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                <title>होली 2026 - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>होली 2026 RSS Feed</description>
                
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                <title>आत्मीय इंद्रधनुषी रंगों से ओत-प्रोत हर्षौल्लास का वैश्विक महापर्व होली</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">होली और होलिकात्सव यह एक ऐसा अद्भुत त्यौहार है जिसे देश मे अनेक धर्म संप्रदाय होने के बावजूद  इसे बहुत ही उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जाने वाला महापर्व माना गया है। इसे समरसता का एक बड़ा प्रतीक भी माना गया है, एकमात्र होली ही ऐसा सनातनी त्यौहार है जो भारत देश की धर्मनिरपेक्षता का जीता जागता  अभूतपूर्व उदाहरण है। भाईचारे की इस त्यौहार में रंगों की आत्मीयता से मिलन की मिठास दुगनी हो जाती है। वर्ग विभेद वाले इस त्यौहार में हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सब एकता पूर्वक इस पर्व को संपूर्ण गर्व के साथ से मनाते हैं।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172190/holi-a-global-festival-of-joy-filled-with-soulful-rainbow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1541469.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">होली और होलिकात्सव यह एक ऐसा अद्भुत त्यौहार है जिसे देश मे अनेक धर्म संप्रदाय होने के बावजूद  इसे बहुत ही उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जाने वाला महापर्व माना गया है। इसे समरसता का एक बड़ा प्रतीक भी माना गया है, एकमात्र होली ही ऐसा सनातनी त्यौहार है जो भारत देश की धर्मनिरपेक्षता का जीता जागता  अभूतपूर्व उदाहरण है। भाईचारे की इस त्यौहार में रंगों की आत्मीयता से मिलन की मिठास दुगनी हो जाती है। वर्ग विभेद वाले इस त्यौहार में हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सब एकता पूर्वक इस पर्व को संपूर्ण गर्व के साथ से मनाते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखा है कि भारत स्वयं में एक लघु विश्व है।</p>
<p style="text-align:justify;">निसंदेह इ भारत पर अध्ययन करने वाले सभी चिंतकों तथा विद्वानों ने एकमत से यह माना है कि भारत विविधताओं व बहुलताओं के मामले में विश्व का अनूठा एवं दिलचस्प देश है। अनेक प्रकार की भाषाएं, रीति रिवाज, खान-पान, रहन-सहन, लोकगीत,नृत्य, धर्म, संप्रदाय, सामाजिक संरचनाएं और संस्थाएं इस देश को बेहद बहुलतावादी और वैविध्यपूर्ण राष्ट्र बनाती है। इस विशाल, बहु भाषाई, बहु सांस्कृतिक देश की अपनी विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक, दार्शनिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, जनसांख्यिकी और भाषाई विभिन्नताएं, विषमताऐ और विशेषताएं विद्वमान है। जो इस देश की विविधता में एकता की खूबी को प्रदर्शित करती है। भारत की सामाजिक संरचना स्वयं में काफी जटिल है। देश में समाज बहुत सारे वर्गों उप वर्गों में बटा हुआ है, इसी तरह यहां समाज में ग्रामीण, उपनगरीय, नगरीय, महा नगरीय, जनजातीय, पहाड़ी कैसे वर्गों में विभाजित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में सामाजिक वर्ग भेद के साथ अंदरुनी अंतर्द्वंद भी बहुत ज्यादा है,जैसे कि एकल परिवार और संयुक्त परिवार जातिवादी जाति विहीन समाज ग्रामीण नगरीय द्वंद विवाह सन्यास का द्वंद जो अनेक रूपों में भारतीय समाज में जनमानस के रूप में दिखाई देता है और यह द्वंद स्वतंत्रता के पश्चात से दिखाई देने लगा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जहां ग्राम स्वराज को आर्थिक विकास की धुरी मानते हुए सर्वोदय पंचायती राज