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                <title>शिक्षा मंत्रालय - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>शिक्षा मंत्रालय RSS Feed</description>
                
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                <title>'आपदाओं का विभाग बन गया है शिक्षा मंत्रालय'- राहुल गांधी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा हमला किया है. NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से छात्रों को होने वाली परेशानी को लेकर राहुल गांधी ने हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय अब आपदा विभाग बन गया है.</div>
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<div style="text-align:justify;">राहुल ने X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'पहले NEET पेपर लीक, जिससे 22 लाख छात्र प्रभावित हुए. फिर CBSE के 12वीं के छात्रों को एक खराब OSM सिस्टम के कारण उम्मीद से कम नंबर मिले,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179532/ministry-of-education-has-become-the-department-of-disasters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा हमला किया है. NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से छात्रों को होने वाली परेशानी को लेकर राहुल गांधी ने हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय अब आपदा विभाग बन गया है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'पहले NEET पेपर लीक, जिससे 22 लाख छात्र प्रभावित हुए. फिर CBSE के 12वीं के छात्रों को एक खराब OSM सिस्टम के कारण उम्मीद से कम नंबर मिले, जिससे कई छात्रों को कॉलेज में दाखिला नहीं मिलेगा. अब CBSE 9वीं के लाखों छात्रों से अचनाक 1 जुलाई से एक नई भाषा सीखने को कह रहा है, जबकि न तो कोई शिक्षक हैं और न ही किताबें.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि 14 साल के बच्चों को 'अस्थायी' समाधान के तौर पर 6वीं क्लास की किताबें थमा दी गईं. राहुल ने कहा, 'तीन एग्जाम. तीन आयु वर्ग. एक मंत्री. धर्मेंद्र प्रधान जी सिर्फ एक बार फेल नहीं हुए हैं. वे भारत के छात्रों के हर आयु वर्ग को एक साथ फेल कर चुके हैं. हर घोषणा छात्रों को अनिश्चितता के गहरे भंवर में धकेल देती है.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने कहा कि हर बार कोई सजा नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि 'शिक्षा मंत्रालय अब आपदाओं का विभाग बन गया है.'</div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले शनिवार को भी राहुल गांधी ने X पर एक पोस्ट कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करते हुए कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान जी को इस्तीफा देने को कहें और जो दोषी हैं, उन्हें पकड़कर जेल में डाला जाए.।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:41:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) का नया निर्देश 45 दिनों से अधिक अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार की आरक्षण नीति (एससी 15%, एसटी 7.5%, ओबीसी 27%) लागू होगी। यह नियम सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों पर लागू है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170974/university-grants-commissions-new-instruction-makes-reservation-mandatory-in-temporary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img_20260223_133812.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थायी नियुक्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर कहा है कि 45 दिनों या उससे अधिक अवधि की अस्थायी नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन किया जाए। यह निर्देश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 2018 और 2022 के कार्यालय ज्ञापनों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने भी मजबूती से दोहराया है।</p>
<p> </p>
<blockquote class="format1">यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी इस पत्र में कहा गया है कि यह निर्देश सितंबर 2024 के पूर्व संचार का अनुवर्ती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि शिक्षण, गैर-शिक्षण और प्रशासनिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्तियां यदि 45 दिनों से अधिक की हों, तो उनमें भारत सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। संस्थानों को 2023-24 और 2024-25 के दौरान की गई ऐसी नियुक्तियों का विवरण यूजीसी के यूएएमपी पोर्टल पर जमा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अनुपालन की जांच की जा सके।</blockquote>
<p> </p>
<p>यह कदम एससी-एसटी और ओबीसी संगठनों से प्राप्त शिकायतों के बाद उठाया गया है, जहां आरोप लगाया गया था कि कई संस्थान अस्थायी नियुक्तियों में आरक्षण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश आरक्षण को बाईपास करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा, खासकर उन मामलों में जहां स्थायी पदों की भर्ती में देरी के कारण अस्थायी व्यवस्था की जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यह नीति दशकों से मौजूद है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में सकारात्मक कदम है।"</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, इस निर्देश पर विवाद भी उत्पन्न हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, "यूजीसी ने ओबीसी, एससी और एसटी का जिक्र किया, लेकिन ईडब्ल्यूएस को क्यों छोड़ दिया? क्या यह जानबूझकर किया गया है?" वहीं, कुछ ने इसे निजी विश्वविद्यालयों पर अनुचित दबाव बताया। एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अस्थायी नौकरियां भी जाति से विभाजित? योग्यता मौसमी नहीं होनी चाहिए।" दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि यह मौजूदा डीओपीटी दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन मात्र है, न कि कोई नई नीति।</p>
<p> </p>
<p>शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह निर्देश सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें डीम्ड विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इससे पहले, 2018 के डीओपीटी ज्ञापन ने स्पष्ट किया था कि 45 दिनों से अधिक की अस्थायी नियुक्तियां आरक्षण के दायरे में आएंगी। यूजीसी ने इसकी निगरानी के लिए पोर्टल शुरू किया है, जो अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगा।</p>
<p> </p>
<p>यह विकास ऐसे समय में आया है जब उच्च शिक्षा में आरक्षण को लेकर बहस तेज है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों अस्थायी पदों पर प्रभाव पड़ेगा, जो मुख्य रूप से गेस्ट लेक्चरर, रिसर्च असिस्टेंट और प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। सरकार का लक्ष्य सामाजिक समावेश को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक इसे नौकरशाही बढ़ावा मानते हैं। आने वाले दिनों में संस्थानों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:39:16 +0530</pubDate>
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