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                <title>सनातन धर्म - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सनातन धर्म RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong> कसारी रामगढ़ स्थित भिखारी बाबा आश्रम परिसर में वृहस्पतिवार को सातवें दिन विराट रुद्र महायज्ञ में यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान जयकारे से समूचा परिसर गुंजायमान हो गया। शिव मंदिर में दूध से रुद्राभिषेक पूजन भी कराया गया। वृंदावन से आई बाल कथा वाचिका धानी शास्त्री ने भागवत कथा का रसपान कराया। वहीं भजन संध्या में वाराणसी से आए राष्ट्रीय बाल कलाकार श्री राम कृष्ण, श्री राधा कृष्ण व श्री राधे कृष्ण ने एक से बढ़कर एक भजन, गीत व गजल सुनाया। वहीं वृंदावन से आए कलाकारों की रासलीला</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180990/crowd-of-devotees-gathered-to-circumambulate-the-yagya-mandap"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001716465.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong> कसारी रामगढ़ स्थित भिखारी बाबा आश्रम परिसर में वृहस्पतिवार को सातवें दिन विराट रुद्र महायज्ञ में यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान जयकारे से समूचा परिसर गुंजायमान हो गया। शिव मंदिर में दूध से रुद्राभिषेक पूजन भी कराया गया। वृंदावन से आई बाल कथा वाचिका धानी शास्त्री ने भागवत कथा का रसपान कराया। वहीं भजन संध्या में वाराणसी से आए राष्ट्रीय बाल कलाकार श्री राम कृष्ण, श्री राधा कृष्ण व श्री राधे कृष्ण ने एक से बढ़कर एक भजन, गीत व गजल सुनाया। वहीं वृंदावन से आए कलाकारों की रासलीला देखने को भारी संख्या में भीड़ उमड़ पड़ी। प्रकृति रक्षा के लिए 251 जड़ी बूटियों से निर्मित हवन सामग्री से आहुति दी गई। प्रतिदिन चलने वाले विशाल भंडारा में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के आयोजक भिक्षुक भिखारी जंगली दास दीनबंधु रमाशंकर गिरी जी महाराज ने बताया कि आचार्यगण गोपालधर द्विवेदी, राजेश कुमार पाठक, हरिओम द्विवेदी व अमरेश तिवारी द्वारा विराट रूद्र महायज्ञ एवं पूजन कार्य कराया जा रहा है। प्रतिदिन शिव मंदिर में दूध, गंगाजल से रुद्राभिषेक पूजन कराया जा रहा है। प्रकृति रक्षा के लिए 251 जड़ी बूटियों से निर्मित हवन सामग्री से आहुति दी जा रही है। प्रतिदिन चलने वाले विशाल भंडारा में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मुख्य यजमान दिनेश, उषा देवी, रूपा गुप्ता, देवेंद्र कुमार, चिंता मौर्य, उर्मिला देवी, विमला देवी, शशि देवी, विजय सिंह, मनीष कुमार, कृति सागर, शुभराम महाराज, परमानंद, रमेश कुमार, प्रहलाद, रामखेलावन, किरन मोदवाल, मानवी, संगीता, मुन्ना बाबा, केवलानंद महाराज, आनंद ओझा, राकेश पाठक, कालो देवी, डॉक्टर विजय, हीरा सिंह, संजय अग्रवाल, चांदनी अग्रवाल, संगीता, राजेश आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:56:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विख्यात कथावाचक राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज को मिली महामंडलेश्वर की उपाधि</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>अपनी ओजस्वी वाणी, मधुर कथा शैली एवं आध्यात्मिक प्रवचनों से देशभर के श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर करने वाले विख्यात कथावाचक राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज को अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा के प्रमुख जगद्गुरु श्री सच्चिदानंदन बाल प्रभु जी महाराज ने उन्हें प्रदान की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर आयोजित धार्मिक समारोह में संत समाज, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति में यह घोषणा की गई। संत समाज ने इसे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक चेतना के क्षेत्र में राज ऋषि माधव मुकुंद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180918/famous-storyteller-raj-rishi-madhav-mukund-maharaj-got-the-title"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001988605.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>अपनी ओजस्वी वाणी, मधुर कथा शैली एवं आध्यात्मिक प्रवचनों से देशभर के श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर करने वाले विख्यात कथावाचक राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज को अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय संत ऋषि अखाड़ा के प्रमुख जगद्गुरु श्री सच्चिदानंदन बाल प्रभु जी महाराज ने उन्हें प्रदान की।