स्वरोजगार एवं परस्पर सहयोग को बढ़ावा देना चाहते थे,दूसरी तरफ पंडित जवाहरलाल नेहरू का झुकाव औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्र को तीव्र औद्योगिकरण , कल कारखानों को मजबूत करने की ओर था। इसीलिए भारतीय समाज में मिश्रित अर्थव्यवस्था की नई व्यवस्था के माध्यम से इसका समुचित समाधान निकाला गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के राजनीतिक द्वंद भी बहुतायत में रहे हैं। आजादी से पहले कांग्रेस के गरम पंथ हुआ नरम पंथ का द्वंद चलता रहा है और पूर्ण स्वराज की मांग का उहापोह तथा आजादी के बाद संविधान निर्माण के समय संविधान की संघात्मक तथा एकात्मक रचना का विवाद या समाजवाद पूंजीवाद का द्वंद इसी तरह भारत दोनों में उलझता रहा है, और उसके बाद समाधान निकाल कर उससे बाहर भी आया है। भारत धार्मिक ,दार्शनिक व आध्यात्मिक दृष्टि से एक बेहद समृद्ध राष्ट्र रहा है। विश्व के चार प्रमुख धर्मों हिंदू, सिख, बौद्ध ,जैन की जन्मस्थली भारत ही रही है। इसी तरह भारत वेद पुराणों, उपनिषदों ,ब्राह्मणों, समितियों और आरण्यकों के प्राचीन साहित्य से लबालब भी रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा इस्लाम ,ईसाई ,पारसी जैसे धर्मों को देश में स्वयं सम्मानित कर अपनी मुख्यधारा में समाहित भी किया है। भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेश नीति के मामले में गुटनिरपेक्षता की नीति को अपना कर किसी भी गुट में न रहते हुए स्वतंत्र विकास की नीति को अपनाया था। जो कालांतर में भारत की विदेश नीति का आधार स्तंभ रहा है। भारत में बहुआयामी विविधता भी रही है। स्वतंत्रता संग्राम में राजनेताओं ने जहां एक स्वर में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का पक्ष लिया था वहीं दूसरी तरफ देश के कुछ हिस्सों में हिंदी विरोधी आंदोलन तक हुए हैं। भारत में संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा देते हुए कुल 22 भारतीय भाषाओं को आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर भाषाई सौहार्द्र और समन्वय का बखूबी परिचय भी दिया है। और भारत में भारतीय संस्कृति के बहुलतावादी चरित्र को बनाए रखने की भविष्य में भी निरंतर आवश्यकता बनी रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय समाज की विविधता पूर्ण सांस्कृतिक,साहित्यिक, दार्शनिक व्यवस्था के बीच विद्वानों ने चिंतन मनन कर इसके बीच का समाधान भी निकाला है एक का सबसे बड़ा उदाहरण भारत में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को महत्व देते हुए मिश्रित अर्थव्यवस्था का अंगीकार करना है। भारत की विजेताओं के विभिन्न नेताओं ने भारत देश के अंदरूनी मामले को लेकर देश की अर्थव्यवस्था सामाजिक व्यवस्था तथा राजनीतिक व्यवस्था को काफी मजबूत तथा पुख्ता भी किया है। भारत की विविधता में एकता के सिद्धांत पर चलते हुए भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था सामाजिक व्यवस्था राजनीतिक व्यवस्था तथा विदेशी नीति पर एक मजबूत आधार स्तंभ रखकर अपनी विश्व में एक अलग छवि तथा स्थान बनाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में अनेक विविधताओं विषमताओं को विशेषता बनाकर समाधान अपने बीच ही खोज कर विश्व को एक कीर्तिमान बनाकर दिखाया है। आज भारत मैं इतनी बड़ी जनसंख्या और विभिन्न जातीय धर्म संस्कृति भाषाएं होने के बावजूद एकजुटता की नई मिसाल दिखाकर विश्व के किसी भी देश को टक्कर देने की स्थिति में है। भारत आज विकासशील देशों में अग्रणी देश माना जाता है। भारत की यही विविधता,विषमता ,साइंस, टेक्नोलॉजी,मेडिकल साइंस तथा सामरिक क्षेत्र में अद्भुत एकजुटता किसी भी देश के आक्रमण का सामना करने के लिए सीना तान कर खड़ा होने की शक्ति सामर्थ और ताकत भी प्रदान करता है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने जितनी प्रगति और वैश्विक स्तर पर विदेशी देशों का विश्वास अर्जित किया है वह निसंदेह भारत की प्रजातांत्रिक लोकतांत्रिक परंपरा के कारण ही है। भारत की विविधता में एकता भारत की एक बड़ी शक्ति है जिसे हमें निरंतर बनाए रखना होगा तब जाकर हम किसी भी देश के सामने सिर उठाकर खड़े हो सकते हैं।