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                <title>सामाजिक न्याय - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सामाजिक न्याय RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>संतराम बी०ए० जन चेतना समिति द्वारा संतराम बी०ए०का 38 वां परिनिर्वाण दिवस मनाया गया।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में 31 मई 2026 संतराम बी०ए० जन चेतना समिति के तत्वाधान में आज हरिहर नगर के इंदिरा नगर में महान समाज सुधारक जाति -पाति तोड़क मंडल के संस्थापक एवं स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक परम श्रद्धेय संतराम बी०ए० का 38 वां परिनिर्वाण दिवस श्रद्धा एवं संकल्प के साथ बनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सतीश चंद्र प्रजापति राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक समझदार पार्टी  एवं अरविंद कुमार प्रजापति द्वारा अध्यक्षता संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ संतराम बी०ए० जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अपने उद्बोधन में सतीश चंद्र प्रजापति जी ने संतराम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180891/the-38th-death-anniversary-of-santram-ba-was-celebrated-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/530579-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में 31 मई 2026 संतराम बी०ए० जन चेतना समिति के तत्वाधान में आज हरिहर नगर के इंदिरा नगर में महान समाज सुधारक जाति -पाति तोड़क मंडल के संस्थापक एवं स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक परम श्रद्धेय संतराम बी०ए० का 38 वां परिनिर्वाण दिवस श्रद्धा एवं संकल्प के साथ बनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सतीश चंद्र प्रजापति राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक समझदार पार्टी  एवं अरविंद कुमार प्रजापति द्वारा अध्यक्षता संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ संतराम बी०ए० जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अपने उद्बोधन में सतीश चंद्र प्रजापति जी ने संतराम बी०ए०जी को महान व्यक्तित्व के साथ एक महान विचारक थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपना पूरा जीवन जाति-पात के भेदभाव को मिटाने और  महिलाओं की शिक्षा के प्रबल समर्थक। आज उनके विचार उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर एस.एन. कश्यप, सतीश कुमार कश्यप, राजीव रतन चन्द्र अति पिछड़ा महासभा समाज के सचिव,</div>
<div style="text-align:justify;">
<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;">
<div> </div>
<div>जयराम प्रजापति, अरविंद कुमार  द्वारा  कार्यक्रम की अध्यक्षता, श्यामलाल महासचिव द्वारा मंच का संचालन सर्वश्री बलिराम प्रजापति, राम अचल प्रजापति, राम आधार प्रजापति, शांति स्वरूप वर्मा एवं अन्य स्थानीय नागरिक एवं महिलाएं  उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने संतराम बी०ए० के जीवन संघर्ष उनके सामाजिक योगदान एवं क्रांतिकारी विचारों पर प्रकाश डाला और सदस्यों ने उनके आदर्श विचारों को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अरविंद कुमार प्रजापति अधीक्षण अभियंता सेवानिवृत्त द्वारा महान संत के विचारों एवं कृतियों पर प्रकाश डाला गया तथा उनको उनके विचारों को अपने जीवन में धारण करने और उन पर चलने का समाज के लोगों से विनम्र आग्रह किया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 21:09:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखिलेश यादव ने राजकुमार भाटी की लगाई क्लास,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी की ब्राह्मणों पर की गई टिप्पणी पर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रदेशभर में ब्राह्मण समाज के नेता राजकुमार भाटी पर निशाना साध रहे हैं. उनके निशाने पर सपा मुखिया अखिलेश यादव भी हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राजकुमार भाटी को पार्टी से बर्खास्त करने की मांग राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से की जा रही है.</div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण नेता भी राजकुमार भाटी के बयान को लेकर खफा हैं. उन्होंने अखिलेश यादव से शिकायत भी की है. रविवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179534/akhilesh-yadav-took-rajkumar-bhatis-class"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी की ब्राह्मणों पर की गई टिप्पणी पर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. प्रदेशभर में ब्राह्मण समाज के नेता राजकुमार भाटी पर निशाना साध रहे हैं. उनके निशाने पर सपा मुखिया अखिलेश यादव भी हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राजकुमार भाटी को पार्टी से बर्खास्त करने की मांग राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से की जा रही है.</div>
<div style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण नेता भी राजकुमार भाटी के बयान को लेकर खफा हैं. उन्होंने अखिलेश यादव से शिकायत भी की है. रविवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी को तलब किया. प्रदेश मुख्यालय राजकुमार भाटी की क्लास लगाई.</div>
<div style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने सभी कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि वे सामाजिक सद्भाव का आचरण करें. अपनी भाषा और व्यवहार में संतुलन और संयम बरतें. ऐसी कोई बात न करें जिससे अपने को अपमानित या आहत महसूस करे. उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को बचाकर ही सामाजिक न्याय के राज की स्थापना की जा सकती है. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी को एकजुट रहना होगा.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सामाजिक नीति में सबका सम्मान निहित है. पीडीए समाज सभी वर्गों-पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक के अलावा पीड़ित अगड़े-पिछड़े, आधी आबादी महिला को अपने से जोड़ती है. पीडीए सामाजिक न्याय की लड़ाई का भी प्रभावी माध्यम है. पीडीए की एकता से ही 2027 में भाजपा को सत्ता से हटाया जा सकेगा और समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा.</div>