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अवसर पर आयोजित धार्मिक समारोह में संत समाज, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति में यह घोषणा की गई। संत समाज ने इसे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक चेतना के क्षेत्र में राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों का सम्मान बताया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज वर्षों से श्रीमद्भागवत कथा, धार्मिक प्रवचनों एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संदेश देते आ रहे हैं। उनकी कथाओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और उनके विचारों से प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उनकी लोकप्रियता देश के विभिन्न राज्यों तक फैली हुई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">महामंडलेश्वर की उपाधि मिलने के बाद उनके अनुयायियों और भक्तों में हर्ष का माहौल है। श्रद्धालुओं ने इसे उनके आध्यात्मिक जीवन, धर्म सेवा और समाज के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। इस अवसर पर उपस्थित संतों ने कहा कि राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज के नेतृत्व में सनातन संस्कृति के संरक्षण, धार्मिक जागरण और समाज में आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार को नई गति मिलेगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उपाधि ग्रहण करने के पश्चात राज ऋषि माधव मुकुंद महाराज ने सभी संतों, गुरुजनों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए सेवा, साधना और धर्म प्रचार की जिम्मेदारी को और अधिक बढ़ाता है। उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार एवं मानव कल्याण के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।<br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 15:43:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैंब्रिज हाईस्कूल एण्ड काॅलेज शंकरगढ़ की जिले में तृतीय स्थान प्राप्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>आज दिनांक 18 मई 2026 को जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रयागराज के सभागार में मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कैंब्रिज हाई स्कूल एंड कॉलेज शंकरगढ़ की इण्टरमीडिएट की छात्रा अंशिका द्विवेदी को जिले में तृतीय स्थान प्राप्ति पर मुख्य अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक , मंडल प्रयागराज श्री आर एन विश्वकर्मा एवं जिला विद्यालय निरीक्षक प्रयागराज पी एन सिंह के द्वारा स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान के साथ साथ विद्यार्थियों से उनकी सफलता के पीछे उनकी दैनिक क्रियाकलाप की भी जानकारी लिखित रूप से मनोविशेषज्ञ को सौंपी गई  ताकि अन्य विद्यालयों में भी जाकर छात्रों</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179510/in-the-month-of-purushottam-525-crore-mortal-shivalinga-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260518-wa0115.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>आज दिनांक 18 मई 2026 को जिला विद्यालय निरीक्षक, प्रयागराज के सभागार में मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कैंब्रिज हाई स्कूल एंड कॉलेज शंकरगढ़ की इण्टरमीडिएट की छात्रा अंशिका द्विवेदी को जिले में तृतीय स्थान प्राप्ति पर मुख्य अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक , मंडल प्रयागराज श्री आर एन विश्वकर्मा एवं जिला विद्यालय निरीक्षक प्रयागराज पी एन सिंह के द्वारा स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान के साथ साथ विद्यार्थियों से उनकी सफलता के पीछे उनकी दैनिक क्रियाकलाप की भी जानकारी लिखित रूप से मनोविशेषज्ञ को सौंपी गई  ताकि अन्य विद्यालयों में भी जाकर छात्रों को प्रोत्साहित किया जा सके। एक लक्ष्य, उसकी  प्राप्ति का मार्ग, और प्राप्त करने की समय सीमा का निर्धारण कार्यक्रम की विशेषता रही।</div>
<div> </div>
<div>छात्रा की इस सफलता पर विद्यालय के प्रबंधक संतोष त्रिपाठी, प्रशासनिक अधिकारी बालेन्द्र पांडेय, मनी शंकर दुबे,सौरभ प्रकाश,इमरान अहमद, धर्मराज कुशवाहा,रमाशंकर मिश्रा,मनोज तिवारी,पंकज श्रीवास्तव, राजेश गोस्वामी ,दीपक केशरवानी, बृजेश मिश्रा, रीतु सुसारी,रेखा सिंह, रीना गोस्वामी, सिम्मी गुप्ता, ऊषा सिंह, प्रीति सेन, निहारिका सेन, अंजु गुप्ता , सीमा सिंह, पूनम द्विवेदी, कोमल त्रिपाठी, रूचि शुक्ला आदि शिक्षक-शिक्षकाओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए छात्रा के  उज्ज्वल भविष्य की कामना की।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:58:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुरुषोत्तम मास में महाकाल घाट पर होगा सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>नैनी,प्रयागराज ।</strong></div>
<div>  </div>
<div>नैनी स्थित अरैल महाकाल घाट पर श्री महाकाल सेवा ट्रस्ट द्वारा आगामी पुरुषोत्तम मास के अवसर पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन 16 मई 2026, रविवार से 14 जून 2026, सोमवार तक आयोजित होगा।ट्रस्ट के अध्यक्ष पवन द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उन्होंने सभी शिवभक्तों से अपील की है कि वे अपने स्वजन, इष्ट-मित्र एवं परिवार सहित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त करें।उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179506/in-the-month-of-purushottam-525-crore-mortal-shivalinga-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/48.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>नैनी,प्रयागराज ।</strong></div>
<div> </div>
<div>नैनी स्थित अरैल महाकाल घाट पर श्री महाकाल सेवा ट्रस्ट द्वारा आगामी पुरुषोत्तम मास के अवसर पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन 16 मई 2026, रविवार से 14 जून 2026, सोमवार तक आयोजित होगा।ट्रस्ट के अध्यक्ष पवन द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उन्होंने सभी शिवभक्तों से अपील की है कि वे अपने स्वजन, इष्ट-मित्र एवं परिवार सहित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त करें।उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलियुग में भगवान शिव अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं, जो अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। </div>
<div> </div>
<div>शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीकात्मक स्वरूप है तथा शास्त्रों में पार्थिव अर्थात मिट्टी के शिवलिंग बनाकर उनके पूजन एवं अभिषेक का विशेष महत्व बताया गया </div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:38:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबनपुर में हरिनाम संकीर्तन का हुआ समापन </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">  <strong>नारायणपुर, जामताड़ा, झारखंड:-</strong> नारायणपुर प्रखंड के सबनपुर हरि मंदिर प्रांगण में आयोजित 24 पहल हरी नाम संकीर्तन का रविवार रात्रि को कुंज मिलन के साथ ही समापन हुआ। समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजन से क्षेत्र में भक्ति के बयार बह रही थी। पश्चिम बंगाल से आए ममता गोराई और सविता पाल की टीम ने हरि नाम संकीर्तन के माध्यम से भगवान नारायण की लीला का गुणगान किया व झांकी प्रस्तुत की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बड़े भाग्य से मानव जीवन मिला है इसे प्रभु की भक्ति में लगाए तभी कल्याण संभव है। जब हस्तिनापुर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178968/harinam-sankirtan-concludes-in-sabanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/news-9.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> <strong>नारायणपुर, जामताड़ा, झारखंड:-</strong> नारायणपुर प्रखंड के सबनपुर हरि मंदिर प्रांगण में आयोजित 24 पहल हरी नाम संकीर्तन का रविवार रात्रि को कुंज मिलन के साथ ही समापन हुआ। समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोजन से क्षेत्र में भक्ति के बयार बह रही थी। पश्चिम बंगाल से आए ममता गोराई और सविता पाल की टीम ने हरि नाम संकीर्तन के माध्यम से भगवान नारायण की लीला का गुणगान किया व झांकी प्रस्तुत की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बड़े भाग्य से मानव जीवन मिला है इसे प्रभु की भक्ति में लगाए तभी कल्याण संभव है। जब हस्तिनापुर में भरी राज्यसभा में राजरानी द्रोपदी का चीर हरण हो रहा था तब पितामह भीषृम, गुरु द्रोण, चक्रवर्ती सम्राट युधिष्ठिर समेत कई महाबली उपस्थित थे परंतु किसी ने भी द्रौपदी की लाज बचाने की हिम्मत नहीं जुटाई। द्रोपदी की पुकार सुनकर भगवान कृष्ण आए और उन्होंने द्रोपदी के लाज की रक्षा की। इससे पता चलता है कि सत्य परेशान हो सकता है परंतु पराजित कभी नहीं हो सकता। अंततः महाभारत के युद्ध में दुराचारी कौरवों का अंत हुआ। यह सब प्रभु की कृपा से संभव हुआ। अर्जुन भीम समैय सभी