<br />संजीव ठाकुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:24:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होलिका स्तोत्र  यह स्तोत्र को तीन परिक्रमा करने के बाद दोनों हाथो से नमस्कार करके होलिका स्तोत्र पढ़ना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">होली जलाते समय या होली जलाने के बाद और तीन या पांच परिक्रमा करने के पश्चात होलिका को दोनों हाथो से नमस्कार करके यह स्तोत्र बोलने से होलिका मनुष्य के सभी पापो को हर लेती है, सभी सन्तापों को हर लेती है, और सभी प्रकार से कल्याण करती है होलिका जगन्माता बनके सर्वसिद्धियाँ प्रदान करती है सुखशान्ति प्रदान करती है।<br /><br />यह स्तोत्र को तीन परिक्रमा करने के बाद दोनों हाथो से नमस्कार करके होलिका स्तोत्र पढ़ना चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;"><br />  <strong>   होलिका स्तोत्र   </strong><br />ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।<br />(अर्थ --ॐ, मैं उस महान् ज्योति का, अग्निदेव का ध्यान करता हूँ। वह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172141/holika-stotra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/sddefault.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">होली जलाते समय या होली जलाने के बाद और तीन या पांच परिक्रमा करने के पश्चात होलिका को दोनों हाथो से नमस्कार करके यह स्तोत्र बोलने से होलिका मनुष्य के सभी पापो को हर लेती है, सभी सन्तापों को हर लेती है, और सभी प्रकार से कल्याण करती है होलिका जगन्माता बनके सर्वसिद्धियाँ प्रदान करती है सुखशान्ति प्रदान करती है।<br /><br />यह स्तोत्र को तीन परिक्रमा करने के बाद दोनों हाथो से नमस्कार करके होलिका स्तोत्र पढ़ना चाहिए</p>
<p style="text-align:justify;"><br /> <strong>  होलिका स्तोत्र   </strong><br />ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात्।<br />(अर्थ --ॐ, मैं उस महान् ज्योति का, अग्निदेव का ध्यान करता हूँ। वह (शुभ) अग्नि हमें (समृद्धि और कल्याण की ओर) प्रेरित करे।)<br />पापं तापं च दहनं कुरु कल्याणकारिणि | <br />होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः || <br />होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी | <br />ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव || <br />वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च । <br />अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव || <br />अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः |<br />अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव ||<br />त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च ।<br />होलिके त्वं जगद्धात्री होलिकायै नमो नमः || <br />होलिके त्वं जगन्माता सर्वसिद्धिप्रदायिनी | <br />ज्वालामुखी दारूणा त्वं सुखशान्तिप्रदा भव ||<br />वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च | <br />अतस्त्वं पाहिनो देवि भूते भूतिप्रदा भव || <br />अस्माभिर्भय सन्त्रस्तैः कृत्वा त्वं होलि बालिशैः | <br />अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव || <br />त्वदग्नि त्रिः परिक्रम्य गायन्तु च हसंतु च | <br />जल्पन्तु स्वेछ्या लोकाः निःशङ्का यस्य यन्मतम्<br />ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय महाचक्राय महाज्वालाय दीप्तिरूपाय सर्वतो रक्ष रक्ष मां महाबलाय नमः।