<div style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में दिनदहाड़े लुटते ‘सुनारों की सुरक्षा’ की समस्या अभी सुलझी नहीं थी कि तब तक ‘सोनाबंदी’ का व्यापार-चौपट करने वाला आह्वान आ गया और फिर ‘सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी ढाई गुना बढ़ाने का फ़रमान’. ज़ेवरात-गहनों के व्यापार में बड़ी कंपनियों के आ जाने से ये छोटे सुनार वैसे ही कम्पटीशन नहीं कर पा रहे थे, अब उन्हें लग रहा है कि शायद बड़ी कंपनियों से एकमुश्त कमीशन लेने के चक्कर में ही भाजपाइयों ने युद्ध के बहाने, सोनाबंदी की बात की है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:49:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा का प्रदेश सम्मेलन संपन्न, 36 प्रतिशत आरक्षण समेत कई मांगों पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रांची, झारखंड:- </strong>सोमवार को रांची स्थित हेमसी हाइट, कचहरी चौक में पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा का प्रदेश सम्मेलन प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रो. जय प्रकाश वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन मोर्चा के उपाध्यक्ष अब्दुल खालिक एवं मंत्री सुरेंद्र कुशवाहा ने संयुक्त रूप से किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सम्मेलन में पिछड़ा वर्ग के अधिकार, आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन में राज्य सरकार की नौकरियों में पिछड़ा वर्ग को 36 प्रतिशत आरक्षण देने, पंचायत चुनाव में पिछड़ों का आरक्षण सुनिश्चित करने तथा झारखंड के निजी क्षेत्र की नौकरियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178970/state-conference-of-backward-class-sangharsh-morcha-concludes-brainstorming-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/news-10.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रांची, झारखंड:- </strong>सोमवार को रांची स्थित हेमसी हाइट, कचहरी चौक में पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा का प्रदेश सम्मेलन प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रो. जय प्रकाश वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन मोर्चा के उपाध्यक्ष अब्दुल खालिक एवं मंत्री सुरेंद्र कुशवाहा ने संयुक्त रूप से किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सम्मेलन में पिछड़ा वर्ग के अधिकार, आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन में राज्य सरकार की नौकरियों में पिछड़ा वर्ग को 36 प्रतिशत आरक्षण देने, पंचायत चुनाव में पिछड़ों का आरक्षण सुनिश्चित करने तथा झारखंड के निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा जिन जिलों में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण शून्य या बहुत कम है, वहां जनसंख्या के आधार पर आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा और विधानसभा में ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण तय करने की मांग भी सम्मेलन में रखी गई। पिछड़ों के सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक अधिकारों से जुड़े अन्य विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रो. जय प्रकाश वर्मा ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आज भी विभिन्न जातियों में बंटा हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक पिछड़े वर्ग के लोग आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर संघर्ष नहीं करेंगे, तब तक उन्हें उनका अधिकार नहीं मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से झारखंड के सभी जिलों में धरना एवं प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जिसके बाद रांची में एक विशाल महाजुटान कार्यक्रम किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सम्मेलन में पूर्व सांसद सूरज मंडल, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप कुमार सोनी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अब्दुल खालिक, अरुण कश्यप, उपेंद्र नारायण सिंह, इंद्रदेव महतो, महामंत्री पप्पू रावत, प्रधान महामंत्री सदन प्रजापति, प्रवक्ता सागर कुमार, विजय महतो, जयंत पटेल, प्रो. विवेकानंद कुशवाहा, हेमंत गुप्ता, रंजना जायसवाल, रोहित शर्मा, राम नरेश यादव, इंद्रदेव प्रसाद, राजू वर्मा, प्रवीण मेहता, विक्रांत विश्वकर्मा, कुशेश्वर महतो, तेजलाल महतो, विक्रम महतो, ललित चौधरी, अजित विश्वकर्मा एवं अवध बिहारी शर्मा सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:43:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकुड़ मंडल कारा समेत जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में चलाया गया नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़, झारखंड:-</strong>झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में चल रहे नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के तहत पाकुड़ मंडल कारा समेत आदिवासी बाहुल्य इलाकों में डालसा के टीम द्वारा आज विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त अभियान के तहत बंदियों एवं लोगों को उनके कानूनी अधिकार के बारे में जानकारी दी। ताकि अपने कानूनी अधिकार पर शसक्त हो सके। अपने आस पास न्याय से वंचित व्यक्तियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178953/ninety-day-intensive-legal-awareness-and-public-relations-campaign-conducted-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/news-21.