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                <title>भारत समाचार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारत समाचार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नीट पेपर लीक के नौ गुनहगार: सिस्टम के अंदर से हुआ खेला, स्पेशल क्लास से लेकर करोड़ों के सौदे ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179528/nine-culprits-of-neet-paper-leak-played-from-inside-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पीवी कुलकर्णी। मनीषा पुणे की एक सीनियर बॉटनी लेक्चरर हैं और उन्हें इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने उन्हें एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। इसी आधिकारिक हैसियत की वजह से प्रश्नपत्रों तक उनकी सीधी पहुंच थी। वहीं, पुणे से गिरफ्तार लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी भी लंबे समय से एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। इन दोनों ने मिलकर सिस्टम के इसी भरोसे का फायदा उठाया और पेपर को लीक कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई के अनुसार, यह खेल अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही शुरू हो चुका था। कुलकर्णी ने अपनी सहयोगी मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर ऐसे छात्रों को जोड़ना शुरू किया जो इसके लिए मोटी रकम दे सकें। अब आप सोच रहे होंगे यह दूसरी मनीषा कौन है? मनीषा वाघमारे  पुणे में एक ब्यूटी सैलून चलाती हैं। इसके बाद पुणे में कुलकर्णी के घर पर चुनिंदा छात्रों के लिए एक 'विशेष कोचिंग क्लास' शुरू हुई। यह कोई साधारण क्लास नहीं थी। यहां छात्रों को न तो कोई कॉन्सेप्ट समझाया जा रहा था और न ही कोई थ्योरी पढ़ाई जा रही थी। यहां सीधे नीट परीक्षा के सवाल, उनके विकल्प और सही जवाब बताए जा रहे थे। छात्र चुपचाप इन्हें अपनी कॉपियों में नोट कर रहे थे। जब सीबीआई ने इन छात्रों की नोटबुक्स जब्त कीं, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। तीन मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से ये सवाल हूबहू मैच कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ महाराष्ट्र के लातूर में हुआ। वहां एक कोचिंग संस्थान के मॉक टेस्ट में अचानक 42 ऐसे सवाल पूछ लिए गए, जो ठीक दो दिन बाद होने वाली नीट परीक्षा के असली पेपर में आने वाले थे। जब परीक्षा के दिन असली पेपर सामने आया, तो कुछ जागरूक अभिभावकों के कान खड़े हो गए। उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की। मामले की गंभीरता और इसके अंतर-राज्यीय कनेक्शन को देखते हुए केस तुरंत सीबीआई को सौंप दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की जांच में सामने आया है कि यह एक बेहद संगठित सिंडिकेट था। यह नेटवर्क सेमिनार आयोजित करता था और ऐसे छात्रों को ढूंढता था जो पढ़ाई में कमजोर हों लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इस काम के लिए उन्होंने पुराने छात्रों, खासकर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले युवाओं को अपना एजेंट बना रखा था। पिछले 24 घंटों में सीबीआई ने देशव्यापी छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए हैं। अब तक जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> कुल नौ लोगों को दबोचा जा चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;">मनीषा गुरुनाथ मंधारे: पुणे की सीनियर बॉटनी लेक्चरर और एनटीए एक्सपर्ट, जिन्हें साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।प्रो. पीवी कुलकर्णी: लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर और मुख्य सूत्रधार, जिनकी प्रश्न पत्र पैनल तक पहुंच थी।मनीषा वाघमारे: पुणे की ब्यूटी सैलून मालकिन, जो उम्मीदवारों को जुटाने और सीक्रेट क्लास मैनेज करने में सहयोगी थीं।मांगीलाल बीवाल: जयपुर का निवासी, जिस पर लीक पेपर हासिल करने और उसे आगे बांटने का आरोप है।विकास बीवाल: मांगीलाल का बेटा और मेडिकल छात्र, जिसने इस अवैध काम को अंजाम देने में मदद की।दिनेश बीवाल: मांगीलाल का भाई, जो इस पूरे खेल के वित्तीय लेन-देन को संभाल रहा था।यश यादव: गुरुग्राम का रहने वाला मुख्य बिचौलिया, जिसने लीक प्रश्न पत्र बीवाल परिवार तक पहुंचाया।शुभम खैरनार: नासिक का निवासी, जिस पर सबसे पहले लीक या गेस प्रश्न पत्र को बाजार में फैलाने का शक है।धनंजय लोखंडे: अहिल्यानगर का आयुर्वेद डॉक्टर, जिसे इस मामले में संलिप्तता के बाद हिरासत में लिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई अब प्रो कुलकर्णी के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस सिंडिकेट का हाथ नीट 2024 के पेपर लीक और अन्य बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से भी जुड़ा हो सकता है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:35:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरैया में लिटिल फ्लावर स्कूल को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने सौंपा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केतहसील हर्रैया क्षेत्र के नगर पंचायत स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल को लेकर विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह एवं थाना अध्यक्ष हर्रैया के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विद्यालय परिसर में “दिशा” नामक एनजीओ के माध्यम से कथित रूप से धर्मांतरण की गतिविधियां कराई जा रही हैं तथा सभागार के नाम पर अवैधानिक चर्च/गिरजाघर का निर्माण किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि विद्यालय के गेट से सटा मार्ग हिंदू कॉलोनी के निजी उपयोग के लिए है जहां छोटे बच्चे खेलते</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172024/vishwa-hindu-parishad-submitted-memorandum-regarding-little-flower-school-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260301-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केतहसील हर्रैया क्षेत्र के नगर पंचायत स्थित लिटिल फ्लावर स्कूल को लेकर विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह एवं थाना अध्यक्ष हर्रैया के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विद्यालय परिसर में “दिशा” नामक एनजीओ के माध्यम से कथित रूप से धर्मांतरण की गतिविधियां कराई जा रही हैं तथा सभागार के नाम पर अवैधानिक चर्च/गिरजाघर का निर्माण किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि विद्यालय के गेट से सटा मार्ग हिंदू कॉलोनी के निजी उपयोग के लिए है जहां छोटे बच्चे खेलते हैं और स्कूल की बसों के आवागमन से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।