<br />ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परम पुरूषाय परमात्मने परकर्म मंत्र यंत्र औषध अस्त्र शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ओम नमो भगवते सुदर्शनाय दीप्ते ज्वालादित्याय ,सर्वदिक् क्षोभण कराय हूं फट् ब्रहणे परं ज्योतिषे नमः।<br />.ॐ नमो भगवते सुदर्शनाय वासुदेवाय, धन्वंतराय अमृतकलश हस्ताय, सकला भय विनाशाय, सर्व रोग निवारणाय त्रिलोक पतये, त्रिलोकीनाथाय ॐ श्री महाविष्णु स्वरूपाय ॐ श्रीं ह्मीं ऐं औषधि चक्र नारायणाय फट्!!<br />ॐ ऐं ऐं अपराजितायै क्लीं क्लीं नमः।<br />ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं हूं हूं त्रैलोक्यमोहन विष्णवे नमः।<br />ॐ त्रैलोक्यमोहनाय च विदमहे आदिकामदेवाय धीमहि <br />तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्।<br />ॐ तेजोरूपाय च विदमहे विष्णु पत्न्यै धीमहि तन्नो;<br />श्री: प्रचोदयात्।<br />                <br />इस साल होलिका दहन 2 मार्च 2026 हैं । होलिका दहन के लिए लकड़ी और उपले आदि एकत्रित किए जाते हैं। होलिका दहन से पूर्व उसमें गुलाल समेत अन्य सामग्रियां डाली जाती हैं। होलिका की अग्नि को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि होलिका की अग्नि में कुछ विशेष चीजों को डालने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। जबकि होलिका में कोई भी अपवित्र चीज डालने की मनाही होती है। मान्यता है कि इसका जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। <br />जानें होलिका में क्या-क्या डालना चाहिए और क्या नहीं-<br />  होलिका में क्या-क्या डालना चाहिए- <br />1.होलिका दहन की आग में सूखा नारियल डालना चाहिए। इसके अलावा अक्षत और ताजे फूल होलिका की अग्नि में चढ़ाएं। होलिका को साबुत मूंग की दाल, हल्दी के टुकड़े, और गाय के सूखे गोबर से बनी माला अर्पित करें।<br />होलिका की अग्नि में सूखा नारियल डालना अत्यंत शुभ माना गया है।<br />2. होली की अग्नि में गेहूं की बालियां सेंककर घर लेकर आएं <br />बाद में इसके गेंहू के दानों को अन्न भंडार में मिला दें अथवा विसर्जित कर दें।<br />3. होलिका की अग्नि में नीम के पत्ते व कपूर का टुकड़ा अर्पित करना चाहिए।<br />4. होलिका की अग्नि में घी में भिगोए पान के पत्ते व बताशा अर्पित करना चाहिए।<br />5. होलिका दहन में चांदी या तांबे के कलश से जल और गुलाल अर्पित करना चाहिए।<br />6. होलिका की अग्नि में हल्दी व उपले अर्पित करने चाहिए।<br />7. होलिका दहन की अग्नि में अक्षत व ताजे फूल भी अर्पित करने चाहिए।<br />8.होली के दिन रंग खेलने के बाद घर में फिटकरी का पोछा लगाने से धन आपकी तरफ चुंबक की तरह चला आता है. एक बाल्टी में पानी लेकर उसके अंदर थोड़ा फिटकरी का पाउडर डाल दें और उससे पोंछा करें. <br />होली पर बहुत सी नकारात्मक शक्तियां सक्रिय रहती है. <br />वह दूर होती है।<br />  होलिका की अग्नि में क्या नहीं डालना चाहिए <br />1. होलिका की अग्नि में पानी वाला नारियल नहीं चढ़ाना चाहिए। होलिका में हमेशा सूखा नारियल ही चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि पानी वाला नारियल अर्पित करने से जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति खराब हो सकती है और जातक को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पानी वाला नारियल फोड़कर प्रसाद रूप में ले सकते हैं।<br />2. 2.होलिका की अग्नि में टूटा-फूटा सामान जैसेपलंग, सोफा आदि नहीं डालना चाहिए। अथवा घर का कचरा न डालें।<br />मान्यता है कि ऐसा करने से शनि, राहु व केतु अशुभ फल प्रदान करते हैं।       <br />3. होलिका की आग में सूखी हुई गेहूं की बालियां न डालें <br />बल्कि सेंककर घर लाए।<br />और सूखे फूल नहीं अर्पित करने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ज्योतिषी काजल उपाध्याय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 22:10:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>होली एआई रे…</title>
