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                <title>सामाजिक न्याय - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सामाजिक न्याय RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत में कभी शाश्वत नहीं रही अस्पृश्यता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वर्तमान भारत में अस्पृश्यता को लेकर कई प्रकार के विमर्श चल रहे हैं। एक विमर्श यह है कि भारत में उच्च वर्ग के लोगों ने निम्न वर्ग के साथ भेद - भाव किया। उन्हें पानी पीने, शिक्षा प्राप्त करने एवं समान व्यवहार के लिए वंचित किया गया। यह विमर्श सर्वथा झूठ और मन गठन्त कहानी और कुंठा से भरा हुआ है। सच तो यह है कि इस प्रकार की उच्च जाति व निम्न जाति का विषय भारत के लोगों द्वारा नहीं अपितु भारत में लम्बे समय तक हुए बाह्य आक्रमणों मुगलों व अंग्रेजों की देन है। जो कभी स्थाई नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176707/untouchability-was-never-eternal-in-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/2ee40841-4d6e-496d-82df-6845b6d5f3f2_202302072115301682_h@@ight_820_w@@idth_1280.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान भारत में अस्पृश्यता को लेकर कई प्रकार के विमर्श चल रहे हैं। एक विमर्श यह है कि भारत में उच्च वर्ग के लोगों ने निम्न वर्ग के साथ भेद - भाव किया। उन्हें पानी पीने, शिक्षा प्राप्त करने एवं समान व्यवहार के लिए वंचित किया गया। यह विमर्श सर्वथा झूठ और मन गठन्त कहानी और कुंठा से भरा हुआ है। सच तो यह है कि इस प्रकार की उच्च जाति व निम्न जाति का विषय भारत के लोगों द्वारा नहीं अपितु भारत में लम्बे समय तक हुए बाह्य आक्रमणों मुगलों व अंग्रेजों की देन है। जो कभी स्थाई नहीं रही। प्राचीन भारत में कभी जाति वैमनस्यता, घृणा, ऊंच नीच का भाव जनमानस में नहीं था। इसके उदाहरण हम आज भी अपने घरों में देखते है।</p><p style="text-align:justify;"> जैसे जब हमारे घरों में वैदिक परंपरा से विवाह होता है तब उस विवाह को संपन्न कराने के लिए सर्व समाज जाति बिरादरी के लोगों का कार्य होता है उनके भाग के बिना विवाह के सारे कार्यक्रम सम्पन्न होना संभव ही नहीं। इसमें किसी भी प्रकार का कोई भेद भाव नहीं है। वहीं यदि सतयुग की बात करते हैं तो राजा हरिश्चंद्र आते हैं जो डोम के यहां नौकरी करते हैं कोई भेद भाव नहीं है। राजा बलि और भगवान वामन देव का उदाहरण कोई भेद नहीं है। इसी प्रकार त्रेता युग में भगवान श्रीराम के जीवन से स्पष्ट होता है कि समाज कितना एक रस था। </p><p style="text-align:justify;">भीलनी के झूठे बेर खाने का प्रसंग, वनवासियों के साथ संगठन कर लंका विजय का प्रसंग, निषादराज को गले लगाना "तुम मोहि प्रिय भरतहीं सम भाई" इत्यादि अनेकों उदाहरण समाज को एक साथ बिना किसी भेद के दर्शाते हैं। द्वापर में जब हम बात करते हैं तब भी समाज में कोई जातीय वैमनस्य अस्पृश्यता नहीं है भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाएं सारे भेदों से परे हैं। पांडवों का अज्ञातवास के समय अनेकों ऐसी घटनाएं मिलती है जहां कोई भेद भाव नहीं है। भीम और हिडम्बा का विवाह, राजा शांतनु का विवाह, विदुर के यहां भगवान का भोजन इत्यादि। </p><p style="text-align:justify;">महाभारत में बहुत सारे सहज समरसता के विषय मिल जाएंगे जो समाज में एकाकार को दर्शाते हैं अब हम कलियुग की बात करते हैं यहां भी कोई जातीय वैमनस्य नहीं है। मध्यकाल में भारत में हुए आक्रमणों से हिन्दू समाज में कुछ विकृतियां आई लेकिन कभी शाश्वत नहीं रही उन्हें दूर करने के लिए भारत में अनेकों संत, महात्माओं, मनीषियों, महापुरुषों ने समय समय पर समाज को दिशा प्रदान कर अभियान चलाया है। चाहे वह स्वामी दयानंद सरस्वती जी, गोस्वामी तुलसीदास जी, राजा राममोहन राय, सन्त रविदास, गुरुनानक देव जी, मीराबाई, सन्त नामदेव जी, शिवा जी महाराज, महाराणा प्रताप, डॉ केशव बलीराम हेडगेवार, सावित्री बाई फुले, लोकमाता अहिल्याबाई होकलर आदि सैकड़ों नाम है जो भारत में बाहर से आई कुरीतियों को लेकर समाज में लम्बा संघर्ष किया। </p><p style="text-align:justify;">आज डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर के विषय को लेकर राजनैतिक लोग समाज में घृणा फैलान का कार्य करते हैं। डॉ अम्बेडकर ने कभी भी समाज को विभाजित करने की बात नहीं की उन्होंने भी संपूर्ण हिन्दू समाज को साथ रहने की वकालत की है। डॉ अम्बेडकर के जीवन में जब कभी ऐसी घटनाएं अस्पृश्यता की आईं भी तो हमारे ही लोगों ने उनका विरोध किया और डॉ अम्बेडकर को आगे बढ़ाया। डॉ अम्बेडकर को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देने वाले ब्राह्मण बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़<strong> </strong>थे। डॉ. भीमराव अंबेडकर को 'अंबेडकर' सरनेम उनके ब्राह्मण शिक्षक कृष्णाजी केशव अंबेडकर ने दिया था। </p><p style="text-align:justify;">स्कूल के रिकॉर्ड में उनका मूल उपनाम 'अंबावाडेकर' (गांव के नाम पर) से बदलकर शिक्षक ने अपना उपनाम 'अंबेडकर' रख दिया था। इसलिए भारत में जातीय घृणा का सिद्धांत कभी नहीं रहा है। मेरा सभी से आग्रह है कि भारत को जानो, भारत को मानो और भारत के बनो। किसी भी पूर्वाग्रह से बाहर निकलिए स्वच्छ मन मस्तिष्क से भारत के ग्रंथों का अध्ययन करें। भारतीय वांग्मय में भी कहीं पर घृणा, उन्मूलन का संदर्भ नहीं है बस शास्त्रों का अध्ययन उनकी व्याख्या मनमाने ढंग से करने से बचें परम्परा से प्राप्त ज्ञान के आचार्यों से मिलकर अध्ययन करें सबकुछ समझ में आयेगे। डॉ अम्बेडकर का मत भी है कि सबके साथ समान व्यवहार, समान शिक्षा, समान सम्मान। खूब पढ़ो, परिश्रम करो, सफलता प्रदान करो आरक्षण की वैशाखी से बाहर निकले।<br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>बाल भास्कर मिश्र</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:35:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस नेतृत्व ने रामबचन भारती को सौंपी अनुसूचित जाति के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के रुधौली विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसीनेता रामबचन भारती को पार्टी नेतृत्व मे अनुसचित विभाग का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। कांग्रेस पार्टी अनुसूचित विभाग के नेशनल चेयरमैन राजेन्द्र पाल गौतम सांसद तनुज पूनिया प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित विभाग) ने तदर्थ नियुक्ति कर जिलाध्यक्षों से पार्टी हित मे कार्य करने और अनुसूचित जाति के लोगों की आवाज उठाने का कार्य करने का निर्देश दिया है। वरिष्ठ कांग्रेसी रामबचन भारती को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी के पदाधिकारियों वे कार्यकर्ताओं ने बधाइयां व शुभकामनायें दिया है। पूर्व जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘ज्ञानू’ ने कहा रामबचन भारती कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं।</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174990/congress-leadership-handed-over-the-responsibility-of-district-president-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260403-wa0057.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के रुधौली विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसीनेता रामबचन भारती को पार्टी नेतृत्व मे अनुसचित विभाग का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। कांग्रेस पार्टी अनुसूचित विभाग के नेशनल चेयरमैन राजेन्द्र पाल गौतम सांसद तनुज पूनिया प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित विभाग) ने तदर्थ नियुक्ति कर जिलाध्यक्षों से पार्टी हित मे कार्य करने और अनुसूचित जाति के लोगों की आवाज उठाने का कार्य करने का निर्देश दिया है। वरिष्ठ कांग्रेसी रामबचन भारती को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी के पदाधिकारियों वे कार्यकर्ताओं ने बधाइयां व शुभकामनायें दिया है। पूर्व जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘ज्ञानू’ ने कहा रामबचन भारती कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। कई दशक से उन्होने पार्टी के लिये कार्य करके न केवल अपना अनुभव बड़ा किया है बल्कि समय समय पर पार्टी के कार्यक्रमों मे बढ़चढ़कर हिस्सेदारी कर अपनी सक्रियता भी सिद्ध की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रामबचन भारती को पार्टी द्वारा जिम्मेदारी दिये जाने पर पूर्व विधायक अंबिका सिंह, बसंत चौधरी, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, अनूप पाण्डेय, अफसर यू अहमद, विरेन्द्र्र प्रताप नारायण पाण्डेय, अनिरूद्ध त्रिपाठी, विश्वनाथ चौधरी, मो. रफीक खां, डा. शीला शर्मा,  प्रशान्त पाण्डेय, लक्ष्मी यादव, बाबूराम सिंह एडवोकेट, नर्वदेश्वर शुक्ला,अनिल भारती, गिरजेश पाल, विनय तिवारी, अशोक श्रीवास्तव, सुनील पाण्डेय, अजय शुक्ला, शिवनरायन पाण्डेय, </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अतीउल्लाह सिद्धीकी, अवधेश सिंह, वाहिद सिद्धीकी, भूमिधर गुप्ता, रामबहादुर, शिवविभूति मिश्रा, डा. मारूफ खान, शकुन्तला देवी,अलीम अख्तर, मंजू