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़, झारखंड:-</strong>झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय के निर्देश पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में चल रहे नब्बे दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के तहत पाकुड़ मंडल कारा समेत आदिवासी बाहुल्य इलाकों में डालसा के टीम द्वारा आज विधिक जागरूकता अभियान चलाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त अभियान के तहत बंदियों एवं लोगों को उनके कानूनी अधिकार के बारे में जानकारी दी। ताकि अपने कानूनी अधिकार पर शसक्त हो सके। अपने आस पास न्याय से वंचित व्यक्तियों को उनके कानूनी अधिकार के बारे में जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ से मिलने वाले निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में जानकारी मिल सके ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस उद्देश्य से डालसा के टीम द्वारा घर घर पहुंच कर न्याय से वंचित न हो इस मकसद से लोगों तक पहुंच कर जानकारी दी जा रही है। उक्त अभियान के तहत बंदियों को लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल सिस्टम के चीफ़ सुबोध कुमार दफादार पैनल अधिवक्ता संजीत कुमार मुखर्जी ने डालसा एवं नालसा के योजनाओं समेत कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। ताकि खुद को, अपने परिवार को ,समाज के लोगों तक न्याय सुनिश्चित कर सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स मनोज सोरेन, सौरभ कुमार यादव ने डायन प्रथा, बाल विवाह, दहेज प्रथा घरेलू हिंसा रोकथाम पर जागरूक करते हुए जागरूक पर्ची पुस्तिकाएं वितरण की साथ ही स्पॉन्सरशिप योजना के बारे में जागरूक की गई। मंडल कारा पाकुड़ में जेल के प्रशासनिक अधिकारी समेत पैरा लीगल वॉलिंटियर्स सायेम अली उपस्थित रहे। </div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:21:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हिंदुत्व, जाति और बंगाल का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2026 केवल एक चुनावी वर्ष नहीं बल्कि एक ऐसी निर्णायक ऐतिहासिक घटना बनकर उभरा है जिसने पूरे देश की राजनीति को नए ढंग से सोचने पर विवश कर दिया है। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा। इसके भीतर सांस्कृतिक अस्मिता, धार्मिक चेतना, राजनीतिक हिंसा, जातीय समीकरण, सामाजिक न्याय और वैचारिक संघर्ष के अनेक स्तर एक साथ दिखाई दिए। यही कारण है कि इस चुनाव को केवल भाजपा की विजय या तृणमूल कांग्रेस की पराजय कह देना उसकी व्यापकता को सीमित कर देना होगा। यह चुनाव उस लंबे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178852/hindutva-caste-and-the-future-of-bengal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/rajneeti2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2026 केवल एक चुनावी वर्ष नहीं बल्कि एक ऐसी निर्णायक ऐतिहासिक घटना बनकर उभरा है जिसने पूरे देश की राजनीति को नए ढंग से सोचने पर विवश कर दिया है। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा। इसके भीतर सांस्कृतिक अस्मिता, धार्मिक चेतना, राजनीतिक हिंसा, जातीय समीकरण, सामाजिक न्याय और वैचारिक संघर्ष के अनेक स्तर एक साथ दिखाई दिए। यही कारण है कि इस चुनाव को केवल भाजपा की विजय या तृणमूल कांग्रेस की पराजय कह देना उसकी व्यापकता को सीमित कर देना होगा। यह चुनाव उस लंबे सामाजिक और मानसिक संघर्ष का परिणाम था जो वर्षों से बंगाल के भीतर धीरे धीरे आकार ले रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2026 के विधानसभा चुनाव में कुल 91.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। कुछ चरणों में मतदान का प्रतिशत 92 तक पहुँचा। यह केवल चुनावी उत्साह का संकेत नहीं था बल्कि जनता के भीतर जमा असंतोष, भय, गुस्से और परिवर्तन की इच्छा का भी स्पष्ट प्रमाण था। 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया जबकि तृणमूल कांग्रेस लगभग 80 सीटों तक सीमित रह गई। 2016 में भाजपा के पास केवल 3 सीटें थीं। 2021 में यह संख्या 77 तक पहुँची और 2026 में यह 207 हो गई। यह परिवर्तन अचानक नहीं था बल्कि एक लंबे सामाजिक और राजनीतिक विस्तार का परिणाम था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल लंबे समय तक वामपंथी राजनीति का गढ़ रहा। 1977 से 2011 तक 34 वर्षों तक वाममोर्चा ने यहाँ शासन किया। उसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने 15 वर्षों तक सत्ता संभाली। इस पूरी अवधि में भाजपा को बंगाल की राजनीति में कभी गंभीर शक्ति नहीं माना गया। बंगाल की बौद्धिक परंपरा, साहित्यिक संस्कृति और धर्मनिरपेक्ष छवि को देखते हुए यह माना जाता था कि यहाँ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीति कभी व्यापक जनाधार नहीं बना पाएगी। लेकिन 2026 ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परिवर्तन की जड़ें केवल चुनावी रणनीति में नहीं बल्कि उन घटनाओं में थीं जिन्होंने बंगाल के समाज को भीतर तक प्रभावित किया। संदेशखाली की घटनाएँ, राजनीतिक हिंसा, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, धार्मिक नारों को लेकर टकराव और अनेक स्थानों पर उत्पन्न असुरक्षा की भावना ने समाज के बड़े हिस्से को मानसिक रूप से बदल दिया। 