                                    <description><![CDATA[जानिए कैसे डिजिटल युग में रंगों से ज़्यादा फ़िल्टर और डेटा का त्योहार बन गई है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171996/holi-ai-re%E2%80%A6"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_20260301_114028.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:left;"><strong>      होली <span style="color:rgb(224,62,45);">एआई</span> रे… </strong></h1>
<h5 style="text-align:center;"><span style="background-color:rgb(241,196,15);"><strong>रंगों से ज़्यादा <span style="color:rgb(224,62,45);">फ़िल्टर</span> का त्योहार</strong></span></h5>
<p style="padding-left:40px;"> </p>
<p>होली आई रे… नहीं साहब, इस बार होली <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>एआई</strong></span> रे!</p>
<p>अब न पिचकारी असली रही, न रंग असली—सब कुछ “अपडेटेड वर्ज़न” में आ गया है। मोहल्ले की गली में अबीर-गुलाल कम और मोबाइल के कैमरे ज़्यादा उड़ते दिखाई देते हैं। पहले लोग होली पर गले मिलते थे, अब “फेस रिकॉग्निशन” से पहचानते हैं—“अरे तुम ही हो न? वही जो पिछले साल मेरे ऊपर पक्का रंग डालकर भाग गए थे?” अब बदला भी डिजिटल हो गया है। एआई बता देता है कि किसने किस पर कितना रंग लगाया और किसने फोटो में कितनी मुस्कान एडिट की।कहते हैं होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त प्रह्लाद की भक्ति और होलिका के दहन की कथा हम बचपन से सुनते आए हैं। पर आजकल लगता है कि असली होलिका तो हमारी प्राइवेसी है, जो हर साल सोशल मीडिया की अग्नि में स्वाहा हो जाती है।अब देखिए, पहले मथुरा-वृंदावन की होली की चर्चा होती थी, लोग मथुरा और वृंदावन जाने का सपना देखते थे। अब सपना यह होता है कि “रील” वायरल हो जाए। रंग से ज्यादा फिक्र इस बात की होती है कि वीडियो पर कितने व्यूज़ आए। कोई गुलाल लगाने से पहले पूछता है—“भाई, कैमरा ऑन है न?”एआई का कमाल देखिए—अब होली की शुभकामनाएँ भी इंसान नहीं, “चैटबॉट” लिखते हैं। एक क्लिक में सौ लोगों को एक जैसा संदेश—“रंगों का त्योहार आपके जीवन में खुशियों की बहार लाए।” बहार तो ठीक है, पर मौलिकता का क्या?मोहल्ले के शर्मा जी ने इस बार “स्मार्ट पिचकारी” खरीदी है। कहते हैं इसमें सेंसर लगा है—जो सामने वाले के कपड़ों की कीमत पहचानकर उसी हिसाब से रंग की मात्रा तय करता है। महंगे कपड़े पर हल्का गुलाल, सस्ते पर पूरा टैंक खाली! तकनीक का न्याय भी बड़ा विचित्र है।बच्चे अब कीचड़ में नहीं कूदते, वे “वर्चुअल होली गेम” खेलते हैं। स्क्रीन पर रंग उड़ाते हैं और असली कपड़े साफ रखते हैं। मां-बाप भी खुश—न कपड़े धुलेंगे, न गली में शिकायत आएगी।</p>
<p>और नेताओं की होली? वह भी एआई-प्रूफ हो गई है। भाषण पहले से ही “डेटा एनालिसिस” से तैयार—किस मोहल्ले में कितनी मिठास घोलनी है, किस वर्ग पर कितना रंग डालना है, सब एल्गोरिद्म तय करता है।पर इस व्यंग्य के बीच एक सच भी छिपा है—तकनीक ने सुविधाएँ दी हैं, पर त्योहार की आत्मा अभी भी दिलों में बसती है। होली का असली रंग तब चढ़ता है जब रूठे मन मान जाते हैं, जब बिना फिल्टर की हँसी गूंजती है, जब रिश्तों की पिचकारी सच्चे स्नेह से भीगती है।