पांडव भगवान की प्रतिनिधि बनकर दुराचारियों का संघार किया। सबनपुर में प्रत्येक वर्ष हरिनाम संकीर्तन होता है तथा भगवान के लीला का गुणगान करने का व सुनने का अवसर लोगों को मिलता है। आयोजन को सफल बनाने में आयोजित समिति सदस्यों की महती भूमिका है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:40:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम कथा में राम जन्म प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रोता हुए भाव - विभोर</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> बिस्कोहर कस्बे से सटे जनपद बलरामपुर सीमा पर स्थित मधुपुर पकड़ी गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्री राम कथा में शनिवार की रात  यज्ञाचार्य दुर्गेश कुमार शास्त्री अयोध्या से आए हुए जगत गुरु स्वामी राम दिनेशाचार्य ने श्री राम जन्म के बारे में कथा सुनाई जगत गुरु स्वामी राम दिनेशाचार्य ने बताया कि भगवान राम की जन्म किस किस भाव में हुआ उसका वृतांत सुनाने जा रहा हूं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस कथा से सनातन धर्म परंपरा के विशेष कृपा भक्ति भाव की जल जीवन परमात्मा की ध्यान आनंदित होने लगे तब जाने भगवान की कृपा मेरे ऊपर स्थान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रभू</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177345/hearing-the-description-of-rams-birth-incident-in-ram-katha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1777214810741.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> बिस्कोहर कस्बे से सटे जनपद बलरामपुर सीमा पर स्थित मधुपुर पकड़ी गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्री राम कथा में शनिवार की रात  यज्ञाचार्य दुर्गेश कुमार शास्त्री अयोध्या से आए हुए जगत गुरु स्वामी राम दिनेशाचार्य ने श्री राम जन्म के बारे में कथा सुनाई जगत गुरु स्वामी राम दिनेशाचार्य ने बताया कि भगवान राम की जन्म किस किस भाव में हुआ उसका वृतांत सुनाने जा रहा हूं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कथा से सनातन धर्म परंपरा के विशेष कृपा भक्ति भाव की जल जीवन परमात्मा की ध्यान आनंदित होने लगे तब जाने भगवान की कृपा मेरे ऊपर स्थान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रभू श्री राम भाव सागर पार करने के लिए नाव का आश्चर्य लेकर संसार सागर को पार करना है। श्री राम कथा की श्रवण रसपान में डुबकी लगाए नौका के सहारे भाव सागर पार हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह केवल राम की जन्म के बारे में सच्चे लगन प्रेम से अंतर आत्मा में बिठाना पड़ता है। माता पार्वती ने महादेव से कहा कि प्रभु श्री राम जन्म किस किस रूप में हुआ महादेव जी ने कहा बाल चरित्र किशोरी जी से विवाह, वन गमन, खरदूषण वध, रावण वध, अयोध्या में बैठकर राज्य व प्रजा में कार्य किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर धनीराम प्रजापति,सीताराम प्रजापति,पंकज प्रजापति, पप्पू सिंह, संजय सिंह, चेयरमैन अजय गुप्ता,रक्षा राम प्रजापति,धर्मेंद्र शुक्ला, गुड्डू सिंह,प्रेम मोदनवाल,बबलू सिंह, शिवपूजन सिंह, मनीराम प्रजापति, दयाराम प्रजापति, विजय पाल प्रजापति, राम नरेश पासवान आदि लोग मौजूद रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 20:31:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>त्याग और समर्पण की देवी - माँ जानकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ई0 प्रभात किशोर</strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जनहितकारी भयहारी ।,अतुलित छबि भारी मुनि-मनहारी जनकदुलारी सुकुमारी ।।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सुन्दर सिंहासन तेहिं पर आसन कोटि हुताशन द्युतिकारी ।, सिर छत्र बिराजै सखि संग भाजै निज-निज कारज करधारी ।।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सुर सिद्ध सुजाना हनै निशाना चढ़े बिमाना समुदाई।, बरसहिं बहुफूला मंगल मूला अनुकूला सिया गुन गाई ।।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">दम्पति अनुरागेउ प्रेम सुपागेउ यह सुख लायउं मनलाई।, अस्तुति सिय केरी प्रेमलतेरी बरनि सुचेरी सिर नाई ।। </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में जानकी नवमी या सीता नवमी का काफी महत्व है। जनक नंदिनी और भगवान राम की अद्र्धांगिनी मां सीता का प्रकटीकरण वैशाख मास के शुक्ल पक्ष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177278/goddess-of-sacrifice-and-dedication-maa-janaki"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/sita-navami-730_1682620129.