पाण्डेय, संदीप श्रीवास्तव, गुड्डू सोनकर, लालजीत सिंह, विवेक श्रीवास्तव, शौकत अली नन्हू, साधूसरन आर्या, साधू पाण्डेय, अनिल तिवारी, सुरेन्द्र मिश्रा, राकेश गांधियन, राहुल चतुर्वेदी, अमरदेव सिंह, डा. दीपेन्द्र सिंह, डीएन शास्त्री, हरिशंकर तिवारी, राजकूपर,घनश्याम शुक्ला, देवी प्रसाद पाण्डेय, बृजभान कनौजिया, रामबाबू कल्पू, शिवशंकर भारती, राजेश भारती, रामधीरज चौधरी, शेर मोहम्मद, सूर्यमणि पाण्डेय, अजय प्रताप सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये बधाइयां व शुभकामनायें देते हुये प्रदेश अध्यक्ष तनुज पूनिया व राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति आभार जताया है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) का नया निर्देश 45 दिनों से अधिक अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार की आरक्षण नीति (एससी 15%, एसटी 7.5%, ओबीसी 27%) लागू होगी। यह नियम सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों पर लागू है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170974/university-grants-commissions-new-instruction-makes-reservation-mandatory-in-temporary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img_20260223_133812.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थायी नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर कहा है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 2018 और 2022 के कार्यालय ज्ञापनों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने भी मजबूती से दोहराया है।</p>
<p> </p>
<blockquote class="format1">यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी इस पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश सितंबर 2024 के पूर्व संचार का अनुवर्ती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षण, गैर-शिक्षण और प्रशासनिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्तियां यदि 45 दिनों से अधिक की हों, तो उनमें भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। संस्थानों को 2023-24 और 2024-25 के दौरान की गई ऐसी नियुक्तियों का विवरण यूजीसी के यूएएमपी पोर्टल पर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अनुपालन की जांच की जा सके।</blockquote>
<p> </p>
<p>यह कदम एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों से प्राप्त शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां आरोप लगाया गया था कि कई संस्थान अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश आरक्षण को बाईपास करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा, खासकर उन मामलों में जहां स्थायी पदों की भर्ती में देरी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह नीति दशकों से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है।"</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, इस निर्देश पर विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "यूजीसी ने ओबीसी, एससी और एसटी का जिक्र किया, लेकिन ईडब्ल्यूएस को क्यों छोड़ दिया? क्या यह जानबूझकर किया गया है?" वहीं, कुछ ने इसे निजी विश्वविद्यालयों पर अनुचित दबाव बताया। एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अस्थायी नौकरियां भी जाति से विभाजित? योग्यता मौसमी नहीं होनी चाहिए।" दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा डीओपीटी दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन मात्र है, न कि कोई नई नीति।</p>
<p> </p>
<p>शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इससे पहले, 2018 के डीओपीटी ज्ञापन ने स्पष्ट किया था कि 45 दिनों से अधिक की अस्थायी नियुक्तियां आरक्षण के दायरे में आएंगी। यूजीसी ने इसकी निगरानी के लिए पोर्टल शुरू किया है, जो अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।</p>
<p> </p>
<p>यह विकास ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों अस्थायी पदों पर प्रभाव पड़ेगा, जो मुख्य रूप से गेस्ट लेक्चरर, रिसर्च असिस्टेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। सरकार का लक्ष्य सामाजिक समावेश को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक इसे नौकरशाही बढ़ावा मानते हैं। आने वाले दिनों में संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:39:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sachin Bajpai]]></dc:creator>
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