तो आइए, इस बार “होली एआई रे…” कहते हुए भी इंसानियत का रंग फीका न पड़ने दें। तकनीक का आनंद लें, पर रिश्तों को ऑफलाइन ही रखें। क्योंकि असली होली वही है, जो दिल से खेली जाए—बिना डेटा पैक और बिना एडिट के।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:57:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मर्यादा लांघकर त्योहार को न करें बदनाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171880/do-not-defame-the-festival-by-crossing-limits"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas50.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास बढ़ती है और वैमनस्य दूर होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन आधुनिक समय में इसकी नैतिक और मर्यादित छवि धूमिल होती जा रही है। अश्लील भोजपुरी एवं द्विअर्थी गीत, तेज डीजे, जबरन छूना और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार ने इसे विवादास्पद बना दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जीजा–साली तथा भाभी–देवर जैसे रिश्तों की मर्यादा भंग करने वाली हरकतें निंदनीय हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भोजपुरी होली गीत ऐसे परोसे जा रहे हैं, जिनमें रिश्तों को यौनिकता के चश्मे से देखा जाता है। इससे परिवारों में शर्मिंदगी फैलती है और भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति की बदनामी भी होती है, जो एक बड़ी क्षति है। भोजपुरी में होली के लोकगीतों और होलिका-गायन की मधुर एवं समृद्ध परंपरा रही है, जो अब धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय परंपरा में कुछ रिश्ते हास्य-व्यंग्य और हल्की छेड़छाड़ वाले माने जाते हैं, किंतु यह सब हमेशा सीमित और सम्मानजनक होना चाहिए। भोजपुरी या हिंदी होली गीतों में जीजा–साली या भाभी–देवर के संबंधों को द्विअर्थी, अश्लील और यौनिक संदर्भों में प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे गीतों का परिवार में तथा सड़कों पर बजना शर्मिंदगी का कारण बनता है और महिलाएँ असहज महसूस करती हैं। इन दिनों महिलाएँ कहीं भी यात्रा करने से डरती हैं, क्योंकि वे अपने ही समाज में असुरक्षित महसूस करती हैं। होली के बहाने जबरन छूना, अनचाहा गले लगना, शारीरिक छेड़छाड़ या अश्लील टिप्पणी करना घोर निंदनीय है। कई मामलों में यह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज सोशल मीडिया भी अश्लील सामग्री परोसकर युवाओं को भड़काने और रिश्तों की मर्यादा लांघने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है, जो हमारे पवित्र त्योहार को बदरंग बना रही है। दूसरी ओर, शहरीकरण और पश्चिमी प्रभाव से पारंपरिक मूल्यों का क्षरण बढ़ रहा है। जहाँ पहले परिवार में सामूहिक रूप से होली खेली जाती थी, वहीं अब यह कई स्थानों पर सार्वजनिक हुड़दंग और अराजकता का रूप ले लेती है। इन गलत प्रवृत्तियों का प्रभाव बच्चों पर भी पड़ रहा है। बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं; वे जो देखते और सुनते हैं, वही सीखते हैं। अश्लील गीत और हिंसक व्यवहार उन्हें गलत मूल्य सिखाते हैं, जो भविष्य में समाज के लिए घातक हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली की इस विकृति का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। महिलाओं की असुरक्षा सबसे बड़ी समस्या बन गई है। अश्लील गीतों और “बुरा न मानो, होली है” जैसे नारों का प्रयोग असहमति की अनदेखी करने का बहाना बन गया है, जो कई बार यौन उत्पीड़न की सीमा पार कर जाता है। लैंगिक वर्चस्व का प्रदर्शन और मर्यादा का उल्लंघन होली जैसे उत्सव की भावना को सबसे अधिक कलंकित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए इस होली को उत्साहपूर्वक मनाइए, किंतु मर्यादा की सीमाओं में रहकर। शोर-शराबा, जबरदस्ती रंग लगाना या किसी को