विभाग मंत्री विवेक सिंह सोनू ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन गांवों में सर्वे के नाम पर 15 से 18 वर्ष की लड़कियों को रोजगार का प्रलोभन देकर स्कूल परिसर में बुलाता है और धर्मांतरण का प्रयास करता है। जिला अध्यक्ष डॉ. हरिमूर्ति सिंह एवं मनोज सिंह ने कहा कि “लिटिल फ्लावर आश्रम” के नाम पर समाज सेवा की आड़ में गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका दावा है कि सभागार निर्माण की अनुमति लेकर चर्च का निर्माण किया जा रहा है।हालांकि विद्यालय के फादर ने इन आरोपों से इनकार करते हुए प्रशासन को लिखित रूप में दिया है कि चर्च का निर्माण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभागार का उपयोग केवल विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए होगा तथा भविष्य में किसी प्रकार की धार्मिक गतिविधि या प्रतीक का प्रयोग नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि स्कूल बसें पुराने मार्ग से ही आएंगी-जाएंगी और कॉलोनी मार्ग से केवल छोटे वाहन गुजरेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला मंत्री प्रवीण सिंह ने मांग की कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और कॉलोनी के मार्ग को बाधित होने से रोके। बजरंग दल के जिला संयोजक अजय कनौजिया ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनआक्रोश की स्थिति बन सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमोद पांडे, अनिल ओझा, अखिलेश ओझा, अविनाश ओझा, डॉ. आनंद सिंह, अमरदेव सिंह, पिंटू सिंह, दीपांशु सिंह, अनुमोदित त्रिपाठी, सुखराम गौड़ सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच का आश्वासन दिया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:46:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) का नया निर्देश 45 दिनों से अधिक अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार की आरक्षण नीति (एससी 15%, एसटी 7.5%, ओबीसी 27%) लागू होगी। यह नियम सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों पर लागू है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170974/university-grants-commissions-new-instruction-makes-reservation-mandatory-in-temporary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img_20260223_133812.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थायी नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर कहा है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 2018 और 2022 के कार्यालय ज्ञापनों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने भी मजबूती से दोहराया है।</p>
<p> </p>
<blockquote class="format1">यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी इस पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश सितंबर 2024 के पूर्व संचार का अनुवर्ती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षण, गैर-शिक्षण और प्रशासनिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्तियां यदि 45 दिनों से अधिक की हों, तो उनमें भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। संस्थानों को 2023-24 और 2024-25 के दौरान की गई ऐसी नियुक्तियों का विवरण यूजीसी के यूएएमपी पोर्टल पर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अनुपालन की जांच की जा सके।</blockquote>
<p> </p>
<p>यह कदम एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों से प्राप्त शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां आरोप लगाया गया था कि कई संस्थान अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश आरक्षण को बाईपास करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा, खासकर उन मामलों में जहां स्थायी पदों की भर्ती में देरी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह नीति दशकों से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है।"</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, इस निर्देश पर विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "यूजीसी ने ओबीसी, एससी और एसटी का जिक्र किया, लेकिन ईडब्ल्यूएस को क्यों छोड़ दिया? क्या यह जानबूझकर किया गया है?" वहीं, कुछ ने इसे निजी विश्वविद्यालयों पर अनुचित दबाव बताया। एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अस्थायी नौकरियां भी जाति से विभाजित? योग्यता मौसमी नहीं होनी चाहिए।" दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा डीओपीटी दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन मात्र है, न कि कोई नई नीति।</p>
<p> </p>
<p>शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इससे पहले, 2018 के डीओपीटी ज्ञापन ने स्पष्ट किया था कि 45 दिनों से अधिक की अस्थायी नियुक्तियां आरक्षण के दायरे में आएंगी। यूजीसी ने इसकी निगरानी के लिए पोर्टल शुरू किया है, जो अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।</p>
<p> </p>
<p>यह विकास ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों अस्थायी पदों पर प्रभाव पड़ेगा, जो मुख्य रूप से गेस्ट लेक्चरर, रिसर्च असिस्टेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। सरकार का लक्ष्य सामाजिक समावेश को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक इसे नौकरशाही बढ़ावा मानते हैं। आने वाले दिनों में संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:39:16 +0530</pubDate>
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