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ई0 प्रभात किशोर</strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जनहितकारी भयहारी ।,अतुलित छबि भारी मुनि-मनहारी जनकदुलारी सुकुमारी ।।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सुन्दर सिंहासन तेहिं पर आसन कोटि हुताशन द्युतिकारी ।, सिर छत्र बिराजै सखि संग भाजै निज-निज कारज करधारी ।।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सुर सिद्ध सुजाना हनै निशाना चढ़े बिमाना समुदाई।, बरसहिं बहुफूला मंगल मूला अनुकूला सिया गुन गाई ।।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">दम्पति अनुरागेउ प्रेम सुपागेउ यह सुख लायउं मनलाई।, अस्तुति सिय केरी प्रेमलतेरी बरनि सुचेरी सिर नाई ।। </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में जानकी नवमी या सीता नवमी का काफी महत्व है। जनक नंदिनी और भगवान राम की अद्र्धांगिनी मां सीता का प्रकटीकरण वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। यह शुभ दिवस रामनवमी के ठीक एक माह बाद पड़ता है और पूरे देश में धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">माँ सीता मिथिला के राजा (जिसे विदेह भी कहा जाता है) राजा जनक की दत्तक पुत्री थी, इसलिए उन्हें जानकी या जनक नंदिनी के नाम से भी संबोधित किया जाता है। सनातन धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार राजा जनक बिहार के वर्तमान सीतामढ़ी में एक यज्ञ अनुष्ठान के दौरान भूमि की जुताई कर रहे थे। इस दौरान उन्हें खेत के गड्ढे में एक सोने के घड़े में एक बच्ची मिली, जिसे निःसंतान राजा ने दिव्य उपहार स्वरूप अपनी प्यारी बेटी के रूप में अपना लिया। श्री राम भगवान विष्णु के अवतार थे और माँ सीता को उनकी पत्नी देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। भूमि के गर्भ से प्रकट होने के कारण उन्हें भूमिजा भी कहा जाता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">प्रभु श्री राम और मां सीता को एक आदर्श युगल माना जाता है। हालाँकि उनके सांसारिक मार्ग में अनेकानेक बाधाएँ आईं, लेकिन अपने संबंधों को लेकर वे सदैव अटल रहे। माँ सीता का चरित्र मानव जगत में एक आदर्श महिला का प्रतीक है और लगभग सभी परिवारों में यह आकांक्षा रहती है कि उनके यहां बेटी, जीवनसाथी, बहू, भाभी या माँ के रूप में देवी सीता जैसी कन्या हो। वे अपने समर्पण, ईमानदारी, साहस, पवित्रता और आत्म-बलिदान के लिए जानी जाती हैं। वे एक राजकुमारी थी, लेकिन वनवास गमन में पतिव्रता स्त्री की भांति उन्होने अपने पति का साथ दिया। वह लक्ष्मण और हनुमान को अपने भाई और पुत्र के रूप में प्यार करती थी। उन्होंने छद्म साधु वेशधारी रावण को भिक्षा देकर गरीबों और संतों की मदद करने की परंपरा का पालन किया। अपहरण के दौरान वानरों के बीच अपने आभूषण फेंककर उन्होने बुद्धिमत्ता का परिचय दिया, जो बाद में श्री राम-सेना को अपहरण मार्ग का पता लगाने में सहायक सिद्ध हुआ। अपहरण के बाद, उन्होने रावण को अपने कुकर्मों के कारण उसके वंश के सर्वनाश की चेतावनी भी दी।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">गर्भावस्था के दौरान सीता अपने अलगाव या अनौपचारिक तलाक से अप्रसन्न एवं कुंठित थीं, परन्तु उन्होने इस विकट परिस्थिति का साहसपूर्वक सामना किया । उन्होने अपने बच्चों को जन्म देने और उन्हें सभी गुणों से लैस करने का निर्णय किया। अपनी मानव जीवनयात्रा के अंतिम दौर में वे एक एकल माँ के रूप में रहीं। उन्होने स्वयं को पीड़ित नहीं माना और समान अधिकारों की मांग के लिए अयोध्या वापस नहीं गई। वे राजा एवं पति के बीच भूमिका चुनने में श्री राम के आंतरिक द्वंद को समझती थी। उन्होंने राजा जनक के परिवार की प्यारी बेटी, दशरथ के परिवार की बहू, प्रभु राम की पत्नी और अंत में महाराज लव एवं कुश की माँ के रूप में अपने कर्तव्यों का सम्यक निर्वहन किया। जब लव और कुश को अयोध्या की प्रजा और पिता राम ने स्वीकार कर लिया, तो माता के रूप में उनकी अंतिम भूमिका भी पूर्ण हो गई और वह इस क्रूर जगत, जहां पवित्रता हेतु महिलाओं से प्रमाण की आवश्यकता होती है, से मुक्ति पाने के लिए धरती माता के गर्भ में वापस लौट आईं।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">जानकी नवमी के शुभ दिवस पर, विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सफल जीवन के लिए उपवास रखती हैं और आशीर्वाद हेतु श्री राम और मां सीता की पूजा-अर्चना करती हैं। राम, सीता और लक्ष्मण  के साथ-साथ धरती माता का प्रतिनिधित्व करने वाले हल की भी पूजा का विधान है। भक्तजन ऋग्वेद 4.57.6 के सीता श्लोक का जाप कर उनकी वंदना करते हैं- ‘‘<em>अर्वाची सुभगे भवः सीते वंदामहे त्वा । यथा नः सुभगास्सि यथाः नः सुफलास्सि</em> ।।