असुविधा पहुँचाना त्योहार की भावना के विपरीत है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भावनाओं का विशेष ध्यान रखें। बिहार पुलिस और महिला आयोग ने इस वर्ष अश्लील गीतों पर प्राथमिकी दर्ज करने तथा ड्रोन निगरानी तक की व्यवस्था की है, जो एक सकारात्मक कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का वास्तविक रंग प्रेम, एकता और पवित्रता में है। इसे विकृतियों से मुक्त रखकर हम न केवल त्योहार की मिठास बचाएँगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज का निर्माण भी करेंगे। इस प्रकार होली की पवित्रता, बंधुत्व और मिठास बनाए रखें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:03:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली: परिवार, समाज और राष्ट्र का हो लेने का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत उत्सव है। यह ऐसा पर्व है जो व्यक्ति को परिवार से, परिवार को समाज से और समाज को राष्ट्र की व्यापक चेतना से जोड़ देता है। ‘हो लेना’ अर्थात् स्वयं को अहंकार, भेदभाव और संकीर्णताओं से मुक्त कर समष्टि के साथ एकात्म कर लेना।होली इसी भाव की अभिव्यक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार के स्तर पर होली स्नेह, क्षमा और पुनर्संयोजन का पर्व है। वर्षभर की व्यस्तता, मतभेद और मौन इस दिन रंगों में घुलकर समाप्त हो जाते हैं। बड़े-बुजुर्गों के चरणों में गुलाल, बच्चों की खिलखिलाहट,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171876/holi-is-the-festival-of-coming-together-of-family-society"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत उत्सव है। यह ऐसा पर्व है जो व्यक्ति को परिवार से, परिवार को समाज से और समाज को राष्ट्र की व्यापक चेतना से जोड़ देता है। ‘हो लेना’ अर्थात् स्वयं को अहंकार, भेदभाव और संकीर्णताओं से मुक्त कर समष्टि के साथ एकात्म कर लेना।होली इसी भाव की अभिव्यक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार के स्तर पर होली स्नेह, क्षमा और पुनर्संयोजन का पर्व है। वर्षभर की व्यस्तता, मतभेद और मौन इस दिन रंगों में घुलकर समाप्त हो जाते हैं। बड़े-बुजुर्गों के चरणों में गुलाल, बच्चों की खिलखिलाहट, घर-आंगन में गूंजते फाग आदि सब मिलकर पारिवारिक संबंधों में नई ऊष्मा भर देते हैं। होलिका-दहन की अग्नि प्रतीक है कि ईर्ष्या, क्रोध और कटुता जलकर राख हो जाए और परिवार प्रेम के रंग में रंग जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज के स्तर पर होली समानता और समरसता का संदेश देती है। इस दिन रंग जाति, वर्ग, भाषा और आर्थिक भेद नहीं देखते। सब एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।यह व्यवहारिक रूप से सामाजिक समता का पाठ है। लोकगीत, नृत्य, ढोल-नगाड़े और सामूहिक उल्लास समाज को जोड़ते हैं। होली यह सिखाती है कि सामाजिक जीवन में संवाद, हास्य और सहभागिता कितनी आवश्यक है; कठोरता नहीं, बल्कि अपनत्व समाज को मजबूत बनाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्तर पर होली सांस्कृतिक एकता का उत्सव है। विविधताओं से भरे भारत में यह पर्व उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक समान भाव से मनाया जाता है।कहीं फाग, कहीं शिगमो, कहीं रंगपंचमी के रूप में। अलग-अलग परंपराएँ होते हुए भी उत्सव का मूल भाव एक है: आनंद, मेल-मिलाप और नवसृजन। यह सांस्कृतिक एकात्मता ही राष्ट्र की आत्मा है। होली हमें याद दिलाती है कि हमारी विविधता विभाजन नहीं, बल्कि शक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का आध्यात्मिक संकेत भी उतना ही गहरा है। यह ऋतु परिवर्तन का पर्व है।</div>
<div style="text-align:justify;">वसंत के आगमन के साथ जीवन में नई ऊर्जा का संचार। रंग यहाँ केवल बाह्य नहीं, आंतरिक भी हैं</div>
