राम मौर्य, जंगली यादव, लवकुश यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:12:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम-केवट संवाद प्रसंग की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> भनवापुर क्षेत्र के कमसार गांव के राम-जानकी मन्दिर पर चल रहे नौ दिवसीय संगीतमयी श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन बृहस्पतिवार रात को श्री धाम अयोध्या से पधारी कथावाचिका देवी ज्योति किशोरी  ने प्रभु श्रीराम के वनवास से लेकर केवट संवाद तक का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया। कथा का श्रवण कर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और  जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा पंडाल गूंज उठा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कथावाचिका ने बताया कि जब अयोध्या में महारानी कैकेयी के वरदान के कारण प्रभु श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मिला, तब उन्होंने बिना किसी विरोध के</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171760/the-audience-became-emotional-after-listening-to-the-story-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1772197364052.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,</strong> भनवापुर क्षेत्र के कमसार गांव के राम-जानकी मन्दिर पर चल रहे नौ दिवसीय संगीतमयी श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन बृहस्पतिवार रात को श्री धाम अयोध्या से पधारी कथावाचिका देवी ज्योति किशोरी  ने प्रभु श्रीराम के वनवास से लेकर केवट संवाद तक का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया। कथा का श्रवण कर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और  जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा पंडाल गूंज उठा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कथावाचिका ने बताया कि जब अयोध्या में महारानी कैकेयी के वरदान के कारण प्रभु श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मिला, तब उन्होंने बिना किसी विरोध के पिता की आज्ञा को शिरोधार्य किया। राजमहल के सुख-सुविधाओं का त्याग कर श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान कर गए। इस प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम का वनगमन त्याग, मर्यादा और आज्ञापालन की सर्वोच्च मिसाल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कथा के दौरान जब प्रभु श्रीराम के निषादराज से मिलन और गंगा तट पर केवट प्रसंग का वर्णन हुआ, तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथावाचिका ने बताया कि केवट ने प्रभु के चरण पखारने का आग्रह करते हुए कहा कि जिस प्रकार पत्थर भी आपके चरणस्पर्श से नारी बन गया, वैसे ही मेरी नाव भी कहीं दिव्य रूप न धारण कर ले। इस प्रसंग में छिपी भक्ति और समर्पण की भावना ने सभी को भावुक कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि केवट संवाद हमें सिखाता है कि ईश्वर को पाने के लिए निष्कपट प्रेम और श्रद्धा ही पर्याप्त है। प्रभु श्रीराम ने केवट को गले लगाकर यह संदेश दिया कि भगवान के द्वार पर जाति-पाति और ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता।कथा के अंत में आरती और भजन-कीर्तन के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान आचार्य दुर्गेश शुक्ल,मनीष गुप्ता,विनय तिवारी, सचिन तिवारी, शिवा विश्वकर्मा, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, राजेंद्र यादव आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे ।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 20:25:47 +0530</pubDate>
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