2021 के चुनावों के दौरान 85 वर्षीय शोभा मजूमदार की मृत्यु को भाजपा और उसके समर्थकों ने राजनीतिक हिंसा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। बंगाल के अनेक क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, हमले और पलायन की घटनाओं ने यह धारणा मजबूत की कि राज्य में लोकतांत्रिक असहमति के लिए स्थान सीमित होता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी बीच धार्मिक पहचान का प्रश्न भी लगातार मजबूत होता गया। जय श्री राम का नारा केवल धार्मिक उद्घोष नहीं रहा बल्कि राजनीतिक प्रतिरोध का प्रतीक बन गया। भाजपा ने इसे सांस्कृतिक स्वाभिमान से जोड़कर प्रस्तुत किया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस पर लंबे समय से तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगता रहा। 2026-27 के बजट में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा के लिए लगभग 5713 करोड़ रुपये के आवंटन ने इस बहस को और तीखा कर दिया। भाजपा समर्थकों ने इसे हिंदू समाज की उपेक्षा और वोट बैंक की राजनीति का प्रमाण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि भाजपा को केवल शहरी या उच्च वर्गीय समर्थन नहीं मिला। अनुसूचित जाति और जनजाति की आरक्षित सीटों में भाजपा ने भारी सफलता प्राप्त की। 84 आरक्षित सीटों में से 67 पर विजय ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर आकर्षित हुआ। यही वह बिंदु है जहाँ बंगाल की राजनीति एक नए वैचारिक मोड़ पर पहुँचती दिखाई देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा ने लंबे समय तक हिंदू एकता की राजनीति की। चुनाव प्रचार के दौरान जातीय पहचान की तुलना में धार्मिक पहचान अधिक प्रभावी दिखाई दी। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद जिस प्रकार सामाजिक अभियान्त्रिकी की चर्चाएँ सामने आने लगीं, उससे नए विवाद पैदा हुए। कुछ विचारकों और रणनीतिकारों ने यह तर्क देना शुरू किया कि बंगाल में सवर्ण और मुसलमानों का एक ऐतिहासिक गठबंधन रहा जिसने दलितों और पिछड़ों को सत्ता से दूर रखा। इस प्रकार की व्याख्या ने भाजपा समर्थक सवर्ण वर्ग के भीतर असहजता पैदा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहीं से यह प्रश्न खड़ा होता है कि क्या भाजपा अब हिंदू एकता की राजनीति से आगे बढ़कर मंडल राजनीति की ओर लौट रही है। यदि ऐसा है तो यह भाजपा के लिए अवसर भी हो सकता है और संकट भी। अवसर इसलिए क्योंकि सामाजिक प्रतिनिधित्व की राजनीति भारतीय लोकतंत्र की वास्तविकता है। संकट इसलिए क्योंकि यदि हिंदू समाज को पुनः जातीय आधार पर विभाजित किया गया तो वह सांस्कृतिक एकता कमजोर हो सकती है जिसने भाजपा को बंगाल में इतनी बड़ी सफलता दिलाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल की सामाजिक संरचना उत्तर भारत के अनेक राज्यों से भिन्न रही है। यहाँ जातीय पहचान मौजूद अवश्य रही लेकिन उसने राजनीति को उस स्तर तक नियंत्रित नहीं किया जैसा बिहार या उत्तर प्रदेश में देखा गया। बंगाल की सांस्कृतिक चेतना लंबे समय तक भाषा, साहित्य और बौद्धिकता के इर्द गिर्द निर्मित होती रही। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और चैतन्य महाप्रभु की परंपरा ने धर्म को विभाजन के बजाय आध्यात्मिक समन्वय के रूप में प्रस्तुत किया। इसलिए यदि बंगाल में जातीय ध्रुवीकरण को कृत्रिम रूप से बढ़ाने का प्रयास होगा तो उसका सामाजिक प्रतिरोध भी सामने आ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस चुनाव में महिलाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न गुस्से ने सरकार विरोधी वातावरण तैयार किया। भाजपा ने इसे प्रभावी ढंग से राजनीतिक मुद्दा बनाया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर चुनाव परिणामों को लेकर विवाद भी सामने आए। विपक्षी दलों और कुछ आलोचकों ने मतदाता सूची संशोधन और मतदाता नाम हटाने की प्रक्रिया पर प्रश्न उठाए। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। हालांकि चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी विवादों के बावजूद यह तथ्य निर्विवाद है कि बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है। पहली बार भाजपा ने राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। यह केवल संगठनात्मक विस्तार नहीं बल्कि वैचारिक स्वीकृति का भी संकेत है। लेकिन वास्तविक चुनौती अब शुरू होती है। चुनाव जीतना अपेक्षाकृत सरल होता है जबकि सामाजिक संतुलन बनाए रखना कहीं अधिक कठिन।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि भाजपा केवल धार्मिक ध्रुवीकरण पर निर्भर रहती है तो उसे दीर्घकालिक सामाजिक स्थिरता प्राप्त नहीं होगी। यदि वह केवल जातीय प्रतिनिधित्व की राजनीति करेगी तो उसका मूल सांस्कृतिक आधार कमजोर पड़ सकता है। बंगाल जैसे राज्य में स्थायी राजनीतिक सफलता के लिए सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक न्याय दोनों को साथ लेकर चलना आवश्यक होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज बंगाल के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या यह परिवर्तन समावेशी होगा या टकरावपूर्ण। क्या जय श्री राम और जय भीम को परस्पर विरोधी नारों की तरह प्रस्तुत किया जाएगा या उन्हें सामाजिक समन्वय के रूप में देखा जाएगा। यदि भाजपा इस संतुलन को साध लेती है तो बंगाल में उसका राजनीतिक आधार लंबे समय तक मजबूत रह सकता है। लेकिन यदि सत्ता के बाद समाज को नए नए वर्गों में बाँटने की राजनीति शुरू होती है तो वही जनता जिसने 2026 में ऐतिहासिक जनादेश दिया है, भविष्य में उससे निराश भी हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल का यह चुनाव केवल एक राज्य का चुनाव नहीं था। यह भारतीय राजनीति की बदलती दिशा का संकेत था। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक असुरक्षा, राजनीतिक हिंसा और प्रतिनिधित्व की राजनीति मिलकर किस प्रकार नए राजनीतिक समीकरण बना सकती है। आने वाले वर्षों में पूरा देश बंगाल को ध्यान से देखेगा क्योंकि यहाँ जो प्रयोग शुरू हुआ है उसका प्रभाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। बंगाल अब केवल साहित्य और संस्कृति की भूमि नहीं रहा बल्कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी वैचारिक प्रयोगशाला बन चुका है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:13:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फर्जी जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ थारू समाज का हल्ला बोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ </strong>अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण और फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के विरोध में थारू समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्थागोरखपुर ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से अनुमति लेकर मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधन ज्ञापन   सौपा</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने आरोप लगाया है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग कथित रूप से “गोंड” शब्द जोड़कर अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं व नौकरियों का लाभ गलत तरीके से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178782/tharu-community-protests-against-fake-caste-certificate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260509-wa0443.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ </strong>अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण और फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के विरोध में थारू समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्थागोरखपुर ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से अनुमति लेकर मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधन ज्ञापन   सौपा</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने आरोप लगाया है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग कथित रूप से “गोंड” शब्द जोड़कर अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं व नौकरियों का लाभ गलत तरीके से लिया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">कई जिलों में  सामने आ रहे मामले</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया है कि गोरखपुर, कुशीनगर, वाराणसी, मऊ, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और आजमगढ़ सहित कई जिलों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं सोनभद्र, मिर्जापुर, हमीरपुर, बांदा, ललितपुर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जनपदों में निवासरत वास्तविक जनजातीय समुदायों के अधिकारों पर संकट गहराने की बात कही गई है। उपरोक्त जनपदों से  हज़ारों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष अपने पारंपरिक भेष भूषा  में शामिल हुए </div>
<div style="text-align:justify;">मूल आदिवासी जनजाति संस्था   गोरखपुर के द्वारा परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल शान्ति मार्च निकालकर प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। समिति के अनुसार इस आंदोलन में विभिन्न जिलों से करीब हजारों लोगों के शामिल हुए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">“वास्तविक जनजातियों का भविष्य हो रहा अंधकारमय”</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यदि कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर रोक नहीं लगी तो वास्तविक अनुसूचित जनजातियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। संगठन ने प्रशासन से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मांगे पूरी होने तक एचएमकेपी जारी रखेगी मजदूर किसानों के अधिकारों की लड़ाई .राष्ट्रीय अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए। तब तक मई दिवस के स्थान पर हर साल काला दिवस ही मनाया जाना चाहिए। अवगत कराते चलें कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के बीते मई दिवस को भी काला दिवस के रूप में मनाने की अपील सभी ट्रेड यूनियनों से की थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्द</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178440/hmkp-will-continue-the-fight-for-the-rights-of-laborers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001889868-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए। तब तक मई दिवस के स्थान पर हर साल काला दिवस ही मनाया जाना चाहिए। अवगत कराते चलें कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के बीते मई दिवस को भी काला दिवस के रूप में मनाने की अपील सभी ट्रेड यूनियनों से की थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस बीच श्रमिकों, मजदूरों और कर्मचारियों के हित में लगातार संघर्ष कर रहे हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने व्यक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल कलप्पा ने कहा है कि मई दिवस शुरुआत 1886 में शिकागो में श्रमिक द्वारा 08 घण्टे के कार्य दिवस की मांग को लेकर एतिहासिक संघर्ष से हुई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा के मुताबिक एकता, प्रतिरोध और श्रमिकों द्वारा बड़ी मुश्किल से हासिल किये गये अधिकारों का प्रतीक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा के माध्यम से राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने मई श्रम संघिताओं के तहत श्रमिको के विधानिक अधिकारों का हनन। बढ़ती नौकरी की असुरक्षा ठेका आधारित रोजगार व बेरोजगारी। सामुहिक सौदेबाजी और ट्रेडयूनियन आजादी पर हमला। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमो का निजीकरण व विनिवेश। श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी और कारपेंर्पोरेट समर्थक नीतिगत दिशाएं जैसे मुद्दों की भी चर्चा करते हुए  हिन्द मजदूर किसान पंचायत की ओर से कड़ा विरोध भी दर्ज कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने के अपने संकल्प को तुरन्त दोहराये। राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा ने सभी केन्द्रीय संगठनों व लोक तात्रिक ताकतों से इस मई दिवस को काला दिवस के रूप में मनाने का आवाहन इसीलिए किया था क्योंकि मई दिवस केवल एक उत्सव नहीं है बल्कि न्याय के लिए संघर्ष जारी रखने का दृढ संकल्प का भी दिन है। हिंद मजदूर किसान पंचायत का जिसके खिलाफ संघर्ष तब तक जारी रहेगा ,जब तक मजदूर श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों से जुड़ी सभी मांगे पूर्ण रूप से मानते हुए उन्हें अमलीजामा नहीं पहना दिया जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:51:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वंचितों के प्रतिनिधित्व हेतु आरक्षण के नव प्रयोग के जनक थे शाहू महाराज: चंद्रभूषण </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>देवरिया, 06 मई। </strong>रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र के डुमरी स्थित सपा जनसंपर्क कार्यालय पर आयोजित शाहू जी महाराज स्मृति दिवस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण यादव ने कहा कि कोल्हापुर रियासत के राजा छत्रपति शाहू जी महाराज वंचित वर्गों को समाज में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए आरक्षण जैसे नव प्रयोग के जनक थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि 26 जुलाई 1902 को शाहू जी महाराज ने 50 प्रतिशत आरक्षण लागू कर सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया। वे सामाजिक परिवर्तन आंदोलन के पुरोधा और प्रेरणा स्रोत थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  यादव ने कहा कि वेदोक्त और पुराणोक्त</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178373/shahu-maharaj-chandrabhushan-was-the-father-of-the-new-experiment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/45.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>देवरिया, 06 मई। </strong>रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र के डुमरी स्थित सपा जनसंपर्क कार्यालय पर आयोजित शाहू जी महाराज स्मृति दिवस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता चंद्रभूषण यादव ने कहा कि कोल्हापुर रियासत के राजा छत्रपति शाहू जी महाराज वंचित वर्गों को समाज में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए आरक्षण जैसे नव प्रयोग के जनक थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि 26 जुलाई 1902 को शाहू जी महाराज ने 50 प्रतिशत आरक्षण लागू कर सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया। वे सामाजिक परिवर्तन आंदोलन के पुरोधा और प्रेरणा स्रोत थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> यादव ने कहा कि वेदोक्त और पुराणोक्त मंत्रों के भेद को समझने के बाद शाहू जी महाराज ने जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया। उन्होंने वर्ष 1917 में निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा लागू की, छुआछूत के विरुद्ध कड़े प्रावधान किए, महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया तथा दलित-बहुजन छात्रों के लिए निःशुल्क शिक्षा और छात्रावास की व्यवस्था की। साथ ही बाल विवाह पर रोक जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार भी किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि शाहू जी महाराज ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को वर्ष 1920 में मूक नायक’ पत्र के प्रकाशन के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया था।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में उपस्थित सुरेश नारायण सिंह, व्यास यादव, नारायण प्रसाद, नगीना यादव, लोरिक गोंड, बबलू यादव, शंकर गोंड, श्रीराम प्रसाद, बेलभद्र गोंड, उत्तिम यादव, अभिषेक गुड्डू गोंड और संतोष मद्धेशिया सहित अन्य लोगों ने शाहू जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:38:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में कभी शाश्वत नहीं रही अस्पृश्यता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वर्तमान भारत में अस्पृश्यता को लेकर कई प्रकार के विमर्श चल रहे हैं। एक विमर्श यह है कि भारत में उच्च वर्ग के लोगों ने निम्न वर्ग के साथ भेद - भाव किया। उन्हें पानी पीने, शिक्षा प्राप्त करने एवं समान व्यवहार के लिए वंचित किया गया। यह विमर्श सर्वथा झूठ और मन गठन्त कहानी और कुंठा से भरा हुआ है। सच तो यह है कि इस प्रकार की उच्च जाति व निम्न जाति का विषय भारत के लोगों द्वारा नहीं अपितु भारत में लम्बे समय तक हुए बाह्य आक्रमणों मुगलों व अंग्रेजों की देन है। जो कभी स्थाई नहीं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176707/untouchability-was-never-eternal-in-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/2ee40841-4d6e-496d-82df-6845b6d5f3f2_202302072115301682_h@@ight_820_w@@idth_1280.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान भारत में अस्पृश्यता को लेकर कई प्रकार के विमर्श चल रहे हैं। एक विमर्श यह है कि भारत में उच्च वर्ग के लोगों ने निम्न वर्ग के साथ भेद - भाव किया। उन्हें पानी पीने, शिक्षा प्राप्त करने एवं समान व्यवहार के लिए वंचित किया गया। यह विमर्श सर्वथा झूठ और मन गठन्त कहानी और कुंठा से भरा हुआ है। सच तो यह है कि इस प्रकार की उच्च जाति व निम्न जाति का विषय भारत के लोगों द्वारा नहीं अपितु भारत में लम्बे समय तक हुए बाह्य आक्रमणों मुगलों व अंग्रेजों की देन है। जो कभी स्थाई नहीं रही। प्राचीन भारत में कभी जाति वैमनस्यता, घृणा, ऊंच नीच का भाव जनमानस में नहीं था। इसके उदाहरण हम आज भी अपने घरों में देखते है।