‘‘  (हे मां सीते, हमें दर्शन दीजिए । हम आपके समक्ष शीश झुकाते हैं। हे रिद्धि-सिद्धि की सर्वोच्च देवी, कृपया अपनी दया और उदारता दिखाएं और हमारे लिए शुभ फलप्राप्ति के अग्रदूत बनें )।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> माँ सीता, उनका चरित्र और संघर्षमय जीवन भारतीय उपमहाद्वीप की समृद्ध संस्कृति का अभिन्न अंग है। ऐसी मान्यता है कि जानकी नवमी पर पूजा-अनुष्ठान और व्रत करने से विनय, मातृत्व, त्याग और समर्पण जैसे गुणों की प्राप्ति होती है और एक सुखी और समृद्ध वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177278/goddess-of-sacrifice-and-dedication-maa-janaki</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:35:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नव संवत्सर: समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के समन्वय का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​हिंदू नववर्ष केवल कैलेंडर या विक्रम संवत के परिवर्तन का संकेत मात्र नहीं है, बल्कि यह समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के उस संगम का उत्सव है जो भारतीय जीवन-दृष्टि की वैज्ञानिक पहचान को अभिव्यक्त करता है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सनातनी परंपराओं को न भुलाने और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की ऊर्जा प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय चिंतन की सबसे बड़ी विशेषता समय को रेखीय न मानकर चक्रीय मानना है। यहाँ हर अंत, एक नए आरंभ का सूत्रपात है। नव संवत्सर इसी शाश्वत चक्र की याद दिलाता है। यह संदेश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173463/new-year-is-the-festival-of-coordination-of-creation-sensitivity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/gudhi-padwa.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रो. (डॉ.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​हिंदू नववर्ष केवल कैलेंडर या विक्रम संवत के परिवर्तन का संकेत मात्र नहीं है, बल्कि यह समय, सृष्टि, संवेदना, संस्कृति और संकल्प के उस संगम का उत्सव है जो भारतीय जीवन-दृष्टि की वैज्ञानिक पहचान को अभिव्यक्त करता है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सनातनी परंपराओं को न भुलाने और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की ऊर्जा प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय चिंतन की सबसे बड़ी विशेषता समय को रेखीय न मानकर चक्रीय मानना है। यहाँ हर अंत, एक नए आरंभ का सूत्रपात है। नव संवत्सर इसी शाश्वत चक्र की याद दिलाता है। यह संदेश है कि जीवन में परिवर्तन और नवीनीकरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। अतः यह दिवस  उत्सव मनाने के साथ-साथ,  अपने विचारों और कर्मों को नए सिरे से परिभाषित और परिष्कृत करने का अवसर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​सनातन परंपरा के अनुसार, इसी पावन तिथि को ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का प्रारंभ किया था। प्रकृति की दृष्टि से भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। चैत्र मास में वसंत ऋतु अपने चरमोत्कर्ष पर होती है; वृक्षों में नई कोपलें फूटती हैं और खेतों में फसलें लहलहाती हैं। प्रकृति के इस परिवर्तन को भारतीय संस्कृति ने केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि जीवन के 'पुनर्जागरण' के रूप में स्वीकार करने का संदेश दिया है। यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच उस गहरे भावनात्मक संबंध यानी 'संवेदना' को पुनर्जीवित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​धार्मिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है  क्योंकि इसी तिथि से 'वासंतिक नवरात्रि' का शुभारंभ होता है। नौ दिनों की यह शक्ति-उपासना प्रत्येक मानव को साधना, संयम और आत्म-अनुशासन का मार्ग दिखाती है। यह समय बाहरी कोलाहल के बीच आंतरिक जागरण और सकारात्मक ऊर्जा के संचय का  है, जिससे हम एक अनुशासित जीवन जीने का संकल्प ले सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारत की विशाल सांस्कृतिक विविधता में यह नववर्ष का प्रथम दिवस अलग-अलग नामों और रूपों में रचा-बसा है। महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा', आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 'उगादि', कश्मीर में 'नवरेह' और सिंधी समाज में 'चेटी चंड' के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। संकेत स्पष्ट है कि विशाल भारत में भले ही नाम और रीतियाँ भिन्न हों, लेकिन समय के स्वागत और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना सर्वत्र एक समान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​आज के तकनीकी और भौतिकवादी युग में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह नव संवत्सर हमें याद दिलाता है कि वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों से मापी जाती है। इस पवित्र पर्व के दिन यदि हम प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, समाज में सह-अस्तित्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान का संकल्प लें, तो यह पर्व एक परंपरा से आगे बढ़कर उज्ज्वल भविष्य की नींव बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​नव संवत्सर हमें यह स्मरण भी कराता है कि प्रत्येक नया वर्ष केवल तारीखों का बदलना नहीं, बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने का एक ईश्वरीय आमंत्रण है। आइए, इस पावन अवसर पर हम सब भारतीय समय और सृष्टि के साथ कदम मिलाते हुए एक श्रेष्ठ समाज एवं आत्मनिर्भर विकसित राष्ट्र के निर्माण का संकल्प लेते हैं।मेरा ऐसा मानना है कि विश्व के लोग यदि इस पर्व के मर्म को समझ पाते, तो आज जो वैश्विक अशांति और युद्ध का वातावरण व्याप्त है, उससे मुक्ति मिल जाती और 'विश्व बंधुत्व' की भावना को बल मिलता।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 16:48:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रज्ञा पुराण कथा सुनने से धन्य हो जाता है मानव जीवन : कैलाश नाथ तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,  </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के भरौली कैथोलिया में चल रहे गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के पहले दिन वृहस्पतिवार रात श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने प्रज्ञा पुराण की रोचक कथा सुनाते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। इसके अध्ययन से व्यक्ति के जीवन में आने वाले अनेक संकट दूर होते हैं और परिवार को उन्नति के मार्ग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173023/human-life-becomes-blessed-by-listening-to-pragya-purana-katha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1772803543856.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर,  </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के भरौली कैथोलिया में चल रहे गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के पहले दिन वृहस्पतिवार रात श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने प्रज्ञा पुराण की रोचक कथा सुनाते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। इसके अध्ययन से व्यक्ति के जीवन में आने वाले अनेक संकट दूर होते हैं और परिवार को उन्नति के मार्ग पर ले जाने की प्रेरणा मिलती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कथा व्यास ने भगवान विष्णु और नारद के संवाद का भी भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नारद जी ने भगवान विष्णु से प्रश्न किया कि त्रेता युग में श्रीराम और द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर आपने पृथ्वी को पापों से मुक्त किया, लेकिन कलयुग में मनुष्य अनेक दुखों और परेशानियों से घिरा हुआ है। ऐसे में उसके दुखों का अंत कैसे होगा।</div><div style="text-align:justify;">इस पर भगवान विष्णु ने कहा कि कलयुग में मनुष्य के दुखों से मुक्ति पाने और सांसारिक भवसागर से पार होने का सरल उपाय प्रज्ञा पुराण का अध्ययन और उसके आदर्शों को जीवन में अपनाना है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कथा के समापन पर श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर मिठाई लाल यादव, आदर्श राम मौर्य, जंगली यादव, लवकुश यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 21:14:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गौ माता को राज्य माता घोषित करने के लिए धर्म युद्ध के लिए शंकराचार्य लखनऊ रवाना।