<div style="text-align:justify;">-विवेक,  करुणा, साहस और सत्य के रंग। होलिका-दहन असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है; प्रह्लाद की कथा हमें बताती है कि आस्था और नैतिकता अंततः विजयी होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में होली का संदेश और भी प्रासंगिक है। जब समाज में वैमनस्य, अविश्वास और तनाव बढ़ रहा हो, तब होली हमें ‘हो लेने’ का मार्ग दिखाती है,परिवार के लिए समय निकालने का, समाज के प्रति संवेदनशील होने का और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहने का। यह पर्व हमें संयम, सौहार्द और पर्यावरण-संवेदनशीलता के साथ उत्सव मनाने की प्रेरणा भी देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, होली रंग लगाने का नहीं, रंग बनने का पर्व है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रेम का, एकता का और राष्ट्रभाव का। जब व्यक्ति परिवार में, परिवार समाज में और समाज राष्ट्र में ‘हो’ जाता है, तभी होली अपने पूर्ण अर्थ में साकार होती है। यही होली का शाश्वत संदेश है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 17:51:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> 3 मार्च को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित, होली पर लगातार तीन दिन बंद रहेंगे कार्यालय</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने होलिका दहन (2 मार्च) और होली (4 मार्च) के पहले से घोषित अवकाश के अतिरिक्त 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171745/offices-will-remain-closed-for-three-consecutive-days-on-holi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ani-20260206499-0_1770721811049_1770721838428_1772199646397.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ</strong>, 27 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने होली पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को बड़ी राहत देते हुए <strong>3 मार्च 2026 (मंगलवार)</strong> को भी <strong>सार्वजनिक अवकाश</strong> घोषित कर दिया है। इससे पहले 2 मार्च को होलिका दहन तथा 4 मार्च को होली का अवकाश घोषित किया जा चुका था। अब तीनों दिन शासकीय कार्यालयों में अवकाश रहेगा।शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार होली के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए 3 मार्च को भी अवकाश घोषित किया गया है। यह अतिरिक्त अवकाश <strong>Negotiable Instruments Act, 1881</strong> के अंतर्गत रखा गया है। इस अधिनियम के तहत घोषित अवकाश के कारण प्रदेश के समस्त कोषागार, उपकोषागार तथा बैंकिंग संस्थान भी बंद रहेंगे।सरकारी प्रवक्ता के अनुसार लगातार तीन दिन अवकाश रहने से कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को पर्व मनाने में सुविधा होगी। प्रशासन ने संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि अवकाश अवधि में आवश्यक सेवाओं का संचालन सुचारु रूप से जारी रहे।प्रदेश में होली का पर्व उल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसे में सरकार के इस निर्णय से कर्मचारियों और विद्यार्थियों में खुशी का माहौल है।उल्लेखनीय है कि इस निर्णय के बाद प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान तथा बैंक 2 मार्च से 4 मार्च तक बंद रहेंगे, जबकि आपातकालीन सेवाएं पूर्ववत संचालित होती रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 20:09:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
                            </item>

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