</p><p style="text-align:justify;"> जैसे जब हमारे घरों में वैदिक परंपरा से विवाह होता है तब उस विवाह को संपन्न कराने के लिए सर्व समाज जाति बिरादरी के लोगों का कार्य होता है उनके भाग के बिना विवाह के सारे कार्यक्रम सम्पन्न होना संभव ही नहीं। इसमें किसी भी प्रकार का कोई भेद भाव नहीं है। वहीं यदि सतयुग की बात करते हैं तो राजा हरिश्चंद्र आते हैं जो डोम के यहां नौकरी करते हैं कोई भेद भाव नहीं है। राजा बलि और भगवान वामन देव का उदाहरण कोई भेद नहीं है। इसी प्रकार त्रेता युग में भगवान श्रीराम के जीवन से स्पष्ट होता है कि समाज कितना एक रस था। </p><p style="text-align:justify;">भीलनी के झूठे बेर खाने का प्रसंग, वनवासियों के साथ संगठन कर लंका विजय का प्रसंग, निषादराज को गले लगाना "तुम मोहि प्रिय भरतहीं सम भाई" इत्यादि अनेकों उदाहरण समाज को एक साथ बिना किसी भेद के दर्शाते हैं। द्वापर में जब हम बात करते हैं तब भी समाज में कोई जातीय वैमनस्य अस्पृश्यता नहीं है भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाएं सारे भेदों से परे हैं। पांडवों का अज्ञातवास के समय अनेकों ऐसी घटनाएं मिलती है जहां कोई भेद भाव नहीं है। भीम और हिडम्बा का विवाह, राजा शांतनु का विवाह, विदुर के यहां भगवान का भोजन इत्यादि। </p><p style="text-align:justify;">महाभारत में बहुत सारे सहज समरसता के विषय मिल जाएंगे जो समाज में एकाकार को दर्शाते हैं अब हम कलियुग की बात करते हैं यहां भी कोई जातीय वैमनस्य नहीं है। मध्यकाल में भारत में हुए आक्रमणों से हिन्दू समाज में कुछ विकृतियां आई लेकिन कभी शाश्वत नहीं रही उन्हें दूर करने के लिए भारत में अनेकों संत, महात्माओं, मनीषियों, महापुरुषों ने समय समय पर समाज को दिशा प्रदान कर अभियान चलाया है। चाहे वह स्वामी दयानंद सरस्वती जी, गोस्वामी तुलसीदास जी, राजा राममोहन राय, सन्त रविदास, गुरुनानक देव जी, मीराबाई, सन्त नामदेव जी, शिवा जी महाराज, महाराणा प्रताप, डॉ केशव बलीराम हेडगेवार, सावित्री बाई फुले, लोकमाता अहिल्याबाई होकलर आदि सैकड़ों नाम है जो भारत में बाहर से आई कुरीतियों को लेकर समाज में लम्बा संघर्ष किया। </p><p style="text-align:justify;">आज डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर के विषय को लेकर राजनैतिक लोग समाज में घृणा फैलान का कार्य करते हैं। डॉ अम्बेडकर ने कभी भी समाज को विभाजित करने की बात नहीं की उन्होंने भी संपूर्ण हिन्दू समाज को साथ रहने की वकालत की है। डॉ अम्बेडकर के जीवन में जब कभी ऐसी घटनाएं अस्पृश्यता की आईं भी तो हमारे ही लोगों ने उनका विरोध किया और डॉ अम्बेडकर को आगे बढ़ाया। डॉ अम्बेडकर को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देने वाले ब्राह्मण बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़<strong> </strong>थे। डॉ. भीमराव अंबेडकर को 'अंबेडकर' सरनेम उनके ब्राह्मण शिक्षक कृष्णाजी केशव अंबेडकर ने दिया था। </p><p style="text-align:justify;">स्कूल के रिकॉर्ड में उनका मूल उपनाम 'अंबावाडेकर' (गांव के नाम पर) से बदलकर शिक्षक ने अपना उपनाम 'अंबेडकर' रख दिया था। इसलिए भारत में जातीय घृणा का सिद्धांत कभी नहीं रहा है। मेरा सभी से आग्रह है कि भारत को जानो, भारत को मानो और भारत के बनो। किसी भी पूर्वाग्रह से बाहर निकलिए स्वच्छ मन मस्तिष्क से भारत के ग्रंथों का अध्ययन करें। भारतीय वांग्मय में भी कहीं पर घृणा, उन्मूलन का संदर्भ नहीं है बस शास्त्रों का अध्ययन उनकी व्याख्या मनमाने ढंग से करने से बचें परम्परा से प्राप्त ज्ञान के आचार्यों से मिलकर अध्ययन करें सबकुछ समझ में आयेगे। डॉ अम्बेडकर का मत भी है कि सबके साथ समान व्यवहार, समान शिक्षा, समान सम्मान। खूब पढ़ो, परिश्रम करो, सफलता प्रदान करो आरक्षण की वैशाखी से बाहर निकले।<br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>बाल भास्कर मिश्र</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:35:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस नेतृत्व ने रामबचन भारती को सौंपी अनुसूचित जाति के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के रुधौली विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसीनेता रामबचन भारती को पार्टी नेतृत्व मे अनुसचित विभाग का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। कांग्रेस पार्टी अनुसूचित विभाग के नेशनल चेयरमैन राजेन्द्र पाल गौतम सांसद तनुज पूनिया प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित विभाग) ने तदर्थ नियुक्ति कर जिलाध्यक्षों से पार्टी हित मे कार्य करने और अनुसूचित जाति के लोगों की आवाज उठाने का कार्य करने का निर्देश दिया है। वरिष्ठ कांग्रेसी रामबचन भारती को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी के पदाधिकारियों वे कार्यकर्ताओं ने बधाइयां व शुभकामनायें दिया है। पूर्व जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘ज्ञानू’ ने कहा रामबचन भारती कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं।</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174990/congress-leadership-handed-over-the-responsibility-of-district-president-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260403-wa0057.