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आज सुबह प्रातः  शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी  ने श्री विद्या मठ में गौ माता की पूजा की उसके बाद हनुमान जी की पूजा की, काशी में चिंतामणि गणेश जी की पूजा करके श्री संकट मोचन हनुमान जी की पूजा की, गौ माता के लिए धर्म युद्ध का शंखनाद किया तथा लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1001637799.jpg" alt="गौ माता को राज्य माता घोषित करने के लिए धर्म युद्ध के लिए शंकराचार्य लखनऊ रवाना।" width="1200" height="855" /></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शुभमुहूर्त में गौपूजा, गंगादर्शन,  विश्वमोहनेश्वर महादेव, कृपामूर्ति हनुमान दर्शन, चिन्तामणि गणेश जी की पूजा आरती/ श्री संकटमोचन हनुमान जी महाराज की पूजा दर्शन के बाद हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ, बजरंग बाण पाठ करके आगे लखनऊ के लिए प्रस्थान कर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172785/shankaracharya-left-for-lucknow-for-religious-war-to-declare-mother"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001637796.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज सुबह प्रातः  शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी  ने श्री विद्या मठ में गौ माता की पूजा की उसके बाद हनुमान जी की पूजा की, काशी में चिंतामणि गणेश जी की पूजा करके श्री संकट मोचन हनुमान जी की पूजा की, गौ माता के लिए धर्म युद्ध का शंखनाद किया तथा लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1001637799.jpg" alt="गौ माता को राज्य माता घोषित करने के लिए धर्म युद्ध के लिए शंकराचार्य लखनऊ रवाना।" width="1280" height="855"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शुभमुहूर्त में गौपूजा, गंगादर्शन,  विश्वमोहनेश्वर महादेव, कृपामूर्ति हनुमान दर्शन, चिन्तामणि गणेश जी की पूजा आरती/ श्री संकटमोचन हनुमान जी महाराज की पूजा दर्शन के बाद हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ, बजरंग बाण पाठ करके आगे लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।वे पयागपुर लोहारमऊ तथा जमानागद् ऋषि के आश्रम में रास्ते में रुक कर पत्रकार वार्ता भी किए।</div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1001637798.jpg" alt="गौ माता को राज्य माता घोषित करने के लिए धर्म युद्ध के लिए शंकराचार्य लखनऊ रवाना।" width="1280" height="855"></img></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/172785/shankaracharya-left-for-lucknow-for-religious-war-to-declare-mother</link>
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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरयू नदी पर धर्म सेवक बंधुओ ने गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा आरती कर लोगों से सनातन धर्म को बचाने तथा विस्तार करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div><strong>बाराबंकी</strong>
<div>  </div>
<div>विकास खंड सूरतगंज के अंतर्गत ग्राम सरसंडा के निकट स्थित सरयू नदी पर धर्म सेवक बंधुओ ने गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा आरती की और साथ ही सनातन धर्म को बचाने के साथ साथ सनातन धर्म के विस्तार की लोगों से अपील की</div>
<div>  </div>
<div>।वहीं इस मौके पर जिला संयोजक अमित अवस्थी,जिला विधि प्रमुख संगीत पाठक, खंड संयोजक सुमित शुक्ला, ब्लॉक प्रमुख सूरतगंज शेखर, पूर्व ब्लॉक प्रमुख आशीष, राम सहारे, दीपक मिश्रा,सहित काफी संख्या में धर्म सेवक बंधु मौजूद रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo">  </div>
<div class="adL">  </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/129810/on-the-occasion-of-ganga-dussehra-the-dharma-sevak-brothers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-05/गंगा-आरती.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div><strong>बाराबंकी</strong>
<div> </div>
<div>विकास खंड सूरतगंज के अंतर्गत ग्राम सरसंडा के निकट स्थित सरयू नदी पर धर्म सेवक बंधुओ ने गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा आरती की और साथ ही सनातन धर्म को बचाने के साथ साथ सनातन धर्म के विस्तार की लोगों से अपील की</div>
<div> </div>
<div>।वहीं इस मौके पर जिला संयोजक अमित अवस्थी,जिला विधि प्रमुख संगीत पाठक, खंड संयोजक सुमित शुक्ला, ब्लॉक प्रमुख सूरतगंज शेखर, पूर्व ब्लॉक प्रमुख आशीष, राम सहारे, दीपक मिश्रा,सहित काफी संख्या में धर्म सेवक बंधु मौजूद रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 May 2023 23:08:33 +0530</pubDate>
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