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के रुधौली विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसीनेता रामबचन भारती को पार्टी नेतृत्व मे अनुसचित विभाग का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। कांग्रेस पार्टी अनुसूचित विभाग के नेशनल चेयरमैन राजेन्द्र पाल गौतम सांसद तनुज पूनिया प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित विभाग) ने तदर्थ नियुक्ति कर जिलाध्यक्षों से पार्टी हित मे कार्य करने और अनुसूचित जाति के लोगों की आवाज उठाने का कार्य करने का निर्देश दिया है। वरिष्ठ कांग्रेसी रामबचन भारती को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी के पदाधिकारियों वे कार्यकर्ताओं ने बधाइयां व शुभकामनायें दिया है। पूर्व जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘ज्ञानू’ ने कहा रामबचन भारती कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। कई दशक से उन्होने पार्टी के लिये कार्य करके न केवल अपना अनुभव बड़ा किया है बल्कि समय समय पर पार्टी के कार्यक्रमों मे बढ़चढ़कर हिस्सेदारी कर अपनी सक्रियता भी सिद्ध की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रामबचन भारती को पार्टी द्वारा जिम्मेदारी दिये जाने पर पूर्व विधायक अंबिका सिंह, बसंत चौधरी, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, अनूप पाण्डेय, अफसर यू अहमद, विरेन्द्र्र प्रताप नारायण पाण्डेय, अनिरूद्ध त्रिपाठी, विश्वनाथ चौधरी, मो. रफीक खां, डा. शीला शर्मा,  प्रशान्त पाण्डेय, लक्ष्मी यादव, बाबूराम सिंह एडवोकेट, नर्वदेश्वर शुक्ला,अनिल भारती, गिरजेश पाल, विनय तिवारी, अशोक श्रीवास्तव, सुनील पाण्डेय, अजय शुक्ला, शिवनरायन पाण्डेय, </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अतीउल्लाह सिद्धीकी, अवधेश सिंह, वाहिद सिद्धीकी, भूमिधर गुप्ता, रामबहादुर, शिवविभूति मिश्रा, डा. मारूफ खान, शकुन्तला देवी,अलीम अख्तर, मंजू पाण्डेय, संदीप श्रीवास्तव, गुड्डू सोनकर, लालजीत सिंह, विवेक श्रीवास्तव, शौकत अली नन्हू, साधूसरन आर्या, साधू पाण्डेय, अनिल तिवारी, सुरेन्द्र मिश्रा, राकेश गांधियन, राहुल चतुर्वेदी, अमरदेव सिंह, डा. दीपेन्द्र सिंह, डीएन शास्त्री, हरिशंकर तिवारी, राजकूपर,घनश्याम शुक्ला, देवी प्रसाद पाण्डेय, बृजभान कनौजिया, रामबाबू कल्पू, शिवशंकर भारती, राजेश भारती, रामधीरज चौधरी, शेर मोहम्मद, सूर्यमणि पाण्डेय, अजय प्रताप सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुये बधाइयां व शुभकामनायें देते हुये प्रदेश अध्यक्ष तनुज पूनिया व राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति आभार जताया है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) का नया निर्देश 45 दिनों से अधिक अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार की आरक्षण नीति (एससी 15%, एसटी 7.5%, ओबीसी 27%) लागू होगी। यह नियम सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों पर लागू है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170974/university-grants-commissions-new-instruction-makes-reservation-mandatory-in-temporary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img_20260223_133812.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थायी नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर कहा है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 2018 और 2022 के कार्यालय ज्ञापनों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने भी मजबूती से दोहराया है।</p>
<p> </p>
<blockquote class="format1">यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी इस पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश सितंबर 2024 के पूर्व संचार का अनुवर्ती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षण, गैर-शिक्षण और प्रशासनिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्तियां यदि 45 दिनों से अधिक की हों, तो उनमें भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। संस्थानों को 2023-24 और 2024-25 के दौरान की गई ऐसी नियुक्तियों का विवरण यूजीसी के यूएएमपी पोर्टल पर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अनुपालन की जांच की जा सके।</blockquote>
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<p>यह कदम एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों से प्राप्त शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां आरोप लगाया गया था कि कई संस्थान अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश आरक्षण को बाईपास करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा, खासकर उन मामलों में जहां स्थायी पदों की भर्ती में देरी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह नीति दशकों से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है।"</p>
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<p>हालांकि, इस निर्देश पर विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "यूजीसी ने ओबीसी, एससी और एसटी का जिक्र किया, लेकिन ईडब्ल्यूएस को क्यों छोड़ दिया? क्या यह जानबूझकर किया गया है?" वहीं, कुछ ने इसे निजी विश्वविद्यालयों पर अनुचित दबाव बताया। एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अस्थायी नौकरियां भी जाति से विभाजित? योग्यता मौसमी नहीं होनी चाहिए।" दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा डीओपीटी दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन मात्र है, न कि कोई नई नीति।</p>
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<p>शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इससे पहले, 2018 के डीओपीटी ज्ञापन ने स्पष्ट किया था कि 45 दिनों से अधिक की अस्थायी नियुक्तियां आरक्षण के दायरे में आएंगी। यूजीसी ने इसकी निगरानी के लिए पोर्टल शुरू किया है, जो अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।</p>
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<p>यह विकास ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों अस्थायी पदों पर प्रभाव पड़ेगा, जो मुख्य रूप से गेस्ट लेक्चरर, रिसर्च असिस्टेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। सरकार का लक्ष्य सामाजिक समावेश को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक इसे नौकरशाही बढ़ावा मानते हैं। आने वाले दिनों में संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:39:16 +0530</pubDate>
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